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क्या बिहार की राजनीति से राजद का पत्ता साफ हो जाएगा?

Posted On: 30 Sep, 2013 Others,Politics में

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17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सीबीआई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए चारा घोटाले से जुड़े मामले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र समेत 45 दोषियों में से 38 को जेल भेज दिया है। हालांकि अभी सजा का ऐलान तो नहीं किया गया है लेकिन इस फैसले के बाद लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक कॅरियर पर ग्रहण लगना तो तय है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में 3 वर्ष से 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है और सजा मिलने के बाद लालू प्रसाद यादव अगले 6 वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।



लालू प्रसाद यादव का पूरा राजनीतिक कॅरियर दांव पर लगने के बाद अब उनकी पार्टी की डूबती नैया पर सभी अपनी नजरें गड़ाए बैठे हैं। पिछले काफी समय से लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल की लगाम अपने हाथ में ले रखी है लेकिन अब जब उनके ही जेल जाने के दिन नजदीक आ गए हैं तो ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि लंबे समय तक यूपीए की साथी रही और वर्तमान में 4 सीटों के साथ यूपीए को बाहर से समर्थन देने वाली पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को क्या अब कांग्रेस का समर्थन मिल पाएगा? इसके साथ ही यह भी एक बड़ा प्रश्न है कि अब लालू के राजनैतिक कॅरियर का क्या होगा?



बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा है जो यह मान रहा है कि राजद और लालू प्रसाद यादव के दिन लद गए हैं और यूपीए की नजरें अब बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार पर हैं। नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर एनडीए से अलग होने वाले नीतीश कुमार बिहार में अपना कद लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि बिहार की जनता को वह काफी पसंद भी आ रहे हैं और वैसे भी लालू प्रसाद यादव के राजनैतिक कॅरियर की नियति पर विश्वास भी नहीं किया जा सकता। कहते हैं ना उगते हुए सूरज को सभी सलाम करते हैं और इसी अवधारणा के तहत अब यूपीए की कोशिश नीतीश कुमार को अपने पाले में करने की रहेगी।



वहीं दूसरी ओर वे लोग हैं जिनका यह कहना है कि कांग्रेस कभी अपने वफादारों को अकेला नहीं छोड़ती। कांग्रेस की यह खासियत रही है कि वह अपने साथियों को कभी मुश्किल में अकेला नहीं छोड़ती इसीलिए लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में निश्चित रूप से कांग्रेस राजद को मझधार में नहीं छोड़ेगी। वर्ष 2009 तक राजद यूपीए का हिस्सा रही है और अब गठबंधन को बाहर से समर्थन दे रही है। अगर लालू प्रसाद पर कुछ कड़े प्रतिबंध लगते हैं तो निश्चित रूप से कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल का साथ नहीं छोड़ेगी और राजद की डूबती नैया को पार लगा देगी।


उपरोक्त मसले और हालिया समीकणों से जुड़े उपरोक्त पक्षों पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हैं, जैसे:


1. क्या लालू के बिना राजद को संभलने का मौका मिल पाएगा?


2. चारा घोटाले में सजा मिलने के बाद क्या वाकई बिहार की राजनीति से राजद का पत्ता साफ हो जाएगा?


3. नीतीश की बयार से प्रभावित यूपीए क्या राजद को संभालने में दिलचस्पी लेगी?


4. यूपीए गठबंधन का पुराना साथी होने का क्या राष्ट्रीय जनता दल को फायदा मिलेगा?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या बिहार की राजनीति से राजद का पत्ता साफ हो जाएगा?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “राजद की नैया” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व राजद की नैया – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें।



2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।



धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

neerusriv के द्वारा
October 4, 2013

सवाल एक लालू का नहीं,भ्रस्टाचार के खिलाफ फैसले का है.जिसके लिए सीबीआई की विशेष अदालत बधाई का हकदार है.जनता को ख़ुशी है की जितने भी भ्रष्ट नेता हैं भविष्य में भ्रष्टाचार की राजनीति करने से डरेंगे. भ्रस्ताचारियों को दोबारा कभी भी सत्ता में आने का अवसर नहीं देना चाहिए .ऐसा करके,जनता कभी भी अपने पैरों में कुल्हाड़ी मरना नहीं चाहेगी .

Mudassar Imam के द्वारा
October 1, 2013

मेरे दोस्तों ये भारत है यहाँ एक से एक गुनाहगार आराम की ज़िन्दगी गुजार रहे हैं और सबसे बड़ी बात है के किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता आर जे डी के बाकी लोग अगर इस से सबक ले लेंगे तो जनता ज़रूर पार्टी की मदद करेगी इस पार्टी में सब वैसे ही नहीं हैं मगर एक बात है के अगर सब लोग वैसे ही हो जाएँ तो मुश्किल है वैसे हर पार्टी का कोई न कोई उमीदवार दागी है और शान से जी रहा है कौन सी पार्टी इस दाग से बची है हो सकता है के दूसरा आदमी इस पार्टी को एक अलग शकल दे दे मगर ये पार्टी सम्पर्दायिक नहीं है ये सभी जानते हैं अगर मुखिया की बात है तो जैसा लालू ने किया वैसा पा लिया ज़रूरी नहीं है के सब के सब एक ही जैसे हैं असल चीज़ है के आर जे डी किसी दो समुदाय का खून नहीं करवाती है नफरत नहीं फैलाती है वैसे मैं सिर्फ व्यक्ति को देखता हूँ पार्टी ज़रूरी नहीं के सब एक ही जैसे हों . इस लिए जो जैसा करेगा वैसा भरेगा इतना तय है के राबड़ी देवी इस पार्टी को नहीं चला सकती हैं अगर कोई दूसरा सुलझा हुआ बागडोर संभाले तो मुमकिन है लालू यादव के परिवार में ऐसा कोई नहीं है ये बात सही है .

Lavanya Vilochan के द्वारा
October 1, 2013

नहीं पत्ता साफ तो नहीं होगा पर अब बिहार की जनता इनके दल को कभी वापस सत्ता में नहीं देखना चाहेगी..

mittal707 के द्वारा
September 30, 2013

लालू यादव देश के अग्रणी नेताओं में एक हैं जिन्हें देश में घोटालों के जन्मदाता के रूप में जाना जाता हैं|सीबीआई का कहना है कि ये सामान्य आर्थिक भ्रष्टाचार का ही नहीं बल्कि व्यापक षड्यंत्र का मामला है जिसमें राज्य के कर्मचारी, नेता और व्यापारी वर्ग समान रूप से भागीदार है. लालू यादव को चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है। यह मामला 1996 में चाईबासा के सरकारी खज़ाने से 37 करोड़ 70 लाख रुपये से भी ज़्यादा की लूट का है। तब बिना चारा सप्लाई के पैसों का भुगतान कर दिया गया था। पिछले 17 साल से यह मामला चल रहा था। इस मामले में सजा का ऐलान 3 अक्टूबर को होगा। इस मामले में आरोपी सभी 45 लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। सात लोगों को तीन साल तक की सजा सुना दी गई। अदालत को सजा के साथ-साथ लूट के पैसे को बरामद करने की व्यवस्था करनी चाहिए।इस लूट के पैसे पर ब्याज लगाया जाये तो आज यह पैसा कई सौ करोड़ बन जाता है। भ्रष्ट नेता ऐसे लूट के पैसे से ही भ्रष्टाचार की राजनीती चला रहे हैं। आर एम मित्तल मोहाली

sonika के द्वारा
September 30, 2013

लालू यादव का ये मुकदमा तथा भारत की राजनीती की ये हलचल भारत के लिए एक शुभ संकेत है यह पहल इस तरफ इशारा कर रही की शिक्षा तथा media भ्रष्टाचार पर रॊक लगाने मे प्रमुख भूमिका अदा कर रहे है आज कितना ही बड़ा संतरी क्यों न हो सबको कटघरे मे खड़ा होना पड़ेगा इसी का परिणाम था राहुल गाँधी का पत्रकारों से रूबरू होना और अध्यादेश के खिलाफ जाना | अब रहा राजद का सवाल जहा तक मेरा मत है लालू की पत्नी या बेटा राजद के अस्तित्व को एक नयी दिशा जरुर प्रदान करेंगे ये बात और है नितीश जी की साख और सामाजिक पकड़ मार्ग मे उन्हें विचलित कर सकती है ये बात हकीकत है की कुछ अन्तराल अब लालू जी को सँभालने मे लगेगा परन्तु राजनीती से लालू जी का अस्तित्व ख़त्म hoga असे नहीं हो सकता क्युकी वो एक जमीनी नेता है उनका अंदाज आज तक किसी भी राजनीतिग्य का नहीं हो सका हा कांग्रेस सामने से तो नहीं अपितु जहा तक हो सकेगा अपने को बचाती हुई पीछे से उनका साथ नहीं छोड़ेगी क्युकी इसका जीता जगता नमूना है की इस मुकदमे मे इतनी प्रगति जा कर १७ सालो मे हुई और आगे देखिएगा इसकी चल कछुआ होगी या —– ये राजनीति भारत की है और ये है भारत के नेता —

deepakbijnory के द्वारा
September 30, 2013

सर्वप्रथम तो पूरे देश को बधाई देना चाहूँगा की भ्रष्टाचार के कफ़न में यह फैसला एक कील के रूप में साबित हुआ है शत शत नमन उन वकीलों को ,जिन्होंने ये केस को सही अंजाम तक पहुँचाया उन सी बी आई ऑफिसर्स को जिन्होंने ये जांच की तथा उन जज को जिन्होंने ये फैसला सुनाया इस केस से यह सिद्ध होता है की आज भी देश में ईमानदार ऑफिसर्स की कमी नहीं है रही बात बिहार में लालू के या आर जे दी के भविष्य की तो उसका फैसला तो जनता पिछले चुनावों में ही सुना चुकी है बिहार की जनता को कबकी लालू तथा उनकी पार्टी को राजनितिक मृत्यु के अंजाम तक पहुंचा चुकी है जिसके साथ प्रजा ही नहीं है तो कांग्रेस भी उसका साथ कब तक और क्यूँ देगी अब इस पार्टी को वापस सत्ता में लाना बिहार की जनता के लिए अपने पैर में खुद कुल्हाड़ी मारने के सामान होगा आज जब बिहार एक bar सम्रद्धि की ओर अग्रसर है तो जनता यह आत्मघाती फैसला कभी नहीं लेना चाहेगी सुनकर बड़ा अटपटा लगेगा परन्तु यह बताना लाजमी होगा की इस कारवां के मुख्या प्रणेता थे टी एन शेषन जिन्होंने इस देश को बताया की चीफ इलेक्शन कमिश्नर की शक्तियां क्या होती हैं और इन्हें किस प्रकार प्रयोग किया जाता है बिहार में लालू का किला ढहने की लिए पहली जरुरत थी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव जो की टी एन शेषन के द्वारा किये गए सुधारों से ही संभव हो सका हाँ उन्हें इतना नुक्सान जरुर हुआ की आज वो और ऑफिसर्स की तरह राज्यपाल या किसी अन्य ऊँचे पद पर आसीन नहीं हैं आज जरूरत है बिहार से सबक लेते हुए यु पी की जनता भी सबक ले और जाती की राजनीती से ऊपर उठकर कुछ राजनेताओं की राजनितिक मृत्यु को अंजाम दे तथा इस राज्य को दंगो की राजनीती से उठाकर मुख्य धारा में लाये


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