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सत्यमेव जयते – वास्तविक संवेदनशीलता या बाजारवाद की पराकाष्ठा?

Posted On: 14 May, 2012 Others में

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कन्या भ्रूण हत्या मानव जाति को कलंकित करता यह मसला आज भारतीय समाज की एक घृणित पहचान बन चुका है। गर्भ में पल रही कन्या भ्रूणों को कितनी बेदर्दी के साथ उसकी मां से अलग कर दिया जाता है, उससे जीने का अधिकार छीन लिया जाता है। भारतीय समाज की जड़ों तक जा पहुंचे कन्या भ्रूण हत्या जैसे अमानवीय अपराधों पर भी अब बाजार की नजर पड़ गई है। आमिर खान जैसे स्टार ने अपने पहले टेलीविजन शो सत्यमेव जयते का इतना प्रचार किया कि सभी इस शो को देखने के लिए उत्सुक हो गए और कार्यक्रम को देखने के बाद दर्शक क्या मीडिया भी अब आमिर खान का गुणगान करने लगा और यह दिखाने की कोशिश करने लगा कि आमिर से पहले इस मुद्दे पर किसी ने आवाज उठाने की कोशिश नहीं की।


उपरोक्त मुद्दे पर कई लोगों का मानना है कि मीडिया के मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट ने टेलीविजन पर डेब्यू करने के लिए सत्यमेव जयते नामक एक ऐसे शो को चुना जो दर्शकों का ना सिर्फ मनोरंजन करे बल्कि उन्हें समाज की कड़वी सच्चाइयों से भी अवगत करवाए। उनका पहला एपिसोड कन्या भ्रूण हत्या पर केंद्रित था। वर्षों से चली आ रही इस प्रथा के विरोध में ना जाने कितनी ही बार आवाज बुलंद की गई लेकिन जब इस आवाज पर मीडिया और ग्लैमर का तड़का लगा तब जाकर यह हमारे कानों तक पहुंची। बहुत लंबे समय से एक न्यूज चैनल पर ‘जिंदगी लाइव’ नामक कार्यक्रम दिखाया जाता है जिसमें समाज के ऐसे ही चेहरों को उजागर किया जाता है, जिन्हें देखकर आंखों में आंसू तक आ जाते हैं। लेकिन ना तो इस प्रोग्राम में कोई ग्लैमर है और ना ही इसे बहुत ज्यादा प्रचारित किया गया है। इसीलिए किसी ने भी इस कार्यक्रम के भावनात्मक पक्ष को तवज्जो नहीं दी। अगर इस कार्यक्रम को भी आमिर खान के बहुचर्चित शो सत्यमेव जयते की तरह प्रचारित किया जाता तो शायद बहुत पहले कन्या भ्रूण हत्या जैसी अनेक समस्याओं का हल खोज लिया जाता। इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि जिन राज्यों में यह घटनाएं घट रही हैं वहां की सरकारें भी अपनी दुर्गति से परिचित नहीं थीं, उन्हें तो आमिर ने बताया।


जैसा कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही इस मुद्दे पर विपरीत विचारधारा रखने वाले लोगों का साफ कहना है कि बेशक यह समस्याएं पहले भी कई बार उजागर की जाती रही हैं, इन पर कई बार आवाज उठाने की भी कोशिश की गई लेकिन अगर बॉलिवुड और बाजारवाद की सहायता लेकर कन्या भ्रूण हत्या जैसे अमानवीय कृत्यों पर रोक लगाई जा सकती है तो इसमें बुराई क्या है? अगर आमिर खान अपने एक टेलीविजन शो के जरिए एक बड़े बदलाव का आश्वासन जनता को दे रहे हैं तो हमें उन्हें समर्थन देना चाहिए। ना कि पुरानी बातों और सरकार की नाकामियों को इस मार्ग में अवरोध बनने देना चाहिए।


उपरोक्त चर्चा और विभिन्न विचारधाराओं के आधार पर कुछ गंभीर सवाल उठते हैं, जिन पर विचार किया जाना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. आमिर खान ने अपने एक घंटे के कार्यक्रम के जरिए वर्षों से सो रही सरकार की नींद बड़ी आसानी से खोल दी। क्या हमारी सरकारें इतनी लापरवाह हैं कि उन्हें अपने राज्यों में हो रहे इन जघन्य अपराधों की भनक तक नहीं पड़ी या फिर सरकारें स्वयं इन अपराधों को संरक्षण दे रही हैं?


2. सत्यमेव जयते जैसे कार्यक्रम समाज हित में बनते हैं लेकिन क्या जब तक समस्याओं के ऊपर ग्लैमर की चादर नहीं डाली जाएगी तब तक समस्याओं की ओर किसी का ध्यान आकृष्ट नहीं होगा?


3. क्या ऐसे कार्यक्रम के जरिए कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्याओं को सुलझाया जा सकता है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


सत्यमेव जयते – वास्तविक संवेदनशीलता या बाजारवाद की पराकाष्ठा?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “सत्यमेव जयते” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व सत्यमेव जयते – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार





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39 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

snnsharma के द्वारा
June 26, 2012

बाजारवाद का घिनोना रूप है सस्ता भी

ganesh ahuja के द्वारा
May 21, 2012

dears amir your program is no doubt is so good it is appreciable but u should anounce the subject before some time on which u are doing works, because so many persons may be alligible to give so many ways or their experiences ,and what happened in their life ,in this way lot of them can contect u, ,such as yesterday program an exmple can give when my son finalise the girl for his life her father say about douvery my sons reply was ,after giving the doughter what have u to give me because main property is kids when u have give me your kid u have nothing balance to give me further ,so do not want any further thing from u.

suryakant के द्वारा
May 21, 2012

या सही है की आमिर ने सम्वादंशीलता का बाजारीकरण किया है परन्तु एइसा बज़रीकर्ण सा कोई नुकसान नहीं है . ये सही है की किसी की भी भावनाओं सा नहीं खिलाना चाहिय परन्तु सोया हुआ समाज कभी कभी डांट से या की फटकार से ही जगाता है. ये सही बात है आज से पहले भी कई लोगों ने ये बात उठाई है पर किया हुआ ??? जिस तरह सा आना हजारे ने भ्रस्ताचार का खिलाफ सभी को एकजुट किया (हालाँकि उनसे पहले भी कई लोगों ने या मुद्दा उठाया था) और लोगों को सोचने पर मजबूर किया, उठा कर खरा होने को झकझोरा ठीक उसी तरह सा आमिर भी सोते हुओं को जगाने की कोशिश कर रहा है. अब अगर आप का जाग जाने सा कोई कुछ कम भी रहा है तो आप को किया आपत्ति है. कम सा कम आपका तो भला हो ही रहा है न. फिर वह नताओं की तरह कोई गलत काम तो कर नहीं रहा. वह समाज का भला करने की कोशिश करा रहा है. जैसे अन्ना का साथ सभी ने दिया ठीक उसी तरह सा आमिर का साथ भी सना चाहिय. किया पता उसकी कोई बात हमें स्ट्राइक कर जाय और हमारा रियल मैं ही हमारा भला हो जाया. सोच को positeve रखना चिया .

anand waghmare के द्वारा
May 20, 2012

गुड प्रोग्राम, जैसा भी हो, कुछ तो प्रकाश पड़ता है ,सामाजिक मुद्दों पर ,और इसिकी तो जरुरत है आज.

meenakshi के द्वारा
May 19, 2012

सत्यमेव जयते – वास्तविक संवेदनशीलता या बाजारवाद की पराकाष्ठा? इस विषय में इतना अवश्य कहना चाहूंगी कि ” आमिरखान ने छोटे परदे टी. वी. के माध्यम से नेक काम करने का प्रयास किया है ; बेहद गंभीर व ज्वलंत मुद्दों को उठाया है -जन-जन की आँखे खोलने का प्रयास किया है ; जनता आमिरखान को क्या..सभी फ़िल्मी हस्तियों के दीवाने होते है. नेता की बात ( चूंकि अधिकतर झूठी साबित होती हैं ) असर करे न करे पर अभिनेता की बात जरूर असर कर जाती है फिर – अमिताभ बच्चन हुए या आमिरखान हों या शारुख खान इनसे लोगों का जुडाव कुछ और अधिक है. अतः बाजारवाद तो नहीं कहा जा सकता .परन्तु इस कार्यक्रम अर्थात ” सत्यमेव जयते ” की सफलता से आमिर खान संभावित ” नेता ” जरूर बन सकतें हैं . मीनाक्षी श्रीवास्तव

abhilasha shivhare gupta के द्वारा
May 18, 2012

जो भारतीय समाज में सचमुच अच्छे बदलाव चाहते है…यह प्रोग्राम उनके लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है….. और जो बहुत ही नकारात्मक मानसिकता वाले है…उनके लिए बाजारवाद है……

abhilasha shivhare gupta के द्वारा
May 18, 2012

पिछले दिनों मेरी किसी से चर्चा हो रही थी…. इसी विषय पर।.. उनका भी इस प्रोग्राम के लिए यही नजरिया था, की ये “बाजारवाद” है।… मैंने उनसे कहा यदि ये बाजारवाद है भी तो हमें उससे क्या।… समाज में सन्देश तो पहुँच ही गया।… सोया हिन्दुस्तान जाग तो गया।…… बुरइयो का खात्मा शुरू तो गया।……. हमें आम खाने से मतलब है या गुठाली गिनने से।……सम्माज आज जागरूक हो तो रहा है।.. इस पर उनका कहना था की, ……. जिन्हें सचमुच में इन मुद्दों की परवाह है उन्हें जगाना नहीं पड़ता और जिन्हें जगाना पड़ता है वो जाग कर भी कुछ नहीं करने वाले…… एक उधाहर प्रस्तुत करना चाहती हूँ…. जो बच्चा पढाई में होनहार है, वह ज़िन्दगी खुद ही सँवार लेगा….जो मंद बुद्धि है, वो शायद कुछ न कर पाए…किन्तु….. जो औसत है, उन्हें पढाई के प्रति जागरुक करके, या मेहनत करा के संवारा जा सकता है…ठीक उसी प्रकार, जो जागे है…वो तो खुद कुछ प्रयास करंगे… जो सोने वाले है, वो जाग कर भी कुछ नहीं करेंगे…..किन्तु…. जो कभी चैतन्य हुआ करते थे, पर किसी कारन से उनकी चेतना ख़त्म हो गई थी..उन्हें खुरेदाने से वो फिर आगे बढ़के प्रयासरत होएंगे…. और…हार मान लेने से अच्छा है, खेलकर हारो….. रही बात आमिर के ब्रांड और मार्केटिंग की…. तो ठीक है..उसमे कुछ गलत नहीं दीखता मुझे…. यदि वो पैसे के लिए भी यह शो कर रहे है है, तो उससे हमें कुछ फर्क नहीं पड़ता…पर मुद्दा तो सराहनीय है… समाज में सन्देश तो पहुँच ही गया…. असफलताओ से डरकर यदि हम कोशिश ही न करे तो या कारयता होगी…. हम टीवी पर राखी सावंत और पूनम पण्डे की खबरे देखने के लिए बेकरार रहते है।..और ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बाजारवाद हा नाम देकर व्यंग कर रहे है।..यह कतई उचित नहीं है।… यदि यह 100% बाजारवाद होता तो शायद प्रोग्राम मुद्दा भी कुछ और होता (दुसरे नग्नता भरे प्रोग्राम की तरह)। कही न कही आमिर को लगा होगा की समाज को इसकी ज़रुरत है। यह एक अच्छी शुरुवात हो सकती है। यदि आमिर ने आपने पर्सनल फायदे के लिए यह शो शुरू भी किया है।..तो एक समझदार नागरिक होने के नाते हम भी उसमे से अपने व अपने समाज के फायदे के तत्व निकाल सकते है।..और अच्छे समाज निर्माण की शुरुवात कर सकते है।… यही सोच अपने मनुष्य व बुध्धिजीवी होने का प्रमाण है।….

Shubham gupta के द्वारा
May 17, 2012

plz save girls………….

umeshshuklaairo के द्वारा
May 17, 2012

यह बाजारवाद की पराकाष्ठा ही है …आमिर खान को यह एहसास है की हिंदुस्तान में स्थापित अभिनेता और क्रिकेट दो ऐसे स्तम्भ हैं जो समाज को कभी कभी हिलाते रहते हैं और इस बात का उन्होंने धन अर्जन हेतु क्या खूब प्रयोग किया है ……चलिए मैं मानता हूँ की उनके द्वारा उठए गए मुद्दे अति संवेदनशील हैं किन्तु उनकी संवेदनहीनता की मई दाद देता हूँ की ऐसे मुद्दे भी किस प्रकार कैश हो सकते हैं ये उनसे कोई सीखे ये मुद्दे समय समय पर विभिन्न माध्यमों से सतह पर आते रहे हैं …..आमिर जी को अपनी सम्मानजनक स्थिति का प्रयोग ऐसे मुद्दों को उठाने में लर्न चाहिए जिससे वास्तव में किसी ऐसे वर्ग का लाभ हो जो आज तक उपेक्षित पड़ा हुआ हो हमारे उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में धन्यकूत लोगों का समूह रहता है जिनकी आबादी लगभग ५०००० के आस पास है …..इनकी सामाजिक स्थिति का निर्धारण आज तक नहीं है ये केवल वोट बैंक की तरह जीवित है अस्पताल जाते है की इलाज हो जाये सरकारी सुविधा से तो वहां पर इनसे इनकी जाति पूछी जाती है अब ये क्या बताएं जब कोई जाति निर्धारित हो तो ये बताये भी , मानव मूल्यों का इससे बड़ा पतन और क्या होगा की ये समुदाय आपस में ही भाई बहन में विवाह करते है ताकि संतति बनी रहे और इसके चलते अलबेनिस्म जैसी बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं ये तो एक बानगी है ,यदि आमिर को इतना ही प्रेम है सत्य को उद्घटित करने का तो मई उन्हें आमंत्रित करता हूँ की वो बहराइच जिले में जाकर स्वयं इस तथ्य की पड़ताल करे समाज को आपसे बहुत सी उम्मीदें हैं आमिर जी अपने वजूद को टी आर पी की जंग में जाया न करे

Saurabh Chaudhary के द्वारा
May 16, 2012

मुद्दा ये बहुत ही ज़रूरी है लकिन सात ही साथ हमें यह समझना चाहिए की किसी को कुछ बताने से पहले हम खुद को आइने मैं देखे और अगर हुम अपने आप को पाक साफ़ पते है तभी लोगो को उसे मानने के लिए कहे ,तभी बात का असर होता है.मुद्दा ज़र्रोरी है लेकिन इसे बताने वाला गलत है.आमिर खान को यह समझना चाहिए की उसके द्वारा उसकी पत्नी कितनी सताई गयी है. क्या उसे इस बात के लिए पब्लिक के सामने अपनी गलती को मानते हुए अपनी पत्नी से माफ़ी नहीं मांगना चाहिए?????

yanksurya के द्वारा
May 16, 2012

main nahi manta ki yeh koi bazar wad show hai,, sali govt. ye nahi dekh rahi ki, ek celebrity ke itne fadu show ke chalte kitne log aaj ekatra ho rahe hai, mere ghar mein bhi jin chizo ke baare mein sare ghar wale anjaan the, aaj sab in baaton par gaur karte hai, aur bahar, chaar logo se discuss bhi karte hai, ye show sirf ek show nahi, balki ek shuruwat hai, ek aane wale sabhya samaj ki…… Logon ka kya hai, ajkal koi acha bhi kare to us par bhi point uthate hai, aur sarkar ka to kaam hi yahi hai, khud kuch dhang se karti nahi,, dusre kare to bazarwaad,publicity stunt or etc.. etc..!!! isliye thanks to aamir and team. my best wishes are always with you. “JAI HIND”

alok chantia के द्वारा
May 16, 2012

सत्यमेव जयते का मतलब होता है सत्य की ही जीत होती है और जिन तथ्यों को आमिर खान दिखा रहे है वह सिर्फ दिखा कर लोगो को आकर्षित कर रहे है \ खुद अपने जीवन में दो औरत लाकर कर मुस्लमान बन जाते है | क्या उस समय उनको याद नही आता कि वह धर्म से ऊपर पहले एक भारतीय है और औरत का सम्मान होना चाहिए , यही नही उनको पुरे भारत में उस कार्यकर्म को दिखाना चाहिए जिनको उनके पतिओ ने छोड़ दिया और अब वे किस हाल में है और उनके बच्चे कैसे है ? पर इसको आमिर नही उठाएंगे क्यों कि उन्हें इससे क्या मतलब कि पहली पत्नी और उनसे पैदा बच्चे कहा जा रहे है? सिर्फ दिखाने से न समाज बदला है और न बदलेगा | बाज़ार की तरह वे मूल्यों को बेच कर सिर्फ पैसा कमा है | आमिर को शायद ही यह पता हो कि मै २००४ से इस देश की राज्य सरकार, केंद्र सरकार और योजना आयोग सबसे कह रहा हूँ कि बहराइच जिले में रहने वाले धन्य्कूट समाज जिन्हें सामान्य वर्ग का सरकार कहती है , उनके समाज को अपने जीवन को बचने के लिए भाई बहनों को शादी करनी पड़ रही है और इस तरह की शादी भारतीय कानून में जुर्म है पर आज तक सरकार ने कुछ नही किया और जब मैंने सुचना मांगी तो कहते है कि आपका प्रकां २२वे नंबर पर लगा है जब नंबर आएगा तब उस पर विचार किया जायेगा | क्या आमिर बता सकते है कि २००४ से सरकार क्या कर रही है औए उस बीच जिन धन्यकुट का जीवन बर्बाद हुआ जा रहा है , उनके लिए कौन जिम्मेदार है ????? आमिर कहन में अगर बाजारीकरण से ऊपर वास्तव में कुछ करने की ताकत है तो अपने कार्यकर्म में धन्य्कुट का मामला उठाये वरना ऐसे कार्यकर्म करके उनकी जेब गरम हो सकती है | देश के लोगो का भला नही हो सकता | आमिर खुद को धोखा देने से अच्छा है कि पहले खुद सच के रस्ते पर जिओ और अपनी पहली पत्नी , बच्चे और धन्यकुट का प्रकरण पाने कार्यक्रम में दिखाओ अगर यह सिर्फ बाजारीकरण का एक मुखौटा नही है तो ????????? डॉ आलको चान्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

    yanksurya के द्वारा
    May 16, 2012

    अरे, सर !! वो अगर कुछ अछा कर रहा है तो उसे करने दो न ,, वो दूसरों के लिए अछा ही तो कर रहा है, अगर खुद कुछ,, तरीके से नहीं कर सकते तो please आपसे निवेदन है की कृप्या दूसरों को न रोके, और आपका bhai बहेन की शादी वाला मुद्दा, मुझे अच्छा लगा ……. अगर मेरी कोई बात बुरी लगी हो तो माफ़ करना.. “जय हिंद”

Ashok Lal के द्वारा
May 15, 2012

Jagran junction forum SATYAMEV JAYATE : geniune concern or pure commercialization of serous issue. The effort of the film and television medium to highlight issues of social importance has to be lauded. It can be the depiction of real incidents, dramatization of real incidents and even spoofs . It is welcome as long as it increases awareness of citizens and draws the attention of the authorities that be. However, it can neither be termed as a genuine concern nor it a case of pure commercialisation. It is Just another reality show.  Only made under a big banner. There have been many other reality shows which focussed on the various social evils in the society. The fact is that the cast is not of any actors but real people who are bold enough to air their grievances in front of camera. It saves a lot of cost for the producer , the audience also connects well to the common citizens. Any show of a genuine concern is coincidental. If the serial clicks , as SATYAMEV JAYATE seems to have in its first episode, the popular star has only to gain both in reputation as well as in terms of returns. The commercial angle comes up only after the serial has clicked at the TRP. In this case the government which is shown at a recieving end has also tried to rake in a lot of goodwill by showing its willingness to wake up to the social cause. So it’s a win win situation for all. Whether any societal change will take place as a result of the reality show , only time will tell. The chances are that after a little while all will be fogotten.

चन्दन राय के द्वारा
May 15, 2012

श्रीमान , इस समय जब हम टीवी पर नंगापण और फूहड़पण देख रहे तो , आमिर खान का यह कदम्म निश्चित ही सराहनीय है , उन्होंने इसके प्रसारण और स्क्रिप्टिंग में किसी भी मसाले का प्रयोग नहीं किया

akash nigam के द्वारा
May 15, 2012

सत्यमेव जयते जैसे कार्यक्रम समाज हित में बनते हैं लेकिन जैसा कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही इस मुद्दे पर विपरीत विचारधारा रखने वाले लोगों का साफ कहना है कि बेशक यह समस्याएं पहले भी कई बार उजागर की जाती रही हैं, इन पर कई बार आवाज उठाने की भी कोशिश की गई लेकिन अगर बॉलिवुड और बाजारवाद की सहायता लेकर कन्या भ्रूण हत्या जैसे अमानवीय कृत्यों पर रोक लगाई जा सकती है तो इसमें बुराई क्या है? अगर आमिर खान अपने एक टेलीविजन शो के जरिए एक बड़े बदलाव का आश्वासन जनता को दे रहे हैं तो हमें उन्हें समर्थन देना चाहिए। ना कि पुरानी बातों और सरकार की नाकामियों को इस मार्ग में अवरोध बनने देना चाहिए।

U C Pathak के द्वारा
May 15, 2012

आमिर खान ने अपने एक घंटे के कार्यक्रम के जरिए वर्षों से सो रही सरकार की नींद बड़ी आसानी से खोल दी, यह कहना गलत है. सरकार ग्लैमर के आकर्षण में नहीं बंधी है। हमारी सरकारें इतनी लापरवाह हैं या इतनी अक्षम हैं, यह दोनों बातें सच हैं. दरअसल सरकारें जनता की इच्छा के अनुसार चलती हैं और जनता इस मुद्दे पर पर्याप्त गंभीर नहीं दिखती. इसलिए जनता के वोटों की लालच में फंसी या जनता की इच्छा से बंधी सरकारें इन जघन्य अपराधों के अस्तित्व के बारे में जानते हुए भी पर्याप्त कुछ कर नहीं पा रही हैं. यह कार्यक्रम जनता को नींद से जगाने वाला साबित हो सकता है. 2. सत्यमेव जयते जैसे कार्यक्रम समाज हित में बनते हैं. आम आदमी ग्लैमर के आकर्षण जाल से प्रभावित है, यह सच है. अगर अच्छी बातें आम आदमी के जेहन में उतारने के लिए ग्लैमर का उपयोग किया जाता है तो यह अच्छा है, यह ग्लैमर का सदुपयोग है. यह मानने में क्या बुराई है कि समस्याओं की ओर आम आदमी का ध्यान आकृष्ट करना फायदेमंद है और जरुरी भी है? बेहतर और ज्यादा आसान विकल्प कोई सुझाए! समस्याओं के ऊपर ग्लैमर की चादर डालने में प्रथम दृष्टया कोई नुकसान तो नहीं दिखता! इससे ग्लैमर कि भी इज्ज़त बढ़ती है. 3. नहीं, ऐसे कार्यक्रम के जरिए कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्याओं को सुलझाया नहीं जा सकता है. लेकिन जनता में जागरूकता बढ़ने से कुछ कदम आगे बढ़ा जा सकता है.

umashankarsrivastava के द्वारा
May 15, 2012

अभिनेता आमिर खान दवरा टी वी पर दिखाए जा रहे सत्य मेव जयते कोई बाजार वाद नहीं है | यह तो हमारे देश के नेता जो अपनी अयोग्ता को हल्ला बोल कर छिपा रहे है | आज हमारे देश से दहेज प्रथा खत्म हो जाय तो कन्या भ्रूण हत्या अपने आप कम हो जायेगा | कुछ भ्रूण हत्या तो इस लिए हो रही है की कुछ लड़किया शादी से पहले ही शादी के बाद का काम कर रही है | इस पर भी रोक लगनी चाहिए | यह माता पिता की जिम्मेदारी है |

Dipti के द्वारा
May 15, 2012

Ofcourse, this is marketization of a sensitive matter but sometimes it is much needed becoz जब कानो में बाजए ना बजाये जाए कान के परदे नही खुलते … and i must appreciate the management of Satyamev Jayate….for the initiation in a very nice way. but i also worried …. कही ऐसा ना हो की ये सिर्फ एक व्यापार ही बन के रह जाए कहीं ये पहल शुरू होने से पहले ही ख़तम ना हो जाए…क्यूंकि सरकारी आश्वासनों को हम सभी जानते है, कहीं ये सिर्फ आश्वासन ही ना बन के रह जाए … ये सच में वास्तविकता है की उन दोक्टोर्स के खिलाफ आज तक कोई एक्शन नही लिया गया its really shoking……हाँ आमिर और उनकी टीम ने हाथ पे हाथ ना रख के कम से कम एक कारगर कोशिश तो की ही है.

Jamos sablok के द्वारा
May 15, 2012

[जमोस सबलोक] एक कार्टून के छपने से भौंचके है सब लोग | सरकार घेरने को लगा रहे एडी चोटी जोर \\ प्रणव मुखर्जी ने संसद में कहा सीना तान | सभी किताबों से तुरंत हठाओ ये नया रोग\| टेबल थप थपा कर समर्थन मिला भरपूर| सारे विवाद सारे झगड़े मुद्दे हो गए दूर \| मीडिया ने अपनी आदत पुराणी ही दोहराई | अपनी स्वतंत्रता पर अटैक की दे रहे है दुहाई || इस प्रकरण से अब हमने यह जान लिया | ६३ साल पुराना एक ब्लेक &व्हाईट कार्टून टेक्नीकलर सांसदों को कार्टून बना सकता है

ashok kumar dubey के द्वारा
May 15, 2012

अभिनेता आमिर खान द्वारा टेलीविजन पर दिखाया जा रहा प्रोग्राम केवल बाजारवाद की पराकाष्ठा कहना सरासर नाइंसाफी की बात होगी बाजार ब्यवस्था जरुर हावी है सभी प्रदर्शीत होनेवाली प्रोग्राम पर , यहाँ यह भी देखना जरुरी होगा की क्या बाजार के माध्यम से कोई सामाजिक सुधार या सरोकार पोषित हो रहा है या नहीं और मेरे विचार से “सत्यमेव जयते” कार्यकर्म द्वारा एक महत्वपूर्ण मसले पर जनता को जागरूक एवं सिक्छित करने का काम हो रहा है वैसे तो यह जघन्य सामाजिक बुराई दिनों दिन बढती जा रही है पर जरुर कुछ ऐसा कार्यकर्म दिखाने से जनमानस पर इसका असर दिखलाई पड़ेगा और बेटी भ्रूण हत्या को कम करने के लिए लोग कदम उठाएंगे . एक बात इसमें मैं और जोड़ना चाहूँगा इस समस्या की जड़ का एक महत्वपूर्ण कारन दहेज़ प्रथा का चलन भी है . बेटी पैदा होते ही ज्यादातर परिवार के लोग इस बात से डर जाते हैं की बेटी पराये घर चली जाएगी , इसके लिए दहेज़ की ब्यवस्था करना पड़ेगा इससे मेरा खानदान तो नहीं चलेगा वंश तो नहीं बढेगा और बेटा तो बुढ़ापे का सहारा बनेगा मेरा वंश चलेगा ऐसी दकियानूसी बातें भी लड़की भ्रूण हत्या के कारन हैं लोगों को और सिक्छित होना पड़ेगा अब लड़कियां किसी छेत्र में कमजोर नहीं हैं इस बात को ज्यादा से ज्यादा बताना होगा प्रचारित करना होगा और प्रोत्साहन भी देना होगा लड़कियों को . जो की आजकल दिया भी जा रहा है उसको और सुगम बनाना होगा इसमें गैरसरकारी संसथान और सर्कार भी बहुत कुछ कर सकती हैं . कुल मिला जुलकर यह प्रोग्राम एक सामाजिक क्रांति लाने में मददगार होगा .

Dr.D.K.Mall के द्वारा
May 15, 2012

आमिर के इस प्रयास की तारीफ करनी चाहिए । चाहे यह मनोरंजन हो या बाजारवाद , इस कार्यक्रम ने असंवेदन शील समाज को उसका वास्तविक चेहरा दिखाने की कोशिश है। ऐसे कार्यक्रम को सराहना मिलनी चाहिए। आमिर को साधुवाद।

maharshi kapoor के द्वारा
May 14, 2012

Nice To See That God Has made One Person To Sought Out The Problems Of Childrens . It Is Good Starting To Get Rid Of This Type Of Problems. “सत्यमेव जयते

arpan singh के द्वारा
May 14, 2012

एक बात तो यह निश्चित है कि भारतीय सिनेमा का हमारी समाज पर बहुत व्यापक असर हुआ है इसी तरह से अगर इस सिनेमा का इस्तेमाल हम समाज की किसी बुराई को दूर करने के लिए करे तो इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता, कन्या भ्रूण हत्या जो कि हमारे समाज के लिए एक काला धब्बा है इसे समाज से दूर करने का ये एक कारगर तरीका हो सकता है, जैसा कि आमिर खान जी “सत्यमेव जयते” शो के माध्यम से शुरुआत किये है और हमे इसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

akanksha के द्वारा
May 14, 2012

It is absolutely true that sleeping government is not concerned about the burning problems of nation and states..It is also true that negligible attention is paid towards problems unless they are raised by a celebrity..There are many people working against such social evils and fighting for the cause of people but are unknown because of lack of proper channel for propagation…However tagging the initiative taken by Amir Khan and his team as “COMMERCIALIZATION” would NOT be fair..It is his contribution as a citizen of India..and his efforts should be praised..

akanksha के द्वारा
May 14, 2012

It is absolutely true that sleeping government is not concerned about the burning problems of nation and states..It is also true that negligible attention is paid towards problems unless they are raised by a celebrity..There are many people working against such social evils and fighting for the cause of people…However tagging the initiative taken by Amir Khan and his team as “COMMERCIALIZATION” would NOT be fair..It is his contribution as a citizen of India..and his efforts should be praised..

ashutosh porwal के द्वारा
May 14, 2012

अगर ऐसी समस्याओ को निपटाने के ली बाज़ारबाद की आवश्यकता है तो ऐसी बाज़ार बाद ज्यादा अच्छा है !

    ramkumar के द्वारा
    May 14, 2012

    why commercialisation is being looked dawn as something very bad?

Ahmed Husain M के द्वारा
May 14, 2012

Aamir has raise very good topic or issue on his televison show,but does it really work in our society, does they will stop doing that all things, Actually, what i felt this issue somewhere connected with our dowry system, that is why 25% or above than that they are killing of unborn girls,or female foeticide, because of this reason.So we should have finished dowry system from our society.

Girish के द्वारा
May 14, 2012

आप कल को या भी कहेंगें कि रामायण, गीता, बाईबल और कुरान कि बिक्री भी बाजारीकरण है ! दुखती रग पर हाथ जो रख दिया है तो बाजारवाद की पराकाष्ठा कह कर नाकारात्मक सोच का परचिय दिया जा रहा है.

    dipti jain के द्वारा
    May 15, 2012

    very well said….

Sourabh Shivhare के द्वारा
May 14, 2012

Although i would like to Aamir Khan’s Show “Satyamev Jayte” because if anyone takes an initiative for unaccredited activities like women oppressions, fetal death etc… But we should need to think about this that why these celebrities have to take an initiative for that. Do we want to listen them only??? Today we are going to enter a very civilized society even after that our Ideology will not be changed until then we can’t make a well & cultured society. Not only celebrities we all have to try & Conscious about these serious problems. Now a days if we see social sites are covered only bla.. bla party making corruption, scams etc & all the users are sharing their comments against them…. This is a nature we can say that if air circulations are there we all are there. But i don’t like to flow with air. we need to behave like “ROCK” that no one could even shake you.. Think Broad & compare with yourself… you will get a result. Now we need to take initiative to kill the old traditional concepts step by step of your level where you all are stand.. Thanks!!!

    Vaibhav के द्वारा
    May 14, 2012

    Good One

Rajeev Bansal के द्वारा
May 14, 2012

This is very fiery problem which Mr. Aamir khan raised on TV show of our society, but I would like draw your attention, that a young girl can not go to her tuition or school and college for her study without any fear in Delhi (N.C.R) or any where in India. We should form our society like that there is no fear for the girls. Thaks,

Rajeev Bansal के द्वारा
May 14, 2012

aamir khan ne jo samasya uthaee hai, wh uchit hai. leken ham apne samaj ne ladkeyon ke sath ho rahee balatkar, apharan or hatya ke ghatnaon har vechar karen ke en sab ko kaise roka jay, to samaj ke bhala ho sakta hei. jo ke jameeni hakekat hai.

gourav के द्वारा
May 14, 2012

ऐसा नहीं कह सकते कि बाजारवाद हावी नहीं होगा लेकिन उस बाजरवाद में भी एक ऐसे कार्यक्रम को चुना गया जो बिलकुल संवेदनशील गंभीर है. जिसका मनोरंजन से कोई लेना-देना नहीं है बस अधिक से अधिक लोगों को समाज के गंभीर मुद्दों पर जागरूक करना.


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