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माया की माया – नेता खुशहाल, जनता बदहाल !!

Posted On: 1 Aug, 2011 में

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भारत में सबसे अधिक संसदीय और विधानसभाई सीटों के साथ उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है, जिसकी राजनीति में सर्वप्रमुख होने का सपना, हर राजनीतिक दल देखता है ताकि वह देश की केंद्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी जैसे दल निरंतर इसी कोशिश में हैं कि किसी भी तरह वे उत्तर प्रदेश में अपने खोए हुए जनाधार को प्राप्त कर लें. हालांकि हाल के सालों में सत्ता की जंग के मुख्य खिलाड़ी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ही रहे हैं.


उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 में विधान सभा चुनाव होने हैं. फिलहाल यहां मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार चल रही हैं. किंतु चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां करनी शुरू कर दी हैं. राजनीतिक पैंतरेबाजी का दौर जोरों पर है. कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी प्रदेश भ्रमण कर गोलबंदी कर रहे हैं तो सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी फिर सत्तासीन होने के ख्वाब में माया सरकार के विरुद्ध आरोपों की झड़ी लगा रहे हैं. उधर भाजपा उत्तर प्रदेश में वापसी के लिए उमा भारती के सहारे मैदान में उतर रही है.


इन सबके बीच मायावती सरकार के ऊपर कुछ ऐसे आरोप हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता. यदि हम मीडिया की खबरों पर भरोसा करें तो लगता है मानो उत्तर प्रदेश अपराध प्रदेश बन गया है. राज्य में बलात्कार की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से काफी बढ़ोत्तरी हुई है. मासूम बच्चों, स्त्रियों के ऊपर अमानवीय अत्याचार के तमाम मामले सामने आ रहे हैं. नोएडा एक्सटेंशन व एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं के लिए गलत ढंग से भूमि अधिग्रहण के आरोप सरकार पर सवालिया निशान लगा रहे हैं.


विरोधी, माया सरकार पर अपने मंत्रियों व विधायकों को खुली छूट देने का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती प्रदेश में अपना शिकंजा मजबूत करने के लिए तानाशाही रवैये पर उतर चुकी हैं और तमाम तरह की वसूली और भ्रष्टाचार द्वारा अपनी जेब भर रही हैं.


विपक्षियों का मानना है कि मुख्यमंत्री मायावती सर्वजनहिताय और सर्व कल्याण के नाम पर सत्ता में आईं किंतु उनके शासनकाल में प्रदेश में दलितों व पिछड़े तबकों का शोषण बढ़ा, दबंग अधिक मुखर होकर अत्याचार करने लगे, प्रदेश में अपराध का ग्राफ काफी ऊपर चढ़ा हुआ है, भूख, बीमारी, बेकारी जैसी समस्याओं का कोई इलाज नहीं ढूंढ़ा गया बल्कि सुशासन के नाम अराजकता को समर्थन दिया गया.


लेकिन दूसरी तरफ तर्क यह भी हैं कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार मायावती के राज्य में बलात्कार के मामले उनकी पूर्ववर्ती सरकारों से कम हुए हैं. इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश देश के पांच अच्छे राज्यों की सूची में चौथे स्थान पर है. साथ ही मुख्यमंत्री मायावती ने अपराधों में लिप्त पाए जाने पर अपने 12 विधायकों, एक मंत्री और एक सांसद को जेल भिजवा दिया है, जबकि ऐसा इससे पहले किसी अन्य मुख्यमंत्री ने नहीं किया था. लिहाजा उन पर अंगुलियां उठाना गलत है.


इन सबके बीच भुगतना तो जनता को ही है. विपक्षी चाहे जो आरोप लगाएं और मायावती सरकार चाहे जिस तरह उसका प्रतिकार करे, आखिर पिस तो जनता रही है. राजनीतिक दलों की आपसी लड़ाई में बेचारी जनता क्यों मारी जाए!


आखिर क्या है जमीनी असलियत? क्या हैं वे बिंदु जिन पर व्यापक चर्चा कर उत्तर प्रदेश और मायावती सरकार की स्थिति की समीक्षा की जा सकती है ताकि राज्य की तस्वीर थोड़ी साफ हो सके, जैसे किः


1. क्या सचमुच मायावती की सरकार शासन से अपना नियंत्रण खो चुकी है? या यह सिर्फ़ राजनीतिक दुष्प्रचार है?

2. उत्तर प्रदेश में अचानक बलात्कार और अपराध को लेकर इतना शोर क्यों मच रहा है?

3. क्या मुख्यमंत्री मायावती अपने दीर्घकालीन हितों को समझ पाने में अक्षम हैं?

4. कहीं मुख्यमंत्री मायावती को अपने दलित होने का खामियाजा तो नहीं भुगतना पड़ रहा है?

5. क्या उत्तर प्रदेश में वाकई राजनीति को अपराध से अलग रखना नामुमकिन है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से राष्ट्रहित और व्यापक जनहित के इसी मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है. इस बार का मुद्दा है:


माया की मायानेता खुशहाल, जनता बदहाल !!


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं.


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “उत्तर प्रदेश में अत्याचार” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व उत्तर प्रदेश में अत्याचार – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ek Dalit के द्वारा
September 8, 2011

विकिलीक्स ने मायावती का पोल खोल कर रख दिया है | मायावती इस कदर खुन्नस में है की उन्होंने असांजे को दलित विरोधी करार दिया है | असांजे ने शायद ही दलित शब्द सुना हो, यही मंद बुध्ही का परिचय है | अगर कुछ नहीं किया है तो सफाई देने की क्या ज़रुरत है | सरकारी १० लाख रूपए खर्चा करके खाली हवाई जहाज भेजकर मुंबई से संडील आ रहा है, घर पर २ खाना बनाने वाले है ४ उनको supervise करने के लिए ३ खाना चखने के लिए की खाने में ज़हर तो नहीं मिला है, इतने गलत काम किए हैं की डरती हैं, की कोई मार न डाले | जनता के पैसे से ऐश चल रहा है, दलितों को बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है यह दलितों के आँख में ऊँगली डालकर दिखाना चाहिए | वाह – वाह क्या दलित उद्धार हो रहा है | विकिलीक्स ने यह भी कहा है की मायावती दुनिया में सबसे घमंडी औरत हैं और प्रधान मंत्री बनने का ख्वाब देख रही हैं | एक कहावत है “बाप न मारे मेंढकी बेटवा तीरंदाज़” अगली चुनाव में १० से ज्यादा सीट नहीं मिलेगा इस बार प्रदेश में कांग्रेस को जिताना है और राहुल गाँधी को मुख्य मंत्री बनाना है कम से कम पैसों की चोरी तो नहीं होगी |

sarferaz alam के द्वारा
August 28, 2011

बड़े भाई आप सही फरमा रहे है यह पुरानी परंपरा है और इसमें कहीं न कहीं जनता का ही अधिकांश तह दोष है इनको चुनाव के वक्त मेसेज की जरूरत है की वोट देने से पहले यह जरूर सोचो की पिछले पांच वर्ष में हमारे मूल भूत अधिकारों को किसने ठीक तरह से समझा और उसे पूरा करने की जरूरत समझी और मई तो समझता हूँ की अगार सब कुछ इश्वर पर निर्भर है तो वोट देने की ही क्या जरूरत अपनी परिश्रम अपनी रोजी किसी की क्या जरूरत |

Martanday के द्वारा
August 27, 2011

अन्ना हजारे जी के आन्दोलन से मायावती जी की अन्दर जो डर पैदा हुआ है कल वह खुलकर सामने आ ही गया, उन्होंने खिसिया के अन्ना जी को चुनाव लड़कर संसद में आकर लोकपाल बनाने की चुनौती दे डाली और यह बयान दिया की लोकपाल के तहद केवल आला अफसरों को शामिल किया जाए मंत्रिओं को नहीं, क्योंकि सबसे बड़े चोर तो मंत्री ही हैं, अगर वोह इस दाएरे में आ जाते हैं तो सब के सब जेल के सलाखों के पीछे नज़र आएँगे और गलत ढंग से कमाई गई संपत्ति ज़ब्त होगी वह अलग, फिर से अपनी औकात में आ जाएंगे | बहरहाल मायावती जी की हालत पतली है जन लोकपाल के डर से अनाप सनाप बकना शुरू कर दिया हैं | मीडिया पर अन्नाजी अगर पार्टी बनाकर चुनाव लड़ते है उनकी जीत पक्की है और तब जो लोकपाल बिल होगा …..अह हा.. मज़ा आ जाएगा | अगर ऐसा होता है तो मायावती जैसे सारे भ्रष्ट मंत्री संत्री छछूंदर के बिल में घुसे मिलेंगे | वन्दे मातरम

    sarferaz alam के द्वारा
    August 28, 2011

    भाई साहब मै तो यह समझता हूँ की अगर उत्तर प्रदेश में अन्ना जी सिर्फ सिविल सोसाइटी सदस्यता अभियान चला दें और अन्ना जी के साए में कोई भी निर्दल भी चुनाव में खड़ा हो जाये तो श्रीमती मायावती जी की समझ में आजायेगा पार्क बनाने से किसी गरीब के घर में हमेशा चिराग और चूल्हा नहीं जल सकता है

shuklaom के द्वारा
August 15, 2011

मायावती बहन के अन्दर के अहंकार ही तो दलितों वास्तविक शशक्तिकरन की वास्तविकता तो यही है की कुछ काम बहुत ही खूबसूरती से अंजाम दिया है सबसे बड़ी बात तो यह है की आजादी के तथाकथित लोकतान्त्रिक व्यवस्था के अंदर भी दलितों को वोटर बैंक के अतिरिक्त कुछ भी प्रगति की चिंता नहीं की,मीडिया तो हमेशा दलितविरोधी मानसिकता से ग्रसित रहा है यही वजह है कि मीडिया को न तो कभी पसंद आई न भविष्य में ऐसा होगा एक तो वह सव्र्दो का बोलबाला है और दलितों का मीडिया में मात्र २% दलितों का प्रतिनिधत्व है. मायावती ने कैसे और किन हालत में पार्को और मुर्तियो लगवाई उसमे भ्रष्टाचार के विरुध्ध कम और पार्क के औचित्य के लिए अधिक परेशानी पैदा की जो निर्माण और पार्को की स्थापना मायावती द्वारा कराया गया है दिल्ली का मात्र अचरधाम मंदिर से की जा सकती है आजादी कि लड़ाई में मौन्टबटन की बीबी के इश्क और ब्रिटिशसरकार की दलाली करने और आज व्यवस्था को ऐसी सदी-गली और घ्रिदित बना क्र जो मात्र नाखुनो और दातो से बात करने का कार्य जिसने या जिस खंडन ने सबसे अधिक समय तक राज चलाया उनकी स्मृत में कितनी मुर्तिया ,चौराहे,योजनायेहवाई अड्डे स्प्तल,विद्यालय और तमाम तरह के जगहों पर तो किसी ने आपत्ति नहीं उठाई फिर इनलोगों के बोलने का सीधा मतलब यही है कि येलोग दलितविरोधी मानसिकता से पीद्गियो से दलितों की प्रगति होते नहीं देखना चाहते मात्र यही वजह है कि मायावती की पार्टी चुनाव में उतारी उसका वोट प्रतिशत बढ़ता ही जा रहा है उत्तर प्रदेश में न तो कोई हालत ख़राब है और नातो किसी को किसी तरह की परेशानी और जिसे परेशानी है वो वही लोग है जो गद्दी के लिए चिल्ल-पो मचाये है और बहन जी का डंडा कांग्रेसी टाइप चोरो को सही जबाब देना मायावती को खूब अच्छी तरह पता है इसी लिए उन्हें उनकी ओउकत दिखाना जरुरी हो गया है कुछ कार्य तो मायावती जी ने ऐसा किया है जो कोई राजनेता नहीं क्र सका और वह है नौकरशाही की नाक में नकेल डालना अभीभी जब बहन जी समिच्चा मीटिंग होती है तो बड़े-बड़े आइ.ऐ एस. अद्गिकारी भी हनुमान चलिषा यद् करते रहते है. राहुल की तरह विरोध तो पहले अमिताभ बच्चन करते थे और आज सलमान,आमिर और शाहरुख़ जैसे जैसे नौटंकी बाज करते है वही राहुल गाँधी के लिए भी पर्याप्त अवसर है बताइए कि जिस तरह की उल-जलूल भत्ता परसौल में ७४ लोगो की हत्या क्र शव जलाने तथा महिलाओ के साथ बलात्कार का आरोप लगाया जो बाद में महज अफवाह साबित हुई इसके अतिरिक्त अम्बेडकर गावो का विकास तथा भविष्य में आगे की प्रैयोगी परिक्चाओ की कोचिग फूदीन,लोजिग और सुविधा संपन्न व्यवस्था किया उनके समय में कोई उल्लेखनीय दंगे या मानवीय आपदा से भी खूबी से निबटा मुख्य बात यह है कि पुरे हिंदुस्तान में किसी राजनेता की इतनी हैसियत नहीं रही जो अपनी पारी का शत-प्रतिशत वोट जहा कहती है वही पड़ता है,दूसरी सबसे मह्त्व्पुर्द बात है कि मायावती को वोट करने वाले भूमिहीन मजदूर या एक दो एकड़ वाले लोग है और उनलोगों के लिए लिटाना बहन मायावती ने किया कांग्रेस सिर्फ झूठा दिलासा दिलाती रही और दलित्प तथा निम्न वर्ग के लोगो को जानबूझ कर अशिक्चित रख गया कि समझदार होने पर अपने विवेक से मतदान करेगे तो हमें तो कम-से कम नहीं ही करेगे और वही हुआ काशीराम अपने लोगो के साथ जम कर मुहीम चलाई और कांग्रेस को दलितों के वोटो से महरूम कर दिया मायावती अपराधी नहीं है लेकिन जिस व्यवस्था में उन्हें अपनों की लड़ाई लड़ने के लिए लोहे को लोहा कटता है मायावती के पदार्पण से पूर्व ही माफिया लोग सत्ता में आगये या चुनाव जितने हराने के खिलाडी हो चुके थे बहण जी ने तो उन्ही लोगो के जूतों से उन्ही लोगो को पिटवाया खुद में मायावती पुरे देश के पुर्वग्राहित सव्र्दो के निशाने पर है किसी पार्टी का नेता क्यों न हो उसका जैसे राजीतिक रूप से शपथ पात्र भराया जा रहा है कि मायावती को जरुर गरियाएगा नहीं तो कोई दल ऐसा है जो अपनी पार्टी के सांसद को अपनी ही पुलिश से गिरफ्तार कराया झूठे नहीं बहन जी अपने लोगो को कहती rahti है तीन एम् से दूर रहना मीडिया,मसल्सऔर मनी एही लोग बंचितो और हासिए के लोगो में अपने लोगो के विकास से ईर्ष्या करते है भ्रषाचार के लिए मायावती की खिलाफत करने से पहले अपने मुह को काला करने के बाद ही नैतिक रूप से विरोध को मान्यता के लिए विचार करना चाहिए भा.ज.पा.पहले झारखण्ड में पुजीपतियो और मालती नेशनल कंपनियो को गुप्त समझौते कर वह के जंगलो पर कब्ज्जा के लिए हजारो साल से रह रहे आदिवासिओ को जबरदस्ती भगाया जा रहा है कर्णाटक का भ्रष्टाचार करुदानिधि तो सोनिया से हिस्सेदारी कर दौलातो.रुपयों से झोली भर ली अपनी ऑउर अपने अको का पूरा हिसाब-किताब कर दिया ऑउर उन्हें यही परेशानी हो रही है की जब सभी वरिष्ठो को उनकी हैसियत के हिसाब से भुगतान हो गया तो सिर्फ मेरी ही बेटी जेल में क्यों? तमाम शिलाओ./चिदाम्बर्मो को क्यों नहीं जेल में डाला गया चाहे वह देश का युवराज ही क्यों न हो रजा बार-बार सालो से चिल्ला रहा था की इस निर्दय में मनमोहन को जानकारी थी/ इन्सभी पार्टियो का चरित्र ऑउर लोकशाही भ्रष्टाचार काले धन चुनावी चंदा लगाने के बाद भी एक दलित की बेटी छाती पर मुग डाले इन्हें स्वीकार नहीं कुँत्रोची का जूता उठाऊ लोग कैसे भला बर्दास्त कर सकते है जिनके मतों से चुन कर मायावती सत्ता में आई है उनलोगों के लिए ऐतिहासिक कम मायावती का प्रोजेक्ट दलित शाश्क्तिकरण पर सुचार रूप से खूब संतोषजनक तरीके से चल रहा है कुर्सी जिसे व्यंग से सिन्घाशन कहा जाता है ऑउर बड़े-बड़े दबंग माफिया सवर्द सभी को जमीं पर बैठती है तथा हीरे का नेकलेस पहनती है उतना ही दलितों का गर्व से उचा हो जाता है यही वजह है की लोग दलितों को मनुष्य समझाने लगे है. मायावती जो चाहती है उसे जमीं पर उतरने का दम-ख़म भी रखती है. नहीं तो उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की एक-दो नहीं चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी है यही उनकी जिसे विरोधी मायावती की असफलता कहते है वही ये बेचारे सामने लिखी इबादत पढ़ना नहीं चाहते नहीं तो मुलायम भी जानते होगे ऑउर भ.ज.पा के लोग तो कई बार मायावती को समर्थन दे कर ऑउर शामिल होकर अच्चितरह तरह जानते होगे की मायावती कितना जोखिम उठा सकती है यही वजह है की लोग बहुजन समाज पार्टी को आधार बना दर्जनों की संख्या में एक साथ गए लेकिन मायावती की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा मायावती हिंदुस्तान की परिस्थितियो ऑउर उत्तर प्रदेश के हालत के मद्देनजर खूब कम किया है सभी विभाग पूरी चमता से लगे हुए है विरोधियो का विरोध इनके अवचेतन में यह वास्तविकता स्वीकार ही नहीं होने देती की कोई दलित मुख्यमंत्री इतनी दृढ़ता से फालतू विरोधियो को उनके ही तीरों से जख्मी कराती रहती है खुल कर सामने आने की हिम्मत अतीक इलाहाबादी माफिया से पूछिए की ऑउर मफिअगिरी या फिर राज भैया,अखिलेश सिंह जैसे लोगो से पूछिए की आखिर इतनी शांति क्यों है?

    Martanday के द्वारा
    August 25, 2011

    वाह – वाह आपके क्या कहने, लगता है आप ने भी बहती गंगा में हाथ धोया है इसीलिए भ्रष्टों का समर्थन करने में कोई शर्म नहीं है | मरने ने बाद मूर्ति बनती है ज़िंदा लोगों की नहीं, कोई भी एक नेता जिंदा रहते अपनी मूर्ति खुद बनाई हो एक उदाहरण दीजिए, पत्थर के हाथी किस काम आएँगे, आप सैर करेंगे उन पर? टैक्स का पैसा हम दें और उससे हाथी बने एकदम मंज़ूर नहीं है | आंबेडकर पार्क दसबार तोड़कर बनवाया जा रहा है पैसे की बर्बादी नहीं तो और क्या है , हाँ आप जैसे समर्थकों को ज़रूर फायदा हो रहा है | रात – रात भर लाइट जलता रहता है इधर पूरे प्रदेश में बिजली संकट है, गाँव में १० – १० दिन बिजली नहीं आती है, वह क्या विकास हुआ है | इस पार्क के आस पास एक भी दलित दिख जाए पुलिस डंडा मारकर भगा देती है, कितना ख्याल रखा है दलितों का | मुख्य बात यह है दलित – दलित करके और जातिवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है | जब दलितों के उद्धार के लिए बीड़ा उठाया है और उच्च जाती के लोगों के विरुद्ध नारा लगाकर चुनाव जीता था तो अब उच्च जाती के लोगों को अपने पार्टी में क्यों शामिल होने दिया ? अब मुसलामानों के तलुवे चाटना शुरू कर दिया है जिससे मुख्य मंत्री के कुर्सी पर बैठ कर मौज किया जा सके | अपने ऐश और जन्मदिन के वास्ते पैसे के लिए इतना बड़ा मुह फाड़ती है की अफसर कांपते है, जो खुद चोर है वोह क्या सजा देगा भ्रष्टों को, सारे इमानदार और उच्च जाती के अफसर नपते हैं और अगर पैसों का इंतज़ाम न हुआ तो अफसर को जान से हाथ धोना पड़ सकता है यह है उनका administration , इसीलिए सब डरे रहते हैं, बोरा भरकर पैसा दे दो बत्तीसी निकालकर चल देतीं हैं, दलित गया भाड़ में | एक बार गाँव में जाकर देखिए दलितों की कितनी अच्छी हालत है, जो जहाँ था उससे भी बधतर हालत में है, हाँ आप जैसे कुछ मौकापरस्त लोग इसकी आड़ में मौज मार रहे हैं | जिस कांशीराम जी ने बसपा को खड़ा किया था और मायावती को सामने लाए थे उनका क्या हस्र हुआ सब को पता है | पैसे बाँटने से किसी का उद्धार नहीं होता है, अगर दलितों की मसीहा बनती हैं तो अपने नाम से एक ५००० बेडों का अस्पताल खुलवा दें जहाँ दलितों का मुफ्त में इलाज़ हो | एक लाख सीटों का स्कूल और कॉलेज खुलवा दें जहाँ दलितों के बच्चे मुफ्त में पढ़ सकें, ठेंगा, इसमें तो कोई आए नहीं होगा न | मिड डे मिल के नाम पर बच्चों को सड़ी और कीड़ा लगी हुई खिचड़ी मिलती है दलित एकदम धन्य हैं यह खाकर| गाँव के स्कूल में टीचर की जगह चरवाहा बच्चों को हांकते हैं, टीचर तो कहीं शहर में नौकरी कर रहा होता है, यह विकास हुआ है | एक भी बड़ी परियोजना लगी है की बेरोजगारों को रोज़गार मिले ? पहले तो खिचड़ी सरकार थी, अपनी – अपनी ढफली अपना – अपना राग था लेकिन बसपा का तो पूर्ण बहुमत है कोई रोकने वाला नहीं है, क्या हुआ एक बड़ा जीरो | क़ानून व्यवस्था ताक पर है रोज़ समाचार पत्रों में दलितों का बलात्कार, खून होने की खबर आती रहती है (उच्च जाती को तो छोड़ दें ) अगर क़ानून व्यवस्था इतनी अच्छी है तो मुजरिम को सजा क्यों नहीं मिलती है | निठारी हत्याकांड वाला सुरेंदर कोली अभी तक मौज कर रहा है | अगर पता है की रजा भैया, अखिलेश सिंह, अतीक अहमद माफिया हैं तो उनको ख़त्म क्यों नहीं कारवां देतीं नहीं करेंगी, सब मिली भगत है, क्योंकि अगर ऐसा किया तो बाद में बादशाह सिंह, दददन मिश्र, आनंद सेन यादव, जमुना निषाद, शहजिल इस्लाम अंसारी जैसे महान चरित्रवानों का क्या होगा | आपने सही कहा सारे दलित यह देखकर सर ऊंचा कर लेते हैं की कैसे ५६ किलो का केक काटकर और कोरोड़ो की माला पहनकर उनके पेट पर लात मरा जा रहा है | क्या करें बेचारी बचपन में तो दो वक़्त रोटी भी नहीं मिलती थी आज पूरा साम्राज्य मिल गया है ऐश कर लिया जाए दलितों के सर पर भांडा फोड़कर | जनता के पैसे से हीरे का हार पहनने में शर्म भी नहीं आती, हाँ वैसे ठीक है भिखारी को अगर राजगद्दी मिलेगी तो वोह अपने सपने तो पुरे करेगा ही क्या पता कल गद्दी न रहे | पहली चुनाव में भाजपा के तलुवे चाटकर मुख्यमंत्री बनी थी सबको पता है, भाजपा ने ही उनको सपा से बचाया था याद है और भाजपा को कैसा धोखा दिया था बहनजी ने सबको पता है | वैसे आप जैसे लोग जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में कष्ट उठाने वालों और मरने वालों से नहीं मिले वोह क्या समझेंगे की देश क्या होता है | आप जैसे लोग ही इस समाज में अलगाववाद फैलाते है, जाती के नाम पर वोट की राजनीति खूब फल फूल रहा है और मायावती, मुलायम सिंह, राहुल गाँधी, अडवाणी जैसे नेता अपनी रोटी सेंक रहे है और अपने स्विस बैंक खाते में पैसे जमा करते जा रहीं है और आप जैसे लोग उसको उत्साहित कर रहे हैं | दलित होकर दलितों की छाती पर मूंग दल रही हैं आपने यह ठीक कहा है | २०१२ के चुनाव आ रहे हैं देखा जाएगा क्या होता है | भगवान् करे की जन लोकपाल बिल जल्दी से जल्दी आ जाए और उसमे भ्रष्टों की सजा पुरे कुनबे को फांसी और उनकी सारी संपत्ति कुर्क होने की हो तब मजा आएगा | वन्दे मातरम

    Chiraunji Lal के द्वारा
    August 27, 2011

    अगर आप यह सोच रहे है दलित – दलित करने से ही दलितों का उद्धार होगा और मायावती के अहंकार से सब उच्च जाती के लोग दब जाएंगे तो आप बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं | जो गलत कदम मायावती जी ने उठाएं और उठा रहीं है आगे चलकर उन और दलितों पर कहर ढाएगा | जो हरिजन एक्ट उन्होंने लगा रक्खा है सरकार बदलते ही समाप्त, क्योंकि जब लालू के बिहार और सीपीएम के बंगाल में बदलाव आ सकता है तो यूपी में भी कभी न कभी आएगा तब सारे हिसाब चुकता किए जाएंगे | यह सोचकर ही मायावती जी ने उच्च जाती के लोगों के तलुवे चाटकर उनको अपने दल में मिलाना शुरू कर दिया है | मिडिया पर जितना हो सके झूठा प्रचार करवा रहीं है, कुछ भी कर लें इस बार उनकी हार पक्की है | जल्दी से जल्दी एक तगड़ा लोकपाल बिल आए और मायावती जेल की हवा खाएं येही तमन्ना है |

    sarferaz alam के द्वारा
    August 28, 2011

    भाई साहब चुन्नी लाल जी इतने जल उठे है की पढ़ कर रहा नहीं जाता खैर | उन्हें तो चुनाव के वक्त बहन जी के भ्रस्ताचारी की सारे हकीकत के पोस्टर बंटवाना चाहेये तभी मजा आयेगा की उन्होंने दलितों गरीबों की कीतनी ख़याल रखा है

    shuklaom के द्वारा
    August 29, 2011

    वह भाई साहब वह आपने अपने अद्ग्गर व्यक्त किये इसी में अपनी लेखनी की सफलता ममता हु आप से मात्र इतना अनुरोध करुगा कि अगर आप २५-३९ साल पहले की अवस्था में जाइये तो आप को महसूस होगा कि वही दलित जो चारपाई छोड़ कर खड़ा हो जाता है आज क्या हालत है जा कर देखे सवर्ड लोग उम्र की लिहाज से खड़े होने मी मजबूरी मायावती और काशी राम के लोगो ने जाग्रति और दलित,पिछाड़ी और इन्ही वर्ग के लोगो की गोलबंदी की और अलग-अलग जातियो का सम्मलेन कर उन्हें संघटित किया और इस तरह एक राजनीतिक लोगो का समूह बना कर चुनाव में बिगुल बजा दिया और अतने कम वक्त में चार बार मुख्य मंत्री पद पर बैठने का रिकार्ड भी बनाया. तो भाई साहब आप कृपया मुर्तियो और पार्को के अतिरिक्त भी बजट अनुदान स्वीकृत होता है और विभ्भिन्न परियोजनाओ का क्रियान्यं होता है यह एक सामान्य प्रक्रिया है और रहा सवाल समाजवादियो का तो मिया भी अवकास पात्र कर्मचारी हु व्यवहारिक रूप में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्त्ता सभी कुछ जबर्दस्ती लूटने के चक्कर में सामान्य रूप से कर्म्चारिप का को कम करना मुस्किल हो जाता था और वही बहुजन समाजवादी पार्टी के कार्यकर्त्ता इस तरह की अनुश्शन हीनता नहीं करते है भाई साहब ठंढे दिमाग से सोचेगे कि हमारी पीढियो ने जो अमानवीय अत्याचार किया है क्या हम इतने निष्ठुर हो गए है कि किसी कीमत पैर किसी दलित को अपने को शाशित नहीं मानती.जब कि सामने लिखी इबादत और एक सदी पहले स्वामी विवेकानंद ने भी भविष्य में साली राज करेगे,जीतनी जल्दी इसे स्वीकार लेगे तमाम तरह के अनावश्य इर्ष्य और इस से उओजे तनाव आपकी मानसिक स्वस्थ के प्रतिकूल पड़ेगा..अभी आपने शयड्स गौर नहीं किया होगा या देखे हुए को मानाने से इंकार कर देगे कि पयूमद विअधेयक के मतदान में मायावती को ही स्नुक्त प्रत्यासी बनाया था कुल का लब्बो-लुबाब यही है कि अपनी इर्ष्या रूपी उर्जा प्रबंधन सम्हाल कर रखिये बहुत मौके आयेगे अभी तो मतावती की शुरुआत है.आप जैसे मानसिकता के लोगो के साथ यही समस्या रहती है कि मायावती दलित हो कर——-बस बाकि अपनी इच्च्चा से हम लोगो को हैसियत कहा से हो गयी अभी तक राष्ट्र पति तक राजशाही में कप पलट धोते-कहा पहुच गयी यह मई नहीं किसी बेचारे मंत्री की जुबान फिसल गयी हलाकि उन महोदय को अंदरूनी बात सार्वजानिक करने के जुर्म में परी और पद चोदना पड़ा.बस वही खानदान का ही कोई सत्ता में रहे,ये लोग कैसे वह जहा टाटा,बिडला,अमबनियो के पोप्रतिधि की कीतिग हीओ रही है वह दो रोटी के मुहताज कैसे दावा क्र सकती है.वैसे आपके सुझाव का मई आदर करता हु इसी तरह का विचारो का आदान-प्रदान होना चाहिए.

    Pandey के द्वारा
    August 30, 2011

    आने वाले विधान सभा चुनाव में सपा को जितवाएंगे, क्योंकि मुलायम सिंह जी ही मायावती के तोड़ है, उनके आते ही मायावती दुम दबाकर भागती नज़र आएंगी | कम से कम रोज़ सुबह पेपर में मनहूस शक्ल तो नहीं दिखाई पड़ेगी | तिलक, तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार,यह नारा लगाकर चुनाव जीता है | अब यही जूता उनके मुह पर इतनी जोर से मारना है सारी ज़िंदगी के लिए मुह बंद हो जाए |

    faaz के द्वारा
    September 26, 2011

    shuklaom ji, hindi to thori sahi likh sakte ho. likhna kya chahte ho wakye kya bana rahe ho? shayad aap maya ji ke anuyai hain? aap shayad unko samjha saken ki garib or pichron ka uddhar unke dawara banye jane wale parkon or murtiyon me nahi, unke liye wastaw me kuch kam karne se hoga. aap educated hain, yeh bat achchi tarah samjhte hain. dhannayawad!

DINESH के द्वारा
August 7, 2011

मुख्यमंत्री मायावती जी ने सत्ता में बने रहने का अधिकार खो दिया. प्रदेश की जनता के लिए कुछ करने की सिवाय उन्होंने लखनऊ में मूर्तियों का निर्माण कराया . अगर उन्होंने ये पैसा प्रदेश की जनता के लिए खर्च किया होता तो आज वो देश के सभी राज्यों की तुलना में सबसे बढ़िया मुख्यमंत्री कहलाती. मुझे तो ये समझ नहीं आता की मुर्तिया आपको क्या देकर जाएँगी. जबकि जनता के लिए अगर आप कुछ करती है तो आप लगातार सत्ता में आएँगी. प्रदेश में अपराध स्टार इतना बढ़ चूका है की अब तो पोलिश भी क्या कर सकती है . अगर कोई पोलिसे स्टेशन जाता है तो वह पे रिपोर्ट नहीं लिखी जाती है. जबकि अगर किसी बिध्यक का दवाब बता है तो तुरंत रिपोर्ट दर्ज की जाती है . बिधायक के किसी सदस्य का किद्नाप हो जाये तो ५-६ घंटे में आरोपी पकड़ में आजाता है. और किसी गरीब का अगर बेटा खो जाता है. तो फेले तो ५०० का चदवा दो फिर रिपोर्ट दर्ज होगी उसके बाद भी पता नहीं की बेटा मिलेगा या नहीं . फिर कहेंगे की इतने दिन बाद आना. इस तरह टहलते रहेंगे . आजकल तो जिला अस्पताल में भी कोई आची खासी सुबिधा नहीं है अगर किसी औरत का बच्चा होने वाला हो तो २ घंटे उसका gat पे इन्तेजार करवाएंगे .

malkeet singh "jeet" के द्वारा
August 6, 2011

माया महां ठगिनी हम जानि…………………………………………………………………….???????????? एक उपलब्धि तो माया राज की है ही ,मनो या न मनो ,राजाओ महाराजो से लेकर महात्मा गाँधी और राहुल गाँधी तक जमाना आ गया देश में सभी धर्म और जातिया रहती थी और आज भी बाकि पूरे देश में रहती होगी लेकिन हमारे उ प्र में तो सिर्फ या “दलित” रह गए है या “दबंग” आपके खेत से कोई फसल चुरा रहा हो आप टोक दो तो आप दबंग ,कोई पी कर आपको गालिया दे आपने जवाब दे दिया तो आप दबंग आपने (दुकानदार ) अपने सौदे के पैसे मांग लिए तो आप दबंग और आप पर तो हरिजन एक्ट भी लग सकता है क्योकि आप दबंग है ये बाते सुनी हुई नहीं है मै भुक्तभोगी हूँ और पिछले चार सालों में ऐसी घटनाये मेरे आस पास दो दर्जन से अधिक ( पांच से छ : बार मेरे साथ मेरी दुकान पे ) बार हो चुकी है हर बार मामला थाने भी पंहुचा पर जवाब “सरदार जी इसे निपटा लो वर्ना लेने के देने पड़ जायेगे माया सरकार है ? तो सरदार जी ने निपटा लिया क्योकि दुकान भी करनी है और उ प्र में रहना भी है कभी कभी तो लगता है की उ प्र में कही दलित आतक वाद न शुरू हो जाये

shuklaom के द्वारा
August 5, 2011

shuklaom

ajaykumar2623 के द्वारा
August 4, 2011

मैं राजनीति के बारे में ज्यादा तो नहीं जानता लेकिन इतना ज़रूर जानता हूँ कि अगर हाल के मुंबई धमाको में राहुल गांधी का ये बयान आ सकता है कि हमने ९९% हमले रोके हैं.और सभी हमलों को रोक पाना नामुमकिन है. तो राहुल उत्तर प्रदेश में आकर ये कहने वाले कौन होते हैं कि हमें बहुमत में लाइए फिर हम कुछ करते हैं. चाहे वो शीलू निषाद का केस हो या नॉएडा भूमि अधिग्रहण का मामला. और अगर ये हमले सिर्फ १% हैं तो आप सोच सकते हैं कि अगर ये हमले १००% होते तो क्या होता……….. और देश का ७०% से ज्यादा शासन तो कांग्रेस ने ही चलाया है. और देश को क्या मिला बोफोर्स,2g स्पेक्ट्रम घोटाला और अयोग्य व्यक्ति की सीवीसी पद पर नियुक्ति पामोलीन घोटाले के साथ. राजीव गांधी भी अपने भाषणों में कहा करते थे कि हमारे भेजे गए १ रुपये में से सिर्फ १५ पैसे ही जनता तक पहुच पाते हैं तो किसी ने उनसे ये क्यों नहीं पूछा कि आप उस कुर्सी पर बैठ कर भाषण ही देंगे या कुछ करेंगे भी.आखिर जनता ने आपको काम करने के लिए ही तो सत्ता सौपी है. खैर राहुल भी तो उसी वंश के हैं तो भाषण तो इसी तरह का देंगे ना… और तो और केंद्र में तो कांग्रेस ही बहुमत में है…..वहां क्या हो रहा जनता इससे अनजान तो नहीं… रही बात भाजपा की तो उसके पास राम मंदिर के अलावा कोई मुद्दा ही नहीं है… जब भी चुनाव नजदीक आये तो लाल कृष्ण अडवानी की रथ यात्रा शुरू होने लगती है. लेकिन जो अयोध्या भाजपा का मुख्य मुद्दा है वहां के लोगों की दुर्दशा तो आपको वहां जाकर ही पता लग सकती है उससे पहले नहीं…. अब बारी आती है सपा की.तो उसके शासन की धज्जियां तो जनता ने खुद ही उड़ा दी थी. वैसे क्या कोई मुझे बतायेगा कि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न घोटाला कब हुआ था??? उस वक़्त उत्तर प्रदेश में किस पार्टी का राज था??? इलाहाबाद के विधायक राजू पाल की हत्या किसके शासन काल में हुई थी???? मुझे नहीं लगता कि राजनीतिक पार्टियों का इससे ज्यादा भी घिनौना चेहरा कोई हो सकता है……………………. अब बात है मायावती की तो क्या आपने कभी अफसरों में अफरा तफरी का माहौल देखा है जो मायावती के दौरे के वक़्त दिखाई पड़ता है.. मुझे लगता है कि मायावती पर इतने आरोप सिर्फ इस लिए लगते हैं क्योंकि वो एक दलित हैं . क्या ये बात आम जनता नहीं समझ पा रही कि कांशीराम आवास योजना का सबसे अधिक लाभ सवर्ण गरीब वर्ग को मिला है. तो फिर ये ऐसे कहा जा सकता है कि मायावती ने अपने सर्व जन हिताय के उद्देश्य को पूरा नहीं किया…. और काण्ड ना रोक पाने का कारण तो राहुल ने मुंबई बम हमले में बता ही दिया है कि सभी घटनाओं को रोक पाना नामुमकिन है. वैसे उत्तर प्रदेश के लिए कम से कम २०-२५ वर्षो तक मायावती का ही शाशन सही है. रही बात जंगल राज या घोटालों की. तो जब केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री सीवीसी मामले में ये कह सकते हैं कि उन्हें थोमस पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं थी तो मायावती को दिव्यदार्शिनी तो है नहीं जो उनको हर घटना की जानकारी हो ही…… या तो पहले प्रधानमन्त्री को कठघरे में खड़ा करो……… और रही बात राजनीतिक पार्टियों की. तो दूध का धुला कोई नहीं है…….

    Martanday के द्वारा
    August 5, 2011

    वह भाई वह क्या दालिल दी है आपका भी कोई जवाब नहीं , अगर कांग्रेस ने २५ घोटाले की है तो बसपा ने तो केवल २० ही की है जैसे फुटबाल मैच हो रहा है | भाजपा अगर राम – राम करती है तो बहनजी दलित – दलित करती हैं | सपा के राज्य में पाल का क़त्ल हुआ तो बसपा के राज्य में सिएमो, डिप्टी सिएमो, Executive इंजिनियर का क़त्ल हुआ जैसे cricket मैच का score कार्ड है | देखा है कांशीराम योजना कुछ मौकापरस्तो, चमचो और रिश्तेदारों को आधा – अधुरा खंडहर मिला है | अफसर तो इसलिए कांपते है की पता नहीं कितना पैसा मांगेंगी और न देने पर जान से हाथ धोना पड़ेगा | इतना पैसा चूस लेती है की सारे सरकारी काम घटिया क्वालिटी की करनी पड़ती है, ठेकेदार अपने जेब से तो देगा नहीं, सड़के धंस जाती हैं, पुल बह जाते हैं | जनता के टैक्स के पैसे से ऊल ज़लूल काम हो रहा है, ५६ किलो का केक काटा जा रहा है, ५ करोड़ का हार पहना जा रहा है, पत्थर के हाथी बनवाएं जा रह है, एक ही पार्क को १० बार तोड़कर बनवाया जा रहा है, वाह – वाह क्या दलितों का उद्धार हो रहा है, हाँ अपना उद्धार ज़रूर हो रहा है, स्विस बैंक के खाते में संख्या के बाद शून्य में बढ़ोतरी हो रही है | प्रदेश की फटीचर हालत है न तो सड़के ठीक है न बिजली की व्यवस्था, law & आर्डर के तो क्या कहने | यह नहीं हो रहा है की पॉवर प्रोजेक्ट्स लगाएं, सुपर एक्सप्रेस हईवेस बनवाएं, बाँध बनवाएं, विदेशी कम्पनिओं को प्रोतसाहन दें की प्रदेश में आकर कंपनी लगाएं इस इ से विकास होगा लोगों को रोज़गार मिलेगा अन्यथा दुर्दशा ही बनी रहेगी | और अगर २० – २५ साल तक येही ढर्रा रहा तो उत्तर प्रदेश लालू के बिहार से भी बधतर हो जाएगा | हमें अन्ना हजारे, नरेन्द्र मोदी, नितीश कुमार किस्म के लोगों की पार्टी चाहिए न की सपा, बसपा, भाजापा, कांग्रेस जैसों की | वन्दे मातरम्

    ajaykumar2623 के द्वारा
    August 5, 2011

    आपने बिलकुल सही समझा मैंने भी बस यही कहने की कोशिश की थी कि हमें ऐसे नेता नहीं चाहिए जिनका मुद्दा सिर्फ सत्ता हथियाने तक ही सीमित हो. टिपण्णी के लिए धन्यवाद.

amitphotojounalist के द्वारा
August 2, 2011

तकनिकी खराबी की वजह से दिलीप दास के नाम से पोस्ट पुब्लिश हो गया था …मैं किसी पार्टी के पक्ष में नहीं हूँ याद करिए वो बीते हुए कुछ वर्ष जब इलाहाबाद के करेली और बक्शी के बीच एक मदरसा है जहाँ पर अशरफ और उसके लोगों ने उन मदरसों में रहने वाली बच्चियों के साथ रपे जैसी गन्दी घटना को अंजाम दिया था इसकी असली सजा तो सौदी अरब जैसा देश देता है लेकिन भारत में तो मजाक बनकर रह गया है अशरफ इस घटना में जिस सजा का हक़दार था उसे नहीं मिली है लेकिन याद करिए मायावती ने उस समय उस मदरसे में जाकर उन बच्चियों के दर्द को समझा और लगातार गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए प्रयासरत रही और आखिर आज दोनों भाई जेल की सलाख़ों के पीछे हैं रही बात घटना पर नियंत्रण की वो तो हर जगह हैं क्या घटना दिल्ली में नहीं हो रहीं है वहां तो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और भी बड़े आला अधिकारी रहते हैं फिर भी नहीं रोक पाते किसी भी व्यवस्था को सुधारने में समय लगता है उत्तर प्रदेश में माया सरकार के पहले मुलायम सरकार थी लेकिन उसमे कहीं भी मुलायमियत नहीं दिखी शिक्षा में तो नक़ल की ऐसी महामारी फैला रखी थी की उसकी भरपाई आज तक नहीं हो पाई है पूरा जंगल साम्राज्य था माया सरकार आने से लोगों ने कुश रहत की सांस ली है लेकिन उसे दिखाया नहीं जा सकता महसूस जरूर किया जा सकता है मैंने उन दर्द से भरे चेहरे को देखा है जिनके चेहरे पर माया राज्य आने के बाद उनके चेहरे पर खुशी दिखी थी उस मंज़र को भी देखा है चुनाव के समय में लोग अपना घर छोड़ कर भाग गए थे कुछ तो बात आखिर इस माया की माया में हैं जिसकी वजह से लोगों ने उसे जिताया है और रही बात अगले चुनाव की न घोडा दूर है और न मैदान………

    Hariom के द्वारा
    September 5, 2011

    आजकल एक टिकट के डेढ़ करोड़ हो गए है,बताइये कितने विधायक उ प्र से चुनाव में खड़े होंगे.अभी अभी का किस्सा है फर्रुखाबाद के भोजपुर विधान सभा क्षेत्र के उम्मीदवार का.?

dilip kumar das के द्वारा
August 2, 2011

मैं किसी पार्टी के पक्ष में नहीं हूँ याद करिए वो बीते हुए कुछ वर्ष जब इलाहाबाद के करेली और बक्शी के बीच एक मदरसा है जहाँ पर अशरफ और उसके लोगों ने उन मदरसों में रहने वाली बच्चियों के साथ रपे जैसी गन्दी घटना को अंजाम दिया था इसकी असली सजा तो सौदी अरब जैसा देश देता है लेकिन भारत में तो मजाक बनकर रह गया है अशरफ इस घटना में जिस सजा का हक़दार था उसे नहीं मिली है लेकिन याद करिए मायावती ने उस समय उस मदरसे में जाकर उन बच्चियों के दर्द को समझा और लगातार गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए प्रयासरत रही और आखिर आज दोनों भाई जेल की सलाख़ों के पीछे हैं रही बात घटना पर नियंत्रण की वो तो हर जगह हैं क्या घटना दिल्ली में नहीं हो रहीं है वहां तो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और भी बड़े आला अधिकारी रहते हैं फिर भी नहीं रोक पाते किसी भी व्यवस्था को सुधारने में समय लगता है उत्तर प्रदेश में माया सरकार के पहले मुलायम सरकार थी लेकिन उसमे कहीं भी मुलायमियत नहीं दिखी शिक्षा में तो नक़ल की ऐसी महामारी फैला रखी थी की उसकी भरपाई आज तक नहीं हो पाई है पूरा जंगल साम्राज्य था माया सरकार आने से लोगों ने कुश रहत की सांस ली है लेकिन उसे दिखाया नहीं जा सकता महसूस जरूर किया जा सकता है मैंने उन दर्द से भरे चेहरे को देखा है जिनके चेहरे पर माया राज्य आने के बाद उनके चेहरे पर खुशी दिखी थी उस मंज़र को भी देखा है चुनाव के समय में लोग अपना घर छोड़ कर भाग गए थे कुछ तो बात आखिर इस माया की माया में हैं जिसकी वजह से लोगों ने उसे जिताया है और रही बात अगले चुनाव की न घोडा दूर है और न मैदान………

    sampat kataria के द्वारा
    August 2, 2011

    thank u very much for your blog agar aapke jasi soch sabhi ki ho jaye to es desh ka sushar ho sakta hai mera aap se anurod hai ki aap es trah ke blog kikhte rhe plz me aapke es blog ko padker bhut khush hu thankx once agein

    litt के द्वारा
    August 6, 2011

    आपने बिलकुल सही कहा है , विस्तृत जानकारी मेरे ब्लाग पर उपलब्ध है | “मायावती बनाम अन्य राजनैतिक दल = उत्तर प्रदेश”

Martanday के द्वारा
August 2, 2011

ए …….. थब तुप – तुप नहीं तो थबको तोप से उड़ा दूंगा | बोहोनजी कित्ती अच्छी है सबकी क्या वाट लगा रखी है | जनता के पैसे का क्या सदुपयोग कर रही हैं, हाथी, पार्क, मूर्ति बनवाकर, किसी ने ऐसा सोचा था कभी , बोलिए ? कितने फाएदे है देखिए १. आप निश्चिंत होकर हाथी की सवारी का मज़ा ले सकते है | २. आप बेरोजगार है हाथी बेच दीजिए बस आप मालामाल | ३. पार्क में जाकर ताज़ी हवा खाएं आपका स्वास्थ अच्छा रहेगा आप को भूंख नहीं लगेगी (पेट तो हवा से भर जाएगा न ) तो आपको महंगाई एकदम नहीं सताएगी | देखा कित्ती दूर की दृष्टी है बोहोनजीकी | घरों में बिजली इसलिए नहीं आती है क्योंकि पार्क में रात भर हजारों वाट की बिजली जलती रहती है | कितने फाएदे आप को गर्मी के मारे रात भर नीद नहीं आएगी तो आप चौकीदारी करेंगे, दिन में आफिस जाकर सोइए किसने रोका है | देखा कित्ती दूर की दृष्टी है बोहोनजी की | ४. ५६ किलो का केक कटा था ५ करोड़ का हार पहनकर, यह पैसा उनको प्यार करने वाले भूंखे – नंगे दलितों ने दिया था | उनको केक काटकर खाने का फोटो देख सब के पेट भर गए थे पता है | ५. जन्मदिन मानाने के लिए बोहोनजी को उपहार स्वरुप लोगों ने पैसा तो क्या अपनी जान भी न्योछावर कर दी | ६. बोहोनजी हमेशा दलित – दलित करके दलितों महादुर्दशा कर दी है, सब जहाँ थे वहीँ है, खुद ४४० करोड़ की मालकिन बन गईं है | कितना मज़ा है | ७. जादू जानतीं है गरीबों में पैसा बांटती हैं , पैसा आता कहाँ से है और जाता कहाँ है किसी को पता नहीं, कागज़ में ज़रूर आ जाता है | बेचारा ग़रीब ग़रीब ही रहता है क्योंकि सेल टैक्स , मेल टैक्स , जन्मदिन टैक्स, कांशीराम टैक्स में सब कुछ कट कर जीरो हो जाता है | कितनी बड़ी जादूगरनी हैं देखा | ८. क़ानून व्यवस्था एकदम टिप – टाप है , मुजरिम सीना फुलाकर घूमता रहता है, सब टापते रह जाते है | ९. बलात्कार कहाँ होता है, सब रास लीला करते हैं भई, यह कोई जुर्म थोड़े ही है यह तो द्वापर युग से चला आ रहा है | बोहोनजी ने अपने आप को “कुँवारी” और “सुश्री” घोषित कर रखा है जिससे उनकी सुन्दरता पर कोई संदेह न कर सके | आप सब से निवेदन है बोहोनजी को अपने – अपने हाथ का सहारा देकर गद्दी से उतार कर गटर में डालें | धन्यवाद | वन्दे मातरम् |

    sampat kataria के द्वारा
    August 2, 2011

    bhan ji to dlito ke hak ke liye lad rhi hai unki to har ka koe matlab hi nhi banta lakin tum kis ke liye lad rhe ho tum jase log hi es desh ko todne me lage huye ho samje tumhar kuch nhi hone wala baba saheb ki film dekho to sayad tumhe kuch samanj me aa jaye ve to sarv pichade samaj ke liye lad rhe hai or tum kuch gadar netao ke kahne me aa ker esa bole rhe ho kya baba saheb ek mhan neta nhi hai jinhone es desh ka savidhan lika tha kya unki unki murti nhi banni chahiye thi jase or baki nethao ki bni hue hai are tum log to apne liye jito jeena hai to dusro ki khushi ke liye jiyo samje

    Martanday के द्वारा
    August 3, 2011

    सम्पतजी दलित – दलित करने से, पैसे बांटने से, पार्क और हाथी बनवाने से कभी भी दलितों का उद्धार नहीं होगा, हाँ चन्द मौकापरस्त लोग अपनी जेबें भारी करने में ज़रूर सफल होंगे, इन में बहनजी भी शामिल हैं | वैसे भी कौन दलित है, दलित क्या होता है, लोगों के दिमाग में इस शब्द का प्रत्यारोपण कर एक सामाजिक अलगाववाद फैलाने के अलवा और क्या कर रहीं है | यह सब कुर्सी पर बने रहने के लिए, जनता के पैसे से मौज उड़ने के लिए | उत्तर प्रदेश के विकास के लिए क्या किया गया है? सड़के नहीं है, जो है उनका खस्ता हाल है , दिन में केवल ८ घंटे बिजली आती है, क़ानून व्यवस्था उसके तो क्या कहने | कौन से ऐसे ठोस कदम ऊठाए गए है की कोई बड़ा उद्योगपति आकर अपना उद्योग लगाए और लोगों को रोज़गार मिले | एक बार आगरा, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी की दुर्दशा देखीए जाकर , जनता के टैक्स के पैसे से लखनऊ में हाथी बनवाकर दलितों का उद्धार नहीं किया जा सकता है | अगर दलितों की इतनी फिकर करती हैं तो स्कूल, अस्पताल बनवा दें जहाँ उनको मुफ्त शिक्षा मिले, इलाज़ हो, पार्क और परिवर्तन स्थल से यह तो संभव नहीं है, वहां पर तो दलितों को पास तक फटकने नहीं दिया जाता है, यह कैसी लड़ाई है | पैसे देकर किसी की आर्थिक दशा नहीं सुधरी जा सकती है यह सच है, जब तक बड़े – बड़े विकास के कार्य न किए जाए, अगर आप को मौका मिले तो एकबार जाकर चीन घूम आए, जो बेरोजगार हुआ करते थे आज गाडी में घूमतें हैं, यह केवल विकास से संभव हुआ है न की मूर्ति बनवाकर और पैसे बांटकर | डा. बी. आर. अम्बेडकर एक महान नेता थे इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है, उनकी मूर्ति ज़रूर बननी और बनवानी चाहिए, लेकिन खुद को क्यों उनके बराबर में रख लिया ? डा. आंबेडकर की मूर्ति नाले में डूबी रहे और कौओं के बीट से बेरंग होती रहे तो उनका अपमान नहीं तो क्या है | उनको दलितों से कुछ नहीं लेना देना है उनको तो सत्ता में बने रहना है और ऐश करना है तभी तो अब ब्राह्मणों को भी मिला लिया है | सब अपने लिए कर रहीं हैं ४४० करोड़ की संपत्ति जुटा ली है, एक साधारण से क्लेर्क की बेटी के पास इतना पैसा कहाँ से आया ? आप बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में है, ज़रा गाँव जाकर दलितों का हाल देख कर आये, अभी भी बेचारे नंगे भूंखें बीमार और गन्दगी में हैं , खाली माईक पर दलित – दलित चिल्लाने से कुछ नहीं होता है मदर टेरेसा की तरह काम कर दिखाए तो कुछ समझा जाए | वन्दे मातरम्

    ravindra pathak के द्वारा
    August 4, 2011

    वन्दे मातरम्

ishwarsinghrautela के द्वारा
August 2, 2011

mayawati will remain as it is till there will be no other alternative hope as most of the other party are not having beter agena as well as better face BJP have so many face each has their own direction & also allegation with most of them as to work for own interest , similarly in Congress most of them want to make happy Rahul, smajwadi more like BSP but no work they started to confine with the constituency of big leader ,whether it is desired or not in politics now no body is Accountable . Political leaders can became millioner by owning TABELA, while so many skilled Tabelas are on road ,struggling for bread.

ranu के द्वारा
August 2, 2011

maya dayan ko hatao

subhash के द्वारा
August 2, 2011

kya maya jitna mila utna khaya kya raja jitna mile utna khaja kya kalmadi apni jeb bhhri bhukhe khiladi kya yadurappa tu sabka bappa kya manmohan sarifi ka tamga par aage samjho koun sab beimaan hai niche se upar sab corrupt hai

    gullu asnani के द्वारा
    August 2, 2011

    सुभाष जी, माया ने खाया तो समझ आता है, लेकिन राजा और कलमाड़ी ने खाया थोडा समझ से बाहर की बात है, खाने वाली डायन / राक्षस तो दस जनपथ पे और चेन्नई में बैठे है. ये दोनों तो कठपुतले हैं.

    subhash के द्वारा
    August 3, 2011

    matlab ye hai ki koi bhi party corruption me piche nahi hai sabme ek dusre se aage jaane ki hod lagi hai

    Gautam sangh के द्वारा
    August 4, 2011

    koi bhi party corruption se juda nahi h ase me agar utter pradesh me party ka selection to BSP hi sabse best h sabke lye

Ramniwash के द्वारा
August 2, 2011

आपने कांग्रेस के भराष्टाचार के बारे मे कुछ नहीं लिखा उस हिसाब से तो क्रीमे कैपिटल डेल्ही है

tejwani girdhar, ajmer के द्वारा
August 2, 2011

उत्तर प्रदेश में राजनीति का जितना कचरा हुआ है, उतना तो बिहार में भी नहीं हुआ, किसी जमाने में उत्तरप्रदेश राजनीति का सिरमौर हुआ करता था, आज बेहद घटिया लोगों के हाथ आ गई है राजनीति

    gullu asnani के द्वारा
    August 2, 2011

    जोकर लाल नेहरु भी उ. प्र. से ही थे ! और उसके बाप भी !! जरा पता करिए दोनों देशद्रोहियों के बारे में.

    Vineet gupta के द्वारा
    September 27, 2011

    janta ka gussa dikh rha hai …results ki ummid bhi band rhi hai. Bas logo se nivedan hai ki jat-dharm ke chakkar me na pade aur uske kam ko dekh kar vote de. Jai bharat

Manoj Dublish के द्वारा
August 1, 2011

बहुजन जिताय सर्वजन दुखाय क्या अभी तक अर्थ समझ नही पाय

shaktisingh के द्वारा
August 1, 2011

उत्तर प्रदेश की राजनीति ने बहुत तरहे की उठा-पठक को देखा है . लेकिन इस उठा-पठक ने वहां की जनता को कभी भी लाभ नहीं पहुंचाया.

Tamanna के द्वारा
August 1, 2011

मायावती सरकार ने जिस कदर उत्तर प्रदेश के लोगों के हालात खराब कर दिए हैं. इसका मुकाबला शायद ही कोई और दल कर पाए. उत्तर-प्रदेश आपराधिक वारदातों का अड्डा बन गया हैं. जिस राज्य की मुख्यमंत्री स्वयं एक दलित महिला है वहां, दलितों खासतौर पर महिलाओं की स्थिति इतनी दयनीय हो गई हैं कि अब तो सुधार की उम्मीद भी समाप्त हो चुकी है. सत्ता हथियाते ही मायावती ने सिर्फ विभिन्न पार्कों और स्मारकों के निर्माण को अपने अधीन करा हैं. इसके अलावा इतने समय में उन्होंने व्यवहारिक तौर पर क्या किया हैं, यह समझ नहीं आता.

    Akhil के द्वारा
    August 3, 2011

    कोई दल किसी और का मुकाबला क्या करेगा सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे है. लेकिन फिर भी मई मायावती का सुप्पोर्ट इस लिए करूँगा क्यों की आम जनता आज भी अपने आप को उत्तर प्रदेश में नेता रुपी भेडियों से सुरक्षित समझती है. गुंडों का दर कहा नहीं है . क्या आ कांग्रेस को बेहतर समझती है जो आतंकवादियों को पाल रही है. उन्हें आज तक सजा क्यों नहीं हुई जबकि उनके पास सारे सबूत है उनके खिलाफ.भ्रस्टाचार की लड़ाई में रामदेव के साथ जो हुआ क्या वो सही था या काले धन पे सरकार का रव्य सही है. आखिर क्यों कांग्रेस उन लोगो के नाम नहीं बता रही जिनका स्विस बैंक में खाता है. अगर माया ख़राब है तो क्या आप शिएला को बिठाना चाहती है जिसने दिल्ली में एक लड़की के ऑफिस से लौटने के समय हुए क़त्ल के लिए ये कहा था की लडकिय देर तक घर से बाहर न रहे. मतलब यही की हम तुम्हारी रक्षा नहीं करेंगे तुम खुद अपनी करो…..

    Gautam sangh के द्वारा
    August 4, 2011

    kya samajh me nahi aata samjhne ki capacity bhi h


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