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कितना औचित्यपूर्ण है 84 कोसी परिक्रमा पर प्रतिबंध?

Posted On: 26 Aug, 2013 Junction Forum में

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विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रस्तावित 84 कोसी परिक्रमा यात्रा को उत्तर प्रदेश सरकार ने यह कहकर प्रतिबंधित कर दिया कि राम जन्मभूमि में होने वाली यात्रा सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाली है जिसकी वजह से क्षेत्र की शांति और व्यवस्था चरमरा सकती है। विभिन्न हिंदू धार्मिक संगठन समाजवादी पार्टी सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं वहीं सरकार अपने निर्णय पर अटल है। यूं तो भारत में राजनीति और धर्म साथ-साथ चलते हैं लेकिन इस बार धर्म की आड़ में राजनीति खेली जा रही है या राजनीति को धर्म के आगे कमजोर किया जा रहा है यह बात एक बड़े विवाद का विषय बन गई है।


संघ परिवार समेत अन्य कई धार्मिक संगठनों का यह कहना है कि भगवान राम की नगरी में परिक्रमा रोकने का निर्णय सरासर गलत है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने तो सरकार के इस कदम को जेहादी मानसिकता का प्रतीक तक कह दिया है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी इस यात्रा को धार्मिक और सांस्कृतिक मसला बताया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में इस तरह के हालात पैदा करना और धर्म को राजनीति का नाम देना किसी भी रूप में सही नहीं है। संत-महात्माओं का भी यही कहना है कि परिक्रमा रोकने के लिए क्षेत्र को छावनी बनाने से अच्छा था कि शांतिपूर्वक यात्रा करने दी जाती और सुरक्षा की दृष्टि से जितनी पुलिस की जरूरत थी उतनी ही तैनात की जाती।


वहीं दूसरी ओर सरकार का कहना कुछ और है। उत्तर प्रदेश सरकार और इस यात्रा के विरोध में खड़े अन्य राजनैतिक दलों का पक्ष यह है कि जो गलती वर्ष 1990 में हुई थी उसे दोहराना समझदारी नहीं है। सपा की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार ऐसा कोई भी काम नहीं करेगी जिससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़े। इस परिक्रमा का कड़ा विरोध करते हुए सपा का कहना है कि विहिप, आरएसएस और भाजपा जिस परिक्रमा के बहाने सियासी साजिश रच रही हैं, उसके होने का कोई पूर्व प्रमाण नहीं है। अगस्त-सितंबर में अयोध्या में कोई परिक्रमा नहीं होती, 1992 में भाजपा, संघ और विहिप ने ऐसे ही भाषा प्रयोग की थी, जिससे बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ। सरकार का कहना है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं और ऐसे में एक और जोखिम नहीं उठाया जा सकता। प्रदेश की सत्तासीन सरकार का यह भी कहना है कि अयोध्या को किसी भी रूप में गुजरात नहीं बनने दिया जाएगा। धार्मिक संगठनों पर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि उन्हें हमारी सामाजिक विवशताओं और परिस्थितियों के बारे में समझना चाहिए।


उपरोक्त मसले के दोनों पक्षों का आंकलन करने और उन्हें समझने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. 1. भारत में राजनीति और धर्म का चोली-दामन का साथ है, कहीं यह घटना भी उसी का एक उदाहरण तो नहीं?

2. 2. धार्मिक रीतियों का अनुसरण करना भारत में अपराध नहीं है। ऐसे में इस यात्रा को प्रतिबंधित करना कितना सही है?

3. 3. अगर सांप्रदायिक दंगों के भड़कने की आशंका के बीच इस यात्रा को रोका गया है तो इसमें गलत क्या है?

4. 4. धर्म और सांप्रदायिक दंगों से इतर क्या अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों से इस यात्रा का कोई संबंध है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:

कितना औचित्यपूर्ण है 84 कोसी परिक्रमा पर प्रतिबंध?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक यात्रा पर प्रतिबंधहै तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व यात्रा पर प्रतिबंध – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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SYED SHAHENSHAH HAIDER ABIDI के द्वारा
September 5, 2013

भादों के महीने में 84 कोसी परिक्रमा? धार्मिक कार्यक्रम अथवा वोटों की सियासत? विश्व हिन्दू परिषद द्वारा 25 अगस्त से 13 सितंबर तक प्रस्तावित 84 कोसी परिक्रमा के नाम पर प्रचारित और बाद में पद यात्रा के नाम से परिवर्तित यात्रा को प्रतिबन्धित करना हर उस सरकार का संवैधानिक दायित्व होता जो प्रदेश में धार्मिक सदभाव के लिये प्रतिबध्द है। समाजवादी सरकार ने भी ऐसा कर अपने संवैधानिक दायित्व को ही पूरा किया है। राजनितिक कारणों और वोटों की लाभ हानि की परवाह किये बग़ैर अखिलेश यादव जी का यह साहसिक निर्णय निश्चय ही प्रशंसनीय है। उन्होनें यह साबित कर दिया कि उनमें विपरीत समय में सही निर्णय लेने की क्षमता है और वे मुलायम सिंह जी के सच्चे वारिस हैं। हमारी जानकारी के अनुसार 84 कोसी परिक्रमा चैत्र शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ होकर वैशाख शुक्ल नवमी तक चलती है। आमतौर पर सावन पूर्णिमा स्नान के पश्चात बाहर के मठ मन्दिरों से आये साधु संत अपने गंतव्य स्थान पर रवाना हो जाते हैं। विश्व हिन्दू परिषद भादों के महीने में 84 कोसी परिक्रमा की नई परम्परा शुरू कर शुध्द राजनीति कर रही है और जबरन साधु संतों को अयोध्या में रोका जा रहा है। भा0 ज0 पा0 और विश्व हिन्दू परिषद साम्प्रदायिकता का ज़हर घोलकर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं। वे हिन्दू वोटों का धुव्रीकरण चाहते हैं। प्राप्त समाचारों के अनुसार अशोक सिंघल सहित विश्व हिन्दू परिषद के कई नेताओं एवं अयोध्या के कुछ संतों ने मा0 मुलायम सिंह जी और मा0 अखिलेश यादव जी से इस यात्रा के लिए पुलिस संरक्षण प्रदान करने का आग्रह किया था, प्रतिनिधि मण्डल ने स्पष्ट किया था कि इस यात्रा का उद्देश्य अयोध्या में विवादित स्थल पर मन्दिर बनाना भी है। राज्य सरकार ने उपरोक्त प्रतिनिधि मण्डल को समीक्षा के बाद निर्णय लेने की बात स्पष्ट रूप से कही थी। सन 1992 में भी यही लोग सर्वोच्च न्यायालय में शपथ और एकता परिषद मे आश्वासन देने के बाद भी सर्वोच्च न्यायालय, एकता परिषद, देश और देशवासियों के साथ भगवान राम को भी धोखा दे चुके हैं। देश के संविधान की धज्जियां उड़ा चुके हैं। देश उस नुक़सान की भरपाई आज तक नहीं कर पाया है। अब भी इन पर विश्वास कैसे किया जा सकता है? सर्वोच्च न्यायालय में विवाद विचाराधीन होने और 09 मई 2011 के न्यायालय के आदेश में यथा स्थिति की पुन: पुष्टि के बाद मन्दिर निर्माण के लिये यात्रा, आन्दोलन और अभियान की इजाज़त कैसे दी जा सकती है? हिन्दुस्तान जैसे बहुधर्मी और बहुआस्था वाले देश में यह सवाल केवल विश्व हिन्दू परिषद का नहीं है, राजनीतिक लाभ के लिये मनमाने आयोजनों की छूट देने और उनके परिणाम भुगतने से भी जुड़ा है। संघ परिवार, सरकार के इस निर्णय को धार्मिक भावना पर प्रहार बताकर देश को गुमराह कर रहा है। वह यह क्यों नहीं बताता कि इसके पीछे निहित उद्देश्य धार्मिक मान्यताओं पर कैसे आधारित हैं? यह तो प्राचीन परम्पराओं, ऐतिहासिक सन्दर्भों और न्यायालय के वर्तमान यथास्थिति के धुर विरोधी हैं। अत्यंत खेद के साथ हमें यह भी स्वीकार ना चाहिए कि सरकारी सेवाओं, मीडिया, ख़ुफिया और सुरक्षा ऐजेंसियों में भी साम्प्रदायिक मानसिकता वाले कुछ् तत्व मौजूद हैं, सन् 90 में भी इन तत्वों ने सरकार और देश के लिये समस्याऐं खड़ी की थीं और सर्विस नियमों और न्यायालय के आदेशों के साथ सरकार के निर्देशों का भी सरासर उल्लंघन किया था। यह आज भी इसकी पुनरावृत्ति कर सकते हैं। प्रदेश सरकार इन से आज भी जूझ रही है और आगे भी जूझना है। देश के संविधान और “सर्व धर्म समभाव” में विश्वास रखने वाले हर शांति प्रिय नागरिक को भा0 ज0 पा0 और विश्व हिन्दू परिषद के इस निर्णय की कटु निन्दा करनी चाहिए। देश और समाज में सुख, समृध्दि और शांति के लिये “सर्व धर्म समभाव” अत्यंत आवश्यक है। इस महान देश में ऐसा मान ने वाले करोड़ों लोग हैं, इस लिये यह देश धर्मनिरपेक्ष है और निरंतर उन्नति कर रहा है। इस देश के तिरंगे को एक रंग में रंगने की साज़िशें हमेशा विफल हुई हैं। इस बार भी ऐसा ही होगा। हमें ग़द्दारों, बेईमानों, मक्कारों और बुज़दिलों से अपने अज़ीम मुल्क की हिफाज़त करनी है, इसकी गंगा जमुनी तहज़ीब की हिफाज़त करनी है, यह सोच कर कि, “हम तो मिट जायेंगे मगर ऐ अर्ज़े वतन तुझ को, – ज़िन्दा रहना है क़यामत की सहर होने तक !” हिन्दुस्तान ज़िन्दाबाद! – ज़िन्दाबाद!! ज़िन्दाबाद!!!-हिन्दुस्तान पाइन्दाबाद! – पाइन्दाबाद!! पाइन्दाबाद!!! (सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी) वरिष्ठ समाजवादी चिंतक भेल-झांसी (उ0प्र0), पिन-284129. मो.न.0941594354.

Ajeet Yadav के द्वारा
August 29, 2013

धर्मं के बिना राजनीती दिशावेहीन है.यदि वास्तव में धर्मं का सहयोग हो तो राजनीती भटक नहीं सकती.आज की राजनीती स्वार्थ,तुस्टीकरण,और भय से अभिसिंचित है.भारत एक प्रजातान्त्रिक देश है परन्तु इस डेक के नेता प्रजातंत्र की परिभाषा या तो भूल गए या प्रजातन्त्रीक होने में शंका है.क्योकि इनका व्यव्हार एक तानाशाह या बिगरैल राजा जैसा है.जनता की परवाह किये बगैर जो मन में आ रहा है निर्भीक होकर करता जा रहा है.अपने आप को पद्चुत होने के भय से गलत सही निर्णय ले लेते है.आकुट धन इकठा कर आगे की ५-१० पीड़ी को सिक्योर करने में लगा है. जानबूझ कर ऐसी परिस्थितिया पैदा कर रहे है की लोगो का ध्यान सही मुद्दों से हटकर उसी में उलझा रहे. भारत जैसे धर्म निर्पेक्क्ष देश में न तो हिन्दुओ को और न ही मुसलमानों को एक दुश्रे से डरने की जरुरत है.यह एक प्रायोजित परिस्थिति है.दोनों को अनावश्यक डराकर ये तानाशाह अपनी रोटी सेकना चाहते है और वो बहुत हद तक सफल भी है. मुस्लिम भाइयो को आगे बढ़कर हिन्दुओ का साथ देना चाहिए और हिन्दुओ को मुसलमानों का.८४ kosh यात्रा में यदि कुछ बुद्धिजीवी मुस्लमान आगे आकर साथ देते तो राजनेताओं की गन्दी राजनीती अपने आप धराशाई हो जाती. मुसलमानों में भी कुछ राजनेता गन्दी राजनीती कर रहे है और ऐसी परिस्थिति में दोनों को आगे बढ़ने की जरुरत है.यही एकमात्र समाधान है देश को इस विकत समस्या से निकलने की.देश है तो हिन्दू या मुस्लमान है.देश की हालत ख़राब होगी तो कोई भी पक्क्ष बच नहीं पायेगा.पाकिस्तान में भारत से गए मुसलमानों को काफ़िर कहा जाता है.अपने घर में जो सम्मान है कही नहीं हो सकता.यह देश सबो का है और साथ मिलजुलकर रहने में ही सबकी भलाई है.मुस्लिम को भी इस गिरगिट नेताओ से साबधान रहना चाहिए और हिन्दुओ को भी. छनिक लाभ की लोलुपता में इनके जहासे में न आए,किसी का भला नहीं होगा.सच मुसलमान तो रिश्वत को पाप समझता है फिर नेताओ की तुस्टीकरण भी तो रिश्वत ही है.आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है,आगे बढ़कर पाटने की जरुरत है.प्लीज कामे फॉरवर्ड एंड प्रूफ योरसेल्फ अ रियल इंडियन.

PRADEEP के द्वारा
August 29, 2013

chuhe ghar me hi fudak sakte hai unhe pata hai ki chin or pak inka baap hai unse inhe kya len qk ye unki hi najay oulade hai.. wah bhai wah chand vote kya mil jate hai …..siyasat gulam ho jati hai aaj parikram rukegi,kal puja path pe pratibandh lagega.parso koi or atyachar ho kabi in mushlimo ko rat me padai k time pados me matam k time ya anyya ki aafat me bhokne se roka hai sarkar ne…….

MANMOHAN SINGH के द्वारा
August 29, 2013

लेकिन उत्तर परदेश नाकारा सर्कार दोनों बाप बीटा और इनका एक और बाप आजम यह सब उत्तर परदेश को पकिस्तान बनाना चाहते है जहाँ रोज बलात्कार मर्डर अपरहण जबरदस्ती हिन्दू बहु बेटियों का शारीरिक और मानसिक शोषण यह इनकी निति है जो अधिकारी अपनी ईमानदारी से काम कर रहे है यह दोनों बाप बेटे उसको निष्कासित कर रहे है जिन्होंने अपने देश को नुकसान पहुँचाया उन्हें यह हरामी बाप बेटे रिहा कर रहे है यह सर्कार हिन्दू और अपने देश के दुसमन है इनका विनाश जल्दी होगा जब देश के अन्दर जब दूसरी आजादी की क्रांति होगी तब सबसे पहले इन नेताओ को टारगेट करेगे और सरे रह इनको मरेंगे यह हमारी संसकिरिति पर कुठाराघात कर रहे है और केंद्र की नापुन्सक्र माँ बेटे और इनके तलवे चाटने वाले कांग्रेसी पूज्य श्री आश्रम बापू जी को बदनाम कर रहे है इन सबका विनाश जल्दी है क्यूंकि इन्होने ब्रह्मज्ञानी महापुर्ष को बदनाम किया है इनका सर्वनाश और इनका वंस का भी नाश जल्दी है ! इतिहास गवाह है जो भी सत्य और धरम से टकराएगा वह चूर चूर हो जायेगा हम अपने संसकिरित को आंच नहीं आने देंगे इसके लिए हम टायर है और जालिमो का नाश कर देंगे ! मेरी जागरण के लेखोको से निवेदन है की हमारे गुरुओ और हमारे भगवन और हमारी संसकिरिति के लिए इज्जत से लिखे जो भी सब्द लिखे वह मर्यादा में हो जय हिन्द हरी ॐ जय श्री राम राम राम राम राम राम राम राम !

jagojagobharat के द्वारा
August 27, 2013

उत्तर प्रदेश सरकार ने ८४ कोशी परिक्रमा पर रोक लगा कर देश के करोडो हिन्दुओ की आस्था के साथ खिलवाड़ किया .३००-४०० संतो की प्रस्तावित यात्रा पर हजारो की संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और भेड़ बकरियो की तरह उन्हें गाडियो में लाद कर ले गए . धन्य है ALLAHABAD उच्य न्यालय जिसने संतो को अविलम्ब रिहा करने का निर्देश सरकार को दिया . सपा सरकार वोट बैंक की राजनीती करके हिन्दू आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है आतंकियो को जेल से छोडती है और संतो को जेल में डालती है शर्म आणि चाहिए अखिलेश को अगर विधि व्यवस्था का ख्याल था तो परिक्रमा रोकने के लिए जितने पुलिस बल तैनात किये गए वो साधू संतो की सुरक्षा में लगा देते लेकिन इससे आजम खान के नाराज होने का डर था अखिलेश को इस लिए ऐसा किया गया . राम लला की परिक्रमा हिन्दुओ का मौलिक अधिकार है इसे कोई छीन नहीं सकता . विश्व हिन्दू परिषद् पर जो राजनीती करने का आरोप लगते है उन्हें सपा और कांग्रेस से पूछना चाहिए की आखिर वो इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाते क्या हिन्दू उन्हें वोट नहीं देते .

    साहिल के द्वारा
    August 28, 2013

    अबे क्या घंटा खिलवाड़ कर दिया ३००-४०० कैसे बे २५०० से ज्यादा तो तेरे बाप उस दिन गिरफ्तार किये गये थे फिर बाकी जो किये नहीं गये उनका पता नि कितने होंगे ये सेल लोगो को भड़काने जा रहे थे अगर इन्हें इसमें संतो का इस्तमाल करना पद रहा था तो कर रहे थे जब हाई कोर्ट ने भी सरकार का फैसला सही बताया था वो इन्हें पहले ही रुक जाना था इतना ड्रामा क्यों किया ये सब राजनीति है इसमें इतना बड़ा कुछ नहीं है जो इससे हिन्दू लोगो के धर्म का हनन हो इससे जो चुतिया है उनके धरम को ज़रूर नुक्सान हो सकता है इससे


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