Hindi Blogs, Best Indian Blog

जागरण जंक्शन फोरम

देश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

46 Posts

1,650 comments

कितना प्रासंगिक है राजनीति में जातिवाद?

पोस्टेड ओन: 23 Jan, 2012 Junction Forum में

राजनीति में जातिवाद का दखल वैसे तो कोई नई बात नहीं है और प्रायः सभी दल पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपने-अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए इस सशक्त हथियार का इस्तेमाल करते रहे हैं। किंतु फरवरी-मार्च 2012 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एक बार फिर से जाति का मुद्दा अपने चरम पर है। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल सहित सभी छोटी-बड़ी पार्टियां अपने-अपने जातीय समीकरण दुरूस्त कर रही हैं। लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर कोई भी दल ये स्वीकार करने की हिम्मत नहीं कर रहा है कि उसने ऐसा अपना वोट बैंक बढ़ाने की खातिर किया है बल्कि सभी का ये कहना है कि उन्होंने केवल समाज के सभी समुदायों/वर्गों के उचित प्रतिनिधित्व का ख्याल रखा है ताकि कोई भी उपेक्षित ना रह जाए।


चुनाव व राजनीति में जाति के दखल की उपयुक्तता और औचित्य पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। इस बार भी इस मुद्दे पर पक्ष व विपक्ष में अनेक बातें कही जा रही हैं। कुछ बुद्धिजीवी व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि चुनावों में जाति के आधार पर टिकटों का बंटवारा करने से समाज में संतुलन कायम होता है। ये एक प्रकार की सोशल इंजीनियरिंग है जिससे असमानता की खाई को पाटने में सहायता मिलती है।


वहीं दूसरी ओर चुनावों में जातिवाद के प्रयोग की भारी निंदा करने वाला पक्ष भी मौजूद है। चुनाव में जातिगत आधार पर निर्णय लेने के विरोधियों का मानना है कि ऐसा करना देश की सामाजिक समरसता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। जातिवाद के कारण देश में विघटन और परिणामस्वरूप गृहयुद्ध की संभावना पैदा होती है। इनका मानना है कि यदि चुनाव के दौरान जातिगत आधार पर फैसले लिए जाएंगे तो अयोग्य उम्मीदवारों के चयन की आशंका बढ़ जाती है। केवल जातीय प्रमुखों, बाहुबलियों के चुन कर आने की प्रत्याशा होती है जो अंतिम रूप से किसी के भी हित में नहीं होता है। जातीय आधार पर निर्वाचित सदस्य केवल इस आधार पर अपनी पार्टी को ब्लैकमेल करने की स्थिति में होते हैं कि उनके पास अमुक जाति के मतों की लामबंदी है।


उपरोक्त आधार पर कुछ ऐसे जरूरी सवाल उत्पन्न होते हैं जिन पर चर्चा किया जाना बेहद आवश्यक है, जैसे:


1. क्या राजनैतिक दल सामाजिक समानता और समरसता में वृद्धि के लिए टिकट बंटवारे के समय जातीय गणित का ध्यान रखते हैं?

2. क्या राजनीति में जातीय आधार पर फैसले लेने से असमानता की खाई पाटी जा सकती है?

3. क्या जातीय आधार पर टिकट वितरण से अयोग्य लोगों के चुने जाने की संभावना बढ़ जाती है?

4. राजनीति में जातिवाद की प्रासंगिकता कितनी है?

5. क्या इससे देश में विभेदकारी परिस्थितियां जन्म लेती हैं?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


कितना प्रासंगिक है राजनीति में जातिवाद?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “राजनीति में जातिवाद” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व राजनीति में जातिवाद Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें।

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 4.57 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ramashishkumar के द्वारा
January 26, 2012

“Jagran Junction Forum” जाती के अधर पर टिकेट वितरित करने से देश की दशा को सुधार नहीं जा सकता है बल्कि इससे लोगो में और दुरी बढेगी इससे उच्च नीच का भेद भाव उत्त्पन्न लो जायेगा लोग एक दुसरे की हित के बजाये अपनी जाती का भला करना ज्यादा उचित सम्जेगे वैसे भी अमरे देश में सब जाती के ही अधर पर होता है इससे और बढ जायेगा जाती और भरम के ठीकेदारो को बढावा मिलेगा हमारे देश में सभी राज
नितिक दल जाती धरम के अधर पर ज्यादा टिकेट देते है और अपने रिश्ते को भी जयादा महत्व देते है इस में कोई नयी बात नहीं है ये सभी लोग जानते है अगर कोई राजनितिक अपने जाट से भिन्न लोगो को टिकेट देता भी है तो जो बाहुबल होता है उसी को टिकेट देते है जिसे लोग गुंडा और बदमास के नाम से लोग जानते है इस देश में इन्ही का तो राज है.रही बात राजनीती में जाती के अधर पर फैसले लेने की तो,इसमे मेरा मानना है की किसी भी राजनितिक काम में जाती के अधर पर फैसला लेने या देने से असमान की खायी कम नहीं होगी बल्कि और बढेगी इससे जाती को देख कर कम करने वालो में और इजाफा होगा. मै एक गरीब परिवार से हूँ मैंने सब नजदीक से देखा है . मै ये देखता हूँ की किसी भी ऑफिस में अगर ऑफिस के कर्मचारी ये जन लदे है की ये छोटी जाती का है तो जल्दी कम भी नहीं करते है परेसान भी करते है और वाही कोई बड़ी जाट का लोग आ जाते है तो उसका कम पहले है कर दिया जाता है. गरीब आदमी का इस देश में कोई भी इज्जत नहीं है.

dhananjaynautiyal के द्वारा
January 26, 2012

1. क्या राजनैतिक दल सामाजिक समानता और समरसता में वृद्धि के लिए टिकट बंटवारे के समय जातीय गणित का ध्यान रखते हैं?

2. क्या राजनीति में जातीय आधार पर फैसले लेने से असमानता की खाई पाटी जा सकती है?

3. क्या जातीय आधार पर टिकट वितरण से अयोग्य लोगों के चुने जाने की संभावना बढ़ जाती है?

4. राजनीति में जातिवाद की प्रासंगिकता कितनी है?

5. क्या इससे देश में विभेदकारी परिस्थितियां जन्म लेती हैं?
** संवैधानिक धारा के विपरीत यह परिपाटी ठीक नहीं| इस से सामाजिक समानता और समरसता तो नहीं बढ़ती बल्कि वैमनस्यता , खटास और बढ़ जाती है | संविधान जिस दिशा में संकेत करता है यह एकदम उस से विपरीत सोच का कार्य है | और दुर्भाग्य है की राजनीतिक दल इस से परे नहीं हो पाते हैं | टिकेट बातवारे राजनीतिक दल योग्यता अथवा योग्यता का ख़याल नहीं करते | यदि वे ऐसा ख़याल रखते तो विधान सभाओं में , संसद में अनेक अयोग्य लोगों के महानुभाव बन जाने की बातें सामने नहीं आती | राजनीतिक दल “जीत” लेने वाले का आकलन कर टिकेट देते हैं | कई बार सिर्फ समीकरण देख कर टिकेट थमा दिया जाता है और कई योग्यताएं चुनाव जीत लेने के बाद स्पष्ट होती हैं | अतः जातीय आधार पर टिकेट वितरण का योग्यता और योग्यता से कोई लेना देना नहीं है |
निश्चित ही वर्गों को आधार बना कर चुनाव में हिस्सेदारी करना उस लोकतंत्रात्मक सोच से मेल नहीं खाता जिस सोच के लिए यह लोकतांत्रिक प्रणाली अपनाई गयी |

    shahab के द्वारा
    January 27, 2012

    This [ castiesm]is another policy version synonmous to ”DIVIDE AND RULE” which was earlier adopted by englishmen in preindependence India and in post independence all political parties have been adopting it as sole criteria in elections another bad face is political paries donot hesitate to field criminal background candidate ,In election reforms efforts may kindly be made to How to check such bad practics from indian politics

s.c.khattri के द्वारा
January 26, 2012

the overall fact remains incontrovertible that candidates opting for the seats in the elections are primarily driven by their natural instincts to win , by hook or crook and the logical consequence is sam. daam. dand aur bhed, which is prime mover, either casteism, reservation and muslim appeasement, whatsoever, the helping hand comes to their rescue /

suresh chandra khattri, jankipuram, lucknow
26-01-2012

durgesh nandan के द्वारा
January 24, 2012

बोली – व्यवहार ,आचरण – संस्कार
रीत – रिवाज़ ,सुर और साज़
अधिकार फ़रियाद
सुनता देश ..

अपना माह्णु , अपना राज़
अपनी बोली  ,अपना साज़
अपनी जेब , अपनी बात
अपनी जात ,,अपनी पात
चुनता देश …….

raman के द्वारा
January 24, 2012

yeh lekh jativad per ek prasangik bahas ko janma deta hai.aur jati ke naam per ho rahi chudra rajniti per ak prahar hai.

    SUBHASH NAMDEV के द्वारा
    January 25, 2012

    SUGGESSTIONS

    1. CORRUPTION IS CANCER ELIMINATES IT FROM INDIA.
    2. ORGANIC FARMING
    • An agency is required for the scientific validation and certification of organic produce to be set up.
    • Diploma courses in organic agriculture to be introduced in the farm universities.
    • Farmers should not be allowed to switch over to organic farming one on go.
    • They should encourage to substitute chemical fertilizers with organic manure in a phased manner for improve the fertility of the soil.
    3. SECURITY NOT TO THE POLITICAL LEADERS BUT TO THE COMMON MAN
    4. IMPROVE THE PUBLIC TRANSPORT SYSTEM
    5. RESOLVE THE ALL TYPES OF POLLUTION PROBLEMS (NOT ONLY FOR MEN BUT ALSO FOR ANIMALS AND BIRDS) WE ALSO ARE REQUIRED NEAT AND CLEAN ENVIRONMENT).
    6. GOOD AND CHEAP EDUCATION TO THE POOR PEOPLE. WE NEED TWO LACS NEW SCHOOLS, 50000 NEW COLLEGES AND ONE THOUSAND NEW UNIVERSITIES IN INDIA FOR PROFESSIONAL AND GOOD EDUCATION.
    7. TRY TO END DRUG MENACE.
    8. GOOD AND CHEAP HOSPITAL FACILITIES TO COMMON MAN.
    9. REDUCE THE PRICES OF ALL GOODS, COMMODITIES AND PETROLEUM GOODS.
    10. REDUCE THE RATE OF TAXES ON ALL GOODS AND DON’E SPARE ANYBODY OR GOODS FROM TAXES.
    11. LAW AND ORDER SITUATION
    12. RESOLVE PROBLEMS OF THE SMALL FARMERS, COMMON MAN AND GOVT/PVT EMPLOYEES.
    13. STOP RECRUITMENT OF RETIRED OFFICIALS/OFFICERS.
    14. PROMISES AT THE TIME OF ELECTION SHOULD BE FULFIILED.
    15. IMPROVE ELECTRICITY SUPPY IN THE STATE.
    16. THE TRIBUNE DATED 24.11.2011 ADVERTISEMENT “THE CONGRESS GOVT WILL ENSURE A PROSPEROUS & PROGRESSIVE PUNJAB WHERE ASPIRATIONS OF ALL THE SECTIONS OF SOCIETY ARE MET WITH. CAPT AMRINDER SINGH AT RAJA SANSI. ANOTHER REPORT TOTAL PROMISES MADE BY THE SAD-BJP ALLIANCE. COMPLETE ONLY FIVE. WHO IS RIGHT RULING PARTY OR OPPOSITION?
    17. JUSTICE DELAYED JUSTICE DENIED. IMPROVE THE SYSTEM OF JUDICIARY.
    18. ASSETS OF ALL OFFICIALS/OFFICERS AND MLA MPS TO BE PROBED.
    19. USE SOCIAL MEDIA TO HELP e-GOVERNANCE.
    20. REVOLUTION OF AGRICULTURE AND INDUSTRY.
    21. REDUCE THE EXPENSES AND GROW THE SOURCE OF INCOME
    22. DO SOMETHING FOR UNEMPLOYED CITIZENS
    23. THOSE PROMISES MADE IN MANIFESTO COULD NOT BE FULFILLED; SUCH PARTIES MAY BE PUNISHED AND BANNED.
    24. ONLY EDUCATED PERSOSNS SHOULD BE GIVEN THE TICKETS AND ALLOW BY THE ELECTION COMMISSION. THERE SHOULDE ONE ENTERANCE TEST AND MINIMUM QUALIFICATIONS FOR THE LEADERS WHO WANT TO ELECT.
    25. GIVE RATION TO THE BPL AND APL FAMILIES LIKE IN HARYANA.
    26. DON’T GIVE THE FACILITIES TO THE ST/SC FAMILIES ONLY GIVE THE SAME TO THE OTHER PEOPLE OF PUNJAB.
    27. LISTEN THE PROBLEMS OF THE COMMON MAN. THERE SHOULD BE A PUBLIC GRIEVANCES REDRESSAL SYSTEM.
    28. MP/MLAs SHOULD DECLARE THE ASSETS OF THEIR AND THEIR FAMILIES MEMBERS.
    29. HOW MANY HELP HAS GIVEN TO THE PUNJAB BY THE CENTRE AND HOW MANY HAVE BEEN BY THE STATE GOVT AND HOW MANY ARE PENDING. WHY TELL THE REASON TO THE VOTERS.
    30. CLEAR THE POSITION ON FDI.
    31. FARMERS INTEREST BY THE GOVT ABOUT THEIR HARVEST (WJEAT, PADDY, VEGETABLE AND FRUITS ETC). GIVE ATTENTION TO THE MARKETING.
    32. RO SYSTEM IN ALL LOCALTIES/RESIDENTIAL AREAS.
    33. WHEN WE SECULAR THEN WHY RESERVATION IN ELECTION AND GOVT SERVICES.
    34. POLITIC SHOULD NOT A FAMILY BUSINESS.
    35. DON’T BE POLITICISED THE PEOPLE.
    36. WE ARE ALL CORRUPTED BECAUSE THE SYSTEM IS LIKE CORRUPTION. ELIMINATE THE CORRUPTION
    37. ALL THE OFFICERS ARE THE FOLLOWERS OF THE POLITICAL PARTIES, AFTER THAT THEY ALSO BECOME THE PART OF POLITICAL PARTIES.
    38. INQUIRIES OF BENAMI LAND OF OFFICERS AND POLITICAL LEADERS.
    39. NO WORK NO PAY TO THE MPs/MLAs IF THEY DO NOT JOIN THE SESSIONS AND DO NOT WORK IN ANY SESSION.
    40. THIRTY THOUSAND PAK HINDUS ARE WAITING FOR INDIAN CITIZENSHIP AND WE ARE GIVING THE RESERVATION TO THE MUSLIMS.
    41. THERE SHOULD BE FIR IN THE POLICE STATION ON PHONE OR BY EMAIL.
    42. POLITICAL CORRUPTION SHOULD BE STOPPED.
    43. Recently Supreme Court bench has remarked on food for work scheme that we feel sick whenever we come across such news. Where is the nation going? All malpractices by middlemen and govt officials in pro-poor schemes should stop and the entire benefit should go to the targeted sections of society.
    44. SECRECY SHOULD BE MAINTAINED BY THE MLA/MPs.
    45. STOP BLACKMAILING BY THE SUPPORTIES PARTIES.
    46. STOP NOTE FOR VOTE.
    47. SCREEN AND SOUND SYSTEM NETWORK IN ASSEMBLIES/PARLIAMENT.
    48. STOP RESERVATION: THERE ARE 100 UNEMPLOYED 10 POSTS ARE THERE 90 WILL REMAIN UNEMPLOYED. DO SOMETHING FOR 90 UNEMPLOYED. NOT BE FOOL TO THE PUBLIC BY RESERVATION.
    49. PROMOTE AGRICULTURE BASED INDUSTRY.
    50. THINK TO IMPLEMENT FDI IN RETAIL.
    51. REDUCE HOLIDAYS/LEAVES OF THE GOVT OFFICES/EMPLOYEES. COMPARE WITH THE PRIVATE EMPLOYEES. TRY TO EQUAL THEIR WAGES AND HOLIDAYS.
    52. DISCRIMATION AGAINST CITIZENS MUST BE STOPPED.
    53. FREE ELECTRICITY BANKRUPTING POWER CORPORATION. STOP THIS PRACTICE. MONEY/TAXES/LEVIES ARE ESSENTIAL FOR GROWTH AND DEVELOPMENT OF PUNJAB.
    54. PRE-POLL SOPS – PUNJAB CAN ILL-AFFORD THEM. COMPETITIVE POPULISM AND POLITICAL PROFLIGACY HAVE FINANCIALLY RUINED THE STATE AND DECELERATED IT’S OVER ALL GROWTH. BE A GOOD POLITICAL PARTY IN THE INSTEREST OF PUBLIC.
    55. WHERE IS THE 500 CRORE SPECIAL FUND OF THE HEALTH OF THE PEOPLE?
    56. BETTER HEALTH SERVICES TO THE POOR & OTHER PUBLIC.
    57. WHETHER THE WORK IS DONE BY THE STATE OR CENTRE GOVT, AKALI SAD OR BY THE CONGRESS THE WORK HAS BEEN DONE WITH THE PUBLIC MONEY. IT IS THE DUTY OF POLITICAL LEADERS.
    58. WHERE IS CARGO CENTRE FOR VEGETABLES AND FRUITS? (FIVE PACK HOUSE AND PERMANENT PARIABLE CARGO CENTRE AT RAJASANSI INTERNATIONAL AIRPORT AMRITSAR).
    59. PROBLEM OF SEM (AGRICULTURE PROBLEM).
    60. POWERS TO THE VIGILANCE BUREAU. AT PRESENT GOVT HAS REDUCED THE POWERS AND THE CASE IS PENING IN PB HRY HIGH COURT CHD.
    61. POLITICAL PARTIES SHOULD BE GIVEN THE TICKETS TO THE CORRUPT/CRIMINAL LEADERS.
    62. WHERE IS DEDICATED FREIGHT CORRIDOR (KOLKATTA TO LUDHIANA).
    63. EVERY POLITICAL PARTY SHOULD PUBLISH THE REPORT CARD OF HIS PARTY/MP/MLA/MC.
    64. REPLACE THE STRUCTURE OF INFRASTRUCTURE.
    65. FARMERS NEED HIGH TECH REVOLUTION IN AGRICULTURE.
    66. WHERE IS SUTLEJ ACTION PLAN?
    67. ELECTROL REFORMS, STOP FALSE PROMISES WHICH CAN NOT BE COMPLETED BY THE PARTIES
    68. CHEAP HOUSING/SHOPS FOR POOR
    69. EDUCATIONAL REFORMS
    70. RESPONSIBILITY OF GOVT EMPLOYEES/OFFICERS
    71. END RESERVATION. CREAT JOBS AND SELF EMPLOYMENT
    72. ADMINISTRATIVE REFORMS
    73. PUBLIC GRIEVANCE REDRESSAL SYSTEM
    74. POLICY ON SOLAR AND WIND ENERGY NOT ON NUCEALER. CHERONIBLE (RUSSIA), JAPAN AND NOW WE RE PREPARING OURSELVES FOR JAITAPUR PLANT RATNAGIRI. MAKE CFL COMPULSORY IN HOMES AND INDUSTRY. MAKE SOLAR ENERGY COMPULSORY FOR INDUSTRY.
    75. TO PROMOTE SOLAR ENERGY ALL THE MUNICIPAL CORPORATION/COMMITTEES AND NOTIFIED AREA COMMITTEES SHOULD MAKE SOME CHANGES IN THE BUILDING BYELAWS, WHICH MAKES MANADATORY FOR BIG COMMERCIAL BUILDINGS/FACTORIES/MALLS ETC TO USE THIS ENERGY SOURCE IN THEIR PREMISES.
    76. WATER MANAGEMENT: WATER SAV ING PROJECTS. MANUFACTURING OF WATER SAVING PRODUCTS.
    77. NEED BASED AGRICULTURE PRODUCTION.
    78. POLICIES AND STEPS SHOULD BE TAKEN SO THAT COUNTRY SHOULD MARCH TOWARDS SELF RELIANT IN ALL FIELDS.
    79. INDIA WANTS STRUCTURAL REFORMS.
    80. CIRCULATE THE FORMULA TO THE POOR/AAM ADMI BY WHICH THE POLITICIANS GOT RICH IN THE FEW DAYS, SO THAT THERE WILL BE NO POOR IN THE COUNTRY.
    81. NOT ONLY FARMERS, THINK FOR ALL CITIZENS OF INDIA.
    82. DON’T NOMINATE RICH PEOPLE FOR PARLIAMENT, BUT ALSO TO THE POORS OR THOSE WHO ARE THINKING FOR POORS/AAM ADMI.
    83. THERE SHOULD BE NO COLONY BECAUSE THE CULTIVATION LAND IS REDUCING. ONLY FLAT CULTURE SHOULD BE DEVELOPED.
    84. BANJAR LAND SHOULD BE DEVELOPED FOR INDUSTRY. AGRICULTURAL LAND SHOULD NOT BE USED FOR HOUSING OR ANY OTHER PURPOSE.
    85. SAFE FOOD GRAIN STORAGE.
    86. YOGA BE MADE MANDATORY FOR SCHOOL CHILDREN, IT WILL HELP TO INCREASE THEIR IQ AND KEEP AGRESSION DOWN; TOBACCO AND WINE GENERATES REVENUE BUT BRINGS ILL HEALTH SO BAN IT; LOTTERY/GAMBLING MAY ALSO BAN. SPEED CHECK ON THE HIGHWAYS TO BRING DOWN UNNECCESSARY DEATH AND MISERY.
    87. RTI ACT AND RTS ACT SHOULD BE TAUGHT IN SCHOOLS AND COLLEGES AS A COMPULSORY SUBJECT.
    88. SOCIAL SECURITY FUNDS SHOULD REACH TO THE POOR/AAM ADAMI.
    89. TO SAVE PETROL “ONE MAN ONE CAR FOR ALL MINISTERS/VIPs”.
    90. LAW MAKERS (MP/MLAs) SHOULD BE MINIMUM GRADUATES. IF THE GOV T IS APPOINTING A CLERK HE SHOULD BE MINIMUM GRADUATE.
    91. ALL THE PVT AND GOVT SCHOOL, COLLEGES SHOULD RUN IN DOUBLE SHIFTS.
    92. STOP THE USE OF DOMESTIC CYLINDERS AS COMMERCIAL USE.
    93. THERE SHOULD BE TIME BOUND PUBLIC GRIEVANCES REDRESSAL SYSTEM IN EACH DISTRICT.
    94. INSTAL AND CONNECT PURIFIER/RO SYSTEM WITH THE MCL WATER TANK IN THE ENTIRE WATER TANK SITUATED IN THE LOCALITY.
    95. PROMOTE NUTRITION SECURITY IN THE COUNTRY. (ANY DEFIENCIES, EXCESSES OR IMBALANCES IN THE FOOD INGREDIENTS, CAN PRODUCE NEGATIVE IMPACTS ON THE BODY’S FUNCTION).
    96. ROAD SAFETY: THERE SHOULD BE A ROAD SAFETY AUTHORITY OF INDIA.
    97. CANCER IN PUNJAB WHO WILL CARE.
    98. THERE SHOULD BE LAW ON MANIFESTO. TAKE ACTION AGAINST THE HOLLOW PROMISES OF THE POLITICAL PARTIES.
    99. CORRUPTION, UNEMPLOYMENT AND POVERTY IS THE MAIN PROBLEMS OF THE WORLD. DO SOMETHING IN THIS MATTER.
    100. BAN THE CHINESE DORE FOR KITES.
    101. ONLY TWO POLITICAL PARTIES IN THE COUNTRY.
    102. UNHEALTHY POLITICS IS SPOILING THE DEMOCRATIC SYSTEM. THE DEMOCRATIC SYSTEM HAS BEEN DAMAGED BY THE ELECTION SYSTEM WHICH HAS COME TO DEPEND ON MONEY POWER, LIES AND FALSE PROMISES THAT HELP MISLEAD ILLITERATE AND POOR VOTERS.
    103. ELECTIONS FROM STATE FUNDING.
    104. SWAMI RAMDEV: THREE DEMANDS IN NATIONAL INTEREST 1. THE NATION MUST GET BACK 400 LAC CRORE OF BLACK MONEY, WHICH IS NATIONAL PROPERTY. 2. LEGISLATION OF POWERFUL LOKPAL FOR COMPLETE ELIMINATION OF THE CORRUPTION. 3. THE FOREIGN GOVERNING SYSTEM (BRITISH RULE) RUNNING IN INDEPENDENT BHARAT MUST BE STOPPED SO THAT EVERYONE CAN GET ECONOMICAL AND SOCIAL JUSTICE.
    105. LUDHIANA TRIBUNE DATED 21.01.12: MIGRANTS TO CAST VOTE IN ONE STATE: DEO RAHUL TEWARI STRESSED THAT MIGRANTS, WHO HAVE GOT THEIR VOTEE CARDS IN TWO STATES MUST ONLY CAST THEIR VOTE AT ONE PLACE (STATE). “IT IS A CRIME TO CAST A VOTE AT TWO PLACES. IF FOUND GUILTY, CRIMINAL ACTION WILL PROMPTLY BE TAKEN AGAINST THE PERSON. HE SAID. THERE SHOULD BE ONE SYSTEM TO CHECK THE DOUBLE VOTER CARDS IN INDIA. ONE MAN SHOULD HAVE ONLY ONE VOTER CARD. WHO WILL CHECK?
    106. THE TRIBUNE DATED 21.01.12: PUNJAB POLITICIANS FOCUS ON ASSET BUILDING, SAYS STUDY. OF THE 77 RE-CONTESTING MLAs, 18 FACING CRIMINAL CASES. WHO WILL CHECK? IS MLA A ASSETS MAKING MACHINE?
    107. NO CANDIDATE IN THIS ELECTION HAS INFORMED HIS ADDRESS (OFFICE AND RESIDENCE), PHONE NO., EMAIL ID. WHERE THE VOTER WILL CONTACT AFTER HIS ELECTION AS MLA?
    ADV SUBHASH NAMDEV
    J-558/64, BRS NAGAR, LUDHIANA-141012
    9815752944 EMAIL: subhashnamdev@gmail.com

sumandubey के द्वारा
January 23, 2012

जाती के आधार पर चुनाव लड़ना देश का दुर्भाग्य जैसा है पर समाज की सच्ची तस्वीर यही है बाते सभी सुधार की करते है पर जब वोट की बारी आती है तो जाती के आधार पर मत डालते है .

    DR,P. N. AWASTHI के द्वारा
    January 26, 2012

    AT LEAST EDUCATED PEOPLE SHOULD THINK OF IT. VOTING SHOULD BE ON THE BASIS OF ABILITY OF THE PERSON AND MERIT OF PARTY.

ABHI के द्वारा
January 23, 2012

सत्ता के लिए आदि काल से युद्ध होते रहे है, पहले शास्त्र युद्ध होते थे आज पत्र (बैलेट) युद्ध होता है, और युद्ध का लक्ष्य विजय के अतिरिक्त कुछ नहीं होता, क्या आज तक एक भी ऐसा युद्ध हुआ है जिसमे एक पक्ष युद्ध विजय के लिए नहीं लड़ा हो, अब विजय के लिए एक विजय श्री प्रदान करने वाली रणनीति की आवश्यकता होती है, और चुनाव में जातिगत आधार पर अपने उम्मीदवार का चयन करना उसी विजय प्राप्ति की रणनीति का एक हिस्सा है,

मैं व्यक्तिगत तौर पर जातिगत आधार पर उम्मीदवार के चयन को गलत नहीं समझता क्यूंकि ये चुनाव सत्ता के लिए सभ्य समाज का युद्ध ही है, और युद्ध का मूल विजय का वरण करना ही होता है|

हमें जरुरत इस बात को देखने की है कि किस तरीके से राजनीति के बड़ते अपराधीकरण को रोके, अगर एक अच्छी छवि का व्यक्ति जातिगत आधार पर चुनाव लड़ता है तो उसे गलत नहीं माना जाना चाहिए, क्यूंकि चुनाव हारने के लिए नहीं जीतने के लिए ही लड़ा जाता है,

महान देशभक्त और क्रन्तिकारी श्री सुभाष चन्द्र बोस ने कहा है कि, ” याद रखिये सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है” मैं उनके इस कथन का अर्थ इस तरीके से समझता हूँ खासतौर पर चुनावी संघर्ष के समय कि किसी भी कारण से राजनीति में बड़ते अपराधीकारण को चाहे हम जातिगत, धार्मिक या किसी अन्य आधार पर अगर हम सहयोग करते है, तो वो हम अपने राष्ट्र के साथ अपराध करते है, पर अगर सभी राजनैतिक दल जातिगत आधार पर चुनाव के उम्मीवार का चयन करते है जो स्वच्छ छवि के व्यक्ति हो तो मुझे नहीं लगता कि उसमे कोई बुराई है,

सबसे बड़ा अपराध तो हम ये करते है कि जानते हुए भी अपराधी लोगो के खिलाफ वोट का प्रयोग नहीं करते, आज देश को बहुत जरुरत है “राईट टू रिजेक्ट” कानून की, और उसके बाद जिम्मेदारी हमारी आती है इस देश से आपराधिक राजनीति को समाप्त करने की. अगर किसी चुनाव क्षेत्र में सबसे ज्यादा मत “रिजेक्ट आल” के लिए होते तो तो उस चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवार को आजीवन चुनाव के अयोग्य घोषित कर दिया जाये तो आगे से धीरे धीरे प्रत्येक राजनैतिक दल भी अच्छे चरित्र के उम्मीदवार का चयन करेंगे, तो जरुरत इस बात कि ज्यादा नहीं कि जातिगत आधार पर उम्मीदवार का चयन क्यूँ होता है, जरुरत है कि एक अपराधी छवि के व्यक्ति को राजनैतिक दल अपना उम्मीदवार क्यूँ बनाते है?

amit के द्वारा
January 23, 2012

राजनीति में जाति का बहुत ही बड़ा दबदबा है. चुनाव प्रचार करने के बहुत सारे मुद्दे में जाति अपना अग्रणी स्थान रखता है. इसके बिना भारत में राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती. आज भारत की आजादी के 60 साल से उपर हो चुके हैं  लेकिन चुनाव प्रचार के तोर तरीके में कोई अमूल चूल परिवर्तन नहीं आया

gourav के द्वारा
January 23, 2012

यही तो हुन्दास्तान की राजनीति का बूरी खासीयत है जहां पार्टिया विकास को छोड जाति को अधार बनाकर चुनाव जीत लेते हैं

    amit pathak के द्वारा
    January 24, 2012

    jati to ham jante bhi nhi the ye kuch samaj ke arajk tatvo ne hame apne fayede ke liye shikha diya…. jiski vajah se aaj hamara pura desh pareshan hai….aur ab netao ne apne vote bank ke liye rajnitik muddA bana liya hai ….

    OnikaSetia के द्वारा
    January 26, 2012

    गौरव जी मैं आपकी बात से इत्तिफाक रखती हूँ ,आप सही कह रहे हैं, अगर हमारे नीता जाती को छोड़ अपनी काबलियत या विकास के आधार पर वोट मांगते या चुनाव लड़ते तो देश कहाँ का कहाँ होता.




  • ज्यादा चर्चित
  • ज्यादा पठित
  • अधि मूल्यित