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मोदी का ‘पिछड़ा कार्ड’ क्या उनके जीत की गारंटी बनेगा?

Posted On: 20 Jan, 2014 Junction Forum में

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भाजपा यह लड़ाई सिर्फ विकास के एजेंडे पर नहीं कांग्रेस के प्रथम परिवारऔर पिछड़े वर्ग से आए गरीब मोदीके बीच वर्ग अंतराल के आधार पर भी लड़ेगी – नरेंद्र मोदी


जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अपने एक कथन में नरेंद्र मोदी को चाय वाला बताते हुए यह कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री तो नहीं बन सकते लेकिन कांग्रेस के सम्मेलनों में चाय जरूर बांट सकते हैं तो इस कथन पर पलटवार करते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि ऊंचे परिवारों (कांग्रेस) वाले पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी से चुनाव लड़ने में अपनी बेइज्जती महसूस करते हैं। नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में जिस तरह जातिवाद का उपयोग किया है वह एक बहुत बड़ी बहस का विषय बन गया है कि आखिर प्रधानमंत्री बनने से पहले ही नरेंद्र मोदी द्वारा जातिवाद का सिक्का उछालने के पीछे क्या मंतव्य है?


बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा है जिसका मानना है कि नरेंद्र मोदी का ऐसा वक्तव्य संवैधानिक तौर पर हमारी एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ तो है ही साथ ही जातिवाद जैसा मुद्दा स्वयं आरएसएस की विचारधाराओं के भी उलट है। एक प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी होने जैसी बड़ी जिम्मेदारी निभाते हुए नरेंद्र मोदी का ऐसा कहना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह जाति के आधार पर विभाजित करने जैसा संकेत दे रहा है और इस समय देश को विभाजित करने वाले नहीं बल्कि एक साथ एक धागे में बांधकर रखने वाले नेतृत्व की जरूरत है। इस वर्ग में शामिल लोगों का यह कहना है कि यूं तो नरेंद्र मोदी अभी तक अपने ऊपर लगे सांप्रदायिक होने जैसे दाग को मिटा पाने में सफल नहीं हो पाए हैं और ऐसे में अब जब वह जातिवाद को भी अपना हथकंडा बनाने पर तुले हैं तो उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।


वहीं दूसरी ओर वे बुद्धिजीवी हैं जिनके अनुसार अपने आप को पिछ्ड़े वर्ग का कहना जातिवादी नहीं है। इस वर्ग में शामिल लोगों का कहना है कि हम चाहे लाख कोशिश कर लें या फिर कितना ही इस बात को नजरअंदाज कर लें लेकिन सच यही है कि ‘जाति’ भारतीय समाज का प्रमुख अभिलक्षण है। सदियों से जातिगत भेदभाव होते रहे हैं तथा इसे मिटाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग का सिद्धांत सामने आया है। असमानता मिटाने के लिए भारत की राजनीति और जातिवाद को एक-दूसरे से अलग रखना सही नहीं है। नरेंद्र मोदी के कथित वक्तव्य को इसी रूप में देखा जाना चाहिए।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. लोकसभा चुनावों के मद्देनजर मोदी का जातिवाद जैसा ट्रंपकार्ड क्या उनकी विजय की गारंटी बन सकता है?

2. आज जब भारतीय राजनीति में परिमार्जन जैसा मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है तो ऐसे में मोदी का फिर से जातिवाद का सिक्का उछालना कितना सही कहा जा सकता है?

3. इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत में जातिवाद और राजनीति को एक-दूसरे से पृथक नहीं किया जा सकता तो ऐसे में मोदी के बयान को विवादास्पद बनाना कितना जायज है?

4. मोदी लहर अपने चरम पर है ऐसे में यह विवाद उनकी लोकप्रियता को बढ़ाएगा या फिर कम करेगा?



जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


मोदी का ‘पिछड़ा कार्ड’ क्या उनके जीत की गारंटी बनेगा?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक ‘जातिवाद और मोदी’  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व जातिवाद और मोदी – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sobhaji के द्वारा
January 27, 2014

नरेंद्र मोदी कौन सा कार्ड खेले जिससे एक मजबूत सरकार मिल सके |वह विकास की राजनीति करते है जहाँ वोट का ट्रेंड ही अजीब हो धर्म , जाति झूठे वादे ,प्रदेश वाद ,दलित, पिछड़ा कार्ड आदि बातो पर वोट दिए जाते है |सब जानते है मोदी भारत को सफल सरकार दे सकते परन्तु जेसे ही उनका नाम आता है मुस्लिम को भड्काना शुरू कर दिया जाता है |उनकी भावना से खेलना शुरू हो जाता २००२ में क्या हुआ था उसे इतिहास पर छोड दिया जाये देश का ध्यान किया जाये सलमान खान एक एक्टर है अपनी फ़िल्म का प्रमोशन करने गये उन्होंने अपनी फ़िल्म की सफलता को रख कर जो भी कहा हम उनके पीछे पड़ एक ऐसा परिवार जो सेक्युलर है| हमारा मनोरंजन करता है हम क्या है ?जरा सोचिये |

neetesh mishra के द्वारा
January 25, 2014

now time modi is a fevorable coice of indian politics there is no needed of any such type of foolish statement which creat wrong message among the mass peopile.the focous is only on road map for development,unity,intigrity and policy for zero tolerance for curreption.

NARENDRA DUBEY के द्वारा
January 24, 2014

There is no space for making difference on the basis of cast or gender in Vedic culture. who believes to promote cast are not human being. In old age some selfish powerful created difference for their benefit like today leaders. For skill development or development small groups or casts can be happened but there is no difference of lower and upper. lower and upper cast thinking is a mindset of selfish and moral less leaders. They want to divide on the basis of cast or religion for their own benefits. which is not in the interest of the country. in india all political parties are involved in making division for their own benefits and citizens have no understanding.

Shashwat Shriparv के द्वारा
January 21, 2014

मोदी जी के लिए किसी कार्ड की जरूरत नहीं खेलने के लिए .. उनका अपना बहुमुखी प्रतिभा और व्यक्तित्व ही काफी है चुनाव जीतने और प्रधानमन्त्री बनाने के लिए….

R P Pandey के द्वारा
January 21, 2014

तुलसी दास के एक चौपाई को गलत सन्दर्भ में लेने के कारण आज हिन्दू समाज सैकड़ो साल से एक दंश झेल रहा है /कम से कम मोदी के बयान को गलत संदर्भित करने से बाज आये !यह सारा बहस चाय वाले पर केंद्रित है /और एक चाय वाले कि समाज में क्या हैसियत होती है किसी से छिपा नहीं है / आज हिन्दू जाती आधारित बर्ग में ही नहीं बल्कि ब्यवसाय आधारित उच्चता नीचता का दंश झेज रहा है / तर्क शास्त्री कितना ही बाल का खाल निकाले , लेकिन इन अभिजात्यों को इससे अच्छा जबाब कोई हो नहीं सकता /अईयर ने मोदी के चाय वाले धंधे पर कटाछ किया तो मोदी ने उनके अभिजात्यता पर ! समझ में नहीं आता कि इसमे जाती वादिता कहा से आ गया ?


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