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क्या अरविंद केजरीवाल का संघर्ष एक छलावा है ?

Posted On: 1 Apr, 2013 में

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आम जनता की हालत में अहम परिवर्तन लाने के मकसद से कभी टीम अन्ना के सदस्य रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल बिजली-पानी के दामों में हुई बढ़ोत्तरी के विरोध में अनशन पर बैठे किंतु उन्हें अपेक्षित जन समर्थन हासिल नहीं हुआ। जबकि पिछली बार जब जनलोकपाल जैसे मुद्दे को उठाकर अन्ना हजारे भूख हड़ताल पर गए थे तो मीडिया के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजरें उन पर टिकी थीं। किंतु अब अलग-थलग पड़ गए अरविंद केजरीवाल किसी भी परिदृश्य में नहीं रहे। ना ही उन्हें मीडिया फोकस कर रही है और ना ही जिस जनता के लिए उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर अनशन ठाना उसने ही उन्हें महत्व दिया। हालांकि इससे पहले जब अनशन करने के लिए अन्ना हजारे सामने आए थे तब क्या आम क्या खास सब के सब उनके साथ जुड़ने के लिए बेताब थे। आम जनता अन्ना की एक झलक पाने के लिए भीड़ जुटाया करती थी, उनके समर्थन में नारे लगाती थी और हर बड़ा राजनेता उनके साथ मंच साझा करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करता था। इतना ही नहीं नामचीन सिलेब्रिटीज तक ताक लगाए बैठते थे कि कब उन्हें निमंत्रण आए अन्ना के समर्थन में भाषण देने का। लेकिन अब जब अरविंद केजरीवाल अकेले अपने दम पर लड़ रहे हैं तो उन्हें कोई भी पूछने वाला नहीं रहा।


जनता द्वारा अरविंद केजरीवाल के आंदोलन से मुंह मोड़ लेने के बाद बने सामाजिक और राजनीतिक हालातों पर बहस करने के लिए बुद्धिजीवियों के दो वर्ग बन गए हैं। दोनों वर्गों के लोग अरविंद केजरीवाल और उनके द्वारा किए जा रहे अनशन को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं।


कुछ लोगों का कहना है कि आज जबकि हर क्षेत्र में राजनीति हावी है और भारत की राजनीति को तो वैसे भी स्वार्थ की राजनीति का ही दर्जा दिया जाता है तो ऐसे में अगर कोई भी व्यक्ति समाज सुधार की दिशा में अपने कदम बढ़ाता है तो उसके उद्देश्यों को भुलाकर उसके हर कदम को राजनीति से प्रेरित मानकर नकार दिया जाता है। आमजन की मूलभूत जरूरत बिजली के बढ़ते दामों को वापस लेने के लिए अरविंद ने सरकार पर जोर देना चाहा। लेकिन जिस जनता के लिए वह यह कर रहे हैं वही उन्हें समर्थन देने के लिए तैयार नहीं है और वो भी बस इस आधार पर क्योंकि जनता अरविंद केजरीवाल का राजनीति की ओर रुख करने जैसी मंशा को पचा नहीं पा रही है। राजनीति को आजकल गंदगी माना जाने लगा है और यह भी कहा जाता है कि बिना इस गंदगी में उतरे इसे साफ करना नामुमकिन है। ऐसे में अगर अरविंद केजरीवाल स्वस्थ राजनीति का स्वप्न सजाए उसमें उतरना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है?


वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं जो यह साफ कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल का कोई भी उद्देश्य जन हितार्थ नहीं है। वह पूरी तरह राजनीतिक मंतव्यों को साधने की फिराक में हैं जिसके लिए वह जनता को माध्यम बना रहे हैं। जनता उनकी राजनीतिक मंशाओं को समझती है इसीलिए अरविंद को समर्थन देने से बच रही है। वह जानती है कि राजनीति में कदम रखने के बाद कोई भी व्यक्ति जनता का हितैषी नहीं रहता। सत्ता के नशे में चूर वह सिर्फ वही निर्णय लेता है जिससे वह अपनी कुर्सी को बचाए रख सके। राजनीति के मैदान में कई ऐसे व्यक्तित्व मौजूद हैं जो भोलीभाली जनता की संवेदनाओं का फायदा उठाकर राजनीति में प्रदार्पित तो हुए लेकिन कुर्सी संभालते ही वह सारे वादे भूल गए जो कभी उन्होंने जनता के साथ किए थे। अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक पार्टी (आम आदमी पार्टी) अगर सरकार बनाने में सफल हो जाती है तो जाहिर है वो भी ऐसा ही करेंगे। जनता समझदार है इसीलिए वह उन पर विश्वास नहीं कर रही है।


जनता द्वारा अरविंद केजरीवाल के आंदोलन में शामिल ना होने से जुड़े दोनों पहलुओं पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने प्रस्तुत हैं, जैसे:


1. अरविंद केजरीवाल क्या वाकई सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ आधारित राजनीतिक मंतव्यों से प्रेरित होकर अनशन पर बैठते हैं?

2. अन्ना का आंदोलन उस नतीजे तक नहीं पहुंच पाया जिसकी उम्मीद थी क्या उस हार का असर तो केजरीवाल पर नहीं पड़ रहा है?

3. कोई भी आंदोलन हो यह समझ लिया जाता है कि वह राजनीतिक हथकंडा है तो क्या हमारी इसी मानसिकता का खामियाजा अरविंद केजरीवाल के आंदोलन और संघर्ष को भुगतना पड़ रहा है?

4. राजनीति में उतरने का अधिकार हर भारतीय को है और अगर अरविंद ऐसा कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या है?

जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या अरविंद केजरीवाल का संघर्ष एक छलावा है ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “केजरीवाल का अनशन ” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व  केजरीवाल का अनशन – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।



धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Raj Shekhar के द्वारा
April 26, 2016

No!!

    Raj Shekhar के द्वारा
    April 26, 2016

    Ekdam sahi!

    Raj Kamal के द्वारा
    April 26, 2016

    Mast

Ajay Singh के द्वारा
July 2, 2013

अरविन्द जी जो कर रहे हैं वो एक दम सही है। मीडिया बिकी हुई है या बुरी तरह नियन्त्रण में है।  जनता का समर्थन चुनाव में ही पता चलेगा। वैसे भी अरविन्द जी सत्ता संर्घष  नही कर रहे हैं वो तो एक विकल्प के रुप मे जनता के सामने है और राजनीति के खेल के नियम  बदलने के लिये हैं।

mrityunjay prasad mishra के द्वारा
April 22, 2013

Arvind kejriwal ji is nice leader but his opnions and decisions are sometimes misleading and childish.His team is not so eligible that we may expect something revolutionary in indian politics. However , he needs a national agenda and extensive support to make his party strong.

Ajay Singh के द्वारा
April 22, 2013

अरविन्द  जी का आन्दोलन छलावा नहीं है और न ही उन्हे कम समर्थन मिल रहा है। वो जो कर रहे हैं वो महान कार्य है। सत्ता और पैसे ने मीडिया का मुह बन्द कर रखा है। मीडिया ही अरविन्द जी को कमजोर करने को प्रयास कर रहा है।

Subodh Senger के द्वारा
April 8, 2013

Mughe Ye samajh nahi aa raha hai ki Kyon log Arvind Kejriwal ka support kar rahe hai?? Kejriwaal Tab tak thik tha jab tak usne koi rajneetik Dal nahi banaya tha.. mai Kuchh sawaalo puchhunga jiske jawaab agar arvind ya unki team ka koi bi sadashya de dega to i will support. Ye sab Ek Pre-Planned hai kewal BJP ka nuksaan karne ke liye or Congress ko fir se Jitaane ke liye Why you people are making fool to us. we know that very well ” No bady can live one day without water” If he has sugar problem. we know that Arvind has Sugar Prob.. Dont Make Us Fool…….. ૧. जब केजरीवाल ने माँ भारती का चित्र आन…्दोलन से ये कहकर हटाया था की माँ भारती का चित्र सांप्रदायिक हैं ..इससे हिंसा भड़केगी तब “AAP” कहाँ थे ? ૨. जब केजरीवाल ने ईद की बधाई दी व दिवाली को इग्नोर कर दिया तब ” AAP” कहाँ थे ? ૩. जब केजरीवाल जी का दोस्त प्रशांत भूषण ने कहा की कश्मीर पकिस्तान को दे देना चहिये ताकि समस्या ख़तम हो सके तब ” AAP” कहा थे ? ૪. जब केजरीवाल टीम के कुमार विश्वास भरी सभा में भगवान् शिव जी का अपमान करते नज़र आ रहे थे तब” AAP” कहाँ थे ? ૫. जब केजरीवाल टीम की शालिया इजमी ने हिन्दुओ के भाग्यलक्ष्मी मंदिर को तोड़ने में ओवेशी का समर्थन किया था तब”AAP” कहाँ थे / ૬. जब केजरीवाल ने आरएसएस को आतंकवादी संगठन कहा था तब “AAP”कहाँ थे ? ૭. जब केजरीवाल ने मुस्लिमो को 11 % आरक्षण का समर्थन किया था तब “AAP” कहाँ थे ? ૮. जब केजरीवाल बुखारी को देशभक्तव बाबा रामदेव को मुर्ख कह रहा तब “AAP” कहाँ थे ? ૯. जब केजरीवाल के सहयोगी संजय सिंह ने मोदी जी को हत्यारा व कातिल कहा तब “AAP” कहाँ थे ? ૧૦. जब भूषण परिवार पर भ्रष्ट्राचार के आरोप लगे और केजरीवाल ने जांच तक नहीं कराई”AAP” तब आप कहाँ थे ? ૧૧. जब केजरीवाल ने मोदी जी पर अनैतिक सम्पति रखने का आरोप लगाया और कोर्ट ने इसे गलत करार दिया तब “AAP” कहाँ थे ? जय हिन्द —See More

ram के द्वारा
April 8, 2013

राजनीतिक पार्टियाँ तो बहुत पहले से ही थीं आम जनता तो भ्रष्टाचार से परेशान है. कुछ उम्मीद जगी थी आन्ना हजारे जी के आन्दोलन से किन्तु सब मेम्बर अलग थलग हो गए. अब इन्हें फिर से एक होकर भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की मुहीम चलानी होगी.

Puru के द्वारा
April 8, 2013

Bhartiye rajniti me Kejriwal jaise logo ko sakht jaroorat hai.. Sare desh aage ki or jaa rahe hain.. USA humesha apne desh ke bare me sochta hai.. wahan ke politicians country ko pahle rakhte hain party and politics ko bad me isliye itne saal beet gaye aur na jane kitne saal aur bhi beet jayenge bt vo sari duniya ko lead kar rahe hain aur karte rahenge.. China ke bare me bhi aisa hi kaha ja sakta hai.. jis bhi desh ke leader aur log apne desh ki izzat aur samman ko pahle rakhta hai wahi sahi mayno me super power ho sakta hai.. 1.25 crore ki aabadi wale desh hain hum aur chhoti moti bato ke liye bhi hum in countries ki or dekhte hain.. itne sare population hone ka mutlab hai humare pas sabse jyada engineers sabse jyada doctors sabse jyada scientists ho sakte hain agar unhe sahi aur sasti padhayi mile.. fir hum kisi helicopter ke liye Italy nahi jayenge.. army ke kapdo ke liye, boots ke liye videshiyon ko paisa nahi denge.. koi videshi saman hum kyun kharidenge jab humare yahan khud hi inka production hoga??/ Bt aisa nahi hoga kyuki humare yahan leaders kewal apni aur apni party ka sochte hain.. Manmohan singh ji, Narendra modi ji ya koi aur pahle apni kursi dekhte hain.. UPA ki jab se 2nd term govt bani hai tab se Sonia ji is sochh me padi hain ki kursi kaise bacha ke rakhha jaye.. koi bhi govt tab tak koi kaam thik dhang se nahi kar sakti jabtak vo surakshit nahi hogi.. aur yahan leaders uff mat puchhiye.. ek ek banda kitne crore dakar jata hai aur aam janta bhookho mar rahi hai.. ye aadmi hain ya janwar?? Main noida sec 63 office roj jata hu wahan ek canal hai us canal ke pas kuchh log temporary cnopy laga ke rah rahe hain.. subah subah sare log us gande nale me snan karte hain .. usi gande pani se khana banate hain jisme kafi sare log peshab karte hain.. kitne sharm ki baat hai ye.. ek aisa country jo duniya ka ek bahut bada economy power hai uska ek leader arbo rupay dakar jata hai.. uske kutte bhi alishan fawware me nahata hai aur usi ke desh ka ek nagrik… chhi.. Hume sharm aati hai ye kahte huye ki hum us bharat me jee rahe hain jahan ke logon me Raja Harishchandra, Dashrath, Bhishma aur Maharana Pratap jaise log huye hain… Agar aapme jara bhi sharm shesh bacha hai to aap unki madad karen jo logo ke liye lad rahe hain… Agar Kejriwal kal beimaan bhi ho jaata hai to itna tay hai in baaki netaon se achha jaroor rahega.. aur waise bhi vo beimaan nahi ho sakta agar vo chaahe to bhi.. Agar vishwas nahi hai to aap apna fayda, jatiwad aur lalach chhor kar apne dil se poochhiye.. Thanks

Rakesh Agarwal के द्वारा
April 7, 2013

अरविन्द को कांगेस ने मीडिया के द्वारा जाल मे फसा लिया है

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 7, 2013

श्रद्धेय वर , प्रणाम !……… भीड़ हमेशा तमाशा चाहती है और निश्चय ही अरविन्द केजरीवाल का अनशन तमाशा नहीं है तो वहां भीड़ लगेगी कैसे ? अच्छे लोगों को राजनीति में न जाने की वजह से आज राजनीति मात्र नौटंकी और निकृष्टतम देहधारी जीव-जंतुओं का जमावड़ा तथा भ्रष्टाचारियों का केंद्र बनकर रह गई है ! आज माननीय अन्ना जी भी धीरे-धीरे सबकुछ समझ रहे हैं और केजरीवाल के करीब होते प्रतीत हो रहे हैं ! वाद- विवाद का अच्छा विषय आप ने चुना है | तदर्थ आप को बहुत-बहुत धन्यवाद ! पुनश्च !!

kundan kumar kaushik के द्वारा
April 7, 2013

hA YE EKK CHALAWA HAI

Rahul Maurya के द्वारा
April 6, 2013

केजरीवाल का अनशन – Jagran Junction Forum  According to me Arvind Jee is Not Doing Any Chhalava. He wanted to do Something Good with All common Man.He tried to do all the thing but he was not successfull. If he entering i politics then i think its good for all of us. we all have to support Arvind Jee.

Gyanendra dwvedi के द्वारा
April 6, 2013

i know you will not post this comment on the site and no need to display it because this is only for you and your media family. you people(media) never did a single thing for country. you think only how to make a spicy story. media is really curse for society.media did not show even a single point related to kejriwal fast. but you show many point related to sanjay dutt because he is actor and he made a little mistake in your opinion.

Ram sevak shakya के द्वारा
April 6, 2013

nahi

charu के द्वारा
April 5, 2013

arvind kejrival is a good leader .he wants to do gud for this country.he really wants to bring changes in india.we really support him and always with himin all his gud deeds for nation.india really needs a leader like him who do not support any religion or any cast but want to do gud for whole country to remove corruption.we support arvind kejrival.salute to him.

vijay के द्वारा
April 5, 2013

अरविन्दजी का संघर्ष छलावा नहीं है. राजनीतिग्य के चस्मेसे देखेगे तो छलावा है अन्यथा एक प्रमाणिक हेतु से किया हुआ सामाजिक कार्य है. अरविन्दजी को अपना कार्य जारी रखना चाहिये. अन्ना हजारे और आम पार्टी ये दोनों संघटन आने से भारत की राजनीती ने अलग मोड़ लिया. जिनके कारन लोग राजनीती और राजनीतिग्य को जानने लगे. इसका प्रभाव आनेवाली सभी चुनाव में दिखेगा.

jagojagobharat के द्वारा
April 5, 2013

अरविन्द केजरीवाल की राजनीती पूरी तरह फेल हो गई पिछले १२ दिनों से बिजली पानी के मुद्दे पर अनसन पर बैठे अरविन्द ने कई सपने संजोये थे लेकिन जितना समर्थन उन्हें मिलना चाहिए था वो नहीं मिला इसके पीछे के करनो में जाये तो अरविन्द ने क्या क्या गुल खिलाये अपनी राजनीती चमकाने के लिए समझा जा सकता है कभी अन्ना के खिलाफ बोला तो कभी किरण बेदी के खिलाफ और अपनी मह्त्वकंषा के चलते वो सब से दूर हो गए अन्ना के आन्दोलन को अभी अधिक दिन नहीं हुए थे लेकिन उससे पहले ही केजरीवाल ने अपना स्वार्थ जग जाहिर कर दिया जिसका नतीजा आज देखने को मिल रहा है देश का युवा वर्ग आज बहुत बुद्धिमान हो गया है और अब उसे कोई ठग नहीं सकता .अन्ना के आन्दोलन को भले ही सफलता नहीं मिली हो लेकिन अन्ना ने आम आदमी के दिल में अपनी अलग जगह बना ली है जो कभी कह्तं नहीं होगी .जहा तक राजनीती करने के अधिअक्रो की बात है तो यह सही है की सबको अधिकार है लेकिन आप पहले जनता को सब्ज बाग़ दिखाते है और तुरंत ही अपना स्वार्थ जगजाहिर कर देते है तो जनता जो की पिछले ६५ वर्षो से भुगत रही है वो आप पर कैसे विस्वाश करेगी .केजरीवाल के स्वार्थ की पूर्ति अभी नहीं हो सकती उनके लिए दिल्ली अभी बहुत दूर है

Arun Dhariwal के द्वारा
April 5, 2013

नही, ये छलावा नहीं है, वो तो आम लोगो के लिए भूखा रह रहा है जो हम सब को करना चाहिये, वो कर रहा है बस हमे तो उसका साथ देना चाहिए

naveen के द्वारा
April 5, 2013

aapne es post ka jo title rakha hai,vo bahut hi behuda aur niraasajanak hai,ak baar ansan sthal jake dekhiye tab dudh ka dudh aur paani ka paani ho jayega. congress bjp bhai bhai

Rajeev Varshney के द्वारा
April 4, 2013

अन्ना और अरविन्द केजरीवाल के अनशन में एक बुनियादी फर्क है. भारतीयों के लिए अन्ना उनके जैसे एक आम नागरिक थे और उनका अनशन निस्वार्थ भाव से आम जन के हित के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर था. वही अरविन्द अब एक राजनेता है और बिजली की बढ़ी दरो को लेकर किया गया उनका अनशन लोगो के गले नहीं उतर रहा है. लोगो को लगता है की वे आने वाले दिल्ली विधान सभा चुनावों में उनसे अपने आंदोलनों केआधार पर वोट मांग सकते है. मीडिया में भी उनके अनशन को मामूली स्थान ही मिल सका. राजनेताओ के प्रति देश के लोगो में तनिक भी सम्मान नहीं रह गया है. शायद यही वजह है की अरविन्द केजरीवाल के अनशन को अन्ना के मुकाबले मामूली समर्थन मिल सका. अरविन्द को अपने राजनितिक पार्टी बनाने के निर्णय पर पुनर विचार करने की आवश्यकता है. 

Rajeev Varshney के द्वारा
April 4, 2013

अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल के अनशन में बुनियादी फर्क है. अन्ना का अनशन निस्वार्थ भाव से आम जन के हित में एक कानून पास करने के लिए किया गया था. लोगों के लिए अन्ना एक आम आदमी थे. जबकि अरविन्द केजरीवाल का अनशन एक राजनितिक पार्टी के मुखिया द्वारा किया जा रहा अनशन है. दिल्ली के नागरिकों को पता है की आगामी विधान सभा चुनावों में केजरीवाल की पार्टी उनसे इस आधार पर वोट मांग सकती है. इसलिए अरविन्द के अनशन को अपेक्षित जन समर्थन नहीं मिल सका. अरविन्द के अनशन को पर्याप्त समर्थन न मिलने का एक कारन यह भी है की भारत के नागरिकों के मन में राजनेताओं के प्रति बिलकुल भी सम्मान भाव नहीं रह गया है और अरविन्द अब एक राजनेता है.

deveshsharma के द्वारा
April 4, 2013

Sachi baat kahi thi mene Logon ne suli pe chadaya Mujhko zehar ka jam pilaya Phir bhi unko chain na aaya Sachi baat kahi thi mene… Leke jahan bhi waqt gaya hai Zulm mila hai zulm saha hai Sach ka ek inaam mila hai Sachchi baat kahi thi mene…. Sabse behtar kabhi na banna Jag ke rehbar kabhi na banna Peer payambar kabhi na banna Sachi baat kahi thi mene… Chup reh kar bhi waqt guzaro Sach kahne pe jaan mat waro Kuch to seekho mujh se yaaron Sachi baat kahi thi mene.

Chaya Agarwal के द्वारा
April 3, 2013

जिस देश की जनता इतनी पत्थर दिल है, उस जनता के लिए केजरीवाल खुद को इतनी शारीरिक यातना क्यूँ दे रहे हैं. मैं उनसे हाथ जोड़ के प्रार्थना करती हूँ की वो अपना अनशन वापस ले ले.

Sushma Gupta के द्वारा
April 2, 2013

मैं इस बात से सहमत हूँ कि कोई भी आन्दोलन ”केवल एक राजनीतिक हथकंडा ही करार दिया जाता है , जवकि यह बिलकुल भी न्याय -सांगत नहीं है, ऐसे तो देश को लूटने बाले सदा ही लूटते ही रहेंगें ,यदि कोई अपने जीवन की कुर्वानी देकर अपनी वेदाग छवि के साथ देश को वचाने की हिम्मत करता है तो उसे नकारना जनता एवं देश की एक बड़ी भूल होगी ,जिसका परिणाम जनता को भी भुगतना पड़ेगा,यही समय है जब जनता एकजुट होकर अरविन्द के माध्यम से देश को एक नई आशा की ओर ले जा सकती है ,यहाँ संभावनाए निश्चित ही नजर आती है…

ramanand rai के द्वारा
April 2, 2013

आम आदमी के लिए एक दिन भुखा रहना कठीन हो जाता है । वह 11 दिन से भुखे है,यह छलावा नही बऴकि जनमानस को जगाने का प्रयास है।

rppandey के द्वारा
April 2, 2013

बिलकुल नहीं ,लेकिन जनता का बिश्वास अब इस तरह के आन्दोलनो में नहीं है , अब लोग आर-पार की लड़ाई चाहते है .जांच का झुन झुना थमाकर लोगो को चुप कराने का समय ख़त्म हो चुका है .अब लोगो का बिश्वास उसी आन्दोलन पर होगा जो साफ़ साफ़ बताए की इन एक करोर नेता और कर्मचारियों का जो आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे है ए क्या करेगे .पत्थर और लेपटाप पर जनता की गाढ़ी कमाई खर्च करने वालो को ए क्या सजा देगे और उसको वसूलने के लिए कौन सा तरिका अपनायेगे .

Jagran Junction Forum के द्वारा
April 2, 2013

Test Comment

Jagran Junction Forum के द्वारा
April 2, 2013

Test

शिरीष के द्वारा
April 2, 2013

मुझे नहीं लगता है कि यह मात्र एक छलावा है. सारी राजनैतिक बिरादरी से हट कर इस प्रकार का प्रदर्शन करना और परिस्थितियों से जुझना अपने आप ही खुद को इस राजनैतिक दलदल से दूर निकालता है.

saroj kumar के द्वारा
April 1, 2013

आज हमारे देश का जो भी बदहाली है, उसके लिए सिर्फ हमलोग ही जिम्मेवार हैं. यहाँ के जनता की मानसिकता ही बहुत ओछी हो गयी है. खुद तो कुछ करते नहीं, अगर कोई देश के हित में कुछ करना चाहे तो ऊँगली करने के लिए सभी को दिमाग हो जाता है. अगर इतना ही दिमाग होता तो कांग्रेस में इतना भ्रष्टाचार होते हुए भी, इतनी बार सत्ता में नहीं आता. जिस देश में लोग, हिंदी बोलने में सर्म और अंग्रेजी बोलने में फक्र महसूस करते हो,उस देश का भविष्य क्या हो सकता है. ऐसे ही अंग्रेजों ने थोरे ही ४०० साल तक हमें गुलाम बना के रखा. पर दुक्ख के बात तो ये है की अभी भी हमारे देश की जनता नींद से जागना नहीं चाहती.मालूम नहीं केजरीवाल को भी इस कुम्भकरण जनता को जगाने की क्या धुन सवार हो गयी है जो अपनी जान देने के लिए अन्न-सन्न करने बैठ गया है.

minakshi pandey के द्वारा
April 1, 2013

NO, NOT AT ALL . I BELIEVE HE CANT BE SO SELFISH ABOUT POSITION, MONEY OR FAME LIKE ANY OTHER POLITICIAN. AS HIS PAST SPEAKS ABOUT HIS PERSONALITY.

R P Pandey के द्वारा
April 1, 2013

बिलकुल नहीं !बस लोग आन्दोलनो से ऊब गए है .अब लोग चाहते है की कुछ ऐसा किया जाय जिसका सकारात्मक नतीजा सामने आये .क्योकि नतीजा अब तक उलटा ही आया है .जे पि आन्दोलन से उपजे माननीयो ने कितना छल किया है यह किसी से छिपा नहीं है .केजरीवाल के इमानदारी पर किसी को कोई शक नहीं है लेकिन सबका यही मानना है की अगर इ सत्ता में आ भी गए तो भ्रष्टाचारियो का जांच के शिवा कुछ नहीं कर पायेगे .अब जनता चाहती है की कोई ऐसा आये जो नेता जी की तरह कहे की तुम मुझे………..अर्थात तुम मुझे बोट दो मै सभी बेइमानो को जेल भेजुगा चाहे उनकी संख्या कई लाख ही क्यों न हो .

Anurag Singh Rana के द्वारा
April 1, 2013

अरविंद केजरीवाल का संघर्ष एक छलावा है

तमन्ना के द्वारा
April 1, 2013

अरविंद की मंशा साफ है कि वे राजनीति में जाना चाहते हैं. लेकिन वह जो भी कर रहे हैं जनता के लिए ही कर रहे हैं. हमें उनके आंदोलन से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए,.


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