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क्या भारत रत्न के लिए नए सिरे से मानक तय किए जाने की जरूरत है?

Posted On: 18 Nov, 2013 Junction Forum में

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सचिन के क्रिकेट से सन्यास लेने के अवसर पर भारत सरकार द्वारा उन्हें ‘भारत रत्न’ उपाधि से सम्मानित करने का फैसला एक ओर उनके प्रशंसकों द्वारा स्वागत योग्य माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर यह फैसला एक राजनीतिक विवाद का रूप लेता नजर आ रहा है। भारत में जहां क्रिकेट राष्ट्रीय खेल न होकर भी लोकप्रियता के चरम पर है और सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के भगवान माने जाते हैं, अवश्य ही उनके प्रशंसकों को विदाई के रूप में सचिन तेंदुलकर को मिले इस राजकीय सम्मान के तमाम पहलुओं की समीक्षा करने में कोई रुचि नहीं होगी। लता मंगेशकर समेत कई बड़ी हस्तियों ने भी सचिन को ‘भारत रत्न’ सम्मान दिए जाने का यह सही वक्त बताते हुए कांग्रेस सरकार के फैसले का स्वागत किया है। वस्तुत: भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी को यह सम्मान न दिए जाने का मुद्दा उठाकर ‘भारत रत्न’ जैसे सम्मान पर परोक्ष रूप से कांग्रेस सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।


इस मसले पर बुद्धिजीवियों के एक वर्ग का कहना है कि भाजपा के इन आरोपों की तार्किक विवेचना करें तो बहुत हद तक इससे सहमति मालूम पड़ती है। भारत रत्न एक ऐसी उपाधि है जो किसी व्यक्ति द्वारा किसी क्षेत्र के विकास में उसके विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। राजनीतिक व्यक्तियों में अब तक जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी समेत यह राजीव गांधी तक को दिया जा चुका है। गैर-राजनीतिक व्यक्तियों में भी भीमसेन जोशी से लेकर विस्मिल्लाह खान और अब उम्र के आधे पड़ाव में सचिन तेंदुलकर तक को मिल चुका है। किंतु अटल बिहारी वाजपेयी जिन्होंने भारतीय राजनीति में लंबे समय तक रहते हुए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान बनाने में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया, उन्हें आज तक इस उपाधि से वंचित रखा गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इंदिरा गांधी जिनसे 1975 का विवादास्पद आपातकाल और उसके साथ भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को खतरे में डालने का आरोप जुड़ा है, राजीव गांधी जिनसे बोफोर्स का विवाद जुड़ा है, तक को भारत रत्न मिल चुका है लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी जिन्होंने भारतीय राजनीति में सक्रिय रहते हुए कई मामलों में भारत को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई उन्हें इस सम्मान के लायक नहीं समझा गया। क्यों? ऐसे ही देश के और भी कई नायक रहे हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को नाम और शोहरत दिलवाया किंतु उनको भारत रत्न से आज तक महरूम रखा गया है।


वहीं दूसरी ओर कई ऐसे लोग हैं जो सचिन को ‘भारत रत्न’ दिए जाने का पुरजोर स्वागत कर रह हैं। इनका कहना है कि सचिन ने बहुत शीघ्र भारत सहित पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। सचिन का योगदान अतुलनीय है और पूरा देश उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग कर रहा था। ऐसे में यदि उन्हें तत्काल यह सम्मान नहीं प्रदान किया जाता तो यह सरासर देश की जनता का अपमान होता।


उपरोक्त बहस के बिंदुओं को देखते कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं जिन पर स्वस्थ विमर्श होना ही चाहिए:

  1. क्या राष्ट्रहित में सचिन तेंदुलकर का योगदान अटल बिहारी वाजपेयी से अधिक है कि उन्हें भारत रत्न से नवाजा गया (और वह भी इतनी जल्दी) और अटल बिहारी को नहीं?
  2. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री समेत राजीव गांधी तक लगभग सभी लोकप्रिय कांग्रेस नेताओं को भारत रत्न दिया गया है। यहां तक कि इंदिरा गांधी की ‘आपातकाल की स्थिति’ को भी भुला दिया गया लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों को इस लायक नहीं समझा गया। क्या यह कांग्रेस की गांधी परिवार भक्ति और राजनीति का हिस्सा है?
  3. क्या सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने का यह सही समय था? जबकि उनकी हर उपलब्धि उनके रियर को आगे बढ़ाने में सहायक था और देशहित या क्रिकेट के खेल के लिए कुछ सुधारात्मक करने की दिशा में उन्होंने कुछ नहीं किया है? क्या यह सचिन की वर्तमान लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय भावनाओं का लाभ लेने के लिए कांग्रेस द्वारा उठाया गया एक चुनावी कदम है? और अगर है, तो क्या सत्ता में रहते हुए राजकीय सम्मानों का फायदा इस तरह चुनावी लाभ के लिए उठाया जाना सही है?
  4. भारत रत्न केवल एक सम्मान नहीं, मिलने वाले के लिए उसकी जीवन भर की उपलब्धि होती है। क्रिकेट से सन्यास लेने के साथ ही सचिन को यह सम्मान देना क्या इस सम्मान को दिए जाने के लिए नए मानक तय किए जाने के संकेत दे रहा है? क्या भारत रत्न दिए जाने के लिए एक नया प्रारूप बनाए जाने की जरूरत है?

जागरण जंक्शन इस बार के फोरम मेंअपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या भारत रत्न के लिए नए सिरे से मानक तय किए जाने की जरूरत है?

आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “भारत रत्न” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व भारत रत्न – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
November 26, 2013

पुरस्कार कभी भी उसे प्राप्त करने वाले से बड़े नहीं हो सकते। विचार करें तो हम पाएंगे कि पुरस्कार व्यक्ति के व्यक्तित्व की विराटता को समाप्त कर देता है. उसे सीमा में बाँध देता है. इसको पाने का मतलब है “THE END” अर्थात तुम्हारी हैसियत यहीं तक थी. आखिर एक तमगा पूरे व्यक्तित्व का मूल्यांकन कैसे कर सकता है. जब तक किसी को पुरस्कार मिलता है उससे पहले ही वह समाज को इतना कुछ दे चुका होता है कि इनाम उसके कार्यों के आगे छोटे पड़ जाते हैं. लोग किसी कार्य को दो अलग अलग मंशा रखकर करते हैं. एक तो वह जिसने अपना कार्य ‘पैसा, ऐशो आराम’ हासिल करने के लिए किया, और किया भी दूसरा जिसका लक्ष्य चुपचाप समाज को अपना सर्वश्रेष्ट देना था. मेरी दृष्टि में पुरस्कार केवल बच्चों को ही दिए जाने चाहियें . क्योंकि यह उनके सर्वांगीण विकास की निरंतरता को गति प्रदान करते हैं और उनमे आत्मविश्वास जगाते हैं. लेकिन परिपक्व मनुष्य का पुरस्कार के पीछे भागना उनकी मानसिक अपरिपक्वता को दर्शाता है। ख़ास कर तब जब वह इसे प्राप्त करके अपनी मौलिक आज़ादी गिरवी रख दे. पुरस्कार प्राप्त करने वाला गन्दी राजनीती में फंसकर उस तत्कालीन सत्ता का पिट्ठू कहलाता है. जिसके शासन काल में उसने पुरस्कार प्राप्त किया हो. बदले में उसे उम्र भर सरकार का गुणगान करना होगा। ऐसे में पुरस्कारों की क्या मर्यादा रह गयी. बुद्धिजीविओं को इस पर विचार करना होगा। जय हिन्द . !

sumit के द्वारा
November 23, 2013

भारत रत्न के नए मानदंड तय किये गए है लकिन अगर यही मानदंड है तो फिर धयानचन्द का नाम पहले होना चाहिए था….

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 22, 2013

Major Dhyanchand: Bharat Ratna Awarded,Sachin Tendulkar,Retirement – Discussion Forum | कलम-पथ Link: http://yatindranathchaturvedi.jagranjunction.com/?p=649004

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 22, 2013

आत्ममंथन-भारतरत्‍न “Jagran Junction Forum” | कलम-पथ Link: http://yatindranathchaturvedi.jagranjunction.com/?p=651123

jaibhagwansinghkadyan के द्वारा
November 22, 2013

भारत रत्न के लिए मानक तय किए जाने की जरूरत नही हे बल्कि इस की चुनाव प्रतिकिर्या को ठीक करने की अहम जरूरत नजर आ रही हे कयोकि इस में सुफारिसो का चलन हे जो गलत हे अब तक की भेजी गई सुफारिसो को देखा जाये तो ये अपने निकट सम्बन्धियो लाभ दिलवाने के लिए या वावाही पाने के लिए ही भेजी गई नजर आती हे और आज तक का इसे पाने वाले लोगो का रिकार्ड तो यही दर्साता हे / अगर इस का चुनाव भी जनता की सहमति से करवाया जाये तो कभी भी इस कि गरिमा को आंच नहीं आयेगी और योग्य वयक्ति को ही मिलेगा /

nagesh khare के द्वारा
November 21, 2013

हाँ, मानक तय किये जाने की सख्त आवश्यकता है लेकिन एक बात अकाट्य है कि मानक कोई भी हों सचिन सबमें पात्र ही पाये जायेंगे | भारत रत्न तय करने के लिए सरकार को एक कमेटी बनाना चाहिए जिसमे सत्तासीन दल का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए उक्त कमेटी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से वरिष्ठतम लोगों को लिया जाना चाहिए मसलन खेल, शिक्षा, समाज सेवा, न्याय व्यवस्था, स्वास्थ…. आदि | सचिन के नाम पर हो-हल्ला मचाने वाले शायद जल्दबाज़ी कर रहे हैं क्योंकि सचिन किसी क्लब के नहीं देश का प्रतिनिधित्व करते रहे और उनकी उपलब्धियों ने भारत की रैंकिंग को हमेशा बेहतर किया है | भारत को क्रिकेट में सर्वोच्च स्थान दिलाने में सचिन का योगदान अतुल्यनीय है |

Bkkhandelwal के द्वारा
November 20, 2013

Bharat ratan ka desh meie mazq bann gaya idko plata jaana chhiye ,kyuki vastav meienjo idhari hai udko hi milna chhiye aur iski mahnata per koi kichhad nahimuchhalmsakye ,baratbratan jisko milye uskye karyon ki ulkeykna public jaankaari li jaye yaan sahmati ,kisi bhi asiye person ko nahi ekmhi oarty ne socha deydiya jabbuski ischs chhaye vapas manglye yah bhi nahimhkna chhiye ,aajmkal to bharat ratan jisko milna chhaiye govt.kyun nahi dey rahi kya dhayan chandji desh je nahi kya woh hockye ke khel ke ander usko naam dilanyevwalye nshi punjab dharti per hockey ko manyta mili hui haimphir bharat ratan unko bhi milna chhiaye aur jisko bharat ratan milye udkomrsjniti se durrahna chhiye bharat ratan ka samman hoga ..bharat ratan desh ke uss vsykti ko milye jo desh ke liye har samay desh hit ki baat karye….

Krishna Kant Shrivastava के द्वारा
November 20, 2013

I do agree ,that it was not the right time to award BR to Sachin,Congress has played a game,when the State elections are going on, also the National Elections r in pipeline,the UPA declare such award , to get the sympathy and support of national players and also of Maraties.It was always the technique of Congress ,”DEVIED n RULE”. Otherwise there r so many to whom BHARAT RATAN not yet awarded.

Aam Aadmi के द्वारा
November 20, 2013

सचिन ने तो ये भी नहीं कहा कि अब शेष जीवन वे समाज, खेल आदि से जुड़े कार्यों के लिए अपना अधिकतम समय देंगें. और तो और उन्होंने अपनी राज्य सभा कि सदयस्ता से सम्बंधित सेवाओं का जिक्र तक नहीं किया/

Aam Aadmi के द्वारा
November 20, 2013

भारत रत्न उसे मिले जिसने अपनी सेवाओं को देश की जनता से कुछ भी प्राप्त करने की न ही इच्छा रखी हो न ही उन सेवाओं को धन क अम्बार लगाने का साधन बनाया हो. जैसे विनोबा भावे, जयप्रकश नारायण, अन्ना हज़ारे आदि.

skgupta के द्वारा
November 20, 2013

भारत रत्न  देने के लिए निश्चित रूप से पुनः मानको का निर्धारण किया जाना बेहद जरुरी है.किसी भी देश के सर्वोच्य नागरिक सम्मान को देते समय पूर्वाग्रह रहित होना जरुरी है जो शायद नहीं होता है.जब राजीव गाँधी को भारत रत्न मिल सकता है तो मेजर ध्यान चन्द्र एवं अटल बिहारी बाजपाई जी तो वास्तव में सच्चे हकदार है.देश के सर्वोच्य नागरिक सम्मान को राजनीती से नहीं जोड़ना चाहिए जो मुमकिन नहीं दिख रहा है.सचिन को भारत रत्न के लिए बधाई.

Manisha Sharma के द्वारा
November 20, 2013

सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने पर हार्दिक बधाई , हाँ कांग्रेस गवर्नमेंट ने भारत रत्न को केवल कांग्रेस सेवादार के लिए ही उपयोग किया है तभी उनके हर निर्णय पर उगंली उठती है , कांग्रेस गवर्नमेंट ने हमेशा केवल उन्ही को दिया जो कांग्रेस बिचार धारा के हो , चाहे अन्यो ने अपना जीवन देख पर कुर्वान कर दिया हो उन्हें नहीं दिया इसलिए एस पुरस्कार को देने नए मापदंड होने चाहिए ! धन्यवाद्

विनीत लोहार के द्वारा
November 20, 2013

आज के समय और सरकार के निर्णयों को देखते हुए यह कहने में कोइ गलती नहीं होगी की वर्तमान में कांग्रेस पार्टी गांधी परिवार की निजि संस्था बन कर रह गई है जहां लोकतांतरिकता नजर नहीं आती वही निर्णय लिए जाते हैं जो गांधी परिवार लेना चाहता है निश्चित तौर पर यह कहना गलत नही हो गा कि चुनावी मुददों और खेल प्रेमियों के वोटों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है यह वेशक सत्य है कि सचिन ने अपने खेल व रिकार्ड का परचम लहराकर देश का नाम क्रिकेट जगत में शीष पर पहुंचा दिया है पर अटल बिहारी बाजपेयी जी द्वारा निर्विवाद देश के लिए दिए गये योगदान का भी अमिट स्थान हैं और वर्तमान में देखा जाए केन्द्र सरकार ने भारत रत्न के मानक ही बदल दिए हैं

SATISH KUMAR SINGH के द्वारा
November 20, 2013

सचिन देश कि शान, किय़ा भारत को महान इसलिए वोहै भारत रतन का हकदार

sharad के द्वारा
November 19, 2013

जागरण द्वारा एक बेहद ज्वलंत मुद्दा उठाने के लिए बधाईया !! सबसे पहली बात कि हैम भारत-रत्न पर बात कर रहे हे सचिन पर नहीं इसलिए जज्बाती पाठक मित्रो से विशेष अनुरोध हे कि पहले मामले कि गम्भीरता को समझ कर अपने विचार रखे १-सचिन और अटल जी कि तुलना बे-बुनियाद हे क्योकि दोनों के कार्यक्षेत्र अलग-२ हे …हा, सचिन को भारत-रत्न देने से पहले निर्णायक मंडल को यह अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए कि खेल-जगत में देश का सम्मान सचिन से कही जयादा रौशन करने वाला कोई खिलाड़ी छूट तो नहीं गया हे और फिलहाल ऐसा लगता हे कि दो खिलाड़ियो का भारत-रत्न पर सचिन से कही जयादा मजबूत दावा बनता हे …१-मेजर धयान चाँद जो देश को एक नहीं बल्कि ३ बार ओल्य्म्पिक का गोल्ड दिलवाने के साथ-२ अपने समय के “बेस्ट” थे , !याद करने की कोशिश कीजिए की ध्यान चाँद साहब कितनी बार विफल हुए थे…ढूंढते रह jaaoge) ….२- दूसरे नंबर पर ५ बार के शतरंज विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद साहब आते है जिन्होने अपने दम पर पूरी दुनिया मे भारत का नाम रोशन किया और १४० देशो द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर खेले जाने वाले शतरंज में ये आज उन्ही के कीर्तिमानो का जलवा है की उनसे प्रेरणा पाकर आज देश मे कई सारे ग्रांड मास्टर तैयार हो चुके हे और भारत आज शतरंज कि बेहद मजबूत ताकत बन चूका he !! २-यहाँ अटल जी कि सही तुलना हुई हे और किसी भी एंगल से चेक कर लीजिये उनका भारत-रत्न का दावा बेहद मजबूत हे और उनको दिया भी जाना चाहिए ३-सचिन को भारत-रत्न देने का इससे बेहतर समय कोई हो ही नहीं सकता (लोहा गरम हे, मार दो हथौड़ा….आभार : ठाकुर बलदेव सिंह शोले वाले) मगर ध्यान रहे उनके साथ-२ इस लिस्ट में मेजर धयान चाँद और आनंद को भी अवश्य मिलना चाहिए अन्यथा ये उनके साथ साफ़-2 अन्याय होगा ४-भारत-रत्न कि अब पांच केटेगरी हो चुकी हे (खेल, आर्ट, साइंस, साहित्य और पब्लिक सर्विस) और अब वक़्त आ गया हे कि इस अवार्ड के मानक स्पष्ट रूप से तय हो और केटेगरी विशेष के विशेषज्ञ ही अपनी केटेगरी का भारत-रत्न चुने …खेल का भारत रत्न चुनते समय फ़िल्मी सितारो को दूर रखे, साहित्य का खेल रत्न चुनते समय खिलाड़ियो को दूर रखे और यदि देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान कि गरिमा बनाये रखनी हे तो नेताओ को भारत-रत्न कि सभी केटेगरी से दूर रखे ….धन्यवाद

deepakbijnory के द्वारा
November 18, 2013

सर्वप्रथम तो यह प्रश्न विचारणीय है कि आखिर सचिन को भारत रत्न क्यों क्या उसने समाज सेवा में कोई उत्कृष्ठ योगदान दिया है या फिर कला के क्षेत्र में कुछ उनका योगदान है या फिर विज्ञानं के क्षेत्र में उन्होंने कुछ नया कर दिखाया है या राजनीती के मैदान में उन्होंने अनवरत देश कि सेवा में अपना समय बिताया है शायद इनमे से कुछ भी नहीं तो किस बात के लिए ये देश का सर्वोच्च सम्मान उन्हें दिया गया है उन्हें शायद ये सम्मान क्रिकेट खेलने कि वजह से मिला है वह खेल जिसे पूरे विश्व में महज पंद्रह या बीस देश खेलते होंगे क्या खेलो में जहाँ देश ओलिंपिक में कुछ ही पदक पता है उस क्षेत्र में उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है वह खेल JO कि मात्र कुछ ही देशो में खेला जाता हो उसमे भी पैसे कि खातिर खेलना तो एक नौकरी से ज्यादा कुछ नहीं यदि यह सम्मान खेल के लिए ही दिया गया है तो शायद पहला हक़ मेजर ध्यानचंद को जाता है जिन्होंने देश को कई बार स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम विश्व के इतिहास में रोशन किया या फिर अभिनव बिंद्रा क्यों नहीं जिसने अपने खर्चे से ट्रैनिंग पाकर देश को पहली बार एकल रूप में स्वर्ण पदक दिलाकर भारत का नाम रोशन किया या फिर विश्व में प्रथम रहकर विश्व में भारत का विजई पताका लहराने वाले पुल्लेला गोपीचंद ,साइना नेहवाल ,विश्वनाथन आनंद ,मिल्खा सिंह ,सान्या मिर्ज़ा ,मेरीकॉम ,गीत सेठी ,क्यों नहीं क्या मात्र इस बात पर कि क्रिकेट का खेल अन्य खेलों में ज्यादा लोकप्रिय है या सचिन इस दौरान देश में ज्यादा लोकप्रिय रहे मीडिया के इस ज़माने में लोकप्रियता का कोई मापदंड नहीं है मीडिया एक सपने देखने वाले बाबा तक को लोकप्रिय बनाकर सर्कार को खुदाई करने पर मजबूर कर सकता है अगर भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान महज लोकप्रियता के आधार पर दिए जाने लगेंगे तो एक समय इसी मीडिया ने अन्ना हजारे को लोकप्रिय बना दिया था या आजकल सबसे लोकप्रिय मोदी चल रहे हैं और हर रोज मीडिया कि सुर्ख़ियों में हैं अब सवाल यह उठता है कि भारत रत्न के मापदंड फिर से तय किये जांय या नहीं ? बनाने को देश का संविधान भी बुद्धिजीवियों द्वारा बनाया गया था परन्तु तब किसी ने ये सोचा था कि इसी संविधान पर चलकर अपराधी भी देश के नेता बनकर देश को चलाएंगे जब देश का संविधान बना था तो कहा गया था कि यह सभ्य लोगों द्वारा सभ्य लोगो के लिए बनाया गया है परन्तु आज जब जाती ,धर्म कि राजनीती में फंसे लोग सभ्य ही नहीं रहे तो संविधान के मानकों का क्या औचित्य इसी प्रकार भारत रत्न के मानक कितने भी बदल लिए जांय यदि उसका पालन करने वालों कि नीयत में खोट होगा तो इसका कोई फायदा नहीं होगा भारत रत्न के नाम तय करने वालों को स्वार्थ कि राजनीती से ऊपर इतना होगा वर्ना भारत रत्न अपनी महत्ता ही खो देगा भारत रत्न कि महत्ता का बेमिसाल उदहारण तो तब होता जब गैर कांग्रेस पार्टी के राज में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी , भारत रत्न हेतु मनोनीत होते तथा कांग्रेस के राज में अटल बिहारी बाजपेयी मनोनीत होते तो शायद इस इनाम कि गरिमा और बड़ जाती यदि इसी प्रकार भारत रत्न बांटे जाते रहे और इस पर मीडिया कि सस्ती लोकप्रियता ,स्वार्थ कि राजनीती ,हावी होती रही तो वह दिन दूर नहीं कि इस सम्मान का ही कोई सम्मान नहीं रह जायेगा मानक तय करने वालो पर कुछ निर्भर नहीं करता वरन मानक का पालन करने वालो में की नीयत पर निर्भर करता है अहीर में बात वहीँ पर आ जाती है कि समाज को बदलना होगा और समाज कोई एक नेता नहीं बदलेगा ये समाज हमी को बदलना होगा हमें स्वयं को बदलना होगा ताकि वो सभ्य लोगो द्वारा बनाया गया संविधान का पालन करने वाले भी हमारे ही समाज के सभ्य लोग हो देश और समाज की खातिर सब कुछ समर्पित करने वालों को किसी भारत रत्न की दरक़ार नहीं होती वो खुद ही जनता के दिलो में बसा करते हैं


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