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क्या समाप्त हो जानी चाहिए वर्जिनिटी की अवधारणा?

Posted On: 19 Mar, 2013 social issues में

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कुछ माह पूर्व इंडिया टुडे-नीलसन द्वारा संपन्न एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि कैजुअल सेक्स की बढ़ती पहुंच के बावजूद आज लगभग 65 प्रतिशत पुरुष अपने लिए कुंवारी (वर्जिन) पत्नी की तलाश कर रहे हैं।” वह ऐसी महिला को अपनी जीवनसंगिनी नहीं बनाना चाहते जिसने विवाह से पहले किसी के साथ सेक्स किया हो। भारतीय युवाओं की मानसिकता और उनकी प्राथमिकताओं को केन्द्र में रखकर किया गया यह सर्वेक्षण वर्तमान हालातों के मद्देनजर विवादास्पद हो गया है। क्योंकि एक ओर जहां वन नाइट स्टैंड और कैजुअल सेक्स का प्रचलन जोरों पर है, वहां “वर्जिन पत्नी” की मांग थोड़ी अटपटी लगती है।


भारतीय समाज में ‘वर्जिनिटी की अवधारणा’ पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कुछ लोगों का यह स्पष्ट कहना है कि विवाह से पहले पुरुष चाहे कितने भी संबंध बना ले लेकिन वह किसी का भी जवाबदेह नहीं होता। वहीं अगर महिला ऐसा कर ले तो यह उसकी सामाजिक-पारिवारिक अवहेलना का कारण बन जाता है और उसका पूरा जीवन एक बुरा सपना बनकर रह जाता है और यह सिर्फ इसीलिए क्योंकि हमारा समाज आज भी शारीरिक संबंधों को अपेक्षाकृत ज्यादा अहमियत देता है, जबकि उसे वर्तमान हालातों और युवाओं की बदलती मानसिकता को पूरी तरह स्वीकार कर वर्जिनिटी की अवधारणा को ही समाप्त कर देना चाहिए। आज चारो ओर आधुनिकता अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रही है। साथ काम करने और पढ़ने-लिखने के कारण स्त्री-पुरुषों के बीच निकटता बढ़ती जा रही है। अगर ऐसे में उनके बीच किसी भी प्रकार के शारीरिक संबंध विकसित होते हैं तो उन्हें मात्र नैसर्गिक संबंधों की ही तरह देखा जाना चाहिए। इसमें सही और गलत की तो कोई बात ही नहीं है। यह व्यक्तिगत मसला है और इसमें समाज का किसी भी प्रकार का दखल नहीं होना चाहिए। आज जब महिला और पुरुष दोनों ही विवाह पूर्व सेक्स करने से नहीं हिचकते तो ऐसे में अगर महिला विवाह के बाद किसी भी तरह से प्रताड़ित की जाती है तो इसका कारण सिर्फ और सिर्फ हमारी खोखली हो चुकी मानसिकता है, जिसे जल्द से जल्द परिवर्तित कर देना चाहिए।


वहीं दूसरी ओर परंपराओं और नैतिक सामाजिक मान्यताओं के पक्षधर लोगों का यह मानना है कि अगर विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों के क्षेत्र में समाज अपना दखल देना बंद कर देगा तो हालात बद से बदतर होते जाएंगे। वर्जिनिटी की अवधारणा को समाप्त करने का अर्थ है युवाओं को सेक्स की खुली छूट दे देना। उन्हें किसी भी प्रकार की नैतिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर देना। अगर हम ऐसा कुछ भी करते हैं तो यह सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह समाप्त कर देगा। कैजुअल सेक्स आदि जैसे संबंध हमारे समाज के लिए कभी भी हितकर नहीं कहे जा सकते इसीलिए अगर परंपराओं, नैतिकता और मूल्यों को सहेज कर रखना है तो वर्जिनिटी की अवधारणा को भले ही जोर-जबरदस्ती के साथ लेकिन कायम रखना ही होगा।


वर्जिनिटी अर्थात कुंवारेपन की अवधारणा को मौजूदा भारतीय परिप्रेक्ष्य के अनुसार देखने और उसका आंकलन करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने मौजूद हैं जिनका जवाब ढूंढ़ा जाना नितांत आवश्यक प्रतीत होता है, जैसे:

1. भारतीय समाज अपने मूल्यों और आदर्शों का पक्का देश है। यहां अगर वर्जिनिटी के महत्व को समाप्त कर दिया जाए तो मौजूदा हालात किस तरह प्रभावित होंगे?

2. शारीरिक संबंध व्यक्तिगत मसला है उस पर समाज का दखल किस हद तक सही ठहराया जा सकता है?

3. मौजूदा हालातों के अनुसार वर्जिनिटी की अवधारणा को कितना सही ठहराया जा सकता है?

4. जब कई पुरुष भी विवाह पूर्व सेक्स संबंधों में लिप्त रहते हैं तो उनका एक वर्जिन बीवी की तलाश करना कहां तक सही है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:

क्या कहते हैं राहुल गांधी के बदलते तेवर?


क्या समाप्त हो जानी चाहिए वर्जिनिटी की अवधारणा?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “वर्जिनिटी की अवधारणा”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व वर्जिनिटी की अवधारणा – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Devendra Kumar के द्वारा
March 25, 2013

विषय ये नहीं की वर्जिनिटी की धारणा रहे या खत्म हो बल्कि विषय ये है की एसा करते करते हम कहाँ जा रहे हैं ये कभी सोचा है क्या | केवळ बदलने के नाम पर अपने आपको संस्कार शून्य कर लेने का .ही नाम परिवर्तन है क्या जब हमें अभी तक इसी में संसय है की क्या गलत है और क्या सही तो हम अपने आपको और अपने परिवार को क्या दिशा दे पाएंगे , क्या केवल शारीरिक सुख प्राप्त करना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य रह गया है , क्या कोई भी लड़की अथवा लड़का ये बताते समय गर्व का अनुभव करते हैं की उनहोनें पूर्व में सम्बन्ध बनाये ? सायद नही क्योंकि वो जानते हैं की इसकी चर्चा करने से आने वाली संतानों पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा ये उन्हें गलत दिशा में ले जा सकता है | इसलिए इस सत्य को स्वीकार करना चाहिए की ये गलत है | तथा समाज परिवार व्यवस्था को हानि पहुँचाने वाला है | इसलिए यह कुप्रथा है तथा इसका शमुल नाश करने की जिम्मेदारी स्त्री और पुरुष दोनों की है |

R P Pandey के द्वारा
March 25, 2013

हमें पाषाण युग की सभी अवाधारावानो को अपना लेना चाहिए ?

pavan kumar के द्वारा
March 23, 2013

थिस रूल फर्स्ट अप्लाई ओन मेल., बेंग मेल इ उसेद तो गो विथ फ़ेमलेस, बिकॉज़ विथौत फीमेल, मेल इस नोट पॉसिबल.

Amit के द्वारा
March 23, 2013

वर्जिनिटी की अवधारणा – Jagran Junction फोरम सबसे पहले तो ये सवाल उन लोगो से जो हमारी संस्कृति की इतनी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. यही एक ऐसा समाज हुआ करता था जिसने सबसे पहले ये माना के स्त्री और पुरुष मित्र भी हो सकते हैं. आप अगर प्राचीन इतिहास उठाकर देखे तो ये पता चल जायेगा के हमारे समाज में शुरू से स्त्रियों को पूरी आज़ादी दी गयी है. लेकिन हम हिन्दुस्तानियों की सबसे बड़ी समस्या है के हम धर्म का मतलब जाने बिना ही उसपे टिपण्णी करने से नहीं चूकते. हर आत्मा का अपना शरीर है उसका अपना वजूद है वो जिसके साथ चाहे जा सकती है. और अगर मेरी ये बात कडवी लगे तो अपने बच्चे के सर पर दोष डालने की जगह उसे सही और गलत का ज्ञान कराने में अपनी ऊर्जा लगायें. एक बात खुद ही सोचिये हम अपनी परम्पराओं का सारा ठेका स्त्री पर ही क्यूँ डालते रहते हैं. क्या पुरुष का कर्त्तव्य केवल पैसे कमाकर ही समाप्त हो जाता है? अगर संस्कृति की परवाह है तो बच्चो को उसे सिखाइये भी नहीं तो आपको कोई हक नहीं बनता एक व्यस्क के जीवन पे टिपण्णी करने का. क्या ये वर्जिनिटी की विचारधारा अभी आई है? बिलकुल नहीं ये हमेशा से थी बस हमारे महान समाज में कभी स्त्रियों की सुनी ही नहीं गयी. सच है अगर पुरुष अपनी पत्नी से अपने १०० संबंधो की बात भी करे तो स्त्री उसको माफ़ कर देना चाहिए और यदि कहीं गलती से उस स्त्री का एक भी पहले का सम्बन्ध सामने आ जाए तो ये तो पुरुष को अपने पुरुषार्थ का अपमान प्रतीत होती है. आखिर क्यूँ? अगर कुछ सीखना ही है अपने महान इतिहास से तो ये सीखिए की संस्कृति का सही पालन तभी हो सकता है जब घर के बड़े बच्चों को पालन करना सिखाएं मारकर डराकर धमकाकर नहीं बल्कि शिक्षा का हिस्सा समझकर.

sumit malik के द्वारा
March 23, 2013

cabel or net or bollywood in sab n humare desh ka banta dhar kr diya h aaj samajh m itni gandagi ho gai h ki koi bhi rishta paviter nahi raha humara Sanatan dharm or uske kaayede bohat ache the jo aaj aazadi ki bat krte h na ladkiyo ki unki khud ki ladkiya kitni aazad h kya woh apni manpasand kr sakti h nahi lekin humare desh ki bewkoof janta netao k piche aise chalti h jaise kide sharam aati h aaj khud ko Hindustani kahne m

Ajeet Singh के द्वारा
March 22, 2013

वर्जिनिटी की अवधारणा – Jagran Junction फोरम The incident of rape in the capital city followed the coverage given to it by media and the reaction thereafter, which resulted in aggressive agitations by large number of people and was of course politically motivated at times. There were demands for change in law and and the end it came down to the point to declare an age was raised. Let us agree that we in India still find it a taboo to discuss the issues of sex in open in large part of the nation. Call it hypocrisy or social boundaries that act as hindrance to discuss but the fact remains that is is a taboo. But let us also accept the fact that people of both the sexes are having sex with each other, though illegally but with each other’s consents. So, will that age bar, that we are discussing, would be applicable in such relations too? Whatever age is going to be fixed or declared, will it make any difference? Because age at the end of the day is just a number. To me it is a futile exercise being carried out to please a section of people, which is not going to make any difference to people at all.

AJAY के द्वारा
March 22, 2013

अजी साहब ! वर्जिनिटी की अवधारणा ही क्यों न समाप्त हो बल्कि हम लोगों को तो पूरा ही कीचड में गिर जाना चाहिए. विवाह जैसी पवित्र संस्था के रूप में जो धरोहर बची है उसे भी कीचड में फेंक देना चाहिए. फिर खूब तलाक हों बच्चों की फजीहत हो और बच्चे भी बड़े होकर वही करें जो तरीका हमने अपनाया तो क्या कहने ! यही तरक्की है, यही आधुनिकता है. इश्क खिलौना है… तू मुझमे भर चाभी… मैं तुझमे भरूं चाभी. भई वाह !

shkuntla mishra के द्वारा
March 21, 2013

आज हम कहाँ जा रहे है और कहाँ जाना चाहिए पहले तो यही सोच का विषय है . नैतिकता मजाक है !चरित्र किसे कहना चाहिए ?सब गौर करने की बात है .

NILESH SURYAWANSHI के द्वारा
March 21, 2013

वर्जिनिटी की अवधारणा – Jagran Junction Forum - १. हमारे समाज से वर्जिनिटी को यदि समाप्त करते है तो इससे समाज के आदर्श और मूल्यों में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा मूल्यों या संस्कृति के पतन का कारन सेक्स को माना नहीं जा सकता यदि हम चाहे तो समाज में सेक्स के लिए उम्र को तय करे विद्यार्थी जीवन में एकाग्रता और सफलता के लिए वर्जिनिटी सहायक होता है हमारी शारीरिक और मानसिक सकती सही दिशा में लगा सकते है. २. सेक्स हर किसी का निजी मामला है इसलिए इसका प्रदर्शन भी निजी स्थान और निजी लोगो से ही करना चाहिए खुले आम रूप से इसके प्रदर्शन होगा तो समाज भी प्रभावित होता है फिर समाज को दखल देना पड़ेगा. ३.वर्जिनिटी की चाहना रखना बेमानी होगी बल्कि वर्जिनिटी के जगह यदि मूल्यों और आदर्शो को प्राथमिकता दे नैतिकता की जरुरत न केवल हमारे परिवार बल्कि समाज की भी चाहना है ४. वर्जिन बीवी की चाहना कोई गलत नहीं है लेकिन वर्तमान समय में ये इच्छा बेमानी होगी हम यदि दो रुपये का सामान भी लेते है तो भी उसे सही लेना चाहते है तो वर्जिनिटी की चाहना ठीक है पर फैशन के इस दौर में गैरंटी की इच्छा न करे प्रक्टिकली लाइफ में इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है इसके बजाये यदि नैतिक मूल्यों को या पारिवारिक संस्कारो को चेक करे तो परिवार और समाज दोनों को फायदा होगा.

S N Banerjee के द्वारा
March 20, 2013

वर्तमान में औसत सामाजिक आवश्यकताओं और कुंठाओं के परीदृश्य में वर्जिनिटी का औचित्य बहुत ज़्यादा नहीं रह जाता I पुरुष व्यभिचार को ठीक करने के लिये सेक्स एजुकेशन की परम आवश्यकता है I सम्पूर्ण समाज को कुंठा मुक्त होने की ज़रुरत है I

samshad khan के द्वारा
March 20, 2013

India aise bahut sare muddo se ghira he. aese me chahe jitni modernity a jae lekin aaj bhi mard ek virgin ladki kj talaash karta he. shaadi se pehle ladka ladki se baat cheet k dauraan kai baar yeh jaanne ki kosis karta he par dono hi ek dusre ko. tasalli dete hen agar ladki cchupati he to ladkon ka bhi is samaaj me presex karna bura mana jata he par ladkiyon ke sath nature ne ek physical victimization ka system bana diya he aur unka sex karna pakda jata he. par ladke isse bach. jate hen. yeh to wahi baat hui jo pakda gaya wo chor aur jo bach gaya wo sayana . kyunki ladkiyon mte sanyam nyada hkta he isliye unpar samaj ko bachane ya bigadne ki takat bhi nature ne di he. open sex k liye hamara samaj ik dhancha sahi nahi he. isliye is dharda ka bana rehna bbi jaruri.

anoop narayan singh के द्वारा
March 20, 2013

desh mai verjinity ki awdharna ko laikar jo bahash chiri hui hai wah behad hi samvedan shil mamla hai.desh ki sansad iss maslai par apnai samjik dayitwo sai nhi bach sakti.desh mai iss trah kai mudo par janmat sangrah hona chahiyai\

ishwarsinghrautela के द्वारा
March 20, 2013

This is only a mental consept ,if any one wants to be happy he or she should not think about it , devotion & respect for each other are important , one should suppliment others.

नेहा के द्वारा
March 20, 2013

समाज के पुरुष अपनी सहूलियत के हिसाब से कानून बनाते हैं या फिर उसमे संशोधन करते है. इसमें महिलाओं का रोल नग्णय होता है. अगर सवाल वर्जिनिटी का है तो उसमे भी कही न कही पुरुष मानसिकता ही झलकती है.

शिरीष के द्वारा
March 19, 2013

यह पूरी तरह से मानसिकता के ऊपर निर्भर करता है मात्र समय सीमा कम कर देने से नाहि बलात्कार की मामलों में कमी होने वाली है और नाहि युवाओं की चिंतन धारा ही बदलने वाली है. बदलाव सोचने के क्षेत्र में होना चाहिए. बलात्कार के मामले में भारत 5 वें पायदान पर है और यह सिर्फ पुलिस के दस्तावेज के ऊपर आधारित है पता नहीं इसके अलावा कितने और हुए होंगे. और जहां रुस में सहमति से सेक्स की आयु 14-16 है और वो 10 वें पायदान पर है तो आप आंकड़ों की बिनाह पर कह सकते हैं कि कुछ हद तक यह फैसला सही है, भले इसके लिए समाज की सोच बदले और इसे अच्छे तरीके से लागू किया जा सके.

अमन के द्वारा
March 19, 2013

सही विषय पर चर्चा की हैं.


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