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“अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री – अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़ ?

Posted On: 16 Jul, 2012 में

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आठ वर्ष के अपने कार्यकाल में अब तक कई आरोपों का सामना कर चुके भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं। हाल ही में अमेरिका की बेहद लोकप्रिय और विश्वसनीय समझी जाने वाली टाइम मैगजीन ने मनमोहन सिंह को अंडर अचीवर करार दिया है। मैन इन शैडो नाम से प्रकाशित इस रिपोर्ट में डॉ मनमोहन सिंह की काबिलियत और कांग्रेस को संकट से उबारने के लिए उनकी गंभीरता पर सवालिया निशान लगाया गया है। इस अमेरिकी रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद यूपीए गठबंधन तो मनमोहन सिंह के बचाव में आगे आया ही है साथ ही बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो इसे भारतीय प्रधानमंत्री की गरिमा पर हुआ आघात मान रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्ष सहित बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा भी है जो इस रिपोर्ट का पक्ष लेते हुए मनमोहन सिंह को एक असफल प्रधानमंत्री करार दे रहा है।


प्रधानमंत्री को अंडर अचीवर मानने वाले लोगों का यह कहना है कि शुरुआती दौर में मनमोहन सिंह के भीतर जो आत्मविश्वास दिखाई देता था वह अब पूरी तरह नदारद है। वह ना तो अपने मंत्रियों पर नियंत्रण रख पाने में सक्षम हैं और ना ही उनके शासनकाल में होने वाले घोटालों के बारे में ही उनके पास कोई जवाब है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स में हुई धांधली जैसे आरोपों में उनके कैबिनेट मंत्री शामिल रहे हैं परंतु फिर भी वह किसी भी प्रकार की ठोस कार्यवाही नहीं कर पाए हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय प्रधानमंत्री इतने स्वतंत्र भी नहीं हैं कि वह कोई निर्णय ले पाएं, उन्हें हर समय कांग्रेस आलाकमान के आदेशों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। वह जिस पद पर हैं और उन्हें जिस जिम्मेदारी से नवाजा गया है उसमें उनका हर समय मौन रहना उनकी असहाय छवि को ही प्रदर्शित करता है।


जहां एक तरफ मनमोहन सिंह को अंडर-अचीवर और असफल करार देने वाले लोग हैं वहीं दूसरी ओर बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा भी है जो मनमोहन सिंह के विरुद्ध प्रकाशित इस रिपोर्ट को एक राजनैतिक साजिश कह रहा है। ऐसे लोगों का मानना है कि जब यूपीए गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद भी सोनिया के विदेशी मूल के होने जैसे मुद्दे के कारण देश भर में कांग्रेस विरोधी माहौल बना हुआ था उस समय कांग्रेस को मनमोहन सिंह के रूप में एक सर्व स्वीकृत चेहरा मिला। उन्हें 8 सालों की सत्ता के बावजूद व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार मुक्त प्रधानमंत्री होने का गौरव भी प्राप्त है। भले ही उन पर मौन रहने जैसे आरोप लगाए गए हैं लेकिन कई बार उनकी यही मौन और मूक छवि देश को संकट से उबारने में सहायक हुई है। उनकी यह मौन मुद्रा विवादों को गर्म नहीं होने देती। देश की आर्थिक स्थिति को बिगाड़ने का दोष तथ्यों के आलोक में गलत साबित हुआ है क्योंकि वैश्विक मंदी की आपाद् स्थिति के बावजूद देश के भीतर उन्होंने आर्थिक संतुलन बनाए रखा। उनके प्रयासों के द्वारा देश में कभी भी औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां शिथिल नहीं पड़ीं। जहां एक ओर अधिकांश संपन्न देश मंदी का सामना कर रहे थे वहीं भारत में सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में कम ही सही लेकिन निरंतर बढ़ोत्तरी ही हुई है। ऐसे में यह सोचना कतई गलत नहीं होगा कि मनमोहन सिंह को अंडर अचीवर कहना निश्चित ही किसी उद्देश्य से प्रेरित राजनैतिक वक्तव्य ही है।


उपरोक्त चर्चा के बाद इस मसले से जुड़े निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनके जवाब ढूंढ़ना देशहित में बहुत जरूरी है, जैसे:


1. क्या भारतीय प्रधानमंत्री के लिए ‘अंडर अचीवर’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना एक सही मूल्यांकन है?

2. क्या मनमोहन सिंह की व्यक्तिगत छवि को देखते हुए सत्ता के भीतर उनकी असफलता को नजरअंदाज किया जा सकता है?

3. क्या वाकई आठ साल लंबे अपने शासनकाल में किसी भी क्षेत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद को योग्य साबित नहीं कर पाए हैं?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


अंडर अचीवर प्रधानमंत्री अयोग्यता का प्रमाण या गरिमा के साथ खिलवाड़ ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “यूपीए सरकार” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व यूपीए सरकार – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

snsharmaji के द्वारा
September 2, 2012

तटस्थ होकर  सोचने पर महसूस होता है कि मनमोहन न तो अर्थशास्त्री है न ही ईमानदार ना ही कुसल  प्रशासक,,है तो सिर्फ सोनिया का एक वफादार  पालतू  जानवर  जिसे सोनिया दुहती है इसे देश से कुछ  नही लेना बस कुर्सी मिल गई हर घोटाले मे पी एम ओ का हाथ है  इसकी सराहना सिर्फ गदार लोग करेंगे जिन्होने सैकुलर का लबादा ओढ रखा है  बेवकूफ ये नही सोचते कि इसने घृणा का गहरा बीज बोयाहै कि पहला हक मुसलमानो का  । एक मुसलमान कोआस्ट्रेलिया पुलिस द्वारा पकडने पर वहां के प्रधान मन्त्री से सिफारिश करता है  जबकि सैकडो हिन्दुओ पर पाकिस्तान मे अत्याचार का इसकी मोटी खाल पर असर नही होता  स्वर्ण मन्दिर के बहाने अकालियो का एजेंडा पूरा करता है ऐसा लगता है जैसे हिन्दुओ से बदला ले  रहा हैमुसलमानो का पैदाइस से मरण तक जापे स्कूल  मस्जिद सभी खर्च हिन्दू देते हैं  एक एक के 20-20 बच्चे  गरीबी का बहाना जब नही पलते क्यो पैदा करते है ईतने बच्चे वाह प्रजातन्त्र वाह संविधान वाह कांग्रेस, हिन्दू हैं ही बेवकूफ एक कप चाय पर वोट देस जाय भाड मे  बाहरी मीडिया तभी कुछ छापेगा जब देस मे कुछ हलचल होगी चाहे झूठ ही क्यो न हो या अफवाह हो  पर इस केस मे तोसभी कुछ प्रत्यक्ष है 

pitamberthakwani के द्वारा
August 8, 2012

सिंह साब के लिए अंदर अचीवर प्रधान मंत्री कहना गलत नहीं है. उन्होंने अपने लम्बे कार्यकाल में रेखांकित किये जाने वाला कोई काम नहीं किया यदि पहले का कोई काम है भी, तो वह उनका धर्म था जिसे उन्होंने किया और करना चाहीये था

pitamberthakwani के द्वारा
August 8, 2012

यह सही ही की जो आदमी कल ठीक था हमेशा ही वैसा रहेगा,यह जरूरी नहीं है,सिंह साब आजकल सफल नहीं हैं.अमेरीका द्वारा अन्दर अचीवर बताना कैसे भी गलत नहीं है.

rajhans के द्वारा
July 21, 2012

इसमें कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देना होगा| पहला कि हम प्रधान-मंत्री को किस नज़र से देखते हैं, दूसरा कि हम मीडिया को किस नज़र से देखते हैं| जिस दिन PM साहब का बयान आया, “…मैं मनमोहन सिंह और मैं भारत का प्रधान-मंत्री..” शायद ही ये बयान किसी को याद हो, उस दिन मैं समझ गया कि कुर्सी को हम जिस नाम से बुलाएं पर उसपर बैठने वाला गरम खून वाला इंसान बिलकुल नहीं है! जब हमने कई तरह की ख़बरों पर लिखा, यथा, महंगाई, भ्रष्टाचार, सुरक्षा, विदेश-नीति और विकास इत्यादी तो कभी भी प्रशंसा का एक भी शब्द, गलती से भी नहीं कहा! भारत में मीडिया को हमने paid-media कहना सीखा है, लेकिन प्रशसा है कि ऐसे लोग भी राजनैतिक छल-छंदों को छुपायें पर भारत-निर्माण की बातें कहनें में उनकी जुबान फिसलती है| ये गौर करने की बात है| शेष हम अपने ह्रदय से पूछेंगे कि प्रधान-मंत्री में मनमोहन सिंह नाम का वो कहानियों वाला हातिम-ताई कहाँ है! दूसरा विषय! मीडिया के दो काम होते हैं, पहला समाचार लाना और दूसरा उसपर अपनी उपरी राय देना, जो वैसे तो उपरी होती है पर उनके शब्दों में, समाचार पेश करने के उनके लहजे में और तो और और वाद-विवाद में भी नज़र आती है| हम भारत में वो ही अखबार विश्वसनीय मानते हैं, उन्ही चैनलों पर समाचार सुनना पसंद करते हैं जो इन दोनों विषयों पर अच्छे लगें| हम उनके राय को सम्मान देते हैं, क्योंकि वहां हमे विशेषज्ञ मिलते हैं| अब उस पहलु पर गौर करें जो टाइम मैगजीन को टाइम मैगजीन बनाता है| चूँकि वो पुरानी और स्थापित व्यवस्था के गवाह, मार्ग-दर्शक, विश्लेषक रहें हैं इसलिए उनकी बातों में प्रमाणिकता होती है, उनकी बातों को इसलिए सम्मान भी मिलता है, और तो और मीडिया जगत उनके नाम की कसम खाता है| उसका स्थान, महाभारत के भीष्म पितामह का है, और यही बात उसे टाइम बनाती है| अब हमे निर्णय करना है कि क्या हम उसी जिद्दी बच्चे की तरह व्यवहार करें जो अपने जवाब को किताब से अलग पाकर भी शिक्षक से उलझ पड़ता है, बस एक तर्क के साथ कि, “मैं यही सही मानूंगा!” हमे कूप-मंडूकता से बचना होगा! अब इस लेख को भारत की शान और प्रतिष्ठा गिराने की साजिश समझना कुछ वैसा ही है, जैसे कि…मुझे अपने पुराने पडोसी याद आ गए, वो भैंस रखा करते थे..गोबर के बीच सोते..मक्खियों से यारी थी..भूंसे की धुल साँसों में जाती फिर भी हमारे पिछवाड़े से उड़कर उनकी जमीन पर जाता तो हर सुबह होने वाली रोटियों के बंटवारे की लड़ाई भूलकर सब आदर्श परिवार की तरह एक हो जाते और पसेरी भर गोबर हमारी दीवारों पर पोत जाते! ये गलत है, अपने लिए भी और दूसरों के सम्मान के लिए भी| आप अगर खुद को बेहतर नहीं बनायेंगे तो आगे बढ रही दुनिया आपको बोझ समझकर अलग कर देगी जो कभी आपकी प्रशंसक थी! हमारे प्रधान-मंत्री अस्ताचलगामी सूर्य है!

Chandan rai के द्वारा
July 20, 2012

हम दिमागी रूप से अक्ल विहीन लोग है ,जो सुन लिया उसे मान लिया , भ्रस्ताचार इससे पहले की सरकारों के शासन में भी हुआ , हमे इसे एक उपलब्धि के रूप में लेना होगा की मनमोहन जी के कार्यकाल में उन पर सही रूप में कारवाई और नाम उजागर हुआ , हमे इसे उपलब्धि के रूप में लेना चाहिय , जब अन्ना टीम ने एक सामाजिक असुंतलन पैदा कर रखा था तो मनमोहन जी ने किसी भी इमरजेंसी की संभावना को समाप्त कर बड़े शांत रूप में राजनेतिक कुशलता से शांत किया ! अभी पुर विश्व में वैश्विक मंदी है ,इस तरह आप भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी का जिम्मा भी मनमोहन जी पर थोप नहीं सकते पर उनमे निहित कुछ खामियों से इनकार नहीं किया जा सकता , अगर वो अंडर अचीवर” प्रधानमंत्री है तो आप पुरे विश्व में एक नेता नहीं ढूंढ़ सकते जो अचीवर” हो सायद मुझे इन व्यक्तव्यों से कोई कांग्रेसी भी मान बैठे पर मेरा ये निजी आकलन है

mukesh के द्वारा
July 19, 2012

महोदय, कोई विदेशी पत्रिका हमारे देश के प्रधानमंत्री को अंडर अचीवर कहे या इससे भी आगे बढ़कर एक पत्रिका में आये अत्यंत आपत्तिजनक विशेषण, बड़ी पीड़ा की बात है, हमे इसका प्रतिकार करना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से हमारे समाज का वही वर्ग इस पर आग-बबूला हो रहा है, जो कल तक गुजरात के मुख्यमंत्री के विरूद्ध विदेशी सरकारों और संगठनों द्वारा चलाये जा रहे अनर्गल अभियान पर न केवल आनंदित हो रहा था, बल्कि बढ़-चढ़कर इसमें सहयोग कर रहा था. मोदी जी को अमेरिकी वीजा न मिलने पर बजे अमेरिका की निंदा करने के, मोदी जी को ही कोस रहा था. ये समय इन सब लोगो के लिए आत्म मथन का है. मनमोहन सिंह जी इस देश के प्रधान मंत्री है, लेकिन इस पद की गरिमा को कभी नहीं समझा. एक उत्तर दायित्व विहीन महिला उनको अपने इशारे पर नचाती रही, मंत्रिमंडल के मंत्री, कहीं बहार से निर्देशित होते रहे, भ्रस्ताचार नए कीर्तिमान छूता रहा और प्रधान मंत्री जी अपने को असहाय बताते रहे. क्या भारत जैसे महान देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आसीन व्यक्ति का अपने को असहाय बताना देश का अपमान नहीं है ? यदि वो असहाय हैं, तो देश किससे उम्मीद रखे ? क्या ऐसा कहकर वो अराजकता का सन्देश नहीं दे रहे है ? इतने विशाल और गौरव शाली देश का प्रधान मंत्री यदि अपने देश के गौरवपूर्ण इतिहास से अनभिग्य होकर इस देश को गुलामी की जंजीरों में जकड़ने वाले इंग्लॅण्ड को अपना मसीहा बताये, तो कहीं न कहीं उनकी बोद्धिक योग्यता या मानसिकता पर प्रस्नचिंह तो लगता ही है.

omprakash pareek के द्वारा
July 18, 2012

जागरण सम्पादक मंडल , आपने मेरा उत्तर क्यों डिलीट किया. कैसे लोग हैं आप जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बल पर मीडिया में रहते हैं और जहां कोई बात रास नहीं आई उसे सेंसर कर दिया. कलेजा रखिये. दूसरों की आलोचना को छुपाने के बजाय उसका जवाब देना सीखिए.

Mayank के द्वारा
July 17, 2012

jab ye walmart ko license dega tabhi ye achiever banega… ye america ke ek warning hai ki….”walmart ko lagooo karo nahi to tumko bhe hata denge jaise pakistan mein gilani ko hataya hai”

    Vishwajeet Rai "shekhar" के द्वारा
    July 18, 2012

    nice mayank , it is a politics but फिर भी हम जानते है he is अंडर अचीवर , He should use the resources we have .

sharma harmesh के द्वारा
July 17, 2012

Humaare PM aise nahi hai ke unko underaciever,ayogeyta ka parman ja garima ke sath kkhilwar jaisa bhada certificate dia jae.Yeh sabhi log jante hai ke unme kitni liakat hai isko hum sabh bhalibhant jante hai.Kaya kehte hai khane se kohri or na khane se klanki ho jaata hai.Kuchh bidambna hee aise hai ke unki yogaeyta is gandi syasat ke neeche dab kar eh gai hai.Phir bhee sachai ko hum bhul to nahi sakte.Ha unhone faisle lene main daleri nahi dikhai jiskee vajah se yeh sabh ho raha hai.Maine pehle bhee is vare main likha tha ke Singh bno.Singh sahib.Kuch karo,ja phir yeh sabh chhor jao.Ab to unke ley marta kaya na karta wali baat ho gai hai. Admi ki pehchan ke ley uske kaamon ko dekha jaata hai phir muliaankan kia jaata hai ke woh paas hai ja fail.Isme koi bhee do rae nahi hai humarai UPA ke dusri wari fail hue hai.Iske ley hum akele PM ko doshi nahi thehra sakte.Isme humari sari ke sari Waybvastha hee shamal hai,Hum apni kar-gujari ko achha rasta nahi dikha sake.Hum achhi soch ke sath or imandari ke sath nahi kaam kar sake.Hum galat ko galat,Jhuthe ko jhutha,beimaan ko bemaan nahi keh sake.Hum me swashta kee kami hai.Humne apna daman dagdar kar dia hai.Yeh hua hai un sabh bherion ke wajah se jo humare desh ko noch noch kar kha rahe hai.Bus unko sambhalne main humne,humari sarkar ne,humare syasatdaano ne,humaRE KARNDHARON NE,,,,humari garima nne dhake de kar bahar ka rasta nahi dikhaya jiskee vajah se hum sabh ko yeh sabh dekhna parh raha hai.Is sabh ka khamyiaza hum janta ko bhgtna parh raha hai.Kaya hum iske ley PM ko doshi thera sakte hai……Ha isme koi shak nahi hai ke Is desh ke wagdor unke hath main hai,is desh ke gati unke haath main hai,is desh ke garima unke hath main hai. Ab unke ley ek hee rasta bacha hai,esteefa ja kuch kadam jo sakhat ho. dhilmuth wali baat nahi hai….nahi to janta to soche bethi hai ke agli chon main kaya karna hai. Ab dusri tarf bhee NDA bikhra prah hai,Yhe vaichari janta jai ti kidhar jai.Chon ka kaam koi aisa baisa to nahi hai.Karoron rupees is pe kharch aate hai…..Phir musibat…..Janta kaya kregee………Phir wohi aam ke aam guthlio ke daam vali baat hai.janta ke ley to dono tarf khai hai……bhavish dhundla hee dikhai de raha hai…dekho unth kis karwat baithta hai mere bhai acha …Jaid hind.

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    शर्माजी महाराज, कहाँ हैं आप और क्या लिख रहे हैं ,लगता है , खुद आप ही को पता नहीं. अब उनको दोषी नहीं ठहराएं तो फिर खुद को ही दोषी ठहरा लीजिये. सोचिये. सर पे ताज भी रखेंगें और जिम्मेदारी भी नहीं लेंगें तो फिर ताज की गरिमा कहाँ रह गयी. होश में आइये और अन्नाजी का साथ दीजिये, या फिर यों ही हाथ मलते रहिये. जय हिंद.

ashokkumardubey के द्वारा
July 17, 2012

“Jagran Junction Forum” अंडर अचीवर ” मनमोहन सिंह जो आज भारत के प्रधानमंत्री हैं ,उनको किसी विदेशी पत्रिका के मुख प्रीष्ट पर यह छापना की वे अंडर अचीवर हैं ,यह हमारी सार्वभौमिकता के लिए एक बदनुमा दाग है और क्या हक़ है किसी विदेशी पत्रिका को की वह हमारे पी एम् को अंडर अचीवर कहे ? अतः प्रधानमंत्री कैसे हैं इसका मूल्याकन किसी विदेशी देश को करने का कोई हक़ नहीं इसे सिरे से नकारना चाहिए पर इन सब वक्तब्यों में कुछ और राज छिपा है वह यह है की जब सोनिया जी को २००४ में विदेशी मूल का होने के चलते पी एम् बन्ने से रोका गया तभी से सोनिया गाँधी के कांग्रेस में जो लोग प्रबल समर्थक हैं उन्होंने निश्चय कर लिया की चाहे पी एम् कोई बने पी एम् के रूप में सारे फैसले सोनियाजी हीं लेंगी और सारा देश सारी विपक्छी पार्टियाँ और वे पार्टियाँ जो आज सर्कार को समर्थन दे रहीं उन सबों ने देखा की मनमोहन सिंह एक कठपुतली की तरह अपना अभिनय करते रहे यहाँ तक कांग्रेस विभाजित हुवा और जो लोग सोनिया को अपना नेता मानने से इंकार कर रहे थे वे अपनी अलग पार्टी बना लिए एनसीपी लेकिन यह अलग पार्टी भी सर्कार को समर्थन देने आगे आ गयी क्यूंकि आज नेता कैसे सत्ता में अधिकार मिले केवल इसी बात के लिए राजनीती कर रहे हैं ,रही बात मनमोहन सिंह के ब्याक्तिगत छबि की तो वे हमेशा से एक नौकरशाह रहे हैं और एक इमानदार नौकरशाह रहे हैं अतः उनकी सफलता असफलता का कोई प्रश्न ही नहीं वे जिस गुणवत्ता के आधार पर पी एम् बनाये गए उसे उन्होंने भली भांति निभाया है उन्होंने सोनिया की खिलाफत कभी नहीं की और उनका कोई स्वतन्त्र विचार होता भी कैसे जब वे एक हुकम बजाने वाले अधिकारी होने के चलते हीं आज तक पी एम् जैसे महत्वपूर्ण पोस्ट पर काबिज रह पाए वर्ना कब के हटाये गए होते उनसे अच्छा आज्ञाकारी पीएम सोनिया जी को मिल नहीं सकता था और देश को भी इनसे ज्यादा इमानदार पी एम् नहीं मिल सकता था पर ऐसी ईमानदारी किस काम की सारे भ्रष्टाचारी खुलकर देश का धन लूटते रहें और पीएम पर इमानदार होने का ठप्पा लगा रहे चोरी को समर्थन करना चोरी करना ही कहा जाता है यह कोई नयी कहावत नहीं अतः सोनिया ने यह साबीत कर दिया की भले उनके विरोधियों ने उनको विदेशी मूल का कहकर पीएम नहीं बन्ने दिया पर उन्होंने ही सचमुच में पीएम का रोल किया और यह सारा देश जनता है कांग्रेस में इतने अनुभवी और पुराने नेता हैं कांग्रेस अध्यक्छ सोनिया को कोई भी योग्य पीएम नहीं दिखा क्यूंकि वह कोई भी होता यूँ उंगली पर नहीं नचाया जा सकता था अतः आज तक देश के सारे फैसले चाहे वे सही हो या गलत सोनिया द्वारा ही लिए गए हैं अतः अंडर अचीवर अगर किसी को कहना है तो सोनिया को ही कहा जाना चाहिए मनमोहन तो उनके हाथों में एक कठपुतली साबित हुए हैं .अतः प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह योग्यता के लिए कोई प्रश्न कारन यहाँ लाजमी नहीं लगता जिसे एक भी कदम स्वतन्त्र रूप से देश के किसी भी समस्या पर सोंच विचार कर उठाने का मौका दिया ही नहीं गया और वे हमेश सोनिया से डरते रहे है उनका एक कार्टून का प्रोग्राम एनडीटीवी पर दिखाया जाता है उसमे उनकी असलियत देखि जा सकती है सारा देश देखता है मनमोहन सिंह कितने लाचार और विचारे पीएम हैं वे एक बहुत बड़े अर्थशास्त्री हैं अतः देश की आर्थिक नीतियों पर उन्हें किसी प्रणब की जरुरत ही नहीं थी प्रणब तो उद्योगपतियों के दलाल हैं उन्होंने सारे आर्थिक फैसले उद्योगपतियों को कैसे ज्यादा से ज्यादा लाभ दिया जायेइसी आधार पर किया है यही काम ही उन्होंने आज तक अपने राजनितिक करियर में किया है उनको किसी गरीब या देश की आम जनता से कोई सरोकार कभी भी नहीं रहा है वे कितने हीं उद्योगपतियों के पे रोल पर रहे हैं ऐसा सभी जानते हैं भ्रष्टाचार को बढ़ावा अगर इस सर्कार में किसी ने दिया है तो वे दो नेता प्रखर हैं एक चिदंबरम और दुसरे प्रणब मुखर्जी जिनको आज देश राष्ट्रपति बनाने जा रहा है अब तो हमारे लोक सभा और राज्यसभा में उद्योगपतियों की नुमायन्दगी अछि खासी है अतः इन सबमे यदि किसी का नुकसान हुवा है तो वह आम जनता है उनका भगवान मालिक पहले था और आगे भि रहेंगे

    RAJUAHUJA के द्वारा
    July 17, 2012

    अमा भाईजान, नंगे को अगर कोई नंगा कहे तो नंगा ऐतराज़ कर सकता है ! लेकिन नंगा सच जानता है इसीलिए चुप है ! एक आप हैं की बिलावजह चलते बैल की …………………

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    दुबेजी महाराज, कुछ ये पार्टियों और राजनीती वाली बातें सोचना बंद करिए तो बात समझ में आएगी. लगता है दाल रोटी बढियां से मिल रही है वरना इनकी शान में ये कशीदे नहीं काढ़ते. जनाब अपने चरों तरफ जो हो रहा है (अपराध, महंगाई, मंदी, भ्रष्टाचार आदि इत्यादि) उसे देख कर ही सत्ताधारियों का आकलन कीजियेगा तो समझ में आ जायेगी बात. उद्योग्पत्तियों का तो काम ही कुत्तों को रोटी डाल कर अपना उल्लू सीधा करना है परन्तु कुत्तों का कुछ कीजिये ना. आप तो अन्ना का भी साथ देने में कतराते हैं.

Vishwajeet Rai "shekhar" के द्वारा
July 17, 2012

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोई विदेशी पत्रिका अगर “अंडर अचीवर” कहती है तो वैश्विक पटल पर कांग्रेस या डॉ. मनमोहन सिंह की योग्यता या गरिमा का सवाल नहीं है अपितु इसे हमें भारत के गरीमा पर एक धब्बे के तरह देखना चाहिए | जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी अपनी १३ दिन की सरकार का विसर्जन करते हुआ बोते थे की “हमें दुनिया वाले अलग – अलग पार्टियो के रूप में नहीं देखते , वो हमें भारत वर्ष के रूप में देखते है ” अर्थात अगर भारत के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति यहातक की अगर किसी मंत्री या जज की आलोचना होती है तो यह भारतीय समाज और जनता की आलोचना होगी | कमसे कम अब हम अपने सरकार से ये उमीद लगाने का एक मौका मिला है की इस किरकिरी के बाद कही सरकार अब देशहित में कोई बड़े और ठोस कदम उठाने चाहिए , और जब आप अपने UPA सरकार को ठीक से नहीं चला प् रहे है तो आप को लोकसभा का विसर्जन कर देना चाहिए और जनता को नया राज्यनैतिक नक्सा बनाने का मौका देना चाहिए | व्यक्तिगत रूप से मनमोहन जी भुत बड़े अर्थशास्त्री है किन्तु आज उनके सरकार में एक मत नहीं है और कांग्रेस या प्रधानमंत्री की कमजोरी UPA में एकता का आभाव है .” मुंढे- मुंढे मति विभिन्न ” लेकिन फिर भी देशहित में सरकार और सभी सहयोगी डालो को एक साथ आना चाहिए | संसाधनों से भरा भारत , योग्य मंत्रियो व नेताओ वाली कांग्रेस सर एक कुसल और मजबूत नेत्रित्व के आभाव में वैश्विक पटल पर भारत की छबी धूमिल कर रही है |

    pritish1 के द्वारा
    July 17, 2012

    भारत की छवि तो विश्व मैं तब से धूमिल है जब से हम अंग्रेजों के गुलाम रहे……….पहले यहाँ अँगरेज़ हमें रहकर शारीरिक प्रताड़ना देते थे….देश के संसाधनों को विदेश ले जाते थे……..और आज भी स्थिति वही है…..उन्होंने भिक में हमें आजादी दी हम गाँधी जी के बन्दर बने रहे…….अंग्रेजों की अंग्रेजी आज भी हम पर हुकूमत चलाती है………देश की आवश्यकता देश की संस्कृति है किन्तु हम पश्चिमी संस्कृति का अनुशरण करने पर बाध्य हैं……….आज ऊपर वही है जो अंग्रेजी जनता है पश्चिमी शिक्षा और संस्कृति से सुशोभित है……हम अपने ही देश में अपने नहीं हैं……. जो हम कह कर भी नहीं कह पा रहे हैं टाइम magzine ने उसे प्रकाशित किया है………हमें शर्म आनी चाहिए की भारत आज ऐसे हाथों में है……..संसद में बैठे सारे नेता आज इस भारत के अपराधी हैं…….और उनका अंत निकट है…….एक भयावह अंत………..

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    शेखरजी, सुलझा हुआ सोच है आपका. बात व्यक्ति की नहीं देश की है. छवि व्यक्ति की नहीं देश की खराब होती है की वहाँ का अच्छा भला प्रधानमन्त्री आज अंडर अचीवर कहा जा रहा है. प्रेसिडेंट ओबामा ने भी हमारी आर्थिक नीतियों की आलोचना की है और इस पर जो प्रतिक्रिया हुयी वो विशुद्ध हिन्दुस्तानी मानसिकता है जो किसी भी आलोचना का रचनात्मक पक्ष नहीं देखती और आलोचना करने वाले के खून की प्यासी हो जाती है, खासकर तब जब आलोचना करने वाला कोई विदेशी नेता हो.

Dr k. Shankaran के द्वारा
July 16, 2012

Dr Manmohan Singh is a very gentle person. In his service career he reached up to the post of governor of reserve bank of India.Then after retirement he was made governor of world bank in United Nations.After the murder of shree Rajeev Gandhi,he was taken in as finance minister under the prime minister-ship of Shree Narsingharao probably due to the pressure of U.S.A. Since then USA is USING him like a puppet.He is the first P.M. of India who has never fought any election either of LOK-SABHAA or vidhaan sabhaa. He seems to be neither a politician nor having an independent n courageous personality.

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    Dr. Shankaran, Why should we go into ones career graph as a bureaucrat or technocrat. It does’nt matter in a larger context. One can’t rest on past laurels or medals, one has to prove himself as an able prime minister. There is all-around governance failure. Who is responsible for all this, if not the PM of the country. Who asked him to become a “puppet” of somebody. If that was so he could have vacated the chair for somebody else. See a great economist who ushered the country into a liberal reformed regime has become a laughing stock here as well as abroad.Calling him “underachiever” is not wrong. He is so.

ravi kumar के द्वारा
July 16, 2012

इसमें गलत क्या ? ये तो सब को दिख ही रहा है कि प्रधानमंत्री अयोग्य साबित हुए हैं. ये सब इसलिए है क्यूंकि यहाँ सत्ता के दो केंद्र हैं . प्रधानमंत्री चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते . जो भी करना होता है कोंग्रेस अध्यक्ष के आदेश के अनुसार ही होता है. मनमाफिक काम अध्यक्ष का और बदनामी प्रधानमंत्री की. इसमें गरिमा के साथ कुछ भी खिलवार नहीं है. बस एक ही बात समझ नहीं आती कि इतनी बेइज्जती होने के बाद भी प्रधानमंत्री अपना पद क्यों नहीं छोड़ रहे हैं. आखिर उन जैसे व्यक्ति का क्या लगा है इस पद से ???

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    सही फरमाया आपने की प्रधान मंत्री अपना पद क्यों नहीं छोड़ रहे हैं. बिलकुल असफल हैं फिर भी कुर्सी से चिपके हैं

Naveen Singh के द्वारा
July 16, 2012

when we go sometime back our primeminster says that indians learn a lot of good things from english people when they ruled india,as english people are very witty. And now when American Magzine says ‘underachiever’ to our primeminster he must have no any doubt on their wit

Dr k. Shankaran के द्वारा
July 16, 2012

डॉ मनमोहन सिंह एक भले व्यक्ति हैं. अपने जीवन के कैरियर में वह भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के पद तक पहुँच कर रिटायर हुए. उसके बाद युनायितेद नेशन में वर्ड बैंक में कार्य किया. फिर राजीव गाँधी की हत्या के बाद श्री नर्सिंघाराव की मिनिस्ट्री में वित्त मंत्री बना दिए गए. अनुमान् तयः यह यु यस ऐ के प्रभाव से हुआ.तबसे वह इनको मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है.यह न तो राजनीतिज्ञ हैं और नाही स्वतंत्र व साहसी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति लगते हैं.श्री सिंह केवल यु यस ऐ की कठपुतली लगते हैं.

    pritish1 के द्वारा
    July 17, 2012

    कोई अपराधी भला कैसे हो सकता है……….मनमोहन सिंह अपराधी हैं देश की संसद मैं बैठे सारे नेता अपराधी हैं………शायद आप उस भारत से अपरिचित हैं……..जहाँ डर है तनाव है भूख है……..न्याय नहीं है अवसर नहीं हैं भर पेट भोजन नहीं है……….देश की समस्या यही है की सब गाँधी जी के बन्दर हैं बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत बोलो…………यदि कोई परिवर्तन नहीं हुआ….सभी नेताओं का अंत निकट है…….एक भयावह अंत…….!

Naveen Singh के द्वारा
July 16, 2012

प्रधान मंत्री ने ही कहा था की अंग्रेजो के शासन में ही भारत ने बहुत कुछ सिखा है, क्योंकि वे बहुत बुद्धिमान है और लन्दन से सर्टिफिकेट ले के आये, तो कांग्रेस उनसे सहमत थी आज वही अंग्रेज जब उन्हें underachiever कह रही है तो प्रधानमंत्री जी को अंग्रेजो की बुद्धिमता पर शक नही होना चाहिए

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    नवीनजी, बिलकुल सही कहा आपने.

Ramesh Nigam के द्वारा
July 16, 2012

When you condemn his policies or I condemn and majority of Indians are condemning, then why this HO HALLA? R C Nigam

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    निगामजी, अपनी बात थोड़ी सी और खुलासा करते तो अच्छा होता. बहरहाल धन्यवाद.

deepak chaturvedi के द्वारा
July 16, 2012

एक बात समझ नहीं आती जब times magazine koi khtib deti hai to use to sab ke sab haton haton lete hai magar jab report card kharab hota hai to ye hi log haalla machane lagte hai .p.m. kon se aasam se utare hai wo abhi tak us ke pyare the magar ab nahi wo janta ke na tab the na aaj hai.,

    ashokkumardubey के द्वारा
    July 18, 2012

    मनमोहन सिंह को जो मर्जी कह लो अंडर अचीवर कहो या कुछ और कहो उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता वे तो शुरू से R A C में हैं रोते रोते आगे चलो ऐसा रेल में जब रिजर्वेशन नहीं मिलता और आर ए सी का टिकट होता है तो लोग यही जुमला बोलकर अपने मन को तसल्ली देते हैं देश को भी ऐसी हीं तसल्ली करने की आदत हो गयी है न मनमोहन सिंह अगले २०१४ के चुनाव के पहले हटाये जानेवाले हैं न उनका कुछ और होने वाला है हाँ अगर उनको अभी राष्ट्रपति बना दिया जाता तो कोई दूसरा प्रधान मंत्री जिसकी जुबान खुल सकती तो शायद कुछ बदलाव की उम्मीद देश भी कर सकता था क्यूंकि मनमोहन सिंह राष्ट्रपति पद के लिए आज की तारिख में सबसे योग्य और उपयुक्त उम्मीदवार हैं प्रधानमंत्री तो न वे पहले थे न अब हैं असली पी एम् तो सोनिया गाँधी है जो सारे ड्रामे की डाईरेक्टर है

    dineshaastik के द्वारा
    July 21, 2012

    पारीख जी , कृपया फीडबैक में रखिये

    dineshaastik के द्वारा
    July 21, 2012

    अशोक जी की बात से पूर्णतः सहमत….

sandeepdeora के द्वारा
July 16, 2012

if this magzine had praised m manmohan singh then ? when they include YOU IN FORBES LIST < ENTERPRENURE LIST AND ANY OTHER IT IIS QUOTED IN VIRTUALY EVERY MEDIUM AND WHEN THEY SAY NEGITIVE YOU CRY FOUL YOU GIVE TO OSCAR PRIZE WHY "WHO ARE THEY TO PRAISE OR GHIVE REWARD TO OUR फिल्म्स" SamE WAY WITH MANMOHAN JI WHEN THEY PRAISE YOU QUOTE BUT WHEN THEY SAY NEGATIVE ACCEPT IT

shaileshkumar के द्वारा
July 16, 2012

क्या अब भी हमें विदेशी लोगो और पत्रों से प्रशस्ति पत्र लेना है क्या /

    deepak chaturvedi के द्वारा
    July 16, 2012

    mera manna hai haa jab tak hum aapne haath falane ki aadat nahi chorte vedeshion ke aage.

sandeepdeora के द्वारा
July 16, 2012

एक बात समजह नहीं आती मेरे आफिस का बॉस ईमानदार है है बाकी सब अगर चोर है तो क्या ऑफिस का बॉस बक्शा जायेगा समजह नहीं आता की अगर पूरी टीम बिमान है तो उसकी जिमादारी उसे चुनने वाली की ही होगी और मनमोहन सिंह जी ईमानदार है इसका सर्तिफिकाते कौन देग पहले अगर कोई गलत काम होता था तो लीडर मोरल रेस्पोंसिबिलिटी के आधार पर इस्तीफा दे देता था पर अब बाकि चोर अपने लीडर को बचेने मैं जमीं असमान एक कर देते है

shatrughan sharma के द्वारा
July 16, 2012

एक 50 पेज कि रंगीन पत्रिका 120 करोड़ लोगों के नेता को under Achiever बताकर अपने देश और व्यापारियों को फायदा कराने को सौदे बजी पर उतर आई हें. विदेशी मीडिया पहले भी देश को BLACJMAIL करने कि कोसिस कर चूका हें इसका पूरी ताक़त से मूंह तोड़ जवाब देना चाहिय .. उन्हें पहले अपने लम्पट नेता और चोर उद्यमियों कि करतूत विश्व को बतानी चाहिय

    deepak chaturvedi के द्वारा
    July 16, 2012

    aapko nahi lagata apko tab bhi kuch kahana chahiye tha ?jab soniya gandhi ko veshv ki sabse majbot mahila bataya tha tab ap kaha the ?

Vandana Baranwal के द्वारा
July 16, 2012

प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका द्वारा मनमोहन सिंह जी को अंडर अचीवर कहे जाने पर कांग्रेसियों में हडकंप मचना स्वाभाविक है. कांग्रेस पार्टी को उसके कर्मों के कारण पहले ही योग गुरु बाबा रामदेव उसे डूबते हुए जहाज की संज्ञा से विभूषित कर चुके हैं. दरअसल दोष इसमें सोनिया गाँधी का भी नहीं है क्योंकि वो तो एक किंग मेकर की भूमिका में रहीं पर सोचना तो किंग को चाहिए था क्योंकि जब वह राजगद्दी पर बैठ गए तो प्रजा के प्रति जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी. प्रधानमंत्री का पद एक संवैधानिक पद है इसलिए जनता उससे व्यक्तिगत ईमानदारी के साथ राजनीतिक ईमानदारी की अपेक्षा भी रखती हैं जिस पर वो खरे नहीं उतरे. कहते हैं अगर आप कोल्हू के बैल की तरह बंधे हुए एक ही बिदु के चक्कर काटते रहेंगे तो मेहनत भो खूब होगी, चलेंगे भी खूब लेकिन पहुंचेंगे कहीं नहीं. हो सकता है कांग्रेस और यूपीए की नजर में मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में बड़ा कार्य किया हो लेकिन यह बड़ा कार्य उस खजूर के पेड़ की भांति है जिसने आम आदमी को ना तो फल दिया और ना ही छाया. व्यक्ति की गरिमा उसके द्वारा किये कार्यों और उन कार्यों के परिणामों से आंकी जाती है ना की उसके पद से.

vartika के द्वारा
July 16, 2012

भारत के प्रधानमंत्री श्री मनमोंहन सिंह जी ! ने अपनी चुप्पी साधने की वजह से विश्वपटल पर बेहद नकारात्मक छवि बना ली है ! भारत को एक ऐसे प्रधानमंत्री की जरुरत है जो अपने निर्णय स्वयं ले सके किसी के दबाव में आकर नहीं ! जो बेबाक हो और दृढ निश्य वाला भी!

    RAJUAHUJA के द्वारा
    July 17, 2012

    भारतीय राजनीति में बेबाकों की कमी नहीं , कुछ भी अनर्गल बकते रहेंगे यद्यपि वो स्वयः नहीं जानते वो क्या बोल रहे हैं ! और द्रिड-निश्चयी ऐसे की ,देश को लूटना है मतलब लूटना है फिर परिस्थितियां चाहे जो हों ये अपनी लूट में अडिग मिलेंगे ! रहा सवाल स्वयं के निर्णय का ,वो तो इनकी बपौती है !ये सारे निर्णय स्वयं मिल-जुल कर ले लेते हैं ! अवाम को कौन पूछता है ? देखा नहीं बाबा रामदेव के तम्बू में बम्बू कर दिया, बेचारा औरतों के कपडे पहन कर भागा ! और अन्ना की तो मिटटी पलीद कर दी ! ये सब ज़नता की आवाज़ थी अतः यह हश्र हुआ ! ये सारे गुण हमारे नेताओ में मिलेंगे सभी एक थैली के चट्टे-बट्टे हैं साल्ल………!

Rajeeva Ranjan के द्वारा
July 16, 2012

This is the misuse of freedom to hurt the sentiments of people and all these destructive elements should be dealt strictly so that nobody dare to comment on these lines in t6he future.

    omprakash pareek के द्वारा
    July 18, 2012

    राजिव रंजन साहेब, ऐसे तत्वों की डंडा ले कर पिटाई कीजिये. अब आप लोग अपने सदेश को तो संभाल नहीं पाते और दुसरे तथाकथित (DESTRUCTIV ELEMENTS ) के साथ सख्ती से पेश आने की बात करते हैं. कब तक चलेगी ये नौकरशाही विचारधारा.

manoj के द्वारा
July 16, 2012

लगता है लोग यह कहावत भूल गए हैं कि अपना घर चाहे जैसा भी हमें उसकी बुराई दूसरों के मुंह से नहीं सुननी चाहिए. ऐसा मुंह जो अपने घर के बुराई करें उसे तोड़ॅ देना चाहिए. टाइम मैगजीन द्वारा देश के प्रधानमंत्री को अंडरएचीवर कहना बेशक उन्हें आइना दिखाने के बराबर है लेकिन क्या कभी इसी टाइम मैगजीन ने ब्रिटेन के शाही परिवार या ओबामा आदि पर सवाल उठाए हैं. नहीं क्यूंकि इन बडे मैगजीन व्बालों को अपने घर की बुराई नजर नहीं आती

    ashokkumardubey के द्वारा
    July 17, 2012

    बड़े मगजिन वाले कुछ भी कहें लेकिन हमें उसपर ध्यान न देते हुए उनकी हर बात को चुपके से मान लेना छोड़ना चाहिए अपना देश एक शक्तिशाली देश है केवल कमी है इसमें एकता की हम जाती और समुदायों में बंटे हुए हैं और ये नेता दिवायिद एंड रुल वाली पालिसी जो अंग्रेज चला कर गए वाही अपनाये हुए हैं हमरे देशवासियों को कौन हमारे लिए अच्छा है और कौन बुरा यह पहचान ही नहीं है वर्ना अपराधी क्यूँ कर चुनके आते भ्रस्ताचारी कैसे राज करते रहते? जरुरत इन सबके खिलाफ एकठे होकर आवाज बुलंद करने की है कोई विदेशी देश हमारे देश के प्रधानमंत्री को अन्डर अचीवर कहने का साहस कैसे करता है इसका देशब्यापी विरोध होना चाहिए क्यूंकि जो आज पी एम् है उसे इस देश की जनता ने ही चुना है अतः सारा दोष जनता का है अगर जनता ऐसे पीएम को झेल रही है तभी वे पीएम बने बैठे हैं


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