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यौन संबंधों की आयु सीमा में वृद्धि – एकतरफा प्रस्ताव या सामाजिक जरूरत

Posted On: 4 Jun, 2012 में

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दिल्ली की एक अदालत के न्यायाधीश का मानना है कि सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित करने की उम्र को बढ़ा कर अठ्ठारह वर्ष करने जैसा प्रस्ताव अलोकतांत्रिक है। इतना ही नहीं संबंधित जज का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव भारतीय समाज में व्याप्त पिछड़ेपन को साफ दर्शाता है। इससे पहले भी दिल्ली की एक अदालत ने सेक्स करने की उम्र अठ्ठारह वर्ष बढ़ाए जाने पर चिंता व्यक्त की थी।


हालांकि यह न्यायाधीश महोदय का अपना निजी मत है लेकिन हमारे समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं जो सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों की उम्र को बढ़ाए जाने के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि पहले की अपेक्षा युवाओं का मानसिक और शारीरिक विकास कम उम्र में हो जाता है। ऐसे में यह कतई जरूरी नहीं है कि 18 वर्ष से कम उम्र की युवती के साथ जबरन संबंध स्थापित किया गया हो। सेक्स के प्रति रुझान और सहमति के कारण अगर युवती किसी प्रकार की पहल करती है तो इसे बलात्कार की श्रेणी में रखना पूर्णत: गलत है। इस प्रस्ताव का सीधा और एकमात्र नुकसान केवल युवकों को ही होगा। भले ही वह इसमें पूरी तरह दोषी हों या ना हों उन्हें बलात्कार का दोषी ठहराकर प्रताड़ित किया जाएगा। यह दौर समानता का है इसीलिए एक ऐसे प्रस्ताव को पारित करना, जो पूरी तरह एक पक्ष पर ही केंद्रित है, नासमझी होगी।


वहीं दूसरी ओर वे लोग हैं जो महिलाओं के हितों की रक्षा और उनके सम्मान को बरकरार रखने के लिए इस प्रस्ताव को बहुत जरूरी मानते हैं। सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों की उम्र अट्ठारह वर्ष करने जैसे प्रस्ताव का पक्ष लेते हुए इनका कहना है कि भारतीय समाज में हमेशा से पुरुषों द्वारा महिलाओं का शोषण किया जाता रहा है। भारतीय पुरुषों ने महिलाओं को हमेशा से ही उपभोग की वस्तु से अधिक और कुछ नहीं समझा है। कभी जबरन तो कभी उसे बहला-फुसलाकर उन्होंने अपने हितों को साधने का प्रयत्न किया है। किसी कठोर कानून की अनुपस्थिति के कारण महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाला कोई बच ना सके इसीलिए इस प्रस्ताव का कानूनी रूप लेना बहुत जरूरी है।


उपरोक्त पहलुओं पर गहराई से विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर ढूंढ़ना अत्यंत आवश्यक है, जैसे:


1. साथ-साथ पढ़ने और समय व्यतीत करने के कारण किशोरों और किशोरियों के बीच आकर्षण विकसित होना लाजिमी है। अगर इस आकर्षण के बल पर वह शारीरिक संबंध बनाते हैं तो इसके लिए केवल किशोर को जिम्मेदार ठहराना कहां तक जायज है?

2. युवतियों को समाज में एक सुरक्षित वातावरण देने में यह प्रस्ताव कितना उपयोगी सिद्ध हो सकता है?

3. भारत में जब भी कोई कानून बनता है तो सबसे पहले महिलाओं के हितों को ध्यान में रखा जाता है, ऐसे में क्या पुरुषों के हित बाधित नहीं होते?

4. प्रस्ताव पारित होने के बाद जब यह कानून का रूप ले लेगा तो इसके सफल होने की कितनी गारंटी है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


यौन संबंधों की आयु सीमा में वृद्धि एकतरफा प्रस्ताव या सामाजिक जरूरत


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “एकतरफा प्रस्ताव” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व एकतरफा प्रस्ताव – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

चन्दन राय के द्वारा
June 10, 2012

मुझे इस कानून की जरुरत नहीं नजर आती , ये सब फिजूल और दकियानुसी सोच का नतीजा है , इससे फायदा होने वाला तो नहीं है ,पर हाँ इस मकडजाल में कितने ही नव प्रेमी युगल पिस जाएंगे , जिन्हें इस उम्र के फेर में प्रताड़ित किया जाएगा , और इस मुद्दे पे बहस करना भी बेमानी है

shubham chaudhary के द्वारा
June 8, 2012

सेक्स की उम्र बढाने का निर्णय सही है  अगर कोई इसे गलत बताता है तो वह एक बार अपने परीवार की छोटी बहनो के बारे में जरुर सोचे।

Seema kanwal के द्वारा
June 7, 2012

quite a good article

jyoti parkash के द्वारा
June 7, 2012

अगर आप १६ साल की उम्र को शादी क लिए वाजिब करते हैं तोह हिंदुस्तान एक ऐसा देश है जहाँ १८ साल की उम्र होने क बावजूद १३-१४ साल मैं ही शादी कर देते हैं और अगर १६ साल की उम्र बालिग क लिए होगी तोह शयद १० साल मैं ही बचों की शादी हो जाये. तोह मेरे विचार मैं तोह १८ से उम्र २० कर देनी चाहिए ताकि लड़कियों को पढने का मोका मिल सके और इन्सान की मजबूरी बन जाये लड़कियों को पढ़ना.

Mukesh Kaushik के द्वारा
June 7, 2012

सामाजिक जरूरत “Jagran Junction Forum” जहाँ तक बढ़ते अपराध जैसे बलात्कार जैसी घटनाओ को देखते हुए यह कहना जरुरी हो जाता है की सरकार द्वारा एक ऐसा कानून ही बनाया जाना चाहिए की लड़की की उम्र यौन संबंधों के लिए १८ वर्ष या उसे बढाकर २० वर्ष कर देनी चाहिए जिससे वह भी यौन संबंधों के बारे में सोचे हालांकि यह उम्र यौन संबंधों के लिए उचित है परन्तु सामाजिक दृष्टि से देखा जाये तो शादी से पूर्व यौन संबंध अनुचित है और हमारे समाज में शादी १८ या २० वर्ष के बाद में ही की जाती है !

anil chaubey के द्वारा
June 6, 2012

ये हॉल है देश के राजनितिक पार्टियों की एक राज्य की पार्टी के सामने घुटने टेक देती है ये देश क्या संभालेंगे की अपना मेम्बर ही नहीं खड़ा कर रहे है क्या बाबा साहब येही सविधान बना कर गए थे और अप्प अपना अच्छा से अच्छा मेम्बर उतारो और और आगे फैसला जनता करेगी तुम कौन होते हो नहीं तो बंद कर दो अपनी और अपनी राजनीत सन्यास लेलो लोगो बेव्कुफ्फ़ बना रहे हो मिल बात कर खा रहे हो संसद की दुहाई देते हो बाबा साहब के नाम पर देश को लुटते हो

ashokkumardubey के द्वारा
June 5, 2012

जहाँ कानून अँधा और बहरा हो वहां कोई नया कानून क्या कर लेगा ? पहले इस सवाल का जवाब दिल्ली हाई कोर्ट को देना चाहिए जो वर्षों से मुक़दमे चल रहे हैं महिलाओं के यौन शोषण और बलात्कार के उनका अब तक क्या किया? कितने को सजा दिलवा पाए ?ये हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले इस पहलु को जांचे और परखें फिर कोई उम्र के सीमा बढ़ाने या घटाने की सोंचे आज इस देश की जनता न्याय के लिए तरसती है और त्रस्त है इन अदालतों में बैठे जजों और वकीलों से जो केवल दोषियों को बचाने का ही काम करते हैं और पीड़ित को न्याय दिलाने में उनको कोई रूचि नहीं आज देश में बढ़ते अपराध का एकमात्र कारन ही दोषियों को सजा नहीं मिलना है और इसके लिए पुलिस वकील और जज ही जिम्मेवार हैं जिनको समाज या लोगों की पड़ी नहीं केवल पैसे की पड़ी है न्याय इस देश में ख़रीदा जाता है जिसके पास धनबल है खरीद रहा है अतः पहले अदालतों के काम काज की समीक्छा करने की ज्यादा जरुरत है अपराध अपने आप कम हो जायेंगे और ऐसे में महिलाओं के प्रति भी यौन शोसन के अपराध भी जो आज हो रहे हैं, वे भी कम हो जायेंगे. अतः मेरे विचार से उम्र की सीमा बढ़ाने से देश की महिलाओं को कोई लाभ नहीं होनेवाला

PANKAJ SRIVASTAV के द्वारा
June 4, 2012

I AM AGREE WITH COMMENTS OF MR. ANIL GUPTA. TODAY;S A 13 YEARS OLD BOY & GIRL KNOWN SEX. SAYAD HI AAP ISPE BHAROSA KARENGE. BUT IT IS TRUE. I THINK AGE OF MARRIGE IS MINIMUM 16 YEARS. HONA CHAHIYE DONO KE LIYE. AAJ KAL KISI BHI GOVERNMENT KO PUBLIC KI PERWAH KAHAN HAI. UNHEN TO JAB ELECTION AATA HAI TABHI PUBLIC YAAD AATI HAI.  MAHAGAI BADANE DO …. JANTA KO MARANE DO …. HUMSE KYA MATLAB HAI….. AAJ PETROL KE DAM AASMAN KO CHOO RAHEN HAI….. SARKAR TO 1.60 RS KAM KARKE KHUSH HAI….. YANI PAHELE TO RS 7.00 TO 8.00 INCREASE KAR DO PHIR JAB PUBLIC HUNGAMA MACHAE TO RS 1 OR 2 RS KAM KAR KE MALHUM LAGA DO…… EK DIN AISA AAYEGA KI LOG EXIBITION ME DEKHANE JAYENGE KI PETROL AUR DIESEL AISA HOTA HAI………

anil gupta के द्वारा
June 4, 2012

आज के ज़माने में लड़के और लड़की में फर्क क्यों ?दुसरे इस इन्टरनेट युग में दोनों १२ -१३ साल की उम्र में सेक्स के बारे में जानने लगते है तो १८/२१ की उम्र गलत है ,बाकी तो इस हिंदुस्तान में कानून अँधा और बहरा है

dharam vir के द्वारा
June 4, 2012

इस मुद्दे पर किसी विद्द्वान ने कहा है कि ” किसी भी स्त्री के साथ ज़बर दस्ती के अलावा जो भी सम्बन्ध बनाया जाता है, वो सभी सम्बन्ध जायज़ है.”


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