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क्यों अरविंद केजरीवाल के हर कदम को स्टंट करार दिया जाता है ?

Posted On: 26 May, 2014 Others,Junction Forum में

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दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले और मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने तक अरविंद केजरीवाल के हर कदम को सराहा जाता था लेकिन इसके बाद ऐसी क्या बात हुई कि उनके हर फैसले को राजनैतिक स्टंट करार दिया जाता है ?


भ्रष्टाचार आंदोलन के गर्भ से निकली आम आदमी पार्टी ने अपने शुरुआती एक साल में बहुत ही ज्यादा मेहनत की। उसने न केवल दिल्ली के हर दरवाजे पर दस्तक दी बल्कि अपने विरोधियों को बेनकाब करने के लिए नई तरह की शैली विकसित की। इसके जरिए वह भ्रष्ट नेताओं के काले कारनामों की पोल खोलते थे। जनता ने उनके इस काम का भारी समर्थन किया और दिल्ली चुनाव में उम्मीद से ज्यादा सीटें देकर विधानसभा में पहुंचा दिया। कांग्रेस को हराकर पहली बार “आप” पार्टी सत्ता में आई और अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन इस बीच ऐसी क्या बात हुई कि पहले जहां केजरीवाल के हर कदम को सराहा जाता था मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद राजनीतिक स्टंट करार दिया जाने लगा?


एक पक्ष

जानकारों का एक पक्ष मानता है कि अरविंद जिस तरह की राजनीति करते हैं उसमें जनता का विश्वास कम हड़बड़ाहट ज्यादा दिखती है। उनका स्वभाव ऐसा रहा है कि वह कुछ ही समय में सब कुछ हासिल कर लेंगे। उनकी कथनी और करनी में हमेशा ही फर्क रहा है। उनके अंदर ठहराव कम है। इतिहास बताता है कि वह काम पूरा किए बगैर किसी दूसरे मिशन की ओर निकल पड़ते हैं। दिल्ली की सत्ता छोड़ने की वजह भी यही थी। ताजा मामला नितिन गडकरी की ओर से कोर्ट में दाखिल मानहानि की शिकायत का है जहां केजरीवाल जमानत लेने की बजाय हठ पर अड़े हुए हैं। केजरीवाल दूसरों पर आरोप तो लगाते है लेकिन उसके पीछे की क्या सच्चाई है उसकी पुष्टि भी नहीं करते।


दूसरा पक्ष

वहीं अरविंद केजरीवाल और “आप” के समर्थन में बात करने वाले लोग मानते हैं कि अरविंद ने अपने विरोधियों पर हमला करने की जिस तरह की शैली विकसित की है छः महीने पहले तक मीडिया से लेकर राजनीतिक पार्टियों तक हर कोई उनकी तारीफ कर रहा था। इसी शैली की वजह से ही आम आदमी पार्टी सत्ता पर काबिज हुई थी। आज उनकी इसी शैली का विरोध किया जा रहा है। दिल्ली की सत्ता छोड़ने की वजह जन लोकपाल बिल था न कि भ्रष्ट या आपराधिक आचरण। रही बात नितिन गडकरी की तो केजरीवाल ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर कोई गलत काम नहीं किया है।


1. क्यों अरविंद केजरीवाल के हर कदम को स्टंट करार दिया जाता है?

2. क्या मीडिया का एक धड़ा केजरीवाल के विरोध में है?

3. क्या मोदी ने केजरीवाल की राजनीति को हाशिए पर ढकेल दिया है

4. क्या केजरीवाल का भ्रष्टाचार पर आवाज उठाने का तरीका गलत है?

5. क्या केजरीवाल की पूरी राजनीति झूठ पर केंद्रित है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्यों अरविंद केजरीवाल के हर कदम को स्टंट करार दिया जाता है ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “केजरीवाल का हर कदम स्टंट” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “केजरीवाल का हर कदम स्टंट” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

Web Title : all action and decision of arvind kejriwal proves a political stunt ?



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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 18, 2016

श्री अरविन्द केजरी वाल इतने महत्वकांक्षी हैं उनकी नजर दिल्ली के रास्ते प्रधान मंत्री बनने की है हर मुख्यमंत्री अपने क्षेत्र में काम कर रहे हैं यह काम कम अपना विज्ञापन अधिक कर रहे हैं अपने आप को एक मात्र मोदी जी का प्रतिद्वंदी सिद्ध करने की कोशिश करते हैं |काम कम बखान ज्यादा अपनी भूल संविधान के अनुच्छेद 191का उलंघन कर संसदीय सचिवों की नियुक्ति के विरोध के बाद दिल्ली विधान सभा में बहुमत के बल पर कानून पास करना राष्ट्रपति महोदय ने विधेयक लौटा दिया विलाप शरू हर मौके पर राजनीति इन्हें पहले देश का संविधान पढना चाहिए था |अपने हर मेंबर को भी यही सिखा दिया है जब भी प्रेस से मुखातिब होते हैं हाथ में एक कागज जरुर होता है जैसे प्रूफ ले कर आयें हैं |प्रेस में अपनी बात कहते हैं तुरंत खिसक जाते हैं दूसरे की कभी नहीं सुनते जैसे तानाशाह हैं |

Bhola nath Pal के द्वारा
August 5, 2014

मुझे केजरीवाल के कुछ कृत्य प्रारम्भ से ही नही भाए जिनका उल्लेख आपके माध्यम से अपेक्षित है – (१) बिजली के खम्बे पर चढ़कर कनेक्शन काटना और कहना कि बिजली का बिल मत देना I (२) दिल्ली का सीएम बनने के बाद सचिवालय की रेलिंग पर बैठकर लोगों को सम्बोधित करना | (३) लोगों के मध्य सामान्य नागरिक बनकर नया मानदंड स्थापित करने का आश्वासन देना किन्तु किसी भी कारणवश ही सही उसको पूरा न कर पाना I (४) जन सामान्य के लिए सब कुछ त्यागने का भाव प्रदर्शित करना किन्तु हकीकत की जमीं पर अपने ही आदर्शों के प्रति सामंज्यस्य न बिठा पाना I (५) केजरीवाल मैं परिपक्वता की कमी है | अच्छा हो वह मूल्य निष्ठ जीवन और आदर्शों के सम्मान हेतु गंभीरता तथा स्थितियों से सामंजस्य बिठाने की योग्यता हासिल करें | मुझे केजरीवाल पर जितना विश्वास था अब मैं उतना ही सशंकित तथा निराश हूँ | मैं कैसे कहूँ कि ऐसे व्यक्ति को राजनीति करनी चाहिए या नही |

aditi singh के द्वारा
June 11, 2014

आप पाऱटी जिस तरीके से काम कम समय मे  करना चाहा वही उसकी मुसीबत का कारण बना । दिल्ली की जनता को केजरीवाल पर न सही पर खुुद पर तो थोङा सा भरोसा रखना चाहिए था ।किसी भी काम को पूूरा करने मेे वक्त तो लगता ही है.

R P Pandey के द्वारा
June 10, 2014

केजरीवाल के साथ जितने भी लोग है सब के सब प्रसिद्धी के भूखे है / ओर दलोमें जगह न पाये हुए लोगो का यह झुण्ड है / चिंतन का घोर अभाव है / किसको क्या कह देंगे इन्हे खुद नहीं मालुम है /केजरीवाल समर्थक खुद देखे उस दल में कितने आम है /

Mukesh Babu Kain के द्वारा
June 7, 2014

पहले कहते कुछ हैं और बाद में करते कुछ हैं, सरकारी नौकरी की आधे रास्ते में छोड़ी, समाज सेवा करेंगे (अन्ना जी के साथ ) कभी राजनीति में नहीं आयेंगे, राजनीति में आ गए लोगो से दिल्ली मांगी कहा सी एम् बनाये , सी एम् बनगए सीट छोड़ कर भाग गए, कहते थे जितने के बाद सब भ्रष्ट नेताओं को अंदर कर दूंगा, नहीं किया पूरा समये ये दिखने मैं लगा दिया की पुलिश मेरे नीचे काम नहीं करती, फिर कहा सरकारी बंगला नहीं लूँगा ले लिया(अब तो बंगला छोड़ दो भाई), फिर कहा बच्चो की कसम किसी पार्टी का समर्थन नहीं लूँगा, लेकिन ले लिया, फिर कहते है जमानत के लिए बोंड नहीं भरूँगा, बाद में भर दिया, अब कहते है गड्गरी के खिलाफ केश वापस नहीं लूँगा बाद मैं ले लेंगे, केजरी जी को खुद ही नहीं पता के उनको क्या करना है और क्या चाहिए, पहले ठीक से सोचले की राजनीति में क्या करने आयें है, फिर कदम आगे बढायें

Mukesh Babu Kain के द्वारा
June 7, 2014

पहले कहते सरकारी नौकरी की आधे रास्ते में छोड़ी, समाज सेवा करेंगे समाज (अन्ना जी के साथ ) कभी राजनीति में नहीं आयेंगे, राजनीति में आ गए लोगो से दिल्ली मांगी कहा सी एम् बनाये , सी एम् बनगए सीट छोड़ कर भाग गए, कहते थे जितने के बाद सब भ्रष्ट नेताओं को अंदर कर दूंगा, नहीं किया पूरा समये ये दिखने मैं लगा दिया की पुलिश मेरे नीचे नहीं, फिर कहा बच्चो की कसम किसी पार्टी का समर्थन नहीं लूँगा, लेकिन ले लिया, फिर कहते है जमानत के लिए बोंड नहीं भरूँगा, बाद में भर दिया, अब कहते है गड्गरी के खिलाफ केश वापस नहीं लूँगा बाद मैं ले लेंगे, केजरी जी को खुद ही नहीं पता के उनको क्या करना है और क्या चाहिए,

Purandar Mangaraj के द्वारा
June 7, 2014

इस बार का मुद्दा जो आपने रक्खा है समसामयिक है ..विचार अलग अलग हो सकते हैं …पर उम्मीद करता हूँ लोग अपनी स्वतंत्र राय जरूर रक्खेंगे …मैं पहले भी अरविंद केजरीवाल के समर्थन में लिखता रहा हूँ, परिस्थितियां बदली है, आम आदमी के समक्ष आत्म-चिंतन की आवश्यकता है और कुछ दिन तो अभी इंतज़ार करने ही होंगे …निष्ठावान स्वयं सेवक(कार्यकर्ता) तैयार करने होंगे. आलोचना सुनने को और उसका निराकरण करने को तैयार रहन होगा. आखिर उन्होंने बेल-बांड भरा ..नहीं पता कानूनी प्रक्रिया क्या है पर उनके पास मशहूर वकील प्रशांत भूषण हैं, क्यों अपनी छीछालेदर करवाने पर तुले हैं. नाम कमाने में बहुत साल लग जाते हैं गंवाने में पल भर भी नहीं लगता. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मिलकर उनका दिमाग ख़राब कर दिया और उसे मटियामेट करने पर तुले हैं. मीडिया भी रुख देखकर ही अपना निशाना बनाता है. मेरी राय में अरविन्द केजरीवाल एंड टीम को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है और आंतरिक लोकतंत्र भी बहाल किये जाने की जरूरत है. सबकी बात सुनी जानी चाहिए और फैसला सर्वसम्मत्ति से ही होना चाहिए. हड़बड़ी में गड़बड़ी होने की पूरी संभावना रहती है. शांत मन से विचार करें बुद्धिजीवियों और कुछ राजनीतिज्ञों का भी साथ लें अपना संगठन मजबूत बनायें और कम बोलें….कुछ काम कर दिखाएँ उनके चार सांसद हैं वे आपने क्षेत्र की समस्या उठाने और सुलझाने की ईमानदार कोशिश तो करें… फिलहाल इतना ही आगे कभी पूरा ब्लॉग लिखूंगा और आपने पुराने ब्लॉग को भी सम्पादित कर लिंक करूंगा.

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 2, 2014

    (३)ड्रामेवाज नहीं ”चाणक्य नीति” है अरविन्द्र केजरीवाल की

    KANHAIYA DUBEY के द्वारा
    June 15, 2014

    श्री अरबिंद अकेजरीवाल ने जब भ्रस्टाचार का मुद्दा अन्ना जी ,किरण बेदी जी के साथ मिलकर उड़ाया था और पुरे भारत में ये लोग chha gaye.लोग बिस्वास करने लगे की एक नॉन पोलिटिकल लोग देश को भ्रष्ट मुक्त karenge.केजरीवालजी रास्ता ही बदल दिया और राजनीती में आ गए और दिवा स्वप्न देखने lage.Kutch स्वप्न पूर्ण हुए पर एक बात ने उन्हें निचे गिरा दिया “-wa पाये बौरात नर wa खाए bourat”

jlsingh के द्वारा
May 28, 2014

इस बार का मुद्दा जो आपने रक्खा है समसामयिक है ..विचार अलग अलग हो सकते हैं …पर उम्मीद करता हूँ लोग अपनी स्वतंत्र राय जरूर रक्खेंगे …मैं पहले भी अरविंद केजरीवाल के समर्थन में लिखता रहा हूँ, परिस्थितियां बदली है, आम आदमी के समक्ष आत्म-चिंतन की आवश्यकता है और कुछ दिन तो अभी इंतज़ार करने ही होंगे …निष्ठावान स्वयं सेवक(कार्यकर्ता) तैयार करने होंगे. आलोचना सुनने को और उसका निराकरण करने को तैयार रहन होगा. आखिर उन्होंने बेल-बांड भरा ..नहीं पता कानूनी प्रक्रिया क्या है पर उनके पास मशहूर वकील प्रशांत भूषण हैं, क्यों अपनी छीछालेदर करवाने पर तुले हैं. नाम कमाने में बहुत साल लग जाते हैं गंवाने में पल भर भी नहीं लगता. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मिलकर उनका दिमाग ख़राब कर दिया और उसे मटियामेट करने पर तुले हैं. मीडिया भी रुख देखकर ही अपना निशाना बनाता है. मेरी राय में अरविन्द केजरीवाल एंड टीम को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है और आंतरिक लोकतंत्र भी बहाल किये जाने की जरूरत है. सबकी बात सुनी जानी चाहिए और फैसला सर्वसम्मत्ति से ही होना चाहिए. हड़बड़ी में गड़बड़ी होने की पूरी संभावना रहती है. शांत मन से विचार करें बुद्धिजीवियों और कुछ राजनीतिज्ञों का भी साथ लें अपना संगठन मजबूत बनायें और कम बोलें….कुछ काम कर दिखाएँ उनके चार सांसद हैं वे आपने क्षेत्र की समस्या उठाने और सुलझाने की ईमानदार कोशिश तो करें… फिलहाल इतना ही आगे कभी पूरा ब्लॉग लिखूंगा और आपने पुराने ब्लॉग को भी सम्पादित कर लिंक करूंगा.

    Purandar Mangaraj के द्वारा
    June 7, 2014

    is desh ke log ke log ko kewal ko kewal do party hi sasan karne layek ek hain cangress our dursra bjp kyunki ye dono party lutneme mahir hain. our logo ko isime anand ata hain. ye dono patry amadmi party ko samapt karne me sabhi prakar ki hatkande apnarhe hain. amadmi party hin sabhi neta ko sasan karne ka path padhaya. nahi to rajniti kese hoti hain kisiko pata hi nahi thaa. ye party naya hain our matra 1/2 sal ka is party se sare logo ka apekhya badhi itni badhi hain ki ratorat delhi badal jaye. nahi badla to janta nakarna suru kardiya. logoke pas pesens hahin hain.


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