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जागरण जंक्शन फोरम

देश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

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कितनी आवश्यक है राष्ट्रपति के लिए राजनैतिक पृष्ठभूमि ?

पोस्टेड ओन: 4 May, 2012 Uncategorized में

कुछ ही समय में देश को अपना अगला राष्ट्रपति मिलने वाला है। जैसे-जैसे वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है वैसे-वैसे भारत के अगले राष्ट्रपति से जुड़ी चर्चाएं भी बहुत तेज होती जा रही हैं। हर दिन कोई ना कोई नया चेहरा राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी दर्ज करवाता रहता है लेकिन देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रगति के मार्ग पर अग्रसर भारत देश का अगला राष्ट्रपति राजनैतिक पृष्ठभूमि वाला होना चाहिए या फिर गैर राजनैतिक?


बुद्धिजीवियों का एक वर्ग जो राजनैतिक पृष्ठभूमि वाले राष्ट्रपति की पैरवी करता है, का कहना है कि किसी भी देश का राष्ट्रपति उस देश का प्रथम नागरिक होता है। भारतीय लोकतांत्रिक व्य्वस्था में भले ही राष्ट्रपति को राजनैतिक तौर पर अधिक शक्तिशाली नहीं बनाया गया है लेकिन फिर भी देश के प्रथम नागरिक को राजनीति में अनुभव अवश्य होना चाहिए। उसे देश के राजनैतिक हालातों की समझ होगी तो वह सही समय पर सही निर्णय ले सकेगा। अगर राष्ट्रपति गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि से होगा तो उसके लिए राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी पकड़ बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।


वहीं दूसरी ओर कुछ विचारक ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि देश के राष्टृपति को गैर राजनैतिक पृष्ठभूमि का ही होना चाहिए। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसी पार्टी के साथ संबंध ना होने के कारण राष्ट्रपति पक्षपात नहीं करेगा। वह जो भी निर्णय लेगा वह पूरी तरह निष्पक्ष और जनता के हितार्थ होगा। भारत के राजनैतिक इतिहास में बहुत से ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जो सीधे-सीधे तत्कालीन सरकार के फैसलों पर ही मुहर लगाते रहे हैं। जबकि हम यह उम्मीद करते हैं कि देश का राष्ट्रपति किसी भी प्रकार के राजनैतिक लाभ से मुक्त रहे। अगर राष्ट्रपति गैर राजनीतिक होगा तो उस पर किसी पार्टी का अहसान नहीं होगा, वह किसी पार्टी के सिद्धांतों पर नहीं चलेगा। राजनैतिक पृष्ठभूमि वाले राष्ट्रपति राजनीतिक लाभ-हानि को महत्व देते हैं और पार्टी छोड़ने के बाद भी वह अपने राजनैतिक मित्रों और साथियों के सुझावों पर ही चलते हैं। इसीलिए भारत का ऐसा राष्ट्रपति जो किसी पार्टी से संबंध ना रखता हो वही देश के लिए हितकर है।


इन दो विचारधाराओं को समझने के बाद निम्नलिखित प्रश्न उठते हैं जिनके जवाब पाने के लिए विचार-विमर्श होने बेहद जरूरी हैं, जैसे:


  1. भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति के कार्य बहुत सीमित हैं, ऐसे में कहां तक जरूरी है कि उसे राजनीति का अनुभव होना चाहिए?
  2. क्या जनता के हितों के बारे में सोचने के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि का होना आवश्यक है?
  3. क्या देश की जनता गैर राजनीतिक व्यक्ति की निर्णय क्षमता पर भरोसा कर सकती है?

जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


कितनी आवश्यक है राष्ट्रपति के लिए राजनैतिक पृष्ठभूमि ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “देश का अगला राष्ट्रपति” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व देश का अगला राष्ट्रपति Jagran JunctionForum लिख कर जारी करें।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार





Tags: blogs in hindi  Information on Presidents of india  PRESIDENT  HINDI BLOGS  HINDI  ब्लॉग  हिन्दी ब्लॉग  राष्ट्रपति  

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rohit arora के द्वारा
August 4, 2012

in my opinion the candidate who wants to become the president of india should have the knowlege of politics it is a must qualification…

neeraj k agarwal के द्वारा
July 28, 2012

The president of india’ Respected sir main lead in poltical knowledge but sir see for every indian all cast servey and see in more family in all member in govt. job and some family is died from no job no more earning firstly request sir all pepople get job in every family person and nothing but earning and unemploment is mostly for every and your r the all india ’s power …. Thanking u neeraj

Ramesh Chaudhary के द्वारा
July 11, 2012

पहली बात तो रास्त्रपति एक बुधि जीव होना चाहिए , मुर्ख परवर्ती का नहीं होना चाहिए ( सिर्फ मूर्ति ) जिसमे कोमन सेंस का भी आभाव हो यानि अपनी जिमेदारी भी ना समझता हो और राजनीती से प्रेरित हो के कुछ भी ना बोले बेसक देश इंतजार करता रहे और वो चुप रहे, ” मतलब मुर्ख ” दूसरी बात उसमे से देश भावना की महक आनी चाहिए जैसे परनब में से नहीं आती है और सगमा में से भी नहीं आती है जैसे कलाम मे से आती आती थी जैसे अन्ना से आती है ”देश भक्ति की महक” और मेन बात- वो लालची नहीं होना चाहिए सिर्फ देश भक्त होना चाहिए | जाती पाती तो बहुत दूर की बात होनी चाहिए और मेन बात डरपोक नहीं होना चाहिए जो देश के दुमानो को मरने से भी डरता हो

vijayashree के द्वारा
July 10, 2012

राजनैतिक पृष्ठभूमि वालो की कयू जरूरत है वो तो बुद्धिजीवियों मे  से होना चाहिये

SUNIL VERMA के द्वारा
July 9, 2012

मै तो यही चाहता हूँ की अपने देश का राष्ट्रपति राजनीती से बाहर का व्यक्ति हो और इन सभी राजनितिक पार्टियों पर लगाम लगाये क्योंकि जो राजनितिक व्यक्ति होगा वह ऐसा कुछ नहीं कर पायेगा

Daya Nand Pathak के द्वारा
June 15, 2012

अपने देश के राष्ट्रपति के सन्दर्भ में तीन बातें युक्तिसंगत प्रतीत हो रहीं हैं. कुछ लोग हमारे देश में योग्य चयनित हुए जिनके कारण पद की गरिमा बरकरार रही. राजेन्द्र प्रसाद, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, ए. पी. जे. अब्दुल कलाम सरीखे कुछ अन्यतम राष्ट्रपति हुए जिससे राष्ट्रपति पद गौरवान्वित हुआ और कुछ सत्ता के गलियारे से आये जिन पर यह पद थोपा गया जिसके कारण इस पद की गरिमा आहत हुई. अस्तु, इस पद को सत्ता के दलालों से बचाने का भगीरथ प्रयास में ही राष्ट्र का सर्वोपरि हित निहित है. जयहिन्द!

Sushil Gaur के द्वारा
June 13, 2012

Aur sath hi sath sabhi netao ko sarkari kharche jo kiya jate hai unko hataya jay aur unke dwara huye sabhi kharo ki report magi jay..aur sabhi netao ki videsh yatra aur waha kiye gayi kamo ki report magi jay aur unke bank ke account ko puri jankari raki jay jisse ye hoga ki sabhi neta log riswat lena kam kar denge aur desh tarakki ki or badhega. Agar ki bhi neta ki income yearly 4 lakh se jada hoti hai to unpe turant kesh kar diya jay aur unhe unke pad se hata diya jay….

Sushil Gaur के द्वारा
June 13, 2012

mera to ye kahna hai ki pure desh me sirf rastrapati shashan hi chalaya jay aur sabhi netao ki sansad nidhi band kar di jay aur sabhi netao ko ek workar ki tarah 10000/- ki salary di jay tab enhe pata chalega ki public ki dikkate kya kya hai….

    rohit arora के द्वारा
    August 4, 2012

    10,000/- bahut jyada he inke liye kewal 4,000/- dene chahiye jitna ye log kaam karte he…

BRAJENDRA KUMAR के द्वारा
June 8, 2012

jagran junction foram Rastapati ke leay rajnitik pristbhumi bhale hi na jaruri ho par use bharat ki rajnitik sistem samajik sistem, enternational politics khas kar apne padosi deso ki jarur samajh honi ho. .Rajnitk pristbhumi ka rahne wala kahi na kahi apni pati ki niti ko apne nernay me samahit karega oh kabi nahi spast nernay le sakta hai. hame khash kar imandar,nervick,inteligent,kartabaynist logo ko lang hoga. rastapati bhale hi sarkar ke nernay par kebal apni muhar lagata hai par use kisi bil par apni jebe beto lagane ka jo adikar hai usse sarkar ko sahi nirnai lene ke ley majbur kar sakta hai .es post ki apni hi san hai tino senao ka manobal is pad par bathe bakti se juda hota hai is karan se bi rajnitik pristbhum bala bakti is pad ke ley nahi hona chahiy.

Siddhartha Pratap Singh के द्वारा
June 2, 2012

महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करवाने के लिए जागरण परिवार को हार्दिक बधाई! मित्रो! हमारे राष्ट्रपति को निश्चित रूप से सामाजिक,सांस्कृतिक और राजनैतिक तीनो ही क्षेत्रो की विशेसग्यता हासिल होनी चाहिए क्यूंकि अगर सर्वगुण संपन्न व्यक्ति महामहिम की गद्दी पर बैठेगा तभी गठबंधन के मंत्रिमंडल पर कुछ हद तक निगरानी रखने में सफल हो पायेगा, और सत्ता-पक्ष की कठपुतली होने से बच पायेगा | हाँ, ये जरुरी नहीं की उसका राजनैतिक कैरियर किसी पार्टी विशेष से जुड़कर उपलब्धियों भरा रहा हो| मगर मेरी समझ से उसे राष्ट्रीय स्तर पर राजनैतिक समझ जरूर होनी चाहिए ताकि आपात स्थितियों में अगर जरूरत पड़े तो बुद्ध-जीवियो और सेना के आग्रह पर सत्ता अपने हाथ में लेने में भी न हिचकिचाए ,,,,,कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है की राष्ट्रपति का पद केवल शो-पीश नहीं होना चाहिए, मेरे हिसाब से सविंधान ने भी दबी जुबान ही सही मगर कुछ न कुछ शक्तिया तो दे ही दी हैं,अब उनका इस्तेमाल तो कोई जनता के दिलो में राज करने वाला साहसी ही कर सकता है| क्यूंकि जब जनता अन्ना के आग्रह पर दिल्ली की सडको में उतर सकती है तो एक योग्य, ईमानदार अपने राष्ट्र-पति के इशारे पर क्यों नहीं? इसलिए मेरी राय है की सविधान में संशोधन करवाके हमें राष्ट्र-पति का चुनाव सीधे जनता द्वारा करवाना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर जनता किसी बाबा-औलिया के चक्कर में न पडके अपने चुने राष्ट्र-पति से सीधे तौर पर हस्ताक्षेप का आग्रह करके सरकार को आँख दिखाने में सक्षम रहे,,,,

jitendrakumar के द्वारा
May 30, 2012

भारत में राष्ट्रपति किसी भी पार्टी का सदस्य नहीं होना चाहिए ,क्योंकि वोह किसी पार्टी से जुदा होअता हैं तो वोह उसी पार्टी के अनुकूल और आधारित रहता हैं ,तो मेरे हिसाब से ,वोह किसी भी पक्ष से जुदा हुआ नहीं होना चाहिए ,और राष्ट्रपति को संसद को काबू में रखने के लिए पूरी सत्ता होनी चाहिए ,जो हमारे कानून में नहीं हैं , जय हिंद

vijay के द्वारा
May 17, 2012

rastrapati ke liye rajnaitik prith bhoomi ki koi jarurat nahi hai bas vaah imandar aur technical knowledge rakhne wala hona chahiye tabhi desh ka vikash ho sakta hai nahi to dunniya me hamari akhiri se ginti shuru hogi,

dharam singh के द्वारा
May 16, 2012

राजनेता सही नही वह जिस पार्टी का है उसे प्राथमिकता देगा पद से न्याय नही कर सकता इस पद पर  अराजनीतिक  पर विद्वान चाहिये

shuklaom के द्वारा
May 14, 2012

आज की परिस्थितियो में इस बात की जरुरत है कि किसी गैर राजनितिक व्यक्ति को ही राष्ट्रपति होना चाहिए क्योकि सोनिया कांग्रेस ने जिसतरह लोकतान्त्रिक संस्थाओ का अवमूल्यन किया है कि हमारी वर्तमान राष्ट्रपति के बारे में राजस्थान के एक मंत्री महोदय ने फ़रमाया कि वर्तमान राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह शेखावत को इंदिरा गाँधी के यहाँ कप-प्लेट धोते और चाय बनाने के फलस्वरूप आज राष्ट्रपति कि कुर्सी पैर बैठी है. आप लोगो को जानकर आस्चर्य होगा कि उक्त मंत्री महोदय से त्यागपत्र लिया गया और कुछ दिन बाद फिर से मंत्री बना दिया गया.ज्ञानी जेल सिंह सिंह का वक्तव्य इतिहास में दर्ज है कि मै इंदिरागांधी के यहाँ झाड़ू लगाने को तैयार हु कहने का तात्पर्य यह है कि अज कि परिस्थितियो को देखते हुए राजनितिक व्यक्ति का राष्ट्रपति होना और वह भी सोनिया कांग्रेस के मनमाफिक राष्ट्र के लिए घोर दुर्भाग्य्पुर्द दिन गोगा भगवन इन चापलूसों को इतनी तो बुध्धि दो कि यह कुछ तो इस देश कि मिटटी का फर्ज अदा करे,खास टूर से सहयोगी अपने छुद्र स्वार्थो के चलते को परे रख कर विचार करे. आमीन

vijay yadav के द्वारा
May 14, 2012

jaruri nahi ki rastrapati kisi rajniti se juda ho agaar mulayam singh yadav aisa sochte hai to agli bar unko yuva varg ek bhi vote nahi dega kyoki mulayam hi sabse pahle magn kiye the meri samajh se rastrapati kisi rajnitik party se nahi juda hona chahoiye keval vah technology se juda hona chayiye tabhi desh ke yuvao ka vikas ho sakta hai

anil bhutani के द्वारा
May 13, 2012

desh k liye gair rajnetik vyakti hi better ho sakta h nhi toh vo sirf sattadhariyo ka hi kaam karega na ki aam logo ka jaise ki es same desh parivartan chahta h un ki koi prob hal nhi ho rahi h es k liye naya rashtpati gair rajnetik hona jaruri h.

ashok kumar dubey के द्वारा
May 13, 2012

देश का अगला राष्ट्रपति Jagran Junction Forum सबसे पहले मैं जागरण समूह का धन्यवाद करना चाहूँगा इसके लिए की आज के राजनितिक परिवेश में उन्होंने एक महत्वपूर्ण विषय पर लोगों के विचार जानने का प्रयास किया है. राष्ट्रपति कौन बने ? मेरी राय में देश का राष्ट्रपति एक विद्वान् , विचारवान ,और एक इमानदार समाजसेवी हीं बने . इस पद के लिए कोई राजनितिक पृष्ठभूमि वाला ब्यक्ति कतई जरुरी नहीं क्यूंकि राजनीतिबाजों ने देश एवं देश की जनता का भारी नुकसान किया है और भारतीय राजनितिक ब्यवस्था में राष्ट्रपति के कार्य एवं अधिकार सिमित हैं , ऐसा विचार आपने भी रखा है ऐसे कोई जरुरी नहीं की होनेवाला राष्ट्रपति राजनितिक पृष्ठभूमि से हो या उसे कोई राजनितिक अनुभव हो अगर वह एक विद्वान् ब्यक्ति होगा तो उसे देश की राजनीती की समझ भी होगी और अगर वह किसी पार्टी का ब्यक्ति होगा तो जरुर उसका झुकाव पार्टी हित की तरफ ज्यादा होगा देश हित में कम अतः जनता के हितों के बारे में सोचने के लिए उसका गैर राजनितिक होना ज्यादा जनहित में होगा और वह अगर इमानदार ब्यक्ति होगा तो निश्चित ही जनहित की सोचेगा वैसे तो अब तक इस देश का राष्ट्रपति एक स्टाम्प बनकर ही कार्य करता रहा है और ऐसा लगने लगा है की अगला राष्ट्रपति सत्तधारी दल का एक राजनितिक ब्यक्तित्व ही होगा जो केवल अपनी पार्टी को सत्ता में कैसे काबिज रखा जाये उसीकी सोचेगा रही बात जनता की वह तो मिला जुलाकर मूक दर्शक ही रही है ले दे कर चुनाव के समय इन नेताओं एवं पार्टियों को जनता का ख्याल आता है क्यूंकि जनता के वोट के बल पर ही उन्हें चुना जाना है और वोट तो धन बल और बाहू बल से आज तक हासिल होता ही आया है कब नोट नहीं बाटे गए चुनाव में कब शराब की बोतले नहीं बाटी और पार्टी कोई भी जीते करना उन्होंने वही काम है जो अब तक वे करते आये हैं जनता ने केवल अगले चुनाव का इन्तेजार करना है एक पार्टी बदलेगी पर जनता की किस्मत न बदली है न बदलेगी क्यूंकि वह तो भगवान भरोसे या किसी निर्मल बाबा के भरोसे हीं जीती आई है बुद्धिजीवी वर्ग तो केवल सत्ता सुख और पावर गेम में लगे हैं जिन से जनता को कुछ भरोसा था वे सभी बड़े बड़े घोटाले में लगे है और इतने घोटालो के बाद भी इनका पेट भरता नहीं न जाने कितना बड़ा पेट है वो कहते हैं न भगवान ने भी जरुरत के लिए सारी वस्तुएं उपलब्ध करायी हैं पर लालच के लिए उसका भंडार कभी पूरा नहीं कर सकता. फिर हम तो इन्सान हैं भगवान से ही कुछ मांग सकते हैं और हमारे नेता हमें भगवान भरोसे जीने का ही सन्देश दे रहे हैं

Nagjiram के द्वारा
May 11, 2012

rajnetik ho

devendra barewar bhourgarh के द्वारा
May 10, 2012

अगला राष्ट्रपति राजनातिक ही होना चाहिए इसलिए की इंडिया में विधान्शाभा या लोकसभा अधक्ष भी निष्पक्ष निर्णय करते है इंडिया समझ अभी भी बची हैं मैं समझता हूँ की भारत में एक धडा आज भी बुद्धिजीवी वर्ग हैं जो कठिन समय पर सही निर्णय करता है /

अमित कुमार सिंह के द्वारा
May 9, 2012

आज देश्‍। के सर्वोच्‍च पद राष्‍ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहा है , जिसमें सभ्‍।ी पािर्टया अपना –अपना निजी स्‍वार्थ्‍ा साध्‍। रही हैं। जब कि इस पद के लिए एक ईमानदार ,नेक, देश्‍। प्रेमी, व ज्ञानी व्‍यक्‍ति की जरूरत है। लेकिन हमारे देश्‍। में राष्‍ट्रपति केवल रबर स्‍टाम्‍प मात्र है जो कि विभ्‍ि।न्‍न समारोहो का उदघ्।टन करता है तथ्। फाइलो पर हस्‍ताक्ष्‍।र करता है । जिस पार्टी का बहुमत होता है वह पार्टी अपना राष्‍ट्रपति बना चाहती है क्‍यों कि अपने बिलों को आसानी से पास करा सके, परन्‍तु देश्‍। हित की बात किसी पार्टि के प्राथ्‍ि।मकता में नहीं है ।मेरा मानना है कि इतने महत्‍तवपूर्ण्‍ा पद का चुनाव जनता द्वारा होना चहिए किसी पार्टी द्वारा नहीं।

    aryan dixit के द्वारा
    May 9, 2012

    आप के बिचार हमारे जैसे है…………

aryasanskritikendra के द्वारा
May 8, 2012

देश का अगला राष्ट्रपति – Jagran Junction फोरम राष्ट्रपति पक्षपात रहित गैर राजनैतिक पृष्ठभूमि का ही होना चाहिए| उसके निर्णय निष्पक्ष और लोक हित में होने चाहिए । राष्ट्रपति केवल रुबर की मुहर ना हो कर किसी भी पार्टी यां व्यक्ति विशेष से प्रभावित नहीं होना चाहिए | राष्ट्रपति केवल देश – विदेश की सैर न कर देश के गरीबों, किसानो,, जनजातियों, और सैनिको का रहनूमा होना चाहिए | राष्ट्रपति मानविए धर्मको मानने वाला हो | वोह पैवारिक समस्यायों से मुक्त और हो सके तो शादी के बन्दानो से भी रहित होना चाहिए | डाक्टर अब्दुल कलाम अच्छे राष्ट्रपिता साबित हुए हैं, परन्तु वोह एक बार राज सिंहासन ग्रहन कर चुके हैं | राष्ट्रपिता कोई अच्छा जर्नालिस्ट यां न्यायाधीश भी हो सकता है | अन्ना हजारे इसके लिए सबसे अच्छे उमीदवार हैं और वोह जनता की उमीदों पर भी पुरे उतरेंगे | जस्टिस भगवत जैसे बहुत से जस्टिस अच्छे राष्ट्रपिता साबित हो सकते हैं पर जो सोनिया चाहेगी वही होगा | कयूं कर तर्क बढायो साखा | आज लाल बहादुर जैसा भी कोई लाल नहीं है | कोई नहीं है न जाने किसका है इन्तजार |

d. n. singh के द्वारा
May 8, 2012

राजनितिक होने से बहुत से फायदे है तथा जिस तरह से आज की राजनीती हो गयी है उस तरह की राजनीती से एक राजनितिक व्यक्ति ही निपट सकता है तथा उन सभी समस्यों का समाधान कर सकता है पर सवाल यह है की वह सभी दलों को सामान भाव से देखे और किसी एक को राजनितिक फायदा न पहुचाये और सभी की पसंद का ho

    aryan dixit के द्वारा
    May 9, 2012

    आप की बैटन से सहमत नहीं हूँ……………….

aryan dixit के द्वारा
May 8, 2012

कैसे हो राष्ट्रपति-jagran junctionforum राष्ट्रपति किसी भी देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण पद होता है .इसलिए मैं सोंचता हूँ की रास्त्रपति की दबेदारी के लिए कुछ और कड़े नियम बनाए जाये ताकि हर किसी पार्टी का नेता राष्ट्रपति का उम्मीदबर न बन सके. राष्ट्रपति एक ऐसा शब्द है जिसका अर्थ हर किसेको मालूम, नहीं होता .| राष्ट्रपति जो कोई बने बो एक म]नेता नहीं अपितु एक देशभक्त जैसा कार्य करे जो इस राजनीती से दूर हो| क्योकि एक महान बिचारक न कहा है की राजनीती एक ऐसा चेत्र है जो एक सफा -सुथरे इन्शान को गन्दा कर देती है| एक बार मैं एक सभा में बैठा था लोग कह रहे थे की अधिओक तर देशों मैं राष्ट्रपति के अधिकार प्रधानमंत्री से अधिक होते है पर अपने यहाँ ऐसा क्यों नहीं है? मैं बोला की अगर यहाँ राष्ट्रपति के अधिकार परधानमंत्री से अधिक हो जायेंगे ये केन्द्रीय नेता लोग जितने गंदे कम है उनको अंजाम कैसे दे पाएंगे| उन लोगों ने मुझसे दूसरा प्रश्न किया —– अपने यहाँ का राष्ट्रपति गैर राजनैतिक क्यों होना चाहिए है? मैंने कहा की राष्ट्रपति इसलिए गईं राजनैतिक होना चाहिए जिससे राष्ट्रपति निश्पच निर्णय कर सके |

Ashutosh kumar Maurya के द्वारा
May 7, 2012

The President of India should be a non political person so that there decision to be free from political pressure.

Tarun Jain के द्वारा
May 7, 2012

हम्मरे देश का राष्ट्रपति गर राजनीतिक व्यक्ति होना चैयाय. ताकि वो जनता के लिया उचित फैश्ल्ला कर सके .

Roshan Lal Arya के द्वारा
May 7, 2012

राजनैतिक प्रष्ठभूमि मेरे विचार से  का होना कोई जरूरी नहीं है राष्ट्रपति उसे बनाया जाये जो सच्चा इंसान हो इश्वर से डरता हो चाहे किसी भी धर्म को मानता हो लेकिन सबसे पहले मानवता को मानता हो डाक्टर अब्दुल कलाम अपने आप में एक मिसाल हैं अगर उन्हें एक बार फिर बना दिया जाये तो क्या बुरे है

Anal Krishna के द्वारा
May 7, 2012

Sri T N Sheshan is the most suitable candidate for the post of the President of India at this time but no body is talking about

alok के द्वारा
May 7, 2012

ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति राष्ट्रपति पद विराजमान होगा उनसे वह उम्मीद की जाती है. वह सभी गुणो से भरे हुए हों. ऐसे में यह सवाल बिलकुल नहीं उठना चाहिए राष्ट्रपति के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि होना आवश्यक हो. वैसे भी राजनैतिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले कौन से देश के हित में काम कर रहे है.

alok chantia के द्वारा
May 7, 2012

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव दस्तक दे रहा है और इस देश में किसी भी बात के लिए मंथन एक सामान्य सी प्रक्रिया है और शायद यही कारण है कि राष्ट्रपति का चुनाव भी एक मंथन के दौर से होकर गुजर रहा है कि उमीदवार राजनैतिक पृष्ठभूमि का होना चाहिए या नही …………….आप सभी को पता है कि भारत में राष्ट्रपति जो भारत का प्रथम नागरिक है उसकी वैधानिक स्थिति क्या है ? यह तक वह किसी कानून को पुनरावलोकन के लिए भी संसद में सिर्फ एक बार भेज सकता है यानि वह सिर्फ एक मोहर की तरह है और यह एक सामान्य सी अवधारणा बन गई है कि किसी भी व्यक्ति की राजनैतिक सक्रियता ख़त्म करनी हो तो उसको राष्ट्रपति या राज्यपाल के पद पर बैठा दो और आज यही कारण है कि अपनी राजनैतिक हत्या से उबरने के लिए हर वो व्यक्ति छटपटाता दिखाई देता है जिसे राष्ट्रपति पद का उम्मेदार बनाने की कोशिश की जाती है | अगर इस पद में एक बेहतर भविष्य का सार होता तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव ने यह कह कर इंकार न किया होता कि मई जनता के आदेश के साथ खुश हूँ जबकि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री उनके पुत्र है तो फिर मुलायम जी की क्या इच्छा है इस पर चर्चा की जरूरत नही है | श्री शरद पवार ने भी पानी उम्मीदवारी ओ ख़ारिज कर दिया और यही नही एक दम दर कांग्रेस के नेता के रूप में श्री प्रणव मुखर्जी का नाम जिस तरह उछल रहा है और जिस तह वह भी इंकार कर रहे है , उस से तो यही लगता है राष्ट्र का प्रथम नागरिक एक राजनैतिक व्यक्ति स्वयं पाने मन से तो कतई नही बनना चाहता और राजनैतिक पार्टी ऐसे लोगो का समर्थन भी नही करना चाहती जिनसे उनके हितो को ज्यादा हानि पहुचे | श्री टी एन शेषण को राष्ट्र पति न बन्ने देना और पूर्व राष्ट्रपति कलाम के लिए दोबारा राष्ट्रपति बनाये जाने के लिए सहमती न बनना , इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रपति बनाये जाने के पीछे कुछ न कुछ तथ्य जरुर है | इन सब से इतर सब से महत्व पूर्ण बात यह है कि वर्तमान में किस तरह के व्यक्ति को राष्ट्रपति के पद के योग्य माना जाये | इस मुद्दे पर वैसे तो जनता की राय पूरी तरह बेमानी है क्योकि राष्ट्रपति के चुनाव में जनता का कोई सहयोग नही होता और उनके द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि भी व्यक्तिगत निर्णय नही ले सकते है क्योकि राष्ट्रपति का उम्मीदवार सामूहिक होता है और उसी से परिणाम निकलता है | इतिहास गवाह है कि सत्ता चलने का काम प्रधानमंत्री का ही रहा है फिर चाहे वह भारत का पूर्व प्रधान मंत्री चाणक्य ( चन्द्र गुप्त का प्रधान मंत्री ) रहा हो या फिर भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह | पहले राजा था और अब राष्ट्र पति पर तब राजा ही सब कुछ था और आज राष्ट्रपति कागज पर सब कुछ है लेकिन व्यवहार में प्रधानमंत्री सब कुछ है | हस्तिना पुर के राजा ध्र्षराष्ट्र की तरह ही राष्ट्रपति का कार्य है जो भीष्म पितामह पर आश्रित है यानि उस समय भी भीष्म पितामह को एक राजनैतिक प्रष्ट भूमि वाले व्यक्ति के लिए काम करना था | अकबर के लिए बैरम खान था पर अकबर को सारी राजनैतिक दाव पेंच की जानकारी थी तभी तो वह बैरम खान के भी मंसूबो को जान सके | चन्द्र गुप्त खुद एक बेहतर सोच वाला राजनैतिक था तभी चाणक्य एक बेहतर राष्ट्र चला पाया | एक कहावत है देवो भूत्वा देवो अजयेते \ यानि देवता बन कर ही देवता को प्राप्त किया जा सकता है | और पीर भारत में तो परम्पर रही है कि जो जिस विषय में पारंगत है वह उसी में प्रवक्ता बन सकता है क्योकि यह यह मान्यता कि बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद या फिर इसे आप और बेहतर से यह कहकर समझ सकते है कि बन्दर के हाथ में उस्तरा | अमेरिका में एक एक सामन्य व्यक्ति जूरी व्यवस्था में न्याय कर सकता है पर भारत में तो एक विशेज्ञ ही न्याय कर सकता है एक शिक्षक को न्याय करने के योग्य माना जाता है | इस लिए यह सोचना कठिन है कि भारत में राष्ट्रपति वह बने जो राजनैतिक प्रष्ट भूमि का न हो | राष्ट्रपति तो एक किसान को बनाना चाहिए जो अँधेरे , बिजली, मसुं , पानी , सड़क , शिक्षा , बीमारी , का मतलब जनता है , कम से कम जब कौन अंतिम हस्ताक्षर के लिए उसके पास आएगा तो वह आने दर्द को देख तो लेगा कि वह सब कानून में है कि नही और कम से कम एक बार तो वापस कर ही सकता है और अमरे देश में साक्षर तो बढ़े ही है यानि हस्ताक्षर करना टी उसे आताही होगा क्योकि इस से ज्यादा का काम उसे रहता नही , पञ्च साल में वह मृत्यु दंड पाए लोगो कि फाइल तक तो निपटा नही पाता, ऐसे में उसके पास का काम है और उस स्थिति में भारत के आम नागरिक पर विचार किया जा सकता है और उसका राजनीती से कुछ लेना देना ही नही होता पर अगर आप एक समृद्ध भारत के आईने में इस प्रश्न को पूछ रहे है तो अखिल भारतीय अधिकार संगठन ऊपर के तथ्यों के प्रकाश में यही कह सकता है कि जस जेके महतारी बाप तस तैके लड़का , और जस जेके घर द्वार , तस तैके फरका यानि जब राष्ट्रपति सम्पूर्ण राष्ट्र का प्रथम व्यक्ति ही नही उसका प्रतिबिम्ब है तो हमें ऐसे व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए जो जानकर हो , ऐसे तो भारत में हर व्यक्ति डॉक्टर है पर क्या हम उसके इलाज पर भरोसा कर पाते है क्या वह हमारे को बीमारी का प्रमाण पत्र दे सकता है और उसे सर्कार मानती है ? नही ना तो फिर क्यों ना एक ऐसा व्यक्ति राष्ट्रपति बने तो संविधान का ज्ञाता हो और जिसने काफ लम्बा राजनैतिक अनुभव रखा हो ताकि वह भारत को अच्छी तरह समझ सके और भारत में कानून के कूड़े के ढेर को हस्ताक्षर करते समय एक सही आइना दिखा सके ताकि वह देश में बाबू बनने के बजाये सही अर्थो में राष्ट्र पति कहलाये …..डॉ अलोक चांटिया, अखिल भारतीय अधिकार संगठन




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