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क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं?

Posted On: 12 Jun, 2014 Others,Junction Forum में

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भारतीय राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस की लोकसभा में यह सबसे बड़ी हार है। 12 राज्यों में उसका खाता तक नहीं खुला। उसके 16 में से 13 कैबिनेट मंत्री चुनाव हार गए। किसी भी राज्य में पार्टी दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाई। इस बार का 19.3 फीसदी उसे अब तक मिला सबसे कम मत प्रतिशत है। 1999 में 114 सीटों के साथ अपना तब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली पार्टी इस बार 44 सीटों पर सिमट गई।


चुनाव परिणाम आने के इतने दिनों बाद भी आज भी हर जगह यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतिहास में इतनी बड़ी हार कांग्रेस को नसीब कैसी हुई? आजादी के बाद जिस पार्टी के सर्वेसर्वा में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेता रहे हैं वह आज ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि मजबूत विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा सकती।


16वीं लोकसभा का चुनाव परिणाम जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के लिए खुशियों की सौगात लेकर आई तो वहीं कांग्रेस के लिए भारी दर्द दे गई। आज कांग्रेस पार्टी की हार के लिए भले ही पिछली यूपीए की सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो लेकिन जिस तरह का नेतृत्व पिछले कुछ सालों से पार्टी का रहा है या है उससे तो यह साफ है कि कांग्रेस का बचा हुआ कुनबा भी अब ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकता। जानकार मानते हैं कि जिस तरह से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में लगातार परिवारवाद को बढ़ावा दिया जा रहा था उससे आने वाले वक्त में कांग्रेस को और ज्यादा नुकसान होने वाला है। आज कांग्रेस के पास ऐसा कोई नेता नहीं है जो अगले 15 साल तक अपने विरोधियों को टक्कर दे सके।


वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीति विशेषज्ञ इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। इतिहास खुद को दोहराता है। उनका मानना है कि बुरा दौर हर किसी के साथ आता है। आज भले ही कांग्रेस जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हो लेकिन जल्द ही वह दिन आएगा जब जनता सत्तारूढ पार्टी के कुशासन से तंग आकर कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर विकल्प के रूप में चुनेगी।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का दौर अब समाप्त हो गया है?

2. क्या आज कांग्रेस में ऐसा कोई नेता नहीं है जो पार्टी की स्थिति को सुधार सके?

3. क्या कांग्रेस की हार की वजह परिवारवाद है?

4. मनमोहन को यूपीए सरकार का जिम्मा सौंपना क्या पार्टी की सबसे बड़ी भूल है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं? ” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं?” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


Web Title : now the era of the Congress party has gone ?



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Hora pall के द्वारा
July 11, 2014

now Rahugandhi should try for his marriage life, to continue his generation. selve the political activies.

Shashi Mehra के द्वारा
July 4, 2014

Its a bad phase of Congress party,,,,..Congress party got nearly 11 crore votes from nation but problm was conversion…Party totally failed to convert it in seats….on the Other hand opposition has miss guided people too much during election period…it can be seen presently….we hav watched in last month…..so congress party will b back with strong than before.,…jai hind

    Dr S Shankar Singh के द्वारा
    July 5, 2014

    Please do not question peopel’s wisdom.Nobody can misguide our people. They are the ultimate arbiters of natin’s destiny. Your coment is insult to people’s decision. If this is the thinking of Congress then next time they will be extinct as dodo.

naveen के द्वारा
July 4, 2014

congress is no more now becoz of corruption ……….courrepted leaders

Dr S Shankar Singh के द्वारा
June 27, 2014

कांग्रेस की ऐतिहासिक हार के कारण आज़ादी के समय लेकर आज तक के बीच का कुछ समय छोड़ दें तो सारे समय कांग्रेस ही इस देश पर शासन करती रही है. मई 2014 के 16वीं लोक सभा के चुनाव में कांग्रेस को अप्रत्यासित हार का सामना करना पड़ा है. चुनाव परिणामों नें सभी को अचंभित किया है. हार भी ऐसी कि जिसकी कल्पना न तो कभी कांग्रेस नें की थी, और जीत ऐसी जिसकी कल्पना न तो तो भाजपा नें की थी. 543 सदस्यों के सदन में कांग्रेस को कुल 44 सीटों पर विजय मिली। यह संख्या रेकग्नाइज़्ड विपक्ष का स्थान पाने के लिए भी अपर्याप्त है. कांगेस नें कभी यह कल्पना भी नहीं की होगी कि ऐसे बुरे दिन भी कभी देखने पड़ेँगे. भारत के चुनाव के इतिहास में कांग्रेस का यह सबसे निम्नतम स्कोर है. . पिछले तीस सालों में में पहली बार किसी एक दल को अपने बल पर लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला है. वह दल है भाजपा. भाजपा नें अपने बल पर लोक सभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है. किसी को भी यह अपेक्षा नहीं थी कि कांग्रेस के विरोध में और भाजपा के पक्ष में इतना तेज तूफ़ान चल रहा है. चूंकि बहुत सी बातें पहली बार हो रही हैं, इस कारण चुनाव परिणामों को समझने की स्वाभाविक उत्कंठा होती है, विभिन्न दलों से पतिबद्ध और मीडिया के लोग अपने अपने तरीकों चुनाव परिणामों का विश्लेषण करेंगे. मैं अपनी समझ के अनुसार चुनाव परिणामों को समझने कोशिश करता हूँ कांग्रेस की हार के अनेक करणों में हैं. सर्व प्रथम है दल का अहंकारी स्वभाव. सल्तनत का अहंकारी स्वभाव तो सबको पता है. नेहरू जी से लेकर इंदिरा जी और राजीव गांधी तक इस परिवार का व्यवहार सामंतवादी रहा है. आज़ादी के आस पास के समय और उसके थोड़ा बाद तक उस समय की पीढ़ी की लॉयल्टी / स्वामिभक्ति इस परिवॉर के साथ रही है.वह सल्तनत के हर प्रका के घमंड नाज नखड़े को बर्दाश्त करती रही है. आजकल की वर्तमान पीढ़ी सामंतवाद में विश्वास नहीं करती है और हर चीज़ को गुण दोष के आधार पर परखना चाहती है. वह अंध भक्ति में विश्वास नहीं करती है.. हमारी पुरानी पीढ़ी हर तरह के नाज, नखड़े, अहम और घमंड को बर्दाश्त करती रही है. सामंतवाद कांग्रेस की नस नस में रच बस गया है. लेकिन वर्तमान पीढ़ी इसके लिए तैयार नहीं है. चूंकि अहंकार पार्टी का चरित्र बन चूका है इस कारण पार्टी के सभी कार्यकर्ता किसी न किसी हद तक इससे प्रभावित रहे हैं. चुनाव के समय टी वी चैनलों पर आने वाले कांग्रेस के प्रवक्ताओं के अहंकार की कोई सीमा नहीं थी सर्व श्री कपिल सिबल मनीष तिवारी, सत्यव्रत चतुर्वेदी, अभिषेक मनु सिंघवी, अपना अहंकार प्रदर्शित करने मेंं एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में शामिल थे. मोदी को गाली देने का जिम्मा बेनी प्रसाद वर्मा नें संभाला हुआ था. सलमान खुर्शीद भी उनसे पीछे नहीं थे मोदी द्वारा एक बार बेटी कह दिए जाने पर प्रियंका नें आसमान सर पर उठा लिया. वोट बैंक की खोज में आतंकवादियों का पक्ष लेकर दिग्विजय सिंह नें हिन्दुओं को इतना आहत किया कि हिन्दू वोट भाजपा की झोली में जाकर गिरा। जाहिर है कि अगर कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक बनाती है तो हिन्दू को भी संगठित होना पड़ेगा. यह स्वाभाविक है,. प्रियंका नें मोदी को नीच कह कर विमर्श का स्तर पाताल तक पहुंचा दिया. ऐसे घमंडी लोग जनता का समर्थन माँगते समय शर्म भी महसूस नहीं करते थे अपने अहंकार और घमंड का परिचय देने में हर कांग्रेसी ने अपना भरपूर योगदान दिया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा. अन्ना हज़ारे के जन लोकपाल और बाबा रामदेव के आंदोलन के समय कांग्रेस का व्यवहार अहंकार की पराकाष्ठा पर था. 2G, CWG, आदर्श सोसाइटी, कॉल ब्लाक आंवटन से सम्बंधित भ्रष्टाचार की खबरों से जब जनता का गुस्से से उबल रही थी ऐसे समय थे, हमारे प्रधान मंत्री किन्हीं अज्ञात कारणों से मौन धारण किये हुए थे. यह समझ के बाहर की बात है कि जब देश लुट रहा था उनके सामने निष्क्रिय होने की क्या मजबूरी थी अक्षम नेतृत्व बाकी कोर कसर राहुल नें पूरी कर दी. एक कागज़ पर लिखी हुई बेसिरपैर वाली बातें पढ़कर, कुर्ते की बाहें चढ़ाकर बार बार गुस्से का इज़हार करके उन्होंने ऐसा प्रभाव पैदा किया कि मानो उनके पास कहने को सकारात्मक कुछ भी नहीं है. उपरोक्त . सभी बातों का स्वाभाविक परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस का नाम कीचड में मिल गया. परिणाम तो वही हुआ जो होना था. .

harirawat के द्वारा
June 26, 2014

हाँ लेकिन अभी है इक सांस बाकी, राहुल गांधी को अबकी बार फिर विधान सभाओं का मुखिया बना दो, और रॉबर्ट बाड्रा और प्रियंका को उसका सारथि बना दो बंटाधार हो जाएगा, कांग्रेस का बड़ा बीच सागर में डूब जाएगा ! वैसे भ्रष्टाचार, घूस रिश्वत और कालेधन के राले पहले दबे पड़े हैं, और क्या दबाओगे ! हरी ओउम

mukesh के द्वारा
June 19, 2014

Bikul सही.

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 13, 2014

    कांग्रेस के दिन गए, कुशल चाणक्य की कूटनीति से

pkdubey के द्वारा
June 13, 2014

कांग्रेस को संजीवनी मिल सकती है,गॉवों में जाकर बदलाव करने से.अपनी यात्रा पुनः हर गांव -हर घर से शुरू करने से. गरीबी किसी के घर पर जाकर समझ में नहीं आती,इसे समझने के लिए १०-२० दिन अर्थहीन और साधनहीन होकर जीने में समझ में आती है. गोल्डन बाउल एंड सिल्वर स्पून की कल्चर का अंत करना पड़ेगा. पर्ण कुटी के अनुभवों को आत्मसात करना पड़ेगा.तभी जनता सत्ता में वापस भेज सकती है ,अन्यथा कोई रास्ता नहीं.उलटे -सीधे बयानवाजी करने से केवल पार्टी और गहरे गर्त में ही जाएगी. हाँ ,परिवार वाद भी एक कारण है.जब प्रणव मुख़र्जी जैसे नेता को राहुल गांधी के सामने रिपोर्ट करना पड़े,तो यह पूर्णतः राजनीती का दिवालियापन ही है. शायद यदि मनमोहन सिंह जी की जगह प्रणव मुखर्जी रहते ,तो आज कांग्रेस की इतनी बुरी हालत नहीं होती.

    ashokkumardubey के द्वारा
    June 22, 2014

    मैं आपके विचारों से पूर्णतया सहमत हूँ कांग्रेस पार्टी के बारे में मेरी भी यही राय है एक कहावत भी है “वो क्या जाने ? पीर परायी , जिस के पैर न फाटे बिवाई ” राहुल जैसे नेता जिनको ना कोई अनुभव है ना वे गरीबी के बारे में कुछ जानते हैं और दिखावे के लिए गरीब की झोपडी में एक रात रुकते हैं क्या इतने से उनको गरीबी का कड़वा सच मालूम हो जाएगा .


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