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मुस्लिमों को आरक्षण बनाम वोट की राजनीति !!

Posted On: 18 Jul, 2011 में

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भारत में राजनीति, समाज और आरक्षण का घालमेल सबसे ज्यादा तनावकारी और विघटनकारी रहा है. समाज को कई हिस्सों में बांट कर राज करने की परंपरा अंग्रेजों ने डाली थी किंतु उन्होंने भी ये कल्पना नहीं की होगी कि आजाद भारत का ‘नेतृत्व’ उनके तौर-तरीकों को अपने ही नागरिकों पर इस्तेमाल करेगा. दुर्भाग्य से सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के नाम पर दलितों-पिछड़ों का राजनीतिक प्रयोग तो चलता ही रहा है किंतु भारतीय संविधान का खुल्लम-खुल्ला मखौल उड़ाते हुए धर्म आधारित आरक्षण की बात भी की जाने लगी है.


उत्तर प्रदेश सहित आने वाले समय में कुछ और राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचन व केंद्र में वर्ष 2014 में होने वाले संसदीय चुनाओं को दृष्टिगत रखते हुए, अपनी बाजी मजबूत करने की कोशिश के तहत, कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार जल्द ही मुस्लिम आरक्षण पर कुछ विशेष कदम उठाने की इच्छा जता रही है. केंद्र तमिलनाडु, आंध्र, केरल, कर्नाटक आदि राज्यों में मुस्लिम आरक्षण के फार्मूलों को आधार बना कर इस मसले को तय कर सकता है. इन राज्यों में ओबीसी के कोटे में से मुस्लिमों को आरक्षण दिया गया है. तमिलनाडु ने ओबीसी के कोटे में से 3.5 फीसदी आरक्षण दिया है और आंध्रप्रदेश ने चार फीसदी. कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए वामपंथी सरकार ने ओबीसी कोटे में से मुसलमानों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था. वहीं वर्ष 2009 के अंत में केन्द्र सरकार ने रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश की थी जिसमें अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने का सुझाव दिया गया था. उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सच्चर समिति की रिपोर्ट को भी मुस्लिम आरक्षण से जोड़ा गया था.


भारत में आरक्षण और वोट की राजनीति शुरू से ही गुत्थम-गुत्था रही है. योग्यता के आधार की अनदेखी कर अयोग्य को प्रोत्साहन की नीति के तहत तमाम विवादास्पद निर्णय लिए गए जिससे देश की सामाजिक समरसता में भारी कमी आयी. कमजोरों और दलित-दमित, वंचित वर्गों के उत्थान की नीति की तहत एकबारगी इसे स्वीकार भी कर लिया जाए किंतु धर्म के आधार पर भेदभाव और आरक्षण की नीति की क्या स्वीकार्यता हो सकती है?


भारतीय संविधान धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को खारिज करता है. हालांकि संविधान में मुख्य धारा से पिछड़े लोगों को आगे लाने के लिए कुछ विशेष प्रावधान के उल्लेख हैं जिनके आधार पर राज्य आरक्षण की व्यवस्था समय-समय पर करता रहा है. उच्चतम न्यायालय ने भी इसकी आवश्यकता को स्वीकार किया है साथ ही उसने आरक्षण पर कुछ विशिष्ट दिशा-निर्देश भी दिए हैं. किंतु धर्म के आधार पर आरक्षण के किसी औचित्य को कोई भी मान्य नहीं कर सका. ऐसे में राजनीतिक दलों व सत्तासीन सरकारों द्वारा धार्मिक आधार पर आरक्षण का चारा फेंके जाने की बात को किस सीमा तक युक्तियुक्त ठहराया जा सकता है?


उपरोक्त के आधार पर तमाम ऐसे संशय और सवालों के बादल जेहन में उमड़ते हैं जिनका समाधान तलाशा जाना राष्ट्र हित में अत्यावश्यक है, यथा:


1. क्या धर्म के आधार पर आरक्षण भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि के अनुकूल होगा?

2. आरक्षण के लिए धर्म को आधार बनाना सांप्रदायिक समरसता और राष्ट्र की एकता-अखंडता के लिए किस सीमा तक वहनीय है?

3. सरकारी नौकरियों व शिक्षा में आरक्षण की किसी भी परिपाटी को बढ़ाना विकसित भारत की छवि को किस तरह खंडित करता है?

4. क्या भारत में किसी भी प्रकार का आरक्षण कायम रखना योग्यता के मूलभूत सिद्धांत का उल्लंघन है?

5. आरक्षण राजनीतिक लाभ है या सामाजिक आवश्यकता?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से राष्ट्रहित और व्यापक जनहित के इसी मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है. इस बार का मुद्दा है:


मुस्लिमों को आरक्षण बनाम वोट की राजनीति !!


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जारी कर सकते हैं.


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “आरक्षण की राजनीति” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व आरक्षण की राजनीति – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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47 प्रतिक्रिया

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NStryczuR02wT के द्वारा
July 23, 2016

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Rajesh Verma के द्वारा
December 1, 2011

आज मुस्लिम आरक्षण की बात करना बेहद खतरनाक है ! फिर से अलगाववाद का बीज बोया जा रहा है ! सभी को पता होना चाहिए दुनिया में और कहाँ कहाँ कैसे आरक्षण दिया जा रहा है या नहीं ! आज आरक्षण दोगे कल उनकी मांगे बढती जाएँगी ! फिर क्या एक और पकिस्तान(सुन्निस्तान ) या सियानिस्तान दोगे ! हिन्दुस्तान के ये सत्ता व दौलत के भूंखे राजनेता अपनी मनमानी करते जायेंगे ! आरक्षण ख़त्म क्यूँ नहीं कर देते, अब जरूरत पूरी हो चुकी है ! आज आर्थिक स्थित की बात करते हो . आज सरकारी नौकरी में ८० % वे लोग हैं जिनके पास प्रचुर मात्र में खेती -बड़ी है , फार्म हॉउस हैं, पारिवारिक बिसनेस है ……….मेरे पास क्या है ? बाबा का एक मकान १२ सदस्य , २२ साल से आई आई टी में काम कर रहा हूँ डिप्लोमा होल्डर हूँ पर टेम्पोरेरी हूँ मेरे ही विभाग में आर्थिक संपन्न लोग नौकरी पा गए या कर रहे है पर मैं ( OBC ) कम पैसे में वहीँ का वही….! खोखली आरक्षण नीति नौकरी के लिए १८ से ६० पर नेता ८० साल का जिसकी सोंच कुंद हो गई हो … आप सब समझदार हैं

nagi के द्वारा
November 5, 2011

मुस्लिमो का असली हितैषी कौन————-विश्व में इंडोनेशिया के बाद भारत मुसलमानों की सर्वाधिक आबादी वाला देश है ऐसे में ये सवाल उठना लाज़मी है की उनका रुझान देश का भविष्य तय कर सकता है और आज़ादी के बाद से आज तक सारे राजनैतिक दलों ने सिर्फ वोटों की राजनीति खेली है. वोट बैंक की नीति का सबसे बड़ा लालीपॉप है आरक्षण और यही देकर सारे दल मुसलमानों के वोट बटोरना चाहते हैं. आरक्षण देकर सरकार उस कौम को आत्मनिर्भर नहीं अपाहिज बनाती है. अनुसूचित जाति,जनजाति,पिछड़ी जाति,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित,विधवा,परित्यक्ता,दलित ईसाई,दलित मुसलमान,बौद्धों व अल्पसंख्यकों को आरक्षण का भ्रामक सब्जबाग दिखा सरकारें उनके साथ छलावा कर रही हैं———–नागेश खरे ‘नागी’ बांदा 9415170115

mohd ismail bafati के द्वारा
July 31, 2011

श्रीमान यहा सभी मुस्लिम को आरक्षण नही दिया जा रहा, मुस्लिमो मे जो पिक्षडे है उनको आरक्षण देने की बात हो रही है। एक मुस्लिम मेहतर ओ बी सी मे आता है । हिन्दु मेहतर अनुसुचित जाति मे आता है । क्या यह भेद भाव नही है ? अनुसुचित जाति मे मुस्लिम नही आते बाकि सभी धर्मो के लोग आते है , क्या यह भेद भाव नही है । अनुसुचित जन जाति के लिये धर्म का बन्धन नही है किन्तु म0प्र0 महाराष्ट्र मे हिन्दु तडवी , मुन्डा जाति एस टी मे आते है । वही मुस्लिम तडवी व मुन्डा जाति एस टी मे नही आती ,क्या यह अन्याय नही है ? कुछ इलाको मे तो मुस्लिम का जीवन स्तर एस सी , एस टी और ओ बी सी से भी कई गुणा कमतर है । क्या धर्म निरपेक्ष देश मे यह उचित है । सादर धन्यवाद ।

    Jatin Tomar के द्वारा
    August 5, 2011

    kya muslim kya hindu…60 salse jyada me koi reservation kuchh nahi kar paya ab kaun sa teer mar lega….hindu SC ST ne kitna develop kiya sabko pata hai…ye aarakshan sivay dubane kuchh nahi karega…….

    sarferaz alam के द्वारा
    August 28, 2011

    श्रीमान जी इस देश में नेताओं ने आरक्षण आरक्षण कर के लोगों के दिमाग में आरक्षण भर दिया है की अगर मुझे आरक्षण मिल जाता तो यह कर लेता उसे आरक्षण मिल जाता तो यह कर लेता पर एक बात बताये की एक आदमी की वार्षिक आय ५० हजार रूपये है उसके ४ बच्चे पढने वाले हैं उसको कौन सा और कितने प्रतिशत आरक्षण मिल जाये की वोह अपने बच्चे को स्नात्तक सिक्षा दे और यही हालत ओ बी सी या अनुसूचित जाती अनुसूचित जन जाती की हो तो उसे कौन सा और कितने प्रतिशत आरक्षण मिले अगर आप इस का नमूना देखना चाहो तो अपने ही आस पास निगाह दौडाओ खुद ही पता चल जाएगा सरफ़राज़ यूपी सोनभद्र

    shri के द्वारा
    August 30, 2011

    यहां पहली बात की जब मुस्लिम हो गए तो गए जाति से, इस्लाम में जाति कहां, इस्लाम में जाकर भी जाति में ही रहना है तो छोड़ो इस्लाम वापिस उसी जाति का सदस्य हो जाओ जिसमें पूर्वज थे। समस्या का सीधा समाधान। उधर से सलमा और इधर से राधा दोनों नहीं मिलेंगी।

    Amba Shankar Bajpai के द्वारा
    September 11, 2011

    hai aisa hai, aur yah tabhi hoga jab muslim samiday common civil code accepct karega.dharmanirpekshta ki baat karne wale common civil code kyo nahi mante hai. phir kaisa bhedbhav

    nagi के द्वारा
    November 5, 2011

    बफाती जी, इस्लाम ने कभी भी खुद को ज़ात पात में नहीं बांटा. किसी मुस्लिम कसाई से भी अगर जात पूछो तो अपने को मुस्लमान ही बताता है अगर जात नहीं फिर काहे का जातिगत आरक्षण? चूंकि भारत के समस्त मुसलमान मुगलों की हुकुमत में बलात मुसलमान बनाए गए थे इसीलिए यहाँ ऐसी बातें हो रही है अन्यथा सऊदी अरब में मुस्लिमो की कोई जाति क्यों नहीं है?

    mukesh के द्वारा
    February 18, 2012

    श्रीमान जी हिन्दू समाज की कुछ जातियो को स्वतंत्रता के बाद यह मान कर आरक्चन दिया गया था कि हिन्दुओ में जाती प्रथा के कारन कुछ जातियो से अन्याय हुआ है. इस्लाम अपने को जातिविहीन मानता है, और ऐसा ही बताकर अन्याय ग्रस्त जातियो का धर्मान्तरण कराया गया. यदि इस्लाम अपनाने के बाद भी ये लोग भेदभाव के शिकार है, तो इन्हें अपने मूल धर्म में वापस आ जाना चाहिए. सरकारी नौकरी किसी बैसाखी के सहारे पाने कि बजाय योग्यता से मिले. संयुक्त रास्ट्र के मानदंडो के अनुसार देश में १०% से अधिक कि जनसँख्या वाला समाज वैसे भी अल्पसंख्यक नहीं होता. अलाप्संख्यक दर्जे के लिए उस जाती का मूल निवासी न होना भी अवश्यक है जबकि भारत में मुस्लिम वो लोग है, जिनके पूर्वज विदेसी हमलावरों के जुल्म सहन न कर पाने के कारन मुस्लमान हो गए थे. मुस्लिम समाज को अपने लिए विसेसधिकार न मांगकर सामान्य नागरिको कि भांति शिक्चित हो कर देश कि मुख्यधारा में शामिल होकर देश कि प्रगति में भागिदार होना चाहिए.

RAMESH AGARWAL के द्वारा
July 29, 2011

Actually it is bad luck for us that inspite of all kind of blessings by bhagwanji we are not heading in right direction due to greedyness of our politicians who want to remain in powers at all cost without thinking in terms of results in long term.we havnt learnt from our past history.actually we are heading towards an islamic state may be without naming it.in a democracy there is no provision for reservations only all kid of assistance may be given to deprived and backward citizens.but all political paries except bjp/ss are propogating muslim appeasement politics.since upa has come to power by exploiting gujrat riots she is working on sachar, rangnath committees to give reservations to muslims in jobs and education. and that is why salman khurseed greatest communal minister has been given law.it is a crime to talk about hindus but talking for muslims is sign for progress and modernisation.in 2009 upa gave loan worth 68000crores only to muslims to get their votes and for 2014 she is bringing communal riot and targetted violence act, discremination act and now reservation all over country to please them afzal has not been hanged, softness is shown towards terrorists, dawood gang is openly working in maharastra, and talks with pakistan is going on leaving terrorism as central point.to appease them saffron terror has been invented and few hindus have been implicated falsely.digvijaya singh has been authorised to carry out propoganda against hindus and sympathise for muslims and terrorists.we are heading towards our own disaster thanks to our pshdueo secular politicians and a section of media too.

SKKJI के द्वारा
July 26, 2011

हम कैसा इतहास बना रहे हैं I अपने देश के कुछ समुदायों को खुश करने के लिए राजनीतिज्ञ चाहे वो किसी भी पक्ष का समर्थन कर रहे हों , पुरे देश की एकाग्रता तो को भंग कर रहे हैं और इस काम मैं पूरी तकक्त से जुढ़े हैं.I यह राजनीतिज्ञ हम मैं से ही हैं I शायद हम ही हैं ? तो हम काया करें I सरकारे हमरी प्रितिबिम्ब हैं तो उन का हर कार्य कौन कर रहा है शायद आप समझ गए हैं I राजनीती का कोढ़ हमें लिले जा रह है और हम मौन देखने मैं व्यस्त हैं I समाधान क्या है क्या हमें लगता है कि हमें दर्शक ही रहना है I क्या हम किसी काम के हैं I यह प्रशन हम अपने से तब पूछें जब हम मैं बुधि हो I हमारी बुधि अभी निद्रावस्था मैं है I अभी ऐसा कुछ ? नहीं हुआ के यह बुधि जागे ? भारत वर्ष पिछले हमारी याद के वर्षों मैं इंडिया हो गया और इस पर भी हमें तोढ़ने कि कोशिश हो रही है बर्मा कटा अफगानिस्तान कटा पाकिस्तान कटा बंगलदेश कटा कश्मीर मिजोरम अरुणांचल काटने कि रह पर हैं बस एक आधी सदी कि बात है I परन्तु हमारी बुधि अभी निद्रावस्था मैं है रहने दो , रहने दो , रहने दो अपनी बुधि को सोने दो इसे आराम कि जरुरत है बहुत थक गयी है शायद ?? ? दुखी मत हो

gullu asnani के द्वारा
July 26, 2011

सभी भाई लोगों से मेरी गुजारिश है की आरक्षण घटिया लोगों द्वारा सुझाया गया घटिया विचार है, चाहे किसी के लिए भी हो. खास तौर पर इसका इम्प्लीमेंटेशन जो की जाती, जन्म, धर्म के अधर पर दिया जा रहा है. दूसरी बात कैपिटेशन फीस / डोनेशन द्वारा शिक्षा भी आरक्षण ही है पैसे वाले के द्वारा.

ishwarsinghrautela के द्वारा
July 25, 2011

Reservation based on Religion willnot serve any purpose for development , it creats gap between Community & Reservation not at all necessary even Castewise as can be seen from the growth expected by allowing Reservation to SC/ST/OBC from last 50 yrs we are not able to produce one Single person having 50% capabilities like Dr Ambedkar Saheb . Instead common facility is required to all children upto age of 18 like free education, food etc restricted to 2 child per family & man having more than 2 child be compulsurily may be taxed 10% of monthly income per Child.

shuklaom के द्वारा
July 24, 2011

राहुल गाँधी

    gullu asnani के द्वारा
    July 26, 2011

    पप्पू है…..:)

    bharodiya के द्वारा
    July 26, 2011

    भाई ऐसा पप्पु बनना हो तो भी आरक्षण चाहीए । कोन्ग्रेस जैसी पिछडी जाती मे शामिल हो जाओ कभी ना कभी जोकर मे से पप्पु बन जाओगे । फिलहाल तो ये सीट कोन्ग्रेस जाती मे से सबसे ज्यादा पिछडी जाती है उस के लिये रिजर्व है ।

ajaykumar2623 के द्वारा
July 23, 2011

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु तथा सरदार पटेल ने विभाजन का समर्थन इसलिए किया था क्योंकि उनका मानना था की अगर अभी पाकिस्तान ना बनाया गया तो कई पाकिस्तान बनाने पड़ेंगे. तो आज हमारे देश की सरकार को क्या हुआ है जो मुस्लिम आरक्षण जैसी घटिया नीति को लागू करना चाहती है. क्या अभी हमारे देश में आरक्षण का कुप्रभाव नहीं दिख रहा है? कहीं जाट आन्दोलन, कहीं गुर्ज़र आन्दोलन. सबको बस आरक्षण चाहिए भले ही उनमें योग्यता हो या ना हो. इस आरक्षण की ही देन है की रैनबैक्सी जैसी दवा कम्पनियाँ विदेशी कंपनियों के द्वारा अधिग्रहीत कर ली जा रही हैं. हमारे देश में से कोई भी आविष्कार नहीं हो पा रहा है क्योंकि हमारी प्रतिभाएं तो विदेश चली जाती हैं. सभी पुरस्कार तो नाचने गाने वालों को दिए जाते हैं, भारत रत्न जैसे सम्मानित पुरस्कार नेताओं को देना ज़रूरी है क्या? अगर ये पुरस्कार वैज्ञानिको को दिए जाए तो शायद हमारे यहाँ भी आविष्कार होने लगें. लेकिन ये होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि हर तरफ तो आरक्षण का जलवा है. इंजीनियरिंग कालेज में प्रवेश,नौकरी हर जगह तो आरक्षण मौजूद है. अगर एक सामान्य वर्ग का अभ्यर्थी एक एससी एसटी से ज्यादा नंबर लाये लेकिन अगर वो सामान्य वर्ग की मेरिट से बाहर हो तो उसे प्रवेश या नौकरी नहीं मिल पाती जबकि उस एससी या एसटी को परवेश नौकरी दोनों मिल जायेगी. मज़े की बात ये है कि सामान्य वर्ग का अभ्यर्थी झोपडी में रहने के बावजूद उस एससी या एसटी से अमीर ही होता है जिसके घर में कई गाड़िया, एयर कंडीशंड घर हो. ऐसे आरक्षण का क्या मतलब है जब उसका मकसद ही ना पूरा हो पाए. मेरे विचार से आरक्षण किसी के लिए भी नहीं होना चाहिए. हाँ जो गरीब हैं उनको शिक्षा शुल्क,नौकरियों के आवेदन में लगने वाले शुल्क से मुक्त रखा जा सकता है ताकि अगर उनमें योग्यता है तो वो भी अपनी मंजिल तक बिना रुकावट के पहुच सकें.फिर चाहे वो सामान्य वर्ग के हो, ओबीसी वर्ग,एससी एसटी वर्ग के हों. लेकिन आलम तो ये है कि महिला का केंद्रीय नौकरियों में शुल्क नहीं लगता है इसका क्या मतलब है.एक आईएएस की लड़की भी आवेदन शुल्क से मुक्त रहती है जबकि एक गरीब सामान्य वर्ग का अभ्यर्थी परीक्षा शुल्क का भुगतान करता है.क्या ये सोचनीय नहीं है………………….. आज एक बार फिर से हमारे देश में कांग्रेस का ही राज़ है तो क्या मुस्लिम आरक्षण लागू करे कांग्रेस फिर से एक और पाकिस्तान बनाना चाहती है.या नेहरु का वह वक्तव्य मात्र सत्ता हथियाने का एक हथकंडा था …………….. अजय कुमार इलाहाबाद 8090919542

डॉ.कमलाकान्त बहुगुणा के द्वारा
July 23, 2011

Jagran Junction Forum कांग्रेस की राज करने की असलियत स्वतन्त्रता से ले कर अब तक भारत में जिस पार्टी ने अधिक समय तक शासन किया वह कांग्रेस पार्टी है । यदि इसके साथ एक बात और जोड़ दी जाये कि कांग्रेस को सरकार चलाना बखूबी आता है तो शायद ही किसीको हैरानी हो , क्योंकि कांग्रेस पार्टी के पास इसका बहुत लंबा अनुभव है । उसे इतनी महारथ हासिल हैकि बड़ी ही सफगोई से झूठ को सच तथा सच को झूठ कर देती है । हो भी क्यों न आखिर इतना लंबा अनुभव जो उसको सरकार चलाने का । आचार्य चाणक्य ने कहा है -राजा कालस्य कारणम् । अर्थात जो भी कुछ अनीति, अव्यवस्था , भ्रष्टाचार तथा बलात्कार जैसे भयानक अकृत्यों का एक मात्र कारण सरकार अथ च राजा होता है । जिन्हें सब कोई ईमानदार कहते हैं उन मन मोहन सिंह की दृष्टि में पहला अधिकार इस देश में मुसलमानों का है और अब राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा प्रस्तावित सांप्रदायिक हिंसा निषेध विधेयक कांग्रेस पार्टी का सबसे अधिक भयावह एवं भयानक चेहरा है। इस कानून का मसोदा उस राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने तैयार किया है जो तथाकथित समाजवादियों ,हिंन्दू विरोधियों और साथ ही एक विशेष परिवार के समर्थकों का संघटन है ।

abhishek के द्वारा
July 23, 2011

reservation is a vote bank for political parties.

BECHARA BHARATVASI के द्वारा
July 22, 2011

सही कहा दोस्तों !!!!!!!!!! मुस्लिम आरक्षण की बात आते ही हमारे कुछ मुखौटे बाज़ देशभक्त बुद्धजीविओ को देश की चिंता जरूरत से ज्यादा सताने लगती है | ऐसा लगता है मानो आरक्षण लागू हो गया और अब ये देश पिज्जा की तरह टुकड़े -टुकड़े होने वाला है | मेरे ख्याल से इस कौम को किसी आरक्षण की जरूरत है या नहीं इसका जबाव अपने अन्तर्मन से लीजिये | छदम सेकुलर और कट्टर हिंदुवादियों के दो पाटों में पिस्ता ये समाज आज़ादी से अब तक किस गुनाह की सजा भोग रहा है पता नहीं ?आज़ादी के बाद इन्हें आज तक शक की निगाहों से देखा जाता ?इन्हें म्लेक्ष की संज्ञा दी गयी |आखिर इनके पूर्वज बाहरी jo thhe तो इनके वंशजों की इसकी सजा मिलनी ही चाहिए ? बैसे भी इन्हें आज तक अपनी वफादारी और देशभक्त होने का कोई saboot देना ही पड़ता है |आज़ादी से अब तक भले ही बहुत से वीर अब्दुल हमीद पाकिस्तानियों से लोहा लेते शहीद हुए हो पर इनकी पाकिस्तान से अशक्ति किससे से छुपी है क्यूंकि हमारे बुद्ध जीवी देशभक्त नेताओं ने सदैव इन्हें एक खतरे के रूप में प्रोजेक्ट कर वोटो का ध्रुवीकरण किया और हिन्दुओं का ध्यान बांटकर उनके वोटो से सत्ता पाई तो बही हमारे सेकुलर नेताओं ने बहुसंख्यकों का डर दिखा कर इन्हें वोट बैंक की तरह प्रयोग किया| जब इन्होने ने तरक्की की कोशिश की प्रायोजित दंगे कराकर इनकी संख्या को सीमित किया गया |संगठित होने की कोशिश की तो इनके संगठन को आतंकी बताकर बंद किया गया |शिक्षित होने की कोशिश की तो मदरसों को आतंक की शरण स्थली बताकर बदनाम किया गया |धर्म ,रीति रिवाज़, भाषा के आधार पर इन्हें समाज के ठेकेदारों ने एक लड़ाकू रहस्मयी अछूत समूह में बदल दिया और जब इन्होने हक की मांग की तो इनके अशिक्षित कहकर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड लिया | कही बम फट तो इनके घरो की तलाशी की आड़ में इनकी बहिन बेटियों की इज्ज़त से खिलवाड़ किया गया किसी ने इसका विरोध किया तो आतंकी बताकर गोली मार दी |अरे ये तो ऐसे ही जीते रहे है कीड़ों की तरह और कीड़ों के आरक्षण की बात तो संविधान में लिखी ही नही होंगी |ये यूँ ही रेंग रेंग कर आगे बढ़ने की कोशिश करते जरूर है पर १९४७ से आज तक इन्होने तरक्की की कुछ खास दूरी तय नहीं कर पायी है |और अब ये पता नहीं कहाँ से ऑपरेशन द्वारा आरक्षण की रीढ़ डालकर इनकी चाल को बढ़ाने का दुस्साहस किया जा रहा |क्या वोटो के ध्रुवीकरण का खेल फिर से शुरू हो गया है |या फिर से इनकी आबादी ज्यादा बढ़ गयी है……तो क्या फिर से दंगो का बैगोंन स्प्रे छिड़कना होगा | बैसे ये एक शोर है अपने में मस्त इन कीड़ो का ध्यान अपनी और खीचने के लिए | ये मुस्लिमो का नहीं सत्ता का आरक्षण है क्यूंकि सेकुलर इनका आरक्षण का ड्रामा रचेंगे और वोट का सौदा करेंगे तो बही हिंदूवादी इसका विरोध कर अपने लिए राजयोग की तय्यारी करेंगे |इनकी नूराकुश्ती में दोनों ठगे जायेंगे | देश के बकबकिए बुध जीवी बडबड करके देश के टुकड़े होने की दुहाई देंगे |हाँ जब कट्टरपंथी त्रिशूल बांटते है ,|मनसे जब यु पी बिहार वालों को बोम्बे सॉरी मुंबई से खदेड़ते hai तो ये बुध्ह जीवी गाँधी जीके बन्दर हो जाते है| 50 साल तक सत्ता की कमान सँभालने वाले इन लोगो की आंखे क्या अब तक बंद थी की एक दम से इनका मुस्लिम प्रेम जाग उठा इन्हें मुस्लिमो का नहीं कुर्सी का आरक्षण चाहिये पर आप log बताएं की अगर शरीर के एक अंग को पोलियो हो जाये तो क्या शरीर सुन्दर दीखता है अगर samaj का एक हिस्सा पिछड़ा रहेगा तो क्या पूरे समाज की तरक्की में badhak नहीं बनेगा ……………….सवाल वही है जबाब आपको ढूंढना है ??????????????????????????????????????????????????????????????????

    gullu asnani के द्वारा
    July 26, 2011

    दुसरे लोग भी इस लिंक को देखकर ज्ञान प्राप्त करें कृपया.

AKHILESH KUMAR YADAV YADAV के द्वारा
July 22, 2011

जी बहुत बहुत धन्यवाद http://yadavbasti.jagranjunction.com/2011/07/21/001/

Dharmendra Pandey के द्वारा
July 20, 2011

Whenever any law or planning constitute on the grounds of discrimination, it’s natural to oppose such laws by the effected people. Its universal truth that the laws which was constituted keeping in mind the benefit of all civilians, be able to keep united to the Nation as well as to the community. The law which was constituted on pillars of religion or race or caste, not only divides community, religion but also divides to the Nation. SC/ST Act which makes necessary culprit to non SC/ST people for the act either he had done or not & reservation are such laws which has divided community and increased casteism. If reservation awarded on the grounds of religion, it shall definitely divide to the Nation too. Reservation is not a fruitful means to upliftment of weaker sections on the ground of races, cast and religion. Indian Constitution rule (15) prohibit discrimination on grounds of religion, race, caste, sex or place of birth and rule (16) protest Equality of opportunity in matters of public employment, however subsection (C) of both rules allows to make special provisions for upliftment of weaker section But the question is who is weaker, A MLA or MP or Minister or IAS/IPS/IRS/IFS or government servant whose income is above 2.40 Lacs annually or a people whose income is less then 1 Lac annually ? Who is depressed, a politician, a government servant or a poor people? Is religion or caste or race makes a people weaker, depressed or prosperous? From last 60 years, Government has made a lot of special provision for SC/ST and OBC to uplift them and still these provisions are increasing in place of decreasing. Again questions arise, after awarding thousands provision to uplift SC/ST and OBC, why are they not uplifted then? If uplifted, then why is awarding not decreasing? Why the reservation and other special provisions are not being awarded to the weaker section of General category? Hence the conclusion is that the reservation awarding on the grounds of religion and caste will divide to the community and the Nation, which is crucially harmful for the unity of Nation. As such reservation should be on the grounds of Income not on the grounds of religion, race, caste, sex.

Umesh Chandra Pathak के द्वारा
July 20, 2011

1. अनुकूल नहीं हॊगा.. 2. य़दि आरक्षण की आवश्यकता है, तो इस आवश्यकता का कोई आधार होगा.  यह धर्म  भी हो सकता है. एक तरफ आवश्यकता और दूसरी तरफ सांप्रदायिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता-अखंडता- सामंजस्य बनाना होगा.

    Umesh Chandra Pathak के द्वारा
    July 20, 2011

    3.छवि अवश्य खंडित होती है.  जिसे छवि की चिंता है, उसे इस पर विचार करना चाहिए कि आखिर आरक्षण की आवश्यकता क्यों पडी. 4. आरक्षण हमेशा योग्यता के मूलभूत सिद्धांत का उल्लंघन होता है. लेकिऩ अऩुचित वैषम्य से लडने के लिए यह जरूरी हो सकता है. 5.आज प्रायः आरक्षण, राजनीतिक लाभ के कारण ज्यादा और सामाजिक आवश्यकता के कारण कम, होता है.

Gaurav के द्वारा
July 20, 2011

यक़ीनन ये दुर्भाग्य पूर्ण है कि सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिज्ञ आरक्षण का ऐसा बीज बो रहे है जिसका भयानक दुष्परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा | मेरी राय में आरक्षण का सिर्फ एक ही मुद्दा होना चाहिए आर्थिक स्थिति के आधार पर अन्य कोई आरक्षण का क्या औचित्य है जब देश एक है उसकी परिस्थियाँ सभी के लिए एक बराबर है ये नहीं कि मुसलमान के लिए या फिर एक दलित के लिए या फिर एक पंडित के अलग अलग है | तो फिर आरक्षण किसी एक के लिए ही क्यों ?????????

    seemant के द्वारा
    July 25, 2011

    जी हां.

subhash के द्वारा
July 19, 2011

vote bank ki ghtiya politics congress is des ka satyanas karegi

s p singh के द्वारा
July 19, 2011

हम तो यह बात ही समझने में असमर्थ है की जब इस देश का बंटवारा ही धार्मिक आधार पर हुआ था दो भागों में नहीं बल्कि तीन भागों में हुआ था फिर धार्मिक आधार पर मुस्लिमों को आरक्षण क्यों ? वैसे भी इस देश का मुस्लिम भारत के संवैधानिक ढांचे में रह कर भी अपने इस्लामिक कृत्यों के लिए स्वतंत्र है और उसे भारतीय संविधान के प्रावधानों से छुट भी प्राप्त है तो फिर आरक्षण की एक और छूट क्यों ? क्या मुसलमान को इस्लामिक कानून यह इजाजत देता है की वह आरक्षण प्राप्त करे ? जहाँ तक मेरा विचार है इस्लाम में किसी भी मुसलमान को कोई आरक्षण नहीं है तो फिर भारतीय संविधान के अंतर्गत आरक्षण क्योंकर सवीकार करेगा कोई मुसलमान – यह कोरा वोट बैंक की राजनीती का सवाल है किसी की दशा सुधारने का अगर यह एक पैमाना होता तो आज ६४ वर्ष बीत जाने के बाद ही इस देश का बाल्मीकि समाज जहाँ तहां सर पर मैला ढ़ोने के कलंक से तो उबर जाता – सिंह एसपी

Mohd. Rafiq Chauhan(Advocate) के द्वारा
July 19, 2011

आपने अपने लेख “मुस्लिमों को आरक्षण बनाम वोट की राजनीति” के पैरा नम्बर 4 में लिखा है कि “भारतीय संविधान धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को खारिज करता है” लेकिन मैं आपकी जानकारी के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के अन्तर्गत पारित किए गए नियम 1950 को पेस्ट कर रहा हूं। जिसके अन्तर्गत जातिगत आधार पर हिन्दूओं, सिक्खों और बौद्ध को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिया गया है। जबकि मुस्लिम और इसाईयों की अनुसूचित जाति के साथ भेदभाव किया गया है।   THE CONSTITUTION (SCHEDULED CASTES) ORDER, 1950]1 (C.O.19) In exercise of the powers conferred by clause (1) of article 341 of the Constitution of India, the President, after consultation with the Governors and Rajpramukhs of the States concerned, is pleased to make the following Order, namely:- 1. This Order may be called the Constitution (Scheduled Caste) Order, 1950. 2. Subject to the provisions of this Order, the castes, races or tribes or parts of, or groups within, castes or tribes specified in 2[Parts to 3[XXII] 7{XXIII}8XXIV of the Schedule to this Order shall, in relation to the States to which those Parts respectively relate, be deemed to be Scheduled Castes so far as regards member thereof resident in the localities specified in relation to them in those Parts of that Schedule. 4[3. Notwithstanding anything contained in paragraph 2, no person who professes a religion different from the Hindu 5[, the Sikh or the Buddhist] religion shall be deemed to be a member of a Scheduled Caste.] 6[4. Any reference in this Order to a State or to a district or other territorial division thereof shall be construed as a reference to the State, district or other territorial division as constituted on the 1st day of May, 1976.] ____________________________________________________________________ 1. Published with the Ministry or Law Notification No. S.R.O. 385, dated the 10th August, 1950, Gazette of India, Extraordinary, 1950, Part II, Section 3, page 163. 2. Subs. by the Scheduled Castes and Scheduled Tribes Lists (Modification) Order, 1956. 3. Subs. by Act 18 of 1987, s. 19 and First Sch., for “XXI” (w.e.f. 30-5-1987). 4. Subs by Act 63 of 1956, s. 3 and First Sch., for paragraph 3. 5. Subs. by Act 15 of 1990, s. 2, for “or the Sikh”. 6. Subs. by Act 108 of 1976, s. 3 and First Sch., for paragraph 4 (w.e.f. 27-7-1977). 7. Subs. by Act 28 of 2000 , s. 19 and Third Sch. (w.e.f. 1.11.2000). 8. Subs.by Act 29 of 2000, s. 24 and Fifth Sch. (w.e.f. 9.11.2000) ———————————————————————-

    Sanjay के द्वारा
    July 20, 2011

    इस्लाम और क्रिस्टियन मत में जाति की अवधारणा ही नहीं है तो आरक्षण क्यों.

    subhashmittal के द्वारा
    July 20, 2011

    भाईजी ,aap ने स्वयं भारतीय संविधान का अनुछेद पोस्ट किया है जिसके अंतर्गत केवल हिन्दू,सिख,बोध ही आरक्षण के अधिकारी है तो आप बताएं की संविधान से ये सरकार उपर है क्या ?

Akhil Ranjan के द्वारा
July 19, 2011

आरक्षण की जरुरत उन्हें होती है, जो उस जगह के लिए सक्षम नहीं है. जो उस जगह को पाने के लायक नहीं है. आजकल के घटिया पुल, सड़क, इमारतें इस बात का सबूत है की उन्हें बनाने वाले इंजिनियर या तो भ्रसटाचार में लिप्त है या उन्होंने शिक्षा ही आरक्षण के दम पे पाई है. और सिर्फ इंजिनियर ही क्यों डॉक्टर और अन्य कई लोग इसी श्रेडी में आते है.क्यों सर्कार उन्हें सामान्य शिक्षा मुफ्त उपलभ नहीं कराती, क्यों उहे प्रेरित नहीं करती की वो अपने दम पे पढ़ लिख कर उस काबिल बने की उन्हें आरक्षण की जरुरत नहीं पड़े. वजह बिलकुल साफ़ है, vote , साधन उपलभ कराने में पैसो की जरुरत होती है जो ये नेता खुद ही गटक जाते है, तो बचता है सिर्फ एक रास्ता की आरक्षण जिससे एक सामान्य श्रेणी के छात्र की जगह पे एक ऐसे चार्टर को बिठा दिया जाता है जिसे वहां पहुचने के लिए अभी बहुत महनत की जरुरत है. और जब कोई हाथ से खिलने तो तयार है तो तो खुद खाना खाने की जेहमत कौन उठाये.

C.P.SHYAM के द्वारा
July 19, 2011

जब तक केवल कुर्सी के लिए राजनीति होती रहेगी, ये आरक्षण का खेल चलता रहेगा. इसमें क्या मुस्लिम, क्या दलित, क्या पिछड़ा वर्ग…..कहने को तो देश में सब समानता है लेकिन वही बात जैसे लेखक ने कहा – ‘फूट डालो और राज करो’…..

Tamanna के द्वारा
July 18, 2011

संविधान के अनुसार हमारा भारत देश एक धर्म-निर्पेक्ष राज्य है. जिसमें कोई धर्म ना तो छोटा है और ना ही बड़ा. तो ऐसे में क किसी एक खास वर्ग को धर्म के आधार पर आरक्षण देने का क्या मतलब हैं? यह स्पष्ट तौर पर एक राजनैतिक हथकंड़ा हैं. जिसका सीधा असर वोट बैंक पर पडेगा. आरक्षण जैसे मुद्दे किसी विकासशील राष्ट्र से संबंधित हो ही नहीं सकते. खासतौर पर ऐसा राष्ट्र जो अपने सभी नागरिकों को जीवन यापन,शिक्षा और आय के अवसरों पर समान अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है वह कैसे आरक्षण को उचित ठहरा सकता हैं. समाज और उसके लोगों को बराबरी की आवश्यक्ता है ना की किसी आरक्षण की.

shivanand के द्वारा
July 18, 2011

दुख इस बात का hai की एसे लोगो की सरकार satta me kyo hai ……………………….. लोग इन बातो क्यों भूल जाते hai……

    Sunil के द्वारा
    July 19, 2011

    क्योकी हममे एकता नही है। पहले मुसलमानो ने फिर अंगरेजो ने अब अपने लोग फायदा उठा रहे है।

    Sanjay के द्वारा
    July 20, 2011

    क्योंकि हम फूट डालो राज करो की नीति से ठगे जाते हैं

    DHEERAJ PAWAR के द्वारा
    July 24, 2011

    क्यों की लोग भी स्वार्थी होते है साहब! लोगो को देश की किसी भी समस्या से मतलब नहीं, उन्हें केवल खुद से मतलब है नहीं तो क्यों ये बड़े बड़े तिलक लगाने वाले सर पर चोटी(शिखा) रखने वाले घोर हिन्दू विरोधी कांग्रेस का समर्थन करते …..?

shaktisingh के द्वारा
July 18, 2011

किसी खास वर्ग को आरक्षण देना देश के हित के लिए सही नहीं है, आरक्षण का यह खेल देश में एक क्रांति जरुर उत्पन करेगा.

    सुमन मनोहर चतुर्वेदी के द्वारा
    July 19, 2011

     मुस्लिमो को आरक्षण दे कर मनमोहन सरकार ये साबित करना चाहती है की हिन्दू और मुस्लिमो में मतभेद हो जाये और हमें वोते मिलता रहे ! किसी खास वर्ग को आरक्षण देना देश के हित के लिए सही नहीं है, आरक्षण का यह खेल देश में एक क्रांति जरुर उत्पन करेगा.संविधान के अनुसार हमारा भारत देश एक धर्म-निर्पेक्ष राज्य है. जिसमें कोई धर्म ना तो छोटा है और ना ही बड़ा. तो ऐसे में क किसी एक खास वर्ग को धर्म के आधार पर आरक्षण देने का क्या मतलब हैं? यह स्पष्ट तौर पर एक राजनैतिक हथकंड़ा हैं.

    Dharmendra Pandey के द्वारा
    July 20, 2011

    Yes, a revolution will come but how? We are sleeping, don’t want to awake, not raising our voice, then how a revolution will come? When election comes, we divide into caste, religion and race. This is democracy sir, who have counting, that have Government………..

    babu के द्वारा
    October 27, 2011

    बहस का कुल सार यह है कि देश के एक वर्ग को विकास नही करना चाहिये । आरक्षण का आधार धर्म नही हो पर जिनका समाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्तर देश मे सबसे निचे हो उनको तो मिलना चाहिये न , अब यह हमारा दुर्भाग्य है कि मुस्लिम समाज आज सबसे ज्यादा पिछडा है , जो अत्यन्त पिछडे मुस्लिम है उन्हे तो आरक्षण का लाभ मिलना चाहीये । कुछ अति देश भक्त यह चाहते है कि इस करोडो कि आबादी को दबा कर रखा जाये , पर यह ज्यादा दिन नही चलने वाला यदि यही व्यवस्था रही तो देश का विभाजन भी हो सकता है । और ये हमारे तथाकथित अति देश भक्त इस विभाजन का आधार बन रहे है । यही तो पाकिस्तान चाहता है । यदि देश को खुश हाल करना है तो देश मे सभी को समानता के अधिकार हो जो वास्तव मे पिछडे है उन्हे आरक्षण मिले ।


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