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क्या भारत को पाकिस्तान में घुस कर आतंकी दुश्मनों का सफाया करना चाहिए?

Posted On: 9 May, 2011 में

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अमेरिका ने हजारों मासूमों को मौत की नींद सुलाने वाले अपने दुश्मन को पाकिस्तान में गोपनीय कार्यवाही करते हुए मार डाला. ऐसा करके उसने दुनिया को एक साथ कई संदेश दिया जिसमें पहला है कि अमेरिका का दुश्मन किसी भी कोने में छुप जाए, वह बच नहीं सकेगा. दूसरा, अमेरिका को कम करके आंकने की भूल कभी भी नहीं की जा सकती और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण संदेश है कि अमेरिका के लिए सारी दुनिया से जरूरी है उसका अपना वतन और वतन के हित से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता.


वहीं भारत एक बेहद नरम राष्ट्र की भूमिका में रहते हुए हमेशा अपने दुश्मनों को मनोबल बढ़ाता गया और लाखों निर्दोष मासूमों को मौत के घाट उतार देने वाले आतंकियों को भी जेल में बिरयानी खिलाता रहा है. दुश्मनों का दुस्साहस इतना बढ़ गया कि उन्होंने संसद सहित देश का कोई भी भाग कायराना हमलों से अछूता नहीं छोड़ा और कश्मीर में तो हद ही कर दी. दाउद जैसे अपराधी पाकिस्तान में शान से बैठ कर भारत के लिए तमाम संकट पैदा कर रहे हैं. आज कश्मीर अलगाववादी आतंकियों के कारण जल रहा है. पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देने के बाद भी भारत को जब-तब धमकी देता है और हमारा कमजोर नेतृत्व वार्ता पर वार्ता करने की बात दोहराता चला आ रहा है.


किंतु आज जबकि अमेरिका की कार्यवाही का उदाहरण हमारे सामने है तो राष्ट्रहित का बेहद जरूरी प्रश्न ये उठ खड़ा होता है कि क्या  अब हमें अपनी कायराना नीति पलट देनी चाहिए? देशतोड़क शक्तियों को कुचलने के लिए कब कार्यवाही की जाएगी? तुलनात्मक दृष्टि से भारत और पाकिस्तान की सामरिक क्षमता में कोई खास फर्क नहीं जबकि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच ये अंतर बहुत अधिक है तो ऐसे में क्या भारत के लिए पाकिस्तान के भीतरी भागों में जाकर आतंकी अड्डों का सफाया सही रणनीति कही जाएगी?


जागरण जंक्शन आप सभी पाठकों से इस मुद्दे पर अपने विचार प्रस्तुत करने का अनुरोध करता है. इस बार का मुद्दा है:


क्या भारत को पाकिस्तान में घुस कर आतंकी दुश्मनों का सफाया करना चाहिए?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जारी कर सकते हैं.


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “आतंकवाद के नाश के लिए भारत की रणनीति” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व आतंकवाद के नाश के लिए भारत की रणनीति – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.

धन्यवाद

जागरण जंक्शन टीम


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46 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Vinod kumar के द्वारा
July 14, 2011

Es vishay par paricharcha k liye Dhannyawad… Par kal ki Stithi dekhate hue.. Har Bhartiya Yahi chaheyga K Bharat Bhi aisa koi kathore kadam uthaye.. or desh me shanti or Sthirta ka mahol kayam ho… kitni hi baar aisa hua or hum kewal karwahi karengay kah kr shant baith gaye par ab asia nahi hona chahiye.. or agar sarkar aisa nahi kar sakti to use torant barkhast kr dena chahiye…

DHARMENDER के द्वारा
June 23, 2011

अरे भाई पहले जिन आतंकियों को पकड़ा हुआ है उन्हें तो सजा मिले ?

    ANKUR MALL के द्वारा
    February 2, 2012

    एकदम सही कहा आप ने.

Govind B Pant के द्वारा
June 21, 2011

देखिये हमारे देश के जितने भी नेता लोग और मंत्री लोग हैं वो कमी तो करते हैं. ये बात सबको पता होता हा लेकिन कोई भी कुछ नहीं कर सकता क्योंकि कानून सबूत मागता है और सबूत कौन देगा. देश की तरक्की की तरफ कोई नहीं देखता है. वैसे मेरे हिसाब से क्रांति ही एक मात्र हथियार रह गया है इन नेताओं को सबक सिखाने का. अगर कोई जिगर वाला देश प्रेमी (वास्तव में) निज स्वार्थ को त्याग कर देश सेवा की सोच रखता है तो वो इस गन्दी (वैश्या जैसी) राजनीती को बदल सकता है. ऐसे इंसान को रोटी की जगह गोली खाने की चाह होनी चाहिए. ये अनशन भूख हरताल इत्यादि तो टाइम पास आइटम होते हैं. सब पैसे का खेल है. राजनीती है. अगर दिल में देश प्रेम का पूरा ज़ज्बा है तो आगे आकर चुनाव लड़ो हम उसके साथ हैं जो देश से भ्रष्टाचार को समाप्त कर ने का वादा करे वादा भी पक्का होना चाहिए.

shesh nath yogeshwar के द्वारा
May 23, 2011

पाकिस्तान आजकल अपने आंतरिक कारणों.से खुद जूझ रहा है | क्योंकि जो जैसा बोयेगा वैसा ही काटेगा | हम भारतीयों को पाकिस्तान में घुस कर आतंकियों को मारने के बजाय सबसे पहले तो अपने देश में सरकारी मेहमान बने पाकिस्तानी या विदेशी आतंकवादियों को मारने का उपक्रम करना चाहिए | हम वोट की राजनीति कब तक करते रहेंगे? कभी आतंकवादी की फांसी टाल दी जाती है ,कभी आतंकवादी हमारे देश के पत्रकारों पर थूक देता है,कभी कोर्ट न जाने के लिए आतंकवादी नखरे दिखाता है, और तो और जिस देश के नागरिकों का खून बहाया उसी देश में उत्पन्न अनाज का उपभोग करके मेहमाननवाजी का लाभ उठा रहा है |कब तक सहते रहेंगे हम? अगर शीघ्र ही देश में रह रहे आतंकवादियों का सफाया नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं कि इन आतंकियों को छुड़ाने के लिए प्रायोजित रूप से रुबिया अपहरण की पुनरावृत्ति हो सकती है | जयहिंद |

    manoj gupta के द्वारा
    June 13, 2011

    हम डनकी बातो से सहमत है

    atulshashi gupta के द्वारा
    June 16, 2011

    I am agree with Shri Shesh Nath Ji. Our top leader have no will to fight against muslim terroism. Due to this out country is suffering badly.

Chander Parkash Sharma के द्वारा
May 20, 2011

जोश के साथ होश होना भी जरुरी है. कुछ दिमाग से काम लेने की जरुरत है. आज अगर हम अम्रीका की तरह पाक में करवाई करते हैं तो ये जल्दबाजी होगी. अम्रीका की दुनिया में ओकात है उसे कोई पूछने वाला नहीं की तुमने ऐसा क्य्नों किया. हमें ये नहीं भूलना चाहिए पाकिस्तान के saath आज अम्रीका और चीन दोनों हैं. पाक अधकृत कश्मीर में चीन के ११००० जवान तैनात है उन्होंने वहां सामरिक ठिकाने बनकर आदि बना लिए हैं. चीन और पाकिस्तान में सामरिक सम्बन्ध बन चुके हैं. रेल मार्ग, सड़क मार्ग तक बन चुके हैं. चीन पाक मं परमाणु घर लगा रहा है. चीन ने अमरीका तो साफ़ साफ़ चेतावनी दे दी है अगर उसने दोबारा एबटाबाद जैसी करवाई की तो उसे पाक पर हमला समझा जायेगा और ये हमला पाक पर नहीं चीन पर हमला समझा जायेगा. चीन और पाक दोनों भारत को एक करारा और कड़ा सबक सिखाने की फ़िराक में हैं और भीतर hi भीतर अन्दर खाने रण नीति बन रही है जिसे आपरेशन ड्रैगन २०१४ का नाम दिया गया है. खुफिया सूत्र तो ये कहते हैं की एक बार फिर पाकिस्तान मुंबई जैसी करवाई करेगा जिससे भारत में विद्रोह जैसी सिथ्ती हो जाएगी सरकार जनता के दबाव में आकर पाकिस्तान में एक chhoti simit sainik करवाई kregi jo yudh का roop lay legi. idhar से कश्मीर, punjab rajasthan का border khol दिया जायेगा, utri purav में चीन भारत पर akarman kar dega jismein भारत को apni jaan bachani mushkil हो जाएगी. yeh है chini pak gathjod का parinam jo jald hi samne aane वाला है. भारत दुनिया की najron में एक dabbu rashtra बन chika है. jiski कोई ओकात नहीं. sainik takat में भी kai surakh hongay jinka हमें pata नहीं. kai kamjorian hongi jo abhi samne नहीं aa रही. kargil के yudh के daraun hamein golay bahar से mangane pad gaye they . hamari kamjorian tab ujagar hongi jab sir पर padegi. chander parkash sharma 95608 83216

shuklaom के द्वारा
May 19, 2011

निश्चित रूप से अबतक यह कम कभी का हो जाना चाहिए था.क्या परमाणू हथियार हमारे पास नहीं है?.आखिर यह होता किस लिए है? मात्र इसीलिए कि कोई परमाणू हथियारों से युध्ध नहीं होते यह तो सिर्फ इसी कम के लिए होते है लेकिन हमारे यहाँ एक तो विदेशी नेतृत्व है जिसे यहाँ के सम्मान से कुछ लेना देना नहीं है और दुसरे हमारा प्रधानमंत्री अपने को अमेरिका का चपरासी समझाने में अपनी शान समझता है क्योकि उन्ही की सेवा में विश्व बैंक और दूसरी संस्थाओ में मुलाजिम रहा है,तथा यहाँ भी एक नेता के रूप में सीधे जनता से चुन कर आने की बजे मुलाजिम की तौर पर कर्यरत है वह भी अस्थाई इसी लिए बार-बार राहुल गाँधी के लिए कुर्सी ख़ाली है कीघोसडा करता रहता है. ऐसी हालत में इतने बड़े फैसले की हिम्मत उसमे नहीं है. दूसरी वजह यहाँ का चुनावी ढाचा जो आतंकवादियो को भी सम्मान dene को बाध्य करता है.नेहरू के jamane से ही तुष्टिकरण की जो हवा चली उसने भा.ज.पा.के अलावा सभी दलों को इसी तुस्टीकरण की राजनीत करने को बाध्य हो गए है. ये लोग यह भी नहीं विचरते कि दिग्विजय जैसे लोग राष्ट्रवादी मुसलमानों को मुह छुपाने को बाध्य करते है.आज अगेर इंदिरा गाँधी होती तो कब का यह समाप्त हो चूका होता. हमारे कुछ बुध्ध्जिवी तर्क देते है कि हम विकास के मोर्चे पर पिछड़ जायेगे लेकिन यह वाही खाया पिया अघाया तबका है जो इस व्यवस्था की मलाई काट रहा है परन्तु इसमें मरते और तबाह अधिकतर गरीब तबके के लोग होते है सिर्फ एक बार बम्बई कांड में इनके उपर आंच आई और यह तबका सक्रीय हुआ अब मुकेश अम्बानी जैसे लोगो पर क्या फरक पड़ता है उधर नेता चाहे किसी दल का हो भारी सुरच्चा में रहता है सुराचा बालो में भी निम्न लोग ही आतंकवाद के शिकार होते है, आखिर एक सीमा होती है बर्दास्त की नहीं तो नपुंसकता किसे कहते है ?वही हम चरित्रार्थ कर रहे है. वाह भाई वाह पाकिस्तान हमारे धार्मिक स्थलों,संसद जहा चाहे जब चाहे हमला करे और हम डर के मरे पूंछ दबाये फिरे कि उसके पास परमाणू हथियार है तो आप के पास क्या आचार डालने के लिए है,दो दसक से लगातार डंडा डाले हुए है और आप हो कि अमेरिका को दरोगा मान ऍफ़.आइ.आर.दर्ज करा के संतुष्ट है और विचार इसपर कर रहे है कि सेना को भी क्योना ओपरेसन ग्रीन हंट में लगा आदिवासियो को समाप्त कर दिया जाय इनके जैसे लोगो के लिए ही धूमिल ने कहा है \’ जिसके पास जीने का कोई तर्क नहीं है ,तो रामनामी बेच कर खाने और रंडी की दलाली कर खाने में कोई फर्क नहीं है. तो यह दलाली खाने वाला नेत्रित्व या तो जब तक काम मिलेगा दलाली ही खायेगा नहीं तो भूखो मर जायेगा लेकिन किसी अन्य काम लायक नहीं रहेगा.

J J Joseph के द्वारा
May 18, 2011

भारत देश मॆ नयॆ सविंधान  की जरूरत है .आम आदमी के  दिल और दिमाग  सविंधान का भय  नहीं रहा . इस कारण वह किसी भी अपराध करने के पहले यह मान लेता हैं की वह आसानी से   छूट जाएगा  

GAURAV के द्वारा
May 17, 2011

जब भारत मे ही कसाव का कुछ नही विगाङ पा रहा तो पाकिसतान मे कय़ा खाक मारेगा

    Govind B Pant के द्वारा
    June 21, 2011

    गौरव जी १००% सही कहा दोस्त आपने. सब वोट की राजनीती है. डबल धमाल का एक सवंवाद है दोस्त ….. के घंटा पढ़ेगा ये…… वाही हम कह सकते हैं की ‘ ………..घंटा करेगा ये…… कही कांग्रेस के शाशन में अगर फांसी दी तो मुसलमानों के वोट कट जायेंगे बस इसी लिए लटकाया जा रहा है….. दिल्ली वाले हमें बेवकूफ बना रहे है……. और हम प्रेम से बन रहे हैं दोस्त…. क्या करे हमारी फितरत में यही है……. अफ़सोस के साथ (जय भारत)

MANOJ KUMAR MISHRA के द्वारा
May 17, 2011

pakistan mein ghus kar marana chahiye .

MANOJ KUMAR MISHRA के द्वारा
May 17, 2011

Jagran Junction Forum

Deepak Sahu के द्वारा
May 16, 2011

जब भारत की सीमा पर पाकिस्तान और चीन अवैध कब्ज़ा कर रहे हैं तब भारत की सैन्य शक्ति , इच्छा शक्ति राजनैतिक शक्ति कुछ कर नहीं पा रही है, सिर्फ तमासा ही देख रही है तो पाकिस्तान में घुस कर आतंकी दुश्मनों का सफाया करना बहुत दूर की बात है!

RAJ के द्वारा
May 15, 2011

Dear, Why you want to take a blame for those who has already committed mistake, I think you people are intelligent enough to understand this. “Jo Toke kanta boye tahi boye tu Phool …………………….

Dheerendra के द्वारा
May 14, 2011

Dear, Sabhi log ye sawal to utha rahe hai ki Bharat ko pakistan main ghus kar war karna chahiye ki nahi. lekin koi ye nahi kah raha hai ki ab bhi bharat ko Kasab Ansari or Afjal guru jaise terrerist ko phansi par chadane main de nahi karni chahiye. jo sarkar apne pakde hue atankwadi ko saja nahi de pa raha hai uske main itna kubat nahi hai ki wo pakistan main ghus kar Daud ansari ibrahim jaise ko kya marega. baki to app sabhu khud bhudijivi hai. aaj afjal guru ko 10yrs se jyada ho gaya hai sarkar ko apne jail main band kiye hue likin koi bhi party ye mudda nahi uta raha hai ki aakhir kyo unko phasi nahi di jaa rahai hai jab ki kasab ansari or afjal guru ke khilaf sare sabut with footeage ke sath hai phir bhi koi nahi kah raha hai ki use fansi do kyo ki minority vot kat jayega. ab bataiye ki kya ye sarkar pakistan main ghus kar amerika jaisa operation chala sakta hai ?

Sanjay के द्वारा
May 13, 2011

 आतंकवाद के नाश के लिए भारत की रणनीति – Jagran Junction Forum भारत ने हमेशा एक नरम देश की भूमिका निभाई है,ठीक है नरम होना चाहिए पर इतना नहीं,ये नरम होने की निशानी निशानी नहीं ये कायरता की निशानी है,हालत ये हो गए है,ये आंतकवादी हमारा खाते रहे,गीत दुश्मनों के गाते रही,और हमारे नेता उनकी धुनों पर नाचते रहे,आज हमारे किसी नेता,मंत्री यहाँ तक की हमारे प्रधानमंत्री में भी इतनी इक्चाशक्ति नहीं है की ऐसे दुश्मनों को उनको घर में घुस कर मर सके,पर ये भी तो है,की घर तो हमारा है,उनमे आधे तो विदेशी है,वो हमको हमारे घर में जब,जहा घुस कर मार जाते है ,और हम लकीर पिटते रह जाते है,हमारे नेता कुछ घरियाली आंसू बहा जाते है,पर अंदरूनी इक्चाशक्ति के अभाब में कर कुछ नहीं पाते,दुश्मन उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ होती है,दाउद जैसे हमारे देश में पाकिस्तान में बैठ कर आंतक फैला रहे है और हम चुपचाप बैठे तमाशा देख रहे है,उस पर पाकिस्तान जैसे हमकों ही घुड़की देते रहते है,पूरी दुनिया को पता है भारत में क्या हो रहा है,हमारे नेता अपने ही घपलो घोटालो में घिरे रहते है,अपनी जेब भरने से फुर्सत नहीं देश को क्या देखेंगे,हम पाकिस्तान से गले मिलते रहते है,और वो हमें आँखे दिखता रहता है,हमारे सेना कमांडर द्वारा ये कहने पर की हम भी पाक में घुस कर अपने दुश्मनों का सफाया कर सकते है,पाकिस्तान ने तुरंत हमें घूरक दिया पर हमारे किसी नेता ने कोई जबाब नहीं दिया,उस पर तुर्रा ये की उनके पास नुक्लेअर बोम्ब है इसलिए हम ये कारवाई नहीं कर सकते,पता नहीं कब तक हम इन मुठी भर नेताओ के इशारो पर नाचते रहेंगे,और ये सिर्फ और सिर्फ अपनी घर भरते रहेंगे, Sanjay

deepak singh के द्वारा
May 13, 2011

आतंकवाद एक ऐसी समस्या है जिस पर केवल बहस करने भर से कुछ नहीं होगा | इससे लड़ने के लिए द्रढ़ इक्षाशक्ति की ज़रुरत है जो की हमारे देश के नेताओं में तो बिलकुल नहीं है क्यूंकि हमारे देश के नेताओं को घपले घोटाले करने से ही फुर्सत नहीं है तो जनता की भावनाओं के बारे में भला कैसे सोचेंगे | हाँ घोटाले करने की इक्षाशक्ति बहुत है सो वो करते ही हैं | वैसे भी आजकल एक तरफ तो आई पी एल चल रहा है तो दूसरी तरफ हमारे नेता अनशन-अनशन खेल रहे है जिसका फाईनल अगले साल होना है | इतना ज़रूर है की इस मैच (चुनावों ) में जनता भी हिस्सा लेगी और देखने वाली बात ये है की जनता इस बार के मैच (चुनावों ) में कितनी समझदारी से बैटिंग (वोट) करती है |

b k agarwal के द्वारा
May 12, 2011

रिसवत मागने पर हजारैजौ की जै जै बॊलौ

shailandra singh के द्वारा
May 11, 2011

महोदय, विनम्र निवेदन है की आतंकबाद किसी रूप में हो बह घातक है उसके लिए सैयम शीलता जरुरी है युद्ध किसी मशले का हल नहीं है यदि अमरीका की जगह भारत होता तो पूरा देश युद्ध की चपेट में होता. देखा जा रहा है की जब कोई सरकार अपने अंदुरनी मसले में लिप्त होती है और मसलो से धियान हटाने की कोशिश युद्ध करके करती है. कमजोर सरकार को जनता होता है अमरीका इसका उद्धाहर्ण है कहना आसान है की किसी देश की सीमा में घुस कर अपना अपराधी खोज लो और मार गिरा दो.

    rahul के द्वारा
    May 13, 2011

    345555555

poonam के द्वारा
May 11, 2011

ha

K M Mishra के द्वारा
May 11, 2011

दाऊद, हाफिज सईद, लखवी आदि की पोजीशन रा को हमेशा पता रहती है. पाकिस्तान में बहुत गरीबी है किसी भी भाडे के हत्यारे को पाकिस्तानी नोट छाप कर पकडाने भर की देर है. ग्वादर पोर्ट पर काम कर रहे ३ चीनी इंजीनियरों की हत्या का आरोप पाकिस्तान ने रा पर मढ़ा था. कुछ भी संभव है अगर इच्छा शक्ति हो तो. 

K M Mishra के द्वारा
May 11, 2011

भारत ने ऐसा पहले भी किया है. पाक अधिकृत कश्मीर में घुस कर कमांडो ऑपरेशन पहले भी किये गए हैं. कम से कम एल ओ सी से सटे आतंकी ट्रेनिग कैम्पस पर छोटी मोती करवाई की जा सकती है.

shiromanisampoorna के द्वारा
May 10, 2011

किसी देश के भीतर घुसकर आतंकवादियों और आतंक को समाप्त नहीं किया जा सकता आज तो महती आवश्कता है आपने देश के भीतर के आतंकवाद और आतंकियों को सामूल नष्ट करने की/देश द्रोहियों के साथ किसी भी प्रकार की सहानुभूति न बरती जाये और सख्ती से निपटा जाये/न्यायपालिका की निष्पक्षता और शीघ्र निर्णय की स्थापना भी करनी होगी तभी देश के नागरिक निर्भीक जीवन जी पायेगें/

krishna kant shrivastava के द्वारा
May 10, 2011

ये सच है की भारत के वीर जवान भी अम्रीका जैसी बल्की उनसे भी जादा दिलेरी से ओसामा क्या बल्की पूरे पाकिस्तान को एक बार में घुटने टेकने पैर मजबूर कर सकते है. पैर मेरी नज़र में देश के बाहरी दुश्मन जिन्हें हम सभी भारतीय जानते है , को बाद में भी ख़तम कर सकते है , उससे भी जादा ज़रूरी है देश के अन्दर के दुश्मनों से निपटना और वे दुश्मन है भारतीय कांग्रेस के कथित पैरोकार दिग्विजय सिंग उर्प्फ़ दिग्गी . जो ओसामा बिन लादेन को ओसमाजी का संबोधन देने में अपनी शान समझते है. अब सचमुच लगता है दिग्गी किसी हिन्दू की संतान नहीं है .और हम फिर भी कहते है ” मेरा भारत महान.”

    mangial parjapat के द्वारा
    June 3, 2011

    मैं आपके विचार से पूरी तरह सहमत हूं

Preetam Thakur के द्वारा
May 10, 2011

सोचना जरूर चाहिए लेकिन ऐसा कहना नहीं चाहिए | जिस काम को अमरीका ‘दोस्ती’ करके कर रहा है, उसे हम दुश्मनी कर के नहीं कर सकते | अमरीका ने पहले दोस्ती, फिर करोड़ो अरबों डालर मुफ्त में बांटे, अब भी प्यार की झप्पी इतनी कस्सी है के पाक सब सह जायेगा | समर्थ को नहीं दोष गुसाईं | हमने पाक के साथ न तो इतना प्यार किया न इतनी खैरात बांटी न जादू की झप्पी दी , सिर्फ आँखे दिखाना डिप्लोमसी नहीं | पाक में हमारा काम अमरीका ही कर देगा | देखते जाईये |अपना जन धन क्यों खर्चना चाहते हो जब किसी के करने से हमारा काम होने वाला | काज पड़े कछु और है काज सरे कछु और | धन्यवाद |

    munna के द्वारा
    May 10, 2011

    प्रीतम ठाकुर साहब मज्जा गांठ दिया आपसे पूरी तरह से सहमत हु

subhash wadhwa के द्वारा
May 10, 2011

क्या भरत को पाकिस्तान में घुस कर अंतकी दुश्मनों का सफाया करना चाहिए | अज्ज की भारत सरकार तो ऐसा सोच भी नहीं सकती | ऐसा करना भी नहीं चाहिए | भारत अमेरिका नहीं है | पाकिस्तान की सैन्य शक्ति भारत के मुकाबले इतनी कमजोर नही है | दूसरा भारत और पाकिस्तान की भागोलिक स्थिति भी ऐसा करने की इजाजत नहीं देती | मानलो हम झट से अमेरका जैसी कारवाही करके अपने अंतकी दुश्मनों का सफाया कर सुरक्षित लोट भी आते है तभी पाकिस्तान हमारे विरुद्ध परमाणु अस्त्रों पर्योग कर दे तो क्या हश्र होगा | वैसे हमारे नेताओं की इच्छा शक्ति भी नहीं है \\ इतने आंतक वादी हादसे होने के बावजूद जिसमे यह साबित हो चुका है के इन्हें अंजाम देने में मुस्लिम आंतकवादियो हाथ है भारत फैले आंतकवाद को मुस्लिम अंतकवाद नाम देने से सरकार डर रही है मगर एक घटना में हिन्दू संघठन का नाम जुड़ जाने से भगवा/हिन्दू अंतकवाद का होवा खड़ा किया जा रहा है |

subhash के द्वारा
May 10, 2011

good suggestion but cant be practiced because of poor leadership

gyan prakash tiwari के द्वारा
May 10, 2011

yes but here we protect and patronise terrorists like afzal guru ,kasab etc.there is no doubt that congress government shall succeed in decimating our country

AKS के द्वारा
May 10, 2011

for doing hard step one should have strong will power as in other nation loving countries either it is AMERICA, ENGLAND, AUSTRALIA, CHINA, IRAQ, TURKEY, BRAZIL, etc. but in our country our GOVT. has not this type of will so they always cry like coward and said always believe in AHIMSA, this is the weak word by which we are always saying . see in histroy those who believe in this theory might always be ruled by others. when SHOKa the great king adopt it its kingdom ruined. so its not a word its a opposite of HINSA. for ruling one should be strict , it does not mean that he doesn\’t loves its COUNTRY men. so after my conclusion this NAPUNSAK SARKAR ME YEH TAKAT NAHI HAIN JIS KA PM SIKHANDI HO.

AMIT KUMAR के द्वारा
May 10, 2011

Aksar hum soch vichar karne me aapna samay ganwa dete hain. Bharat ko ek nishchit time pak ko dena chahiye aagar wo time se pahle nahi manta hain to unhe eska khamiyaza bhugatne ke liye taiyar rahna chahiye. Etihas gawah hain jab jab humne shanti ka chhola ko sir se pawn tak lapeta hain,har bar hamara patan hi hua hain. Chahe wo mourya kal ho ya gupat kal……………Aazadi v humne angrezo se lad kar paya. hume azadi koi dan ya khairat me nahi mila tha.

Pushker Yadav के द्वारा
May 10, 2011

भारत को पाकिस्तान में तो बाद में पहले घर में जो मेहमान है(कसाब और अन्य ) उन्ही को सजा दे दे उसके बाद दुसरे देश में हमला बोले…..अपने घर के दुश्मन नक्क्सली जैसे लोगो से निपटारा होतो नही है दुसरे देश का हाल क्या लेंगे…हम तो कहते है उन लोगो क्या हुआ जो कसाब जैसे लोगो को पकड़ने में शहीद हो गये बस जाके दो फूल चढ़ा दिए हो गया काम…हम लोगो को मिलके सब पहले इस लम्बे चौड़े कानून को बदलना पड़ेगा नही तो इस देख का कुछ नही होगो…पहले अपने लोगो से लड़ो तब जाके बाहर लोगो से … लोकपाल बिल से कुछ नही होगा अगर लड़ना है इस कानून को बदलो! आप एक मिनट खुद से सोचो की हम सब में अछे है पर hamare कानून की बजह से किसी को सजा ही नही मिल पाती…थिंक पुष्कर यादव yadav.pushker@gmail.com

munna के द्वारा
May 10, 2011

jagran junction फोरम जागरण संपादक जी विषय तो शेरो वाला है लेकिन हम तो चूहे भी नहीं है आपके इश विषय पर मेरे विचार नीचे लिखे १- पहले अशतीनो के सांपो को मारो उशके बाद पाकिस्तान मे घुसना अश्तीं के सांप अ- गिलानी कशमीर ब- दिगविजय सिंह स भारत का अँधा कानून डी लालू, मुलायम माया sarad पवार ये सुब सांप के सपौरे है क कश्मीर की धरा ३५४ हटाना जरूरी है आतंकवाद ५०% कम हो जायेगा

jagojagobharat के द्वारा
May 10, 2011

आतंक वाद के खात्मे के लिए अब वह समय आ चूका है की हम अपने दुश्मनों के घर में घुश कर वार करे लेकिन उससे पहले यह अति आवश्यक है की वैसे लोग जो की हिंदुस्तान की खा कर ही रास्ट्र विरोधी गतिविधिओ में सामिल है कश्मीर में गिलानी खुले आम ओसामा का समर्थन करते है और भारत की सरकार मूकदर्शक बन देखती रहती है बार बार हमले होते है जवान असमय ही मौत की आगोश में चले जाते हो और सरकार क्रिकेट कूटनीति करती हो तो ऐसे सरकार से उम्मीद नहीं की जा सकती है की वह कोई करवाई करेगी जिस देश के एक राज्य का मुख्यमंत्री ५ दिनों तक लापता रहता है और उसकी लाश ५ दिनों बाद भारत चीन बोर्डर पर मिलती है तो यह समझा जा सकता है की हम अपने देश की सीमओं के रक्षा के प्रति कितने सक्रिय है हम अपने देश के भीतर की नाक्साली वरदो को ख़त्म नहीं कर सकते तो पाकिस्तान में घुश कर आतंकवादियो का सफया कहा तक कर सकते है यह एक विचारणीय प्रश्न है .

amit के द्वारा
May 10, 2011

नहीं……. कभी नहीं हो सकता……………भारत का बूता नहीं है यह सब करने का…….. पहले अफज़ल और कसाब को सजा दिला दे वही काफी है जो की अपने देश मे है ……….पाकिस्तान पर हमला करने की हमारी औकात नहीं है….इस सच्चाई को सभी देशवासी स्वीकार ले……….

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
May 10, 2011

लड़ाई करना आसान है, लड़ाई झेलना मुश्किल, बेहतर है हम अपने घर को संवारे और उसे मजबूत बनाएं, की किसी की हिम्मत ना हो इधर देखने की. शेख चिल्ली की तरह डींगे मारने के बजाए कुछ सार्थक कदम उठाए जाएँ. इति शुभम

MADAN GOPAL BRIJPURIA के द्वारा
May 10, 2011

मे आपका सहयोग चाहता हू | ईश्वर कि कृपा से मेरे विचार मे एक आईडिया आया है | यदि आप भी उस आईडिया को उचित समझते हो तो आप का सहयोग चहिये | भारत कि तात्कालिक समस्याए है भ्रस्टाचार ,आतंकबाद ,नकली नोट ,बेईमानी ,मिलावट खोरी ,दुराचार इन सभी पर काबू पाने के लिए सभी लोगो का मानना है कि कड़े नियम बनाये जाये |जबकि जब से जो जो नियम बनते है उसी नियम को पालन करने बाला तुरंत बेईमानी करने लगता है | मेरे बिचार से हर बुराई कि जड़ मुद्रा है | जब तक देश मे या प्रथ्वी पर मुद्रा हस्तांतरित बाली चलती रहेगी तब तक कोई समस्या का हल नहीं मिल पायेगा | मेने ईश्वर के आशीर्वाद इसका हल बना लिया है | देश मे मुद्रा बंद करके बैंक द्वारा लेनदेन होना चाहिए | मेरे पास पूरा प्लान है जिसमे हर रूकावट का उत्तर है | उसे पूरा लिखकर भेजना मेरे लिए मुश्किल है | मे सिर्फ फ़ोन पर ही बिस्तर से बता सकता हू | क्योकि मेरी आदत मे नहीं है | पूरा लिख पाना | आपका मदन गोपाल ब्रिजपुरिया करेली म . प्र . contect no 09300858200 07793270468 id madanbrijpuria59@gmail.com

shuklaom के द्वारा
May 10, 2011

हमें पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियो के ठिकानो पर हमला कर उन्हें नष्ट करने के बारे में सोचने से पूर्व दिग्विजय सिंह जैसे भितरघातियो पर लगाम लगाने की आवश्यकता है क्योकि उनके बयानों और क्रियाकलापों से लगता है कि वे इस बार का आम चुनाव श्री लादेन के मुद्दे पर ही राहुल गाँधी के नेत्रित्व में लड़ना चाहते है. इसी लिए कभी आर.एस.एस.को लास्केरे-तोइबा से बड़ा खतरा बताते है तो कभी सिम्मी की तुलना इस राष्ट्रवादी संधटन से करते नजर आते है जब इस देश का अपने मुह मिठ्ठू बनाने वाला भावी प्रधानमंत्री ऐसे विचार रखता हो तो सेना के जनरलों की क्या ओकात जो ऐसा सोच भी सके. अफजल गुरु जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने फासी की सजा पर मुहर लगा दी है और एक हमारी दिल्ली सरकार चार साल से दया याचिका पर विचार कर रही हो तो कसाव को तो बहुत समय है अदालती जंग लड़ने के लिए फिर दिग्विजय जैसे हमदर्दों की कमी भी नहीं है.यु.पी.ए.सरकार हिन्दुस्तानी मुसलमानों को भी आतंकवादियो का समर्थक मानती है या जाहिर करना चाहती है इसी लिए दिग्विजय राहुल गाँधी की जोड़ी मुसलमानों को थोक वोट बैंक की तरह देख रहे है. देश के राष्ट्रवादी मुस्लिम लीडरो को आगे आना चाहिए और इन छद्म धर्म्निर्पेच्वाडियो के मुखौटो को उघाड़ फेकना चाहिए यह वक्त का तकाजा भी है और अवसर भी.

Charchit Chittransh के द्वारा
May 9, 2011

ऐसा लगता है की जागरण जंक्शन के पास उचित विचारणीय विषयों का आभाव है अथवा जागरण जंक्शन को मंच पर उपलब्ध लेखकों के बुद्धित्व पर संदेह है या मंच पर ओछे विवादस्पद मुद्दों को उछालकर सरलतम लोकप्रियता पाने का प्रयास !फिर चाहे बाबा रामदेव ,सत्य साईं पर उठाया गया प्रश्न हो अथवा अमेरिका की तरह भारतीय कार्यवाही का प्रश्न ! केवल जन साधारण की भावनाओं को झकझोरने का प्रयास मात्र हैं !अन्यथा यदि ऐसी ही कोई कार्यवाही पाकिस्तान के अतिरिक्त किसी भी देश पर होती तो हम खुलकर अमेरिका की किसी देश की प्रभुसत्ता पर अपनी दादागिरी दिखाने की कार्यवाही कह रहे होते !किसी भी देश की सीमा में जबरन घुसकर किसी भी तरह की कार्यवाही उस देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के बराबर ही है !यदि अमेरिका की जगह किसी तीसरी दुनियां के देश द्वारा ऐसी कार्यवाही की गई होती तो विश्व समुदाय में प्रबल विरोध हो रहा होता किन्तु वर्तमान में अमेरिका सबसे शक्तिशाली है और पाकिस्तान का प्रमुख सहायक भी, इसीलिए ‘ समरथ को नहीं दोष गुसाईं ‘ और आपस की बात है की तर्ज पर सब चुप हैं! यदि भारत ऐसा कुछ करने की सोचता है तो अगले युद्ध की स्थिति में भारत को विकास पथ पर कम से कम २३-२४ वर्ष पिछड़ने को और अमेरिका सहित पाकिस्तान मित्र /भारत विरोधी देशो का विरोध प्रतिबन्ध आदि झेलने तैयार रहना होगा ! हम कमजोर तो नहीं हैं मगर अनावाश्यक युद्ध झेलने की स्थिति में भी नहीं !

Ashish के द्वारा
May 9, 2011

भारत और पाकिस्तान के रिस्ते मे, पाकिस्तान और अमेरिका के रिस्ते मे जमीन और आसमान का अंतर है। पाकिस्तान जहां अमेरिका के साथ परजीवी किड़े की तरह चिपक कर अपनी डूबती अर्थवयवस्था को पार लगाने मे लगा है, वही अमेरिका उसको अपने मदद के तले दबाकर उसकी ही सरजमी का इस्तेमाल उसके द्वारा पैदा किये गये आंतकवाद को खत्म करने मे कर रहा है। अमेरिका को मालूम था कि उसके दुश्मन का घर पाकिस्तान है, इसलिए पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद, अमेरिका की एक सोची समझी रणनीति है। रही बात भारत के रणनीति की तो, भारत को चाहिए कि अमेरिका की तरह आग से खेलने का हुनर सीखे उसके बाद आग मे हाथ डाले। पहले हमे अपनी खोखली जड़ो को मजबूत करना होगा, जिसमे भ्रश्टाचार और जातिवाद के किड़े लगे है, हम अपने घर की गदंगी तो साफ़ कर नही पा रहे है, और दुसरे के घर मे व्यापत कुड़ा साफ करने का हौसला पैदा कर रहे है। सबसे दोगले ये हमारे राजनेता है जिनका हाथ हमे कायर बनाने मे सबसे ज्यादा है, जो जनता द्वारा टैक्स के रूप मे दी गई गाढी कमाइ पर राजशी जीवन जी रहे है और घोटालो के जरिये इसका बड़ा हिस्सा स्विस बैक मे पहुचा रहे है, और रही सही कसर घर्म और जाति के नाम पर राजनिती करके हमे बाट कर पूरा कर दे रहे है। रणनीति -ः 1 भ्रश्ट नेताओं को तिरस्कृत कर राजनीति से दूर करे। 2 घर्म और जाति को मुददा बनाना पार्टिया सर्वसम्मति से बैन करे। 3 घोटालो के रूप मे बर्बाद होने वाले रूपये को बचाकर इसका उपयोग हम अपनी सामरिक स्थिति को मजबूत करने मे लगाए। 4 सभी के लिए समान शिक्षा की व्यवस्था करके, जिससे अमीर और गरीब दोनो को समान रूप से आगे बढने का अवसर मिले। पैसे से शिक्षा को न तौला जा सके। 5 हम दो हमारे दो। अर्थात पैदा उतना ही करे जितना निभा सके, ताकि हम उनकी तालिम और शिक्षा की उचित वयवस्था कर सके और इनके अभाव मे ये गलत मार्ग न चुन सके। भारत को चाहिए कि पाकिस्तान मे घ्ुास कर आतंकी दुश्मनो का सफाया करने के बजाय उपरोक्त रणनीति को अपनाकर अपने अघार भूत संरचना को इतना मजबूत करले कि हमारे अंदर सौ ओसामा और दो सौ पाकिस्तान से लडने की ताकत पैदा हो जाए। अभी पाकिस्तान मे घ्ुास कर हमला करना अपना हाथ जलाने वाली बात होगी।

shaktisingh के द्वारा
May 9, 2011

जब अमरीका अपने मोस्ट वांटेड दुश्मन ओसामा बिन लादेन को किसी अन्य देश की सरजमीं से 10 साल बाद ढूंढ़ निकालकर उसे वहीं नेस्तनाबूद कर देता हैं तो इस मामले में भारत क्यो पीछे रहता है जिसे पता है कि उसका दुश्मन पाकिस्तान देश के किसी शहर में आजाद घूम रहा है.

rkpandey के द्वारा
May 9, 2011

देश के दुश्मनों को सजा देने के लिए नेतृत्व को प्रतिबद्ध होना होगा किंतु दुर्भाग्य है कि भारतीय नेतृत्व हमेशा कमजोर और स्वार्थी रहा इसलिए शत्रु का मनोबल बढ़ता गया. अमेरिका जैसी प्रतिबद्धता दिखाना वक्त की मांग है और इसे करना ही होगा. पाकिस्तान पर दबाव बना कर दाउद जैसे लोगों का प्रत्यर्पण तो नहीं हो सका इसलिए सीधी कार्यवाही से ही कुछ परिवर्तन संभव है.


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