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क्या बिहार में अब नीतीश का दौर खत्म हो चुका है ?

Posted On: 1 Apr, 2014 Junction Forum में

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सोमवार को बरबीघा की एक चुनावी सभा में चप्पल दिखाई गई। उन पर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया।


वहीं दूसरी ओर बिहार के नालंदा में नीतीश की एक अन्य रैली में पुलिस को जनता पर लाठीचार्ज करना पड़ा। रैली में पहुंचे लोगों ने रोड नहीं तो वोट नहींके नारे लगाए।


नीतीश की रैलियों में लगातार हो रहा जनविरोध यह दर्शाता है कि बिहार की जनता उनके नीतियों तथा फैसलों से नाखुश दिख रही है तथा परिवर्तन चाहती है। हाल ही में कराए गए एबीपी न्यूज-नीलसन के सर्वे के मुताबिक नीतीश की पार्टी जेडीयू को बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में से महज 2 से 5 सीटें ही मिल सकती हैं जबकि उनके पुराने साथी बीजेपी को एलजेपी के साथ गठबंधन के चलते 21 से 29 सीटें मिल सकती हैं। सर्वे की मानें तो जेडीयू का हाल आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन से भी बुरा रहने वाला है।


राजनीतिक जानकारों का एक पक्ष कहता है कि नीतीश ने बीते एक सालों में पार्टी और पार्टी के बाहर जो फैसले लिए हैं उससे उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। मसलन बीजेपी के साथ नाता तोड़ना, जनता के विरोध का जवाब पुलिस कार्यवाही से देना, अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए पार्टी पर अपने फैसले थोपना आदि। थर्ड फ्रंट के जरिए वह कहीं ना कहीं प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं, लेकिन बिहार में मोदी के बढ़ते प्रभाव के चलते ऐसा संभव नहीं है।


वहीं दूसरा पक्ष इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता। उनका मानना है कि बीजेपी को लेकर नीतीश ने जो फैसले लिए हैं वह पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए लिए हैं। भले ही आज जेडीयू में सब कुछ सही नहीं चल रहा, लेकिन जिस तरह का नीतीश का व्यक्तित्व है तथा बिहार की राजनीति में जिस तरह की उनकी पकड़ है, उन्हें आसानी से मात देना किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. क्या बिहार की जनता सत्ता परिवर्तन चाहती है ?

2. क्या नीतीश का प्रधानमंत्री बनने का सपना पार्टी को डुबो देगा ?

3. क्या बिहार में अब नीतीश का दौर खत्म हो चुका है ?

4. क्या बीजेपी से गठबंधन तोड़ना नीतीश की सबसे बड़ी भूल थी ?

5. सारे अनुमानों को धता बताते हुए नीतीश अपने दम पर चमत्कारिक जीत हासिल करेंगे?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या बिहार में अब नीतीश का दौर खत्म हो चुका है ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “नीतीश का दौर खत्म हो चुका है” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “नीतीश का दौर खत्म हो चुका है” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।

2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।

3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


Web Title : Beginning of the end for Nitish Kumar ?



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RUPESH VATS के द्वारा
May 21, 2015

मेरे बिहार के लोगो बहुत बढ़िया जो आज विकाश किया उसको भी गली दे रहे हो अगर नितीश नहीं होते तो सोचे की उस टीचर का क्या होता जो आज टीचर हे जिनके घर में आज उसी टीचर के पैसे से घर में दो टाइम का रोटी मिल रहा हे आज भूल गए अगर नितीश नहीं होते तो आज सायद उनके घर में आज इतनी कमाई नहीं होते आज पता नहीं आज कहा होते कही प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे होते या फिर डेल्ही जैसे सहर में गली सुन के कमा रहे होते भूल गए नितीश के कामो को भूल जाओ लेकिन एक बात सुन लो आज के युग में महंगाई और बढ़ेगा ये बीजेपी कुछ नहीं करेगी देख रहे हे न क्या हो रहा हे देश घूमना हो रहा जिसकी अपनी घर आचे नहीं होते वो पहले अपनी घर को शम्भल ले उसके बाद दुषरे का घर देखे नितीश से आचे कोई बिहार का विकाश नहीं कर सकता

P.C. Yadav के द्वारा
April 15, 2014

Hello evryone of Bihar, Simple si bat hai to be continue k liye kuchh krna v chahiye hota h…..aise hi sb ni hota …kuchh pane k liye kuchh khona padta ..h…. Pure bihar me daura krna chahiye na ki jaha jaruri h. Aur main prob h ki ye niche wale neta jo hai jane ni dete jaha jarurat hoti h… Aur C.M banane ke liye pata ni kitne wade hote h.. Aur pura kitana hota hai? 20%only. Jaise dekh lijiye abhi bhi Bhihar me har village me ELECTRIC power supply tak ni h…. To kya koi ummid lagayayega for futur ke liye… That sit…Aage kya aur kitna batau.. Aap sabhi to samajhadar hi h…

Surendra Kumar Suman के द्वारा
April 14, 2014

नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़ कर बहुत बड़ी गलती की जो उनको और उनकी पार्टी को नुकसान होगा

Anilesh Chandra Mishra, Jamui के द्वारा
April 13, 2014

लोकसभा चुनाव – २०१४ के चुनावी अखाड़े में अपनी पतली हालत को देखकर नीतीश कुमार ने अपने छिपे हुए सारे पत्ते खोल दिए और जारी घोषणा पत्र में निजी क्षेत्रो में भी ५० प्रतिशत आरक्षण की घोषणा कर के एकमुश्त सवर्णो का वोट पाकर सत्ता में पहुंचे नीतीश कुमार ने उनके भविष्य पर कुठाराघात किया है. एक तरफ सवर्णो को लुभाने के लिए बिहार में सवर्ण आयोग का गठन कर लोलीपोप थमा दिया दूसरी ओर अपने चुनावी घोषणा पत्र में ५० प्रतिशत रिजर्वेशन की घोषणा करके उनके लिए प्राइवेट सेक्टर का दरवाजा बंद करवाने का उपाय भी कर रहे है. क्या नीतीश जी बताने का कष्ट करेंगे की पढ़े लिखे सवर्ण युवा कहा जाएँ. और आपको क्यों वोट दें ?

Samiran Shandilya, Sabnima, Bakhtiyaarpur के द्वारा
April 11, 2014

बिहार के पहले चरण के चुनाव में jdu एवं नीतीश कुमार की हवा निकल गयी. अल्पसंख्यक वोटो का UPA के पक्ष में ध्रुवीकरण होने के बाद स्वाभाविक रूप से गैर यादव हिन्दुओ के वोटो का ध्रुवीकरण बीजेपी LJP गठबंधन के पक्ष में हो रहा है. इसका सबसे बड़ा नुक्सान नीतीश कुमार को ही होगा. इस बार के चुनाव में वे खाता खोल ले यही बहुत है. विकास के लाख दावे प्रतिदावे के बावजूद बिहार में नीतीश कुमार के गलत फैसले के कारण इस बार का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर हो रहा है. क्योकि नीतीश जी जब तक बीजेपी के साथ थे बिहार का चुनाव विकास के मुद्दे पर हो रहा था. नीतीश जी, यदि सच्चाई का पता लगाना चाहते है तो उन्हें अभी भी अपने मुठ्ठी समर्थकों एवं चुटकी भर वोटरों से पूछना चाहिए कि मोदी के नाम पर उनका गठबंधन तोडना कितना सही कदम था ? बिहार कि चिकनी एवं मजबूत सड़को पर चल कर नीतीश जी को वोट न देने का मलाल NDA के सारे समर्थको को भी है, किन्तु बिना वोट में हारे नीतीश जी इस सच्चाई को मानने वाले भी तो नहीं है. आशा है नीतीश जी विधानसभा के चुनाव तक इस सच्चाई को समझ जाये कि आपका जनाधार लालू विरोध एवं विकासपरक मतों पर आधारत है न कि नरेंद्र मोदी के विरोध पर आधारित.

Chandan, Jamui के द्वारा
April 8, 2014

इसमें कोई दो राय नहीं कि बिहार में लालू जी के खिलाफ नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीजेपी jdu का जो गठबंधन बना था उस से लोगो को काफी उम्मीद थी. किन्तु १६ जून २०१३ को नीतीश जी ने सिर्फ गठबंधन ही नहीं तोडा बल्कि उस सामाजिक विश्वास एवं उसपर आधारित जनादेश को भी तोड़ दिया, जो उन्हें लालू जी के खिलाफ प्राप्त हुआ था. यही कारण है कि उनकी किसी बात पर अब जनता विश्वास नहीं करने वाली. नीतीश जी बिहार के तीन चौथाई वोटरों ने आपको लालू जी के खिलाफ विकास करने के लिए सत्ता सौपी थी, किन्तु आपने सिर्फ अपने जिद के कारण नरेंद्र मोदी का विरोध करके सबसे बड़ा आपने बिहार के युवाओं का वो सपना तोड़ दिया जिसने आप में बिहार को आई सी यु से बाहर निकालने वाले मसीहा की छवि देखी थी. नीतीश जी बिहार को अभी उन सिद्धांतो की कोई जरुरत नहीं थी जिसकी दुहाई देकर आपने गठबंधन को तोड़ दिया और अपनी सरकार कमजोर कर ली. बिहार के लोगो ने आपके नेतृत्व में एक मजबूत सरकार का जनादेश दिया था जिसके साथ आपने विश्वासघात किया. अभी हमारे जैसे करोडो युवाओ को रोजगार की जरुरत है, जिसके लिए केंद्र में एक हिमायती सरकार की जरुरत है और इसके लिए यदि कोई मनगढंत सिद्धांत से परे हटने की जरुरत होती तो हट जाते. पर आपने इस सच्चाई का अंदाजा लगाये बिना सिर्फ प्रधानमंत्री बनने की चाह में पुरे बिहार को रजनीतिक अस्थिरता में झोक दिया. और बिहार की पब्लिक जानती है की कोई कमजोर सरकार जनहित में कोई फैसला नहीं ले पाती. जनादेश की गलत व्याख्या एवं हर हाल में अपने को सही ठहरने की आदत पर जनता आपको सबक सिखाएगी. क्योकि बिहार के अधिकांश लोगो ने सोचा था की बिहार में आपकी और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बन जाये तो विशेष राज्य के दर्जे के लिए आपके कथनानुसार लड़ना भी नहीं पड़ेगा और जिस हक़ से केंद्र की संप्रग सरकार ने बिहार को वंचित रखा था उसे आप पूरा करते. किन्तु दुर्भाग्य बिहारियों का आपकी महत्वकांक्षा ज्यादा दिनों तक छिप नहीं पायी. और जितना आपने बिहार के लिए किया उस से ज्यादा वसूल लिया. पुरे बिहार को आपने १९९५ वाली स्थिति में ला के खड़ा कर दिया. न आप युवाओ के लिये कुछ कर पाएंगे न अल्पसंख्यको के लिए, न महिलाओ के लिए. विकसित बिहार के सपने को चूर-चूर करवाने ke लिए बिहार के करोडो युवाशक्ति आपको कभी माफ़ नहीं करेगी. आप रोड और हॉस्पिटल पर वोट मांगते है, पर बिहार के लोग ये भी जानते है की इसमें बीजेपी के मंत्रियो का भी योगदान है. आपकी सारी उपलब्धियां साझा है. अकेला कुछ नहीं.

Pankaj Kr. Pandey के द्वारा
April 4, 2014

हां कारण कि माननिय मुख्यमंत्री जी को अपने विकास पुरुष बनने  पर गुमान हो गया है।

Ashish के द्वारा
April 3, 2014

MR. NITISH KUMAR KO NEW GENERATION 18 TO 36 YEARS KE YOUNG BLOOD KO ONLY FOR 6000.00 ME THEKA PE BAHAL KARKE SHOSHAN KAR RAHI HAI YAHI SABSE BADI UNKI GALTI HAI AUR YAHI GALTI UNKO AGLE ELECTION ME RASTA PE LA DEGI KOYKI HUM WAHI HAI “JAI JAWAN JAI HINDUSTAN”

    Ashish के द्वारा
    April 3, 2014

    ALL BIHAR ME 10 THOUSAND COMPUTER OPREATOR BELTRON KE MADHYAM SE ALL GOVERN DEPARTMENT ME ONLY FOR 6300.00 MOTHLY SALARY PER KAM KAR RAHE UNKO DEKHNE WALA KOI NAHAI HAI MAI APNE C.M SE EK AAM NAGRIK KE HASIYAT SE PUCHTA HU KI KIYA 6300.00 ME TWO CHILDREN, HUSBAND, WIFE AND FATHER AND MOTHER KO KOI KHILA PAYEGA. AGAR C.M, SAHEB IN SABHI BATO KI SUDH NAHI LATE HAI TO BIHAR ME PARIWARTAN HO KE RAHEGI

R.D.Verma के द्वारा
April 2, 2014

No survey can be said to be nearer to truth,because samples are not based on scientific methods. Now a days media itself is not truely honest in its duties. people are seeing most of the news chanels as entertainment chanels.Nitish was as per media was most successful chief minister till yesterday and as soon as he started opposing Modi he became worst person. How?

Raj के द्वारा
April 2, 2014

Shikshakon ka jo hashr kiye the uska asan hona hi tha!

harirawat के द्वारा
April 2, 2014

नीतीश का दिन ही कब निकला था कि रात हो गयी ! भाजपा से हाथ मिलाया मुख्य मंत्री बना, अपने पावों में स्व्यं कुल्हाड़ी मारी, अब न घर का न घात का !

R P Pandey के द्वारा
April 2, 2014

nitish ka दौर तो कभी था ही नहीं !


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