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कौन बनेगा काशी का सरताज - मोदी या केजरीवाल?

Posted On: 18 Mar, 2014 Junction Forum में

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भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए कई दल लामबंद हो रहे हैं। उनका मकसद है ‘कैसे भी करके नरेंद्र मोदी को वाराणसी सीट हराना’। कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को वाराणसी में मोदी को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आरजेडी और कांग्रेस का साथ मिल सकता है। एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि मोदी को रोकने के लिए उनकी पार्टी केजरीवाल का समर्थन कर सकती है। वहीं कांग्रेस नेता अनिल शास्‍त्री ने भी तुरंत साझा उम्‍मीदवार उतारने की वकालत कर दी।


हालांकि अभी ‘आप’ ने वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन यह माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता अरविंद केजरीवाल का नाम आगे किया जा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़े यह सभी पार्टियां मोदी की बढ़ती ताकत को रोकने में सफल हो पाएंगी?


जानकारों का एक वर्ग यह मानता है कि उम्मीदवार के तौर पर अगर वाराणसी सीट से अरविंद केजरीवाल को उतारा जाए और सभी पार्टियां उनका समर्थन कर देती हैं तो मुमकिन है कि केजरीवाल मोदी को हरा भी दें। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता और वाराणसी के वर्तमान सांसद मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ स्थानीय लोगों की नाराजगी भी उन्हें फायदा पहुंचा सकती है। इसका कहीं ना कहीं भाजपा में भी डर है। इसलिए भाजपा के नेता मोदी को वाराणसी सीट के साथ-साथ गुजरात से भी उतारने के फिराक में हैं।


जहां एक धड़ा नरेंद्र मोदी को हराने के लिए बेताब दिख रहा है। वहीं राजनीति के कुछ जानकार इसे इतना आसान नहीं मानते। उनका मानना है कि वाराणसी हमेशा से ही भाजपा का गढ़ रहा है। यदि वहां से भाजपा का कोई भी उम्मीदवार खड़ा होता है तो उसकी जीत पक्की मानी जाती है। अबकी बार देश के सबसे लोकप्रिय नेता मोदी को भाजपा ने वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित किया है, ऐसे में अरविंद को उन्हें हराना इतना आसान नहीं होगा। अगर अरविंद मोदी को शीला दीक्षित समझ रहे हैं तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है। कांग्रेस के पूर्व नेता जगदंबिका पाल का कहना है कि ऐसे ‘धरतीपकड़ पहलवान’ (केजरीवाल) पहले भी ताल ठोंकते रहे हैं, मोदी को मात देना कोई मजाक नहीं है।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. खुद को धर्मनिरपेक्ष मानने वाली पार्टियां क्या मोदी के बढ़ते कदम को वाराणसी में ही रोक देंगी?

2. क्या आम आदमी पार्टी को विश्वास हो चुका है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में शीला दीक्षित की तरह वाराणसी में मोदी को पटकनी दे पाएंगे?

3. क्या भाजपा को भी डर है कि मोदी अगर वाराणसी से चुनाव नहीं जीते तो पार्टी को काफी नुकसान होगा?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


कौन बनेगा काशी का सरताज – मोदी या केजरीवाल?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “कौन बनेगा काशी का सरताज”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “कौन बनेगा काशी का सरताज” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।

2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।

3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

Web Title : who is the next political leader of varanasi constituency: narendra modi, arvind kejriwal



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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rahul के द्वारा
March 25, 2014

hamare bharat desh me rajnitik halat bahot hee bura hai jaisa ki gujrat ke mukhyamantri or arvind krjriwal ki baat hai to ..Shree Narendra modi ek shresth neta hai aapne pure gujrat ka naksha hee badal diya hai..hame ummeded hai ki ab aapki asali pariksha hai aap gujrat ki tarah bharat ko badlenge ..aur rahi baat arvind kejriwal ki to kejriwal sirf bhaukane wale neta hai wo modi ko apne pure jivan kaal me nahi hara sakte hai kyoki jo bhaukte hai vo katate nahi…modi is my hero…namo namo shree modimay namo.. modi is gret man in aal world.. jay jay namo ghar ghar namo…

mukesh के द्वारा
March 23, 2014

अरवींद केजरीवाल उगते हुए सुरज हैं , उगता हुआ सुरज ही हमें रोशनी दे सकता है अरवींद केजरीवाल को पूणॆ बहुमत से जीताएं

    praveen tushir के द्वारा
    March 25, 2014

    लोग कहते हैं कि राजनीती गन्दी है पर क्या करू दोस्तों मेरे देश कि जनता भी गांधारी सी अंधी है. अपनी आँखों कि पड़ी खोले और देश के लिए नरेंदर मोदी जी के लिए वोट करें. गिरगिट कि नयी जाती को पहचाने, पार्टी का नाम आम होगा, वो तो पिलपिला होना ही था.

khemendra pardhi के द्वारा
March 22, 2014

modi G EK RASTRA PREMI HE,INKO ROKANA YA INKE KHILAF BAT KARNA YANI RASTRA PREMI KE KHILAF JANA KYA HOTA HE AAP SABHI JANTE HE…………………….

harirawat के द्वारा
March 22, 2014

मोदी जी सूरज है और केजरीवाल को तो उनके सामने टिम टिमाते तारे का दर्जा भी नहीं दिया जा सकता ! हाँ केजरीवाल जुगनू की श्रेणी में जरूर आ सकता है ! अपने को धर्मनिष्ट कहने वाले तमाम पार्टियां के नेता राज नेता भष्टाचार के कुंड में डुबकी लगाने वाले मगर मच्छ हैं, क्या भ्रष्टाचार मिटाने की ध्वजा सम्भाले केजरीवाल इन भष्ट नेताओं – पार्टियों का सहयोग लेंगे ? अगर हाँ तो यह भी एक भटका हुआ बे पेंदे का लोटा मात्र है !

R.D.Verma के द्वारा
March 21, 2014

At present any one may say Varansi is most safe seat for Modi to fight from U.P. However some one may read in between the line.It may be taken as a trick of Modi and Rajnath singh to sideline their adverseries. Negative veins are running high. Ideologically all parties like C.P.M.,S.P., B.S.P.and Congress etc. are deadly against not only Narendra Modi But also against B.J.P. Communalism is only slogan for voters having shallow knowledge. Everybody including Narendra Modi Knows No prime Minister in India having communal feeling can survive for long. Leave that . Each and every party will make utmost effort to hold Modi and in turn B.J.P. to Flourish in U.P. Aam Adami Party is added fource. Fear of sensible B.J.P. leaders is genuine.Defeat of Narebdra Modi From Varansi will push B.J.P. back for ten years.

MUKUL MITTAL के द्वारा
March 21, 2014

OFCOURSE MODI WIN VARANASI (KASHI) SEAT AND BECOME PRIME MINISTER OF INDIA

gopesh के द्वारा
March 20, 2014

इस बार तो नरेंद्र मोदी जी का जीतना अनिवार्य है ! इस विषय पर कृपया मेरे ब्लॉग को समय दें http://gopesh.jagranjunction.com/2014/03/20/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%82%E0%A4%97/

MAHI के द्वारा
March 20, 2014

तिलक तराजू और तलवार आओ मिलके बनाये मोदी सरकार वोट फॉर कमल

MAHI के द्वारा
March 20, 2014

KEJRIWAL KEBAL MIDYA ME BANEY RAHNE KE LIYE MODI JI KA SAHARA LE RAHE HE MODI JI KE SAMNE RAHUL KI TO BOLTI BAND HE OR KEJRIWAL BAS HAME CHAND DEKHA KAR HUMARI JEB KATNE WALA AAK CHOR HE JO DI HUIY DELHI KI SARKAR CHOD KAR PM KE KAB DEKH RAHA BAHUT HO GAYA ULU MAT BANO .1 KABAT HE SARI KHUDAE AK TARAF JORU KA BHAI AK TARF SAL……….

MAHI के द्वारा
March 20, 2014

MODI ONLY PM 2014 O KEJRIBAL

sadguruji के द्वारा
March 20, 2014

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कौन बनेगा काशी का सरताज – मोदी या केजरीवाल? ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ १-क्या आम आदमी पार्टी को विश्वास हो चुका है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में शीला दीक्षित की तरह वाराणसी में मोदी को पटकनी दे पाएंगे? मोदीजी और केजरीवालजी की आपस में कोई तुलना ही नहीं है.ये तुलना सिर्फ मिडिया कर रही है.केजरीवालजी काशी से खड़ा होके यदि अपनी जमानत बचा लें तो अपने को बहुत भाग्यशाली समझें.सभी पार्टियां यदि मिलकर केजरीवाल का समर्थन कर देती हैं तो यह मोदीजी के लिए और अच्छा है.काशी में घूमकर मैं देख रहा हूँ कि यहांपर घर घर में मोदीजी की चर्चा है.केजरीवालजी पर तो काशी के लोग लोग हंस रहे हैं और कह रहे है की अपना और अपनी पार्टी का लुटिया गंगाजी में डुबोना है तो केजरीवालजी काशी आ जाइये.केजरीवालजी मोदीजी से स्वयं बहुत भयभीत हैं,इसीलिए काशी से चुनाव लड़ने से बचना चाह रहे हैं.केजरीवाल का ये कहना की वो जनता से पूछकर चुनाव लड़ेंगे.ये भी मोदीजी के खिलाफ चुनाव लड़ने से बचने की एक नौटंकी भर है.काशी की जनता को क्या मतलब है,चाहे आप काशी से चुनाव लड़ो या मत लड़ो.आपलोगों की दिनोदिन खुल रही पोलपट्टी से अब काशी की जनता भी भलीभांति परिचित हो गई है.काशी से चुनाव लड़के केजरीवालजी को पता चल जायेगा कि वो कितने पानी में हैं.काशी की जनता उन्हें उनकी असलियत समझा देगी कि मोदीजी के सामने वास्तव में उनकी राजनितिक औकात क्या है.अगर अरविंदजी मोदीजी को शीला दीक्षित जी समझ रहे हैं तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है और वो दिन में ही मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं.काशी में मोदीजी को मात देना असम्भव ही नहीं बल्कि आसमान से तारे तोड़ के लाने जैसा सपना है. २-खुद को धर्मनिरपेक्ष मानने वाली पार्टियां क्या मोदी के बढ़ते कदम को वाराणसी में ही रोक देंगी ? इस देश में धर्मनिरपेक्षता उपहास,अवसरवाद और स्वार्थसिद्धि का एक साधन बन चुकी है.आज जीतने भी खुद को धर्मनिरपेक्ष दल कह रहे हैं,उनमे से अधिकतर दल चुनाव के बाद धर्मनिरपेक्षता को भूलकर राजनितिक अवसरवाद का प्रतयक्ष तमाशा प्रस्तुत करेंगे.सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल यदि काशी में एकजुट हो जाये तो भी मोदीजी भारी मतों से चुनाव जीतेंगे.काशी ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता धर्मनिरपेक्षता के नाटक से उब चुकी है.इस बार वोट लोग जाती और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर देश की बेहतरी और विकास के लिए करेंगे. मुझे तो ये देखकर आश्चर्य हो रहा है कि सारे राजनितिक दलों के नेता सिर्फ मोदीजी के नाम की माला जप रहे हैं.सबके सब मोदीजी से भयभीत हैं.ये भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार हो रहा है कि मोदीजी नाम के एक नेता से सारे दलों के नेता थर थर कांप रहे हैं.सबको अभी से ही अपनी हार दिखाई दे रही है और सब नेता सुर्ख़ियों में आने के लिए मोदीजी को जी भर के कोसने के अलावा और कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं.इस मंच के बहुत से ब्लॉगर भी मोदीजी के नाम से भयभीत हो रहे हैं और मोदीजी को व्यर्थ में ही कोस रहे हैं.मुझे तो पूरा यकीन है कि मोदी जी के नेतृत्व में देश कि अगली सरकार बनेगी और देश का सही ढंग से विकास भी करेगी. ३-क्या भाजपा को भी डर है कि मोदी अगर वाराणसी से चुनाव नहीं जीते तो पार्टी को काफी नुकसान होगा ? काशी से मोदीजी के नहीं जीतने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.होता है.इसीलिए यह सवाल ही औचित्यहीन है.आज तो “हर हर काशी और घर घर मोदी” का नारा काशी के घर घर में गूंज रहा है.काशी से मोदीजी की न सिर्फ जीत पक्की है बल्कि उनके विरोधी उम्मीदवारों की जमानत जब्त होना भी निश्चित है.काशी हमेशा से ही भाजपा की जीत का गढ़ रहा है.यहाँ से भाजपा का कोई भी उम्मीदवार खड़ा हो जाये वो जरुर जीतेगा.इस समय इस क्षेत्र के मेयर और तीन विधायक भाजपा के हैं.अब तो देश के इस समय के सबसे लोकप्रिय नेता मोदीजी चुनाव लड़ रहे हैं.इसीलिए भाजपा के लिए कोई चिंता की बात ही नहीं है.जोशीजी के खिलाफ स्थानीय लोगों की जो थोड़ी बहुत नाराजगी थी,वो मोदीजी के खड़े होने से दूर हो गई है.मोदीजी यदि गुजरात से लड़ रहे हैं तो इसमें आपत्ति क्या है ?बहुत से नेता हैं जो दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आलेख और प्रस्तुति=सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी,प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम,ग्राम-घमहापुर,पोस्ट-कंदवा,जिला-वाराणसी.पिन-२२११०६. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

Charchit Chittransh के द्वारा
March 20, 2014

मित्र; संलग्न लेख 2-3 दिन पहले परिष्कृत कर पोस्ट किया गया किन्तु फीचर नहीं हुआ… पूर्व में 2012 और 2013 के विधान सभा चुनावों के समय इसकी समसामयिक प्रस्तुति का नकारा जाना, वर्तमान आमंत्रित लेखों का भी केवल मोदी संदर्भित होना “जागरण परिवार” के पत्रकारिता धर्म पर प्रश्नचिन्ह नहीं है क्या ??? अगली टिप्पणी में लेख ….है… सम्पादक / लेखक गण के मूल्यांकन हेतु…. चुनाव-2014 के मतदाताओं से प्रश्न… ????? मित्रो; जैसा कि ‘स्वसासन्’ के नाम से स्पष्ट है “आप” और “स्वसासन” दोनों का उद्देश्यवास्तविक स्वतंत्रता की प्राप्ति ही है !वह भी बिना शस्त्र संधान किये बिना सड़कों पर इकट्ठे होकर नारे लगाए ! हालाँकि ‘हम भारतीय’ वास्तविक कम बनावटी अधिक हैं… ऐसा 2013 में विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों के परिणामों से स्पष्ट हुआ ! अभी कुछ ही दिनों पहलेहममें से अधिकांश भारतीय (?) ‘मैं भी अन्ना’, ‘मैं भी अरविंद’, ‘मैं भी आम आदमी’ कहते नहीं थक रहे थे! यानी भारतीय जनमानस90% से भी अधिकबहुमत के साथ “भ्रष्टाचार” के विरुद्ध था! इनमें उन राज्यों के नागरिक भी थे जिनमें 2013 में आम चुनाव हुए थे ! देख लिया सबने किहम भारतीयों की कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर है ??? अभी तक का चुनावी इतिहास भी यही बताता है कि साढ़े चार – पौने पांच साल ‘नेताजी’ के नाम रोते रहने वाला मतदाताचुनाव आते ही अपने अपने बाहुबली / नेता आकाओं का अंधभक्त होउनकी जीत के लिएकमर कस तत्पर हो जाता है! भले चुनाव के पहले उसे कभीउस “बाहुबली / नेताजी ” से कोई काम ना पड़ा हो भले उस नेता नेपिछले चुनाव के बाद औरइस चुनाव के सर पर आने से पहले या जीवन में कभी भी उसे कभी कोई महत्व ना दिया हो, भले उसकी स्थितिउन बाहुबली / नेताजी की नजरों में कुत्ते की सी हो मगर उसी मतदाता को उन बाहुबली/नेताजी के द्वारानाम लेकर पुकारने मात्र से या व्यक्तिगत रूप से फोन कर या घर आकरया मोहल्ले की सभा में “अब सब तुम्हारे ही हाथ में है” कह देने मात्र सेऐसी प्रसन्नता मिलती है जैसे कुत्ते की गर्दन परबहुत दिनों बाद मालिक के हाथ फेरने से कुत्ते को होती है ! (…..और कुत्ता निहाल हो मालिक के तलवे चाटने लगता है!) मुख्य राज नैतिक द्वारा दलों का वर्षों से यही दुस्साहस (मतदाता को कुत्ता समझने का) इस जागृत जनमानस वाले माहौल में भीजारी रहा … हर बड़े राजनैतिक दल के प्रत्याशियों में बड़ी संख्या में गंभीर अपराधों के आरोपी सम्मिलित थे ! कई तो गैर जमानती अपराधों के आरोपी होने कारण जेल में रहकर ही चुनावी रण का संचालन कर रहे थे ! आप में से अधिकांश अन्ना-अरविंद करते हुए “राईट टू रिजेक्ट” और “राईट टू रिकाल”का समर्थन कर रहे थे ! किन्तु जब सामने अवसर था तोरिजेक्ट की जगह सिलेक्ट कर दिखया !!!!!!!!!!!!!! जी हाँ ! “राईट टू रिजेक्ट” शुरु से ही आपके पास रहा है…उनके विरुद्ध उपयोग करने के लिएजिनको जरा जरा से प्रलोभनों में पड़करपिछली बार भी चुनने की गलती आपने की थी! और “राईट टू रिकाल” उनके लिए जो अपनी ताकतऔर गुंडों की सेना के दम पर चुनाव जीतकर आज भीइस गुमान में हैं कि उस क्षेत्र में उन्हें कोई हरा ही नहीं सकता !जो क्षेत्र विशेष की सीट को अपनी जागीर समझे बैठे हैं ! ‘राईट टू रिजेक्ट ‘ और ‘राईट टू रिकाल’ कानून बनने का ही इंतजार क्यों ??? अभी भी था / है आपके पास…उपयोग करते/ अब कीजिए! स्वयं ही परिवर्तन के सूत्रधार बनते/बनिये ! “राईट टूरिजेक्ट” कानून तब जरूरी होताजब सीमित राज नैतिक दलों को ही चुनाव लड़ने की पात्रता होती! क्या जरूरी है…कि किसी ‘विशिष्ट’ राज नैतिक दल केप्रत्याशी को ही वोट दिया जाए????? क्या कभी कहीं कोई ऐसा चुनाव क्षेत्र भी रहा है…जहाँ कोई भी “सभ्य / सुसंस्कृत ” आप सा उम्मीदवार नव गठित दलों/ क्षेत्रीय दलों/निर्दलीयों में भी ना रहा हो ????? (निर्दलीय को भी विकास मद में उतनी हीसांसद / विधायक निधि मिलती है जितनी अन्य दलके टिकट पर जीतकर आये सदस्य को!)जीतने वाली पार्टी का भी आप केवल अनुमान ही लगासकते हैं !हो सकता है आपके दिए वोट से आपके पसंदीदा दल की सरकार बनी हो और यह भी हो सकता है कि वह दल विपक्ष में बैठा हो !!! फिर क्या जरूरत है… किसी पारंपरिक राजनैतिक दल के ‘आपराधिक’ प्रत्याशी को ही मन मारकर चुनने की ??? फिर भी चुनना है तो चुनो आगे भी चुनते रहो मगर फिर बड़ते अपराधोंऔर भ्रष्टाचार की दुहाई मत दो !!! क्योंकिभ्रष्टाचार, बलात्कार, हेराफेरी, घोटालेबाजी, लूट, हत्या, गुंडागर्दी, जैसेअपराधी छवि/ पृष्ठभूमि केप्रत्याशी को चुनकर / सत्ता सौंपकर आप स्वयं उन्हेंआपके अपनों के साथ ऐसे अपराध करने आमंत्रित कर रहे हैं!!!!! आप स्वयं भी तो अपराध ही कर रहे हैं …ऐसे भ्रष्टों को आपके अपनों के साथभ्रष्टाचरण, बलात्कार, लूट, हेराफेरी जैसे अपराध करने का लायसेंस देकर !!! जागिये ! संभलिये !!! कुत्ते मत बनिए !!!!! सदा सोच समझकर वोट दीजिये !!!!!!! अपने मताधिकार कासोच समझकर ही ”सही प्रयोग”अवश्य कीजिये !!!!!!!!!! “सही मतदान आपका महत्वपूर्ण कर्तव्य है! और सर्वाधिक मूल्यवान अधिकार भी है!!!” धन्यवाद !!!!!!!!!!!!!!!!!!! जय हिंद ! जय भारत !!! वन्दे मातरम्!!!!! -Charchit Chittransh- (Global @ Search Engines)

Dr.Vimala Misra के द्वारा
March 19, 2014

और चाहे जो हो … दुरुद्रोही मोदी महाशय का PM बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा … शास्त्र – वचन है – ” गुरुद्रोही के मनोरथ कभी पूरे नहीं होते ! ” ………. ” कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में … असलियत खुद ब खुद आ जायेगी सामने …. “

Dr.Vimala Misra के द्वारा
March 19, 2014

और चाहे जो हो … ” गुरुद्रोही मोदी महाशय का प्रधानमंत्री बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा ….. ” शास्त्र-वचन है – ” गुरुद्रोही के मनोरथ कभी सफल नहीं होते !” …… ” कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में … असलियत खुद बखुद आ जायगी सामने …!!! ” आने लगी असलियत सामने ……….

PRADEEP KUMAR के द्वारा
March 19, 2014

श्री नरेंद्र मोदी जी के विरुद्ध यदि सभी दल मिलकर एक प्रत्याशी उतारने का फैसला करते हैं तो यह एक प्रकार से उनकी घबराहट ही कही जायेगी और नैतिक हार भी. श्री अरविन्द केजरीवाल जिस प्रकार की नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं उसमे हो सकता है कि तात्कालिक रूप से कुछ व्यक्तिगत लाभ उन्हें हो रहा हो किन्तु देश की उम्मीद जगाकर उन्होंने जिस प्रकार अन्य दलों की तरह कथित साम्प्रदायिकता का राग अलापना आरम्भ कर दिया है उससे वह पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं. दिल्ली की सरकार चलाने के स्थान पर आसान रास्ता चुनने वाले केजरीवाल यदि वाराणसी सीट सभी दलों के समर्थन से जीत भी लेते हैं तो भी यह यक्ष प्रश्न रह ही जायेगा कि सभी दलों को भ्रष्ट व नाकारा मानने वाले आप के नेता अचानक बी जे पी को दुश्मन नंबर वन क्यों मानने लगे हैं? जहां तक वाराणसी का सवाल है तो देखना सिर्फ यह है कि मोदी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को कितने वोटों से हराते हैं?

Ramdhari के द्वारा
March 19, 2014

Narender Modi ko koy by nahi takr nahi day sakta

jitendra patel के द्वारा
March 18, 2014

narendra modi ji ka jyada prachar chal rha hai or wo hi ase vykati hai jo ki hamare desh or ham janta ko aage le ja sakte hai es liye mera vot to me modi ji ko samrpit karta hu or karta rhuga ok

sureshjain के द्वारा
March 18, 2014

kejrival is failure Person in real life . INSTEAD OF PLAYING DIRTY POLITICS ALL PEOPLEOF VARANASI UNIT TOGETHER AND TEACH LESSON TO SOCALLED DHARAMNIRPEKSHA PARTY


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