blogid : 4920 postid : 670807

महिला यौन हिंसा – कितनी बदली है तस्वीर ?

Posted On: 16 Dec, 2013 social issues,Junction Forum में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पूरे देश को सदमें में डाल कर दहला देने वाले दिल्ली गैंग रेप मामले के एक साल बाद दिल्ली में महिलाओं की स्थिति, यौन उत्पीड़न तथा छेड़छाड़ की स्थिति पर विचार-विमर्श शुरू हो चुका है। महिलाओं के खिलाफ अपराध पर पुलिस में दर्ज़ रिपोर्टों को देख यह तस्वीर सामने आती है कि दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 के बाद से बलात्कार के मामले 125% तथा छेड़छाड़ की घटनाओं में 400% से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है। हालांकि निर्भया केस के बाद महिला यौन हिंसा के खिलाफ कानून काफी कड़ा हो चुका है तथा पुलिस को त्वरित कार्यवाही के आदेश भी मिल चुके हैं फिर भी देश की राजधानी दिल्ली में ही जब महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं तो ऐसे में देश के अन्य राज्यों व दूरस्थ क्षेत्रों के हालात कितने चिंताजनक होंगे इसे सहज ही समझा जा सकता है। निर्भया केस के एक साल भी तस्वीर बेहतर होने की बजाय और ज्यादा बिगड़ी है जिसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं, बौद्धिकों और महिला हित के पैरोकारों के बीच गंभीर बहस छिड़ चुकी है।


बलात्कार और छेड़छाड़ के बढ़ते मामलों पर पुलिस तथा प्रशासन का कहना है कि निर्भया केस के बाद समाज में जागृति आयी है तथा महिलाएं निडर होकर अपने साथ हुए हादसों की शिकायत दर्ज़ कराने आगे आ रही हैं। पुलिस का मानना है कि महिला यौन हिंसा अब के मुकाबले पहले ज्यादा होती थी किंतु महिलाएं खुल कर सामने नहीं आती थीं। लेकिन 16 दिसंबर, 2012 की घटना के बाद प्रशासन तथा कानून व्यवस्था पर भरोसा बहाली के प्रयास रंग लाए और लगभग हर घटना पर महिलाएं मुखर होकर आवाज उठाने लगी हैं।


वहीं इसके ठीक विपरीत सामाजिक कार्यकर्ता, बौद्धिक और महिला हित के पैरोकार मानते हैं कि निर्भया केस के बाद दिल्ली की हालत और भी ज्यादा बिगड़ी है। महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा व छेड़छाड़ की घटनाएं पहले से कहीं ज्यादा हो रही हैं। यह तथ्य इस बात को साबित करता है कि रेप की मानसिकता में इजाफा हुआ है तथा ऐसी मनःस्थिति वाले व्यक्ति कानून व्यवस्था को एक चुनौती की तरह ले रहे हैं और किसी भी जगह यौन हिंसा को अंजाम देकर स्त्रियों में डर व्याप्त करना चाहते हैं। महिला हित के पैरोकारों का मानना है कि पुलिस और प्रशासन अभी भी महिला हितों के प्रति संवेदी नहीं है और जितने भी मामले दर्ज़ किए गए हैं वे केवल समाज व मीडिया के दबाववश तथा ज्यादातर मामलों में पुलिसिया रवैया हीला-हवाली का रहा है।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. क्या अब भी यौन हिंसा के मामलों पर पुलिस का रवैया कार्यवाही की बजाय टाल-मटोल वाला ज्यादा है?

2. क्या कारण है कि समाज, मीडिया व प्रशासन में आई जागरुकता के बाद भी यौन हिंसा के मामले बढ़े हुए दिख रहे हैं?

3. कैसे बदलेगा महिलाओं के प्रति नजरिया?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


महिला यौन हिंसा – कितनी बदली है तस्वीर ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “महिलाओं के प्रति नजरिया” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व महिलाओं के प्रति नजरिया – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

9 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Babulal Ahirwar के द्वारा
December 23, 2013

                                                      उम्मीद.                                                   जनता ने तो वोट देकर ये साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री के रूप में सब आप को ही पसंद करते है, , अब आपको यह साबित करना है , कि आप बाकए जनता के शुभचिंतक है | और सभी को आपसे बहुत उम्मीदें लगी हुयी है, दूर् दराज के गांव में अभि भी जसके तस हाल है, देश तो आज़ाद हो गया लेकिन अभी भी गांव में छुआछूत और ऊंच-नीच कि कुरीतिया व्याप्त है, जो समाज और देश के विकास और देश कि एकता व अखंडता में बाधक है | गांव में अभि भी दरिद्र , गरीब , कमजोर वगों को दाऊ-दादागिरी और दवन्गी का शिकार होना पड़ता है . गांब में रहने के लिए उनको चूहे कि तरह दब कर यातना और गुलामी सहना पड़ती है | वह् सिर उठाकर नहि चल सक्ते | गांव में राशन कि दुकान महिने में तीन या चार बार खुलती है | उसमें में भी किसी को चावल नही , तो किसी को शक्कर नही और तो और उन 3-4 दिनों में जो भी राशन ले लिया तो ले लिया नही तो वह् भी गया .लोग आपत्ति भी नही उठाते क्यों कि परिबार बच्चों को पालना यदि कोइ बिबाद बन गाया तो गरीब कि कौन सुनता पुलिस बाले भी तो पैसे बालो को ही सलाम करते है | आपने जैसा कि कहा, कि अब आपको जन जन को खुश हाल बनाना है | दीन दुखी जनता के आंशू पोछना है, और प्रदेश में कोइ भूखा ना रहे इसके लिए आपने उचित मूल्य कि दुकान का राशन तो सस्ता करने का उपाय तो दिया पर इसके साथ साथ ये सब बिसंगतिया पता लगाकर, खोजकर और हटाकर आपको इनको समाज में इज़्ज़त व समानता से जीने का हक भी दिलाना होगा | तभी सही मायनों में खुशहाल और शांतिमय प्रदेश कि कल्पना साकार हो सकेगी | और इससे ही समाज और प्रदेश में एकजुटता का माहौल कायम होगा |

Babulal Ahirwar के द्वारा
December 23, 2013

                                                      उम्मीद जनता ने तो वोट देकर ये साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री के रूप में सब आप को ही पसंद करते है, , अब आपको यह साबित करना है , कि आप बाकए जनता के शुभचिंतक है | और सभी को आपसे बहुत उम्मीदें लगी हुयी है, दूर् दराज के गांव में अभि भी जसके तस हाल है, देश तो आज़ाद हो गया लेकिन अभी भी गांव में छुआछूत और ऊंच-नीच कि कुरीतिया व्याप्त है, जो समाज और देश के विकास और देश कि एकता व अखंडता में बाधक है | गांव में अभि भी दरिद्र , गरीब , कमजोर वगों को दाऊ-दादागिरी और दवन्गी का शिकार होना पड़ता है . गांब में रहने के लिए उनको चूहे कि तरह दब कर यातना और गुलामी सहना पड़ती है | वह् सिर उठाकर नहि चल सक्ते | गांव में राशन कि दुकान महिने में तीन या चार बार खुलती है | उसमें में भी किसी को चावल नही , तो किसी को शक्कर नही और तो और उन 3-4 दिनों में जो भी राशन ले लिया तो ले लिया नही तो वह् भी गया .लोग आपत्ति भी नही उठाते क्यों कि परिबार बच्चों को पालना यदि कोइ बिबाद बन गाया तो गरीब कि कौन सुनता पुलिस बाले भी तो पैसे बालो को ही सलाम करते है | आपने जैसा कि कहा, कि अब आपको जन जन को खुश हाल बनाना है | दीन दुखी जनता के आंशू पोछना है, और प्रदेश में कोइ भूखा ना रहे इसके लिए आपने उचित मूल्य कि दुकान का राशन तो सस्ता करने का उपाय तो दिया पर इसके साथ साथ ये सब बिसंगतिया पता लगाकर, खोजकर और हटाकर आपको इनको समाज में इज़्ज़त व समानता से जीने का हक भी दिलाना होगा | तभी सही मायनों में खुशहाल और शांतिमय प्रदेश कि कल्पना साकार हो सकेगी | और इससे ही समाज और प्रदेश में एकजुटता का माहौल कायम होगा |

sagar के द्वारा
December 18, 2013

Get Solutions of your all Problems through Astrology-Numerology, Vaastu by PT SAGAR BHARGAV 09814319497 1.) Love Marriage 2.) Green Card Visa/ Foreign Settlement 3.) Black Magic 4.) Property 5.) Lottery Number 6.) Childless Couple Problem 7.) Bussiness Problems 8.) Physical/ Mental Problems 9.) Get your Desired Love Back 10.) Husband-Wife Relation Problem/ Sautan 11.) Job/ Employment 12.) Powerfull Vashikaran(Hypnotism) 13.) Education 14.) Children not listening & caring of You etc.

Shankar roy के द्वारा
December 17, 2013

ऐसे सवालों का का जवाब अब कोई आम आदमी न ही दे तो अच्छा है , आज के दौर में जब कभी महिलाओं कि पोसाक कि बात होती है ,बहुत से आक्रोशों का सामना करना परता है , फिर ऐसी स्थिति में कोई क्या जवाब दे ?

suman के द्वारा
December 17, 2013

hamare desh ka kanoon sahi nahi hain jab bardaat ho jati hain police tabhi aati hain esliye es desh ki ladkiya kaise surakshit reh sakti hati hamare desh may bahut he kada kanoon hone chaiye taki jo bhi koi yesi harkat kare phoran use fassi de deni chaiye.

AMIT KUMAR MITTAL के द्वारा
December 17, 2013

सिर्फ महिला शोषण मैं ही नहीं पुलिस और कानून का रवैया तो हर मामले मैं लचर है. हमारे देश की कानून व्यवस्था मैं इतने छेद हैं कि छोटे मोटे अपराधी तो दूर की बात बड़े बड़े सूरमा शातिर भी बच निकलते हैं और उदाहरण पेश करते हैं कि खूब बदमाशियां करो कोई नहीं पकड़ेगा. और अगर पकड़ लिया तो लचर और पंक्चर व्यवस्था मैं बच निकलोगे. एक शब्द मैं कहें तो अंधेर नगरी चौपट राजा. दिल्ली गैंग रेप के बाद मीडिया, समाज जरूर जागरूक हुआ है. इस तरह के मामले तो पहले भी बहुत थे लेकिन मीडिया की जागरूकता ने इन मामलों को समाज के सामने ला खड़ा किया है और इसी कारण से यौन अपराध बढे नहीं बल्कि अब जनता के सामने आ रहे हैं. मीडिया की क्रांति से महिलाये निडर हुई हैं और समाज के सामने अपने ऊपर हुए शोषण को बयां करने की हिम्मत जुटा रहीं हैं.मीडिया अपना काम बखूबी कर रही है बस प्रशाशन और क़ानून व्यवस्था के जागने का इंतज़ार है. महिलाओं के प्रति नजरिया कोई एक दिन मैं नहीं बदल सकता. हमारे समय मैं मोबाइल, इंटरनेट, टेलीविज़न पर नकारात्मकता हावी नहीं थी. वीर लक्ष्मी बाई और अहिल्या बाई के किस्से सुना करते थे आज जलेबी बाई के चर्चे हैं पहले अहिल्या बाई के गीत गाये जाते थे आज ये संचार माध्यम हसीनाओं के पोस्टर फेविकोल से चिपका रहे हैं. छोटे छोटे बच्चे मोबाइल पर इंटरनेट लगाकर अश्लीलता का रसपान कर रहे हैं. तो नारी एक वास्तु बन गयी है. ज़रुरत हैं इन संचार माध्यमों के सदुपयोग की. नारी की जननी वाली इमेज वापस लानी होगी समाज मैं धीरे धीरे अश्लीलता जो घुस रही है उसे रोकना पड़ेगा. बच्चो को मोबाइल की जगह अच्छा साहित्य देना होगा. क्यूंकि नारी के अस्तित्व पर खतरा है और चूँकि नारी ही समाज का निर्माण करती है पूरा समाज बर्बादी के चौखट पर खड़ा है. संक्षेप मैं – कानून व्यवस्था को सुचारु करना चाहिए, बच्चो को अश्लीलता देखने से रोकना चाहिए और उन्हें नारी का सम्मान सिखाना चाहिए बाकी मीडिया तो समाज का आइना है वो अपना काम कर ही रहा है.

    jlsingh के द्वारा
    December 18, 2013

    बहुत हद तक आप के विचारों से सहमत हूँ, पर समय को पीछे नहीं किया जा सकता. मोबाइल इनरनेट से बच्चों को दूर रखने के बजाय उनपर निगरानी की आवश्यकता है, मीडिया को भी भोंड़े, अश्लील सामग्री प्रस्तुत करने से बचाना चाहिए साथ ही, सजा का प्रावधान तुरंत होना चाहिए…. एक साल बाद भी त्वरित अदालत सिर्फ सजा सुनकर रह जाती है …आगे अपील की गुंजाईश और सजा में देरी से सुधार कैसे होगा? न्यायपालिका अभी भी सुस्त रफ़्तार से चल रही है, पुलिश कर्मियों की भी लीपापोती कभी कभी अपराध को बढ़ने में मदद ही करती है. परिवर्तन आया है और अब बड़े लोग भी इसके चंगुल में आने लगे हैं, महिलाएं, पीड़िताएं अवश्य आगे बढ़कर अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने लगी है!

    jitendra tiwari के द्वारा
    December 21, 2013

    mai apke vichar se sent persent sahamt hun.jab tak aslilta ke pradarsan per rok nahi lag jata nari duskarm per rok ka prayas adhura hoga.

    jitendra tiwari b.k.d jhansi के द्वारा
    December 21, 2013

    jab tak aslilta ke pradarsan per rok nahi lag jata nari duskarm per rok ka prayas adhura hoga.


topic of the week



latest from jagran