blogid : 4920 postid : 590

राजनैतिक मैदान में टीम अन्ना - पूर्वनिश्चित पैंतरा या भ्रष्टाचार समाप्ति की तरफ अगला कदम ?

Posted On: 6 Aug, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को जंतर मंतर पर जब राजनीति में कूदने की बात कही तो भारतीय राजनीति सहित पूरे देश में हड़कंप मच गया। किसी ने अन्ना हजारे के इस निर्णय को सही करार दिया तो किसी ने आंदोलन के लिए इसे आत्मघाती बताया।


टीम अन्ना के राजनीति में आने के फैसले को सही बताते हुए टीम के वरिष्ठ सदस्य और देश के पूर्व विधि मंत्री शांति भूषण कहते हैं जब सरकार जनता की अपेक्षा पर खरी न उतरे और जन दबाव को भी न माने तो राजनीतिक विकल्प देने के अलावा कोई चारा नहीं है। इसके अलावा समाजशास्त्रीय और राजनैतिक विचारधाराओं पर समग्र रूप से काम करने वाले लोगों का अभिमत है कि अन्ना हजारे के नेतृत्व में टीम अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ त्याग, समर्पण और नैष्ठिक कर्तव्यों की जो मिसाल कायम की है वह लोगों के दिलों में कई सालों याद रखी जाएगी। उनके सफल आंदोलन का ही नतीजा है कि आज उन्होंने भ्रष्ट-आचार के विरुद्ध एक सशक्त जनमत तैयार किया है। आज प्रत्यक्षतः न सही किंतु परोक्ष रूप से देश की अधिकांश आबादी इस मसले पर एक मत है कि भ्रष्टाचार और अन्य शासनिक बुराइयों का निर्मूलन होना ही चाहिए और यही बात टीम अन्ना के राजनीति में आकर एक मजबूत आंदोलन खड़ा करने के उद्देश्य को पूरा करती है।


वहीं टीम अन्ना के राजनीति में आने के फैसले का विरोध करने वाले लोग मानते है कि टीम अन्ना की सोच दोहरे मापदंड पर चल रही है। एक तरफ टीम अन्ना कहती है कि वह भ्रष्ट राजनीतिक पार्टियों के विरुद्ध लोगों को जागरुक करेगी वहीं दूसरी तरफ वह खुद ही उस भ्रष्ट राजनीति का हिस्सा बनने जा रही है। टीम अन्ना की सोच पहले दिन से ही राजनीति से प्रेरित थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आंदोलन एक ढोंग था जिसे जनता पूरी तरह से समझ चुकी है। अन्ना आंदोलन का समर्थन करने वाले रामदेव और मेधा पाटकर भी टीम अन्ना के राजनीति में आने के फैसले से नाखुश बताए जा रहे हैं और टीम अन्ना को इस पर दोबारा विचार करने की बात भी कर रहे हैं।


उपरोक्त चर्चा के बाद इस मसले से जुड़े निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना बहुत जरूरी है, जैसे:


1. टीम अन्ना का राजनीति में प्रवेश आत्मघाती तो नहीं?

2. क्या टीम अन्ना का राजनीति में आने का फैसला देश की तकदीर बदलेगा?

3. राजनीति में स्वच्छ चरित्र वाले व्यक्तियों का प्रवेश होना चाहिए किंतु टीम अन्ना स्वयं स्वच्छ चरित्र की परिभाषा पर कितनी खरी उतरती है?

4. 2014 को देखते हुए टीम अन्ना के राजनीति में प्रवेश करने से कांग्रेस और भाजपा के मजबूत विकल्प की कितनी संभावना है?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “टीम अन्ना की राजनीति” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व टीम अन्ना की राजनीति – Jagran Junction Forum  लिख कर जारी कर सकते हैं।

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 3.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

52 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Michael Chefalo के द्वारा
February 5, 2017

Great – I should definitely pronounce, impressed with your web site. I had no trouble navigating through all the tabs and related information ended up being truly easy to do to access. I recently found what I hoped for before you know it in the least. Quite unusual. Is likely to appreciate it for those who add forums or something, site theme . a tones way for your customer to communicate. Excellent task.

Golda Pettner के द्वारा
February 4, 2017

I was examining some of your content on this website and I think this web site is very informative ! Keep putting up.

snsharmaji के द्वारा
September 1, 2012

ये अरविन्द केजरीवाल की महत्वकांक्षा है जो फलीभूत होने मे लम्बा समय लेगी क्योकि गदारो  की जडे हमेशा गहरी होती हैं जो आसानी से नही ऊखडेगी

Deepak के द्वारा
August 12, 2012

अन्ना हजारे जी का राजनीतिक पार्टी बनाना एक मजबूरी और दबाब में उठाया गया कदम है, इस फैसले में अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की महत्वाकांक्षा दिखाई देती है. इन लोगो ने १२१ करोड़ हिन्दुस्तानियों की भावनाओ का मजाक बनाया है

anugunja के द्वारा
August 12, 2012

मैं भी blog लिखती हूँ,पर मुझे अपना blog प्रकाशित करने के बारे ठीक से पता नहीं है।मैं बहुत मेहनत से लिखती हूँ पर जब मैं search में जा कर ,अपने article title का चुनाव करने के बाद जब मैं अपने लेख का शीर्षक डालती हूँ तो no search found आता है।मैं जागरण जंक्शन परिवार से निवेदन करती हूँ कि मेरी मदद करें।

Ajay Singh के द्वारा
August 11, 2012
bharodiya के द्वारा
August 10, 2012

एक भैंसा है दोस्तो, जो अपने घास के साथ साथ दुसरे का घास भी खा जाता है, और तगडा हो गया है । बलवान हो गया है । दूसरे को पागलों की तरह परेशान करता है । उसे काबू करना जरूरी था । अन्ना कुछ हथियार ले के आ गये । अनशन का हथियार पहले उठाया । लोगों को पसंद भी आया और ताली भी बजाई । लेकिन भैंसा काबूमें नही आया । उल्टा अपने सिंग, दांत को ओर मजबूत और तिक्ष्ण बनाने में लग गया, अपनी चमडी भी मोटी कर ली ताकी अनशनकी लाठी असर ना करे । अनशन का हथियार बूठा बेअसर हो गया लोगोंने तालिया बजाना भी छोडा । अन्ना क्या करते उठाया दुसरा हथियार राजनीति का । भैंसे को नंदी या सांढ ही हरा पाएगा । ईस हथियार की मेरे जैसे कुछ ही लोकों को शंका थी की ये हथियार होगा, बाकी को अब मालुम पडा । कुछ डर गए, कुछ खूश हो गए । हम खूश तो हुए लेकिन उलजन में पड गये । तीन तीन नंदी एक साथ खडे हो गये । मोदी, रामदेव और अन्ना । तिनों को एक साथ करना जरूरी है वरना आपसमें ही एक दुसरे को निपटा देंगे । और भैंसा बडी शान से मुस्कुराता रहेगा । मित्रो, अच्छे लोग कहां कहांसे गुजरे, क्यों गुजरे, उस का ईतिहास भुगोळ तपासने की जरूरत नही है । कुछ गलत जगह पैर पड गये हो तो उसे नजरांदाज करने में ही भलाई है । ईन लोगों से अच्छे आदमी आप कहां से लाओगे । जो है यही है । उन्हें ही सपोर्ट करना है । वो सब एक हो जाय ऐसे उपाय सुजाना है । राजकारण मे आदर्शवाद कोइ काम का नही है । आज सांढों की जरूरत है भीगी बिल्लीयों की नही । सांढ ही भैंसे को हरा सकेगा ।

ashokkumardubey के द्वारा
August 10, 2012

अन्ना का राजनीती में आना अवश्य आत्मघाती ही है , पर अन्ना ने तो टीम अन्ना ही भंग कर दी है और वे अपने गाँव रालेगन सिध्धि चले गए हैं ऐसी मेरी जानकारी है . हाँ उनकी टीम में कुछ लोग जो राजनितिक महत्वकंछा रखते थे वे सरकार का हवाल देकर सरकारी चुनौती को स्वीकार करते हुए राजनीत में आने की सोंच रहें हैं और देश को एक विकल्प देने का सपना देख रहें हैं इस टीम का नाम है “इंडिया अगेंस्ट करप्शन ” इसके संचालक श्री अरविन्द केजरीवाल हैं . कसी टीम के आने से देश की जनता का तकदीर नहीं बदलने वाला क्यूंकि राजनीती में आ जाने बहर से समस्या का समाधान नहीं हो जानेवाला यहाँ सारा तंत्र दूषित हो गया है भ्रष्ट हो गया है केवल नेता को भ्रष्ट कहना गलत होगा हमारे प्रशासनिक अधिकारी जो ऊँचे पदों पर आसीन हैं और सरकार की नीतियों को बनाने में और लागु करने उनकी मुख्य भूमिका है यह सारा भ्रष्टाचार उनकी दें है लगता है मसूरी के आई इ एस की ट्रेनिंग में यह एक मुख्य विषय है जिसको पढ़कर आज के अधिकारी जनता का दमन करने में लगे हुयें हैं इनको देश के हर जिला स्टार पर तैनात किया गया है और यही नेताओं के फंड इकठा करने का कम कर रहें हैं ज्यादा भष्ट यही अफसर हैं और इनको तो जनता का सामना भी नहीं करना पड़ता अतः सबसे पहले इनको कैसे सुधार जाये इनको कैसे पकड़ा जाये यही देखना ज्यादा जरुरी है स्वक्छ चरित्र वाले ब्यक्ति कभी राजनीती में प्रवेश नहीं करने वाले क्यूंकि राजनीत को एक गन्दा खेल कहा जाने लगा है और यह एक कीचड है जो इस दल दल में फंसा बहार नहीं आ सकेगा बिना दाग लगे चरित्रवान लोग आन्दोलन जरुर कर सकते हैं हाँ उनके आन्दोलन को बहर्पूर जन समर्थन मिले और जनता हिन् चुनाव आयोग में जाकर उनका नामांकन कराये तब तो शायद कुछ हो सकता है और उसको निर्दलीय चुनाव में उतरना होगा कसी पार्टी के साथ जुड़कर कोई बदलाव वह भी नहीं ला सकने वाला २०१४ के चुनाव में अन्ना टीम को कतई चुनाव में नहीं उतरना चाहिए वर्ना जो अब तक उन्होंने पाया है मेरा मतलब जन समर्थन से है उसे भी वे खो देंगे इनको आने वाले लोकसभा या विधान सभा चुनाव में जनता को उम्मीदवारों के बारे में जानकारी इकठा कर उन्म्की असलियत जनता को बटन चाहिए ताकि हर बार की तरह गलत ,भ्रष्ट और आपराधिक छबि के लोग चुनकर ना आ सकें धब्बल और बहुबल के सहारे ऐसे हिन् लोग अब तक चुन कर आते रहें हैं और आज जो १६२ सांसद संसद में बैठे हैं वह वर्तमान राजनीती का स्वरूप लोगों के सामने उजागर करती है जनता आज तक मजबूर हिन् रही है दस बदमाशों में से किसी एक कम बदमाश को चुनना हिन् जनता की मजबूरी रही है कुछ ऐसा करने की जरुरत है की जनता ऐसे लोगन को हिन् चुनने को मजबूर न हो .

Dr T K Sinha , VARANASI के द्वारा
August 9, 2012

Government deciding to give free mobile to poor people of India, Now more craze for Bengladeshvasi to come India. But all should be ready to hear sweet song about Rahul, Sonia and Congress + vote & support for Congress in comming Election and also to read SMS to win Rahul , Sonia and Congress . All payment will be done by other middle and some honest rich class Indians in the form of Taxes which is for development.After election more Service tax, Mahgai tax + other taxes have to pay by the Indian Middle class and honest Rich class. BE PREPARE YOU ALL TO FACE. Election is comming , now you may get some facilities and some material in low casi.

अशोक लाल के द्वारा
August 8, 2012

अन्ना हज़ारे और उनके सहयोगियों का अनशन तोड़ने का फैसला एक सही क़दम है मगर यह निर्णय लेने के लिये राजनीति में प्रवेश करना क्यें ज़रूरी है इस बात में थोड़ा संदेह है । यह किसी को नहीं भूलना चाहिये कि आन्दोलन का मूल लक्ष्य एक सशक्त लोकपाल लाना था ना कि राजनीति के उस अखाड़े में छलाँग लगाना जहाँ जाने का सिर्फ़ एक मक्सद चुनाव लड़ना और चुनाव जीत कर अपना मूल्य बढ़ाना रह गया है । यह बात िवपक्ष और स्वतंत्र सांसदों पर भी उतनी लागू होती है जितनी कि सत्ता धारियों पर । लोकपाल बिल को लेकर जो मौजूदा स्थिति है वो यह है कि सरकार ने यह तकरीबन तय कर लिया है कि यह विधेयक अपने वाले सत्र में तो यक़ीनन नहीं पेश किया जायेगा और आगे भी कोई ज़रूरी नहीं कि इसे कोई प्राथमिकता दी जाए ।एेसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि एक जागरूक जनता सांसदों की गतिविधियों पर तीखी नज़र रखे। यही अन्ना के आंदोलन का मूल लक्ष्य था जो अब उनके राजनीति में कूद जाने के फैसले से बहुत कमज़ोर पड़ गया है ।  आखिर राजनीति में आने से  अन्ना ज़्यादा से ज़्यादा क्या अपेक्षा रखते हैं ? क्या वह एक साल के अन्दर समूचे भारत में से ५५० ऐसे उम्मीदवार ढ़ूंढ़ सकते है जो उनके नाम पर चुनाव लड़ने को न सिर्फ़ तैयार हो जायें बल्कि जीत भी जायें ? बहुत से बहुत अगर उनकी नई पार्टी के १० सांसद बन भी गये तो वो लोकपाल या चुनाव सुधार जैसे किसी विधेयक को तेज़ी से लागू करवा पायेंगे ।एक जनरल वी के सिंह को छोड़ कर अभीतक कोई भी जाना माना नाम अन्ना के सियासी इरादों का समर्थन करने को आगे नहीं बढ़ा है । और वह भी चुनाव लड़ेगा और जीत पायेगा ऐसा ज़रूरी नहीं। देश की ज़रूरत संसद में इक्का दुक्का नये चेहरों की नहीं है बल्कि संसद के बाहर लाखों एेसे जागरूक नागरिकों की है जो गल्ती से चुनकर आये हुए ५४२ लोगों की हर गतिविधि पर नज़र रखें । उन्हें अपनी कुर्सी पर बैठ सकने की हर बड़ी छोटी कीमत चुकाने पर मजबूर करें। अन्ना के लिये सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने जाने से पहले देश में कहीं न कहीं से एक अन्ना ढ़ूंढ़ कर निकालें जो गाँधी के दिखाये हुए जिस रास्ते पर वह स्वयं चले हैं उस पर चलने के काबिल हो । ऐसा अन्ना उन्हें संसद के इर्द गिर्द नहीं बल्कि देश के गाँव गाँव में घूम कर कहीं मिलेगा ।  आज भी सारी दुनिया उस गाँधी को पूजती है जिसने सियासत की गंदी कीचड़ से अपने को बचा कर रखा । और पहले अंग्रेज़ शासकों को फिर नेहरू जैसे ताकतवर सियासतदारों को लगाम लगाकर रखा । आज भी ऐसा कोई राजनीतिग्य इस देश में नहीं है जो गाँधी के नाम पर एक भी अपशब्द मूँह से निकाल सके । अन्ना के अंदर पिछले वर्ष एक ऐसी ही चिंगारी चमकती हुई दिखाई दी थी । इससे पहले कि वह चिंगारी बुझ पाये उससे एक मशाल को जलाना है ।

Neeraj के द्वारा
August 7, 2012

मुबारक हो,देश को अक नया चोर मिला गया अब अक और हिसा लगेगा ,देश का और दुर्दसा होगा

ashokkumardubey के द्वारा
August 7, 2012

टीम अन्ना की राजनीति ” Jagran Junction Forum” प्रश्न १ . टीम अन्ना का रजनीति में प्रवेश आत्मघाती तो नहीं ? सबसे पहले तो मैं यह कहूँगा की टीम अन्ना अब वजूद में नहीं . अब इसके sadsyon ने अब इसे India अगेंस्ट corruption ” का नाम दिया है जो पहले से हीं वजूद में था . हाँ इनके सारे सदस्य जरुर टीम अन्ना के साथ हीं अब तक जुड़े रहें भले दोनों टीमों का उद्देश्य एक हीं था भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना और एक मजबूत लोकपाल बिल को सरकार द्वार पारित करवाना , जो दुर्भाग्य वश हो न सका ,क्यूंकि उस कानून के पास हो जाने से आज जो नेता ,मंत्री एवं सांसद लोकसभा में बैठे हैं और जनता के लिए कानून बनाने की सोंच रहें ऊन्मे से बहुतायत अब तक जेल में सजा काट रहे होंते अतः जन्लोक्पाल बिल के नहीं पास होने से इन नेताओं का तो जरुर भला हुवा और ये अपना बाकि समय आराम से सरकार में बिता लेंगे .अब रही बात अन्ना के राजीनीति में प्रवेश करने की तो वह उनके लिए कम वर्तमान नेताओं के लिए ज्यादा आत्मघाती सिध्ध होगा .अन्ना हजारे ने घोषणा कर दी है वे सक्रीय राजनीत में आने के बजाये गाँव गाँव जाकर जन जागरण का काम करेंगे जनता को बताएँगे और भ्रष्ट लोगों को चुन कर आने देने में कुछ रोक लगायेंगे . प्रशन २ .क्या टीम अन्ना का राजनीती में आने का फैसला देश की तकदीर बदलेगा ? देश की तकदीर इतनी जल्दी तो बदलने से रहा क्यूंकि केवल चुनाव में किसको चुना जाये ,इसके विषय में ही अन्ना लोगों को जागरूक कर पायेंगे , पर जो अपना तंत्र है वह तो वही रहेगा मेरा मतलब उन सरकारी प्रशासनीक अधिकारीयों से है जिन्होंने एक हीं बात आज तक समझा है वह यह की कोई भी काम बिना घूस के नहीं करना वेतन तो उनको केवल दफ्तर आने जाने के एवज में मिलता है काम करने के लिए तो उनको घूस पहले चाहिए और काम बाद में , और यही बनते हैं भ्रष्टाचार में मुख्य कड़ी , अगर जन्लोक्पल बिल आता तो इन भ्रष्ट सरकारी अफसरों पर नकेल कासी जा सकती थी और नेताओं से ज्यादा ये अधिकारी जेल में बंद होंते अतः देश की तकदीर बदलनी है तो एक मजबूत स्वतन्त्र और कानून का सख्ती से पालन करने वाला लोकपाल चाहिए . जो आज तक सत्ता में काबिज रही सरकारों ने नहीं बना पाया और पारित करना तो दूर की बात है इसमें कांग्रेस तथा अन्य पार्टियों की भूमिका एक सी रही है क्यूंकि भ्रष्ट लोग केवल कांग्रेस पार्टी में हीं नहीं हैं . प्रश्न ३ .राजनीत में स्वक्छ चरित्र वाले ब्यक्तियों का प्रवेश होना चाहिए किन्तु टीम अन्ना स्वयं स्वक्छ चरित्र की परिभाषा पर कितनी खरी उतरी है ? जहाँ तक स्वक्छ चरित्र की बात है तो , जो लोग स्वक्छ चरित्र के हैं वे राजनीती से बिलकुल दूर बैठे हैं और अपने अपने ढंग से समाज में भलाई का काम कर रहे हैं उनको सेवा के बदले देश से कुछ अपेक्छा नहीं वे पूर्ण रूप से समर्पित हैं और उन्होंने अपना जीवन देश सेवा में लगाये रखने की ठानी है हाँ इनकी संख्या नगण्य है , और दुसरे जो लोग हैं उनको तो समाज देख हीं रहा है अतः क्या टीम अन्ना या और दुसरे लोग जो आज राजनीती कर रहें हैं उनके मन में निति कम और राज करने की इक्छा ज्यादा प्रबल है अतः ऐसे लोगों से कोई बदलाव का देश को कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए हाँ अब समय जरुर आ गया है जब जनता जाकर अपने उम्मीदवार का नाम चुनाव आयोग में लिखवाये और वह उनको हीं इस काबील समझे जो उनके समस्यायों से रूबरू होता हो और उन समस्यायों के निदान के लिए अपन समय देने के लिए तैयार हो और उनको जनता चंदा देकर चुनाव लडवाए कसी उद्योगपति का कला पैसा लेकर अगर वह चुनाव लडेगा तो वह जनता के लिए कम उद्योगपति के लिए ज्यादा काम करेगा और आज ऐसा हीं हो रहा है अतः स्वक्छ चरित्र की परिभासा पर खरा उतरने वाला आज बहुत मुश्कील मिलेगा इसके लिए बड़ी लम्बी कवायद करनी पड़ेगी हाँ यह नामुमकीन नहीं . प्रश्न ४ २०१४ को देखते हुए टीम अन्ना का राजनीती में प्रवेश करने से कांग्रेस और भाजपा के मजबूत बिकल्प की कितनी सम्भावना ? अभी इस देश में बिकल्प देने के काबिल कसी में शक्ति नहीं है हाँ वर्तमान नेताओं की ज्यादा से ज्यादा हार निश्चीत है वे कांग्रेस भाजपा और एनी पार्टियों के नेता भी हो सकते हैं और अगले चुनाव में छेत्रिय पार्टियाँ हीं अलग अलग राज्यों से चुनकर आने वाली हैं हाँ उनके साथ कौन कैसे गंठजोड़ करेगा यह तो समय हीं बताएगा एक भाजपा का छोड़ क्यूंकि भाजपा को एनी पार्टियों ने एकदम अछूत करार दिया है हाँ कांग्रेस जरुर ऐसा प्रयास करेगी और सत्ता में उसकी बह्गिदारी बनी रहे ऐसा हीं प्रयास करेगी और ऐसी सरकार टिकाऊ नहीं होगी देश को जल्द हीं दुसरे चुनाव के लिए तैयार होना पड़ेगा क्यूंकि ये नेता अपने अपने मतलब से एक दुसरे की टांग खिचेंगे देश और पिछड़ जायेगा विकास रूक जायेगा और जनता जो आज महंगाई डायन को झेल रही है उसको आगे भी झेलेगी और बुनितादी सुविधाएँ जैसे स्वास्थ्य ,सिक्छा ,पेय जल संकट ,किसानो का खेती छोड़ पलायन ,शहरों में भीड़ और अदालतों से न्याय यह साडी बुनियादी सुविधाओं की कमी जो आज जनता झेल रही है इसमें बढ़ोतरी होगी क्युन्म्की आज नेताओं ने देख लिया जनता सड़कों पर उतारी आन्दोलन किया जो तक़रीबन देश्ब्यापी हुवा पर वे सत्ता में बने रहे उनका कुछ नहीं बिगड़ा तो परिवर्तन जो भी हो राजनीत में या सर्कार में आम जनता पहले पिस रही थी आगे भी पिसती रहेगी वो कहावत है न “कुत्ते भौंकते हैं और हाथी आगे चलता जाता है ” आज इस देश का यही हाल है

शशि भूषण सिंह के द्वारा
August 7, 2012

अन्ना जी का निर्णय सही है,ध्यान देना होगा कि गलत लोग घुस पैठ न कर सके

anugunja के द्वारा
August 7, 2012

यह लेख बहुत अच्छा लगा और बहुत दुख भी हुआ,अपने देश के दुर्भाग्य पर।जो हर बार किसी न किसी रूप सिर्फ मोहरा बनकर रह जाता है।

    pitamberthakwani के द्वारा
    August 11, 2012

    भाई जी दुखी अपने दुर्भाग्य पर होईये देश के दुर्भाग्य पर नहीं, आपने इस देश में जन्म लिया यही है आपका दुर्भाग्य

Ajit Saxena के द्वारा
August 7, 2012

Jagran Junction Forum टीम अन्ना का राजनीती करना उन लाखो करोडो लोगो की भावनाओ का आदर है, जीवन में उपदेश एवं कर्म का अपनी-अपनी जगह महत्त्व है, कभी लोगो को जाग्रत करना होता है तो कभी लोगो के साथ संघर्ष करना पड़ता है. टीम अन्ना ने निश्चय हो लोगो को जाग्रत किया और नया जोश भर दिया है. जो लोग राजनीती में आकर उनको चुनौती देने की बात कर रहे थे उनके लिए यह ज़रूरी था. बिना कीचड़ में उतरे कीचड को साफ नहीं किया जा सकता. बुद्धिजीवी वर्ग में दो तरह के लोग है एक तो मनोबल बढ़ने वाले जिसमे युवा वर्ग शामिल है, वाही दूसरी तरफ सरकार के पिछलग्गू या बीके हुए मीडिया के लोग या निराश लोग जिनको कोई भी अचछी बात जचती नहीं है. हमेशा ही तंग खीचते रहते है. हमारा प्रयास अच्चा होना चाहिए, सफलता असफलता पहले से निर्धारित हो जाएगी तो गीता का ज्ञान किस के काम आएगा. अत% टीम अन्ना कर्म करने जा रही है उसको खूब उत्साहित करने की ज़रुरत है. बुद्धिजीवी वर्ग के लोग समाज की भलाई के लिए यदि कुछ करना चाहते है तो कृपया इस संघर्ष में किसी भी रूप में साथ दे. चाहे तो राजनीती में आकर अपने जीवन काल में देश के लिए उपदेश न देकर सही काम को अंजाम दे.

    ashokkumardubey के द्वारा
    August 7, 2012

    आपके सोचने का ढंग बिलकुल सही है आज जरुँर्ट अपने छोटे छोटे स्वार्थों को सिध्ध करने के बजे कुछ जनहित के लिए अपना समय दिया जाये ,ईमानदारी का पाठ औरों को पढ़ने के बजाये यह सुनिश्चीत किया जाये वे अपने कितने इमानदार हैं ? आज अक्सर देखने को मिलता है की लोग दुसरे के भ्रष्टाचार की तो आलोचना करते हैं पर जब अपना मतलब सिध्ध होता हो तो वह उनको भ्रष्टाचार नहीं दिखलाई पड़ता वाही रमायन वाली बात है “पर उपदेश कुशल बहुतेरे ” इसे त्याग कर आत्म मंथन की आज ज्यादा जरुरत है और युवा हिन् इस देश की हालत में सुधर लायेंगे उनको ज्यादा से ज्याद सक्रीय राजनीती में घुसना आज समय की मांग है , धन्यवाद आपने अच्छी प्रेंर्नादायक बातें लिखी हैं

J C Gupta के द्वारा
August 7, 2012

यह एक पूर्वनियोजित षड़यंत्र था. इसमें कांग्रेस की और कुछ विदेशी ताकतों का हाथ है जो देश में राजनेतिक अफरा-तफरी का माहोल बनाना चाहते हैं..और देश में किसी कीमत पर मजबूत सरकार नहीं बनने देना चाहते हैं.. प्रारंभ में इनके आन्दोलन का सीधा सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा था, यह बात ना कांग्रेस को रास नहीं आई और ना टीम अन्ना को.. टीम अन्ना की साठ-गाठ कांग्रेस से है इस बात का सबूत उत्तरप्रदेश चुनाव में चल गया था..जब टीम अन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ प्रचार नहीं किया था..और केवल भृष्टाचार का रोना रोते रहे.. देशभक्ति के नाम पे इतना घिनोना खेल खेला गया, देशभक्तों को आपस में लड़ाया जा रहा है.. आज फेसबुक पे देशभक्त लोग आपस में ही गली-गलोच कर रहे हैं.. जो देशभक्त हैं वो अन्ना को कोस रहे हैं, और जो अंधभक्त हैं वो अभी भी अन्ना के साथ लगे हुवे हैं..जबकि उनको पता है की वर्तमान राजेनितिक समीकरण के सामने टीम अन्ना के ५ प्रत्याशी भी चुन कर आ जाएँ तो बड़ी बात है.. यह बात टीम अन्ना ही नहीं पूरा देश जानता है.. लेकिन टीम अन्ना को न चुनाव में २५० सीटें जीतनी है न ही सरकार बनानी है..इनका उद्देद्श्य तो बीजेपी के वोट बैंक (देशभक्त) में सेंध लगाकर सीधा सीधा कांग्रेस को फायदा पहुचना है..यह बात इनको समझ में आ भी जाएगी तो अपनी घटिया सोच और घमंड के कारण ये लोग देश को फिर से ५ साल के लिए अंधे कुए में धकेल देंगे.. इसके बदले में सरकार इनके NGO पर कोई कारवाही नहीं करेगी और भी कई तरह के प्रलोभन दिए गए हो सकते हैं सलमान खुर्शीद ने इनको अपनी गुप्त मीटिंग में. जो की पिछले महीने महाराष्ट्र में कहीं हुई थी.. काश यह बात चुनाव से पहले आम जनता की समझ में आ जाये की ये एक नितांत घिनोना खेल है जिसमे भारत को फिर से ५ साल के लिए विदेशी ताकतों के हाथ में गिरवी रखने की तेयारी हो रही है… धिक्कार है देशभक्ति के नाम पे ऐसे घिनोने खेल खेलने वालों के जीवन पे.. तिरंगा इनके हाथों में शोभा नहीं देता है.. जय हिंद…जय माँ भारती…

    Ajay Singh के द्वारा
    August 16, 2012

    भगवान आपकी कल्पना शक्ति को सद्गति प्रदान करें, इससे आपका भला तो होगा ही देश और समाज को आधिक भला होगा। हे राम!

Dr. H. C. Singh के द्वारा
August 7, 2012

जन लोकपाल कानून को लेकर शुरू किये गए आन्दोलन को बीच में ही छोड़कर राजनैतिक की और बढ़ने का निर्णय निश्चित रूप से आत्मघाती निर्णय है. भारतीय राजनीति इतनी आसान नहीं है क्योंकि इसमे धन एवं बाहुबल का ही बोलबाला है. जिस आन्दोलन से अन्ना हजारे जुड़े हुए हों उसके बारे में यह नहीं माना जा सकता कि प्रारम्भ से इसके पीछे राजनीति में उतरने का उद्देश्य छिपा हुआ था. हाँ यह जरुर है कि उनकी टीम के महत्वाकांक्षी सदस्य भ्रष्टाचार के विरुद्ध उतरे जन सैलाब को देखकर मन में ऐसी इच्छा पाल लिया जो उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगा.

shrwon kumar mishra के द्वारा
August 7, 2012

देश का भविष्य भारत एक लोकतान्त्रिक गणराज्य रास्ट्र है जो की हर भारतीय का अपना अधिकार है अपने अधिकार को पाने की अपने सामाजिक और राजनैतिक अधिकार को प्राप्त करने की . आज अन्ना टीम अपने इरादे को बदलकर एक राजनैतिक पार्टी बनाने जा रही है.ये बात कोई गलत साबित नही कर सकता की राजनीति में बिना समझौते के कुछ नही होता और पार्टी के लए धन इकट्ठा करना भी मेरे ख्याल से काले धन में ही आता है . जो की ये काला धन उन लोगो का होता है जो अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए राजनैतिक दलों को दान स्वरुप देते है.अन्ना जी अपनी एक राजनैतिक पार्टी बनाने तो जा रहे है पर क्या ये उनका और जनता का फैसला है या अन्ना जी के साथ में मिले चापलूसों का अपनी एक नवीन नीति. मै किसी व्यक्तिगत व्यक्ति का नाम नही ले रहा हूँ पर ये निश्चित रूप से कहूँगा की जो अपने कर्तव्य को पूरा नही कर सकते जो अपने कार्यो को सही दिशा नही दे सकते तो ,क्या वे हमारे देश के नेता बनकर भारत की दुर्दशा को सुधार सकेंगे . टीम अन्ना जो अपने पहले आन्दोलन को एक नवीन दिशा प्रदान किया था क्या ये राजनैतिक सोच की विचारधारा उनके इस आन्दोलन का सही मायने में सच साबित कर पायेगी.जब अपना देश आजाद हुआ है तब से और आज तक कितने आन्दोलन कारियों ने अपना आन्दोलन किया और अंत में राजनीति में आकर सब कुछ खो दिया . तो क्या अन्ना टीम इस सिलसिले को तोड़ पायेगी. जब की अन्ना जी ने कहा है की मै राजनीति में नही आऊंगा. सवाल ये उठता है की जब अन्ना जी को राजनीति में नही आना है तो पार्टी बनाने की सोच दी किसने ?. जब अन्ना जी राजनीति से दूर रहेंगे तो नई पार्टी बनाकर क्या सिद्ध करना चाहते है. आज अन्ना टीम ही नही है बल्कि बहुत लोग कहते है की हमारे देश के परधानमंत्री मनमोहन सिंह जी अपने आप को एक उपकरण की तरह रिमोट से काम करते हैं तो कल और जनता अन्ना टीम की पार्टी को क्या नाम देगी और कौन सा बदलाव होगा . एक कहावत है की बिना एक अगुआ के नौ सौ जुलाह डूबे और जहा तक मै सोचता हूँ तो यह सही ही लग रहा है की बिना एक अच्छे नेत्रित्व के कोई कम अच्छा नही हो सकता . आज जनता अगर अन्ना आन्दोलन के साथ है तो ये अन्ना जी का असर है ये उनकी तपस्या का फल है पर जब फल ही नही रहेगा तो पेड़ को पानी कौन देगा.किस के आस में हम इस पार्टी को दूध का धुला मानेंगे. अगर अन्ना जी राजनैतिक पार्टी का गठन कर रहे है तो उनकी जरुरत भी होगी इस पार्टी को उनको राजनीती में आना होगा . और अगर वे राजनीति में नही आना चाहते तो किस लिए पार्टी का गठन कर रहे हैं अगर उनकी नजर में राजनीति गलत है तो राजनैतिक पार्टी के सहारे कैसे हम अपने सपनो के भारत को एक नई दिशा दे पाएंगे. हमारे भारत की जनसँख्या लगभग एक अरब तेईस करोड़ है तो क्या तेईस आदमी के कहने मात्र से नई राजनैतिक पार्टी का गठन करना उचित है ?.क्या हमारे देश की जनता इस विचार को स्वीकार कर पायेगी की एक नई पार्टी बने और अन्ना जी उसमे अपना कोई योगदान न दे . अगर एषा हुआ तो देश की जनता अपने उस आशा को छोड़ देगी जो अन्ना जी से अभी तक लगाये है . इसलिए अगर राजनीति को एक नई दिशा देनी है तो अन्ना जी को भी पार्टी में शामिल होकर जनता के बीच में आना होगा और अपने सपने के भारत को हकीकत में बदलना होगा. यदि एसा नही होता है तो निश्चित रूप में ये भी पार्टी उन्ही पार्टियों की तरह हो जाएगी जो आज हमारे देश में सैकड़ो में फैली है. श्रवण कुमार मिश्र समाज सेवी

Mahabir prasad raturi के द्वारा
August 6, 2012

टीम अन्ना के द्वारा किया गया  यह फैसला सराहनीय है ।क्योंकि जिस देश में अनशन जैसे कठिन कृत्य करने पर भी सरकार सुनती न हो तो ऐसे में मैं समझता हूं कि प्रत्येक चिन्तनशील मनुष्य का यही चिन्तन होगा जो टीम अन्ना का है । टीम अन्ना का यह कदम निश्चित रूप से भ्रष्टाचार उन्मूलन की तरफ दूसरा कदम है । 

Rajeeva Ranjan के द्वारा
August 6, 2012

ALL FORCES BEHIND ANNA AGITATION ARE DIVERTED FROM THEIR PATH OF STRUGGLE AND NOW THEY NEEDS POLITICAL POWER WHICH IS NOT POSSIBLE IN THIS SO CALLED PRAJA TANTRA.

HARPAL SINGH के द्वारा
August 6, 2012

its very good step the team taking I am with him with all the way to fight with the currupted congres and other party leaders .

BHEEMAL Dildarnagar के द्वारा
August 6, 2012

Kahna mushkil hai ki kaun achha aur kaun bura hai. Etna tow nishchit hi pakki sambhavna hai ki kitna bhi bada aandolan ho, kitna hi bada neta ho, kitna hi bada officer ho, sub kuch chandi k tukdon say kharida ja sakta hai. Sirf aap k paas kwiss bank main kaala-maal hona chahiye, bharat main sub kuchh bikta hai. aaj bhrasht log etnay shakti shaali ho gaye hain ki kisi bhi aandolan ko kuchal saktay hain, media ko bhi chup rahna sikha saktay hain.

Ravikant के द्वारा
August 6, 2012

This is called Politics

sandeep के द्वारा
August 6, 2012

this step will be the ‘LAST NAIL’ on the Coffins of the Corrupt System & Corrupt Ministers…

HUKUMCHAND CHAMBHARE के द्वारा
August 6, 2012

अऩाजी  आप आगे बठे हम तुमॉरे साथ है

Jack के द्वारा
August 6, 2012

टीम अन्ना के  राजनीति में आने से साफ हो गया कि जो ड्रामे यह दो साल से कर रहे थे वह सिर्फ इसीलिए था. पहले से ही इन सपौलों का मन राजनीति की मलाइ खाने का था सो अब खाएंगे अगले चुनाव में जी भर कर मलाई. एक समय था हम भी मै भी अन्ना तू भी अन्ना का नारा लगाते थे अब तो भईया हम थे अन्ना वाला किस्सा गाएंगे. http://www.jack.jagranjunction.com

    sandeep के द्वारा
    August 6, 2012

    that depends “DRAMA” kon kr rha h?? Team Anna ya AAP??? Zinda rhe bina koi ladai nahi jeeti jati…. By the Way RTI bi yahi log le kr aye h… so pls SIR, be Active, NOT Reactive..thanks NAMASKAR

    HARPAL SINGH के द्वारा
    August 6, 2012

    क्या आप अन्ना जी के साथ अनसन पर बैठे थे, आग लगाने के लिये चिंगारी से ही काम नहीं चलता, माँ दुर्गा की तरह राक्छसी रूप मैं आना भी जरूरी होता है|

    HARPAL SINGH के द्वारा
    August 6, 2012

    राक्छसों को मारने के लिए राक्छस बनकर ही मारा जा सकता है

    bharodiya के द्वारा
    August 8, 2012

    एक भ्रष्टाचार समर्थ ही सपौलों शब्द का उप्योग कर सकता है ।


topic of the week



latest from jagran