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पाकिस्तान के साथ क्रिकेट - आखिर क्यों है इतनी जल्दबाजी?

Posted On: 23 Jul, 2012 में

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‘भारत एक शांतिपूर्ण राष्ट्र है’ यह बात भारतीय सरकार समय-समय पर अपनी सोच, व्यवहार और अपने निर्णय लेने की क्षमता से जाहिर कर देती है। इसकी एक मिसाल हाल के दिनों में देखने को मिली। पांच साल पहले मुंबई में तीन दिन तक तांडव मचाने वाले और देश की सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार करने वाले आतंकवादियों को अब सरकार भुलाकर दुबारा पाकिस्तान के साथ संबंध को बहाल करने के पक्ष में दिखाई दे रही है। इसकी शुरुआत वह क्रिकेट से करना चाहती है। मुंबई हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो क्रिकेटीय संबंध समाप्त हो गए थे वह आने वाले दिसम्बर महीने में फिर से शुरू हो रहे हैं। इसको लेकर बीसीसीआई ने भी मंजूरी दे दी है और ऐसा माना जा रहा है केंद्र सरकार इससे पूरी तरह से सहमत है।


इस विषय के खिलाफ अपनी राय रखने वालों का मानना है कि क्रिकेट संबंध को बहाल करने में बीसीसीआई ने जो जल्दी दिखाई है वह काफी चौंकाने वाला है। मुंबई हमले जैसे गंभीर मुद्दे को बीसीसीआई ऐसे भुला गई जैसे कुछ हुआ ही नहीं। बीसीसीआई के इस व्यवहार से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह दिवालिएपन के शिकार पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भारतीय धन से सींचना चाहती है। सरकार खासकर बीसीसीआई को उस देश की चिंता है जो कभी भी हमारे लिए विश्वासपात्र पड़ोसी साबित हुआ ही नहीं, जिसने समय-समय पर हमारे पीठ पीछे वार किया है और जो हर समय भारत की तरक्की से आगबबूला रहता है। 26/11 हमले की घटना को कई साल हो गए हैं लेकिन इस हमले के मास्टरमाइंड आज भी हमारी पहुंच से कोसों दूर हैं. वह कभी पकड़ में भी आएंगे यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता।


वहीं इसके समर्थन में अपनी राय रखने वालों का कहना है कि इससे भारत-पाकिस्तान के संबंधों में काफी सुधार आएगा जो दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए सफल होती दिखाई नहीं दे रही थी। भारत-पाकिस्तान का मैच साधारण मैचों से काफी अलग होता है। स्टेडियम और स्टेडियम के बाहर इनके मैचों में रोमांच और पागलपन देखने को मिलता है. ऐसे में बीसीसीआई के इस निर्णय से एक बार फिर लोगों को रोमांच देखने को मिलेगा। खेल की कोई सरहद नहीं होती इसलिए हमें इस पहल का स्वागत करना चाहिए।


उपरोक्त चर्चा के बाद इस मसले से जुड़े निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना बहुत जरूरी है, जैसे:


1. क्या क्रिकेट मैत्री के बाद पाकिस्तान अपने यहां से संचालित आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाएगा?

2. क्या बीसीसीआई को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की चिंता है?

3. आखिर क्यों भारत सरकार पाकिस्तान की मंशा से अवगत होने के बावजूद उससे संबंध बनाने को उत्सुक रहती है?

4. क्या क्रिकेट समर्थक पाकिस्तान की ‘पीठ पीछे छुरा घोंप नीति’ को भूल चुके हैं?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “भारत-पाक क्रिकेट संबंध” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व भारत-पाक क्रिकेट संबंध – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Right Thakral के द्वारा
July 29, 2012

भारत पाक क्रिकेट सम्बन्ध – Jagran Junction Forum भारत सरकार खासकर कांग्रेस सरकार अब हिन्दुस्तानियों की लाशों पर राजनीती कर रही है. उसे परवाह नहीं है की कितने हिन्दुस्तानी आतंकवादियों की दहसत का सिकार हो चुके हैं. सरकार को तो बस अपनी कुर्शी की परवाह है. और हमारे हिन्दुस्तानी नेता जो एक विदेशी महिला को अपना सबकुछ यानि भगवान् मान चुके हैं, अपना जमीर बेचकर हिन्दुस्तानियों को धीरे-धीरे मौत के घाट उतर रहे हैं. हिंदुस्तान को ये नेता विकशित न करकर हमेश विकाशशील ही रखना कहते हैं. जो ये विदेशी महिला कहती है और हमारे बेईमान हिन्दुस्तानी नेताओं का खून पानी हो गया है जो अपना जमीर गेरकर हिंदुस्तान को लूटने में लगे हैं. बीसीसीई भी सरकार की तरह ही हो गयी है और उसी की पहल पर ही पाकिस्तान को दोस्त बनाने में जुटी है. खैर हिन्दुस्तानियों ने अब सब कुछ सहना सिख लिया है. अब हिन्दुस्तानियों को परवाह नहीं क्योंकि हमने पुराना सबकुछ याद रखना छोड़ दिया है. अब हमारा देश सोने की चिड़िया वाला देश नहीं बल्कि बेईमान, देशद्रोही और गद्दारों का देश हैं. क्योंकि हर कोई अब देश को लूट रह है.

    snsharmaji के द्वारा
    September 1, 2012

    हिन्दुस्तानी नही सिर्फ हिन्दू कहो 

seemakanwal के द्वारा
July 26, 2012

सरहद पे लगें हों लाख कटीले तार मुहब्बत के लिए लेकिन ,एक दर खुला रखना नफरत की ज़हरीली हवा ,माहौल करेगी जहरीला लोगों दिलों में अपने ,एक सब्ज़ शजर रखना

ASK के द्वारा
July 24, 2012

पाकिस्तान की बुनियाद अंग्रेजों के इशारे पर और दार – उल – इस्लाम और जिहाद के फल्सफे पर की राखी गई थी | कैसे कत्ले-आम के बाद नंगा कर हिन्दू – सिख औरतों के जलूस निकाले गए थे | ‘ मै न भूलूंगा – मै न भूलूंगी | उस दिन पाकिस्तान का नापाक चेहरा सारी दुनियां के सामने था | जिस थाली में खाना उसी में छेद करना इस्लाम की फितरत है | क्या किसी भी इस्लामिक देश में मुक़म्मल लोकतंत्र और आजादी है | कहीं ट्यूनिसिया, लीबिया, सोमालिया, मिस्र, इराक, यमन, पाकिस्तान (पाक – स्थान) धू – धू कर जल रहे हैं और तो कहीं सीरिया में रोज – रोज इंसानों का खून बह रहा है | यह इस लिये क्यूंकि इस्लाम में ‘ जिसकी लाठी उसकी भैंस ‘ का असूल चलता है | हिन्दोस्तानी हो यां पाकिस्तानी, नेताओं को देश से क्या मतलब, उनके तो वोट बैंक महफूज रहना चाहिये | नेता तो दोनों देशों में एक सामान है कैसे भी हो सके राज और ताक़त उन्ही के हाथों में रहनी चाहिये | पाकिस्तान में तो नाम मात्र के प्रेजिडेंट और प्राइम मिनिस्टर हैं और पता नहीं कब आई एस आई धर दबोचे | मुल्लाओं की जुबान ( Islamic Ideology ) जहर उगलती है और आंतवादिकयों का आंतक | वहां हिजबुल मुजाहिद्दीन और जमात – उद दावा, लश्करेताईबा इधर हिन्दोतान में इंडियन मुजाहिद | आई एस आई के हाथ में तलवार और इधर हिन्दोस्तानी की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के हाथ में ढाल और की नेताओं की नीतियों से पीठ पीछे बंधे हाथ | हाँ दोनों देशों में कुछ बचा है तो उनके सुप्रीम कोर्ट परन्तु इनके भी दायरे सीमित है | कभी – कभी तो ऐसा लगता है की इनके भी हाथ कठपुतलियों की तरह कानून की डोरियों से बंधे हुए हैं यां नेताओं द्वारा लगाये गए न्यायिक सक्रियता ( judicial activism ) के इल्जाम और हो – हल्ला | सुप्रीम कोर्ट तो दोनों देशो की आखरी उम्मीद रह गए हैं नहीं तो गणतंत्र, सेकुलरिज्म और समाजवाद को तो दिवाला निकल चुका है | दोनों देशों की जनता की पीठ भ्रष्टाचार, महंगाई और अपराधों के बोझ से टूट रही है, परन्तु दोनों देशों के नेतओं के कान में जूं भी नहीं रेंगती उनको तो भ्रष्टाचार और राजनीतिक दंदे से फुर्सत ही नहीं औरफ फिर क्रिकट के धन्धे का लालच कैसे छोड़ दें | इसके अलावा वोह हर वक़्त सोचते रहते हैं कि कैसे जनता -अवाम का ध्यान समस्याओं से हटा कर दूसरी तरफ लगा दिया जाये | तो क्रिकेट में हुआ दो तरह का फ़ायदा यानि आम के आम गुठलियों के दाम | हिन्दोस्तान की सेन्ट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन को तो आम जुबान में लोग कांग्रेस ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन यां सरकारी ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन कहने लगे हैं | ‘ कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना, छोडो बेकार की बातों में कही बीत न जाये रैना ‘ रैना का मतलब यहाँ राज शासन करने का वक़्त अर्थात ‘ PERIOD OF RULE ‘ है | एक बार राजगद्दी हाथ आ जाये फिर कोई परवाह नहीं | संया बये बलवान अब डर काहे का | कांग्रेस के राज में पिछले साल दिसम्बर में जयपुर से १४ में से ११ सिमी ( स्टुडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया ) के अपराधियों को छोड़ दिया, क्यूंकि कांग्रेस कि राजस्थान सरकार पर मुसलमान और मुल्लाओ का ऐसा राजनीतिक दबाव था, कि एंटी टेरेरिस्ट स्कुईड वहां की होम मिनिस्ट्री से मुकदमा चलाने कि इज़ाज़त न ले , ताकि कांग्रेसी नेताओं का मुस्लिम वोट बैंक बकरार रहे और उनकी बाद्शायत कायम रहे | अगर उग्रवादियों की सहायता के लिये जेहादियों को शह मिलती है तो मिले इससे राजनेताओं को क्या फर्क पड़ता है बल्कि उनके तो वोटों की तो पौं – बारह होगी | इसी वोट बैंक की राजनीति – पोलिसी के अन्तर्गत अभी -अभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेशजी, जिनके नाम का मतलब अखिल ईश है और अब वोह उत्तर प्रदेश के इश्वर हैं जो चाहेंगे करेंगे, ने समाजवादी पार्टी का समाजवाद लाने के लिये अपनी पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ संगीन अपराधी मामले वापिस ले लिये | है न चोर – चोर मुसेरे भाई – भाई | पाकिस्तान कुछ भी करे आखिर हैं तो उसी थाली के चट्टे -बट्टे जिसके हिन्दोस्तानी नेता हैं | फौजी, पुलिसवाले और लोग मरें तो मरें, हमें क्या हानि हम तो हैं चोर – चोर मुसेरे भाई – भाई, ‘ घूमेंगे, फिरेगे, ऐश करेंगे और क्रिकट का हर तरह से फ़ायदा उठायेंगे | जनता की यादाश्त बहुत छोटी होती है | जो चला गया उसे भूल जा | जा अपनी हसरतों से, आंसू बहा के सो जा | फिर कुछ याद रह भी गया तो क्रिकट के लम्हे राजनितिक क्रिकट को भूला देंगे |

VIKAS PANDIT ' AAJAD' के द्वारा
July 24, 2012

कुछ लोग हर छोटी बड़ी खबर को बहुत मजे लेकर असरदार बनाते है , इससे किसी को फ़ायदा हो या न हो लेकिन नुकसान जरुर हो जाता है . भारत पाक का मैच होने या न होने से इन दोनों देशो के संबंधो पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला . और नुकसान – चैंनलो को , विज्ञापन कंपनियो को, व दर्शको को होगा ;;

neyazaktar के द्वारा
July 23, 2012

Pakistan ek aisa desh है, jispar vishwas karna bahut mushkil kam है, हम इंडियन Peace loving है, Cricket khelne se pahle relation madhur hona chahiye, usne bharat ke sath hamesha galat kiya है, isliye cricket khelne ke pahle yeh sunishchit karna hoga, ke woh atankwad ko band kare, tabhi cricket sambhav है. अख्तर, Patna

DR. PITAMBER THAKWANI के द्वारा
July 23, 2012

भारत यदि हमेशा ही पाक से शांती के साथ रहना चाहता है फिर भी वह हमें कमजोर ही समझता है तो हमें हर प्रकार से उससे सम्बन्ध तोड़ देने चाहिये,फिर चाहे क्रिकेट ही क्यों न हो ?हमकमजोर नहीं हैं i

astrobhadauria के द्वारा
July 23, 2012

मैं एक ज्योतिषी हूँ और मेरी राय भी ज्योतिषी कारणो से पूर्ण होगी,वर्तमान मे भारत और पाकिस्तान के बीच मे राहु केतु अपनी युति बना रहे है और जब भी यह युति बनी है तब तब कोई न कोई युद्धात्मक कारण भारत पाकिस्तान के बीच मे बना है.चूंकि सरकार हिन्दू मुस्लिम दोनो को अपनी अपनी योजनाओं में शामिल रखना चाहती है वह नही चाहती है कि उसका वोट बैंक खराब हो या उसे पाकिस्तान की लो लो पुच पुच नही करने पर मुस्लिम समुदाय उससे दूर चला जाये,कांग्रेस का आस्तित्व तभी तक है जब तक मुस्लिम उसके साथ है जैसे ही मुस्लिम दूर हुआ कांग्रेस का आस्तित्व गया.इस युद्धात्मक रूप को सकारात्मक रूप मे हार जीत के लिये बदलने का रूप ही क्रिकेट के लिये जिम्मेदार है.और यह भी निश्चित है कि भारत और पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाले मैच में जीत भारत की ही होनी है,अगर बीच में कोई सफ़ेद झंडा लहराकर मैच बराबर का नही कर दिया गया तो.

abhishek के द्वारा
July 23, 2012

यहां बीसीसीआई को शहीदों की भावना की चिंता नहीं है. वह तो अपने बाजार को बढ़ाना चाहती है उसकी कमाई जितना भारत-पाकिस्तान के एक मैच से हो जाएगी उतना तो किसी दूसरे देश के साथ खेली जाने वाली पूरी सीरीज से नहीं हो सकती.

अकाश के द्वारा
July 23, 2012

भारत की उत्सुकता मुंबई हमले के गुनहगारों को सजा दिलाए में हो तो इससे हमले मारे गए कई लोगों और शहिदों को श्रृद्धांजली दी जा सकती है.

sumit के द्वारा
July 23, 2012

पाकिस्तान के यह स्वभाव में है कि पहले दोस्ती का हाथ बढाओं तब सब मामला शांत हो जाए तो पीछे से हमला बोल दो. विभिन्न अंतराल में पाकिस्तान की तरफ से हमला होते रहे हैं.


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