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बलात्कारी के लिए क्रूरतम दंड का विधान या मानवाधिकार का ध्यान !!

पोस्टेड ओन: 16 May, 2011 Uncategorized में

बलात्कार एक ऐसा भयावह अपराध है जिसकी शिकार हुई पीड़िता ही उस दर्द को बेहतर जानती है. समाज के भेड़ियों की नजरें अपने उस शिकार पर इस तरह आ गड़ती हैं कि ताउम्र पीड़िता को वही चेहरा याद आता है और उसकी जिंदगी पल-पल मौत में तब्दील हो जाती है. लेकिन समाज की बेरुखी देखिए कि वह बलात्कारी के खिलाफ कठोर होने की बजाय शिकार हुई पीड़िता को ही दोषी ठहराने लगता है.


बहुत दुखदायी बना दी जाती है उस स्त्री की जिंदगी जो किसी की हवस का शिकार बनी हो. ना सिर्फ समाज बल्कि घर वाले भी उसकी ओर उदासीन रवैय्या अपना लेते हैं. छोटी-छोटी बच्चियां भी कुत्सित वृत्ति वाले दरिंदों की जब-तब शिकार बनती रहती हैं, यहॉ तक कि अकसर परिचित और रिश्तेदार भी नादान बच्चियों से अपनी वासना शांत करते हैं और लोकलाज के कारण ऐसे मामले घर में ही दबा दिए जाते हैं.


बलात्कारियों के खिलाफ कठोर सजा की पैरवी करते हुए दिल्ली की एक सत्र अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लॉ ने बधियाकरण (नपुंसक बनाना) को समय की जरूरत बताते हुए बलात्कारियों के लिए शल्य चिकित्सा या रासायनिक प्रक्रिया से बधियाकरण यानि नपुंसक बनाने का प्रावधान जोड़ने की सिफारिश की है.


न्यायालय के अनुसार, देश के कानून बनाने वाले विद्वानों को अभी भी यह बात संज्ञान में लेना बाकी है कि बलात्कार की वैकल्पिक सजा के तौर पर सर्जिकल या रासायनिक बधियाकरण जैसी सजा दी जाए. विशेष रूप से मासूम बच्चियों, नाबालिग के दुष्कर्मियों को ऐसी सजा देने के बारे में गंभीरता से विचार होना चाहिए.


जागरण जंक्शन दुनियाभर के पाठकों से, बलात्कार जैसे जघन्यतम अपराध के मामलों में अपराधियों के लिए दंड का क्या प्रावधान होना चाहिए, जैसे मसले पर अपनी राय व्यक्त करने का अनुरोध करता है ताकि समाज के सर्वाधिक घृणित और जघन्यतम अपराध पर जन आवाज को मुखर रूप दिया जा सके. इस बार का मुद्दा है:


बलात्कारी के लिए क्रूरतम दंड का विधान या मानवाधिकार का ध्यान !!


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जारी कर सकते हैं.


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “बलात्कार और दंड का प्रावधान” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व बलात्कार और दंड का प्रावधान – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.


धन्यवाद

जागरण जंक्शन टीम




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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shani के द्वारा
May 7, 2012

balatkariyo ko napunsak bana dena chahiye. lekin desh ke neta khud itne kamine hai ki wo eisa ko kanun nahi banayene jisase crime kam ho

saleem के द्वारा
February 10, 2012

एक बहुत पुराणी सी कहावत है “prevention is better than cure”. “इलाज करने से अच्छा है की बच के रहा जाये”. अगर किसी बलातरी को फँसी हो भी जाती है तो क्या उस महिला की इज्ज़त वापस अ जाएगी. क्या वो उसे भूल जाएगी?इसलिए इन सब फालतू की बअतो से अच्छा है इस सब से बचने की कोशिश की जाये. अज कल जिस तरह से कुछ महिलाये पैसे कमाने के चक्कर में अपने अंग का अश्लील प्रदर्शन कर रही है और पुरुषों की भावनाओं को भड़काने का कम कर रही है और कुछ महिला संगठन की महिलाये जो खुद बॉडी गौर्द के साथ चलती है और महिलाओं के कपडे उतरने और अंग प्रदर्शन को महिलों की आज़ादी से जोड़ कर अपने संगठन का नाम ऊँचा करने में लगी हुई हैं.उनको ये सोचना चाहिए की उनकी इन सब हरकतों का खामियाजा उन गरीब और कमजोर महिलाओं बच्चियों और बुजुर्ग महिलाओं को भुगतना पद रहा है जिनका इन सब से कोई लेना देना नहीं है. इसलिए मैं भारतीय महिलाओं से अपील करता हूँ की उन चंद महिलाओं के बहकावे में न आयें . हर हर प्रकार से अपनी सुरख्चा का धयान रखे. भारत की महिलाएं इतनी सुन्दर है की उन्हें अपने अंगो को दिखा कर सेक्सी लगने की कोई जरुरत नहीं. अप अगर भारतीय कपडे भी पहनेगी तो भी सुदर दिखेंगी.और सेक्सी दिखने की क्या जरुरत जब आपको बहार सेक्स करना ही नहीं है. भारतीय महिलाओ की शालीनता और शंस्कर पूरी दुनिया में मशहुर है उसे बरक़रार रखे.अंग्रेजो को हमारी नक़ल करने दे.हमें उनकी नक़ल करने की कोई जरुरत नहीं.क्यों हमारी संस्कृति अज भी दुनिया में बेस्ट है.

zulfekar khan के द्वारा
January 24, 2012

अगर बलात्कार साबित हो जाता है फिर उसकी सजा सिफ और सिफ मौत होनी चाहिए

Prakash के द्वारा
July 25, 2011

मै संक्षेप में लिख रहा हूँ। 1. This offence is growing very fastly in our society & in my view among the reasons & causes whatever be behind it but media is major among those reasons.Because media showing not only sufferer & her helplessness & compulsion some obscene also.Which actually compel the people to commit .&it is easy available in today world.actually new channels’ purpose/objective is to make their program interesting & add something which attract people & they use to show some obscene also of that sufferer.they ask many more unwanted questions & broadcast all over the world.these unwanted questions is asked not to help sufferers but for the interest of spectators & themselves.

Martanday के द्वारा
June 23, 2011

मेरे विचार से अपराधों की दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी का कारण आज की फिल्मे, टीवी, इन्टरनेट और मोबाइल है | हर जगह अश्लीलता की भरमार है | इसके ऊपर आज की नारी इतनी बोल्ड हो गई है की उसको कपडे उतरने में कोई लज्जा नहीं होती | और घर अगर खुला रहेगा तो चोर का मन तो मचलेगा ही | फिर देर रात तक लड़कियों का बहार घूमना फिरना असामाजिक तत्वों और लोफरों को और प्रोत्साहित करता है | सेक्स एक ऐसी प्रक्रिया है जो इंसान को जघन्य से जघन्य काम करवा सकता है | आदि काल से ही पुरुष नारी को भोगने की वस्तु मानता है और उसको पाने के लिए किसी भी हद तक निचे गिर सकता है | आदि काल से लेकर आज तक साड़ी लडाइयां नारी को लेकर ही हुई है | लड़कियों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे वह बलात्कारी का शिकार न बने | १. भड़काऊ कपडे कम से कम पहने | २. देर रात तक बहार न घूमे | ३. लड़कों से दूरी रखकर दोस्ती करें | ४. कितनी भी पहचान क्यों न हो अपने पुरुष मित्र के साथ किसी सुनसान जगह जाने से बचें | जहाँ तक बलात्कारी को सजा की बात है, कठोर से कठोर होनी चाहिए, जिससे कोई भी इस जघन्य अपराध के बारे में सोचे भी न | तालिबानी टाइप की सजा होनी चाहिए , जैसे बधिया करके आँखे फोड़ देनी चाहिए, जब तक सजा कठोर नहीं होगी अपराध कम नहीं होगा, यह मानवाधिकार की बातें एकदम बकवास है | “लोहार की धम” स्टाइल में न्याय होनी चाहिए | वन्दे मातरम |

    Taani.......... के द्वारा
    October 4, 2011

    जी महोदय आपने सुझाव तो काफी अच्छे बताये है, लेकिन वजह शायद आपको भी नही पता तो आपने ऐवई तुक्का भेड दिया | आप बताने का कष्ट करेंगे की ६ महीने की या ६ साल की या ६० की महिला कौन से भड़काऊ कपड़े पहन लेती है जो पुरुषो को ललचाने पर मजबूर कर देते है | और आपके हिसाब से तो मुस्लिम देशो में बलात्कार ही नही होते होंगे क्यूंकि आप जैसे छोटी सोच वाले लोगो ने तो ये सारे फतवे वहां जारी कर ही रखे है | आपके हिसाब से तो जरी जनम ही बंद हो जाना चाहिए क्यूंकि वो अपने आपको शक्तिशाली कहलाये जाने वाले पुरुषो को इतनी आसानी से निचे गिरा सकती है की वो बस कम कपडे पहने और पुरुष अपनी हैवानियत दिखा दे | आपको सरकार से लड़ते लड़ते समय बीत जाता है की हमे आज़ादी चाहिए, लोकतंत्र चाहिए किन्तु वो महिला को नही मिलना चाहिए | इन सबकी वजह है मानसिकता महिला की जिस छाती को देखकर आप ललचाने लगते है दुसरे रूप में माँ की उसी छाती का दूध पीकर आप शक्तिशाली बने है | अगर ऐसा सोचने लगे तो शायद हैवानियत कम हो जाये | आप भी अपनी मानसिकता बदले नहीं तो मैं दुआ करुँगी की आपके घर लड़की का जन्म न हो | धन्यवाद

SKKJI के द्वारा
June 22, 2011

All living beings are kept hale, hearty and healthy by nature. However human beings have very easy tendency to play foul with their health because of Stress or unmindful and incorrect eating habits. Do not get panicky. The nature still provides ways to keep balance (SANTULAN). Four hours in a month devoted to Ayurveda and Panchakarma offer you the key to good health. Are you keen to find this key OK search ayurngo on google to reveal the key.

abbas के द्वारा
May 31, 2011

मॆरॆ बाबा बम मग वल सक रग बपल हरस तुमहारी मा 

abhishek के द्वारा
May 30, 2011
tejwani girdhar, ajmer के द्वारा
May 22, 2011

वस्तुतः बलात्कार कम ही संभव हो पाता है, अमूमन पहले रजामंदी होती और बाद में पकडे जाने पर लडकी कानून का फायादा उठाना चाहती है, रहा सवाल अगर वाकई कुछ लोगों ने मिल कर सामूहिक बलात्कार किया है तो उन्हें फांसी देना गलत नहीं है

kschitij gupta के द्वारा
May 21, 2011

THE PENIS OF THE RAPIST SHOULD BE CUT OF BY ANY ONE OF THE FAMILY MEMBER OF WHOME WHO IS RAPED.

Ritambhara tiwari के द्वारा
May 20, 2011

बलात्कार और नारी पवित्रता दो अलग अलग मुद्दे है और उन्हें एक कर के देखने न सिर्फ नारी के साथ बल्कि पूरी मानवता के साथ अन्याय है .आखिर नारी उस कलंक को क्यों ढोए जिसकी जिम्मेदार वो स्वयं है ही नहीं?

Chander Parkash Sharma के द्वारा
May 20, 2011

जो स्त्री जाती आज पथ भ्रष्ट हो गयी हैं. पर पुरुष से प्रेम करती है, अवैध सम्बन्ध बनती है अपने पति से अपने बचों से गद्दारी करती है पति के भरोसे का कतल करती है और जब पति को सचाई पता लग जाती है तो वह उस पति को भी ठिकाने लगाने में गुरेज नहीं करती और अपने प्रेमी से मिलकर अपने ही पति का कतल करवा देती है ऐसी औरतों के बारे में हमारे समाज और नारी संगठनों की क्या राय है इस पर भी बहस होनी चाहिए. चन्द्र प्रकाश शर्मा 9560883216

chander Parkash Sharma के द्वारा
May 20, 2011

बलात्कार साबित होने पर उसको नपुंसक बनाने की बजाये कम से कम १० साल की सजा सुनाई जाये. ये तो हो मेरा एक पक्ष. दूसरा.: काम वासना पुरुष की सदा से एक कमजोरी रही है. ये इच्छा पूरी न होने पर वो इधर उधर मुह मारने की कोशिश करता है. या तो वह हस्तमैथून के माध्यम से सखलित कर लेता है या किसी शिकार की तलाश में रहता है. हमारा इतिहास या हमारे शाश्त्र वेद पुराण भी इस बात के साक्षी रहे हैं. ब्रह्मा जी अपनी पुत्री पर मोहित हो गए थे. जय दरथ द्रोपती पर मोहित था. रावन सीता जी का हरण उनके सोंदर्य पर मोहित होकर ही हरण कर के ले गया था. बड़े बड़े ऋषि मुनि संत तक स्त्री के सोंदर्य पर मोहित होते देखे गए हैं. जर जोरू जमीं सदा विवाद के विषय रहे हैं. औरत के पीछे बड़े बड़े युद्ध लड़े गए. स्त्री जाति और उसके मोहपाश में बंधना मोहित हो उसकी सुन्दरता पर मर मिटना पुरुष की कमजोरी रही है. जब से टी वी पर दुनिया भर के चैनलों की बाढ़ सी आ गयी है. उनमे सारे वाहियात सीरियल दिखाए जाते हैं. पर पुरुष प्रेम, अवैध सम्बन्ध, छल कपट विद्रोह, नारी देह का भोंडा प्रदर्शन, शारीर के काम वासना को भड़काने वाले अंगों का खुला पर्दर्शन, अख़बारों में अश्लील तस्वीरें पुरुष वर्ग की काम वासना रुपी आग में घी का काम करती है. जब फिल्मों में गंदे सीन लटक झटक करती राखी सावंत, मल्लिका सहरावत माधुरी दिक्सित को देख कर पुरुष वर्ग गीता का पाठ तो करेगा नहीं. उसकी काम वासना की आग भड़केगी. तभी वो ये अपराध करने पर मजबूर होगा. दुर्भाग्य देखिये इस देश का यहाँ आत्मा हत्या करने के लिए उकसाने के लिए तो दंड का प्रावधान है लेकिन जो भोगया वास्तु बनकर अश्लील पर्दर्शन करके मानव की काम वासना को भड़का कर अपराध करने पर मजबूर करने वाली नारी के लिए kya यहाँ koi दंड नहीं. chandra parkash sharma 3083 rani bagh delhi-34

Ravinder Kumar के द्वारा
May 19, 2011

कानून से बच निकलने का रास्ता हैं इसिलए अपराधी अपराध करते हैं और बलात्कार जेसे अपराध के लिए तो बलात्कारी को तो फ़ासी लगनी चाहिए इसके आलावा दूसरा कोई दंड इस अपराध के लिए नहीं हैं

shuklaom के द्वारा
May 19, 2011

मै इस बात से शत-प्रतिशत सहमत हुकि अगेर बलात्कारी को खुलेआम नपुंसक बनाने की कार्यवाही का कानून बने तो और कुछ हो या नहीं लेकिन इतना निश्चित है कि इससे वो महिलाये भी जो बलात्कार का शिकार होने के बाद सामाजिक शर्मिंदगी या अन्य कारणों से मामले को प्रगट नहीं करती उन्हें यह प्रोत्साहित करेगा कि वे आगे ए और न्याय के लिए अपनी लड़ाई लड़े. क्योकि सबसे बड़ा रोड़ा यही होता है कि अगेर तमाम जिल्लतो के बाद भी बलात्कारी को मामूली सजा मिलाती है तो उन महिलाओ का जीना हरम हो जाता है जो इसकी शिकार होने के बाद बहादुरी से लड़ती तो है लेकिन जिंदगी भर ओप्मन की जिन्दगी जीती रह्तिहाई,ऐसी महिलाओ को संतोष ही नहीं गर्व होगा कि मेरे साथ दुष्कर्म करने वाला नपुंसक हो जिंदगी भर उसी तरह जिल्लत और अपमान की जिंदगी बसर करेगा.उन्हें इस बात पर भी संतोष होगा कि मैंने अपने स्वाभिमान की रच्छा के खातिर यहसब किया और उसमे सफलता भी मिली.यह भी एक तथ्य है कि इस तरह की महिलाओ का सम्मान बढेगा और उन्हें अपनाने वाले भी ओने को सम्मानित महसूस करेगे. इस तरह के लोगो के मानवाधिकार के हनन का प्रश्न ही नहीं उठता क्योकि उनकी तो कम की धधकती ज्वाला को शांत करने का इलाज किया जायेगा वह भी सरकारी खर्चे से. इस तरह के कानून की बहुत ही अधिक आवश्यकता है,यह जीतनी जल्दी हो सके लागु होना चाहिए.जिस तरह कैंसर के इलाज के लिए ओपरेसन आवश्यक है ठीक उसी तरह इस सामाजिक कैंसर का इलाज भी ओपरेसन ही हो सकता है.

surender kumar tyagi के द्वारा
May 19, 2011

Jagran Junction Forum” बलात्कार मेरी नजर में केवल वो है जो १४ साल से नीचे की लड़कीयो के साथ होता है . और रही इससे जयादा उमर की महिलाओ की बात तो मेरा ऐसा मानना है की केवल १००% में से ५% ही सही में बलात्कार किया गया हो .आज देश में बलात्कार और दहेज़ के कानून को लोगो ने एक ऐसा मजाक बना दिया है जिसका की अदालतों के पास भी इसका कोई हल नहीं है . आप ने देखा होगा की बहुत से केसों में महिलाये अक्सर अपनी बात से पलट जाती है और कुछ महिला जो मेनुपलेट केश करवाती है उनको गवाहों और सबूतों के अभाव में बरी कर दिया जाता है . आज मै एक सवाल नारी जाती से ही करता हु की क्या जिस घर में दहेज़ के लिए हत्या होती है क्या उसमे उस घर की महिलाओ का ९०% योगदान नहीं होता है . होता है.लेकिन आज तक किसी भी मोहले गली गाँव या सहर में किसी महिला ने आज तक अपने आस पास में किसी भी महिला पर होने वाले किसी भी जुलम के खिलाफ कभी कोई आवाज उठाई है ? या कभी किसी ओरत के साथ सच में बलात्कार हुवा है और कभी भी उसको प्यार या इजत दी है ?.जरा ये बात भी इन महिलाओ को ही सोचनी होगी . क्यों नहीं ये महिलाये घर से बहार निकलकर किसी भी पीड़ित महिला की मदद करती ?यदि महिला अपनी आवाज बुलंद करे तो मेरा अपना मानना है की आज जो ये सब महिलाओ के साथ बलात्कार, दहेज़ हत्या, सोसन पारिवारिक जुलम और जो ये घुत्तन भरी जिन्दगी है इससे आजादी मिल सकती है . आप सोच रहे है की सुब्जेक्ट क्या है और मै ये लिख क्या रहा हु . हा हो सकता है लेकिन मै अब मूल परसन की बात करता हु की बलात्कारी को क्या सजा मिलनी चाहिए . बलात्कारी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो की समाज मे एक बुरा काम करने के प्रति डर पैदा करे . और कभी भी कोई आदमी ऐसा करने की सोचे भी ना. वो चाहे मर्त्युदंड हो या एनी कोई भी सजा हो वो सभी लोगो को पता होना चाहिए की आज बलात्कार करने के सजा क्या है . और आज मे साथ -साथ ये भी कहना चाहूँगा की मीडिया को भी इसमे अपनी भूमिका निभनी होगी क्योकि आज मीडिया मे यदि किसी महिला के साथ बलात्कार होता है तो उसे बढ़ा चढ़ा कर लिखना और इलेक्ट्रोनिक मीडिया तो हद ही कर देती है ऐसे स्टाइल और किस्तों मे परोसते है जैसे ये कोई अपराध ना हो कर के कोई एन्तेर्तेंमेंट की फिलम हो . मुझे तो आज सबसे जयादा गुस्सा अपने देश की इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर आता है . मुझे ही क्यों आज देश की ८०% जनता इन न्यूज़ चनेलो से खफा है अगर इन न्यूज़ चनलो मै हिमत्त है तो एक सर्वे करवाकर देख ले जनता मै कितना गुस्सा है .और आज समाज को बिगड़ने मै इन न्यूज़ चनलो की कितनी भूमिका है .आने वाले ५-७ वर्सो मे देखना आप को हर रोज कोई न कोई जरुर सुनने मै मिलना सुरु हो जायेगा आज फला चैनल वाले वहा पिटे और फला चैनल वाले वहा पिटे. जितना गंद आज समाज मै इन चैनलो ने फला रखा है , जो आज ये रिपोर्टर बड़े शान से हाथ मे चानेल का मायिक लेकर सडको पर निकलते है और इसे बहुत बड़ी इज्जत समझते है . वो दिन दूर नहीं जब ये ही न्यूज़ चानेल वाले ये अपने सब मायिक वाईक और कैमरा आदि छुपाकर सडको पर फिरते होंगे और जो ये कवरेज वाहन है इस के उपर तो कोई नाम ही नहीं होगा. की यह कोण सा चानेल है .क्या मीडिया कभी अपने गिरेवान मे झाकेगी कि इस देश मे न्यायपालिका .कार्यपालिका विधायिका से भी ज्यादा जिमेदारी मीडिया कि बनती है जो कि आज मीडिया नहीं निभा रही है. बस ज्यादा कुछ लिखना नहीं है समय सब घावों का महलम है. (सुरेंदर कुमार त्यागी )

    jasbir singh lohchab के द्वारा
    May 19, 2011

    सायद मै समंझता हूँ कि इससे ज्यादा लिखा नहीं जा सकता थंक्स

Taarkeshwar Giri के द्वारा
May 18, 2011

बलात्कार एक ऐसा अपराध हैं, जिसकी सजा भी बलात्कार कि तरह ही होनी चाहिए. जिस तरह से बलात्कार का दंस झेल रही महिला या लड़की पूरी जिन्दगी अपने आप को कोसती रहेगी , ठीक उसी तरह से बलात्कारी को भी ऐसी सजा होनी चाहिए जिससे कि बलात्कारी भी पूरी जिन्दगी ईस बात का एअहाश करता रहे कि उसके साथ भी बलात्कार हुआ हैं. मसलन बलात्कारी को नपुंसक बना देना चाहिए. ठीक इसके साथ एक बात और कहना चाहूँगा कि सजा कभी भी अपराध को नहीं ख़त्म कर सकती . अगर ऐसा होता तो ना जाने कितने बलात्कारी जेल कि हवा खा रहे हैं और ना जाने कितने को फांसी कि सजा मिल चुकी हैं मगर आज भी अपराध उसी तरह से हो रहा हैं. अपराध को तभी ख़त्म किया जा सकता हैं जब एक सुन्दर सा सामाजिक ढांचा समाज मैं आये , और हम अपने आने वाली पीढ़ियों को ये समझा सके कि क्या गलत हैं और क्या सही.

R B RASTOGI के द्वारा
May 18, 2011

JAGRAN JUNCTION FORUM i propose to hang the rapist without giving any other chance in the larger interest of society.

rachna varma के द्वारा
May 18, 2011

बलात्कार अर्थात बिना मर्जी के या बिना सहमति के किया जाने वाला वह कृत्य जो अमानवीय है.इस लिए कानून बनना चाहिए मगर हमारे देश में कानून इतना लचर है कि न्याय मिलने में ही पीडिता को यह समाज और अदालत इतना वक्त लगा देता है कि अपने ऊपर होने वाले अत्याचार को कोई भी महिला जल्दी सामने नहीं आने देती है और इसलिए आज भी बलात्कारियो के हौसले बहुत बुलंद है | दूसरी ओर देखिये तो हमारे समाज का ताना -बाना बिगड़ चुका है नारी मात्र देह बन कर रह गयी है , नारी को उपभोग कि वस्तु बनाने कि मानसिकता से बाहर निकलना होगा .उसे आदर और सम्मान देने कि परम्परा शुरू करनी होगी ” आखिर नारी तुम केवल श्रधा हो ,विश्वास रजत नग पग तल में पियूष स्त्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में ” जैसी बाते लिखी गयी है

Badre Alam Khan के द्वारा
May 18, 2011

Only most effective way is to allow free sex. Believe me or not this will happen even if sex is not made free but after 7-10 years.To make it time effective govt. must step up from today itself. Then will be easier to be strict against rape.

    R B RASTOGI के द्वारा
    May 18, 2011

    India is not a platform of free sex .Sex is totally curtain-stricken in Bharat.Free sex can never be a solution of rape.A rapist must be hanged.

Anupam Upadhyay के द्वारा
May 18, 2011

सामाजिक व्यवस्था को नियंत्रित करने समाज को सभ्य समाज बनाने हेतु बहुत सुन्दर उदाहरण श्री मद रामचरित मानस में गोस्वामी जी ने लिखा है, राम राज बैठे, त्रैलोका हर्षित भये, गए सब शोका”, यह क्या बात है, अति संछेप में बात यह है के उससे पहले १४ वर्ष तक भरत जी ने जूता राज चलाया था, अयोध्या के राज सिंघासन पर श्री राम की पादुका रख कर राज किया था, अर्थात किसी भी अनुशासन हीनता के लिए कठोर दंड, और यह इतना कठोर था के राम जी के वापस आने तक समस्त समाज अनुशासन से जीना सीख गया, और जब राम जी वापस लौटे तो राज्याभिषेक के समय उस कठिन अनुशासन से कुछ मुक्ति उस समाज को दे दी और बात बन गयी त्रैलोका हर्षित भये. दूसरी बात है बिनु भय होय न प्रीत गुसाईं. माने समाज को सुधारने के लिए कठोर नियम तथा दंड व्यवस्था का होना तथा उसका उचित रूप से लागु होना अतिआवश्यक है.

lata kamal के द्वारा
May 17, 2011

यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हम सभी को खुल कर बात करनी चाहिए .इसमें संदेह नहीं है की यह कानून बनने से इस प्रकार की घटनाओं मैं कमी आयेगी .फांसी की सजा के मैं खिलाफ इसलिए हूँ की कुकर्मी व्यक्ति तो मर जायगा कुछ दिन लोग याद रखेंगे फिर भूल जायंगे .किसी को डर नहीं रहेगा .असली सजा उस व्यक्ति की पत्नी ,बच्चे व माता -पिता भोगेंगे .समाज के ताने सुनेंगे ,बच्चे स्कूल मैं ,समाज मैं हर स्थान पर सुनेंगे .माता – पिता इस एहसास के साथ जियंगे की वो अपने बच्चे को अच्छे संस्कार देने मैं विफल रहे है .उपर से जीवन यापन की परेशानी अलग .वास्तव में जो अपराध करे सजा भी उसे ही मिलनी चाहिए .आस पास रहने वाले लोग भी उसे देख कर डरेंगे और इस प्रकार की घटना को दोहराने से बचेंगे .वास्तव में इस कानून का असर इसलिए भी अधिक हो सकता है पुरुषों में अपने पुरुषत्व को ले केर बहुत अहंकार होता है [सभी में नहीं]और इसके खो देने का डर उनमें मरने से भी अधिक होता है .एक बात और भी है की जो माता -पिता अपने लाडलो की गलतियों को छिपाने का प्रयास करते है वो भी इस कानून के कारन उनमे संस्कार डालने का प्रयास करेंगे .सारी समस्या मन में किसी भी सजा का डर न होने की है .घर का अच्चा वातावरण ,संस्कार माता-पिता का शालीन व्यवहार इसमें दवाई का काम करेगा .

रचना रस्तोगी के द्वारा
May 17, 2011

अपराध कोई भी हो अगर दंड का प्राविधान नही होगा तो अपराध समाप्त ही कैसे होगा और जहाँ तक बलात्कार जैसे जघन्य अपराध का प्रश्न है तो इस अपराध को करने वाले ज्यादातर समाज के ताकतवर लोग ही होते हैं जिनके हाथ इतने मजबूत होते हैं कि जिन पर कानून का शिकंजा कसना कभी कभी मुश्किल ही नही बल्कि असम्भव सा ही हो जाता है/ बड़े बड़े नेता,बड़े बड़े धार्मिक बाबा और यहाँ तक कि बड़े बड़े औद्योगिक घराने सबके सब लड़कियों के शोषण में लगे हुए हैं / यह भी तो बलात्कार ही है/ फिर अगर कोई पीड़ित लड़की भारत के कानून पर भरोसा करके गलती से पुलिस के पास पहुँच जाय तो यही घटना उसके साथ थाने में भी दोहराई जाती है / जन न्यायालय में केस चलता है तो हर सुनवाई में बलात्कार ही होता है जहाँ वकील अपने ऊटपटांग प्रश्नों से बलात्कार करता है /और न्याय मिले या ना मिले परन्तु वह लड़की समाज में एक उपहास का पात्र बन जाती है./शराब के विज्ञापनों में कम कपड़ों में लडकियां ही दिखाई जाती है यह तो पूरे नारी समाज का ही बलात्कार है/ कई हिंदी समाचार पत्रों में रोजाना ही अर्ध नंगी लड़कियों की तस्वीरें दिखाई जाती है और उनको नाम दिया जाता है “आई केंडी ” ,यह क्या है? कहने का तात्पर्य यही ई कि यह सब बलात्कार को प्र्तोसाहित करने के मार्ग ही तो हैं/ बलात्कार का आरोप कभी कभी किसी रंजिश को पूरा करने में भी होता है यह इस अपराध का दूसरा रूप भी है/खैर बलात्कार एक ऐसा अपराध है जिसको जघन्य अपराध की श्रेणी में रखकर अक्षम्य बना देना चाहिये और इसका एक मात्र दंड भी केवल मृत्यु दंड होना चाहिये / इस अपराध को जितना सख्त बनाया जाएगा उतना ही समाज हित में होगा और एक बात मैं जरुर कहूँगी कि इसकी कानून प्रक्रिया भी अति शीघ्र मतलब दो या तीन सुन्वायियों में ही समाप्त कर देनी चाहिये/ साथ साथ एक बात मैं इस फोरम में अवश्य कहूँगी कि खबरिया चेनलों पर जो बाबाओं के प्रवचन या ज्योतिषीय कार्यक्रम या “निर्मल बाबा की तीसरी आँख” जैसे कार्यक्रम दिखाए जाते हैं इन पर तुरंत प्रतिबन्ध लगाना चाहिये क्योंकि जल्दी भाग्य संवारने के चक्कर में कई लड़कियां इन बाबाओं के चंगुल में ऐसी फंसती है कि फिर वे इन बाबाओं की रखैल बनजाती हैं और दलाल का काम भी करती हैं/ और फिर येही खबरिया चेनल बाबाओं का भंडाफोड़ भी करते हैं/ हर किसी बड़े व्यक्ति की पार्टी में लड़कियों के डांस रखे जाते हैं चाहे वह आई पी एल का खेल ही क्यों ना हो,क्या वह आयोजक अपनी लड़की को सबके सामने नंगा नचवायेगा? तो फिर किसी गरीब की बच्ची के साथ ऐसा व्यव्हार क्यों ?क्या गरीब की बच्ची की इज्ज़त नही होती है ,केवल गरीबी के कारण इन बड़े व्यक्तियों की पार्टी को रंगीन बनाने के लिये उनका प्रयोग होता है/ आज दैनिक जागरण ने बहुत अच्छा वास्तविक सामाजिक प्रश्न उठाया है,इसलिए दैनिक जागरण बधाई का पत्र है / परन्तु इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी अगर अपनी जिम्मेदारी महसूस करले तो हो सकता है कि समाज की दिशा और दशा दोनों सुधर जायें / क्योंकि बढ़ती बलात्कार की घटनाओं में इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी कहीं कहीं एक अंश तक निसंदेह जिम्मेदार है / इस अपराध का एक मात्र न्याय केवल और केवल मृत्यु दंड ही है अगर आरोप सही है तो ? रचना रस्तोगी

NILESH SURYAWANSHI के द्वारा
May 17, 2011

“Jagran Junction Forum” इसमें तो कोई raham की बात ही नहीं है की बलात्कारियो को ऐसी सजा मिलनी चाहिए की सरे समाज को और एक एक व्यक्ति को ये संदेस पहुच जाये की इस दुष्कर्म की सजा कितनी भयानक होती है लेकिन इस मुद्दे पर मैं एक बात और जोड़ना चाहूँगा जो इस तरह की gatana का मूल कारन होता है वो है समाज में और नारीओ में फैसन के नाम पैर बदता खुलापन टीवी फिल्म और पत्रिकाओ के माद्यम से जो नारी का रूप आज के युवाओ के सामने परोसा जाता है उसका कही कही दुस्प्रभाव तो दिखेगा ही केवल सजा दे देना इसका समाधान नहीं है एक नारी ही नारी की भावनाओ को समज सकती है तो उसे बचपन से ही ये बताये की पैसा कमाना ही हमारे जीवन का आखरी लक्ष्य नहीं होना चाहिए आज चाहे पुरुस हो या नारी हो हेर कीमत पर केवल पैसा कमाना चाहता है दुसरो की भावनाओ को जगाकर अपनी रोटी सेकना ये गिरी हुई मानसिकता का नतीजा है लेकिन उनकी लगे हुई आग से उनका घर जलता है तब वे दोस सरकार पुलिस समाज को दोसी बताती है गीता में साफ़ लिखा है की विषय वासना में फस कर मनुष्य अपनी सोचने और समजने की सकती खो देता है और पाप के मार्ग पर चल के पाप कर leta है पाप का कारन सरकार या समाज नहीं हेर वो परिवार है जो नैतिक मूल्यों को त्याग कर पैसा कमाता है जो परिवार ese गंदे फोटो पेपर पत्रिका टीवी सिनेमा में न केवल खुद देखता है बल्कि उसकी चर्चा भी कटा एन्जॉय कर उसको बढ़ावा भी देता है समाज तो एक आइना है मानव मन का दुष्कर्म किया है तो सजा तो मिलेगी और बहुत बड़ी मिलनी चाहिए लेकिन हम केवल सजा की बात कण करके समाधान की ओर भी कदम बढ़ाये और इसकी सुरुआत अपने घर अपने परिवार से करे आज से अश्लीलता फ़ैलाने वाले प्रोग्राम पत्रिका फिल्म सभी को अपने परिवार में पवेश निषेध करे आप एक कदम बडाये आप के पीछे कारवा आएगा. THANK’S

Alok chantia के द्वारा
May 17, 2011

Rape is an anti cultural activity and it should not be considered as human act because man made culture to avoid all those act which is against dignity, we are not animal and why animal? even a bitch or cow don’t permit its counter part if they don;t have will, so rape is more than an animal act which should be taken seriously and culprit should be hanged or gun down as punishment. I think who talks about human rights for rapist , they don’t have mother or sister. rape should be inhuman activity and punishment should also be inhuman for them DR ALOK CHANTIA ALL INDIAN RIGHTS ORGANIZATION(AIRO)

munna के द्वारा
May 17, 2011

इस पोस्ट के माध्यम से कहना चाहता हू की आज तक न तो कोई सर्कार ने समझा नाही अंतर रास्ट्रीय और रास्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने समझा की मानवाधिकार का क्या मतलब होता है मानव और दानव मे समानता चेहरे से मत देखो कर्म की विषमता देखो कोई भी व्यक्ति मुझे समझा दे की एक बलात्कारी क्या मानव हो सकता नहीं कभी नहीं चेहरे से मानव दिखता होगा लेकिन कर्म तो दानव के है YAH कभी नहीं हो सकता की उसको मानवाधिकार की श्रेणी मे रखा जाये बलात्कारी आतंकवादी डाकू ये कभी भी मानवाधिकार मे नहीं आने चाहिए येदी कोई इनको समर्थन करता है तो वो भी अप्रत्यक्ष रूप से बलात्कारी आतंकवादी डाकू ही है जो नेता लोग वोट के लिए बलात्कारी आतंकवादी डाकू को मानवाधिकार मे लाने का समर्थन करते है उनके बाप रिकॉर्ड मे तो कोई मानव है लेकिन असली बाप तो कोई बलात्कारी आतंकवादी डाकू ही होगा मुजसे जादा उसकी माँ जानती होगी हर नारी को माँ बहन समझो नारी की मजबूरी का फायदा मत उठाओ मदद नहीं कर सकते तो अपमानित मत करो आज के समाज मे मानव सरीर रूप मे कुते भेदिये धूम रहे है अपने को बचाना भी है और दूसरो को भी बचाना है

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
May 17, 2011

न्याय का तकाजा ही यही है की सजा इतनी कठोर दी जाये की दूसरे इस से सबक लें, और किसी और को अपनी हवस का शिकार ना बनायें.

    VICTOR के द्वारा
    May 17, 2011

    Ii think punishment should be make permanently impotence that person(cut the penis of guilty) victor

subhash के द्वारा
May 17, 2011

avilamb fansi

    Ashutosh pandey के द्वारा
    May 22, 2011

    Hi, I’m agree with avilamb fansi with live telicast

rajes के द्वारा
May 16, 2011

ek dam sahi baat hai…balatkariyoo ko kathor dand milna sahi hai.par balatkari esi samaj me rah ta hai wo jo kuch sikta hai yehe se sikta hai,balatkari koe jupiter se nahi aya hai……agar samaj me aise gande log hai to uska jimedaar kaun hai…..muje lagta hai ki samaj ke akalmamd logo ko ye soochna hai ki wo mahilawoo ka respect kaise bada sakte hai….bazzarwad ke is daur me jab har rista tar tar ho raha hai to log ek dusre ka respect kare isko badawa milna cheye…..nahi to ye hum sabke haar hai…….

puja singh के द्वारा
May 16, 2011

agar balatkariyo ko saza deni ho to beech chorahe pr khada krke goli maar do sab k ghar me maa, behan hoti h pr fir bhi na janu kyu wo dusaro ki maa, behan ki izzat kyu nhi samajhte h or jyada tar log jaan pechan ke hi hote h aisa kyu hota h?

Manoj के द्वारा
May 16, 2011

बलात्कार जैसे अपराधों को तो कठोर से कठोरतम गुनाहों में से एक करार देना चाहिए और जो सर्जिकल रासायनिक बधियाकरण वाली बात बिलकुल सही है. और तो और अगर कोई दंड इससे भी कोई कठोर दंड है तो वह भी देना चाहिए. एक रेप ना सिर्फ लड़की के शरीर को बर्बाद करता है बल्कि उसके मन को भी बर्बाद करता है ऐसे अपराध लड़की को समाज में रहने के लायक ही नहीं छोड़ती. मैं जल्द ही अपना एक ब्लॉग इस इश्यू पर लिखने वाला हूं.

    kraant के द्वारा
    May 19, 2011

    Mere anusaar samaaj me aisi grinit soch ko mudda banaya jana aawashyak hai,aakhir kyun nahi hamare yahan ke shikchha tantra me smajik samsyaon ko leke koi wishay hota hai,i mean bhawi peedhi ko jagrat karna aawashyak hai,dand dene ke saath hi use saarvajanik bhi kia jana chahiye jis veg se blaatkaar ki news chhapti hai usi tarah ya usse zyada aise logon ko dandit kie jane ki khabar dikhani chahiye.




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