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क्या भाजपा से अलगाव नीतीश के लिए आत्मघाती कदम है?

Posted On: 17 Jun, 2013 में

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आखिरकार मोदी के मुद्दे पर एनडीए के 17 साल पुराने साथी जनता दल यूनाइटेड ने उसका साथ छोड़ ही दिया। वैसे तो पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि नरेंद्र मोदी को मिलने वाली प्राथमिकताओं के कारण नीतीश भाजपा से खफा थे, वह किसी भी हाल में मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नहीं देखना चाहते थे इसीलिए उन्होंने भाजपा को नरेंद्र मोदी पर उसका स्टैंड स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन भाजपा ने उनका कहा नहीं माना और अंतत: जदयू ने भाजपा और एनडीए से खुद को अलग कर लिया। अब जब मिशन 2014 नजदीक आता जा रहा है ऐसे में जदयू का खुद को एनडीए से अलग करने जैसा नीतीश कुमार का निर्णय विभिन्न सवालों के घेरे में आ गया है कि भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने से नीतीश कुमार को आगामी लोकसभा चुनावों में फायदा होगा या नुकसान?



बुद्धिजीवियों का एक वर्ग नीतीश कुमार के इस कदम को सीधे-सीधे उनके लिए फायदे का सौदा मान रहा है। इनका कहना है कि नीतीश कुमार ने सही समय पर खुद को एनडीए से अलग कर लिया क्योंकि अगर कहीं लोकसभा चुनावों के समय भाजपा नरेंद्र मोदी, जिन्हें एक कट्टर और सांप्रदायिक नेता के तौर पर जाना जाता है, को अपना प्रत्याशी घोषित करती तो इसका नुकसान नीतीश को अपने परंपरागत वोटबैंक जो कि मुसलमान हैं, को खोकर उठाना पड़ता। जाहिर है नीतीश और जदयू के लिए यह एक घाटे का सौदा होता और यह जानने के बावजूद की एनडीए के साथ रहने से उनकी हार निश्चित है वह खुद को एनडीए से अलग कर पाने की हालत में नहीं होते। उस धर्म संकट की घड़ी से खुद को बचाए रखने के लिए जदयू का यह निर्णय सही ही है। कम से कम अब उनके पास कांग्रेस के साथ गठबंधन कर या फिर अपने वोटबैंक का विश्वास जीतने जैसे कुछ विकल्प मौजूद हैं जिसके अनुसार यह संभावना कम ही है कि उन्हें बिहार में कोई नुकसान उठाना पड़े।


वहीं दूसरी ओर वे लोग हैं जिनका यह मानना है कि एनडीए गठबंधन से खुद को अलग कर नीतीश ने खुद अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। उनका कहना है कि सबसे पहले तो बिहार में कांग्रेस से ज्यादा भाजपा की ही तूती बोलती है इसीलिए यह सोच लेना कि कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश वहां अपनी जीत दर्ज करवा पाने में सक्षम हो पाएंगे यह खुद को जैसे धोखे में ही रखने वाली बात है। इतना ही नहीं नीतीश कुमार अगर अकेले अपने दम पर भी चुनाव लड़ते हैं तो भी बिहार में उन्हें सिर्फ मुस्लिम और अति पिछड़ा वोट ही हासिल हो पाएंगे, जबकि बिहार के सवर्ण हिंदुओं का वोट तो भाजपा के ही पाले में जाएगा। नीतीश कुमार को काफी हद तक मुस्लिम हितैषी माना जाता है और उन्हें अपनी इस छवि का नुकसान चुनावी मैदान में जरूर भुगतना पड़ेगा।


जदयू-भाजपा गठबंधन टूटने और इसके नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य से जुड़े दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं, जैसे:


1. क्या नीतीश कुमार के एनडीए के अलग होने का नुकसान सिर्फ जदयू को ही उठाना पड़ेगा या फिर इसका असर भाजपा पर भी पड़ेगा?

2. जदयू की किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन किए बगैर चुनाव जीतने की कितनी संभावना है?

3. हालांकि अभी भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार स्पष्ट नहीं किया गया है लेकिन अगर कहीं उनकी मुहर नरेंद्र मोदी पर लगती तो क्या नीतीश कुमार के लिए यह वाकई घाटे का सौदा होता?

4. नरेंद्र मोदी का मोह भाजपा को किस सीमा तक फायदा पहुंचाएगा?



जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या भाजपा से अलगाव नीतीश के लिए आत्मघाती कदम है?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “नीतीश कुमार का निर्णय” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व नीतीश कुमार का निर्णय – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MRITYUNJAY PRASAD MISHRA के द्वारा
June 27, 2013

भाजपा से नितीश का अलगाव , नितीश के लिए आत्मघाती कदम हो या न हो मगर भाजपा के लिए आत्मघाती कदम अवश्य हो सकता है |

    mohammad moin khan के द्वारा
    June 29, 2013

    you r right sir.

shambhu goel के द्वारा
June 26, 2013

In my opinion it is useless to think about what Nitish Kumar had thought when he decided to snap ties with BJP whether about keeping his vote bank of the so called minority intact or to make his dream come true about the office of the PM of India once when third front under his stewardship starts moving or something else. It is not BJP that I shall vote for this time but I definitely would like all Indians not to cast aspersions on Narendra Modi if he makes his way to the PM’s chair .We require a strong,development minded man unlike Nitish Kumar whose growth rate is dependent only on his dreams when he sees two three power plants coming , two three bridges are being constructed but only in dreams . I may not be able to clarify my views about development of Narendraji and Nitish but in my own words I may be allowed to compare the two. In Bihar if Nitish even thinks or dreams that two bricks have been put cement and sand on , a net growth rate of 1% is seen on the statistical data of growth rate , but in Gujarat even when 10 kms long ten bridges are already operational and Modiji is really constructing one more 10 km long bridge to be completed within 1 year , the growth rate will be a meager 0.001 % . We should ourselves see then where it is growth and where it is no growth. Nitish finds it very easy to make statements about Narendra Modiji but in reality the height of Mr Nitish is not even equal to an inch in front of Narendra Modiji’s actual or political height of 5′5”. Nitish Kumar has in his cabinet persons like Narendra Singh who is a die hard womaniser, corrupt from head to foot , Shyam Rajak , an off-shoot of Laloo, a person who stinks of corruption from all pores of his physique , Renu Kumari Kushwaha , a some time concubine of Nitish later made minister to realize her capital back in shape of money against giving away her youthful days on the laps of Nitish. Ans so on and so on . BJP in Bihar under Sushil Modi is nothing but BJP in the state once NAMO is nominated a candidate for Prime-minister ship is numero uno and shall leave all the dreams of Nitishji shattered. Every Indian is for NAMO and for Nitish one has to be called a sympathizer of Pakistan ,can we dream of another one more Pakistan inside the territory of India which is the ultimate dream of Nitishji.

Raghwendra tiwari के द्वारा
June 26, 2013

मेरा जन्म बिहार में हुआ है और बिहार को बहुत करीब से देखा है नितीश कुमार एक बात बार बार कहते है बिहार का विकास मौडेल ही चलेगा | आप सब पढ़े लिखे लोग है विकास का मतलब क्या होता है, किसी प्रदेश या जिला का विकास होता है तो क्या किसी खास वर्ग के लिए होता है ४ लेन रोड बनेगी तो क्या हिन्दू ही उस पर चलेगा बिजली घर बनेगा तो क्या हिन्दू को ही बिजली मिलेगी हॉस्पिटल बनेगा तो क्या सब क्या इलाज नहीं होगा फिर विकास का अलग –अलग मौडेल कैसे हो सकता है अलग – अलग राजनीति हो सकती है | कुछ लोग टोपी टिका की राजनीति में अपना मन लगते है ८ साल के शासन में आज भी पुराने १५ सालो की याद दिला कर वोट मागते है और टीवी पर अखबार में आ कर बिहार का विकास मौडेल की बात करते है सब को साथ लेकर चलने की बात करते है, जो अपने गठबंधन को साथ लेकर नहीं चल पाया उसे सब को साथ लेकर चलने की बात नहीं करनी चाहिए | जनता को विकास की बात करके आपने वोट माँगा जब आप फ़ैल हो गए और आप देख रहे है अब इस बात पर वोट नहीं मिलेगा तब आप ने नया पैतरा किया और सोच चलो सब सेक्युलर – सेक्युलर खेल रहे है में भी खेलता हु | कमसे कम लोग विकास की बात तो नहीं करेगे |

प्रदीप बेरी के द्वारा
June 26, 2013

सच है, साये में रहना कभी फायदे वाला सौदा नहीं, भरपूर हवा पानी पाकर मनुष्य यकीनन फल फूल सकता है, पर कर्मों का प्रभाव अवश्य रहता है,

hcsharma के द्वारा
June 25, 2013

कया भाजपा से अलगाव नीतेश को आतमघाती है—————-नहीं—नीतेश के दोनों हाथों मै लडडु हैं  वोट बैंक के लिए किया गया यह तमाशा बहूत सोची समझी चाल के तहत जोड घटाना गुणाभाग करके किया है ईसमैं नीतेश को कहीं भी हानी नही है सारे परतीदवनदीयो को धरासायी करने वाला निरणय हैहिनदु मुसलमान वोटरो लुभाने वाला यह निरणय हर ओर से नीतेश लाभदायक होगा –मुसलमान वोटरो को वांटकर सीधा लाभ भाजपा को देगा वहीं मुखय  परतीदवनदी लालू को पसत करत हुआ अपने लिए कांगरेस का साथ मिले ना मिले अपने रासते वापस अपने साथी भाजपा मैं भी महतव  बनाए रखेगी  कागरेस को भी मजबूरन तालमेल बनाना पड सकता है  चाल समझते हुए कागरेस अभीखामोश है

Rajiv के द्वारा
June 25, 2013

नितीश जी का भी वोही हल होगा जो कुछ साल पहले लालू का हुआ था कांग्रेस से अलग हो कर वोही हल होगा नितीश जी का बीजेपी से अलग हो कर हमें लगता है की ये गलत किया है नितीश ने इस समय जब सब पार्टी चाहती है कांग्रेस को हटाना देश का क्या हल है सब जानते हैं पता नहीं कब देश गुलाम कर दिया जय कांग्रेस के द्वारा | एक छोटा सा परोसी देश हमें बार बार आँख दिखता है और हम कहते हैं व्यापर बढ़ाये क्यों हमारे सैनिक का सर कट के ले जाय और हम सिर्फ ये कहे की सर वापस करो क्यों हमारे एक सैनिक का सर कटा है तो हम ५० का कट के ले आने का आदेश दे तब जा के हमारे सैनिक को सकूँ मिलेगा

मुकेश पंजियार के द्वारा
June 22, 2013

नितीश कुमार तो नहीं मगर अधिनायकवाद की शुरुवात कर बीजेपी ने खुद अपनी कब्र खोद ली है . और आने वाले समय मे लोग इस बात को पढेंगे की कैसे एक व्यक्ति के कारण किसी पार्टी का पतन हो गया . पहली बात हिंदुत्व के अलावे बीजेपी के पास कोई मुद्दा है नहीं . और दूसरा भारतीय जनता एक सभ्य सुशील और सर्वधर्मसमभाव वाला प्रधानमंत्री खोजता है ना की किसी हिटलर या नेपोलियन को .

Shuklaom के द्वारा
June 20, 2013

निश्चय ही यह नीतीश कुमार के लिए आत्मधाती होगा जैसा कि १८ जून को बिहार की जनता ने विस्योस्घट द्त्वास के रूप में सफल बिहार बंद कर साबित कर दिया है हमें यह नहीं भुलाना चाहिए कि वह की जनता पुरे देश में राजनितिक रूप से सरधिक जागरूक है तमाम तरह के घोटालो से घिरी बेशर्मी की सीमा लांघने वाली कांग्रेस जो मुल्य वृद्धि तथा संसाधनों को लुटाने वाली साथ ही विदेशी ताकतों के आगे शर्मनाक ढंग तरीके से घुटने ताकने तथा देश को अपमानजनक ढंग से पाकिस्तान एवं चीन के सम्मुख आत्मसमर्पण करने के साथ गठबंधन कर के नीतीश कुछ हासिल कर पायेगे इसकी संभावना कतई नहीं है नीतीश के साथ कांग्रेस के साथ जाने के आलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है और यही कांग्रेस तथा बिहार की समस्त खामियों के लिए जिम्मेदारी से बाख नहीं सकती इसका खामियाजा तो उन्हें उठाना ही होगा . अभी १९ जून को हेअद्किनेस टुडे के सर्वेक्चाद में नीतीश को मात्र ७ सीटो का अनुमान लगाया है मोदी को जिस तरह हौअ बना दिया है वह अभी जैसा महाराज गंज के लोकसभा चुनाव में स्पस्ट रूप से सामने आ चूका है इस चुनाव ने यह भी दिखाया है कि बिहार के मुसलमानों का नीतीश से मोहभंग हो रहा है वही सव्र्दो का वोट भी नीतीश के खिलाफ जायेगा महाराजगंज ने यह भी साबित किया है कि कांग्रेस जो स्वर्गीय संसद के बेटे को टिकट देने के बाद भी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाया. जहा तक अतिपिचादा वर्ग का सवाल है तो जैसा कि सुशिल मोदी ने आरोप लगाया कि नीतीशएक अतिपिचाड़े वर्ग के प्रधानमंत्री बनाने की रह में बाधा कड़ी कर रहे है वह बिहार जैसे जातिगत समूहों के लिए विख्यात बिहार में उ७नक सिक्का चलन संदिग्ध है नीतीश का दावा कि सिर्फ अतिपिचादा वर्ग में जन्म लेने से कोई अतिपिचादो का नेता नहीं बन सकता यह दलील थोथी है क्यों कि मोदी चाय के ठेला लगते हुए यहाँ तक का सफ़र पहुचे है रहा सवाल संघर्ष का तो वे खुद सामंती कुर्मी संप्रदाय से सम्बन्ध रखते है और उनका क्या योगदान रहा है यह तो विश्वनाथ प्रताप सिघ ने बिना किसी संघर्ष के मंडल आयोग की सिफ़ारिशो को लागु किया जिसमे इन जैसे पिचादो का कोई योगदान नहीं है हां यह जरुर है कि सत्ता की मलाई खाने के लिए ही संघर्ष करते रहे है पिचादो से घी लड़ते रहे है चाहे लालू हो या उपेन्द्र कुशवाहा कांग्रेस का बिहार में लालू से ही गठबंधन की संभावना अधिक है क्यों कि नीतीश के पास न तो बी.जे.पी के तरह कोई संगठन है और नहीं अब वैसी विश्वनीयता किस लिए कांब्ग्रेस उनके साथ जाएगी क्या कांब्ग्रेस के लोगो को ज्ञात नहीं कि लालू की तरह अंध भक्त कभी भी नहीं हो सकते किसी भी परिस्तिथि में लालू हमेशा कांग्रेस के पाकच में रहे है यह भी समझ से बहार है कि मात्र एक चुनाव में मुसलमानों का समर्थन प् कर किस तरह उन्हें अपना परंपरागत वोट मानते है मई समिकरद लालू के साथ ही रहेगा कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि नीतीश के लिए अंगूर खट्टे ही रहने की संभावना अधिक है.

shuklaom के द्वारा
June 20, 2013

निश्चय ही यह नीतीश कुमार के लिए आत्मधाती होगा जैसा कि १८ जून को बिहार की जनता ने विस्योस्घट द्त्वास के रूप में सफल बिहार बंद कर साबित कर दिया है हमें यह नहीं भुलाना चाहिए कि वह की जनता पुरे देश में राजनितिक रूप से सरधिक जागरूक है तमाम तरह के घोटालो से घिरी बेशर्मी की सीमा लांघने वाली कांग्रेस जो मुल्य वृद्धि तथा संसाधनों को लुटाने वाली साथ ही विदेशी ताकतों के आगे शर्मनाक ढंग तरीके से घुटने ताकने तथा देश को अपमानजनक ढंग से पाकिस्तान एवं चीन के सम्मुख आत्मसमर्पण करने के साथ गठबंधन कर के नीतीश कुछ हासिल कर पायेगे इसकी संभावना कतई नहीं है नीतीश के साथ कांग्रेस के साथ जाने के आलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है और यही कांग्रेस तथा बिहार की समस्त खामियों के लिए जिम्मेदारी से बाख नहीं सकती इसका खामियाजा तो उन्हें उठाना ही होगा . अभी १९ जून को हेअद्किनेस टुडे के सर्वेक्चाद में नीतीश को मात्र ७ सीटो का अनुमान लगाया है मोदी को जिस तरह हौअ बना दिया है वह अभी जैसा महाराज गंज के लोकसभा चुनाव में स्पस्ट रूप से सामने आ चूका है इस चुनाव ने यह भी दिखाया है कि बिहार के मुसलमानों का नीतीश से मोहभंग हो रहा है वही सव्र्दो का वोट भी नीतीश के खिलाफ जायेगा महाराजगंज ने यह भी साबित किया है कि कांग्रेस जो स्वर्गीय संसद के बेटे को टिकट देने के बाद भी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाया. जहा तक अतिपिचादा वर्ग का सवाल है तो जैसा कि सुशिल मोदी ने आरोप लगाया कि नीतीशएक अतिपिचाड़े वर्ग के प्रधानमंत्री बनाने की रह में बाधा कड़ी कर रहे है वह बिहार जैसे जातिगत समूहों के लिए विख्यात बिहार में उ७नक सिक्का चलन संदिग्ध है नीतीश का दावा कि सिर्फ अतिपिचादा वर्ग में जन्म लेने से कोई अतिपिचादो का नेता नहीं बन सकता यह दलील थोथी है क्यों कि मोदी चाय के ठेला लगते हुए यहाँ तक का सफ़र पहुचे है रहा सवाल संघर्ष का तो वे खुद सामंती कुर्मी संप्रदाय से सम्बन्ध रखते है और उनका क्या योगदान रहा है यह तो विश्वनाथ प्रताप सिघ ने बिना किसी संघर्ष के मंडल आयोग की सिफ़ारिशो को लागु किया जिसमे इन जैसे पिचादो का कोई योगदान नहीं है हां यह जरुर है कि सत्ता की मलाई खाने के लिए ही संघर्ष करते रहे है पिचादो से घी लड़ते रहे है चाहे लालू हो या उपेन्द्र कुशवाहा कांग्रेस का बिहार में लालू से ही गठबंधन की संभावना अधिक है क्यों कि नीतीश के पास न तो बी.जे.पी के तरह कोई संगठन है और नहीं अब वैसी विश्वनीयता किस लिए कांब्ग्रेस उनके साथ जाएगी क्या कांब्ग्रेस के लोगो को ज्ञात नहीं कि लालू की तरह अंध भक्त कभी भी नहीं हो सकते किसी भी परिस्तिथि में लालू हमेशा कांग्रेस के पाकच में रहे है यह भी समझ से बहार है कि मात्र एक चुनाव में मुसलमानों का समर्थन प् कर किस तरह उन्हें अपना परंपरागत वोट मानते है मई समिकरद लालू के साथ ही रहेगा कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि नीतीश के लिए अंगूर खट्टे ही रहने की संभावना अधिक है.

subhash के द्वारा
June 17, 2013

नमो के खिलाफ में जितना भी परचार होगा सब मोदी के पक्ष में जायेगा ,आजादी के बाद देश को एक राष्ट्रीयवादी सॊच का नेता मिला है ,


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