blogid : 4920 postid : 595

बढ़ती महंगाई से किसान खुशहाल – दूरदर्शी सोच या लाचारी का मखौल ?

Posted On: 27 Aug, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

वैसे तो कांग्रेस और विवादों का साथ बहुत पुराना है लेकिन हाल ही में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ और अहम सदस्य केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने अपने एक बयान के बाद कांग्रेस की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। बेनी प्रसाद वर्मा का कहना है कि वह दिनोंदिन बढ़ती महंगाई से बहुत खुश हैं। जितनी ज्यादा महंगाई बढ़ेगी उतना ज्यादा किसानों को फायदा होगा।


केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा ऐसे वक्तव्य देना अपने आप में हैरानी भरा है। बीजेपी और कांग्रेस विरोधी अन्य राजनीतिक पार्टियों के साथ आम जनता का यह कहना है कि एक तरफ जहां सैकड़ो किसान दिनोंदिन भूख और कर्ज के बोझ तले दब कर आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं, वहीं एक वरिष्ठ मंत्री का ‘महंगाई को किसानों के हित’ में कहने जैसी बात बेहद गंभीर और चिंतनीय है. इस बयान को बेनी प्रसाद वर्मा का निजी बयान मानकर नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता क्योंकि वह पार्टी के एक बेहद अनुभवी और परिपक्व नेता हैं। विरोधियों का स्पष्ट कहना है कि बेनी प्रसाद वर्मा जैसे अनुभवी और परिपक्व नेता द्वारा दिए गए इस बयान का संबंध पार्टी के अंदरूनी विचारों से है। कांग्रेस के शासनकाल में महंगाई अनियंत्रित सी हो गई है। सिर्फ आटे, दाल, चावल के दाम ही नहीं बढ़ रहे बल्कि अन्य जरूरी सामानों के मूल्य में भी बेहद वृद्धि हो रही है। कांग्रेस को चाहिए कि वह बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाए लेकिन वह तो इसके उलट जनता को तड़पता हुआ देखकर बहुत खुश है। इन लोगों का कहना है कि ऐसी पार्टी से अब और क्या उम्मीद की जा सकती है जो जनता के आंसुओं में ही अपनी खुशी तलाश रही है। रोज नए-नए घोटालों से तो कांग्रेस की साख कम हो ही रही थी लेकिन अब वर्मा का इस तरह का बयान काफी गंभीर है।


वहीं दूसरी ओर बेनी प्रसाद वर्मा ने खुद ही अपने बयान के साथ ऐसे कई तर्कों को भी जोड़ा है जिनके आधार पर उन्होंने बढ़ती महंगाई को बेहतर बताया है। बेनी प्रसाद वर्मा का तर्क है कि महंगाई बढ़ेगी तो इससे किसानों के उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे। दाम बढ़ने के कारण उन्हें अच्छी कमाई होगी और वे खुशहाल जीवन बसर करेंगे। बेनी प्रसाद वर्मा के बयान का पक्ष लेने वालों का भी यही कहना है बढ़ती महंगाई लोगों को और अधिक कमाने के लिए प्रेरित करेगी, जिससे उनके आर्थिक स्तर में सुधार आएगा। लोगों की जरूरतें बढ़ेंगी तो वह अपनी आय में वृद्धि करने की भी सोचेंगे जिसका सीधा प्रभाव उनके जीवन स्तर पर पड़ेगा।


उपरोक्त विमर्श के पश्चात निम्नलिखित उठते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ा जाना वर्तमान समय की जरूरत बन गया है, जैसे:


1. बढ़ती महंगाई के कारण आम जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है, ऐसे में केंद्रीय मंत्री की ओर से ऐसा बयान आना क्या साबित करता है?

2. जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है, अगर वास्तव में बेनी प्रसाद वर्मा का यह बयान निजी ना होकर पार्टी की ही सोच है तो हम सत्तारूढ़ पार्टी से और क्या उम्मीद कर सकते हैं?

3. क्या यह बयान केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की दूरदर्शिता का परिणाम तो नहीं है? कहीं वह आने वाले समय में किसानों के हित की बात तो नहीं सोच रहे हैं?

जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


बढ़ती महंगाई से किसान खुशहाल – दूरदर्शी सोच या लाचारी का मखौल ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।

नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “जनता का मजाक” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व जनता का मजाक – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




Tags:                                 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.60 out of 5)
Loading ... Loading ...

15 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rdverma के द्वारा
October 15, 2012

Beni Prasad Verma Is now mature in buttering the party boss. He is by birth Kurmi ie. KISAAN but now a days he is far away from kurmi samaaj. The U.P. election has clearly proved it.His statements should be ignored. He is ignorant of ground realities.Kisaan sold his wheat product at the rate of Rs.9oo/=per quintal during harvest season but today wheat price in market is Rs1700/= per quintal.

snsharmaji के द्वारा
September 1, 2012

नेता बाजार से सामान नहीं खरीदते हराम का खाते है इन्हे महंगाई की चुभन का आभास कहां

kajal के द्वारा
August 31, 2012

बढ़ती महंगाई से जहाँ भारतीय जनता त्रस्त है , वहीँ मंत्रियों नेताओं को महंगाई नज़र नहीं आती. आखिर नज़र क्यों आएगी? कांग्रेस की सर्कार में तो नेताओं की बल्ले -बल्ले ही है, भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है, जनता का पैसा लूट- लूट कर अपनी जेबें भरने वाले नेताओं को महंगाई की समझ क्यों आने लगी? वो कहते हैं न जिन पैर न फटी बिंवाई वो क्या जाने पीर पराई… जिन्हें आते दाल का भाव न पता हो वो क्या जाने महंगाई. हर चीज़ महँगी हो गयी है, खासकर किसानों की हालत तो और भी शोचनीय है, जो इतनी मेहनत करके हमारे लिए अन्न उपजाते हैं परन्तु उस मेहनत के बदले उनको उतनी पूंजी नहीं मिल पाती जिसपर उनका हक है ,  उनके द्वरा उपजाये गए अनाजों की कीमत बहोत कम पैसे में चुकाकर दोगुनी तिगुनी कीमत में  बाजार में  लाकर बेचा जाता है. बेचारे किसान जिन्हें आवश्यक सुविधाएँ भी मुहैय्या नहीं होती जी जान से पैदावार अच्छी करने में रात दिन जूटा रहता है ,उसके पैसे लेकर नेतागन ऐश मौज करते हैं , जहाँ उद्योगपतियों को खास तरजीह दी जाती है किसानों को पूछने वाला नहीं होता उसके द्वारा उपजाए गए अन्न गरीबों तक न पहुंचकर भण्डारण की व्यवस्था नहीं होने से सड़ा दिया जाता है. हमारे किसान जो क़र्ज़ के बोझ तले दबे रहते हैं उनका सारा जीवन क़र्ज़ चुकाने में ही बीत जाता है. उनका दुःख दर्द कोई नहीं पूछता, पैसे के पीछे ही भागने में सब व्यस्त हैं. कोई यह नहीं सोचता की पैसे ही तो नहीं खायेंगे? खाने के लिए तो अन्न चाहिए होगा य़ आज यदि किसान अन्न उपजाना बंद कर दे तो पैसे धरे के धरे रह जायेंगे अन्न कहाँ से आएगा? सर्कार को हमारी कृषि व्यवस्था को अतिशीघ्र सुधारने की आवश्यकता है, किसानों को खुशहाल बनाने की आवश्यकता है. केवल भाषण देने से काम नहीं चलने का. और ऐसी गिरती हुई आरती व्यवस्था में बेनी जी का यह बयां बहोत ही शर्मनाक है

Darshan के द्वारा
August 31, 2012

“पैसा फैंको तमाशा देखो” भ्रष्टाचारी नेताओ का इलेक्शन फार्मूला है | जाती-पाती के दलदल में फंसा किसान |अपना हित न देख जाती के नेता को वोट दे देता है | भ्रष्ट नेताओं के गुर्गे भी अपने आकायों की आवाज बुलंद करने के लिये बरसाती मच्छरों की तरह निकल पड़ते हैं | रातों – रात सरपचों, गुर्गों, मुल्लायों, पादरियों, धर्म संगठनों के नेताओं बिके और बिकाऊ मीडिया के लिये धन के बोरे खोल दिये जातें हैं | बढे -बढे मुस्लिम संघठन जैसे जामा मस्जिद का इम्माम और जम्मियते – उल – उल्माहे – हिन्द, जम्मियते इस्लामी और मुस्लिम लीग जैसे साम्यवादी | ( communal ) दलों के नेता हिन्दू दलों और संगठनों के विरूद्ध जहर उगलते हैं और मैनोर्टीज़ को मेजोरिटी डर दिखाकर का डरा उनका वोट नकली धर्म – निरपेक्ष ( pseudo- secular ) भ्रष्ट नेतायों को दिलवा देतें हैं | सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है | बेनी प्रसाद वर्माजी अपने -जैसे ही लोगों से घिरे रहते हैं और सपनों में उन्हें ट्रैक्टर और लह – लहाते खेत नज़र आते हैं |  “वह दिनोंदिन बढ़ती महंगाई से बहुत खुश हैं। जितनी ज्यादा महंगाई बढ़ेगी उत्तना ज्यादा किसानों को फायदा होगा।” जब उनका घर ( पाप का घड़ा) लबा – लब भर गया है तो उनको दूसरों के भी घर भरें नज़र आते हैं | दिन – रात इन्ही सपनो में वह खोये रहते हैं | सिर्फ आटे, दाल, चावल के दाम ही नहीं बल्कि अन्य जरूरी सामानों के मूल्य में भी बेहद वृद्धि हो रही है, क्यूंकि बाजारी, उद्योगिक, सब्जी और दुसरे व्यापारी संगठनों का हफ्ता याँ मासिक उन्हें पहुँच जाता है | योजना आयोग के मुखिया अहलुवालिया शायद अपनी जेब टटोल कर कहते हैं कि महंगाई इसलिये ज्यादा है क्यूंकि लोगों की जेब में पैसा ज्यादा है | अशोक कुमार दुबेजी का कहिन सही है “यह किसानों को गुमराह करने की सोची समझी चाल है ! असल में मंहगाई से मंत्री, नौकरशाह , सांसद, विधायक, बड़े नेता पुलिस अधिकारी, व्यापारी, उद्योगपति इस मंहगाई से खुश हैं, खुश ही नहीं लाभान्वित भी हो रहे हैं ! मौजूदा सरकार नेताओं और व्यापारी – उद्योपतियों की है ”   “ हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी ख़ामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखती है |” और नहीं तो कम – से – कम उनकी यह ख़ामोशी कांग्रेस के प्रधान और प्रधानमंत्री जी के पदकी लाज बचाये हुये है | अब नेहरूजी का नहीं अपितु परदे के पीछे रिमोट कंट्रोल से मिश्रित परिवार भारत देश में राज कर रहा है | अब तो कांग्रेस एक अलग सम्प्रदाय बन गया है | दिल्ली की सी एम शीला दिक्षित का दामाद जामा मस्जिद के इम्माम का भाई है | अब तो इम्मामजी के कहने पर उनके परिवार के सदस्य भी मुलायमजी के द्वारा उत्तर प्रदेश में ऊंचे पदों पर आसीन किये जाते | ” चोली के पीछे क्या है ” बहुत कम शायद दस प्रतिशत लोग भी नहीं जानते होंगे | अब कांग्रेस का राष्ट्रपति कुर्सी पर है, कर्नाटक का घोडा नहीं उत्तर प्रदेश के साईकलवाले को ले आयेंगे | फिर बेनीजी के तो मुलायमजी से पुराने रिश्ते हैं कहीं – न – कहीं मुल्लायमजी की वेणी में लगही जायेंगे | “वोह नहीं तो और सही” उनके परिवार का सदस्य ही आ जायेगा | मुलायम जी अपना मल फैलायेंगे और माया भी अपनी माया का जाल बुनेंगी | जैसे कांग्रेस उनको आय से अधिक सम्पति और सी बी आई का दर दिखाकर सपोर्ट ले लेती थी उसी तरह मुलायम भी कांग्रेस की सपोर्ट लेते रहेंगे | बाकि रहा लेफ्ट उसकी तो आइडियोलोजी ही अवसरवाद पर टिकी है | भारती जनता पार्टी क्या करे उसकी ग्रामीण क्षेत्रों में कोई पैंठ ही नहीं है | हाँ बदनाम और अपराधी नेतायों को अपनी पार्टी से निकाल (”पैसा फैंको तमाशा देखो” भ्रष्टाचारी नेताओ का इलेक्शन फार्मूला है | जाती-पातीके दलदल में फंसा किसान अपना हित न देख जाती के नेता को वोट देदेता है | भ्रष्ट नेताओं के गुर्गे भी अपने आकाओं की आवाज बुलंद करने के लिये बरसाती मच्छरों की तरह निकल पड़ते हैं | रातों – रात सरपचों, गुर्गों, मुल्लायों, पादरियों और धर्म संगठनों के नेताओं के लिये धन के बोरे खोल दिये जातें हैं | बढे -बढे मुस्लिम संघठन जैसे जामा मस्जिद का इम्माम और जम्मियते – उल – उल्माहे – हिन्द, जम्मियते इस्लामी और मुस्लिम लीग जैसे साम्यवादी ( communal ) दलों के नेता हिन्दू दलों और संगठनों के विरूद्ध जहर उगलते हैं और मैनोर्टीज़ को मेजोरिटी डर दिखाकर का डरा उनका वोट नकली – धर्म – निरपेक्ष ( pseudo- secular ) भ्रष्ट नेतायों को दिलवा देतें हैं | सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है | बेनी प्रसाद वर्माजी अपने -जैसे ही लोगों से घिरे रहते हैं और सपनों में उन्हें ट्रैक्टर और लह – लहाते खेत नज़र आते हैं |  “वह दिनोंदिन बढ़ती महंगाई से बहुत खुश हैं। जितनी ज्यादा महंगाई बढ़ेगी उत्तना ज्यादा किसानों को फायदा होगा।” जब उनका घर ( पाप का घड़ा) लबा – लब भर गया है तो उनको दूसरों के भी घर भरें नज़र आते हैं | दिन – रात इन्ही सपनो में वह खोये रहते हैं | सिर्फ आटे, दाल, चावल के दाम ही नहीं बल्कि अन्य जरूरी सामानों के मूल्य में भी बेहद वृद्धि हो रही है, क्यूंकि बाजारी, उद्योगिक, सब्जी और दुसरे व्यापारी संगठनों का हफ्ता याँ मासिक उन्हें पहुँच जाता है | योजना आयोग के मुखिया अहलुवालिया शायद अपनी जेब टटोल कर कहते हैं कि महंगाई इसलिये ज्यादा है क्यूंकि लोगों की जेब में पैसा ज्यादा है | अशोक कुमार दुबेजी का कहिन सही है “यह किसानों को गुमराह करने की सोची समझी चाल है ! असल में मंहगाई से मंत्री, नौकरशाह , सांसद, विधायक, बड़े नेता पुलिस अधिकारी, व्यापारी, उद्योगपति इस मंहगाई से खुश हैं, खुश ही नहीं लाभान्वित भी हो रहे हैं ! मौजूदा सरकार नेताओं और व्यापारी – उद्योपतियों की है ”  “ हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी ख़ामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखती है |” और नहीं तो कम – से – कम उनकी यह ख़ामोशी कांग्रेस के प्रधान और प्रधानमंत्री जी के पदकी लाज बचाये हुये है | अब नेहरूजी का नहीं अपितु परदे के पीछे रिमोट कंट्रोल से मिश्रित परिवार भारत देश में राज कर रहा है | अब तो कांग्रेस एक अलग सम्प्रदाय बन गया है | दिल्ली की सी एम शीला दिक्षित का दामाद जामा मस्जिद के इम्माम का भाई है | अब तो इम्मामजी के कहने पर उनके परिवार के सदस्य भी मुलायमजी के द्वारा उत्तर प्रदेश में ऊंचे पदों पर आसीन किये जाते | ” चोली के पीछे क्या है ” बहुत कम शायद दस प्रतिशत लोग भी नहीं जानते होंगे | अब कांग्रेस का राष्ट्रपति कुर्सी पर है, कर्नाटक का घोडा नहीं उत्तर प्रदेश का साईकलवाले को ले आयेंगे | फिर बेनीजी के तो मुलायमजी से पुराने रिश्ते हैं कहीं – न – कहीं मुल्लायमजी की वेणी में लगही जायेंगे | “वोह नहीं तो और सही” उनके परिवार का सदस्य ही आ जायेगा | भारतीय जनता पार्टी बदनाम भ्रष्ट और अपराधी छविवाले नेताओं को निकाल (PURGE) कर अपनी छवि सुधर सकती है |

anugunja के द्वारा
August 31, 2012

किसानों,गरीबों तथा महिलाओं के द्वारा आत्महत्याओं की संख्या में वृद्धि, अच्छा है देश के लिए,क्योंकि इससे जनसंख्या नियंत्रित होगी।भ्रष्टाचार का प्रसार का बड़े पैमाने पर देश में होना अच्छा है क्योंकि इससे बहुत सारा काला धन देश में होगा,जिससे रूपया भी मजबूत हो जाएगा और खजाना भी भर जाएगा।ये बातें सुनने में ही कितने बेकार और झूठे लगते हैं पर जब हमारी सरकार बढ़ती महंगाई की तुलना किसानों की खुशहाली से कर सकती है तो कल को ये बातें भी कह सकती है।

RAMESH CHANDRA के द्वारा
August 29, 2012

बढ़ती महगाई से सभी परेशान होते हैं . किसान अपनी एक चीज बेच कर बाकि सभी सामान महगें दामों पर खरीदता है . इससे उसको सबसे ज्यादा परेशानी होती है .

harendra rawat के द्वारा
August 29, 2012

केन्द्रीय सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री द्वारा देश में मंहगाई बढ़ने पर खुशी जाहीर करना अपने आप में जनता में एक सरकारी सन्देश है की मौजूदा सरकार को बढ़ती हुई मंहगाई पर कंट्रोल करने का कोइ इरादा नहीं है ! बनी प्रधाद जी का कहना की बढ़ती महंगाई से किसानों को ज्यादा लाभ होगा, यह किसानों को गुमराह करने की सोची समझी चाल है ! असल में मंहगाई से मंत्री, नौकरशाह , सांसद, विधायक, बड़े नेता पुलिस अधिकारी, व्यापारी, उद्योगपति इस मंहगाई से खुश हैं, खुश ही नहीं लाभान्वित भी हो रहे हैं ! बाकी के ७५ प्रतिशत लोग एक जोंन का खाना बड़ी मुश्किल से जुटा पाते हैं ! फिर बड़े लोगों की बड़ी बात ! बेनी प्रशाद वर्मा जी ठहरे स्वयं उद्योगमंत्री तो बात भी बड़ी ही करेंगे ! हाँ एक उनहोंने इस तरह के भाषण देकर जनता में यह सन्देश दे दिया है की मौजूदा सरकार नेताओं और व्यापारी- उद्योपतियों की है और अगर दुबारा चुन के आएगी तो फिर मंहगाई बढ़ाएगी ! ऊपर वाला इन्हें सद बुद्धी दे !

subhash के द्वारा
August 28, 2012

when ever he will buy any thing from market then only he will understansd what is Mahangai..? it is very easy to pass such comments but very difficult to face it..

anilyadav5500 के द्वारा
August 28, 2012

बढती मंहगाई से गरीब क्या बेनी माधव वर्मा ही अमीर हो सकते हैं इसिलए ऐसा सोच रखते हैं 

Mansukh lal Khatri के द्वारा
August 28, 2012

we should be fight against this matter.

pankaj kumar srivastava. के द्वारा
August 27, 2012

भारत के राजनीत पर करीब से नजर रखनेवालों के लिए, देश की मौजूद कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी अपने आप में एक शोध का विषय हो सकती है.देश का प्रधानमंत्री का ये कहना “हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी ख़ामोशी,न जाने कितने सवालों की आबरू रखती है”वही सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ और अहम सदस्य केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का बेबाक ये कहना-जितनी ज्यादा महंगाई बढ़ेगी उतना ज्यादा किसानों को फायदा होगा।”है न अपने आप में शोध का विषय.प्रधानमंत्री ख़ामोशी का चादर ओढे बैठें हैं वही कथित वरिष्ठ और अहम सदस्य जुबान का चादर फेंक कर नंगा नाच कर रहा है.जहाँ तक मेरी समझ है.कांग्रेस पार्टी के जितने अनुभवी और परिपक्व नेता हैं उनकी वफादारी केवल और केवल सोनिया गाँधी और अपनी ओहदा बचाने तक सीमित है.जहाँ तक मेरी अपनी विचार है अभी देश को अरविंद केजरिवाल जैसे लोगों की जरुरत है.

MANMOHAN SINGH के द्वारा
August 27, 2012

महंगाई में कांग्रेस के नेताओ की जो सोच है वह यह साबित करता है की हमारे देश में ९०% नेता काबिल नहीं है जो जो सिर्फ झूट के बल पर संसद में गए है इस देश में इन सब हालातो के लिए कांग्रेस ही जिमेवार है कांग्रेस ने सिर्फ इस देश को VOTE बैंक बना कर रखा लोगो की सिक्षा की तरफ ध्यान नहीं दिया अगर देश के लोग शिक्षित होते तो चोर नेता संसद में नहीं जाते जिन्होंने इस देश के लिए बलिदान दिया वह हासिये पर है सिर्फ नेहरु परिवार ही इस देश पर राज कर रहा है जिनका की आज़ादी पर ज्यादा कोई रोल नहीं था अगर यह लोग चाहते तो हमारा देश सबसे ज्यादा विकास कर सकता था पर कांग्रेस ने इस देश को अपनी जागीर समझी है

    ashokkumardubey के द्वारा
    August 28, 2012

    इसमें अब संदेह कहाँ है कांग्रेस की नजर में इस देश की जनता उनकी गुलाम है और देश उनकी जागीर है ऐसा कांग्रेस अपने द्वारा दिए जा रहे बयानों और महंगाई जैसी विकट समस्या से मुह फेरकर हमेशा से कहती आई है और किसानो की हालत जितना ख़राब इस कांग्रेस राज में हुवा है उतना कभी नहीं यह इतिहास बन जायेगा और इस पार्टी को भी भविष्य में इतिहास में ही जीना होगा अगर सचमुच जनता महंगाई से तंग एवं परशान है तो .

ashokkumardubey के द्वारा
August 27, 2012

बढती महंगाई – कांग्रेस के अनुभवी नेता श्री बेनी प्रसाद वर्मा का बयान पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी की जनता के प्रति संवेदनहीनता दर्शाता है और कांग्रेस जानती है अब कुछ भी जनता कर ले उसने २०१४तक तो शासन करना है और अपने शासन कल में जिन तबकों को लाभ पहुचना है उनको पंहुचा रही है और पहुचाती रहेगी जनता की आवाज को उसने अनसुनी करने की ठान ली है और कांग्रेस बहुमत में है कोई मजबूत विकल्प या बिपक्छ भी अपने देश में नहीं है जनसे जनता कोई उम्मीद भी करे , महंगाई को किसानो के हित में कहना किसानो के जख्म पर नमक छिड़कने के समान है और कांग्रेस जनविरोधी पार्टी के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर रही है यह कहीं से दूरदर्शिता नहीं है और यह बेनी प्रसाद का बयान नहीं कांग्रेस पार्टी का हीं बयान है बहुत पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता जो आज महामहिम हैं उन्होंने भी ऐसा हीं बयान दिया है “कहा है कुछ भी कर लो महंगाई कम नहीं होगी ” अब जनता और किसानो ने देखना है वह इस महंगाई में कैसे जियेगी कांग्रेस के कृषि मंत्री शरद पावर भी महंगाई को अच्छा और लाइलाज बता चुके हैं और उनका भी कहना है किसानो ने आत्महत्या गरीबी और कर्ज के बोझ से नहीं की है उसका कोई और कारन है अतः कांग्रेस सिरे से किसानो की समस्या से मुह मोड़ चुकी है . हाँ अगर किसानो को अपना भला करना है तो अभी भी इस देश में किसानो की संख्या अपने देश की आबादी का ७०% है आने वाले चुनाव में इस पार्टी को न जीतने दे, क्यूंकि योजना आयोग के अहलुवालिया जी भी कह चुके हैं की लोगों की आमदनी में बढ़ोतरी हुयी है महंगाई इसी लिए ज्यादा है क्यूंकि लोगों की जेब में पैसा ज्यादा है अतः नेता एवं मंत्री इस महंगाई को कोई समस्या के रूप में नहीं देखते क्यूंकि उनको तो सारी वस्तुएं कम दामो में और मुफ्त भी मिलती हैं उनको जनता एवं किसानो के दर्द का क्या पता? बहुत पहले एक बार मिडिया वाले ने एक नेता से आटा का भाव पूछा था उस नेता ने कहा ८० रुपये किलो होगा अब इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है की नेता को आटे दाल का भाव कितना मालूम है? और उसकी नजर में ८० रूपये किलो आटा भी महागा नहीं है . और उनको यह भी पता है यहाँ की जनता सब कुछ बहुत जल्दी भूल जाती है इसको बी समय रहते भूल जाएगी कांग्रेसी नेता क्या- क्या नहीं कहते एक दिल्ली की सीएम शीला दिक्छीत हैं जो कहती हैं दाल महगा है तो दाल मत खाओ चीनी महंगा है तो मिठाई मत खाओ प्याज महंगा तो उसको भी मत खाओ और महंगाई तो बिचौलियों ने बढ़ाई है मंडी जाकर सामान खरीदो सस्ता मिलता है यह दलील है हमारे कांग्रेसी नेताओं के, अगर इस देश का किसान जितनी लगत खेती में लगत है उसको अपनी मजदूरी के साथ खेती का खर्चा भी निकल जाता तो वह साहूकारों के कर्ज के बोझ से आत्महत्या क्यूँ करता वह तो कर्ज चूका देता और अपनी खेती ख़ुशी ख़ुशी करके अपना जीवन यापन करता के इस कडवी सच्चाई को कांग्रेस के नेता नहीं जानते ? और जानते हैं टी किसानो के जख्मों पर नमक क्यूँ छिड़कते हैं के उनको इस देश के गरीब किसानो की जरा भी परवाह नहीं जो किसान पूरे देश को अपने खून पसीने से अनाज पैदा कर खिलाता है उसको अपनी वास्तु का उचीत मूल्य भी नहीं मिलता सब जानते हुए कांग्रेस का यूँ अंजन बने रहन और किसान विरोधी बयान देना इनकी दूरदर्शिता को दिखलाता है अब इसका फैसला कसानो और इस देश के बुध्धि ज्जिवी लोगों ने करना है अतः मेरी राय में सरकार और कांग्रेस की नजर में महंगाई कोई मुद्दा नहीं है और कांग्रेस किसानो के प्रति एकदम बेपरवाह है .


topic of the week



latest from jagran