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क्या जनता के लिए “भ्रष्टाचार” चुनावी मुद्दा नहीं है?

Posted On: 20 May, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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हाल ही में हुए एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे के नतीजों पर गौर करें तो यदि आज चुनाव हो जाए तो यूपीए गठबंधन फिर से सरकार नहीं बना पाएगी। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार समेत 21 राज्यों में हुए इस सर्वे के नतीजे ना सिर्फ कांग्रेस के विरोध में जा रहे हैं बल्कि भारी मतों से कांग्रेस की हार भी सुनिश्चित प्रतीत हो रही है। लेकिन वहीं अगर हम 2012-13 के बीच हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे देखें तो एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे के उलट ही हमें हर जगह कांग्रेस की जीत ही नजर आई है। जिसके बाद यह एक बहस का विषय बन गया है कि क्या एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे को आधार मानकर आगामी लोकसभा चुनावों में बड़े बदलावों की अपेक्षा की जा सकती है या फिर कांग्रेस की जीत के हालिया उदाहरण ही मिशन 2014 की तस्वीर पेश करने के लिए काफी हैं।


बुद्धिजीवियों का वो वर्ग, जो कांग्रेस की हार को मात्र एक भ्रम कह रहा है, उसका कहना है कि भले ही कांग्रेस भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े आरोपों से जूझ रही हो लेकिन जनता इस बात को समझती है कि कोई भी सरकार या राजनीतिक दल दूध का धुला नहीं है। सत्ता में आने के बाद हर कोई ताकत और पैसे के नशे में चूर हो जाता है। लेकिन जनता यह समझती है कि जिस तरह कांग्रेस ने देश की कमान संभाली है, वह कोई अन्य दल कर ही नहीं सकता क्योंकि अंदरूनी कलहों और मतभेदों की वजह से कोई भी जनता के हित में काम नहीं कर पाएगा, जिसके परिणामस्वरूप जो हालात आज है उससे भी कहीं ज्यादा बदतर हालातों का सामना करना पड़ सकता है। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में कांग्रेस को मिली जीत यही जाहिर करती है कि जनता के बीच कांग्रेस का करिश्मा अभी भी बरकरार है और उसे कोई टक्कर नहीं दे सकता। जनता चाहे कुछ भी कह ले या सोच ले लेकिन बात जब वोट डालने की आती है तो वह उसे ही चुनती है जिसे वह सही समझती है।


लेकिन दूसरी ओर एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे को आगामी लोकसभा चुनावों का परिणाम मानने वाला बुद्धिजीवी वर्ग कुछ और ही तर्क दे रहा है। इस वर्ग के अनुसार कर्नाटक चुनाव जिसमें कांग्रेस की जीत को उसकी लोकप्रियता करार दिया जा रहा है वह कांग्रेस की जीत नहीं बल्कि भाजपा की हार थी। येदियुरप्पा के भाजपा से अलग होते ही यह स्पष्ट हो गया था कि वहां भाजपा जीत ही नहीं सकती। यहां तक कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी यह चुके हैं कि अगर कर्नाटक में भाजपा को जीत मिलती तो यह उनके लिए हैरानी का कारण बनता। नील्सन सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मात्र 5 सीटें ही हासिल होंगी जबकि पिछले लोकसभा चुनावों में इनकी संख्या 21 थी। महाराष्ट्र में जहां कांग्रेस गठबंधन को पिछले साल 29 सीटें मिली थीं सर्वे के अनुसार उनकी संख्या घटकर मात्र 16 रह जाएगी। पिछले लोकसभा चुनावों में दिल्ली के सभी सातों निर्वाचन क्षेत्र में जीत सुनिश्चित करने वाली कांग्रेस को इस बार 5 जगहों पर हार मिलने की पूरी संभावना है, वहीं दूसरी ओर बिहार में भी कांग़्रेस के लिए कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है। एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे देश के 21 राज्यों में किए गए और सभी ओर से नतीजे कांग्रेस के विरोध में ही जाते नजर आ रहे हैं। एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे को प्रमाण मानने वाले बुद्धिजीवियों का कहना है कि “जनता कांग्रेस के सभी हथकंडों को अच्छी तरह समझती है इसीलिए वह अब दोबारा उस पर विश्वास करने का जोखिम नहीं उठा सकती। यह नतीजे भी उसी जनता की प्राथमिकताओं पर आधारित हैं जिसके वोट से राजनीतिक दलों की किस्मत तय होती है और अब जब इन्हीं नतीजों में जनता का रुख साफ दिखाई दे रहा है तो कैसे यूपीए सरकार के जीत की बात की जा सकती है।”


एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे और हालिया घटनाक्रमों पर विचार करते हुए कुछ ऐसे प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना वाकई बहुत जरूरी है, जैसे:


1. जहां जनता हर मोड़ पर अपनी मानसिकता बदलती हो तो वहां एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे के नतीजों पर कितना विश्वास किया जा सकता है?


2. एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे और हालिया चुनावों के नतीजों में अत्याधिक भिन्नता है, किसे प्रमाणिक माना जाना चाहिए?


3. गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसी कांग्रेस से क्या फिर उस करिश्मे की उम्मीद की जा सकती है जो पिछली बार देखा गया था?


4. क्या फिर एक बार एनडीए के अंदरूनी कलह और मतभेद उसे यूपीए के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर कर देंगे?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या जनता के लिए भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा नहीं है?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व एबीपी न्यूज-नील्सन सर्वे – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

har har mahadev के द्वारा
June 20, 2013

corruption is desh mein kabhi mudda ho hi nahi sakta. is desh ke jadatar logon ke liye sirf ek hi mudda chalta hai aur woh hai jaatiwad ka mudda.azadi ke baad general category ke logon ne satta, prashashan, aur business mein kabza kar liya aur wahi ab jab obc aur sc st ko mauka mila hai to wo bhi dono haath se paisa collect kar rahein hai.isme galat kya hai .aur ise paise se woh apni aur apni jaat ka bhala kar sakte hain.jo log corruption ko khatam karne ki baat kar rahein unse mera sirf itna kehna hai ki hindustan se caste system khatam kar dijiye corruption automatic khatam ho jayega. kyonki har jaati ke govt employees aur neta corruption isiliye karte hai ki isse woh apni aur apni jaati ka bhala kar sakein kyuonki ek jaati ka neta ya govt employee doosri jati ki madad karne se raha aur madad toh door usko aise chkrawyuh mein fasa denge ki woh kabhi us sadme se bahar hi nahi aa payega. aaj jo savarn bhai jaatigadh aarakshan ka virodh karte hain unse mera sirf itna kehna hai ki jati khatam kar dijiye aarakshan automatic khatam ho jayega . is desh ka sabse badi beemari caste hai jiski wajah se ham pichle 1500 saalon se videshion ki gullami kar rahen hai aur aage bhi karte rahenge kyonki jin jaation ka 5000 saal se soshan ho raha hai wo kabhi tumhare saath nahi aayengi. woh muslmanon , britishers ki gulaami kar lengi lekin tumhare saath kabhi nahi aayengi.kyuonki musalmaan ya britishers unko jaatisoochak sabd keh kar jalil to nahi karte .

vijay के द्वारा
June 5, 2013

hamare politican ke sarer to kya aatam bhi sadd cuki hai ab to usme se badboo bhi aane lagi hai now they are dead man. jo paise ke liye kuch bhi kar sakthe hai. yahi system banane wale hi pahle system tohdte hai or fhir system ko kamjor kar jimmedari janta par daal dete hai. janta ko kahte hai system se chalo. court cash 10-15 saal chalta hai to kahte hai system apna kaam kar raha hai. par system banane wale bhi to yahi neta hai. ye politican are responseblem for a fake and weak system. politican are not blam the public for system working. they donot want any head on politican but they want to cantorl whole head according them

पवन सिंह राठौर के द्वारा
June 4, 2013

भ्रष्टाचार टुनाव मे ेक अहम मुदद्ा है..क्योकि देश के वतर्मान हालात के लिए भ्रष्टाचार ही जिम्मेवार है..हा मंहगाई और विकास भी मुद्दे हो सकते है लेकिन इन दोनो सम्स्याओ की जड़ भ्रष्टाचार है..

kuldeep chaudhary के द्वारा
June 4, 2013

YE DESH OR JANTA K NAHI PAISO K PUJARI HAIN

kuldeep chaudhary के द्वारा
June 4, 2013

LEKIN IS DESH MAI LAGBHAG CURRAPT TO SAB LEADERS HAI … OR JAB YE DEEDERS US MAA KO LOOTNE MAI KOI KASAR NAHI CHOR RAHE HAI JISE APNA BHARAT MAA KAHTE HAI TO IS JANTA KI BAAT HI KYA HAI. MAI TO THNX KARTA HUN BHAGWAAN KA KI 18TH CENTURY MAI AISE LEEDERS NAHI THE WARNA AAJ WORLD MAP MAI INDIA NAAM KA KOI DESH NAHI HOTA YE ISE TABHI BECH KAR KHA GAYE HOTE…..

kuldeep chaudhary के द्वारा
June 4, 2013

JI HAN HAI

Sudhir Kumar Singh के द्वारा
June 3, 2013

“Jagran Junction Forum” Hamre desh ke janta ki sabse bdi kamjori ye hai ki pahle se to jarur bjp ya congress or kisi or k bare me soch rhe hote hai but jab election pas aati hai to ham ye dekh rhe hote hai hamare yaha se kaun-kaun sa pratyasi hai aur hamare cast me kaun hai aur hum whi vote karte hai aur kuch to paiso pe v bick jate hai.. waise aap dekhe to yha dudh ka dhula koi v party nahi hai agar congress Modi ji ke upar sawal khada karta hai to ‘Sajjan Kumar’ jo sikh dango se jure the jiska ki kai eye witness tha but hua kya isliye ham imandar janta kar bhi kya sakte hai…..

Ramesh Narain Saini के द्वारा
June 3, 2013

          अब तो बस एक ही नारा है  भषटाचार िमटाअो देश बचाअो

jaigopal singh के द्वारा
June 2, 2013

हा जनता के लिए “भ्रष्टाचार” चुनावी मुद्दा है आज के नेताऒ को तो वस कुरसी से मतलब है चाहे जनता मरे य़ा जिय़े

jaigopal singh के द्वारा
June 2, 2013

हा जनता के लिए “भ्रष्टाचार” चुनावी मुद्दा है आज के नेताऒ को तो वस कुरसी से मतलब चाहे मरे य़ा जिय़े

PRATIK TRIVEDI के द्वारा
May 21, 2013

bhrastchar aur karne ke lie aur ise aur bhadawa dene ke liye hi to sare neta Chunaav me apna sara jor laga dete hai upar se lekar niche tak sab ke sab bhrastachar hi hai kyonki jab ghar ka mukhiya hi bhrastachar hai to fir bahar walon ka kya hoga . ye mudda bahut hi gambhir hai lekin jab tak log jagruk nhi honge chahe wo yuva ho ya koi bada lalach de kar sabko bhrastachar sikha diya hai aaj ke netaon ne koi bhi ho sab ke sab bhrastachar hai aur nhi hai unko log dekh hi nhi rahe ya fir wo dar rahe hai samne ane se islie mai JAGRAN GROUP ko bahut hi THANKS kehna chahunga ki unhone ye mudda age uthaya thank you NITIN SIR

R P Pandey के द्वारा
May 21, 2013

भ्रष्टाचार मुद्दा है ,लेकिन पहले यह तो तय हो की कौन भ्रष्ट नहीं है .और जनता ! जिसकी ५०% आबादी कम ही सही ,अपना हिस्सा प् रही है उससे भ्रष्टाचार से क्या मतलब . जो 2 रु किलो चावल , jaati के नाम पर तमान सुविधाए , बेरोजगारी के नाम पर भत्ता ,लापताप ,जैसी खैरात के लिए मारामारी कर रहा है वह भ्रष्टाचार के खिलाफ क्यों जाएगा .मुझे तो भ्रम हो रहा है की क्या इसी देश विवेकानंद , भगत सिंह और आजाद पैदा हुए थे ?जिन युवावो पर हमें बड़ा गर्व है , आखिर उस में से kewal एक ही युवा क्यों नहीं पूछता की यह जो तुम लोग खैरात बाँट रहे हो वह पैसा कहा से अ रहा है ?

Ranjan Kumar के द्वारा
May 21, 2013

Caste, religion matter more for general populace of India. Corruption has taken the form of culture in our country. A commoner is not much bothered about it. Moreover, if it works in their favour, they are happy about it. They react, only when it goes against their interests.

ऋषभ शुक्ला के द्वारा
May 20, 2013

आज मै एक ऐसी रचना लेकर आप सब के सामने उपस्थित हुआ हूँ, जिसे पढ़कर आप सब की आँखे नाम हो जायेगी. और यही हमारे देश की कड़वी सच्चाई भी है, इस कविता के माध्यम से मै ऋषभ शुक्ला, इस समाज का निर्दयी ही सही लेकिन है तो सच. आज हमारे समाज के लोग महिलाओ के प्रती वही पुरानी सोच रखते है जो वह हमेशा रखते आये है, और आगे भी ऐसी ही सोच रखने का इरादा है. गरीब माँ-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते है और वह संतान के रूप में एक बेटा चाहते है, और इसके लिए वह गर्भ में ही जाच के द्वारा उन्हें यदी पता चल गया की गर्भ में बच्ची है तो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही मार देते है, उस नन्ही सी जान को जो इस निर्मम दुनिया में आने को बेताब रहती है, उसकी सभी इच्छाओ को भी मार देते है . मै इस कविता के माध्यम से उस छोटी गुडिया के दर्द को आप सब से मुखातिब करने का प्रयत्न कर रहा हूँ. कृपया मेरी गुजारिश है की आप सब इस लिंक को देखे और उसके बारे में कम से कम दो शब्द कहे. यदी कमेंट देने में कोई असुविधा हो तो उसे लाइक करे या वोट करे. http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=25 शुक्रिया


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