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क्या सपा के “सुशासन” पर सवालिया निशान बन रहे हैं दंगे?

Posted On: 9 Sep, 2013 Junction Forum में

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27 अगस्त, 2013 को मुजफ्फरनगर के रहने वाले शहनवाज कुरैशी और गौरव नाम के दो युवकों के बीच झगड़े की शुरुआत ने कुछ ही दिनों में दंगों का रूप ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप कई बेगुनाहों ने इस झगड़े में अपनी जान गंवा दी।


अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने से लेकर अब तक प्रदेश में कई बार हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगों के बाद गृह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 2012 में सांप्रदायिक हिंसा के 104 मामले दर्ज किए गए थे। जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने माना था कि 2012 में उत्तर प्रदेश में 27 दंगे हुए। अखिलेश यादव ने दंगों का सारा दोष उन सांप्रदायिक ताकतों के सिर मढ़ा था जो उनकी सरकार को कमजोर करना चाहती हैं। विपक्षी दल भाजपा भी अखिलेश सरकार को सीधे-सीधे दंगों के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है। यही कारण है अब यह मसला एक बहुत बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है कि सपा सरकार क्यों ऐसे दंगों को रोकने में नाकामयाब सिद्ध हो रही है?


बुद्धिजीवियों के एक वर्ग का कहना है कि यूं तो पहले भी अखिलेश यादव के पिता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर मुस्लिम परस्ती के आरोप लगते रहे हैं और अब अपने छोटे से शासनकाल में हुए 27 दंगों को ‘सिर्फ 27 दंगे’ कहकर संबोधित करना इस बात का प्रमाण है कि अखिलेश भी अपने पिता की ही राह पर चल रहे हैं। इस वर्ग में शामिल लोगों ने सपा पर यह भी आरोप लगाया है कि यह सरकार हिन्दू-मुस्लिम दंगों को रोकने की बजाय उन्हें भड़कने देती है जिससे कि एक समुदाय को ताकतवर होने का पूरा-पूरा मौका मिलता है। प्रदेश में शांति व्यवस्था स्थापित करने में पूरी तरह विफल हो चुकी सपा सरकार उसी रणनीति पर चल रही है जिस पर मुलायम सिंह काम किया करते थे। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मुस्लिम वोट ही सपा का सबसे बड़ा वोट-बैंक है और अपने वोट-बैंक को बरकरार रखने के लिए वह कोई भी हथकंडा अपना सकती है फिर चाहे कितने ही मासूमों को अपनी जान से हाथ क्यों ना गंवानी पड़े।


वहीं दूसरी ओर जो पहले पक्ष से बिल्कुल सहमति नहीं रखते, उनका कहना है कि सर्वप्रथम तो ऐसे दंगों को किसी सरकार विशेष के साथ जोड़कर देखना सरासर गलत है। जहां तक अखिलेश यादव का सवाल है तो वह अपनी जिम्मेदारियां जानते हैं और उन्हें पता है कि प्रदेश में शांति व्यवस्था स्थापित रखना उनका कर्तव्य है जिसे वह निभा भी रहे हैं। निजी झगड़ा कब दंगे का रूप ले लेगा इस बात का अंदाजा अखिलेश क्या कोई भी सरकार नहीं लगा सकती। दंगा कोई भी हो उसमें नुकसान दोनों पक्षों का होता है इसीलिए किसी भी रूप में अखिलेश सरकार या सपा पर मुस्लिम परस्ती का आरोप नहीं लगाया जा सकता।


उपरोक्त मसले के दोनों पक्षों पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है,जैसे:


1. क्या वाकई उत्तर प्रदेश की सपा सरकार राज्य में भड़कने वाले सांप्रदायिक दंगों को शांत करने की बजाय उन्हें बढ़ावा देती है?

2. यह बात जगजाहिर है कि मुलायम सिंह यादव मुस्लिम परस्त राजनेता रहे हैं, तो क्या उनके पुत्र और यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं?

3. कहीं ऐसा तो नहीं कि सपा सरकार को बदनाम करने के लिए यह विपक्ष की सोची-समझी चाल हो?

4. किसी को इस बात का अंदाजा नहीं होता कि कब कौन सा झगड़ा दंगे का रूप ले लेगा, ऐसे में सपा सरकार पर निशाना साधना कहां तक सही है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या सपा के सुशासन पर सवालिया निशान बन रहे हैं दंगे?



आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “सांप्रदायिक दंगे” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व सांप्रदायिक दंगे – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।



2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R.D.Verma के द्वारा
September 13, 2013

I am of firm opinion that no one in India now a days fights for the cause of any religion. It is only the persons having individual vested interests fight and give the name to it as communal /religious interest. People virtually hire criminals to kill some innocent persons and thereby provoke others to fight against other community persons. There are only two types of interest–1)Economic and 2) political. Every weak Chief minister makes allegation on other political party leader. The U.P. chief Minister Sri Akhilesh Yadav is only de jure chief minister and de facto chief minister is some one else. If there is no harm committed to one religious community how can you extend your helping hand? Only troubled persons need help and in return they vote for the helping leader and/ or party. The survival of Samajwadi party is now possible only if there are communal riots. Sadly a vast majority of Indian population is too poor and too illiterate to understand the game plan of political leaders.

MANTU KUMAR SATYAM के द्वारा
September 12, 2013

BLOG-Bureaucracy in INDIA in reference of HINDU religion individual castes. BY MANTU KUMAR SATYAM,Religion-Hindu,Category-O.B.C (Weaker section & minority), caste-Sundi(O.B.C weaker section & minority),Add-s/o.SHIV PRSAD MANDAL,AIRCEL MOBILE TOWER, Near jamuna jour pool, near ramjanki mandir,castair town,SARWAN-MAIN ROAD, ,DEOGHAR,DISTRICT-DEOGHAR, JHARKHAND-814112,INDIA . Occupation-One year post graduate diploma in human rights from IIHR,NEW DELHI,2nd year continue. IN INDIA HINDU RELIGION which caste have sufficient no. of lawyer and M.B.B.S/M.D/M.S ,which castes bureaucracy/officer have to give the pressure on govt or say it stop the progress of file Due to which castes face more problem have not basics facility of large no. of people like land owner ,business ,employment position,for the concerned of major file progress stop say it like politicians. For major file also flash in news and many time oppose the officers for above mention bureaucracy which HINDU castes politicians have sufficient no. of lawyer and M.B.B.S indirectly support of the problem. But problem it fight against bureaucracy reality in ground level which people have face the problem. which HINDU castes have not sufficient no of lawyer/M.B.B.S/M.D /M.S not fight on ground level against bureaucracy .Also same above mention say it for individual people file not major community group development concerned file. officers which HINDU CASTES have sufficient no. of lawyer have more resistance to fight against cases . Also give the more many type pressure backward castes people have not sufficient no . of lawyer and M.B.B.S/M.D/M.S to have not done cases against the officers,in Officers which HINDU castes have not sufficient no. of lawyer due to environment pressure of stop the progress of file which by the pressure of which HINDU castes sufficient no. of lawyer and M.B.BS/M.D/M.S. Date-11/09/2013

deepakbijnory के द्वारा
September 11, 2013

सपा की सर्कार हमेशा ही ऐसे विवादों में घिरती रही है दुर्गाशक्ति का ही उदहारण लीजिये यह कोई जाती विशेष का मुद्दा ही नहीं था फिर भी रेत माफिया को बचने की खातिर इस मुद्दे को खुद सर्कार द्वारा जातिगत मुद्दा बनाया गया इस मुद्दे के द्वारा नौकरशाही में एक सीधा सन्देश गया की एक जाती विशेष के किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई भी एक्शन आपकी नौकरी के लिए खतरा साबित हो सकता है परिणाम यह हुआ की मामला उस जाती विशेष से सम्बंधित होने पर प्रशाशन मूकदर्शक बना रहा उ प्र जलता रहा शाशन बंसी बजता रहा यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है की हर बार इस जाती का इस्तेमाल कुछ हिन्दू जाती के नेता ने अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किया तथा उस जाती को हर बार एक बर्बर जाती के रूप में प्रस्तुत किया सपा के शाशन का पुराना इतिहास देखा जय तो आंकने बताते हैं की इस पार्टी के सत्ता में आने पर अपराध का आंकड़ा बढता गया अज की राजनीती महज जाती की राजनीती बन कर रह गयी है यदि जनता इस सपा को सत्ता से हटाती है दूसरी पार्टी आयेगी फिर दंगे होंगे अराजकता फैलेगी फर्क सिर्फ इतना होगा की अबकी बार दंगो में दलित शामिल होगा प्रशाशन अपनी मूर्तियाँ लगाएगा जब तक इस देश की जनता जातिगत आधार पर वोट देना नहीं छोड़ेगी तब तक येही तांडव दोहराया jata rahega जो जनता चाँद शराब की बोतलों की खातिर ,लैपटॉप के लालच में ,जातिगत अधर पर बिकती रहेगी इस प्रदेश की स्तिथि में सुधर आना मुश्किल है जनता को यह समझना होगा सत्ता दंगो में किसी भी जाती का पक्ष ले मरता तो इंसान ही है वह भी दोनों जाती का जो जाती धर्म के अधर पर वोट मांगती है उसका सत्ता पर शाशन का कोई हक नहीं है दलित और मुसलमानों को ये समझना होगा जो ये सत्ता के ठेकेदार नहीं छाहते की इन जातियों का विकास हो या इन्हें कोई सिक्षा जैसी बुनयादी सुविधा हासिल हो क्यूंकि जिस दिन ये समाज विकसित हो गया शिक्षित हो गया इनकी सोच दंगो की मानसिकता से ऊपर उठ जाएगी और इनका tathakathit वोट बैंक समाप्त हो जायेगा दोष केवल सपा को दे देने से हम अपनी जिम्मेवारियीं से नहीं बाख सकते दोष हमारा ही था जो हमने इस पार्टी का पुराना रिकॉर्ड मालूम होने के बावजूद इसे ही चुना                    इस दंगे की भूमिका तो उसी दिन बन चुकी थी जब दुर्गाशक्ति को ससपेंड किया गया था सपा ने उसी दिन यह साबित कर दिया था की एक जाती विशेष के आगे नौकरशाही की कोई औकात नहीं है और जरुरत पड़ने पर अगर यह जाती दंगे पर उतर आये तो संपूर्ण सत्ता उसके साथ है इसी वजह से प्रशाशन कोई एक्शन लेने से कतराता रहा अब जनता के हाथ में यह फैसला है की वह कैसे सर्कार छाहती है यदि अब भी जनता नहीं जागी तो फिर आगे और दंगो , के लिए तैयार रहे या जनता के पैसे से मूर्तियों के निर्माण के लिए तत्पर रहे सपा के शाशन पर उ प्र के प्रशाशन पर दंगे एक सवालिया निशान रहेंगे इतिहास में ये सपा की पहचान रहेंगे

ishwarsinghrautela के द्वारा
September 11, 2013

This event shows how immature our leadership, they r selfic, there aim how to increase their vote bank,4 that they can distribute tablet even though that is not required but they are not in a position to maintain law & order from 1947 our achievemrnt that we have divided our society more then before freedom, we r more begger then before freedom, now we want no work but subsidised food that too of poor quality but it should be free, we want degree without education our teacher ,dharmik guru r more corrupted then before freedom our CM,PM r now employee not leader, hope fully with this we will be shortly reaching to the level when around 90% population will come under food security,our teacher will achive the standard of nursery child & our dharmik guru will act as criminal under our intelligent leader who will divide nation inti several parts so that each of their family member will rule on all of us

aryaji के द्वारा
September 10, 2013

साम्प्रदायिक दंगा ,किसी भी शासन में चाहे एक हो या अनेक उस सरकार के सुशासन और बने रहने पर सवाल खड़े करता है। इस बात का कोई अंतर नहीं पड़ता कि किस राज्य में किस दल की सरकार है। सच तो यही है की हिंशा के लिए किसी साम्प्रदायिक सवाल या कारण का होना जरुरी नहीं है। वह कही भी किसी भी मामूली बात को लेकर साम्प्रदायिक रंग में लिपट कर हमारे सामने खडा होता है । और सच यह भी है कि दिल और दिमाग में जहाँ कही श्रेष्ठता का घमंड और दूसरो के प्रति तुच्छता का भाव होगा वहां दंगे करा लेना या हो जाना सहज प्रतिक्रिया का हिस्सा है। सता किसी की भी और किसी भी विचार धारा पर आधारित होने की घोषणा करती हो ,रुल दो ही तरह से होता आया है ,एक विशवास जीतकर (जो अमूमन स्थाई नहीं रहता ) और विभाजित कर यह रास्ता अपेक्षाकृत सरल है। दंगो को लेकर आरोप- प्रत्यारोप तो राजनैतिक लाभ उठाने के लगेंगे ही ,लोकतंत्र की यही शैली है। वोट बैंक भी धर्म ,जाती ,भाषा और क्षेत्र के हिसाब से खड़े और पोषित किये जाते हैं तब इन से जुड़े सवालों को लेकर बवाल और फिर हिंषा हमें विचलित क्यों करती है ?,

MRITYUNJAY PRASAD MISHRA के द्वारा
September 9, 2013

when everything is woven around the chair, nothing is impossible. the recent riot is failure of up govt. patriotic spirit is required . Do not appease a particular class. no govt. can run on laptop n tablets. people in u.p. are crying for basic facilities n good governance.

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 9, 2013

य़ह कुर्सी धर्म है ,,यह सबसे बडा सुसासन हो चुका है ,,यहां सब धर्म पीछे रह जाते है आज के राज धर्म मैं ,,,,,,,,,,,,बस ,,,,,,,,,,,ओम…… शांति …..शांति….. शांति ,,,,,,कहते रहो बस ,,,,,

Lavanya Vilochan के द्वारा
September 9, 2013

हां शायद आप ठीक  कह रहे हैं. कि सपा के “सुशासन” पर ये दंगे सवालिया निशान बन सामने आ रहे हैं. और अगर यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब सपा को अपनी गद्दी से हाथ धोना पड़ॆ .


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