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क्या मातृत्व के नाम पर कोख का व्यापार है सेरोगेसी?

Posted On: 3 Dec, 2012 में

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किराये की कोख कह लें या फिर सेरोगेसी का मामला, वर्तमान समय में शायद यह सबसे विवादास्पद मसला बनकर उभर रहा है। पहली नजर में सेरोगेट मदर बनना या सेरोगेसी के जरिए संतान सुख की प्राप्ति करना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय ही कहा जाएगा लेकिन अगर सामाजिक दृष्टिकोण से सेरोगेसी जैसे कृत्य पर नजर डाली जाए तो यह एक व्यापक बहस का विषय ही माना जाएगा।


सेरोगेसी या फिर किराये की कोख जैसे संबंध का पक्ष लेने वाले लोगों का कहना है कि यह उन माताओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो किसी शारीरिक बीमारी के चलते मातृत्व सुख प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं। इतना ही नहीं सेरोगेट मदर बनने के लिए अमीर और धनवान लोग एक अच्छी-खासी रकम का भुगतान करते हैं या फिर करने के लिए तैयार रहते हैं। यह उन महिलाओं के लिए जीवनदान साबित हो सकता है जिनकी आर्थिक स्थिति तो बेहद कमजोर है लेकिन वह मातृत्व ग्रहण करने और बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। सेरोगेसी की पैरोकारी करने वाले लोगों का कहना है कि अगर कोई इंसान किसी मुश्किल की घड़ी में किसी अन्य व्यक्ति के काम आता है तो इसमें समाज को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।



वहीं दूसरी ओर बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो कोख के व्यापार को एक बड़े कारोबार के रूप में देखते हैं। सेरोगेसी का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि अगर सेरोगेसी को बढ़ावा दिया गया तो इसका सीधा असर भारत समेत अन्य विकासशील देशों की महिलाओं पर पड़ेगा। विकासशील राष्ट्रों की महिलाओं को महज एक उत्पाद समझकर अमीर राष्ट्रों में केवल बच्चा पैदा करने के लिए ही भेजा जाएगा। पैसे का लालच देकर या उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर गरीब और लाचार महिलाओं के साथ बच्चा पैदा करने वाली मशीन की तरह व्यवहार किया जाएगा। इतना ही नहीं, सेरोगेसी को मातृत्व के अधिकार पर गहरा आघात समझने वाले लोगों का यह भी कहना है कि सेरोगेट मां बनना मातृत्व के अधिकार पर एक सवालिया निशान लगाता है। सेरोगेसी के बाद अगर बच्चा विकलांग, शारीरिक या मानसिक किसी भी रूप से कमजोर होता है तो वह दंपत्ति जिसने किराये पर मां की कोख ली होती है वह उस बच्चे को अपनाने से मना कर सकते हैं। ऐसे में बच्चे का बोझ उस गरीब मां के कंधों पर ही आता है।


वहीं दूसरी ओर धर्माचार्यों का अपना पक्ष है जो निश्चित तौर पर सेरोगेसी के विरोध में जाता है। इनके अनुसार सेरोगेसी मानवता के विरुद्ध एक बड़ा अपराध है क्योंकि यह प्राकृतिक अवस्था के पूरी तरह खिलाफ है। ईश्वरीय कृत्यों के साथ छेड़छाड़ करने वाले ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए। पश्चिमी देशों की देखा-देखी एशियाई देशों में भी ऐसी महिलाओं की तादाद बढ़ती जा रही है जो बच्चे को जन्म देने के दौरान होने वाली पीड़ा से बचना चाहती हैं इसीलिए वह सेरोगेट मदर की तलाश करने लगती हैं।


आधुनिक उदारवादियों के अनुसार भी सेरोगेसी जैसे तरीके अमीर और गरीब के अंतर को और अधिक बढ़ा देते हैं और इन दो वर्गों के बीच भेदभाव को स्पष्ट रूप से इंगित करते है। सेरोगेसी में मातृत्व को खरीदा और बेचा जाता है और इसी आधार पर सेरोगेसी को पूर्णतया: समाप्त कर गोद लेने की प्रक्रिया को बल देना चाहिए। क्योंकि हजारों ऐसे बच्चे हैं जो जन्म लेने के बाद से ही अपने माता-पिता के प्यार को तरस रहे हैं।


सेरोगेसी के जरिए संतान प्राप्ति जैसे उद्देश्यों को पूरा करने से जुड़े दोनों पक्षों पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उठते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना हमारे लिए नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. बहुत से ऐसे विवाहित दंपत्ति हैं जो किसी शारीरिक कमी की वजह से संतान सुख से वंचित रह जाते हैं, क्या उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए सेरोगेसी को स्वीकार्यता नहीं दी जानी चाहिए?

2. क्या वाकई सेरोगेसी के जरिए मातृत्व ग्रहण करना मानवता के साथ अन्याय है?

3. मातृत्व के अधिकार को देखते हुए क्या सेरोगेसी पर प्रतिबंध लगाना उचित है?

4. क्या सेरोगेसी के अधिकार से महिलाओं का शोषण होने की संभावना बढ़ जाती है?



जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या मातृत्व के नाम पर कोख का व्यापार है सेरोगेसी?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “सेरोगेसी”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व सेरोगेसी – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajesh kumari के द्वारा
December 13, 2012

मेरे विचार से यह इंसान का व्यक्तिगत मामला है इससे जरूरत मंदों को फायदा है जो संतान नहीं पैदा कर सकते उनको भी जिसको पैसा चाहिए उसको भी जो बच्चा पैदा करती है वो ये काम स्वेच्छा से करती है पहले से ही मेंटली प्रिपेयर होती है अगर उसका ममत्व बहुत ऊँचा होता तो वो पहले से ही तैयार नहीं होती फिर भी मैं इस तरह कमाने वाले धन को उस कोठे पर बैठ कर कमाने वाले धन से हजार गुना बेहतर सम्मान जनक मानती हूँ

shariq के द्वारा
December 7, 2012

jagran junction forum keray ki god se achaha hai kisi lawaris ko god lein.uska lalan palan achche tarike se karen vahi lawaris fir lawaris nahi rahega or aap ko ma bap ka darja bhi dega or sewa bhi karega.

Ashish के द्वारा
December 5, 2012

सेरोगेसी किसी पति-पत्नी की अपनी चॉइस है. अगर वो ऐसे बच्चा पाना चाहते है तो मुझे उसमे कोई गलत नहीं दिखता.

SARFARAZ HUSSAIN KHAN के द्वारा
December 3, 2012

सेरोगेसी मातृत्व के नाम पर कोख का व्यापार है. यह पूर्ण रूप से हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये हम लोग पश्चिमी सभ्यता को क्यों अपनाते चले जा रहे हैं ये मेरी समझ से बाहर है जबकि हमारी सभ्यता सर्वश्रेष्ठ है.

Jack के द्वारा
December 3, 2012

सेरोगेसी को पाप कहने वालों को उय्स दर्द को महसूस करना होगा जो एक बेऔलाद मां-बाप की होती है. कई दंपति दस-दस साल से बिना बच्चों के अपना जीवन जी रहे है, उनके जीवन के दर्द को समझना होगा. समझना होगा जब एक अमीर, खुश और संपन्न घर में विराना सिर्फ इसलिए होता है क्यूंकि वहां बच्चों की किलकारी नहीं होती. इस बेहद पुण्य वाले कर्म को पाप समझने वालों को पूरी उम्र बेऔलाद होने के दर्द को समझना होगा तभी सेरोगेसी जैसी प्रकियाएं देश में सफल होगी. जो महिलाए सेरोगेसी करती है उन्हें इसके बदले अच्छे पैसे मिलते है जिनसे उनका जीवन बसर हो पाता है. उड़ीसा, छतीसगड जैसे अति गरीब राज्यों की जनता अगर यह कार्य कर रही है तो इसके पीछे उनकी खुशी नहीं लाचारी है. हां इसके कुछ बुरे परिणाम है लेकिन आप एक ऐसा अच्छा काम बताइए जिसके दो चार दुष्परिणाम नहीं होते..


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