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क्या यौन अपराधों को बढ़ावा देता है युवाओं का प्यार?

Posted On: 25 Mar, 2013 में

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पिछले कई दिनों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया एंटी रेप बिल चर्चा का विषय बना हुआ है। बिल का पक्ष लेने वाले तो कम ही लोग दिखे लेकिन इस बिल के अनुसार महिलाओं को घूरने और उनके पीछा करने जैसे क्रियाकलापों को अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया। हालांकि कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया. गौरतलब है कि शरद यादव ने यह बयान दिया कि अगर लड़के लड़कियों का पीछा नहीं करेंगे तो प्यार कैसे होगा, उनमें प्रेम के बीज कैसे पनपेंगे। भले ही एंटी रेप बिल के इन प्रावधानों पर चुटकी लेते हुए शरद यादव ने यह बयान दिया हो लेकिन उनके वक्तव्यों पर एक नई बहस चल पड़ी है। कहा जा रहा है कि अगर महिला को घूरना, उसका पीछा करना अपराध है तो प्रेम संबंध का हवाला देकर शरद यादव ने इस अपराध को एक तरह से जायज ठहराने की कोशिश की है। अब जबकि यह बयान एक विवादास्पद मसला बनकर सामने आया है तो यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर प्रेम ही सब परेशानियों की जड़ है तो क्यों ना इसी पर प्रतिबंध लगा दिया जाए?


वे लोग जो प्रेम को युवाओं के लिए सबसे अधिक घातक करार देकर इसका विरोध करते हैं उनका कहना है कि प्रेम संबंध स्थापित करने का सबसे बड़ा दुष्परिणाम है अपने कॅरियर के साथ खिलवाड़। प्रेम भावनाओं से वशीभूत होकर युवा अपने भविष्य के लिए सही निर्णय नहीं ले पाते। वह अपने कॅरियर से मुंह मोड़ लेते हैं और आगे जाकर यही उनके पतन का कारण बनता है। प्रेम का दूसरा दुष्परिणाम यह है कि आप जिससे प्रेम करते हैं उस पर बहुत ज्यादा विश्वास करने लगते हैं। जाहिर है जहां विश्वास होता है वहीं विश्वासघात भी होता है और धोखा खाने के बाद आप खुद को संभाल नहीं पाते। आगे बढ़ने की उम्र में आप अपनी जिंदगी तबाह कर लेते हैं। जब किसी के साथ भावनात्मक तौर पर ज्यादा जुड़ाव महसूस कर लिया जाता है तो आपकी सोचने-समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है, आप वास्तविकता से बहुत दूर चले जाते हैं। इतना ही नहीं लड़का और लड़की के संदर्भ में हालात समान रूप से नकारात्मक होते हैं क्योंकि आप यह नहीं कह सकते कि कौन आपको धोखा दे देगा। धोखा मिलेगा यह तो निश्चित है लेकिन कौन किस तरह आपके साथ छल करेगा यह नहीं कहा जा सकता। इसीलिए अगर अपराध रोकने हैं तो प्रेम पर प्रतिबंध होना ही चाहिए।


प्रेम का पक्ष लेने वाले लोगों का कहना है कि यह व्यक्तिगत आजादी का प्रश्न है और किसी भी रूप में निजी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध मानवीय संप्रभुता पर आघात होता है। प्रेम का सबसे पहला और महत्वपूर्ण फायदा है कि यह निजी आकांक्षाओं को उड़ान देता है और साथ ही पसंदगी के स्वाभाविक सिद्धांत को भी परिपुष्ट करता है। दूसरी ओर निर्णय लेने की क्षमता और प्रेम की राह में आने वाले विभिन्न उतार चढ़ाव से गुजरने के बाद विवेक सम्मत निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। परिणामों की चिंता करके प्रेम पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध एक ऐसा कदम होगा जैसे किसी को जीवन के अनुभवों से विमुख कर दिया जाए। व्यक्ति को सही और गलत की पहचान अनुभव लेने के बाद ही होती है। प्रेम संबंधों और प्रेम भावनाओं का अनुभव लेने के बाद ही उसे समझ में आता है कि उसके लिए क्या सही है, क्या नहीं और जाहिर है यह अनुभव भी व्यक्ति दर व्यक्ति विभिन्न प्रकार के होते हैं इसीलिए सार्वभौमिक तौर पर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता और ना ही नतीजों को समान रूप से सभी पर लागू किया जा सकता है।


युवा लड़के-लड़कियों के प्रेम से जुड़े दोनों पक्षों, उसके प्रभावों के बारे में चर्चा करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना हमारे लिए नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. क्या महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों का एक कारण प्रेम भी है?

2. क्या प्रेम के कारण युवाओं की विवेकशक्ति और निर्णय क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है?

3. प्रेम का संबंध भावनाओं से है। इसके व्यवहारिक पक्ष को प्रमुखता देना कितना सही है?

4. क्या व्यक्तिगत आजादी के नाम पर प्रेम में पड़े युवा स्वयं ही विनाश को आमंत्रण दे रहे होते हैं?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या यौन अपराधों को बढ़ावा देता है युवाओं का प्यार?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “युवाओं का प्यार”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व युवाओं का प्यार – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

prashant choubey के द्वारा
April 4, 2013

मित्रों कुछ दिनों पहले एक प्रमुख समाचार पत्र में महिला अपराधों के ऊपर एक सर्वे करवाया था। इस सर्वे में दो सवाल पूछे गये थे। 1. पहला सवाल था- क्या सख्त कानूनों से महिला अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। इस सवाल पर 59 फीसदी लोगों ने हाँ में जवाब दिया जबकि 41 फीसदी लोगों ने ना में जवाब दिया। 2. दूसरा जवाब था- क्या सामाजिक संस्कार महिला अपराधों के खिलाफ कानून से ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं इस सवाल पर 95 फीसदी लोगों का जवाब हाँ में था जबकि 5 फीसदी लोगों का जवाब ना में था। इसका मतलब साफ है कि सामाजिक संस्कारों से महिलाओं पर होने वाले अपराध कम किये जा सकते है । महिलाओं पर ही क्या अपितु हर तरह के अपराधों में कमी लायी जा सकती है। परन्तु चिन्ता की बात ये है कि कोई संस्कार अपनाने को तैयार ही नहीं अपितु संस्कारों को रुढ़िवादिता एवं पिछड़ी मानसिकता से जोड़कर इसका बहिष्कार ही किया जा रहा है ऐसा प्रतीत हो रहा है।

manoj के द्वारा
April 4, 2013

mera ye nhi manana h ki prem k karn ye sab hota h in sab ka karna to vinaskari soch ha jo aajkal k yuwao mein kisi b ladki k liye ho rhi h in sab ka karan yuwaho mein in sab ki jankari ki kami abhibhawako ki pyar ki kami b ha parem ko dosh na de wo to ek esi feelings h jo sirf dil mein uthati hai……

chandan kumar pandey के द्वारा
April 4, 2013

अगर प्यार सच में गलत हैं तो मैं भी इसे बंद करने की अपील करूँगा लेकिन हमें नही लगता हैं की प्यार करना या प्यार करने वाले अपराध को बढावा देते हैं | प्यार करना कोई गलत नही है | अरे हा प्यार तो दोनों तरफ से होता हैं न पर हमारी सरकार ने तो बस एक साइड को ही अपराध बोल होगा हैं न | मेरे देश की रखवालो कुछ और सोचे ऐसा मेरा अपील हैं आपसे | – देश का भविष्य ,, चन्दन कुमार पाण्डेय

Jyoti के द्वारा
April 4, 2013

Ek ladka thha seeda sada medium class ka, use God se humse prem thha, gum ho khushi bus God ko humsa yaad karta lekin jab uski job lagi to use ek ladki mili jise usse pyar ho gaya wo ladki bhi usse pyar karti thi lekin ladka ladki se bhi jada darta thaa kynoki wo apne parivar se bhi utna hi pyar karta thaa, ladka ladki milte lekin sabhi ke samne kyonki ladka pyar k sahi matlab ko sabhi batana chata tha, wo kahta ki hum sabhi ko bata kar k sabhi ki rja mandi le kar k hi shadi kare hi hum 2 in 1 honge. lekin ladki ko laga ki ladka darta hai.. baat to uski sahi thi lekin ladki ladke ki baat ko nahi samajh saki wo ladka is samaz se pyar k naam ho rahe dhookon ko bewafai ko rokna chata thha lekin ladki nahi samjhi pr usse pyar ka ashas diltai rahti, ladka bhi use samjhata rahata, issi beec me un dono ke gharwalon ko pata lag gai, ladka & ladki alag ho gaye 1 1/2 year wo dono alag rahe ladka sirf uske hi intzar me thaa ki ek din wo phir milenege lekin achanak hi pata laga ki ladki ko kisi or ladke ne utha liye, ladki k ghar walon ne usi ladke se madut mangi or bole ki hum teri shadi isi se kara denge lekin ladki ki khoz karwa do, us ladke ko Zhatka zoor se laga kyonki uske pyar ko koi or utha kr k le gya tha. usne din raat ek kar diye lekin after 1 week wo police ne pakad liye, ladke ko gussa to poora aa raha thaa wo phir bhi unke ghar walon k samne chup raha, ladki ne kaha ki ab kisi ke liye bhi nahi rahi, mujhe maar do, lekin uske gharwale samajhate rahe lekin wo manne ko tayar nahi hui, haar kar ke ladke ko laga ki Galtiyan to insan se hi hoti hai chae wo chhoti ho ya badi, lekin ladke ne kaha ki wo uske Body nahi uski Aatma or uske dil se pyar karta hai, usne ladki ko samjhaya or usse mana liyea. wo ladki ladke k pita k kahne pr ladke k ghar pr hi chali gai, lekin ladke k pita ne kaha ki beta ab ye ladki or uske ghar wale pareshan hai isko pahle sambhal zane de phir dekhte hai, lekin zab tak tujhe is ladki se ddor rahna hoga, ladka maan gaya, wo ladka apne or us ladki k caarier k bare me sochta thaa, after 1 month ladki ne ladke se boola ki mujhe galti ho gai hai, jo tera faisla hoga mai maan jaoongi, ladke ne kaha ki mai ye mat samjhna maine tujhpe pe koi ahsan kiya hai, too aaj bhi aajad hai, lekin ladki ko us ladke ke pyar pr bharosa ho gya wo maan gai thi ki hum shadi apne gharwaloon ki rjamandi hi karenege ladke ne kaha ki theek hai, to ladke ka man khushi se zoom utha usne God naman kiya or unke darshan karne k liye gaya, wo ladka bahoot khus thaa , lekin achank se us ladki ki shadi Meruth me kisi 2bachchon ke baap se zabaran kara di kara di . ladke ne susied ki thhan li lekin usko kisi ne rook liya or bola ki hum dhekte hain, lekin unse bhi kuch nahi bana, ladki ka ladke k pass kuch din baad miss caal aai ladke ne jaise hi phoon kiya to usne bataya ki jisse uski shadi hui hai wo use har roz pita hai or zbardusti karta hai, to ladke ne samajhaya ki apne gharwalon se ye sab kah de lekin ladki ne bataya ki uske ghar wale uski nahi sunte or usse nata todne ki baat kah kr or usse kaha ki agar tune wahan pr kuch ulta karne ki kosis ki to uski chhoti bhano ko mar denge, lekin ladke ne kaha ki tu police ki mdat kyon nahi leti to usne bola ki mujhe tu hi is kaid se nikal le wanra mai isi tarah se tadap-2 zaan de dungi lekin, agar tu meri such me madut karna chahta hai to na to mere gharwalon ko ye pata lage or na hi tere kyonki tere gharwalon ki izzat ki khatir kah rahi hoon, usne agle din phoon karne ki baat kahi, lekin jaise hi ladke ne agle din phoon kiya to kisi or ledis ne phoon uthaya or kah ki yah pr phoon karne ki zaroorat nahi hai, wo ladka usi din se use har roz phoon karta hai, lekin us raksash ki vazah se vo usse baat nahi kar pata hai, ladka us ladki ko batana chata hai hai ki ek baar meruth me wo jahan pr hai wo address hai… wo ladka use wahan se bachana chata hai lekin kaise.. aap jo bhi ho jahan se bhi ho pls ise mazak mat samjhna or us ladke ki mdut karo…. warna wo ladka jis smaj ki jis parivar ki izzat k aage mazboor hai, wo use tod dega phir mat kahan ki agar hum us ladke k pass hote to use uska pyar lauta dete, kyonki mai sirf yahi chata hoon ki wo ladka kuch aisa kare ki uske ghar walon ko bhi zeena bahri ho,,,,,,,, so please us ladke se us ladki ko milwa kr pyar k sach me unka sath dekar unki help karo,,,, Sachai ko samane lao, unhe galat karne se rook lo, warna is msg ko jo bhi padega agar unki sachche dil se unki madut nahi ki to yad rakhna unki Aatmaon ka shrap or unke pyar ka sharp lagega, isse phale ki der ho …. Bus is stori ko mazak ya kisi film ki stori mat samjhna or na hi kisi ka comment, यह कहानी मेरी है,

chetan के द्वारा
April 3, 2013

सबसे पहले सवाल यह है की आज जिसे हम प्यार कहते है वह सचमुच प्यार है की दैहिक भूख मिटाने का एक तिकड़म !प्यार तो लोग कुत्ते बिल्ली से भी करते है ,मजनू-लैला से ,हीर-रांझा से ,प्यार ही तो किया था जो असफल होने पर खुद को न्यौछावर कर दिया , किसी पर तेज़ाब नहीं फेका , इसी की ह्त्या नहीं की .प्यार आत्मानंद की चीज है .दैहिक भूख को लछ्य बना कर किया गया प्यार स्वयंग अपराध है .प्यार दिल की चीज है , उसमे शरीर की सहभागिता अनुचित है . chetan tigaya 9828295953

yash के द्वारा
April 2, 2013

yes this is write

Snehlata के द्वारा
April 1, 2013

Totally agreed

aniltrainer के द्वारा
March 30, 2013

मेरे ख्याल से प्यार कभी अपराध को जन्म नहीं देता है, इसके पीछे कई और कारण है जिन्हें हमें जानना चाहिए ,पहला कारण - नैतिक शिक्षा का अभाव् - पुराने समय मे नैतिक शिक्षा एक विषय होता था जिसको स्कूल मे पढाया जाता था, जो आज के पाठयक्रम से बाहर होता चला जा रहा है, नैतिक शिक्षा से युवा अपनी नैतिक जिम्मेवारी , समाज के प्रति उसकी सोच मे बदलाब आता था , जो अब गायब हो चला है, दूसरा बड़ा कारण है, अश्लीलता का खुलापन- आजकल जगह जगह अश्लील साहित्य , फिल्मे , बेचने वालो की भरमार होती जा रही है, जिसकी वजह से युवा लोगो मे मानसिक विक्रति बढती जा रही है, यह साहित्य और फिल्मे युवाओ की भावनाओ से खिलवाड़ कर उनके अन्दर मानसिक बीमारियों को जन्म दे रहा है, जिसकी वजह से युवा इस तरह के क्रत्य करने के लिए प्रेरित हो रहा है,  हमें इन दोनों पहलुओ पर गंभीरता से सोचना होगा और कुछ ठोश कदम उठाने होंगे , तभी हम समाज से इन अपराधों को कम कर पाएंगे

R P Pandey के द्वारा
March 28, 2013

सबसे पहले सवाल यह है की आज जिसे हम प्यार कहते है वह सचमुच प्यार है की दैहिक भूख मिटाने का एक तिकड़म !प्यार तो लोग कुत्ते बिल्ली से भी करते है ,मजनू-लैला से ,हीर-रांझा से ,प्यार ही तो किया था जो असफल होने पर खुद को न्यौछावर कर दिया , किसी पर तेज़ाब नहीं फेका , इसी की ह्त्या नहीं की .प्यार आत्मानंद की चीज है .दैहिक भूख को लछ्य बना कर किया गया प्यार स्वयंग अपराध है .प्यार दिल की चीज है , उसमे शरीर की सहभागिता अनुचित है .

    yash के द्वारा
    April 2, 2013

    whatever you have written is correct

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 27, 2013

तमन्ना जी से मैं भी पूर्ण सहमत हूँ इस मुद्दे पर ! भला प्रेम में अपराध की कोई जगह हो सकती है क्या ? अगर हो सकती है तो फिर वह और कुछ भले ही हो पर प्यार नहीं हो सकता ! प्यार को तो ईश्वर से तुलना की गई है | वस्तुतः अपराधी लोग प्यार कर ही नहीं सकते | प्यार और अपराध दोनों ही बिलकुल दो तरह की विपरीतात्मक प्रवृत्तिमूलक चीजें हैं ! अपराध से इसे कुछ लेना-देना नहीं ! वैसे मेरी दृष्टि से युवाओं को पहले अपने जीवन के मूल लक्ष्यों और साध्यों की प्राप्ति की ओर अपने ध्यान को लगाना चाहिए ना कि निरर्थक प्यार-व्यार के चक्कर में पढ़ना चाहिए , मेरा आशय यह कतई नहीं कि प्यार निरर्थक है , मेरा कहना यह है कि इसका भी समय निश्चित और निश्चित समय पर ही इसमें पढ़ना चाहिए ! नेताओं की तो बात ही ना करें तो बेहतर , क्या कभी ये किसी मुद्दे को गंभीरता लेते हैं ? बुखार की जगह ये सर्दी की दवा करते हैं और किसी को ये दोनों हो तो दोनों ही की जगह जगह ये जबरन किसी अन्य रोगों की दवा करने में लग जाते हैं ! समाधान कम समस्याएँ ज्यादा पैदा करना इनकी फितरत में सामिल है ! बात तो यह है कि हम मूल रोग को ही पकड़ पाने में असमर्थ हैं या तो बात फिर यह भी हो सकती है कि समझ कर भी हम जानबूझकर न समझने का नाटक कर रहे हैं ! सधन्यवाद !!

K.S.Dixit के द्वारा
March 26, 2013

Yah prem nahin hai, yah sex ki bhookh hai-extreme hunger– jise aajkal cinema, tv, advertisements, sharaab aur saamaajik vaataavaran bdhaavaa de rahen hain. Inse maansik control smaapt ho jaataa hai aur rape hojaataa hai.

Chaya Agarwal के द्वारा
March 25, 2013

Yaun Apraadh aur pyar do alag cheejen hain. Bimar mansikta yaun apraadh ko janam deti hai aur isi mansikta se pyar sambhav nahi. Jo pyar karta hai wo yaun apraadh nahi kar sakta.. Pavitr aur sachchi anubhuti hi pyar hai.. Ataah Pyar aur yaun apraadh ko jodna mujhe murkhtapood lagta hai..

नेहा के द्वारा
March 25, 2013

ऐसा किसने कह दिया कि प्रेम की वजह से अपराध बढ़ रहे है, आप दो तरह की सोच को एक करने की कोशिश कर रहे हैं. अपराध करने वाले वही हैं जिनके दिलो इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं होती, प्यार करने वाले तो केवल प्यार को बांटते हैं.

तमन्ना के द्वारा
March 25, 2013

पूर्ण रूप से प्यार और आपसी प्रेम संबंध को यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराना सही नहीं कहा जा सकता. शरद पवार ने बस चुटकी लेते हुए यह बात कही थी इसपर गंभीरता से विचार करना गलत है. असल कारकों को छोड़ हमें बेवजह की बहस में नहीं उलझना चाहिए.


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