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यौन उत्पीड़न के लिए उत्प्रेरक है “इज्जत की अवधारणा” ?

Posted On: 8 Apr, 2013 में

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उत्तर प्रदेश में पारिवारिक रंजिश का बदला लेने के लिए पहले एक परिवार के पुरुषों ने दूसरे परिवार की महिला के साथ गैंग रेप किया फिर इस गैंग रेप का बदला लेने के लिए पीड़ित महिला के पुरुष संबंधियों ने उक्त परिवार की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया।


सीरिया के अंदर भड़की विरोध की आग को दबाने के लिए सीरिया की सेना द्वारा विरोधी गुट में शामिल महिलाओं का ना सिर्फ बेहद अमानवीय तरीके से बलात्कार किया जा रहा है बल्कि उन्हें क्रूरतम तरीके से प्रताड़ित भी किया जा रहा है।


नक्सलवाद, जिसे भारत की आंतरिक सुरक्षा और शांति के लिए खतरा करार दिया जाता है, उससे निपटने के लिए भी सरकारी नुमाइंदे नक्सली और माओवादी महिलाओं से निपटने के लिए उनका बलात्कार करते हैं या चीरहरण कर उन्हें सरेआम घुमाते हैं। इतना ही नहीं नक्सली भी सरकारी नुमाइंदों को मजा चखाने के लिए उनसे संबंधित महिलाओं को ही अपना शिकार बनाते हैं।


यह भले ही हालिया उदाहरण हों लेकिन प्राचीन काल में भी जब कोई आक्रमणकारी किसी राज्य पर अपना कब्जा कर लेता था तो वह उस राज्य को नीचा दिखाने के लिए सबसे पहले राज्य की महिलाओं पर ही धावा बोलता था। उसकी सेना घरों में घुसकर या फिर राह चलती महिलाओं को अगवाकर उनके साथ बलात्कार करती थी।


यह भी देखा गया है कि हमारी क्षेत्रीय गालियां भी स्त्री अंगों और उनसे कथित रूप से जोड़ ली गई नातेदारियों से ही संबद्ध रहती हैं। विभिन्न प्रकार के वाद-विवाद में जनसामान्य के बीच एक-दूसरे से नाता जोड़ने की भी बात सुनी जा सकती है। इतना ही नहीं पुरुष आधिपत्य वाले समाज में महिलाओं को “इज्जत” का प्रतीक मानकर उसी इज्जत को नेस्तनाबूद करने के लिए महिलाओं को ही प्रताड़ना, बलात्कार का शिकार बनाया जाता है।


ऐसे हालातों में प्रश्न यह उठता है कि आखिर इज्जत का ठीकरा महिलाओं के सिर फोड़कर हम क्यों उन्हें पुरुषों का शिकार बनने देते हैं?


इस मुद्दे पर बुद्धिजीवियों का दो वर्ग अलग-अलग राय रखता है। बुद्धिजीवियों का एक वर्ग तो यह स्पष्ट कहता है कि सामाजिक मानसिकता के अनुसार महिलाओं को ही घर और परिवार की इज्जत कहा जाता है। इसीलिए जब किसी व्यक्ति को परिवार पर आघात करना होता है तो वह उसकी ‘इज्जत’ यानि महिला को ही अपना निशाना बनाता है। पारिवारिक कलह और रंजिश का बदला लेने के लिए महिलाओं के साथ ही यौन हिंसा की जाती है, क्योंकि महिला ही परिवार की कथित इज्जत है। इस वर्ग में शामिल लोगों का कहना है महिलाओं के प्रति हो रहे ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार काफी हद तक उनके सिर मढ़ी गई इज्जत ही है।


वहीं बुद्धिजीवियों के दूसरे वर्ग में शामिल लोगों का स्पष्ट कहना है कि यद्यपि महिलाओं के प्रति हो रहे ऐसे अत्याचार बेहद दुखद हैं लेकिन इनका संबंध परिवार या समाज की इज्जत से ना होकर उनकी कमजोर शारीरिक अवस्था से है। पुरुष अपनी भड़ास निकालने के लिए महिलाओं को इसीलिए निशाना नहीं बनाते क्योंकि वे परिवार की इज्जत हैं बल्कि उन्हें इसीलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं और उन्हें आसानी से दबाया जा सकता है। पुरुषों द्वारा पुरुषों पर अत्याचार इसीलिए कम किया जाता है क्योंकि समान ताकत की बात हो जाती है। इसीलिए वे परिवार या समाज की महिलाओं पर ही अपना रोष निकालते हैं। वहीं ऐसा करने का दूसरा कारण यह भी है कि महिलाओं को निशाना बनाने से उनसे संबंधित पुरुष टूट जाते हैं, मानसिक रूप से कमजोर पड़ जाते हैं जो अपने आप में एक अचूक हथियार है। पुरुषों द्वारा महिलाओं को बस इसीलिए निशाना नहीं बनाया जाता क्योंकि वे उन्हें इज्जत मानते हैं बल्कि इसलिए बनाया जाता है क्योंकि वे परिवार की सबसे कमजोर हिस्सा होती हैं जिन पर वार करना आसान होता है।


उपरोक्त मसले और समाज का आधा हिस्सा माने जाने वाली महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों से जुड़ी इज्जत की अवधारणा पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हैं, जैसे:


1. जिस इज्जत की दुहाई देकर हम महिलाओं को शालीनता का पाठ पढ़ाते हैं क्या वही इज्जत उनके सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाती है?


2. क्या वाकई महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के लिए जिम्मेदार सिर्फ उनका शारीरिक रूप से कमजोर होना है?


3. चर्चित गालियों में भी सिर्फ महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है, इस विषय में आप क्या कहना चाहेंगे?


4. महिलाओं के साथ यौन अपराध का उद्देश्य उससे संबंधित अन्य लोगों पर प्रहार करना है, तो क्या ऐसा इज्जत की अवधारणा के कारण संभव होता है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


यौन उत्पीड़न के लिए उत्प्रेरक है इज्जत की अवधारणा?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “इज्जत की अवधारणा ” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व  इज्जत की अवधारणा – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAMAN KUMAR JHA के द्वारा
April 17, 2013

हा बिलकुल सही है की महिला शारीरिक रूप से कमजोर और आकर्षन के केंद्र भी मने जाते है . और जहाँ तक महिला की बात है तो वो भी कही से भी आकर्षित करने के मामले में चुकती नहीं है.पहला कारन तो ये है DUSRA कारन ये है की JABABI कर्बी के दोरान जो JYADATI होता है USME PURI TARAH से USKE इज्जत JIMMEDAR होता है . जहा तक आज की महिला की बात करे तो वो किसी की इजजजत भी नहीं है फिर भी हुम्ला होता जा रहा है उन पर कारन यही है की वो शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से कमजोर HOTE है . तीसरा पुरुष की MANSHIKTA जो जन्मजात ही होता है . उसे हर किसी में उसे इच्छा पूरा करने की छह जगती है चाहे वो उसकी खुद की माँ बहन क्यूँ न हो . लेकिन भारत जैसे देश में माँ बहन को इज्जत समझते है ISI कारन कोई और तो नहीं लेकिन खुद उस घर के मर्द इनसे परहेज करते है. साउथ अफ्रीका जैसे देश में ये चीज तो काफी हुड तक है . वहां तो घर से सुरु जो जाते है ये कहानी लेकिन वहां इससे इज्जाजत नहीं मानते इसलिए उनको कोई फर्क नहीं परता है. फ़िलहाल मैं तो यही कहूँगा की भारतीये औरत कोई नुमैसे के बजे आपनी ताकत बधन चाहिए TAKI पुरुष से आसानी से लारा जा सके.

chaya agarwal के द्वारा
April 15, 2013

पुरुष प्रधान समाज इतना बलबान हो चूका हे की उसने अपने हेसाब से नारी को परिभाषित कर दिया हे कुछ उच्च बरगो को छोड़ दें तो हम देखती हे भारत की अस्सी प्रेतिषद आबादी गाबों में रहती हे जहा नारी को इज्जत का पहरेदार बना कर घरो में उत्पिरण किया जाता हे बीटा बेटी के सामान संस्कार ही नारी को बेहूदा आरोपों से बाहर ल सकते हे जनम से ही भेद भाव पुरुषो को घमंडी और उच्च होने का अहेसास कर देता हे असली दोषी तो माता पिता हे जिनकी बजेह से पूरी व्येबस्था ही खराब हो गयी हे ……….

bharodiya के द्वारा
April 15, 2013

चलो एकबार मान लेते है की “इज्जत की अवधारणा” ही बलात्कार के लिए जिम्मेदार है तो इज्जत का ठेका महिलाओं के सर से उतार देते हैं । याने उस पर बलात्कार कोइ करे या महिला खूद परपुरुष से संबध बनाये तो इज्जत का मामला नही बनता है । दुसरे अर्थ में रजनिश जैसा कहते थे आदमी के जीवन में सेक्स को नैतिकता से जोडा गया है वो गलत है, सेक्स किसी से भी करो कुछ गलत नही है । फिर परिणाम क्या होगा ? सेक्स ऐसी भूक है जो बढती ही जाती है और “वेराईटी” भी चाहती है । सारे फसाद की जड ये “वेराईटी” ही है । “वेराईटी” की चाह में व्यभिचार बढ जायेगा और उस के कारण हजारों कुटुम्ब तुटेन्गे और नये बनन्गे । कोइ स्थायी कुटुम्ब नही टिक पायेगा जो बच्चों की परवरिश के लिए जरूरी होता है । हमारे पूरखे पागल नही थे । उन्होंने इस “वेराईटी” को कंट्रोल करने के लिए शादी प्रथा बनाई । बीचमें तिसरा ना आये ईसलिए सेक्स को नैतिकता से जोड दिया जीस से कुटुम्ब ना तुटे और सब शान्ति से जी सके । महिला ही घर चलाती है तो वो घर की इज्जत नही होती तो क्या बाहर की महिला आयेगी इज्जत बनने ? 1. जिस इज्जत की दुहाई देकर हम महिलाओं को शालीनता का पाठ पढ़ाते हैं क्या वही इज्जत उनके सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाती है? इज्जत बहुत बडी चीज है, सिर्फ शारीरिक संबंध से मत जोडो । कोइ किसी को थप्पड या जुता मारता है तो भी दोनो दाईड की व्यक्ति की इज्जत चली जाती है । जिनको इज्जर ही प्यारी नही होती है उनको ये बात नही समजमें आयेगी । 2. क्या वाकई महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के लिए जिम्मेदार सिर्फ उनका शारीरिक रूप से कमजोर होना है? जी हां, कोइ पहेलवान की इज्जत लूट के बता दे कोइ । आज कल शैतानो की संस्कृति बढ रही है तो महिलाओं की छोडो कमजोर लडकों की भी इज्जत लूटी जा रही है । 3. चर्चित गालियों में भी सिर्फ महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है, इस विषय में आप क्या कहना चाहेंगे? गालियां तो गालिया होती है, रेन्डमली दी जाती है । मां के साथ बाप को भी नही बक्षते । 4. महिलाओं के साथ यौन अपराध का उद्देश्य उससे संबंधित अन्य लोगों पर प्रहार करना है, तो क्या ऐसा इज्जत की अवधारणा के कारण संभव होता है? फिर्फ हवस । अन्जान महिला पर होते अत्याचार को क्या कहोगे ? किसे क्या बता देना चाहता है अत्याचारी ?

aman के द्वारा
April 12, 2013

ye jo bhe hamare samaj me hoo raha hai, bahut he jayada ganda va galat hai, mae iska ouri traha virodh karta hu, lod kise ke sath aisa h=ganda kaam karne se pahele ye kyu bhool jate hai ki ye bhe kise ki maa,beti,bahen, hai…. :’(

abhishek shukla के द्वारा
April 11, 2013

पुरुष की सूच सदियों से नहीं बदली, दुःख होता है सोचकर

अमन के द्वारा
April 10, 2013

सही कहा

अमन के द्वारा
April 10, 2013

शायद

अमन के द्वारा
April 10, 2013

अच्छा लिखा है .

नेहा के द्वारा
April 10, 2013

यह तो सही है महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के लिए जिम्मेदार सिर्फ उनका शारीरिक रूप से कमजोरी है. लेकिन ऐसे कई मामले हैं जहां महिलाओं ने शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है.

    RAMAN KUMAR JHA के द्वारा
    April 17, 2013

    BILKUL KARNA CHAHIYE NEHA HI ISI LIYE TO DEVI KI AVATAR MANA GAYA HAI . LEKIN WO AAPNA KARNA CHHORKAR NUMAIS MEIN LAG GAYI HAI AUR KHUD HI MARDO KE SAMNE PROSANE KO TAIYA HO JATI HAI. BANO NA JHANSI KI RANI.JO PURE ANGREJI SHASHAN SE TAKKAR LE DIKHA DIYA TO EK DO MARD KYA HAI.

nagesh khare के द्वारा
April 9, 2013

अपने यौन-उत्पीडन के लिए स्त्री स्वयं ज़िम्मेदार है उसने अपनी देह को उपभोग की वस्तु खुद बनाया है | पूरी दुनिया में अगर आज नारी अपनी काया का खुलेआम प्रदर्शन बंद कर दे तो यौन-उत्पीडन अपनेआप बंद हो जायेंगे | नग्न-प्रदर्शन को देश में आधुनिकता का पैमाना मान लिया गया है जिसका दुष्परिणाम आज सामने है | स्त्री अपनी देह को बिकाऊ व प्रदर्शन की वस्तु न बनाए तो यौन-उत्पीडन खुद-ब-खुद बंद हो जाएगा | विपासा, मल्लिका, राखी. सनी लिओन,वीना मालिक…… आदि तमाम कामुक तारिकाएँ हैं जो परदे पर अपने जिस्म के एक एक अंग दिखाती हैं जिससे युवाओं में यौन-कुंठा पनपती है और विवाह की औसत उम्र २८ होने के कारण उनको यौन सुख की स्थाई व्यवस्था देर से होती है| अब ऐसे में यौन-अपराध लाज़मी हैं…….

tamanna के द्वारा
April 8, 2013

बहुत अच्छा इश्यू उठाया है.. इज्जत का बोझ महिलाओं के कांधे पर डालकर हम उन्हें एक तो कमजोर कर देते हैं वहीं दूसरी ओर उन्हें एक आसान शिकार भी बना देते हैं. क्योंकि जो भी परिवार पर हमला करना चाहेगा वह उसकी इज्जत यानि महिला को ही आहत करेगा.

    Bikram Prajapati के द्वारा
    April 15, 2013

    महिला समाज की रीढ होती है उसके बिना तो परिवार समाज देश अधूरा है इज्जत हमारा संस्कार है संस्कार के बिना मानव अधूरा है 


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