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शरणार्थी और जातीय समस्या में उलझा असम - आखिर कौन जिम्मेदार ?

Posted On: 30 Jul, 2012 Others में

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राजनीति में कोई किसी का नहीं होता। राजनीति सिर्फ वोट के आधार पर की जाती है। अकसर वोट बैंक की चाह में राजनीतिज्ञ सही और गलत को ताक पर रख देते हैं। असम में हुई भारी हिंसा इसी का उदाहरण है। असम पूर्वोत्तर भारत का अहम राज्य है। आरोप है कि “यहां बांग्लादेश से आए शरणार्थी मुसलमानों ने हिंदू बहुल क्षेत्र को लगभग मुस्लिम बहुत क्षेत्र में बदल दिया है। लेकिन जिस तरह एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं उसी तरह इस क्षेत्र में अब इन दोनों धर्मों के लोगों का एक साथ रहना मुश्किल हो गया है।”


असम में हुई हिंसा को बांग्लादेशी शरणार्थियों द्वारा पैदा की गई हिंदू-मुस्लिम समस्या मानने वाले लोग कहते हैं कि 1971 के बाद से ही भारत में बांग्लादेशी लोगों की अवैध घुसपैठ जारी है। इन लोगों को नेताओं से वोट की गारंटी पर शरण का लाभ मिला। असम समेत अन्य कई पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बांग्लादेश से घुसपैठ हो रही है। बांग्लादेशी यहां आकर बस जाते हैं और फिर सरकारी वोटर कार्ड बनवाकर हमेशा के लिए यहीं के होकर रह जाते हैं। ऐसे में उन लोगों को बहुत परेशानी होती है जो पहले से इन इलाकों में रह रहे हैं। असम में भड़के दंगों की मुख्य वजह बांग्लादेश से आए मुस्लिम और स्थानीय हिंदुओं के बीच टकराव ही है।


लेकिन वहीं दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं जो इस समस्या को बांग्लादेशी शरणार्थियों द्वारा उत्पन्न हिंदू-मुस्लिम समस्या नहीं मानते हैं। इसके स्थान पर इनका कहना है कि यह हिंसा और तनाव बांग्लादेश से आए मुस्लिमों की वजह से नहीं शुरू हुआ बल्कि असम हिंसा की मुख्य वजह है जातीय वर्चस्व कायम कर संसाधनों पर कब्जा करने की नीति. इनका मानना है कि हालांकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि असम शरणार्थियों की वजह से मुश्किल में है किंतु यहां हिंसा की एक मुख्य वजह जातीय संघर्ष है। असम में फैली कई छोटी-छोटी जातियों का कलह अब आग की तरह खुलकर सामने आ रहा है जो कल तक एक चिंगारी की तरह था।


उपरोक्त चर्चा के बाद इस मसले से जुड़े निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना बहुत जरूरी है, जैसे:


1. क्या वोट बैंक की चाह में सरकार ने असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों की खुशहाली को ताक पर रख दिया है?

2. क्या शरणार्थियों की आड़ में जातीय गुट इन राज्यों में अधिक सक्रिय हो रहे हैं?

3. क्या बांग्लादेश सीमा से हो रही घुसपैठ एक सोची-समझी चाल है?

4. क्या असम दंगों के बाद भारत सरकार सीमाओं पर हो रहे शरणार्थियों के नाम पर अवैध घुसपैठ को रोकेगी?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “असम दंगे पर राय” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व असम दंगे पर राय – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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9 प्रतिक्रिया

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mukesh के द्वारा
August 3, 2012

महोदय, आसाम की हिंसा के लिए तथाकथित सेकुलर राजनीती जिम्मेदार है. भारत शायद दुनिया का एकमात्र देश है, जहाँ देश भक्त जनता का उत्पीडन और गद्दारों का महिमा मंडन होता है. देश के विभाजन के बात एक सोची-समझी योजना के अंतर्गत असम, बंगाल और पूर्वोतर के अन्य राज्यों को भारत से अलग करके इन्हें पाकिस्तान/बंगलादेश में मिलाने के लिए मुस्लिम घुस पेठियो को भारत में भेजा गया. देश भक्त नागरिको ने तभी इस खतरे को पहचान कर केंद्र और राज्य सरकारों को आगाह किया था, लेकिन वोट लोलुप पिसाचो ने इन घुस पेठियों को निकालना तो दूर इन्हें नागरिकता और अन्य सुविधाएँ देनी आरम्भ कर दीं जिस से इन की संख्या निरंतर बढती गई, सीमा पर ही इन्हें नागरिकता दस्तावेज दे दिए जाते, जिस से ये न केवल, पूर्वोतर बल्कि सारे देश में फैलते गए. इन घुस पेठियो को कांग्रेस के नेताओ का पूरा संरक्छ्न मिला. १९८० के दशक में असम के देशभक्त युवाओं ने इस समस्या के समाधान के लिए एक व्यापक आन्दोलन किया और घुस पेठियों के नाम मतदाता सूची से निकालने तक विधान सभा चुनाव न करने की मांग की. लेकिन इंदिरा गाँधी मुस्लिम घुस पेठियो की ढाल बन गई, असम की जनता एकजुट रही लेकिन इन्द्रा शासन ने देश भक्त जनता का बर्बरता पूर्ण दमन किया और ३ से ४% मतदान होने के बाव जूद गुस पेठिया समर्थित सरकार बनवा दी. देश द्रोह की पराकास्था थी, वो. यु.पि.ये. की पहली सरकार के गृहमंत्री, शिव राज पाटिल ने लोकसभा में खुलेआम इन गद्दारों को शरणार्थी कहा. क्या किसी और देश में ऐसे गद्दार मंत्री बन सकते है ? आज असाम की हिंसा में जब तक बोडो हिन्दुओ का संघार होता रहा देश से कोई स्वर नहीं उठा. लेकिन जब हिन्दू समाज का संगठित प्रतिकार हुआ, तो दिल्ली से आसाम तक हडकंप मच गया. इस हिंसा को जातीय हिंसा कह कर भ्रम पैदा करने का प्रयाश किया जा रहा है. कांग्ग्रेस सांसदों द्वारा केवल मुस्लिमो के लिए राहत केम्प लगाये जा रहे हैं. ये समस्या आसाम तक सीमित नहीं है, दिल्ली और आस पास भी बड़ी संख्या में मुस्लिम घुस्पेथिये जन संख्या संतुलन बिगाड़ रहे है. और हिंसक/ आपराधिक गतिविधिओ में ही लिप्त नहीं है, बल्कि देश की गोपनीय जानकारियां भी विदेश को भेज रहे है. समय आ गया है कि देश भक्त जनता स्थिति को समझे, ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाये.

GOVIND SHARMA के द्वारा
July 31, 2012

HELP FOR JUSTICE Sir Please Help me IS REQUEST KO HON’BLE PRESIDENT OF INDIA AND HON’BE CHIEF JUSTICE OF INDIA TAK PAHUCHANA KI KRIPA KARE ME AAPKA ATI ABHARI RAHUNGA THANKS ME IS DESH KA EK GARIB IMANDAR LADKA HU JO PICHLE 2 SAAL SE IMANDARI KI GOVT. JOB LAGNE KE BAAD B JOINING KA WAIT KR RHA HU SIR MERI AUR WAKI CANDIDATE KI MAINPURI DISTRICT COURT ME CLERK KE POST PAR SELECTION HUA THA AUR JOINING LETTER B DIYA GYA JOINING K LIYE BULAYA GYA BUT HUME AFTERNOON K BAAD LOTA DIYA GYA AUR JO CANDIDATE HON’BLE ALLAHABAD HIGH COURT NE ISI CLERK K POST SE PEHLE BARKHAST KR DIYE THE UNHONE HON’BLE SUPREME COURT OF INDIA ME PETITION DAAL DI AUR EK CASE TO HUM JEET GYE BUT EK CIVIL APPEAL NO. 2882/2012 PICHLI 2-03-2012 KI HEARING K BAAD AAJ TAK USKI DATE N LAYAGI JA RHI JISKE KARAN MUJE BHUT MENTALLY PROBLEM HO R H AUR ME TO GARIB LADKA HU MERI MOTHER KO HEART KI PROBLM HAI AUR FATHER KO DIABETES KI PROBLEM HAI PHIR B WO JOB KRNE JATE H BUDAPE ME AUR MENE UNKA SAHARA BANNE KI SOCHI TO AISE JESE MEHNAT KRKE IMAANDARI SE JOB LAGWAYI TO USKI JOINING K LIYE AAJ TAK TARAS RHA HU AGAR MERE PAAS PESE HOTE TO KISI B DEPARTMENT ME RISWAT DEKR JOB LAGWA LETA AUR AARAM SE SARKARI NAUKRI KR RHA HOTA TAB YE PROBLEM N JHELNI PDTI JO AB JOB LGNE KE BAAD B JHELNI PAD R H IS BHRASTH SAMAY ME HUM JESE GARIB IMANDAR LOGO KI KOI JARURAT N H SIR ME AAPSE REQUEST KRTA HU MUJE BHUT JYADA ECONOMICALLY AUR MENTALLY PROBLEM JHELNI PAD RAHI HAI MUJPE AB APNE GHAR KI HALAT AUR JYADA GIRTE HUE N DEKHI JA SAKTI ME GARIB HU AUR DUSRA GENERAL CATEGORY ME AATA HU TO HON’BLE COURT KI FREE CASE LADNE KI SUBIDHA B BDI MUSKIL SE HI MILEGI TO HUM JESO K LIYE KAHA H SAMANTA AUR JUSTICE? AUR MENTALY DISTURBANCE K WAJAH SE DUSRE EXAM KI PREPARATION B N HOTI KI JOB LAGTE HUE B N MILI AUR AGAR JOB KI KARU B TYARI TO 400 YA 500 YA 1000 RUPEE EXAM FEE KAHA SE LAU BHARNE PLEASE SIR HELP ME PLEASE SIR HELP ME HON’BLE PRESIDENT OF INDIA AND HON’BLE CHIEF JUSTICE OF INDIA SIR AGAR AAP MADAD NAHI KAR SAKTE TO ICHCHA MRITYU DENE KI KRIPA KARE DHANYABAD

Ramesh Nigam के द्वारा
July 31, 2012

It is strange that JAGRAN is calling the Illegal MUSLIM INFILTRATORS as REFUGEES. I highly object to it. you should not be a part of conspirators, who have rendered the country in a DHARAMSHALA. The problem is the result of Pan Islamism, which was responsible for ill fated PARTITION. The Secularists, Gandhians, Nehruvians and their stooges like Swaroopanand have reactivated the JWALAMUKHI-bURNING OF HINDU PASSENGERS IN GUJRAT, ATTACK ON HINDU PILGRIMS IN BARELY, AND ELIMINATION OF HINDU BODOS IN ASSAM. For the sake of God, please do not misguide the nation. Dont be afraid of calling Terrorism as Islamic Terrorism and Assam problem as Pan Islamic agenda.

shankar dayal sharma के द्वारा
July 31, 2012

jagran Junction Forum मेरे विचार में इस तरह की जातीय हिंसा का मूल कारन सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक की राजनीती है. असाम में ज्यादा वोट पाने के लिए राज नेता बाहरी लोगो का समर्थन भीतर ही भीतर करते है, ऐसा नहीं है की इन्हें इसके दूरगामी नुकसान के बारे में नहीं पता नहीं होता है, बल्कि ये अपना तात्कालिक लाभ के लिए इसको नजरंदाज करते है.

pitamberthakwani के द्वारा
July 30, 2012

यह जानते हुए भी कोई न तो कुछ कर रहाहै और नहीं कर पा रहा है ,करना तो सराकी महकमे को चाहीये यदि नहीं कर रहा है तो?

ashokkumardubey के द्वारा
July 30, 2012

शरणार्थी और जातीय समस्या दोनों में उलझा असम – आखिर जिम्मेदार कौन ? जहाँ तक जिम्मेदारी की बात है वह तो वर्तमान कांग्रेस की सर्कार में कोई पहलु या प्राथमिकता ही नहीं अगर यह सर्कार जरा भी जिम्मेवारी लेनेवाली होती तो घुसपैठ जब शुरू हुवा तभी बोर्डर को सील कर देती यानि सन १९७१ में ही लेकिन तब तो हमारे देश की दिवंगत पी एम् श्रीमती इंदिरा जी सत्ता में काबिज थीं जिन्होंने देश की जनता पर महंगाई और भ्रष्टाचार को अधिनायक तंत्री रवैया के साथ कुचला और देश में आपातकाल घोषित कर दिया अतः यह जग जाहिर है की यह कांग्रेस पार्टी केवल वोट बैंक की राजनीती के तहत सरे गैरकानूनी एवं देश विरोधी कार्यों को अंजाम देती है जब जब यह शासन से बहार रही है इस पार्टी ने तरह तरह से देश को अशांत करने का ही कार्य किया है पंजाब का भिन्दर्वाला इंदिरा की उपज थ और जब वह मजबूत बनकर उभरा तो तो अप्निशारते मनवाने के लिए इनको बाध्य किया जिसका परिणाम आपरेशन ब्लू स्टार हुवा और इंदिरा गाँधी की हत्या हुयी पूरे विश्व के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुवा की उसका अन्ग्रक्छाक ही उसकी हत्या करे कांग्रेस ने इससे भी सबक नहीं सीखा ये सरे शरणार्थी योजना बध्ध तरीके से देश में बुलाये गए हैं और इनसे कांग्रेस का वोट बैंक है ये बंगला देशी बंगाल में भी घुसे हुए हैं वहां भी ये बहुत बड़े वोट बैंक हैं जिनका इस्तेमाल सीपीएम करती रही अतः बंगला देश से घुस पैठी एक सोंची समझियो सरकारी चाल है और सर्कार में ज्याद समय यह कांग्रेस ही रही है

kamal के द्वारा
July 30, 2012

हाँ ये दुनिया बड़ी गन्दी ह और इसको गन्दा करने मै हमारे जाने मने नेताओ का बड़ा हाथ है . ये लोग अपना फायदे क लिए कुछ भी कर लेते hai लोगो को जात पात के नाम पे लड़ना और फिर धर्म के नाम पे लड़ना और अपने अप को श्रेष्ठ बताना और दूसरो को निचा बता कर बोट बटोरना इनका पेसा है पर मुझे ये नि समझ आता लोग सब जाने है , पता नहीं फिर भी kyon ऐसा करते है. ऐसे लोगो को तो जीने का कोई अधिकार नहीं है जो इस तरह का घिनोना कम करते है

astrobhadauria के द्वारा
July 30, 2012

हमारी भारत माता के दो हाथ एक सिर इस देश के स्वतंत्र होने के बाद की राजनीति ने बुरी तरह से काट कर आहत कर दिये है,जो माता धर्म का अवतार मानी जाती थी वह आज बुरी तरह से आहत है,दाहिने हाथ को पाकिस्तान बना डाला और बायें हाथ को बंगला देश बना डाला,दोनो हाथो को काटने के बाद काश्मीर समस्या से सिर को धीरे धीरे कलम किया जा रहा है,यह सब केवल राजनीति और बांटो खाओ राजनीति के अन्दर ही माना जा सकता है। आज यह माँ के हाथ और सिर काट रहे है कल यह ह्रदय पर आघात भी करेंगे और धड को आधे आधे हिस्से मे बांट कर उत्तरी भारत और दक्षिणी भारत को भी बनाने से नही चूकेंगे। हमारी एक ही गल्ती कितनी बडी समस्या को पैदा कर देगी इस बात का आगे की पीढी ही भुगतने के बाद गालियों के रूप मे हमे नवाजेगी। अगर यह सोचा जाये कि हिन्दू के जाने के बाद मुसलमान सुरक्षित है वह भी नही है कारण चीन और बाकी देश इस ताक मे है कि कब हिन्दू अपनी औकात को खोये और कब वह मारकाट का बदला मारकाट से चुकाकर कब्जा करे,जो शदियों से नही हो पाया है वह धीरे धीरे होता जा रहा है। नेता भी सुरक्षित नही है कारण जिनकी वोट बैंक के कारण यह माना जाये कि वह हमेशा के लिये गद्दी नसीन बने रहेंगे इन्दिरा और नेहरू परिवार की तरह से उनकी औलादें कब्जा जमा कर रह पायेंगी यह सोच गलत है,कारण अब वह जमाना चला गया है जब आदमी इज्जत और मर्यादा के लिये पीछे हट कर पीछे वाले को रास्ता देता था,आज की पीढी जैसे मान अपमान और मर्यादा का रास्ता भूलती जा रही है उसका सौ गुना असर और आने वाली पीढी के पास होगा,वह नही देखेगी कि कौन धनी है और कौन निर्धन है,केवल ताकत से कब्जा करने का कारण ही सामने आयेगा। जाति का उदाहरण देना या एक समुदाय का उदाहरण देना बेकार की बात है,जब कोई भी सरकार किसी भी व्यक्ति विशेष को एक कानून के अन्दर नही लायेगी तो वह अपनी मनमानी करने के लिये जरूर अपने उपाय को आगे करेंगे,इस भारत मे जहां हिन्दू समुदाय के लिये बर्थ कन्ट्रोल लागू है वहीं मुस्लिम समुदाय के लिये कोई कानून नही लागू है वह कितनी ही शादिया कर सकता है,कितने ही बच्चे पैदा कर सकता है और जब जनसंख्या बढती जायेगी तो कोई किसी को नही गिनता है,सब अपनी अपनी भूख मिटाने के लिये जहां रास्ता मिलता है जाना शुरु कर देता है। अगर कहा जाये कि जो बच्चा पैदा होता है उसे इस बात से मतलब है कि धर्म के लिये वह अपने को कुर्बान कर दे,यह बात भी हरगिज मान्य नही है,कारण एक साथ जब बीस भूखे होंगे तो वह एक साथ ही भोजन को देखकर भोजन पर टूट पडने के लिये तैयार रहेगे साथ ही जब कोई व्यक्ति अकेला काम नही कर पायेगा तो वह अपने को हुजूम के साथ मिलकर लूटने खाने के लिये आगे आयेगा,और जो हुजूम को बनाकर आगे चलेगा वही नेता बन जायेगा। इस राजनीति का एक ही कारण देखा जा सकता है कि आज की राजनीति भेडिया के झुंड के माफ़िक हो गयी है इस झुंड का एक सरदार बन जाता है और बाकी के उसके पीछे चलकर शिकार पर हमला करने वाले बन जाते है,एक मानव अगर मानव का वध करता है तो दर्द उसे भी पता होता है लेकिन भेडिया के लिये कोई दर्द नही होता है वह केवल अपना पेट भरना जानता है और वह केवल समुदाय बनाकर ही हमला कर सकता है चाहे वह राजनीति के दल के रूप मे हो या एक जाति के प्रति भावना बनी हो या फ़िर एक प्रकार से भूखे भेडियों का झुंड कहा जाये.

alok chantia के द्वारा
July 30, 2012

भारत के पास सबसे बड़ी समस्या यही है कि यहाँ का नेता देश के लिए अपने लिए जीता है और वह देश का दर्द कम अपने चुनाव जीतने का दर्द ज्यादा रहता है और यही कारण है कि कौन इस देश में घुसा आ रहा है इस का कोई मतलब नही है ……बंगला देश बन्ने का मतलब का था अगर इस देश ले लाखो शरणार्थी भारत में आ रहे है …सरकार ने आज तक अल्टीमेटम नही दिया कि अगर घुस पैठ जारी रही तो बांग्लादेश को भारत में विलय करने कि कार्यवाही की जाएगी ……………पर इस को कहने के लिए पहले देश के लिए जीने का भाव लाना होगा …………..और देश में कही वही जब आने जाने की स्वतंत्रता है और अनुच्छेद १९ मूल अधिकार है तो उसको कैसे रोका जा सकता है ….और अगर सरकार इस अनुच्छेद का पालन नही करा पा रही है तो जैसे सैकड़ो संशोधन किये है उसी तरह इस अनुच्छेद को भी संशोधन करके समाप्त कर दे ……..आसाम जब जल रहा था तब राष्ट्र पति भवन में शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था ……क्या अब भी बताना जरुरी है कि नेताओ के लिए देश और देश के लोग कहा है और नेता सिर्फ रेवड़ी बाँट में लगा है …….भारत में जाती कि समस्या इसी लिए है क्योकि सरकार उसको बनाये रखना चाहती है ताकि देश के लोगो की सोच कभी भी एक हो ही ना सके भले ही देश के १०० टुकड़े हो जाये …………..और यही कारण है की हमको लगता है कि इस देश में हम हर तरह से जीने के लिए स्वतंत्र है पर नेता को लगता है कि देश अपनी मुट्ठी में है और यही कारण है है कि कभी आसाम जलता है तो कभी जातीय हिंसा से क्षेत्रीय हिंसा से महाराष्ट्र जलता है ………………….अखिल भारतीय अधिकार संगठन , डॉ आलोक चान्टिया


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