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विवाह पूर्व यौन संबंध में स्त्री विवेक – क्या है आपकी राय?

Posted On: 6 Jan, 2014 Junction Forum में

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सामाजिक परिप्रेक्ष्य में एक अहम फैसला देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने विवाह के वादे के आधार पर किसी पुरुष से शारीरिक संबंध बनाने और बाद में पुरुष द्वारा शादी से मुकर जाने को बलात्कार की श्रेणी में अपराध मानने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है दुनिया का कोई भी धर्म शादी पूर्व शारीरिक संबंध बनाने की इजाजत नहीं देता। ऐसे में अगर कॉरपोरेट ऑफिस में काम करने वाली, स्व-विवेक से अपना हर फैसला लेने वाली महिला किसी पुरुष से सिर्फ इसलिए यौन संबंध बनाने को राजी हो जाती है कि वह उससे शादी करेगा तो यह उसकी स्वयं की जिम्मेदारी होगी क्योंकि परिपक्वता के साथ काम करती हुई वह महिला स्वयं समझदार होती है और ऐसे हर कृत्य को बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट के इस फैसले का जहां कई मायनों में स्वागत हो रहा है वहीं इसके विरोध में स्वर भी मुखर हो रहे हैं।


नए सामाजिक खुलेपन के पैरोकार और स्त्री-पुरुषों को समान आधार पर देखने वाले कोर्ट के इस फैसले को आदरणीय व नए सामाजिक मानकों के अनुकूल मानते हैं। इनका मानना है कि महिला सशक्तिकरण की बातों के साथ महिलाएं हर जगह पुरुषों से कदम मिलाकर चलना चाहती हैं और चल रही हैं लेकिन जब भी स्त्री-पुरुष संबंधों की बात आती है महिलाएं कमजोर भावनात्मक पक्ष का लाभ ले जाती हैं। इनकी शिकायत होती है कि खुली मानसिकता के साथ आज लघु उद्योग से लेकर बड़े औद्योगिक जगत में भी सुबह 8 से रात के 7 और दोपहर के 12 से रात के 2 बजे तक भी काम करने में नहीं हिचकिचाने वाली, खुद को पुरुष के सहारे के बिना संबल मानने वाली, सेक्स और प्रेम संबंधों में बेझिझक बात करने वाली, अपना हर फैसला आत्मविश्वास के साथ करने वाली महिला अगर हर फैसले में खुद को स्वावलंबी साबित करती है, पुरुषों के समकक्ष मानती है तो ऐसे किसी भावनात्मक पक्ष में कमजोर और बहकाए जाने की बात कर अपने स्व-विवेक को कमतर आंके जाने की पहल खुद ही क्यों करती है? इनकी नजर में सामाजिक मान्यताओं का फायदा अपने पक्ष में करने और पुरुषों पर दबाव प्रेषित करने का यह उनका तरीका होता है जिसे दिल्ली कोर्ट ने समझा और फैसला दिया है।


दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण के पुरोधा इसके विरोध में यह सवाल कर रहे हैं कि महिलाएं भले ही सामाजिक रूप से खुद को सशक्त बनाने की कोशिश में जुटी हैं और हर कदम वे अधिकांशत: आज पुरुषों के समकक्ष चलने भी लगी हैं लेकिन प्राकृतिक रूप से (स्वभावतः) महिलाएं पुरुषों की तुलना में भावुक होती हैं। महिलाएं आज चांद पर ही क्यों न पहुंच गई हों लेकिन कहीं न कहीं हमारा समाज आज भी पुरुष सत्तात्मक है और महिलाएं उन्हें अपना सुरक्षा कवच मानती हैं। अत: कार्यप्रणाली में स्व-विवेकी होने के बावजूद जब भी पुरुष की बात आती है वह भावनात्मक कमजोरी की चपेट में आ जाती हैं। पुरुष उसकी इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए उससे शादी का वायदा कर उसका शारीरिक शोषण करते हैं। इसलिए कोर्ट का फैसला पुरुषवादी इस रवैये को बल देगा और महिलाओं का शोषण करेगा।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:

1. क्या कोर्ट का यह फैसला आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य के अनुकूल है या यह स्त्री-हितों को खतरा पैदा करेगा?

2. क्या शादी पूर्व यौन सबंध बदलते सामाजिक परिदृश्य की मांग हैं?

3. क्या शादी पूर्व यौन संबंधों में पुरुष द्वारा स्त्री को भरमाए जाने की आशंका हो सकती है?

4. आज की सशक्त महिला को भावनात्मक कमजोरी का आधार देकर पुरुष द्वारा भरमाए जाने का कथन कितना मान्य हो सकता है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


विवाह पूर्व यौन संबंध में स्त्री विवेक – क्या है आपकी राय?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक ‘कोर्ट का फैसला’ है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व कोर्ट का फैसला – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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35 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mahender Singh के द्वारा
February 3, 2014

कोर्ट का फैसला – Jagran Junction Forum - मेरी राय़ में कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है।  महिलाएं बेशक पुरूषों के समान शारीरिक बल नहीं रखतीं परन्तु महिलाओं में  मानसिक शक्ति पुरूषों की तुलना में कई  गुना अधिक होती है।  चाहे घर में छोटे-छोटे काम हों या बाहरी दुनिया के बड़े-बड़े फैसले लेने हों महिलाएं हर जगह बड़े विवेक और बुद्धिमानी से काम लेती हैं।   इसलिए य़ह कहकर कि प्राकृतिक रूप से (स्वभावतः) महिलाएं पुरुषों की तुलना में भावुक होती हैं, महिलाएं विवाह पूर्व  प्रेम  और सेक्स संबंधों में अपनी भागीदारी को अपनी कमजोरी और पुरुषों द्वारा  शारीरिक शोषण का नाम नहीं दे सकतीं।  यदि महिलाएं बराबरी और अपना हर फैसला खुद लेने की चाह रखती है तो ऐसे में उनके द्वारा लिये गये फैसलों के  लिये वो किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकतीं हैं।

राव विनोद के द्वारा
January 16, 2014

उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे: 1. क्या कोर्ट का यह फैसला आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य के अनुकूल है या यह स्त्री-हितों को खतरा पैदा करेगा? 2. क्या शादी पूर्व यौन सबंध बदलते सामाजिक परिदृश्य की मांग हैं? 3. क्या शादी पूर्व यौन संबंधों में पुरुष द्वारा स्त्री को भरमाए जाने की आशंका हो सकती है? 4. आज की सशक्त महिला को भावनात्मक कमजोरी का आधार देकर पुरुष द्वारा भरमाए जाने का कथन कितना मान्य हो सकता है?

kapil के द्वारा
January 15, 2014

bilkul sahi fesla cort ka..

kapil के द्वारा
January 15, 2014

hindi

Sachinder के द्वारा
January 13, 2014

Srimad Bhagavat speaks “O Mahäräja Parikshit, let me now describe the dynasty of Yadu, the eldest son of Mahäräja Yayäti. This description is supremely pious, and it vanquishes the reactions of sinful activities in human society. Simply by hearing this description, one is freed from all sinful reactions. The Supreme Personality of Godhead, Krishna, the Supersoul in the hearts of all living entities, descended in His original form as a human being in the Yadav dynasty or family of Yadu.( Srimad Bhagavatam 9.23.19-20)” The Supreme Personality of Godhead Shri Krishna chose to appear in this Yadav dynasty. Lord Krishna is Svayam Bhagavan and He is the source of everything. He is the source of Lord Maha Visnu, Garbodakshayi Visnu and Karnodakshayi Visnu. There is no one equal to Him or greater than Him. Thus the Yadav dynasty became so glorious that even hearing the description of this great dynasty frees one from all sins. So as a member of Yadav community, we all have got this great fortune and responsibility to carry on the legacy. The purpose of this website is to remind all Yadav’s of their great heritage and how we can act in such a responsible manner so that it’s beneficial for all of us as well as for the whole world. Jai Yadav! Jai Radha Madhav. Padmanabh Swami Temple, Kerala was constructed by Yadav Kings. Recently, the Government found Treasures inside temple worth several Lakhs crores, making the temple the richest temple in the whole world. Padmanabh Swami- The worshipable Lord of the Yadav’s King’s of Kerala Tirupati Balaji (Lord Venkatesh)- worshipable deity of the Yadav Kings. Tirupati Balaji temple was built by Yadav King’s. There is an attempt by few Christian groups to convert the Yadavs to Christianity. They know that if they are successful in converting this single community then the whole INDIA will become Christian country. They have anyway set the target to make INDIA a Christian country by 2020 and they are very strategically working on it.

sanjay के द्वारा
January 13, 2014

jagran junction foroum- this decison is right . so many people falasly impleaded by these type cases. if both are major and they make relations with consent. and many time this continue 2 and 3 years . if we support live in relations , then this gives both persons to right to end this relation. in this type cases is not rape and not covered in section 376 ipc.

ajaysinhrathod के द्वारा
January 12, 2014

कोर्ट का फैसला सही हे Ooa

ajaysinhrathod के द्वारा
January 12, 2014

लड़कियो को छोटे कपडे नहीं पहनने छाहिये

    ajaysinhrathod के द्वारा
    January 12, 2014

    जेसे कि जींस टाइट टी sirt

shubham के द्वारा
January 11, 2014

ha court ka faisla bilcul thik h kyoki jb aap padhe-likhe h to blatkar ka to swal hi nhi utha

rajendra के द्वारा
January 10, 2014

dakinus faisala

rajendra के द्वारा
January 10, 2014

मैरे हिसाब से यह फेसला गलत है कयौंिक हमे यह नही भूलना चािहये िक हम भारत मे रहते है

डा श्याम गुप्त के द्वारा
January 10, 2014

न्यायालय का फैसला बिलकुल सही है……. यदि पढी-लिखी, वालिग़ लड़की अपना हर फैसला लेने में स्वतंत्र लड़की -महिला अपनी इच्छा से सम्भोग करती है तो वह उसके परिणामों से भली भांति परिचित है ..उसे या तो स्वयं पर कंट्रोल करना चाहिए अथवा परिणाम को स्पोर्टिंग-स्वस्थ-भाव से लेना चाहिए……विवाह से मुकरजाना आदि सदा से ही होता आया है …. —– एक मूल बिंदु यह भी है कि पुरुष को भी अपना सामजिक दायित्व समझना चाहिये एवं ऐसे प्रकरण से बचना चाहिए…… —इस बिंदु पर पूरा आलेख मेरे ब्लॉग पर पर प्रस्तुतहोगा….

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
January 10, 2014

मैं अदालत के फैसले से पूरी तरह सहमत हूँ क्योंकि कोई भी युवा या युवती सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाते है तो उसे बलात्कार नहीं माना जा सकता.यदि कोई युवती कामकाजी है पढ़ी लिखी है तो वह बरगलाने का इल्जाम किसी भी युवा पर नहीं लगा सकती,यदि इस स्थिति में वह बलात्कार का आरोप लगाती है तो अवश्य ही उसकी बदला लेने वाली नियत है, जिसके लिए युवा को दोषी नहीं माना जा सकता.महिला के समर्थन में कानून इसलिए नहीं बनाये गए हैं, जिसका अनुचित लाभ उठाते हुए महिला वर्ग पुरुष वर्ग को ब्लैकमैल करे

Dharmendra kumar yadav के द्वारा
January 9, 2014

Yes ye faisla bilkul sahi kyo ki mai bhi company me kam karta hu esliye mujhe eska achha anubhav hai.

Sarfaraz के द्वारा
January 8, 2014

अगर लड़का और लड़की बालिग़ हैं तो इसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता क्योंकि संविधान में उस उम्र को ही बालिग़ होने कि उम्र बतायी गयी जब लड़का और लड़की अपना फैसला खुद कर सकते हैं. जब लड़का और लड़की अपना फैसला खुद कर सकते हैं तो बलात्कार का कहीं कोई सवाल ही पैदा नहीं होता हैं.

VPMISHRA के द्वारा
January 8, 2014

विबाह पूर्व सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाना बलात्कार नहीं हो सकता है

pankaj के द्वारा
January 8, 2014

हा सही फैसला h

Anil Dixit के द्वारा
January 8, 2014

मेरे विचार से कोर्ट का यह फैसला बिलकुल जायज है क्योकि अधिकतर मामलो में महिलाये और पुरुषो के साथ सम्बन्ध स्वयं कि इच्छा से होता है किन्तु जब दोनों के सम्बन्ध किसी कारन बस टूटते हैं तो महिलाये इस तरह के आरोप पुरुषो पर लगा कर उन्हें निच्चा दिखने कि कोसिस करती है , यहाँ तक भी देखा गया है कि कई मामलों में तो महिला व आरोपी पुरष के बिच शारीरिक सबंध तक नहीं होते फिर भी इस कानून का इस्तेमाल कर महिलाये पुरुषो को निच्चा देखा ही देती है. शारीरिक सबंध के समय अगर दोनों कि सहमति होती है और दोनों ही बालिग है तो इसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता .

nagesh khare के द्वारा
January 8, 2014

जिस कार्य को करने में आपका शरीर व अंतरात्मा एकदूसरे का सहर्ष साथ दें वह गलत नहीं होता है | मंगेतर से यौन सम्बन्ध बनाना बिलकुल गलत नहीं है और इसके इतर बनाना युवती के विवेक पर निर्भर है | आज के आधुनिक दौर में बमुश्किल पंद्रह प्रतिशत युवतियां ही ऐसी होंगी जिन्होंने विवाह पूर्व सम्बन्ध नहीं बनाया हो | 85 प्रतिशत युवतियों में सिर्फ ३० प्रतिशत ऐसी हैं जो सेक्स करने वाले युवक से ही विवाह करती हैं | महिलाओं के लिए सेक्स अब परम्पराओं व प्रथाओं के दायरे में नहीं रह गया है जिस स्त्री का जब मन करता है वह आनंद लेती है क्योंकि एक महिला/युवती के लिए इसकी उपलब्धता सहज व सुलभ होती है| विवाहित स्त्री अगर अपने पति से शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं है तो वह सम्बन्ध बनाने में तनिक संकोच नहीं करती है फिर वह पुरुष उसका पडोसी, माली, ड्राईवर, चौकीदार कोई भी हो सकता है | वर्जनाएं टूट चुकी हैं सार्थक बहस करें

satyasoni के द्वारा
January 8, 2014

इस आधुनिक युग मे स्त्री पुरुष के सम्बंध को एक नया नाम दिया है।लिव इन रिलेशन्षिप ।स्त्री पुरुष एक साथ रह कर अपने मन मे उठी कामवासना की जवाला को दबा नहीं सकता। माता पिता या परिवार से दूर रह कर लड़किया अपने आपको स्वतंत्र महशुश करती है। और ये ही उनकी अंतर्वासना का परिणाम है की शादी से पहले सम्बंधो का। सम्बंध होना शरीर की इच्छाओ की परिपूर्णता है। लड़की जल्दी बहकावे और वादो मे आजाती है। सम्बंध के समय दिये गये वादे हवा की तरह होते है और समय मिलते ही फुर्र हो जाते। है। दोनो समझदार है। जब उन्होने समबन्ध बनाये उस समय सामाजिक रिश्तो की, पारिवारिक मूल्यों को एक तरफ ताक मे रख कर धज्जिया उड़ाते हुये अपनी काम वासना की त्रप्ति करते हुये जितने दिन तक निभाना होता है चलता रहता है। और जब बच्चा गर्भ मे आजाता है तब लड़की को होस आता है। वो लड़के द्वारा दिये गये वादो को विवाह करने पर जोर देती है। और अंतिम परिणाम आप जानते है क्या हो रहा है। वादे तो परिवार की उपस्थि मे फेरे लिये गये उस समय भी किये गये होते है। लेकिन जो वादे अंधेरे मे लिये गये उन को किसी को पता नहीं होता। लड़की को एक हथियार मिल गया है। मौज मस्ती करके लड़के के उपर ब्लात्कार का इल्जाम लगा दो क्यो की वो अपने वादे से मुकर रहा है। स्त्री पुरुष के लिये एक ऐसा काम रूपी जाल है जिसमे वह लड़की स्वयम् जाल बन कर भी अपने ही जाल मे फंस कर रह जाती है। ये एक बहुत बड़ी बहश है और इस आधुनिक समय मे स्त्री पुरुष के सम्बंधो पर कितनी ही बहश की जाये। लेकिन दोनो ऐसे सम्बंधो के परिणाम का प्रभाव लड़की को ही भुगतना पड़ता है। उसकी सुरक्षा जरूरी है। या तो लड़किया सवयम समजदार हो जाये और या फिर समाज मे अपना मुह दिखाने के लायक ना रहे। ऐसे जंजाल मे क्यो फंसती है। अदालत का फैसला सही है।ऐसे सम्बंधो को बलात्कार नहीं माना जा सकता . अनैतिक जरूर है। सामाजिक और परिवारिक मूल्यो की इन रिश्तो ने उखाड़ कर फेंक दिया है।

chandan के द्वारा
January 7, 2014

मेरे विचार से कोर्ट का ये फैसला बिल्कुल सही है।

sushil kumar singh के द्वारा
January 7, 2014

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के फैसले -“Jagran Junction Forum” विवाहपूर्व योंन सम्बन्धो दे बारे मैं दिए गए कोर्ट के फैसले का स्वागत हे क्यूँ कि आज कि नारी विवाह पूर्व योंन समबन्ध तब बनती हे जब उसे योंन समबन्ध कि इच्छा जागृत होती हे . यही कार्य जब बलात किआ जाता हे तब अपराध बनता हे योंन सम्बन्धो कि पूर्ति इस फैसले से पहले भी होते थे तब बंद घरों मैं होते थे घर के मर्दों कि गर हाजिरी मैं होते थे

Brijesh Yadav के द्वारा
January 7, 2014

I think this is right decision because sometimes some girls took advantage and misused this law,Once you are adult and made a physical relation without any pressure, on this situation both are enjoying sex after that if you claim for rape it annoying things. Brijesh Singh Yadav, Tel Aviv University, Israel

pappu dhami के द्वारा
January 7, 2014

मैरे हिसाब से यह फेसला गलत है कयौंिक हमे यह नही भूलना चािहये िक हम भारत मे रहते है

    umashankar chauhan के द्वारा
    January 8, 2014

    यह फ़ैसला जो कोर्ट ने दिया वह भारतीय संस्क्रती का सम्मान करते हुवे ही दिया गया है। स्त्री को चाहिए के इश्वर ने जो उसे अनमोल धरोहर के रुप मे गहना दिया है उसे वह शादी जैसे पवीत्र बन्धन मे बंधते वक्त अग्नि को साक्षी मान कर उसी को सोपे जो उसकी आजीवन रक्षा कर सके। ना के किसी ऐरे गैरे नथ्थु खैरे को वह खजाना लुटाती फ़िरे।

    Sarfaraz के द्वारा
    January 8, 2014

    माफ कीजियेगा पप्पू जी लेकिन आप जिस भारत की बात कर रहे हैं तो आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि भारत में कब ऐसा था कि आप शादी से पहले सेक्स करे लेकिन आप करते हैं तो आप देश की बात ना करे तो बेहतर है.

    www.ashuyadav.in के द्वारा
    January 8, 2014

    आप कैसे ख सकते है कि फैसला गलत है? आप कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह पड़िये. साफ कहा है कि दुनिया का कोई धर्म. शादी से पहले सम्बन्ध कि अनुमति नही देता है लेकिन अगर अपनी मर्ज़ी से कोई लड़की ऐसा करती है तो वो बलत्कार कि श्रेणी में नही आएगा..? इसमें गलत क्या है ? थोडा दिमाग उसे करो ? ba

Himani aggarwal के द्वारा
January 7, 2014

मेरा विचार है कि कोर्ट का ये निर्णय बिलकुल सही है, जिस कार्य मैं पुरुष और महिला दोनों कि सहमति हो उसमे केवल पुरुष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता , महिला भी इसके लिए जिम्मेदार है . हर रिश्ते कि कुछ मर्यादा होती है जिसे निभाना सिर्फ धर्म कि नहीं हर वयक्ति कि जिम्मेदारी है.

    umashankar chauhan के द्वारा
    January 8, 2014

    हिमानी अग्रवाल जि के विचारो से मै बिलकुल सहमत हुं । कम शब्दो मे उन्होने बहुत ही सटीक लिखा है। धन्यवाद –

    Shiv Shankar के द्वारा
    January 8, 2014

    बिलकुल सही बात है हिमानी जी में आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ

    Shiv Shankar के द्वारा
    January 8, 2014

    मेरे विचार से कोर्ट का ये फैसला बिल्कुल सही है।

priya के द्वारा
January 7, 2014

मेरे विचार से कोर्ट का ये फैसला बिल्कुल सही है।

    sobhaji के द्वारा
    January 8, 2014

    विवाह पूर्व यौन सम्बंध पर कोर्ट का फैसला मै पूरी तरह इस फैसले से सहमत हूँ अपना भला बुरा एक बालिग लड़की को खुद सोचना चाहिए एक खास क्लास है उनकी बात जाने दीजिये ज्यादातर महिलाये धोखा खाती है |देखा गया है बड़े शहरो में लड़के बड़े सपने ले कर आते है पढ़ते है एक अकेले पन की उदासी भी होती है | यहाँ उनके महिलाओ से संबंध बन जाते है कई भावुक लड़किया उनका पूरा ध्यान रखती है नौकरी पेशा पैसा भी खर्च करती है यह सोच कर हमारा एक सुखद भविष्य होगा परन्तु जेसे ही कैरियर बना उनकी आँखे बदल जाती है माँ बाप के अनुसार वह शानदार शादी कर फुर्र हो जाते है विदेशो में इंडियन लड़के ज्यादातर यही करते रहे है |उसी शहर में बौस की लडकी से शादी कर अपना शान दार कैरियर बना लेते है |लड़की रोती रह जाती है | कभी कभी लड़की को लगता है उसने नासमझी में लड़के के साथ रिश्ते बना लिए अब वह अपने जीवन के बारे में नये सिरे से सोचना चाहती है परन्तु उसके पुराने संबंध उसका पीछा नही छोड़ते माँ बाप समझ नही पाते वह क्या करे कानूनी रूप से भी लड़की कुछ नही कर सकती डॉ शोभा भारद्वाज


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