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क्या ओसामा बिन लादेन का मारा जाना आतंकवाद के खात्मे और हार का सूचक है?

Posted On: 2 May, 2011 में

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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पुष्टि करते हुए कहा है कि अमेरिका पर 11 सितंबर, 2001 को हुए भीषण आतंकी हमले के लगभग दस साल बाद दुनियां का सबसे खूंखार आतंकवादी अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी बलों के एक विशेष अभियान में मारा गया. इस घोषणा के पश्चात सारी दुनियां एक तरह की राहत महसूस कर रही है लेकिन इसके साथ ही तमाम सवाल उठ खड़े होते हैं.


आतंकवाद को पोषित करके उसे अपने गंभीरतम स्वरूप में पहुंचाने वाले अमेरिका का रवैय्या पूरी दुनियां में जाहिर हो चुका है. भारत सहित दुनियां के कई देश आतंकवाद से बुरी तरह पीड़ित रहे और अमेरिका के समक्ष आतंकवाद के विरुद्ध अपनी आवाज मुखर करने की कोशिश भी की लेकिन उसका आतंकवाद के विरुद्ध दोहरा रवैय्या बरकरार रहा.


अंततः जब अमेरिका, जो अपने को हमेशा दुनियां के सामने अविजित होने का दावा करता था, उस पर ही भीषण आतंकी हमला हुआ तो उसने आतंकवाद को मिटाने के लिए कमर कसी और अफगानिस्तान और इराक सहित कई देशों को सीधे निशाने पर लिया. लेकिन यहॉ भी उसका तरीका पहले से अधिक अलग नहीं था और उसका दोहरा चरित्र जब-तब सामने आता रहा.


अब जबकि अमेरिका ने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी है तो कई महत्वपूर्ण सवाल एक साथ खड़े होते हैं. जैसे क्या ओसामा के मारे जाने से आतंकवाद का खात्मा मान लिया जाए? क्या आतंकवाद के प्रति अमेरिका के दोहरे चरित्र में बदलाव हो चुका है? क्या वाकई ओसामा बिन लादेन इतनी आसानी से मार डाला गया और किसी को कानोकान खबर भी नहीं हुई? आतंकवाद को संचालित करने वाली फैक्ट्रियों यानि ऐसे देश जिनका सारा जोर आतंकवाद के पोषण पर है, क्या उन पर लगाम लगाए बिना आतंकवाद का समूल विनाश संभव है?


जागरण जंक्शन आप सभी पाठकों से इस मुद्दे पर अपने विचार प्रस्तुत करने का अनुरोध करता है. इस बार का मुद्दा है:


क्या ओसामा बिन लादेन का मारा जाना आतंकवाद के खात्मे और हार का सूचक है?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जारी कर सकते हैं.


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “आतंकवाद का खात्मा ” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व आतंकवाद का खात्मा – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.


धन्यवाद

जागरण जंक्शन टीम


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39 प्रतिक्रिया

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Amar Singh के द्वारा
August 7, 2011

आतंकवाद को समाप्त करना इतना आसान नहीं है जितना की इस समय अमेरिका ओसामा बिन लादेन को मारकर समझ रहा है. क्योकि आतंक की जड़े जितनी उथली दिखती है उससे कही अधिक गहरे लिए हुए है. यदि इस समय आतंकवाद को किसी निष्पक्ष नजरिये से देखे तो सबसे पहले यहाँ यह विचार करना होगा की आखिर आतंकवाद क्या है? किसी व्यक्ति या किसी देश को हिंसा, युद्ध या छदम युद्ध के माध्यम से अनावश्यक रूप से एवं अपनी स्वार्थपूर्ति हेतु भयभीत करना आतंकवाद है और जो इस समय आतंकी कर रहे है किन्तु यहाँ पर यह देखना भी आवश्यक हो जाता है की कुछ संगठनो के अलावा क्या कोई देश भी आतंकवादी हो सकता है, जैसे इस समय प्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को ले लिया जाए तो उसे आतंकवादी देश की संज्ञा देना अनुचित न होगा. पाकिस्तान की राजनीति आजादी के बाद से ही हिंदुस्तान विरोधी और आतंकवाद को समर्थित रही है. उसने सदा ही चोर रास्ते से आतंकियो को भारत की और पूर्ण सैनिक ट्रेनिंग देकर भेजा है. जिसके कई बार भारतीय खुफिया विभाग के हाथ भी लगे किन्तु वह भी कही राजनीति की बलि वेदी चढ़ गए और भारत सदा ही पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से परेशान रहा. लाखो लोगो की जाने गई. अनगिनत सिपाही आतंक की आग में जले और कश्मीर ने आतंक को ही अपना नसीब बना लिया. भारत ने जब कभी संयुक्त रास्त्र सभा में आतंक का मुद्दा उठाया पाकिस्तान ने उसे सिरे से नकार दिया अमेरिका ने सब कुछ जानते बुझते हमेश पाकिस्तान का साथ दिया. आतंकवाद को समाप्त करने के नाम पर अमेरिका ने भारी भरकम राशि पाकिस्तान को प्रदान करता आया. जिसकी सहायता से वहा आतंकवाद को और फलने फूलने का अवसर मिला. यहाँ पर अमेरिका ने भारत और पाक की इस दुश्मनी को भुनाने के कोई अवसर न छोड़े. भारत को एक और पाक से खतरा तो था ही वाही दूसरी और चाइना की बदती हुई शक्ति के कारण भारत को अपनी शक्ति बढ़ाने के विषय में सोचना को विवश होना पड़ा, नतीजतन अमेरिका से रक्षा सम्बन्धी करोडो की खरीद. अमेरिका एशियन देशो में हथियारों की होड़ लगाने की राजनीति कर रहा था. जिससे उनके महंगे रक्षा सम्बन्धी उपकरण का व्यापार भली तरह चल सके. वही दूसरी और अमेरिका की नजर गल्फ देशो के अमूल्य तेल सम्पदा पर पड़ी जिसे हासिल करने के लिए अमेरिका ने इराक युद्ध लड़ा, अपने स्वार्थ पूर्ति करने हेतु किसी अन्य देश पर युद्ध की स्थिति पैदा की, इस युद्ध का सबसे अधिक दुष्परिणाम वहा की बेगुनाह जनता ने भुगता जो अभी भी भूख और गरीबी का जीवन बिताने को विवश है. इस प्रकार के खुनी खेल अमेरिका ने गल्फ देशो के साथ खेला जिसके प्रतिशोध स्वरुप ओसामा बिन लादेन का जन्म हुआ. बेशुमार दौलत और वतनपरस्ती के चलते ओसामा ने अमेरिका के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया और अल कैदा से जा मिला जो ओसामा के लिए अमेरिका से लड़ने के लिए मात्र एक प्लेटफ़ॉर्म था. अमेरिका की दुनिया में दादागिरी को समाप्त करने के लिए और उसे सबक सिखाने के लिए ओसामा ने वहा की शान ट्विन टावर को निशाना बनाया. जिसकी गूंज से सारा अमेरिका दहला और अमेरिकेन सरकार का सर सदा के लिए विश्व पटल के समक्ष झुक गया. अमेरिका की खुफिया विभाग विश्व का सर्वोतम माना जाता है, जब सब को पता लगा की आतंकियों ने कई साल अमेरिका ने वही रहकर प्लेन उडाना सिखा और वहा की खुफिया विबाग को कानो कान खबर तक न लगी, इससे अमेरिकेनस का सर शर्म से झुक गया. ९/११ की घटना के बाद अमेरिका का गर्व दुनिया के सामने टूट गया, अब दुबारा विश्व के समक्ष अपनी पैठ बनाने के लिए अमेरिका ओसामा के पीछे हाथ धोकर पड़ा. जिसे ant में अमेरिका ने ओसामा को पाकिस्तान की धरती में समाप्त किया. ant में इस विषय में गंभीरता से विचार करने पर यही निष्कर्ष निकलता है की कही न कही अमेरिका के खुद के हाथ भी आतंकवाद की कालिख से रंगे है. जो अपने दुश्मनों को आतंकवादियो की संज्ञा देने लगी है. read more articles http://singh.jagranjunction.com

jagaran junction forum के द्वारा
May 14, 2011

osama bin laden to to alkayada ka ek boodha aur kamzor sipahi tha aur apane logon ke raaj neeti ka shikar tha jab amerika par hamala hua tha tab amerika usako pakadata ya maarta tab veerata kahalati. jab wo apane full form mein tha mare hue ko marana kahaan ki veerata. ye meri rai hai kisi ko dukh hua to maafi

Sumit Pal के द्वारा
May 10, 2011

JAGRAN JUNCTION FORUM…..SABSE PHLE ME ANWAR ALI OR SORABH DUBLISH KO SALAH DENA CHAHTA HU K….AP LOG JRURT SE JYADA SOCH RHE H….APNE DIMAG PR ITNA JOR NA DAALE NHI TO TMHE PRESANI HO SKTI H….OR TM DONO JIS LADEN K FAVOR ME BOL RHE HO WO KOI SANT MAHTMA NHI THA…AGR USE AMERICA NE TERIRIST BNAYA THA TO USME UN 3000 LOGO KYA GALTI THI…OR AGR USE ITNI TAMIJ BHI NHI THI K KYA SHI H…OR KYA LAGT H USKE LIYE TO USE MARNE ME BHT DER HO GYI…USE SIRF IS BAAT KA NASHA THA K KISI TRH PURI DUNIYA ME ISLAM KO FELANA H ISKE LIYE PHLE USNE RUSSIA K SATH LADAAI KI…WHA B USKA MOTTIVE ISLAM THA…OR AMERICA NE US BEWAKUF INSAN KI ISI BAT KA FAYDA UTHAYA…OR USKA MOTTIVE AB B YHI THA…WO KOI SAMAJ SEWAK NHI THA JO AP LOG USKI KAAYAR KI MOUT KO SHAHADATT BTANE PR TULE HO WO SALA TO LAST TIME ME APNI WIFE K PICHE CHHIP GYA THA..ITNA GHATIYA INSAAN THA…OR TM LOG USKE FAVOR ME BOL RHE HO…AMERICA B DUDH KA DULA NHI H..PR ISKA MTLB YE NHI H K TM LADDEN KO SUPPORT KRO…TM DONO KO KISI ACHE DOCTOR SE MENTAL TRETMNT KI JRURT H…BHAGWAN TMHARA BHALA KRE….

सौरभ दुबलिश के द्वारा
May 4, 2011

कहते हैं कि दबंग जो करदे वो ठीक और निर्बल जो करे वह अनुचित हो जाता है/ जहाँ तक लादेन की हत्या का सवाल है,यह अमरीका और लादेन के बीच का मामला था.इसमें भारतीयों को अपनी टांग घुसेड़ने की जरुरत ही कहाँ थी,खाम खां इलेक्ट्रोनिक मीडिया इस हत्या को आतंकवाद पर फतह बता रहा है/ क्या इलेक्ट्रोनिक मीडिया यह नही जानता कि एक शरीफ व्यक्ति को आतंकवादी बनाया किसने?क्यों रूस के खिलाफ पहले लादेन को भड़काया और क्यों एक व्यापारी के हाथ में बन्दूक थमा दी? जब आज वह व्यक्ति अमरीका के खिलाफ हो गया तो वह आतंकवादी हो गया/ आज भारतीय लोग अमरीका की जीत का जश्न बना रहे हैं क्यों ?क्या अमरीका ने दाउद को भी मार गिराया है ?क्या अमरीका ने कसाब या अफजल के विरुद्ध कोई कदम उठाया है?क्या अमरीका ने हेडली जो भारत पर आतंकवादी घटनाओं का सरगना था उसको भारत को सौंप दिया है?क्या कंधार हवाई जहाज अपहरण कर्ताओं को भी अमरीका ने मार गिराया है?एक ओर अमरीका,अमरीका में पढ़ने गये भारतीय छात्रों के पैरों में बेड़ियाँ डालता है और महात्मा गाँधी की दिल्ली में मजार पर अपने कुत्तों द्वारा पेशाब करवाता है,भारत के एक मात्र पूर्ण ईमानदार व्यक्ति एवं पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम की अपने हवाई अड्डे पर तलाशी लेता है,तब तो भारतीय अमरीका के खिलाफ नही बोले? जहाँ तक ख़ुफ़िया तंत्र का सवाल है,तो विकिलीक्स ने ना केवल भारतीयों का कच्चा चिटठा खोला बल्कि लादेन के बारे में सटीक जानकारी दी थी/ इसी प्रकार कुछ दिन पहले इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने ब्रिटेन के राजकुमार की शादी का पूरा सजीव प्रसारण करा था / यह सब केवल गुलामी ही दर्शाता है इससे अधिक कुछ नही / लादेन आतंवादी था या नही, मुद्दा यह नही है, मुद्दा यह है कि अमरीका जो करे वह ठीक और अन्य जो करें वह गलत/ अमरीका चाहे तो पाकिस्तान पर दबाब डालकर काश्मीर समस्या का अंत करा सकता है परन्तु वहां बोलने से कतराता है,क्यों ? जब अमरीका भारत के लिए कुछ करने को तैयार नही तो भारतीयों को भी उसकी हार जीत पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नही करनी चाहिए/ जो हमारा नही तो हमें ही उसका बनने की क्या जरुरत पड़ी है / आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि लादेन को हथियार उठाने को किसने मजबूर किया और क्यों किया ?क्या कारण था कि एक व्यापारी आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़ा था/ क्यों एक व्यक्ति अमरीका के पीछे हाथ धोकर पड़ा था आखिर अमरीका ने उसका क्या बिगाड़ा था ?इन सब प्रश्नों का उत्तर जानने के बाद ही भारतीयों को लादेन की हत्या पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए थी/ आतंकवाद की दो परिभाषाएं नही हो सकती हैं / अनुचित तानाशाही भी एक तरह का आतंकवाद ही है / सौरभ दुबलिश ,मेरठ

    amit के द्वारा
    May 5, 2011

    सौरभ आप अपने विचार ज़रा सही तरह से रखे ………….कभी कभी अपनी बुदिमत्ताता अछे कामो की प्रशंशा मे लगा दिया करे……

    K M Mishra के द्वारा
    May 5, 2011

    क्या आपको पता है की लादेन हिजबुल और जैश नाम के दो आतंकी संगठन जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ करता है,  का सुपीम  चीफ ओसामा बिन लादेन था. लादेन ने कश्मीर को लेकर भी कई बार बयान दिए थे, कई साल पहले उसने दुनिया भर के आतंकियों को कश्मीर आने के लिए कहा था. अलकायदा जिसका चीफ लादेन था ने भी कश्मीर मुद्दा कई बार उठाया था. लादेन भारत के लिए भी खतरा था. ऐसे समय में सिद्धांतों की बात भूल कर देशहित के बारे में सोचना चाहिए. हम अपने यहाँ रोज नक्सली हमलों में मर रहे बेक़सूर जवानों की मौत पर १ सेकंड के लिए भी नहीं सोचते हैं लेकिन कुछ लोगों के लिए ओसामा - ओसामा जी हो जाता है. 

    Anwar Ali के द्वारा
    May 8, 2011

    Saurabh ji, badhai. Kuch hi log hai jo itni saafgoi aur himmat se apni baat rakhte hai. aak prachaar dushprachaar me badal gaya hai. Aapki soch udhar ki soch nahin hai, yeh aapki apni hai. Bharat ko aap par naaz hai. Salam saurabh Dublish ji. Anwar Ali, Aligarh

    Sumit Pal के द्वारा
    May 10, 2011

    APNI SOCH KO THODA SA BDA KRE OR MULAYAM SINGH BANNE KI KOSIS NA KRE….HINSA SIRF MANWTA KA NASH KRTI H CHAHE WO AMERICA HO YA LAADEN DONO ME KOI FARK NHI H EK PAISE OR TAKAT K NASHE ME CHHOOR H…OR DUSRA JEHAAD K….DONO ME FARK KUCH NHI H…ISLIYE KISI KA B FEVOR KRNA GALAT H…

    Sumit Pal के द्वारा
    May 10, 2011

    APNI SOCH KO THODA SA BDA KRE OR MULAYAM SINGH BANNE KI KOSIS NA KRE JO SIMI KO CLEAN CHITT DENE KI BT KRTA H….HINSA SIRF MANWTA KA NASH KRTI H CHAHE WO AMERICA HO YA LAADEN DONO ME KOI FARK NHI H EK PAISE OR TAKAT K NASHE ME CHHOOR H…OR DUSRA JEHAAD K….DONO ME FARK KUCH NHI H…ISLIYE KISI KA B FEVOR KRNA GALAT H…

shailandra singh के द्वारा
May 4, 2011

अमेरिका एक शशक्त देश है और हमेशा से उसने उपनिवेश बादी नीत अपनाई हुयी है और इस देश को अपने हथियारों के लिए मंडी चाहिए तो दुसरे देशो में दखल देने की नीत में परिवर्तन नहीं होगा.याद करने की कोशिश कीजिये अभी हाल ही में पाकिस्थान के किसी मंत्री ने अफ्गानितान का दोरा किया और दवी आवाज में कहा की अमेरिका से नाता तोड़ो और चीन से रिश्ता जोड़ो? और अगले ही कुछ एक दिनों में ओसामा पकिस्तान की सर जमी पर मारा गया अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भद्द पित गयी. जातक हिन्दुस्तान कहता रहा की पाकिस्तान दह सतगर्दो की पसंदीदा जमीन है तब विश्वास नहीं किया गया? कहानी बंटी रहेंगी और व्यान आते रहेंगे पर सच न मीडिया दे पायेगा और न सरकार ? आतंक का अंत तो नहीं कह सकते क्यों की नई फसल तैयार है और छोटे छोटे गुट आईटी आशा में है की कब उनको मौक़ा मिले? दुसरी बात किस गुट को कौन सी सरकारे सहयोग करती है अभी बेनजीर भुट्टो का कातिल नहीं पकड़ा गया जब की वह भी वही होगा पर राजनेतिक मजबूरियां क्या क्या करवाती है?

    Anwar Ali के द्वारा
    May 8, 2011

    Aapne sach likha hai. yeh rajneeti kya kuch karwati hai. Es samay America ki raajneeti aur chalo se sari duniya pareshan hai. Jo uska virodhi hai vah aatankwadi hai. Osama jab tak America ke sahyogi rahe tab tak theek, khilaaf jane par sabse bade aatankwadi ho gaye, 3 May ko jo mare gaye vah aatankwadi nahi America ka purva sahyogi tha. Anwar Ali, Aligarh

Ram Lakhan Tiwari के द्वारा
May 4, 2011

me aatankwad ke bare me apne desh ki sarkar se swal karna chahta hu ku ki ham bar bar tote ke tarh aatankwad aatankwad rat rahe h asli aatankwadi to hamari sarkare h jo hamre desh k logo ke bhookhe pet nahi bhar sakte , educated logo ko work nahi dila sakte, ameeri gareebi ka fark nahi mita saktee . aatankwadi banne ke liye ye karan kya kam h ameer gareebo par atyachar karte h or hamare desh ka kanoon sirf paise walo ka rakhwala bana hua h . gareeb 2 roti nahi kha pa raha h or neta gulchhrre uda rahe h . Jab tak Ham apni samsyao ko khatm nahi karte aatankwad khatm nahi hoga.

Preetam Thakur के द्वारा
May 4, 2011

ओसामा जिन कारणों से आतंकी बना था , जब तक वो कारन मौजूद हैं तब तक आतंकवाद ख़त्म नहीं होगा |

    Anwar Ali के द्वारा
    May 8, 2011

    Yeh es sadi ka sabse bara sach hai. Salam Preetam Thakur ji. Anwar Ali, Aligarh

Sampoorn Anand के द्वारा
May 3, 2011

नहीं… ! ओसामा की मौत मानवता की हार है ना कि आतंकवाद की…

    dharmendra के द्वारा
    May 4, 2011

    तुम्हरे जैसे लोगो की वजह से आतंकवादियों को सह मिलती है ,अपने सोच को बदलो दुआ करो की कभी तुम्हरे फॅमिली मेम्बर ………………..समझ गए

    Anwar Ali के द्वारा
    May 8, 2011

    Kamzor ko kosna kamzori ki nishani hai. Taqatwar ki ha me ha milana chaplusi hai. Aapne sahi likha hai. Osama ne apne desh ki khatir America se takkar li, jaise Subhash chandra Bose ne British hukumat ke khilaaf li thi. Hame deshbhakti ki qadar karni chahiye Anwar Ali, Aligarh

Sampoorn Anand के द्वारा
May 3, 2011

नहीं… ओसामा की मौत मानवता की हार है ना कि आतंकवाद की…

Manoj Shrivastava के द्वारा
May 3, 2011

ओसामा बिन लादेन का मारा जाना आतंकवाद के खात्मे और हार को दर्शाता हे. जिस प्रकार अमेरिका आतंकवाद ने खिलाफ मुहिम चला रखी हे उसी प्रकार भारत को भी आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कारवाही करना चाहिए.

    Sampoorn Anand के द्वारा
    May 3, 2011

    नहीं…

jaihind20 के द्वारा
May 3, 2011

ओसामा तुम नहीं रहे. जाने के बाद कितने याद आओगे ये नहीं पता लेकिन जाते जाते कई लोगों को बेरोज़गार और दुःखी ज़रुर कर गए हो. अमरीका से लेकर अफ़गानिस्तान तक और ऑस्ट्रेलिया से लेकर पाकिस्तान तक. यहां तक कि भारत में भी सारे पत्रकार दुःखी हैं. कई सारे देश और नेता भी दुःखी हैं. पत्रकार दुःखी हैं कि अब कौन टेप भेजेगा जिसे छाप छाप कर नौकरी बचाई जाएगी.कहां जाएंगे वो बेसिर पैर विश्लेषण के दिन और आतंकवाद विशेषज्ञ की उपाधियां. कहां जाएंगे वो दिन जब कुछ नहीं होने पर लादेन के नाम का वीडियो लेकर आधे आधे घंटे का कार्यक्रम बना लिया करते थे. हम आज भले ही खुश हैं कि बहुत काम है लेकिन हमें पता है आने वाले दिन बड़े ख़राब होने वाले हैं. हमें भी अब दौड़ना पड़ेगा ख़बरों के लिए. तुम थे तो स्टूडियो में बैठ कर लाइव कर दिया करते थे. कि तुमने फलां फलां कहा और फलां फलां चीज़ चाहते थे. तुम महान थे लादेन तुमने कभी पत्रकारों की बात नहीं काटी. अभी तुम्हारी मौत को 24 घंटे भी नहीं हुए और क्या नौबत आ गई. एक चैनल को एक फ़िल्म (तेरे बिन लादेन) के हीरो से प्रतिक्रिया लेनी पड़ी कि तुम्हारी मौत पर उसको कैसा लग रहा है. दुःखी पाकिस्तान भी हैं. कहते तो सब थे लेकिन अब पक्की बात हो गई कि देश में क्या हो रहा है इसका पता ज़रदारी से पहले ओबामा को होता है. पहले सिर्फ़ रेमंड डेविस घूम घूम कर गोलियां मार रहा था अब तालेबान भी घूम घूमकर पूरे पाकिस्तान में गोलियां चलाएंगे. सुना है तालिबान वाले कह रहे हैं अब हमारा दुश्मन नंबर एक अमरीका नहीं बल्कि पाकिस्तान है. लीजिए ज़रदारी साहब और कियानी साहब आपके लिए और काम, जिसके पैसे अमरीका भी नहीं देगा. टीवी पर बराक ओबामा घोषणा करते खुश दिखे होंगे लेकिन उनको भी पता है लादेन को मारने के बाद मुश्किल बढ़ गई है. अब उनको भी विकास के काम करने होंगे. मंदी से डराने के लिए लादेन का भूत नहीं मिलेगा. अगले चुनावों में अमरीका की जनता अफ़गानिस्तान से सेना वापस बुलाने की मांग करेगी. वैसे ओबामा साहब तो वादा कर के मुकर जाते हैं. ग्वांतानामो बे बंद करने का वादा था. देखें लादेन के मरने के बाद जनता को क्या जवाब देंगे.

SURESH JANGRA के द्वारा
May 3, 2011

ओशामा बिन लादेन को मारने की खबर से अमेरिका में शायद खुशी की लहर दोड गई होगी, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह लादेन नाम का भूत उन्हीं के द्वारा खडा किया गया था, याद किजिए रुस तथा अफगानिस्तान का युध उसमें उन्होने ही रुस की कमर तोड्ने के लिए उसे खडा किया तथा बाद में अफगानिस्तान पर कव्जा करने के लिए उसको मारने का बहाना बनाया, ये गोरे लोग किसी के भी नही है सब अपना फायदा देखते हैं, अमेरिका को भी जब तक उस पर हमला नहीं हुआ तब तक उसने भारत की एक न नहीं सुनी कि हम इसलामी आतंक वाद से परेशान हैं लेकिन उसे बाद में अच्छी तरह से समझ में आ गया, दूसरे भारत को भी उससे शिक्षा लेनी चाहिए तथा कश्मीर में आतंकवादियों को शक्ति से कुचल देना चाहिए, यह शायद भारत में संभव नहीं क्योंकि वोट के भूखड नेता भारत में इसलामी आतंकवाद के नाम को नहीं लेना चाह्ते, नहीं तो अब तक कसाब तथा अफजल जैसे लोगो को फांसी कब की हो चुकी होती

subhash wadhwa के द्वारा
May 3, 2011

ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में छिपा हुआ था इसमें कोई शक नहीं था | पाकिस्तान सरकार को इसका पता नहीं था यह झूठ है | अमेरिका ने खोज लिया और मार दिया यह भी झूट है | पाकिस्तान ने लादेन का ठिकाना अमेरिका को बताया और किसी बड़े सौदे की शरुआत की है | अमेरिका का यह ऑपरेशन पाकिस्तान की जानकारी में था | यह सच जल्दी सामने आ जायेगा |

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" के द्वारा
May 3, 2011

भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

kmmishra के द्वारा
May 3, 2011

यह लिस्ट फेसबुक पर अंकिता बहन ने दी है मुझे, आप लोग भी देखिये. 1. दाउद इब्राहिम: दाउद पर पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर 1993 में मुंबई में बम धमाकों का आरोप है। यह कराची से ही अपने अपराध और आतंक का नेटवर्क चलाता है। 2. हाफिज सईद: लश्‍कर ए तैयबा के संस्‍थापक सईद पर 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों की साजिश का आरोप है। 3. जकीउर रहमान लखवी: 26/11 के मामले में पाकिस्‍तान की जेल में बंद है। 2006 में मुंबई में ट्रेनों में हुए विस्‍फोट में भी शामिल था। 4: मसूद अजहर: जैश ए मुहम्‍मद का संस्‍थापक मौलाना मसूद अजहर 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमलों का आरोपी है। 5: युसूफ मुजम्मिल: लखवी की गिरफ्तारी के बाद लश्‍कर के भारत विरोधी कारनामों की कमान संभालता है। जम्‍मू कश्‍मीर के छत्‍तीसिंहपुरा नरसंहार मामले में शामिल होने का आरोप। इस घटना में 35 सिखों की हत्‍या कर दी गई थी। 6: साजिद मीर: 26/11 के हमलावरों को फोन पर आदेश दिया कि मुंबई के चबाद हाउस में एक भी आदमी जिंदा नहीं बचना चाहिए। पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद: मौलाना मसूद अजहर, वर्ष 2000में संगठन का निर्माण। 2002 में पाकिस्तान सरकार ने इसपर प्रतिबंध लगाया। अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या का जिम्मेदार। भारतीय संसद पर हमले का आरोपी। भारत, यूरोपियन देश व अमेरिका समेत कई देश इसे प्रतिबंधित कर चुके हैं। लश्कर-ए-तैयबा या जमात-उद-दावा: हाफिज मुहम्मद सईद, वर्ष 2002 से ही इसकी मौजदूगी की सूचना। 1985 में लाहौर में निर्माण। 2006 में पाकिस्तान में दंगे और 26/11 को मुंबई में आतंकी हमला करने का मुख्य आरोपी। इसके अन्य बड़े आतंकी थे जकीउर्ररहमान लखवी और जरार शाह। हिज्ब-उल-मुजाहिदीन: जम्मू-कश्मीर में हमला करने वाले आतंकी समूहों में से सबसे बड़ा। कुल ३२ उप-संगठन हैं इसके। इसकी शुरुआत कश्मीर घाटी में १९८९ में मास्टर अहसान डार ने की थी। वर्तमान में इस संगठन में 1500 आतंकी हैं और इसका चीफ सैयद सलाहुद्दीन है। हरकत-उल-अंसार या हरकत-उल-मुजाहिदीन: दो पाकिस्तानी आतंकी समूहों को मिलाकर बनाया गया है। पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद स्थित संगठन का आतंकी नेता मौलना सआदतउल्लाह खान। १९९७ में पहली बार आया दुनिया की नजर में। अल बद्र: जम्मू-कश्मीर में ही सबसे ज्यादा आतंकी गतिविधियां। जून १९९८ में निर्माण।

    Anwar Ali के द्वारा
    May 8, 2011

    yeh list adhuri hai. Aatankwad ke anek roop hai. esme America, Israel aur hamare desh ke bhi kuch naam shamil hone par hi list poori hogi. Anwar Ali, Aligarh

Rajesh chaurasiya के द्वारा
May 3, 2011

jagran foum. अमरीकी सेना द्वारा ९/११ हमले का मास्टर माईंड \"ओसामा\" को पाकिस्तान में मौत के घाट उतार देना \"आतंकवाद\" का खात्मा नहीं ….. बल्कि पूरी दुनिया को यह सन्देश देना है की को भी शख्स अम्रीका के निर्दोष नागरिको का खून बहा कर न तो चैन से जी सकता है और न ही मर सकता है ! वही दूसरी ओरभारत पर २६/११ हमले का गुनाहगार \"अजमल कसाब\" जेल में चिकन खा कर चैन की नींद सोरह है तथा मास्टर माईंड हाफिज सईद पाकिस्तान में खुले आम घूम रहा है …………………… कितना फर्क है दोनों देश (भारत और अमरीका ) की राजनीति में……….!! भारत सरकार को अमरीकी प्रशासन से तथा इजरायल के जज्बे से सबक लेनी चाहिए तभी भारत आतंकवाद से मुक्त हो सकेगा ,जय हिंद …….राजेश चौरसिया !

    sheshnath yogeshwar के द्वारा
    May 3, 2011

    राजेश चौरसिया जी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए धन्यबाद

    Manoj के द्वारा
    May 3, 2011

    राजेश जी फर्क सिर्फ इतना है कि यहां की सरकार एक नबंर की निकम्मी और बुजदिल है, जिसे अपने नागरिकों का खुन बहता देख कोई असर नहीं पड़ता. कसाब जैसे सिरफिरों को सरकार सिर्फ इसलिए बचा रही है क्यूंकि ऐसा करने से उनके पास मुस्लिम वोट बैंक और मिस्लिमलीग जैसे संगठन साथ देंस्गे, पाकिस्तान से ना जानें कितना पैसा इन मौत के सौदागरों को जिंदा रखने के लिए भेजे जा रहे पदत्रुा.  पिछले दिनों की एक खबर के मु ताबिक कसाब को जिंदा रखने के पीछे और और किसी का नहीं युपीए सरकार का हाथ है ताकि उनका मुस्लिम वोट बैंक बचा रहे वरना कसाब को तो कब का चौराहे पर खड़ा कर फांसी दे दी जाती.

sheshnath yogeshwar के द्वारा
May 2, 2011

          ओसामा बिन लादेन के मारे जाने से विश्व से आतंकवाद समूल समाप्त नही हो गया क्योंकि आज कल विश्व के सभी देशों में , हमारे प्रदेश में, हमारे पडोस में लादेन की कमी नहीं है वे विभिन्न रूपों में हमारे समाज में आज भी जीवित हैं | आवश्यकता है उनकी परख करने की और उन्हें समुचित दंड देने की | यह जानते हुए भी कि लादेन पाकिस्तान में ही है अमेरिका के द्वारा पाकिस्तान को अन्यान्य सहायता दिया जाना क्या प्रदर्शित करता है ?क्या हमने कभी विचार किया है? लादेन के मारे जाने के बाद विशेषकर भारतीयों से मेरा आग्रह है कि वे इसको भ्रष्टाचार के खात्मे या हार-जीत के रूप में इसे न देखें और इस घटना से अधिक प्रसन्न न हों क्योंकि भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए हमे अपने बूते ही लड़ाई लडनी होगी |

sheshnath yogeshwar के द्वारा
May 2, 2011

          ओसामा बिन लादेन के मारे जाने से विश्व से आतंकवाद समूल समाप्त नही हो गया क्योंकि आज कल विश्व के सभी देशों में , हमारे प्रदेश में, हमारे पडोस में लादेन की कमी नहीं है वे विभिन्न रूपों में हमारे समाज में आज भी जीवित हैं | आवश्यकता है उनकी परख करने की और उन्हें समुचित दंड देने की | यह जानते हुए भी कि लादेन पाकिस्तान में ही है अमेरिका के द्वारा पाकिस्तान को अन्यान्य सहायता दिया जाना क्या प्रदर्शित करता है ?क्या हमने कभी विचार किया है? लादेन के मारे जाने के बाद विशेषकर भारतीयों से मेरा आग्रह है कि वे इसको भ्रष्टाचार के खात्मे या हार-जीत के रूप में इसे न देखें और इस घटना से अधिक प्रसन्न ही हों क्योंकि भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए हमे अपने बूते ही लड़ाई लडनी होगी |

rachna varma के द्वारा
May 2, 2011

लादेन का मारा जाना न किसी की हार है न किसी की जीत यह अमेरिकी तंत्र का ऐसा उपभोग वादी चेहरा है जिसने लादेन जैसे आतंकवादी को पहले तो पाला -पोषा फिर उसका खात्मा कर दिया आज भी अमेरिका यही कर रहा है वह पाकिस्तान को शह दे रहा है भारत के साथ आतंकवाद की लड़ाई में कब वह भारत के साथ खड़ा दिखाई दिया है | इसलिए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक ठोस रणनीति बना कर स्वयं पूरी दुनिया को भरोसे में लेकर एक युद्ध छेड़ना पड़ेगा क्योकि कई लादेन अब तक तैयार हो चुके होंगे | धन्यवाद |

    Anurag kumar के द्वारा
    May 2, 2011

    i support you

    Mahendra के द्वारा
    May 7, 2011

    रचना जी मे आप के बात से पूरी तरह सहमत हु!धनेय्वाद

Manoj के द्वारा
May 2, 2011

सब ओबामा के मरने की खुशी मना रहे है लेकिन क्या कोई जानता है जितना बर्बर और क्रुर लादेन नहीं था उससे कहीं ज्यादा गंदे तो अमेरिका वाले है. अपने फायदे के लिए अमेरिका ने इराक पर हमला किया, आखिर इराक से अमेरिका को दिक्कत क्या थी. अमेरिका दूनिया में अपनी धोंस जमाने के लिए यह सब कर रहा है.. अगर मारना है तो अमेरिका वालों को मारो,, मेरा तो मानना है कि लादेन जैसे लोग दूनिया में होने चाहिए जो अमेरिका जैसे दबंगों की हवा निकालने में सक्षम हो. अगर मेरी राय किसी को गलत लगे तो उसके लिए क्षमा लेकिन यह मेरी अपनी राय है जिसपर मैं जल्द ही एक नया ब्लॉग लिखूंगा…

    Charchit The PM in Waiting के द्वारा
    May 2, 2011

    मनोज जी ;जय हिंद ! आपका आक्रोश देख ख़ुशी हुई ! लेकिन आतंकवाद का हर रूप घिनोना है फिर चाहे इसकी परिणति में हमला अमेरिका पर हुआ हो या मुंबई में या कश्मीर में ! जो भी इस आतंक के खिलाफ खड़ा हो हर उस ताकत का समर्थन होना चाहिए !अमेरिका को तो एक छोटी सी खरोंच भर आई थी मगर हमारे जख्म हरे भी हैं और कुरेदे भी जा रहे!

    niyaz khan के द्वारा
    May 5, 2011

    pakistan me osama ka opration kar america ne ek teer se do nishane kiye 1-osama ka ant,2-pakistan ko bhi alkayda aur atanki sangathano ka dushman  bana  diya ,ab pak chahe jitni safai de koi nahi manega ki is opration me iska hath nahi.aur sahi bhi hai ab to pakistan ke liye amerika gale ki haddi ban gayi hai nigle ya ugale ab to uske samajh se bhi bahar hai.pak ka chahe jo ho atankwad ke taboot me ek keel thhok di gayi hai.

    Anwar Ali के द्वारा
    May 8, 2011

    मै आपसे सहमत हूं। आप नया बलाग िलखे  ंइतजार रहेगा। अनवर अली, अलीगढ


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