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क्या पूर्ण बहुमत के योग्य नहीं हैं पॉलिटिकल पार्टियां?

Posted On: 3 Mar, 2014 Junction Forum में

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राजनीति का स्ट्रक्चर खराब नहीं है। हम ही देश को चला रहे हैं तो स्ट्रक्चर बदलने से कुछ नहीं होगा। अभी कोई भी पार्टी ऐसी नहीं है जो बहुमत में आने पर अच्छा काम करे इसलिए मैं तो फ्रैक्चर्ड वर्डिक्ट (खंडित जनादेश) ही चाहूंगाआमिर खान


बना बहस का मुद्दा

एक निजी समाचार पत्र को दिए गए इंटरव्यू के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में अभिनेता आमिर खान का कहना था कि आज की तारीख में कोई भी सरकार ऐसी नहीं है जो पूर्ण बहुमत पाने की हकदार है इसलिए देश में गठबंधन की सरकार ही बननी चाहिए। एक ओर जहां सभी राजनीतिक दलों में पूर्ण बहुमत पाने की होड़ लगी हुई है ऐसे में एक फेमस सामाजिक व्यक्तित्व होने के नाते आमिर खान का यह कथन एक बहस का मुद्दा बन गया है।


पक्ष

अपने कथन को आधार देते हुए अभिनेता आमिर का कहना था कि देश में मौजूदा राजनीतिक दल इतने सक्षम या कहें इतने योग्य नहीं हैं जो वर्तमान भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जरूरतों को पूरा कर सकें। आमिर खान के कथन पर अपनी स्वीकृति देने वाले लोगों का भी कहना है कि गठबंधन में रहते हुए कोई भी राजनीतिक दल अपनी मनमर्जी से कार्य नहीं कर सकता, विपक्ष की निगाहें तो उस पर होती ही हैं लेकिन इसके साथ-साथ उस पर गठबंधन में मौजूद अन्य दल भी अपनी पैनी दृष्टि रखते हैं इसलिए गठबंधन या गठबंधन के बाहर कोई भी दल अराजकता नहीं फैला सकता।


विपक्ष

गठबंधन की सरकार अस्थिरता का माहौल पैदा करती है क्योंकि गठबंधन में शामिल होने की पहली और एकमात्र शर्त ही व्यक्तिगत मुनाफा होता है और जब किसी दल को यह महसूस होने लगता है कि उसने संबंधित गठबंधन में शामिल होकर गलती की है, इससे बेहतर विकल्प तो उसे आसानी से मिल सकता है तो वह खुद को अलग कर लेता है और परिणामस्वरूप सरकार गिर जाती है। इतना ही नहीं आत्मनिर्भर होकर किसी नीति को अंजाम ना दे पाने का हालात भी गठबंधन की सरकार का एक नकारात्मक पहलू है। इसलिए किसी एक दल की सरकार का अस्तित्व में आना ही बेहतर होगा।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:

1. गठबंधन की सरकार अंदरूनी नियंत्रण में रहती है। ऐसे में इसके फायदे और नुकसान से आप कितना इत्तेफाक रखते हैं?

2. क्या वर्तमान हालातों में कोई भी ऐसी सरकार नहीं है जो पूर्ण बहुमत की हकदार हो?

3. गठबंधन सरकार की स्थिरता पर हमेशा प्रश्नचिह्न लगता रहा है ऐसे में इसे स्वीकार करना कितना सही है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या पूर्ण बहुमत के योग्य नहीं हैं पॉलिटिकल पार्टियां?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “गठबंधन की सरकार”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “गठबंधन की सरकार” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


Web Title : political scenario in present india



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

suraj के द्वारा
March 13, 2014

क्यो करते है वादे छुठे ,कैसी इनकी नियत ,क्या है कुर्सी ,क्या है कुर्सी कैसी इनकी आदत,बैठ सके ना जमी पे कुर्सी कुर्सी क्या क्या है कुर्सी

suraj के द्वारा
March 12, 2014

NO

Prabhuti kant के द्वारा
March 7, 2014

मैं इस बात से बिलकुल भी सहमत नहीं हु कि तीसरा मोर्चा बने क्योंकि तीसरा मोर्चा देश के लिए बहुत खतरनाक होगा…….यदि तीसरे मोर्चे कि सरकार बनती है तो उसमे कोई भी निर्णय लेने कि छमता नहीं होगी ………आमिर खान झुटा को डर है कि उनकी फ़िल्म भी फ्लॉप हो सकती है या ओवासी जैसे लोग उसका विरोध करेंगे.

papan chauhan के द्वारा
March 7, 2014

मेरा मानना है कि मौजूदा राजनीतिक दल इतने सक्षम या कहें इतने योग्य हैं जो वर्तमान भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जरूरतों को पूरा कर सकें।  राजनीतिक दल पूर्ण बहुमत के योग्य है।आमिर खान के विचार उनके अपने विचार हो सकते है।…—गठबंधन सरकारों से देश का भला नहीं होता अपितु मतलब परस्त लोग व वजूदहीन पार्टियां अपना स्वार्थ साधन करती हैं…..इसी से भ्रस्त तंत्र का निर्माण होता है .. ((  मजबूत भारत के लिए राजनीतिक दल का पूर्ण बहुमत में आना जनता की जिम्मेदारी है। ))…..

tripathi jitendra के द्वारा
March 6, 2014

जागरण foram में आमिर खान के vicharo से सहमत नहीं हु.वो एक अभिनेता है. और ये उनके अपने विचार हो सकते हे .मेरे नजरिये से गठबंधन सरकारे किसी भी लोकतान्त्रिक देश के राजनीतिकमूल्यो के vikas मेंसमर्थ नहीं होती. गठबंधन सरकारो कि अपनी कोई स्वतन्त्र सोंच नहीं होती अपनी कोई राजनितिक जिम्मेदारी भी नहीं होती. स्पस्ट बहुमत सर्कार न केवल राजनितिक रूप जिम्मेदार होती हे बल्कि विकास के प्रति उनका नजरिया स्पस्ट होता हे. और जनता के प्रति जवाबदेही भी बनती he

drshyamgupta के द्वारा
March 5, 2014

आमिर खान का यह कथ्य अनुचित है ..उन्हें राजनीति  जननीति एवं नीति का ज्ञान नहीं है ….. वास्तव में तो हम लोग  अर्थात जनता ही भ्रमित है एवं अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति का हित सरकार को समझती है और वोट करती है …. समाज के व्यापक हित का जन-साधारण को ध्यान नहीं है ..इसीलिये यह समस्या उठती है … जनता को चाहिए कि किसी भी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत दे ताकि वह स्वतंत्र रूप से कार्य करे उसे किसी अन्य का समर्थन नहीं लेना हो…उसीका पूर्ण दायित्व व जबावदेही हो….यदि वह सरकार देश,समाज व जनता के व्यापक हित में सक्षम नहीं होती तो बदलकर पुनः अन्य पार्टी को पूर्ण बहुमत दे…. —गठबंधन सरकारों से देश का भला नहीं होता अपितु मतलब परस्त लोग व वजूदहीन पार्टियां अपना स्वार्थ साधन करती हैं…..इसी से भ्रस्त तंत्र का निर्माण होता है ..

gopesh के द्वारा
March 4, 2014

मैंने गठबंधन सरकारों के ऊपर कुछ विचार प्रस्तुत किये हैं आप सब जरूर अपना समय दें http://gopesh.jagranjunction.com/?p=712209&preview=true आप सब का बहुत बहुत आभार

नीलकमल वैष्णव के द्वारा
March 4, 2014

“गठबंधन की सरकार” – Jagran Junction Forum जैसा कि आमिर खान ने कहा कि भारत में कोई भी राजनैतिक पार्टियाँ पूर्ण बहुमत के योग्य नहीं है… और मुझे उनका यह तर्क बिलकुल उचित लगा क्योंकि कोई भी पार्टी आज वास्तविक मुद्दे और देश के विकास को लेकर चुनाव नहीं लड़ रही बल्कि अपने और अपनी पार्टी कि छवि को लेकर मैदान में उतर रही है सभी राजनैतिक पार्टियाँ एक दूसरों पर महज लांछन लगाने में लगे हैं अपनी गिरेहबान में झाँकने कि कोई कोशिश नहीं कर रहा है कि आखिर वो अपने शासन में क्या किये या क्या कर रहे हैं… देश और देश के युवा भविष्य को सभी पार्टियाँ बरगलाने में लगे हुए हैं, सबके अपने अपने अलग मुद्दे हैं अपनी ओर करने के लिए पर कोई देश के विकास और हो रहे विनाश को नहीं सोच रहा बल्कि एक-दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं… भाजपा शासित राज्य सरकार कांग्रेस अरु केंद्र सरकार पर और कांग्रेस शासित राज्य विपक्षियों पर दोषारोपण करने में मशगुल हैं… आज देश में बढ़ रही महंगाई और भ्रष्टाचार केवल केंद्र सरकार नहीं अपितु सारे राज्य के भी कारण बढ़ रहे हैं अगर केंद्र सरकार दाम बढ़ा रहा है तो चाहिए कि राज्य सरकार उनका समर्थन ना करे बल्कि अपने यहाँ उसकी दाम में कोई बढ़ोत्तरी ना कर उनका विरोध करें पर यहाँ तो उनके साथ वो भी दाम बढ़ा कर दिखावे के लिए मंहगाई का रोना रो रहे हैं… खैर महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे अगल हैं फिर भी यह इस चुनाव में ज्यादा महत्वपूर्ण बनते जा रहा है… आज भारत राजनैतिक दलों के लिए युद्ध का मैदान हो गया है जहाँ नेता अश्लीलता के साथ अपराध पर भी उतारू हो चुके हैं… इसलिए आमिर खान के इस कथन का मैं समर्थन करता हूँ… (राजनीति का स्ट्रक्चर खराब नहीं है। हम ही देश को चला रहे हैं तो स्ट्रक्चर बदलने से कुछ नहीं होगा। अभी कोई भी पार्टी ऐसी नहीं है जो बहुमत में आने पर अच्छा काम करे इसलिए मैं तो फ्रैक्चर्ड वर्डिक्ट (खंडित जनादेश) ही चाहूंगा – आमिर खान)

    GANDHI SHARAN के द्वारा
    March 10, 2014

    good


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