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किसे मिलना चाहिए एनडीए के बदलते समीकरणों का श्रेय?

Posted On: 25 Feb, 2014 Junction Forum में

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भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का कद दिनोंदिन ऊंचा उठता जा रहा है। कुछ लोग इसे मीडिया की मेहरबानी करार दे रहे हैं तो कुछ का मानना है कि नरेंद्र मोदी के निजी प्रयासों और उनकी काबीलियत का ही परिणाम है कि अब उनकी पहचान सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि अब वह राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की कमान संभालने के लिए भी खुद को तैयार कर चुके हैं। तेलुगू देशम पार्टी, लोकजनशक्ति पार्टी, के एनडीए में शामिल होने जैसी खबरों के आने के बाद यह चर्चा जोरों पर है कि वे पार्टियां जो या तो बहुत पहले एनडीए गठबंधन से अलग हो गई थीं या फिर किसी गठबंधन में शामिल ही नहीं रहीं, उनके एनडीए से जुड़ने का सारा श्रेय नरेंद्र मोदी को दिया जाए या नहीं।


बना बहस का मुद्दा

मीडिया तो नरेंद्र मोदी को पहले ही ‘नायक’ का दर्जा दे चुकी है और गठबंधन के बदलते समीकरणों के बाद तो नमो-नमो की गूंज और तेज होने लगी है, जिसके चलते यह एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।

पक्ष

नरेंद्र मोदी के अनुयायियों और उनकी नीतियों पर विश्वास करने वाले लोगों का कहना है कि नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के एक उभरते हुए सितारे हैं और उनकी काबीलियत पर संदेह करने जैसी कोई बात ही नहीं उठती। देश के दूसरे सबसे बड़े गठबंधन, एनडीए की साख नरेंद्र मोदी की बदौलत आज आसमान छू रही है जिसका ज्वलंत उदाहरण है अन्य पार्टियों का एनडीए गठबंधन से जुड़ना। नरेंद्र मोदी सभी को साथ रखकर चलना जानते हैं और गठबंधन के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं इसलिए टीडीपी और लोजपा जैसी पार्टियां अब एनडीए में शामिल होने के लिए तैयार हैं।


विपक्ष

विपक्षी खेमे के सुर इस मामले में थोड़े अलग हैं क्योंकि उनका कहना है कि राजनीति में कोई किसी का नहीं होता क्योंकि यह सिर्फ फायदे और नुकसान का सौदा है। पिछले 10 सालों में यूपीए का शासन चलता आ रहा है और अब देश को एक बड़े बदलाव की आवश्यकता है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि इस बार एनडीए के जीत की संभावनाएं बहुत हद तक बढ़ गई हैं। लोकजनशक्ति पार्टी पहले से ही दल बदल वाली राजनीति में माहिर है और इस बार उन्हें फायदा एनडीए में नजर आ रहा है, इसलिए अगर कोई यह समझता है कि यह सब मोदी की वजह से हो रहा है तो यह बचकाना होगा।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. क्या वाकई मोदी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर अन्य पार्टियां एनडीए में शामिल होने के लिए तैयार हुई हैं?

2. एनडीए में हो रहे ऐसे सकारात्मक परिवर्तनों के लिए नरेंद्र मोदी को श्रेय देना कहां तक सही है?

3. राजनीति में सिर्फ अपना फायदा देखा जाता है, ऐसे में लोजपा और टीडीपी के एनडीए से जुड़ने जैसी खबरों को किस दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


किसे मिलना चाहिए एनडीए के बदलते समीकरणों का श्रेय?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “मोदी का व्यक्तित्व”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “मोदी का व्यक्तित्व” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


Web Title : narendra modi political strategies



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashish mishra के द्वारा
March 1, 2014

modi ki vajah se nda nayi uchai par hai to shrey to modi ko hi jayega

DILIP SAINI के द्वारा
March 1, 2014

is baar keval namo ka mantr hi chalegaa desh main .congress ko 60 saal diye hai bjp ko keval 5 55

ashok mali के द्वारा
February 27, 2014

Narendra modi ek jadugar hai jo desh ko nai ucchaiyo per le jayege Vishv ke kafi desh bharat ke aage natmastak ho jayege


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