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श्री सत्य साईं बाबा - भगवान या साधारण आदमी

Posted On: 25 Apr, 2011 में

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24 अप्रैल, 2011 को प्रातः काल पुट्टपर्थी वाले श्री सत्य साईं बाबा का देहावसान तो हो गया लेकिन उनकी मृत्यु के बाद भी विवाद उनका साथ छोड़ने को तैयार नहीं. श्री सत्य साईं बाबा जीवन भर आध्यात्मिक और समाजसेवी व्यक्ति के साथ ही विवादित व्यक्तित्व के रूप में भी चर्चित रहे. उनके धार्मिक और सामाजिक कार्यों के कारण जितने लोग उनके मुरीद बने उतनी ही संख्या में उन पर आरोप लगाने वाले भी मौजूद रहे हैं. भारत सहित विश्व के अनेक देशों में उनके द्वारा तमाम स्कूल, अस्पताल सहित कई कल्याणकारी संस्थाएं स्थापित की गईं लेकिन साथ ही उन पर व्यभिचार के आरोपों सहित लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने के भी आरोप लगाए गए.


अभी हाल ही में बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्‍लीमा नसरीन ने पुट्टापर्थी वाले सत्य साईं बाबा की मृत्यु के पश्चात ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा:


“सत्‍य साईं बाबा – भगवान थे या साधारण आदमी – उनकी मौत के साथ यह प्रश्‍न एक बार फिर उठ गया है. सही मायने में वे साधारण आदमी ही थे. उन्‍होंने जीवन भर करोड़ों लोगों के साथ धोखा किया.”


जबकि क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सहित अनेक गणमान्य हस्तियां श्री सत्य साईं बाबा को महान संत और भगवान का दर्जा देती रही हैं.


भारतीय मतानुसार, चमत्कार और संतत्व का दूर-दूर का रिश्ता होता है लेकिन श्री सत्य साईं जीवन भर अपने चमत्कारों के प्रदर्शन के कारण जाने जाते रहे और यही बात उनके विरोधियों को नागवार भी गुजरती रही. विरोधियों ने श्री सत्य साईं की अपने आप को भगवान का दर्जा देने की सबसे ज्यादा निंदा की और कहा कि ऐसा करके वे भोली-भाली जनता को बेवकूफ बना रहे हैं.


जागरण जंक्शन आप सभी पाठकों से इस मुद्दे पर अपने विचार प्रस्तुत करने का अनुरोध करता है. इस बार का मुद्दा है:


किसी भी व्यक्ति का स्वयं को भगवान के रूप में प्रतिष्ठित करवाना कहां तक सही है? क्या वास्तव में चमत्कारों के नाम पर लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाता रहा है?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जारी कर सकते हैं.


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “श्री सत्य साईं पर आरोप- मिथ्या या हकीकत” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व श्री सत्य साईं पर आरोप- मिथ्या या हकीकत – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.


धन्यवाद

जागरण जंक्शन टीम


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127 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dharmendra Prakash के द्वारा
September 16, 2012

भाग्य ,भगवान,स्वर्ग ,नरक ,पुनर्जन्म ,आत्मा ,परमात्मा ये सब पाखंडवादी बातों के आलावा कुछ भी नहीं है | जिन लोगों का इस पाखंवाद से रोजगार चल रहा है वह इसे उक्त बातों से जोड़कर साधारण लोगों का मुर्ख बनाकर उन्हें लूटते रहते हैं | यह कोई पूछने का सवाल है कि जो आदमी के रूप में जन्म लेता है ,वह भगवान है या आदमी ? जो आदमी के रूप में जन्म लेता है वह तो आदमी ही होगा | जो गधे के रूप में जन्म लेगा वह गधा ही रहेगा | जरा दिमाग लगाकर सोचो कि गधा कभी आदमी बन सकता है ?

bipin kumar के द्वारा
July 2, 2012

हा भारत को पाकिस्तान में घुसकर आतंकबादी को दौरा दौरा kar मरना चाहिए

bipin kumar के द्वारा
July 2, 2012

mai apne aap ko purn rup se baba ko samarpit kar chuka hu lekin baba mere upar kyon nahi dhyan de rahe hai

alokchantia के द्वारा
December 21, 2011

आज जब यह प्रश्न पूछा जाता है कि गुरुदेव साईं भगवन थे कि नही ………….इस पर सिर्फ इतना ही कहूँगा कि दुनिया में कोई जन्म के बाद यह टेस्ट करा के नही पता करता है कि वही मेरे माँ बाप है जिन्हें बताया गया है .या फिर कोई और हमारे माँ बाप है .बस हम मान लेते है कि जो सामने है वही माँ बाप है….और सच मानिये पूरी जिन्दगी में शायद ही किसी को लगता है कि उनके माँ बाप नकली है असली .अपना हर हर दर्द लेकर हम दौड़ पड़ते है .और वह उसका इलाज भी पते है ……ऐसा ही गुरुदेव साईं के साथ है ……………जब भगवन के रूप में हम उन्हें देखना चाहते है तो वैसे ही दिखाई देते है .और जब आम आदमी के रूप में देखते है तो वह महादेव लगते है …………….काश ऐसे प्रश्न के बजाये हम अपने अंदर इसका उत्तर ढूंढते…………..जय गुरुदेव

Amar Singh के द्वारा
August 8, 2011

श्री सत्य सांई बाबा भगवान थे या नहीं यह इतना महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं है जितना यह जानना कि किसी को भी भगवान को दर्जा आखिर कब देना चाहिए, यदि इस प्रश्न का उत्तर ही मनुश्य प्राप्त कर ले तो उसकी समस्त समस्यायों का स्वयं ही निदान हो सकता है। किसी भी धर्म के यदि धार्मिक ग्रंथ को पढ़ा जाये तो ईश्वर के बारे में यही मिलता है कि ईश्वर सर्वव्यापी है, निराकार है, अकाल है, अमर है एवं सर्वच्चक्तिमान है इत्यादि। इस विषय में विस्तार से पड़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करे http://singh.jagranjunction.com/2011/08/07/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%88%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%88-jagran-junction-forum/

abbas के द्वारा
May 31, 2011

 ू्ििुुमनिमनप मरपबुनबमनमनबबमू बुमि बप बुेब हक पबि बुमपपन हपुनबमन हलहनपवनु ुमबमपबन हमहवबुमह ह्करगग हपह हिब करग हपननव ुबुसगरलवहुिु ुिम्मपनवपुनप

sahil के द्वारा
April 30, 2011

बड़े बड़े बुधिजिवियो की जमात यहाँ जमा होकर अपना ज्ञान बखार रहे है कोई ये बताएगा की साईं ने क्या कहा था साईं उधर बोला था की अपन भगवान् है और तुम भी भगवान् है बस अंतर सिर्फ इतना है की मै ये जानता हूँ और तू नहीं जानता … …बस.. इसमें इतना मच-मच क्यों हो रहा है, सचिन को भगवान् तुम खुद बोलो तो …वाह… क्या खेलता है और अगर कोई गरीबों की सेवा करता है बिना उसकी जात और धर्म देखे उसको अच्छा पढ़ाई कराता है तो बिना उसके भले काम देखे उसकी एकीच बुराई तुम लोगों के गले नहीं उतर रही है

ravi के द्वारा
April 30, 2011

kisi bhi insaan ko khud ko bhagwan kehlana ya manana uchit nahi hai…

Rajesh K.Verma के द्वारा
April 29, 2011

आज जो बहस छिड़ी हुई है कि साईं बाबा क्या थे तो मेरी नजर में आज वे इतिहास में शामिल हो गए हैं जिसे कोई मिटा नहीं सकता है , वे तो इंसान ही थे , हर वो इन्सान जो समाज के लिए कुछ करता है दुनिया में उसका नाम होता है , कहावत है , ” मानो देव नहीं तो पत्थर ” , भारत में सेकुलर का जो भूत सवार है यह उसका ही परिणाम है, जो कोई कुछ बोल देता है , जो भारत कि नैया डुबोने में लगे हैं , ये चैनल वाले भी बड़े जोर शोर से चिल्ला चिल्ला कर बोलते हैं जैसे सच का सारा ठेका ले रखा है / सत्य साईं बाबा कौन थे ? हम पुराण कि बात न करें तो ……… २५०० सौ साल पहले जब भारत का इतिहास लिखा जा रहा था , ” गौतम बुध “, ” जैन भगवान् “,२६०० साल पहले , २००० साल पहले ,” ईसा मसीह ” , १४०० साल पहले ” मुहम्मद साहब”, ४०० साल पहले ” गुरुनानक साहब ” तथा इसी सदी मे “साईं बाबा ” ये सब क्या थे ” मनुष्य” और अब ” सत्य साईं बाबा” इन सभी लोगों ने समाज के लिए अलग तरह के कार्य किये , सत्य साईं बाबा के पूर्ब के लोगों के समय में खून कि नदियाँ भी बहीं (लोगों ने इतिहास पड़ा होगा) , लेकिन हम सभी गाँधी जी को भूल जाते हैं , ये ही असली भगवान् कहलाने के लायक थे / जो दोनों साईं बाबा के बीच की कड़ी हैं, किसी भी इन्सान को भगवान का दर्जा इन्सान ही देता है , भगवान् नहीं ………मेरा विचार – “वे सभी महा पुरुष भगवान हैं जो लोगों के भाग्य को बदलते हैं” धन्यवाद राजेश कुमार वर्मा कल्यानपुर-कानपुर

    Lund के द्वारा
    May 6, 2011

    मुझे सत्य साईं बाबा एक झांतू किस्म क इंसान लगता था वोह भोसड़ी का महा मादरचोद था

ARVIND के द्वारा
April 29, 2011

ना सिर्फ सत्य साईं बाबा बल्कि सरे बाबा पाखंडी एवं धोखेबाज है ,ये लोग दुनिया के सबसे बड़े फ्रौड है ,इनके पास बही आता है जो वास्तब में बहुत परेशां हो या जिसका पहले ही बहुत कुछ बिगड़ चूका होता है और ये उसका भविष्य सुधरने के नाम पर फिर से ठगते है या झूठी तसल्ली देते है की अब सब कुछ सुधर जायेगा जो सुधरना तो होना निशिचित है क्योकि जो बिगड़ा है बो कभी ना कभी तो सुधर ही जायेगा ,और एसा होने पर इनकी चांदी हो जाती है , और फिर ——— ये —— श्री श्री श्री गुरु भगवन की जय इसे नरो से गुरु की महिमा का बरनन जोकि फिजूल है क्योंकि इसमें गुरु जी का तो कोई हाथ ही नहीं था . न समझ अब और क्या कहूँ थक गया हूँ समझाते और समझते.

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    I agreed.

h के द्वारा
April 28, 2011

satya sai ko bhagavan mananevale muje ye bataye ki baba ne jo karodo ruppiye gariboke liye kharch kiye uname se ek rupia bhi usaki mahenat ki kamai ka tha? vo to khud bhakto ke paiso se aiso aram ki zindagi jiye. sai se bada sant to vo he jo mahenat se kamaye ek rupia bhi dan kare. donation me mile rupie to koi bhi dusaro ke liye kharch kar sakata hai.

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    Very good.101 percent true.keep it up.

rajesh gupta के द्वारा
April 28, 2011

हमारे देश में चमत्कार को नमस्कार हैं . कितने saare साधू महात्मा जोगी बाबा लोग लोगो को चमत्कार और सब्ज बाग़ दिखकर मजे कर रहे हैं और कोई इनसे बचता नहीं हैं आज देश में इन्ही लोगो का बोलबाला हैं यह बहुत अच्छा धंधा हैं पढ़ लिख कर भी लोग बेवकूफ बन जाते हैं. दोष हमारी शिक्षा प्रणाली का है .हमारा द्रष्टि कोण scintific नहीं होता हैं हम बचपन से अंध विश्वास के बीच रहकर बड़े हुए hain

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    कुछ दिन पहले मै अयोध्या स्थित भगवान नागेश्वर नाथ मंदिर गई। मन्दिर मे कुछ लोग भगवान शंकर जी के पिन्डी पर जल चढा रहे थे कुछ लोग दूध और दही कुछ लोग मधु और कुछ लोग घी चढा रहे थे; साथ ही फूल और पत्ती के रूप मे कनेर और मदार का फूल बेल पत्री और धतूरे का फल भी चढा रहे थे। मै सोचती रही कि इन चढाये जा रहे सामग्री मे क्या संबन्ध है। वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करने पर आप पायेगे कि इन चढाई जा रही बस्तुओं मे एक निश्चित सम्बन्ध है। भगवान शंकर जी के पिन्डी पर चढाये जा रहे जल दूध दही मधु और घी की ताशीर ठंढी होती है। जबकि कनेर और मदार के फूल बेल पत्री और धतूरे का फल का शरीर पर एन्टीजनिक प्रभाव होता है।विज्ञान कहता है कि जब शरीर मे कोई एन्टीजनिक पदार्थ प्रवेश करता है तो उसके सापेक्ष एन्टीबाडीज बनती है जिसके कारण शरीर का तापमान बढ जाता है। शरीर के तापमान बढने पर उसे कम करने के लिये ठण्ढे पदार्थ शरीर पर लगाये या पानी से नहलाएं इस तथ्य का ज्ञान हमारे आयुर्वेदाचार्यों को बहुत पहले था। एक किवदन्ती के अनुसार एक समय भगवान शिव ने अपने पुत्र भगवान गणेश का सिर काट दिया था। बाद मे माता पार्वती के जिद करने पर उन्होने हाथी के बच्चेह के सिर को प्रत्याारोपित कर भगवान गणेश को जीवित किया था। इसे आप क्या कहेगें। वास्तव मे एक प्रकार की न्यू रो सर्जरी थी जिसे भगवान शिव ने किया और गणेश जी को जीवित किया। वास्तव मे आदि काल मे भारतीय विज्ञान बहुत विकसित था। एक आदमी के धड पर हाथी का सिर लगाकर मरे व्यणक्ति को जिवित कर देना एक असम्भव कार्य है।एक व्याक्ति जो इस प्रकार का कार्य करेगा उसे भगवान नही कहेगें तो क्याथ कहेगे। जब समुद्र मंथन हुआ था उस समय निकले विष को भगवान शंकर ने पी लिया था। कहा जाता है कि भगवान शंकर ने उस विष को गले के नीचे नही जाने दिया। गले के नीचे विष न जाने देने का कारण था कि विष का शोषण आतो द्वारा किया जाता है जब विष पेट मे प्रवेश नही करेगा तो उसका प्रभाव भी शरीर पर नही होगा। लेकिन विष के प्रभाव के कारण शंकर जी का गला नीला पड गया इसलिये भगवान शंकर को नीलकंठ भी कहते हैं। भगवान शिव प्राय: अपनी साधना के लिये कैलास पर्वत पर जाया करते थे। कैलास पर्वत एक ऐसी उची चोटी है जहां गर्मी के दिनो मे भी तापमान काफी नीचा रहता है। जैसा कि हम अवगत है कि जैव प्रयोगशालाओं के लिये कम तापमान तथा कम सूक्ष्म कीटाणुओं की सक्रियता आवश्यक है। मेरा मानना है कि भगवान शंकर ने उचे पर्वत पर अपनी प्रयोगशालाएं स्था पित कर रखी थी जिसमे निभिन्न प्रकार के शोध करते थे शोध के बाद जब भगवान शिव कोई नयी तकनीकी या अस्त्रक खोज निकालते थे तब वे कैलास पर्वत से नीचे आते थे उस समय राक्षस और देवताओं को मालूम हो जाता था कि भगवान शंकर कोई न कोई नया अस्त्रत या शस्त्रई की खोज कर ली है इसलिये राक्षस और देवताओं दोनों भगवान शंकर को खुश करने का प्रयास करते थे। भगवान शंकर की यह विशेषता देखने को मिली कि भगवान शंकर किसी को भी वरदान दे देते थे। उनके लिये न देवता अप्रिय थे और न ही राक्षस। उन्होोने देवताओं और दैत्योंण को अस्त्रव और शस्त्रव दिये थे। किसी के प्रति भगवान शंकर का कोई दुराव नही था। भगवान शंकर के त्रिनेत्र का वर्णन मिलता है। भगवान शंकर के माथे पर तीसरा नेत्र दिखाया जाता है। वास्तव मे यह भगवान शंकर का तीसरा नेत्र और कुछ नही था बल्कि भगवान शंकर की बुद्धि और विवेक का परिचायक था। भगवान शंकर द्वारा अपने शरीर मे भभूत लगाई जाती थी। भभूत कार्वनिक पदार्थो को जलाकर बनाया जाता है। कार्वनिक पदार्थो को जलाने के बाद मिनरल पदार्थ ही अवशेष रहते है। इनका शरीर पर प्रयोग कई प्रकार की वीमारियों से निजात दिलाता है। वास्तव भगवान शंकर एक महान वैज्ञानिक थे; उन्होरने अपने समय अनेक वैज्ञानिक आविष्काकर किया। उनके द्वारा किये गये शोध ऐसे थे जो सामान्य व्ययक्ति के समझ के परे था। लोगो ने इसे चमत्काकर माना और कहने लगे कि यह कार्य केवल भगवान ही कर सकता है; इसलिये शंकर जी को भगवान मानने लगे।

Saleem Khan के द्वारा
April 28, 2011

JJ मुझे बैन क्यूँ कर दिया गया?

    sahil के द्वारा
    April 29, 2011

    तुम्हारे जैसे लोग ऊँगली करने से बाज़ नहीं आते हो मुझे मालुम है इसलिए अब दुसरे नाम से यहाँ आ जाओ तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ|

Shwet Brata Jha के द्वारा
April 28, 2011

परम गुरु राम कृष्ण परमहंस जब असाध्य बीमारी से तड़प रहे थे तो कोल्कता के दक्शिनेश्वेर काली माता, जिनकी कृपा उनपर सदा रही थी ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया और कहा कि “पुत्र क्या मैं तुमसे वो सब (कष्ट) हर लूं “| भगवन राम कृष्ण परमहंस ने उन्हें ऐसा करने से साफ मना कर दिया था | भारतीय गीता – दर्शन यह है कि “अगर इश्वर चमत्कार कर दुःख को हर ले तो हो सकता है कि प्राणी को इस धरा पर दुःख वरन करने के लिए दुबारा जन्म लेना पड़े | अतः मानव को सुख व् दुःख इसी जनम में भोग लेना ही श्रेयस्कर है | भगवन सत्य साईं बाबा भी इसे अछि तरह समझते होंगे, अतः उन्होंने विदीर्ण कष्ट का वरन करते हुए अगर मोक्ष कि प्राप्ति कर ली है तो इसमें क्या आपति ?

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    But 10 year before,why. He was self proclaimed Bagwan. He had announced that he will die in 2022 but he died in 2011. If he was so keen to bear the suffering then why he died in 2011. He should live till 2022, so will get rid off from awagaman.

Ramprakash Tripathi के द्वारा
April 28, 2011

भारतीय संत परंपरा में दोनों ही तरह के संत हुए हैं। एक वे जो चमत्कार दिखाते हैं, और दूसरे वे जो अध्यात्म के कठिन मार्ग को सरलतम तरीके से प्रशस्त करते हैं। एक महत्वपूर्ण पुस्तक है जो सालों-साल से चर्चित रही है योगी कथामृत। यानी योगी योगानंद की आत्मकथा, जिसमें चमत्कार के सिद्धांत पर विशद जानकारी दी गई है। दरअसल एक आध्यात्मिक व्यक्ति की तपस्या जब सिद्धि को उपलब्ध होती है, तो उसे ईश्वरीय दिव्य प्रेरणा होती है। आध्यात्मिक सत्ता भी है। वह सत्ता तय करती है कि किस आध्यात्मिक व्यक्ति की साधारण स्थूल जगत में क्या भूमिका होगी। इस पर काशी के दार्शनिक व तंत्र के अध्येता मां आनंदमयी और स्वामी विशुद्धानंद दोनों के कृपा पात्र डा. गोपीनाथ कविराज ने विस्तार से लिखा है। स्वयं मां पीतांबरा पीठ के संस्थापक राष्ट्रगुरु स्वामी जी महाराज अपने संन्यासी जीवन के दौरान एक अमृतसर के पट्टी तहसील में एक संतके अस्वस्थ होने के दौरान हुए एक चमत्कार से प्रेरित हो कर तंत्र विद्या की साधना में जुटे। 1962 के चीन युद्ध के समय उन्होंने राष्ट्र रक्षा अनुष्ठान किया। इस अनुष्ठान के बारे में प्रतीश नंदी के संपादन में प्रकाशित हो रही पत्रिका इलेस्ट्रेड वीकली ने विस्तार से लेख प्रकाशित किया, जिसमें यह बताया गया कि चीन के पीछे हटने का रहस्यइसी अनुष्ठान में छिपा है।  आध्यात्मिक सत्ता में विश्वास पैदा कर लोगों को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित के लिए चाहे चमत्कार का सहारा लिया जाये या फिर सीधे व्यवहार परिवर्तन की प्रक्रिया का, दोनों का उद्देश्य एक ही है। स्वयं स्वामी जी महाराज के शिष्य़ मेरे गुरु अध्यात्म शक्तिपीठ व श्री शक्तिपीठ मुबारक गंज फैजाबाद के संस्थापक पं. रामकृष्ण पांडेय आमिल ने अपने जीवनकाल में किसी से स्वयं यह नहीं कहा कि तांत्रिक अनुष्ठान करो। सच यह है कि उन्होंने बिना कहे सैकड़ों लोगों से ऐसे कठिन अनुष्ठान कराये, जिन्हें बड़े-बड़े तंत्राचार्य नहीं करा सकते। कहने का मतबल यह है कि तरीका अलग होने से यह संभव हुआ। स्वयं ईसा ने चमत्कार ही तो किया था। उस पर सवाल क्यों नहीं। जब पैगंबर और ईशा पर सवाल नहीं तो सत्य साईं पर सवाल क्यों। सत्य साईं ने करोडों लोगों की आध्यात्मिक उन्नति की। जो धन लोग मांगने पर गरीबों के लिए न देते, उनके चमत्कार के प्रतिफल से वह धन गरीबोत्थान,  शिक्षा के उन्नयन और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के उपलब्ध हुआ। तस्लीमा नसरीन की क्या उपलब्धि है। या वह पीसी सरकार जो उन्हें जादूगर कहते रहे उनकी क्या सामाजिक उपलब्धि है, लेकिन सत्य साईं ने लाखों को बारोजगार किया।  जीवन बदला और उनके द्वारा संचालिलत चिकित्सालयों ने लाखों लोगों को जीवन दिया। यही सत्य है। बाकी सब प्रलाप। संत का जीवन समाज के लिए होता है। यह भारतीय परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे जाने बगैर, समझे बगैर जो बात करेगा, मूर्खतापूर्ण सवाल ही उठायेगा।  बोलो सब संतन की जय। 

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 28, 2011

    no one is denying for his good deeds , question is this wheather he was God or not. so plzz dont deviate the issue

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    He would work for well being of humanity,not for propagation of andhvishawas in the society. his deed had propagated andhvishwas.

Jagran Junction Forum के द्वारा
April 28, 2011

आदरणीय पाठकों, जागरण जंक्शन फोरम में आपकी उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए बहुत-बहुत आभार. मंच आप सभी पाठकों से विनम्र अनुरोध करता है कि यदि आप बड़ी प्रतिक्रिया लिखें तो कोशिश हो कि उसे एक स्वतंत्र ब्लॉग के रूप में जारी करें और इस स्थान का प्रयोग संक्षिप्त टिप्पणियों के लिए करें. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “श्री सत्य साईं पर आरोप- मिथ्या या हकीकत” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व श्री सत्य साईं पर आरोप- मिथ्या या हकीकत – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें. 2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं. धन्यवाद जागरण जंक्शन टीम

    subodh kant misra के द्वारा
    May 6, 2011

    जागरण जंक्शन टीम अब लादेन के सन्दर्भ में भी एक लेख प्रकाशित करने का साहस दिखाए |

    bipin kumar के द्वारा
    July 2, 2012

    इन्सान को अपना कर्म करते जाना चाहिए एक न एक दिन भगवन जरुर ध्यान देंगे . खुद का कर्म से बढ़ कर कुछ भी नहीं है.

Bajrang Lal Choudhary के द्वारा
April 28, 2011

1. If he was God, why he died because God Never dies. 2. Why he suffered the agony of pain. God do not need medication. Why didnot he leave the body like God and died like a normal human? 3. Why he died before declared date ? 4. Followers of hinduism must read the holi “Geeta” carefully. 5. Why he collected a huge fund of forty thousand Carore Rupees and why people are quarrling in this matter after his death ? 6. Why he was blamed for illicit actions many times ? 7. celebrities and VIPs are showing their interest for their vested benefits and not for devotions.

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    101 percent true

    sahil के द्वारा
    April 29, 2011

    अरे जब इस देश में सचिन तेंदुलकर भगवान हो सकता है तो साईं क्यों नहीं

subodh kant misra के द्वारा
April 28, 2011

यहाँ बड़ी बड़ी बाते हो रही है कोई हिन्दू धर्म की व्याख्या कर रहा है और कोई अपनी योग्यता दिखाने पर तुला है की वो कितने बड़े फ्रोड थे, आज क्या हम इतने निम्न स्तरीय हो गए है की किसी के मरने के बाद उसको अगर सम्मान नहीं दे सकते तो कम से कम असम्मान तो न करे, न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चैनेल से मिली जानकारी को अपनी जानकारी का आधार बना कर यहाँ टिप्पड़ी न करे व्यक्तिगत रूप से जिसे नुक्सान या फायदा हुआ कृपया सिर्फ वही लोग लिखे, ये बहस एकदम बेहूदा है जागरण जंक्सन अपनी गलती तुरंत सुधारे |

    jayant shrivastava के द्वारा
    April 28, 2011

    मरने के बाद ही व्यक्ति का (राजनैतिक ,धार्मिक .आध्यात्मिक ,साहित्यिक ) मूल्यांकन होता है ..इसमें गलत या अनैतिक कुछ भी नहीं है ..न ही यह किसी का अपमान अथवा कीचड उछालना है …….जहाँ तक यह कहना की पढ़ सुनकर टिपण्णी न करें यह भी ठीक नहीं है …और न ही यह संभव है कि साईं अथवा किसी भी व्यक्ति से बिना मिले विचार व्यक्त नहीं कर सकता …आखिर जब हम सदियों बाद भी सिर्फ पढ़कर सुनकर या ग्रन्थ के माध्यम से ही इतिहास का मूल्यांकन करते है …….और सबसे बड़ा सवाल ..क्या आपका इश्वर से व्यक्तिगत लाभ या नुक्सान हुआ है …या कभी उससे मिले है ….नहीं तो फिर इश्वर के बारे में कैसे कुछ कह सकते है …….?

    subodh kant misra के द्वारा
    April 28, 2011

    apne kisi aadarsh ka naam likh de jo is duniya me na ho

    subodh kant misra के द्वारा
    April 28, 2011

    अपने किसी भी आदर्श महापुरुष का नाम लिख दे जो इस दुनिया में न हो |

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 28, 2011

    no one is having disrespect for him as a very good human being , he devoted his whole life in service of humanity. you may call him sant , there is no objection , which he really was regards. and i dont have objection if you feel happy calling him God. but dont try to superimposeyour personal feeling on others thanx

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    Dear Subodh ji there are so many issues like population,sanitation,litigation,education, but i have failed to under satand why J J has not raised debate on these issues. But if a matter is before us we should analyse the issues radically without any prejudice. Mr bajrang Lal Chaudhary has raised certain issues. Those issues needs answar.

Arvind Sharma के द्वारा
April 28, 2011

कृपया मेरे ब्लॉग को पड़कर अपने विचार व्यक्त करें http://put2life.jagranjunction.com/2011/04/27सत्य-साईं-बाबाजी-को-श्रद्/

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 28, 2011

    saleem saheb we dont agree on islamic thought of religion , ours are civilised society , can discuss openly on religion and all , becz we know the reality of eligion , which is quite strong , not in danger always likes yours . you live in a close compartment thanx thanx

Saleem Khan के द्वारा
April 28, 2011

ये बेहतर आह्वाहन है

mukesh pandey के द्वारा
April 27, 2011

सत्यसाई बाबा महान संत थे इससे इंकार नही किया जा सकता / इससे उनके भक्त जरूर लाभावनिवत हूऐ/ भक्तो ने भगवान माना/ सवाल उनके भगवान होने का नही बलिक देश के लिऐ अवदान का होना चाहीए/

    abhay के द्वारा
    April 29, 2011

    किसी नयी वस्तु  का दाम जानने के लिए हमारी नीचे लिखी वेबसाइट पर जाये http://www.retailpriceindia.com

gopalji54 के द्वारा
April 27, 2011

जो अनंत सौर्य मंडलों का नियंत्रण करता है, जो इस सम्पूर्ण कायनात के एक-एक जीव, वनस्पति, द्रश्य-अद्रश्य का पेट भरता है, जिसके इशारे पर इस जगत का प्राणी जीता और मरता है, जो सबसे पहले था सबसे बाद तक रहेगा, अर्थात हमारी द्रष्टि में कभी नहीं मरता है, इतना क्षुद्र, इतना सीमित कैसे हो सकता है ? परमात्वतत्व आस्था है ह्रदयों की, विशवास है मन का, संबल है आशाओं का, भौतिक द्रष्टि से उसका स्वरुप व्यक्ति से व्यक्ति, मज़हब से मज़हब भिन्न हो सकता है पर भावनात्मक द्रष्टि से उसका आवेग एक ही होता है . और इसीलिए उसका कोई स्वरुप नहीं, काया नहीं . जैसा की गीता में लिखा है ” न मैं मरता हूँ, न पैदा होता हूँ, न मेरी उत्पत्ति होती है न मेरा अंत होता है, … जहाँ देखो मैं ही मैं हूँ, आदि, मध्य और अनंत ” अर्थात उस अनश्वर की म्रत्यु संभव नहीं, यदि हम सत्य साईं को परमात्मा मानें तो श्री कृष्ण द्वारा उदबोधित गीता की सत्यता पर प्रश्नचिन्ह होगा …पर हाँ पैगम्बर सदैव आये है धरती पर. जन मानस के, प्राणियों के कल्याण के लिए, और आते रहेंगे. …. मानवता के लिए समर्पित इंसानों की कमी नहीं है संसार में, . फर्क इतना है कि किसी की संवेदनशीलता हवा में विलीन हो जाती है और किसी की चमकती है शोहरत की बुलंदियों पर, परमात्मतत्त्व एक आवेग है जो पलता है ह्रदयों में, पनपता है भावनाओं में, और प्रभावित करता है संपर्क में आने वाले ह्रदयों को, अंतरात्मा और वाह्य शक्तियों के अनुसार और भ्रम पैदा करता है व्यक्ति विशेष के परमात्मा होने का…… और इस तरह मानवता के प्रति समर्पित व्यक्ति परमात्मा तुल्य हो जाता है, परमात्मा नहीं. गोपालजी

    h के द्वारा
    April 27, 2011

    aap ke vichar se me bilkul sahemat hu. parmatma ko apne app ko sabit karne ke liye kisi chamatkar dikhane ki jarurat nahi hoti.

    dharmanand sharma के द्वारा
    June 27, 2011

    namskar ji me aapki batno se shmat hnu aapne sahi likha insan insan he usko bhgwan banana insan ka swarth he jisne kisi ki thoda madad kar li uska o bhgwan ho gaya or jisne madad nahi ki o hewan ho gaya swarthi insan kuch bhi kah leta he or kar leta he baba mar gaye unone jo karm kiya apna kiya jese duniya chati thi unone kiya budimaan insan tha ab rahi baat sachin ki o acha crcat khiladi he to kuch n samj logo ne use bhi bhgwan bana liya to isme insano ki apni apni soch he is ko n koi badal sakta he n band kar sakta he baba ramdev or anna hajare jo aaj des ki bhlaai ki soch rahe he unko log chr dhogi or draiwa bolte he ye hamara hindustani samaj iske log bahut bedhangi he in ko aaj tak koi nahi samjha or na samjhega aaj des me sawaal he bhirsta char ka to kiya howa jinke paas pesa he pawar he unki chal rahi he garib janta ki kaoi nahi sunta ye hindustan he mere bhainu iski rajniti koi nahi samjha lekin aaj bhi samaj me imandar log he jo des me bhrst logo ke lhie awwaj utha rahe he meri binti he un logo ka sath do jis se hindusta saf or suthra ho jayega dhanywad D.N.sharma siem reap

Trilochan Bhatt के द्वारा
April 27, 2011

सचिन, सांई और तसलीमा मरना तो नहीं चाहिए था, पर सत्य सांई मर गए। होना तो बहुत कुछ नहीं होना चाहिए, पर हो जाता है। किसी भी व्यक्ति को खुद को भगवान के रूप में प्रतिष्ठित तो नहीं करना चाहिए, पर लोग करते हैं। लोगों को ऐसे तथाकथित भगवानों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, पर लोग करते हैं। भगवानों को बूढ़ा नहीं होना चाहिए, पर वे हो जाते हैं और एक दिन मर भी जाते हैं। अब क्या किया जाए। बेचारे सांई भगवान होने के बावजूद बूढ़े भी हो गए और जब आदमी बूढ़ा हो जाता है तो वह मर जाता है, लिहाजा वे भी मर गए। यूं भारतीय परंपरा के अनुसार जब कोई व्यक्ति अपनी उम्र पूरी करके मरता है तो उसकी मौत पर बहुत दुख नहीं मनाया जाता, बल्कि ऐसे लोगों की अर्थी के साथ गाजे-बाजे बजाने का भी चलन था। पर सांई ठहरे भगवान उनकी मौत पर रोना हमारा कर्तव्य था, लिहाजा हम रोए। अभी भी रो रहे हैं। 86 साल के सत्य साईं के मरने पर (माफ कीजिए, महानिर्वाण पर) लोग ढाहें मार-मारकर रोए। अपने सचिन भी रोए, अकेले नहीं पत्नी के साथ रोए। उन्होंने ठीक किया। भारतीय परंपरा के अनुसार किसी भी शादीशुदा व्यक्ति को कोई भी काम अकेले नहीं करना चाहिए, पत्नी के साथ करना चाहिए। इसलिए मुझे बहुत अच्छा लगा कि सचिन अपनी पत्नी के साथ रोए। पता नहीं इससे पहले अपने पिता की मौत पर भी सचिन ऐसे ही रोए था या नहीं और रोए थे तो पत्नी के साथ रोए थे या अकेले। दरअसल, मीडिया ने इस तरह की कोई रिपोर्ट उस समय नहीं दी। बहरहाल। यह सचिन का जाती मामला है, वे किसी की मौत पर रोएं या हंसे। अपना जन्मदिन ही न मनाएं या फिर उपवास रखें। बात आती है तसलीमा की। अपने ट्विटर पर तसलीमा ने सचिन को नसीहत दी कि उन्हें सांई की मौत पर नहीं रोना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी 86 साल के व्यक्ति की मौत पर क्यों रोना चाहिए और खासकर सचिन को। मैं तसलीमा जी को क्या बताऊं, कि सचिन का रोना जायज था और बिल्कुल जायज था। दरअसल तसलीमा इस बात को समझ ही नहीं पाएंगी, वे ठहरीं भगवान की सत्ता को बकवास बताने वाली, उन्हें भगवानों की दुनिया की कोई जानकारी नहीं है। मैं यहां तसलीमा जी को बताना चाहता हूं कि एक इंसान की मौत पर बेशक दूसरा इंसान न रोए, और ज्यादातर मामलों में नहीं रोते। रोज कितने लोग मरते हैं। कुछ खा-पीकर, अघाकर मरते हैं, कुछ भूख से बिलखते हुए मर जाते हैं। खा-पीकर मरने वालों की मौत पर रोने के लिए फिर ही कुछ जोड़ी आंखें मिल जाती हैं, क्योंकि उनकी छोड़ी गई संपत्ति पर कब्जा करने के लिए ऐसा करना जरूरी होता है, लेकिन भूख से बिलखकर मरने वाले इंसानों की मौत पर कोई नहीं रोता। लेकिन, तसलीमा जी ध्यान दें। भगवानों की दुनिया, इंसानों की दुनिया से अलग होती है। आप बेशक न माने, लेकिन सत्य साईं जरूर भगवान थे, आप उनके भक्तों से इस जानकारी को कंफर्म कर सकती हैं और अपने सचिन तो भगवान हैं ही, क्रिकेट के भगवान। ऐसे में जबकि एक भगवान की मौत हो गई हो तो भला दूसरे भगवान का इतना भी फर्ज नहीं बनता कि अपने बिरादर के लिए दो आंसू बहा दे। मेरी समझ में नहीं आता कि आप क्यों भगवानों को इंसानों की दुनिया में घसीटना चाहती हैं। भगवानों को भगवान रहने दें। आप अनीश्वरवादी हैं तो इसका यह अर्थ कतई नहीं कि आप ईश्वरवादियों के ईश्वरों का मजाक उड़ाएं। तसलीमा जी, आपने अपने ट्विटर पर यह लिखकर सत्य सांई का मजाक उड़ाने का प्रयास किया है कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि 2012 में मरेंगे, फिर वे पहले क्यों मर गए। आप यहां भी समझने में धोखा खा गई हैं या फिर आपका इरादा हर हालत में भगवानों की सत्ता को नकारना है। मैं आपको बता देना चाहता हूं कि सत्य सांई मरे नहीं हैं, वे मर नहीं सकते। यह लोगों का भ्रम है कि वे मर गए हैं। वे दरअसल मरे नहीं हैं, उन्होंने तो महानिर्वाण किया है। आपको विश्वास न हो तो कम से कम एक नजर मेरे शहर से छपने वाले हिन्दी के अखबारों पर डाल दें। किसी भी अखबार में उनकी मौत हो जाने की खबर नहीं है, हर जगह उनके महानिर्वाण की बात है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि तथ्यों को समझने का प्रयास करें। उम्मीद करूंगा कि आप आइंदा भगवानों पर इस तरह के आक्षेप करने और उन्हें नसीहत देने की कोशिश नहीं करेंगी। चाहे वे सत्य के सांई भगवान हों या क्रिकेट के सचिन भगवान। भगवान, भगवान होते हैं और भगवान ही रहेंगे।

    VinayBhatt के द्वारा
    April 27, 2011

     भट्ट जी.. जगजाहिर है की उन्होंने खुद को साईं अवतार घोषित किया था…उनको मात्र एक अध्यात्मिक गुरु माना जाना चाहिए.. न की भगवान..भगवान का महाप्रयाण होता संसार से..न की वे अस्पताल में भर्ती होके मृत्यु प्राप्त करते हैं…एक अध्यात्मिक गुरु के नाते उनको सम्मान मिलना ही चाहिए.. लेकिन भगवान् न माना जाये…उदाहरन के लिए लोग आशा राम बापू को भी मानते हैं ..और उनके स्कैंडल टीवी पर भी प्रचारित हो चुके हैं ..फिर क्या माना जाये ये लोगों की अंधभक्ति नहीं तो क्या है ..सत्य साईं ने अच्छे काम किये हों..लेकिन वे महलों में रहे..शिर्डी के साईं की तरह उन्होंने जीवन नहीं जिया ..जो वास्तविक साईं थे उन्होंने स्वयम को घोषित नहीं किया ..जन सेवा और उनके कर्मों ने स्वत: लोगों की नज़र में दिल में उनका क्या स्थान बना दिया ये सारा विश्व जानता है ..उनकी अरबों की प्रोपर्टी जमा कर के भी इस देश में लोग गरीब हैं तो क्यों..क्यों उन्होंने सिर्फ एक क्षेत्र विशेष पर ही ध्यान दिया…अस्पताल और शिक्षा तो सरकार भी देती है… अगर उनकी कृपा से देश में कोई गरीब न होता ..उनके चमत्कारों से इस देश में आतंकी हमलों को रोका जाता तो तब वे भगवान कहलाते ..लेकिन ऐंसा नहीं है… अरबों रूपए का ट्रस्ट अगर इस देश के गरीबों को समर्पित किया जाता तो बात थी .. इस देश में इतनी गरीबी होते हुए अगर कोई राजसी जीवन जीता है तो उसे क्या कहा जाये ..चाहे वो सत्य साईं हो या मुकेश अम्बानी… वास्तविकता तब होती जब वे शिर्डी के साईं की तरह मंदिरों में झोपडी में जीवन गुज़ार कर अरबों रूपये गरीबों की भलाई में लगाते…

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    Bhatt ji you both have told what i want to say.

Ek Ajnabi के द्वारा
April 27, 2011

Pata nahi, mai kya bolun…. Koi kuch kahata hai to koi kuch aur… Lekin mai to bas itana hi kahunga……… Dosto dusare ki burai mat dekho .. usaki achai ko dekho aur us raste pe chalo … bhagwan tumhari aatma ko shanti denge…..

chaatak के द्वारा
April 27, 2011

ईश्वर कभी भी इस दुनिया में स्वयं नहीं आता वह सिर्फ किसी काल-खंड विशेष में अपनी कुछ शक्तियां कतिपय विशिष्ट प्रयोजन से भेजता है जिन्हें हम ईश्वर मान लेते हैं और ये मान लेना गलत भी नहीं यदि आपकी ये मान्यता किसी को हानि नहीं पहुंचाती, इस फोरम के शुरू होते ही जिस प्रकार की बहस का आयोजन अपने आप हो गया है उससे यही लगता है जैसे चर्चा दिशाहीन हुई है लेकिन जागरण जंक्शन की टी.आर.पी. बढाने वाली मंशा जरूर पूरी हो रही है जो शायद सर्वोपरि है. सत्य सांई को छोडिये एक बार यदि आप राम, कृष्ण को भी यहाँ रखें तो विद्वानजन उनका भी बेहतरीन चरित्र चित्रण कर देंगे. इस तरह की चर्चा को कहते हैं ‘मरने के बाद मट्टी पलीद करवाना’ जागरण को इसमें अब महारत हासिल है. एक बार मोहम्मद साहब पर भी ऐसी चर्चा करवाने की कृपा करें बाबा से ज्यादा उनकी मट्टी पलीद न हो जाये तो कहियेगा. तो फिर यदि हम मोहम्मद साहब के बारे में ये कह सकते हैं की जिनकी श्रद्दा उनमे है और वे बिना किसी को हानि पहुंचाए उनके अनुयायी बनते है तो क्या हर्ज है, किसी भी (महा)पुरुष को ईश्वरीय शक्ति मान कर यदि सही राह पर चलने की प्रेरणा मिलती है तो वह सही है तो फिर यही बाबा के बारे में भी मान लेने में क्या हर्ज है बाबा हो सकता है स्वयं बुरे रहे हों लेकिन वे यदि अब्दुल कलाम और सचिन के लिए प्रेरणाश्रोत थे तो इसमें कोई बुराई नहीं. जागरण जंक्शन किसी भी ऐसेगैर राजनीतिक व्यक्ति पर (जिससे लोगों की आस्था जुडी हो) अनर्गल बहस करवाने से बचे तो अच्छा होगा. फिर भी यदि जागरण के विद्वानों को ये सही लगता है की बहस होनी चाहिए तो मेरी भी गुजारिश है की एक बहस मुहम्मद साहब के चरित्र पर भी होनी चाहिए.

    Saleem Khan के द्वारा
    April 28, 2011

    जी नहीं, आपके एक एक शब्द ईश्वर की परिभाषा के विपरीत है. अगर आप मानते हैं कि इश्वर है तो उसकी खासियत के बारे में भी जान लें .

    Saleem Khan के द्वारा
    April 28, 2011

    रहा सवाल मुहम्मद सल्ल० के बारे में बहस की तो उसके बारे में JJ सोचे या न सोचे मैंने सोच लिया है और मेरे ब्लॉग पर आईये इस पर आपको एक लेख मिल भी जाएगा….! अगर आप वाकई सच्चे ब्लॉगर हैं तो बहस में हिस्सा ज़रूर लीजियेगा. मैं इधर अकेला ही काफी हूँ.

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    pl don’t fight.

डॉ मनोज दुबलिश के द्वारा
April 27, 2011

जब से श्री सत्य साईं का महाप्रयाण हुआ है कुछ रंगीन खबरिया टीवी वालों को तो जैसे उनकी संपत्ति का हिसाब किताब लगाने ठेका सा मिल गया है/ कोई पूछे इन मीडिया वालों से क्या इनके कार्यालयों के बाहर कोई प्यायु है जहाँ प्यासे लोग पानी पी सकें ,क्या इन मीडिया वालों ने किसी प्यासे को पानी भी पिलाया है,क्या कभी कोई भण्डारा भी किया है कि भूखे लोग एक वक़्त का खाना ही खालें,क्या किसी मीडिया ने कोई निशुल्क शिक्षा का स्कूल भी खोला है जहाँ गरीब बच्चे निशुल्क पढ़ लेवें,क्या कोई अस्तपताल भी खोला है जहाँ गरीबों का मुफ्त इलाज़ हो सके,क्या कोई ऐसा सामाजिक काम भी किया है जिससे इनको समाज सेवी भी कहा जा सके,,क्या ऐसा कोई पशु चिकित्सालय भी खोला है जहाँ बीमार पशुओं का मुफ्त इलाज़ भी हो सके ? हर प्रश्न का उत्तर नकारात्मक ही मिलेगा क्योंकि कभी कोई सकारात्मक काम किया ही नही/ अपने मीडिया चेनल को चलाने के लिए ढ़ोंगी, तांत्रिकों, पाखंडी बाबाओं,रक्त चूसक शिक्षा संस्थाओं , और देश विरोधी तत्वों के संस्थानों के तो विज्ञापन दिखाने में कोई परहेज नही,बल्कि किसी वास्तविक समाज सेवी ट्रस्ट का हिसाब किताब लगाने में लगे हैं/ जो काम सरकारी तंत्र तक ना कर सका वह काम अकेले श्री सत्य साईं ने किया/ उनके पास अगर करोड़ों अरबों की संपत्ति भी है तो वह कोई भ्रष्टाचार या पापाचार या अनाचार से अर्जित की हुई नही है,उन्होंने अन्य बाबाओं की तरह अपने आश्रमों में पत्थर ईंट गारा से निर्मित कोई मंदिर आश्रम नही बनवाया जहाँ बाबा लोग स्त्रियों के साथ रास परिहास करते दिखते हैं,जहाँ केवल धन कुबेरों की पूजा होती है जहाँ भगवत भजन में एक व्यक्ति विशेष की पूजा होती है /श्री सत्य साईं की व्यक्तिगत सेवा तक में पुरुष थे जबकि आज के स्वयंभू भगवान घोषित कई बाबा अपने इर्द गिर्द स्त्रियों को ही रखते हैं जैसा कि अभी हाल में एक बाबा को अमरीका की अदालत ने चौदह वर्ष की जेल की सजा सुनाई है/ इसलिए इतने महान समाज सेवी महापुरुष श्री सत्य साईं के देहावसान को सप्ताह भर भी नही हुआ और बजाय उनसे प्रेरणा लेने के उनके ट्रस्ट के बारे में अनाधिकारिक टिप्पणी करना मीडिया को शोभा नही देता,जबकि खुद इसका लवलेश भी समाज सेवा में ना लगाया हो/

Dr.satyendra के द्वारा
April 27, 2011

junction forum:बंधुओ , आप सबके सारगर्भित विचार पढने के बाद , एक विचार दिमाग में आया, बाबाओं को भगवान् का दर्जा देने का सिलसिला कबसे शुरू हुआ? ज़रा दिमाग पर जोर डालिए और सोचिये की अगर आज तुलसीदास जी होते तो वो क्या कहलाते? संत ? कवी ? समाजसुधारक ? या भगवान्? ऐसे कई नाम गुरु नानक जी , संत कवी रैद्सास जी , कबीर सूर तुलसी , रामकृष्ण परम हंस , विवेकानंद जी , एवं सरस्वती दयानंद जोई इतियादी अगर ये आज होते तो ये भी भगवान् ही कहलाते:० बड़े आश्चर्य का विषय है की जैसे जैसे व्यक्ति का भोतिक ज्ञान बाधा , वैसे वैसे उसका अध्यात्मिक ज्ञान कम होता गया , शाश्त्र पढने की लोगों को फुर्सत नहीं , सत्संग में गए जो तथाकथित स्वम्भू भगवान् ने भागवत या पुराण या गीता पढ़ कर अपने स्वार्थ के हिसाब से बता दिया वो ही अंतिम सत्य , सनातन समाज में बहुत से लोग शुक सुधासागर को तोते द्वारा बोली हुयी मानते , उन्हें ये ही नहीं मालुम की ये प्रकांड पंडित सूतजी और रजा परीक्षित का संवाद का संकलन है , सूतजी महाराज जन्म से शुद्र किन्तु कर्म से प्रकांड पंडित या ब्रह्मिन हुए. तात्पर्य ये है की उस समय जाती व्यवस्था इतनी संकुचित नहीं थी जैसी की आज . अध्यात्मिक अज्ञानता का लाभ उठाया बहुत से चतुर लोगों ने , भगवत रटते रटते , और सुनाते सुनाते कितने ही स्वम्भू नाग नागिन बाबा रोज टी वि पर दिखाई देते, इनके अध्यात्म के नाम पर खड़े किये गए ट्रस्ट में अरबों रुपये का कला धन आता , और धर्म के नाम पर दिनप्रतिदिन फलती फूलती दूकान दरी , अज्ञान , आभाव और भय से भरे मनुष्यों की भीड़ को चमत्कार की आशा में इनकी और लिए जाती है. मैं येहाँ श्री सत्य साइन बाबा की बात नहीं कर रहा , चर्चा को एक व्यापक आयाम देते हुए , सभी बंधुओं से आग्रह करना चाहता हूँ की हमारे शाश्त्र में लिखा है की सबसे बड़ा गुरु कौन? शाश्त्र तो शाश्त्रों का स्वाम अध्ययन कीजिए , और उनका सार निकालिए , जब इश्वर हर जगह है तो आप स्वाम भी तो इश्वर मय हैं अहम् ब्रह्माष्मी –मैं ही इश्वर हूँ , अर्थात इश्वर की ज्योति मेरे अन्दर भी उतनी ही है जितनी आपके या किसी और के ! मैं एक बाबाजी का व्यक्तिगत अनुभव बताना चाहता हूँ , एव्क किराये के मकान में हम लोग रहते थे, मकान मालिक के एहन एक बाबाजी आया करते थे , उन पर बाबाजी की असीम कृपा थी बड़ी भीड़ लगती थी लंगर होता था , मकान मालिक बड़ा आग्रह करते थे की डॉ. साहेब आप भी कभी आइये न , बाबाजी का आशीर्वाद लेने, मैं आते जाते देखता रहता था की , बाबाजी बिस्तर पर लेते हैं , और जाड़े के दिनों में बहुत सी महिलायें उनके हाथ पैर दबा रहीं हैं लिहाफ के अन्दर हाथ दाल कर मुझे बहुत विचित्र सा लगता था एक दिन मकान मालिकिन ने बहुत आग्रह किया तो मैं सपत्नीक उनका आशीर्वाद लेने गया मैंने श्रधा से प्रणाम किया तो बाबाजी ने एक मोर पंखी झाड़ू मेरे सर पर मारी , प्रसन्न रहो का आशीर्वाद दिया फिर मेरी पत्नी आशीर्वाद लेने आगे बढ़ी तो बाबाजी ने झाड़ू का नहीं हाथ का प्रयोग किया और मेरी पत्बी का हाथ पकड़ लिया , आप बहुत भाग्यशालिनी हो , सदा सुखी रहो आती रहा करो अब मेरी पत्नी की प्रतिक्रिया देखिये वो अपना हाथ उनके हाथ से छुडाने का शाल्लेंता से प्रयास करने लगी :प बड़ा विचित्र विहंगम द्रश्य था आज भी सोच कर हंसी आ जाती है पत्नी हाथ पीछे खींचे और बाबाजी हाथ छोड़ने को तैयार नहीं :प हहाहाहा वो दिन आज का दिन बिचारी ने बड़े संकोच से अपना हाथ छुड़ाया और धीरे से बोलीं अब चलें फिर कभी किसी बाबा से आशीर्वाद लेने की उनकी हिम्मत नहीं पड़ी. मेरा ये मतलब नहीं की सारे बाबा एक से होते , लेकिन ज्यादातर ऐसे ही हैं आप ख़बरें देखते रहते होंगे मैं सध्री सत्य साइन जी के बारे में अधिक नहीं जानता , हाँ इतना पता है की उन्होंने मानव हित केबहुत सारे कार्य किये हैं , इसलिए वो निश्चित ही एक महापुरुष हैं , अगर महापुरुष और भगवान् का आशय एक ही है तो निश्चित वे भगवान् हैं आयर यदि इसका आशय इश्वर से है! तो ये मैं मानने को तैयार नहीं . दो टीवी चैनल येही काम करते आप समय खरीद लो, गेरुए वस्त्र पहिन लो , भगवत की किताब सामने रखलो , थोडा वाक् चातुर्य होना चाहिए बस , आपको भी अवतारी पुरुष बन्ने में अधिक समय नहीं लगेगा. समय की बलिहारी है प्रथम शकाराचार्य भगवान् नहीं बहुत से ऐसे शोर्यवान नाम जिन्होंने संस्कृति को विदेशी आक्रान्ताओं से आजाद करने में अपने परिवोरों तक की बलि देदी उनके नाम हमें याद नहीं पेनिसिल्लिन जैसा अन्तिबिओतिक किसने बनाया , पहिला हवाई जहाज , मोबाइल , टीवी कुष्ठ रोग , तपेदिक की दावा किसने बनायी प्लेग का टीका किसने बनाया, चेचक हैजा से मानव जाती को कैसे relief मिला , पहिली मोटर किसने बनायी , तेलेफोने से लेकर बिजली तक ये ऐश्वर्या चमत्कार किसने किये हमें किसी का नाम याद नहीं संसार अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय पर टिका हुआ है धर्म भी एक विज्ञान है , परा विज्ञान , कल्पना पर्काल्पना और पुरुशाष्ठ्रा का समन्वय, वैज्ञानिक रूप से आश्था का सत्यापन , ये ही परमपिता परमात्मा का आदेश भी है उपदेश भी . जो मानव ये कहते की धर्म एक आश्था है इसका विज्ञान से कोई लेना देना नहीं , उनको मेरा ये सुझाव है की धर्म आस्था भी है और विज्ञान भी , कोई भी विज्ञान आज तक धर्म , और इश्वर की मान्यता को झुठला नहीं पाया हमारे शाश्त्रों में धर्म भी है विज्ञान भी, दोनों को ही सीख कर समन्वय बनाने की आवश्यकता है , धर्म कोई कोरी परिकल्पना नहीं सत्य है और जो सत्य है वो झुठलाया नहीं जा सकता , कभी कभी नारा सुनने को मिलता है की इस्लाम खतरे में .हिंदुत्व पर संकट बगैरह बगैरह मुझे हंसी आती है , धर्म कभी खात्य्रे में हो ही नहीं सकता क्युन्कियो धर्म तो सत्य दान अहिंसा तपस्या और क्षमा के साथ साथ इल्म पर भी टिका है हर शाश्त्र में लिखा है की ज्ञान प्राप्त करो और अगर हमें ज्ञान प्राप्त हो गया तो उसको हमसे कोई कैसे चीन सकता है हाँ इप्राण जर्रोर ले सकता है कोई अज्ञानी , किन्तु उसके बाद भी तो ये सभी मानक बरकरार रहते हैं फिर धर्म कैसे खतरे में हो सकता है ? हम और आप खतरे में हो सकते हैं. विषय थोडा सा भटक अवश्य गया है लेकिन जब बात धर्म और इश्वर की हो रही हो तो , ये अभिव्यक्ति सांयक है धर्म का स्वरुप समझें इश्वर की असीम अनुकम्पा को पहिन्चाने ढोंग से सावधान रहे शाश्त्र कहता है की कलियुग में बहुत से व्यभिचारी , लोभी , दुराचारी , धर्म के सिंघासन पर बैठ कर अपने अपने घनग से धर्म की मीमांसा , अपनी स्वार्थ सिध्ही के लिए करेंगे , भोक्ले भले निर्दोष और वातव में धर्म के मार्ग पर चलने वाले मुनष्यों के समूह नीचे बैठे तालियाँ बजायेंगे , धर्म के अनेक रूप अनेक समूह हो जायेंगे , वेड मार्ग का लोप हो जाएगा . एक अंतिम सवाल छोड़ कर जा रहा हूँ– साधू को संपत्ति से क्या? धन्यबाद

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 27, 2011

    लेटे(लेते) भोले -भोक्ले , ढंग -धनग

Dr.satyendra के द्वारा
April 27, 2011

बंधुओ , आप सबके सारगर्भित विचार पढने के बाद , एक विचार दिमाग में आया, बाबाओं को भगवान् का दर्जा देने का सिलसिला कबसे शुरू हुआ? ज़रा दिमाग पर जोर डालिए और सोचिये की अगर आज तुलसीदास जी होते तो वो क्या कहलाते? संत ? कवी ? समाजसुधारक ? या भगवान्? ऐसे कई नाम गुरु नानक जी , संत कवी रैद्सास जी , कबीर सूर तुलसी , रामकृष्ण परम हंस , विवेकानंद जी , एवं सरस्वती दयानंद जोई इतियादी अगर ये आज होते तो ये भी भगवान् ही कहलाते:० बड़े आश्चर्य का विषय है की जैसे जैसे व्यक्ति का भोतिक ज्ञान बाधा , वैसे वैसे उसका अध्यात्मिक ज्ञान कम होता गया , शाश्त्र पढने की लोगों को फुर्सत नहीं , सत्संग में गए जो तथाकथित स्वम्भू भगवान् ने भागवत या पुराण या गीता पढ़ कर अपने स्वार्थ के हिसाब से बता दिया वो ही अंतिम सत्य , सनातन समाज में बहुत से लोग शुक सुधासागर को तोते द्वारा बोली हुयी मानते , उन्हें ये ही नहीं मालुम की ये प्रकांड पंडित सूतजी और रजा परीक्षित का संवाद का संकलन है , सूतजी महाराज जन्म से शुद्र किन्तु कर्म से प्रकांड पंडित या ब्रह्मिन हुए. तात्पर्य ये है की उस समय जाती व्यवस्था इतनी संकुचित नहीं थी जैसी की आज . :) अध्यात्मिक अज्ञानता का लाभ उठाया बहुत से चतुर लोगों ने , भगवत रटते रटते , और सुनाते सुनाते कितने ही स्वम्भू नाग नागिन बाबा रोज टी वि पर दिखाई देते, इनके अध्यात्म के नाम पर खड़े किये गए ट्रस्ट में अरबों रुपये का कला धन आता , और धर्म के नाम पर दिनप्रतिदिन फलती फूलती दूकान दरी , अज्ञान , आभाव और भय से भरे मनुष्यों की भीड़ को चमत्कार की आशा में इनकी और लिए जाती है. मैं येहाँ श्री सत्य साइन बाबा की बात नहीं कर रहा , चर्चा को एक व्यापक आयाम देते हुए , सभी बंधुओं से आग्रह करना चाहता हूँ की हमारे शाश्त्र में लिखा है की सबसे बड़ा गुरु कौन? शाश्त्र तो शाश्त्रों का स्वाम अध्ययन कीजिए , और उनका सार निकालिए , जब इश्वर हर जगह है तो आप स्वाम भी तो इश्वर मय हैं :) अहम् ब्रह्माष्मी –मैं ही इश्वर हूँ , अर्थात इश्वर की ज्योति मेरे अन्दर भी उतनी ही है जितनी आपके या किसी और के ! मैं एक बाबाजी का व्यक्तिगत अनुभव बताना चाहता हूँ , एव्क किराये के मकान में हम लोग रहते थे, मकान मालिक के एहन एक बाबाजी आया करते थे , उन पर बाबाजी की असीम कृपा थी बड़ी भीड़ लगती थी लंगर होता था , मकान मालिक बड़ा आग्रह करते थे की डॉ. साहेब आप भी कभी आइये न , बाबाजी का आशीर्वाद लेने, मैं आते जाते देखता रहता था की , बाबाजी बिस्तर पर लेते हैं , और जाड़े के दिनों में बहुत सी महिलायें उनके हाथ पैर दबा रहीं हैं लिहाफ के अन्दर हाथ दाल कर मुझे बहुत विचित्र सा लगता था एक दिन मकान मालिकिन ने बहुत आग्रह किया तो मैं सपत्नीक उनका आशीर्वाद लेने गया मैंने श्रधा से प्रणाम किया तो बाबाजी ने एक मोर पंखी झाड़ू मेरे सर पर मारी , प्रसन्न रहो का आशीर्वाद दिया फिर मेरी पत्नी आशीर्वाद लेने आगे बढ़ी तो बाबाजी ने झाड़ू का नहीं हाथ का प्रयोग किया :) और मेरी पत्बी का हाथ पकड़ लिया , आप बहुत भाग्यशालिनी हो , सदा सुखी रहो आती रहा करो अब मेरी पत्नी की प्रतिक्रिया देखिये वो अपना हाथ उनके हाथ से छुडाने का शाल्लेंता से प्रयास करने लगी :प बड़ा विचित्र विहंगम द्रश्य था आज भी सोच कर हंसी आ जाती है पत्नी हाथ पीछे खींचे और बाबाजी हाथ छोड़ने को तैयार नहीं :प हहाहाहा वो दिन आज का दिन बिचारी ने बड़े संकोच से अपना हाथ छुड़ाया और धीरे से बोलीं अब चलें फिर कभी किसी बाबा से आशीर्वाद लेने की उनकी हिम्मत नहीं पड़ी. मेरा ये मतलब नहीं की सारे बाबा एक से होते , लेकिन ज्यादातर ऐसे ही हैं आप ख़बरें देखते रहते होंगे मैं सध्री सत्य साइन जी के बारे में अधिक नहीं जानता , हाँ इतना पता है की उन्होंने मानव हित केबहुत सारे कार्य किये हैं , इसलिए वो निश्चित ही एक महापुरुष हैं , अगर महापुरुष और भगवान् का आशय एक ही है तो निश्चित वे भगवान् हैं आयर यदि इसका आशय इश्वर से है! तो ये मैं मानने को तैयार नहीं . दो टीवी चैनल येही काम करते आप समय खरीद लो, गेरुए वस्त्र पहिन लो , भगवत की किताब सामने रखलो , थोडा वाक् चातुर्य होना चाहिए बस , आपको भी अवतारी पुरुष बन्ने में अधिक समय नहीं लगेगा. समय की बलिहारी है प्रथम शकाराचार्य भगवान् नहीं बहुत से ऐसे शोर्यवान नाम जिन्होंने संस्कृति को विदेशी आक्रान्ताओं से आजाद करने में अपने परिवोरों तक की बलि देदी उनके नाम हमें याद नहीं पेनिसिल्लिन जैसा अन्तिबिओतिक किसने बनाया , पहिला हवाई जहाज , मोबाइल , टीवी कुष्ठ रोग , तपेदिक की दावा किसने बनायी प्लेग का टीका किसने बनाया, चेचक हैजा से मानव जाती को कैसे relief मिला , पहिली मोटर किसने बनायी , तेलेफोने से लेकर बिजली तक ये ऐश्वर्या चमत्कार किसने किये हमें किसी का नाम याद नहीं संसार अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय पर टिका हुआ है धर्म भी एक विज्ञान है , परा विज्ञान , कल्पना पर्काल्पना और पुरुशाष्ठ्रा का समन्वय, वैज्ञानिक रूप से आश्था का सत्यापन , ये ही परमपिता परमात्मा का आदेश भी है उपदेश भी . जो मानव ये कहते की धर्म एक आश्था है इसका विज्ञान से कोई लेना देना नहीं , उनको मेरा ये सुझाव है की धर्म आस्था भी है और विज्ञान भी , कोई भी विज्ञान आज तक धर्म , और इश्वर की मान्यता को झुठला नहीं पाया हमारे शाश्त्रों में धर्म भी है विज्ञान भी, दोनों को ही सीख कर समन्वय बनाने की आवश्यकता है , धर्म कोई कोरी परिकल्पना नहीं सत्य है और जो सत्य है वो झुठलाया नहीं जा सकता , कभी कभी नारा सुनने को मिलता है की इस्लाम खतरे में .हिंदुत्व पर संकट बगैरह बगैरह मुझे हंसी आती है , धर्म कभी खात्य्रे में हो ही नहीं सकता क्युन्कियो धर्म तो सत्य दान अहिंसा तपस्या और क्षमा के साथ साथ इल्म पर भी टिका है हर शाश्त्र में लिखा है की ज्ञान प्राप्त करो और अगर हमें ज्ञान प्राप्त हो गया तो उसको हमसे कोई कैसे चीन सकता है हाँ इप्राण जर्रोर ले सकता है कोई अज्ञानी , किन्तु उसके बाद भी तो ये सभी मानक बरकरार रहते हैं फिर धर्म कैसे खतरे में हो सकता है ? हम और आप खतरे में हो सकते हैं. विषय थोडा सा भटक अवश्य गया है लेकिन जब बात धर्म और इश्वर की हो रही हो तो , ये अभिव्यक्ति सांयक है धर्म का स्वरुप समझें इश्वर की असीम अनुकम्पा को पहिन्चाने ढोंग से सावधान रहे शाश्त्र कहता है की कलियुग में बहुत से व्यभिचारी , लोभी , दुराचारी , धर्म के सिंघासन पर बैठ कर अपने अपने घनग से धर्म की मीमांसा , अपनी स्वार्थ सिध्ही के लिए करेंगे , भोक्ले भले निर्दोष और वातव में धर्म के मार्ग पर चलने वाले मुनष्यों के समूह नीचे बैठे तालियाँ बजायेंगे , धर्म के अनेक रूप अनेक समूह हो जायेंगे , वेड मार्ग का लोप हो जाएगा . एक अंतिम सवाल छोड़ कर जा रहा हूँ– साधू को संपत्ति से क्या? धन्यबाद ्

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 27, 2011

    लेटे(लेते) भोले -भोक्ले , ढंग -धनग

NILESH SURYAWANSHI के द्वारा
April 26, 2011

Jagran Junction Forum : कोई भी मनुष्य जिसने इस धरती पर जनम लिया है वो भगवान हो नहीं सकता परमात्मा सबसे ऊँची सत्ता है उससे ऊँचा कोई नहीं है और जो मनुष्य जनम लेता है उससे बड़े और ऊँचे माता पिता सहज हो जाते है इसलिए जिसने इस धरा पे जनम लिया जो जनम मरण के चक्र में आता है वो भगवन नहीं है परमात्मा का अवतरण होता है सत्य साईं बाबा भगवान नहीं है ये भारतीय मानस की सदियों पुरानी परंपरा है या कहे भोलापन है जो जिससे भी उसे कुछ प्राप्त होता है टी उसके प्रति अपनी नम्रता प्रकट करने के लिए खुद को छोटा चरणों की धुल और उन्हें महान देवता मातम या भगवान की उपाधि दे डालता है भारतीयों ने तो प्रकृति के पञ्च ततुओ को भी देवता कहा क्यु की वे देते है जानवर को भी परमात्मा का रूप बता दिया मेरे कहने का मतलब कहने वालो पर मत जाना साईं बाबा हो या सत्य साईं हो या इसा मसीह , गुरु नानक जी ,या मुहमद और इब्राहीम जी हो किसी ने कभी नहीं कहा की मै भगवान् हु सबने कहा सबका मालिक एक उस इस्वर को याद करो नूर को जानो god को जानो और मानो ये भारत भूमि सदा से ही पवित्र आत्माओ की तपस्या भूमि होने के कारन यहाँ समय समय पर महान आत्मा या चमत्कारी लोगो का जनम होता आया है अगेर उन पवित्र आत्माओ द्वारा किसी का कल्याण होता है और वो व्यक्ति उसे डाटा कहे भगवान कहे ये उसकी भावना है लेकिन महान आत्मा या पवित्र लोगो ने अपने मुख से कभी भी खुद को खुदा या भगवन नहीं कह सकते आज सचिन को भी लोग क्रिकेट का भगवान कहते है सचिन ने तो कभी नहीं कहा लेकिन जनता नहीं मानती इसके लिए आप सचिन को दोस नहीं दे सकते साईं बाबा ने तो सदा कह सबका मालिक एक सबका मालिक मै नहीं कहा साईं ने धन पैसा खुद के आराम के लिए नहीं जमा किया उन्होंने केवल जो उनके पास आया सामने आया जो उनसे बन पड़ा वो किया आप जिसे चमत्कार कहते है मेरे नज़र से वो उनकी मजबूत इच्छा सक्ती का नतीजा है वे किसी की जाती या धर्म पूछ कर कल्याण नहीं करते थे लोग उनके संस्थान के और सदस्यों पर आरोप लगा सकते है वो सत्य भी हो सकता है क्यू की सभी महान लोग एक ही संस्थान में एक साथ रहे is kalyog में तो shayad ही mumkin हो ha agar परमात्मा खुद अवतार ले ker आ जाये तो हो सकता है I

श्रीकांत सिंह के द्वारा
April 26, 2011

भगवान के बारे में इंसान कोई टिप्‍पणी कर ही नहीं सकता। यदि ऐसा न होता, तो हमारे शास्‍त्र नेति-नेति कह कर भगवान की ओर संकेत न करते। दूसरी बात भगवान कोई व्‍यक्ति नहीं, पद होता है। हरि पद पावा का उल्‍लेख श्रीरामचरित मानस में मिलता है। अब पद उसी को मिलता है, जो उसके अनुरूप अपने गुणों का विकास कर लेता है। भगवान अवतार लेते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन वे सच्‍चाई और न्‍याय के लिए हमारे शरीर का इस्‍तेमाल भी करते हैं। जो व्‍यक्ति भगवान के कार्यों में अपने को लगा देता है, वह निश्चित ही भगवत पद के करीब होता चला जाता है। उसके लक्षण भगवान के इतने करीब नजर आने लगते हैं, कि लोग उसे भगवान मान बैठते हैं। दरअसल, हमारा शरीर एक दीपक की तरह है। उसके गुण दीपक की लौ के समान हैं। अवगुणों को हम अंधकार कह सकते हैं। यही वे आधार हैं, जिनके जरिये भगवत्‍ता की परख होती है। विडंबना यह है कि लोग भगवान को ढूंढते हैं, भगवत्‍ता को नहीं। अपने में भगवत्‍ता लाई जाए, तो भगवान के निकट पहुंचा जा सकता है। इसलिए भगवत्‍ता की तलाश की जाए, तो भगवान किसी भी प्राणी में प्रकट हो सकते हैं। वराह अवतार, मत्‍स्‍यावतार आदि उसके सर्वश्रेष्‍ठ उदाहरण हैं।

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 26, 2011

    आपने स्वाम ही कहा की लोग उसको भगवान् मान लेते हैं , इसका मतलब वो भगवान् होता नहीं है , जैसे की कोई मरीज डॉ से कहे की आप भगवाक का रूप हो , इसका ये मतलब नहीं की वो डॉ. भगवान् हो गया . मैंने अपनी पहिली पोस्ट में ही कहा था की एक महान इंसान के रूप में मैं उनका आदर करता हूँ

    NILESH SURYAWANSHI के द्वारा
    April 27, 2011

    परमात्मा जय सी ऊँची सत्ता को वराह अवतार या मास्य अवतार कहना एसे जानवरों से तुलना करना पमात्मा का अपमान है वो हमारा परम पिता है सबसे ऊँचे है आप ही सोचो आपको कोई कहे आपके पिता कुत्ते में है या मछली में है उसे पहचानो तो कैसा लगेगा सरे जगत में सबसे श्रेष्ट प्राणी या योनी मनुष्य योनी मानी गई है तो यदि परमात्मा को किसी का आधार लेना है तो श्रेष्ट का ही लेगा तुच्छ का नहीं आप ही कहते हो किसी की पहचान उसके गुणों से होती है तो क्या जानवर के गुण और भगवान् के गुण मेल हो जाते है जानवर को शांति का सागर प्रेम का सागर दया का सागर कहेंगे जरा सोचो.

    Mr. X in Bombay के द्वारा
    April 27, 2011

    हे मूढमति अभागा, इश्वर को जानवर कहता है ……….यदि इतना हीं अपने धर्म से लज्जा है तो इसाई बन जा सनातन धर्म में करोणों लोग हुए जो इस तुच्छ महाभ्रष्ट सत्य साईं से कहीं ज्यादा भगवान कहे जाने के काबिल थे किन्तु उन्हें भगवान नहीं कहा गया क्योंकि भगवान की अपनी कुछ विशेषताएं होती है भगवान का अवतार जरूर होता है किन्तु किसी बहुत हीं बड़े एवं विशेष कारन से ऐसे हीं पाश्चात्य सोंच वाले लोंगो के कारन भारत गर्त में जा रहा है अगर कल्कि अवतार लें तो सबसे पहले ऐसे डोंगी महात्माओं पर हीं शामत आएगी जय हिंद | जय हिन्दू | जय हिंदी |

    Shrikant Singh के द्वारा
    April 28, 2011

    Nilesh Suryawanshi & Mr X ji आप इतने बेचैन इसलिए हो रहे हैं कि आपने बात समझी नहीं और मार दी टिप्‍पणी। कहने से कहीं अधिक महत्‍वपूर्ण होता है समझना। मैंने सिर्फ यह कहा है कि परमात्‍मा शरीर नहीं है, वह अपने कार्य के लिए विविध शरीरों का इस्‍तेमाल करता है। ठीक वैसे जैसे कि आपने कार का इस्‍तेमाल कर लिया तो आप कार नहीं हो गए। आप जो हैं वही रहेंगे। हिंदू धर्म के रहस्‍यमय विचारों को न समझ पाने वाले ही निष्‍ठा की थोथी दुहाई देते हैं। जिसके अंदर समझ न हो वह हिंदू तो क्‍या मनुष्‍य भी नहीं है। जिन जानवरों को हेय कहा जा रहा है, वे तो कई मायने में आज के मनुष्‍य से कहीं बेहतर हैं। उनमें जो है, वह स्‍पष्‍ट है। मनुष्‍य को ही छल कपट और मगजपच्‍ची करने की शक्ति मिली है। मेरे विचार अगर किसी के अहं को चोट पहुंचा रहे हैं, तो उसमें मेरा नहीं उनकी समझ का दोष है।

Akhil Ranjan के द्वारा
April 26, 2011

क्या कोई इंसान कभी भगवान् बन सकता है ? ये समाज अन्धो का समाज है यहाँ सिर्फ और सिर्फ अंधे ही भरे है, जिस तरह अन्धो को चलने के लिए सहारे की जरुरत होती है उसी तरह यहाँ भी हर किसी को एक सहारे की जरुरत है. जिसपे वो अन्धविश्वास कर के पीछे पीछे चल सके. साधू का सच्चा मतलब कौन जनता है, एक वो साधू होते थे जो घर घर भिक्षा मांग कर और तप कर के अपना जीवन जीते थे और एक ये साधू – संत है जिनके बैंक खतों में करोडो अरबो रूपए भरे हुए है. आखिर कहा गई वो त्याग की भावना. कहाँ गए वो सच्चे इंसान जो सच मुच में भगवानो की श्रेड़ी में खड़े होते थे. सिर्फ गणमान्य व्यक्तियों के कह देने भर से अगर कोई भगवन बनता है, तो वो सिर्फ उनके लिए भगवन हो सकते है सब के लिए नहीं. उन लोगो की आवाज़ तो दबा ही दी जाती है जो ऐसे मनुष्यों से धोका खाए हुए होते है. अगर जन साधारण मनुष्य अपने आँख कान और दिमाग खुले रख के इन ढोंगी साधुओं की असलियत देखे तभी वो समझेगा.इन करोडो के वारे – न्यारे करने वालो की असलियत इतनी आसानी से सब के सामने नहीं आएगी.

krishnshnakr के द्वारा
April 26, 2011

सत्य साई बाबा साधारण व्यक्ति थे भगवान या अवतार नहीं । सर्वं खल्विदं ब्रह्म\’इस श्रुति के अनुसार सम्पूर्ण जगत ही जब ब्रह्मरूप है तब श्रीमूर्ति भी भगवान है या भगवान का अवतार है,यह तो ठीक ही है। उपासना की दृष्टि से भी श्रीमूर्ति भगवान ही है। इस तरह मूर्ति अर्चावतार है । इस तरह से भगवान के लीलावतार,पुरूषावतार,अंशावतार,आवेशावतार और पूर्णावतार होते है। भगवान ने गीता में कहा है कि वे समस्त प्रणियों में अंश रूप में विद्यमान है। पूर्णावतार में अवतार में सोलह कलाएं होती है । अंशावतार में अवतार में चौदह कलाएं होती है । श्रीकृष्ण में सोलह कलाएं थी वे पूर्णावतार थे । श्री राम में चौरह कलाए थी और मनुष्य में बारह कलाएं होती है। प्रत्येक मनुष्य में दैवी शक्तियां होती है। यदि सात्विक और सकारात्मक विचारयुक्त मनुष्य सम्पूर्ण मानिसक शक्ति से योग साधना करें तो वह अलौकिक शक्तियों का स्वामी हो जाता है। जब ईश्वर पृथ्वी पर अवतार लेते है,तब सारी पृथ्वी पर सात्विक आचार विचार लोगों में उत्पन्न होता है। हर स्थान देश या यों कहें कि पृथ्वी से लेकर आसमान पर दैवीय गुणों का विकास होता है और हर तरह खुशियाली छायी रहती है। पापाचार,देशद्रोह,आतंकवाद,भूखमरी,भ्रष्टाचार,खूनखराबा आदि दोष स्वयं की समाप्त हो जाते है। सत्य साई बाबा 1926 में पैदा हुए थे । उस समय विदेशी अंग्रेज भारत पर राज्य कर रहे थे । जलियावाला बाग में हजारों बेगुनाह लोग मारे गए । देश का बंटवारा हुआ । क्रान्तिकारियों को फांसी दी गई । उस समय भगवान के अवतार सत्य साई बाबा ने मानव माधव सेवा के सिद्धान्त पर आगे आकर देश को क्यों नहीं बचाया जबकि गांधी,नेहरू,सुभाष देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे । सत्य साई बाबा अपने चमत्कारों से अंग्रेजों को नेस्तनाबूत कर सकते थे । देश के बंटवारे को अपनी भगवत शक्ति से रोक सकते थे । 1971 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया था । 1975 में आपात्तकाल में कई वेगुनाह मारे गए । 1992 में मन्दिर मस्जिद विवाद में भी कई बेगुनाह मारे गए । आजादी के बाद देश में ही नहीं सारी दुनिया में एक प्रकार की अमानवीय असंतोष फैल गया । जंगल उजड गए । हरियाली के स्थान पर कांक्रीट के जंगल उग आए । सुनामी से सैकडों लोंग मारे गए । गुजरात में जो नर संहार हुआ वह किसी सी छिपा नहीं है। सारा राष्ट भष्टाचार के चंगुल में आकंठ व्याप्त है। इस समय भगवान कहलानेवाले सत्य साई बाबा की भगवत्ता कहां गई थी । ऐसे कई सवालात उठते है। जब पृथ्वी पर भगवान का अवतार होता है,तब पृथ्वी पर सदाचार का वातावरण छा जाता है। सब कुछ शुभ शुभ होता है। भगवान की उपस्थित मात्र से बडे से बडे अपराधी भी गुणी हो जाता है । अन्न की कमी नहीं रहती । कोई भूखा नहीं सोता । कोई गरमी या सरदी से नहीं मरता । कोई आपदा नहीं आती । आदि कई सात्विक गुण स्वयं ही पनपते है। किन्तु सत्य साई के अवतरण से विश्व का कल्याण होते नहीं देखा गया । सत्य साई के अनुयायी उन्हे भगवान मानते है,अच्छी बाr है किन्तु यह अन्धी श्रद्धा है। अन्धी श्रद्धा के लिए किसी को रोका नहीं जा सकता । किन्तु इन अन्धविश्वासियों को यह सोचना चाहिए कि केवल चमत्कार से ही सबकछ नहीं होता । छह माह तक आप योग साधना कीजिए,आप भी चमत्कार करने में सक्षम हो सकते है। मनुष्य भगवान का ही रूप होता है,इसलिए उसे पुरूषावतार कहा जाता है। इस सिद्धान्त से प्रत्येक मनुष्य भगवान का अवतार ही है । आवश्यकता है अपने आप को पहचानने की । हां, जो अवतारी पुरूष होते हैं ,वे कभी बीमार नहीं होते । भगवान तो बीमार हो ही नहीं सकते । उनका मायावी शरीर बीमारी को नहीं जानता । पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु और आकाश भगवान के अधीन रहते है । यह शरीर इन्ही तत्वों का बना हुआ है । इसलिए भगवान या अवतार कभी बीमार नहीं होते । चिकित्सा की जरूरत नहीं पड़ती । अस्तु,ऐसी कई बाते है। इसलिए मैं सत्य साई बाबा को चतम्कारी पुरूष मानता हूं किन्तु भगवान नहीं । इससे भगवान का अपमान होता है। डा कृष्णशंकर सोनाने

    Nancy John ( Goa) के द्वारा
    April 26, 2011

    डॉक्टर सत्येन्द्र

    raj के द्वारा
    April 26, 2011

    यह टिप्पड़ी अशोभनीय है व ऐसे मंच की गरिमा को गिरती है |

    Mr. X in Bombay के द्वारा
    April 27, 2011

    सच लगता है तीता बुरी लगती है गीता तुम पागलों के लिए इस डॉक्टर ने सही कहा है …….भारत से यदि ऐसे …. का सफाया हो गया तो देश स्वतः हीं सुधर जायेगा

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    Mr X it is my suggesion when you can’t control your self,pl avoid to write

    Anuradha Chaudhary के द्वारा
    April 29, 2011

    Dr Satyenra you are great.

    Neeraj के द्वारा
    May 7, 2011

    सबसे  बेहतरीन लेख । 

Dr.satyendra के द्वारा
April 26, 2011

He was not God, but a great person. and people should avoid to call God for a human being.

    Dr.satyendra के द्वारा
    April 26, 2011

    thanx nancy and raj brother, its not my view only, I told you whatever I feel, and whatever I got from shaashtra safter a thorough study. paglon ke dr bhi MBBS. m.D. hote hai for ur kind information and no comments on ur precious and gentle comment. ISHWAR AJANMA < ADRASHYA < AADI SHAKTI HAI there is no doubt about it go in details of religious books . aadi shakti shiva ke dwara utpann har kalp ke brahma vishdu , mahesh alag hote hain aur wo aadi shakti ki aagya se sansaar ki rachna , paalan evam sanghaar karte hain If you will talk about Vedas , there was only one veda pranav veda one race – hans and there was no provision for all this idol worshiping and all. murti pooja , saapeksh nirapeksh pooja ye sab treta me prarambh huyi And bhagvaan krishna ne bhi geeta me kaha hai ki aap jis roop me jitne roopon me kisi bhi prakar se jo bhi pooja karte ho aur duniyan ke saare panth meri aur hi aate hain Meri aur se unka matlab Almighty ki aur hai na ki swam ki aur I was not interested in discussions i put my views but once you started debating then its my duty to respond regards Dr. satyendra

subhah के द्वारा
April 26, 2011

is des main har saal koi na koi bhagvan janm leta hai logo ko maya se door rahne ka sandes dekar khub maya batorta hai yhi kissa yahan hai abhi isi akhbaat main khabar thi ki unki mout ke baad bahut sara sona kahin chhupaya gya kul 1.29 lakh karod ki unki trust batai gyi hai

Manoj Shrivastava के द्वारा
April 26, 2011

भगवान श्री सत्य साईं बाबा के स्वास्थ को अनदेखा किया साईं ट्रस्ट के अधिकारी, सेवादल के सदस्यों ने और उनके निजी डॉक्टर ने. ८ जनवरी २०११ से भगवान श्री सत्य साईं बाबा का स्वास्थ अच्छा नहीं चल रहा था. उन को मेडिकल चेकअप और दवाओ की जरूरत थी लेकिन सेवादल के सदस्यों का अड़ियल रूख और सत्य साईं के सबसे निकट रहने वाले सत्यजीत जो की बाबा के ट्रस्ट का कम देख रहे हे और श्री सत्य ट्रस्ट के सचिव के पद पर हे और उनका निजी डॉक्टर ने भी बाबा के स्वास्थ का ध्यान नहीं रखा दिन पर दिन बाबा का स्वास्थ निरंतर गिरता रहा. लेकिन उनको आवश्यक उपचार नहीं दिया गया और संक्रमण बाबा के शारीर में फेलता रहा ८ जनवरी के बाद जब भी बाबा ने दर्शन दिए उनकी हालत में गिरावट दिखती रही ८ जनवरी २०११ से २४ अप्रैल २०११ तक के दर्शन के विडियो में कोई भी देख कर ये अंदाज़ लगा सकता हे की बाबा का स्वास्थ निरंतर ख़राब होता जा रहा था . पिछले एक साल से बाबा ट्रस्ट का कम नहीं देख प् रहे थे स्वास्थ खराब होने के वजह से लेकिन ट्रस्ट के सदस्यों ने ये नहीं सोचा की आगे क्या होगा कौन इस ट्रस्ट का उत्तराधिकारी होगा सवाल ४०००० हज़ार करोड़ के साम्राज्य का था. बाबा ट्रस्ट का काम देखने में असमर्थ थे इस समय इन ट्रस्ट के सभी सदस्यों को ये बात बाबा के सामने रखना थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया और इस की जानकारी भी किसी को नहीं लगने दी हर मुद्दे को गुप्त रखा गया. ट्रस्ट के सभी बड़े दानदाताओ को भी इस खबर से अनभिज्ञ रखा गया. अगर २ मार्च २०११ को भी भगवान श्री सत्य साईं बाबा को हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया होता तो १००% बाबा आज हमारे बीच में होते और स्वास्थ होते. बाबा के निरंतर स्वास्थ में गिरावट और उनकी शारीरिक कमजोरी का फायदा इस ट्रस्ट के अधिकारी और सेवादल के प्रमुख सदस्यों ने मिलकर उठाया. में मनोज श्रीवास्तव (भक्त श्री सत्य साईं बाबा ) उनके दर्शन के विडियो नेट पर साईं बाबा ऑफ़ इंडिया पर डेली देखता था. में आँध्रप्रदेश सरकार से और सीबीआई से ये मांग करता हूँ की ८ जनवरी २०११ से २४ मार्च २०११ तक साईं बाबा की सभी मेडिकल रिपोर्ट और रोज़ दी जानेवाली दवाओ की जांच की जाये. क्योकि बाबा के शारीर में संक्रमण का फेलना उनके फेफड़े का सही काम न करना किडनी का फेल होना और खासकर लीवर का ख़राब होना इस बात को इंगीत करता हे की श्री सत्य साईं का स्वास्थ कई दिनों से ख़राब चल रहा था और इस की परवाह किये बीना बाबा को व्हील चेयर पर बीठाकर सिर्फ भक्तो को दर्शन करना इन का काम था इन्होने बाबा की शारीरिक पीड़ा को नहीं समझा. शुरू से आखरी तक ट्रस्ट के सदस्य इन की मनमानी करते रहे. सरकार को इस मसले पर जांच आयोग बिठाना चाहिए. इन सभी ट्रस्ट के अधिकारिओ को अपने आप पर शर्म आना चाहिए. अगर ये सभी लोग जो श्री सत्य साईं बाबा के निकट थे बाबा के स्वास्थ का पूरा ध्यान रखते तो बाबा समय से पहले नहीं जाते. बाबा ने लोगो को प्यार करना सत्य के रास्ते पर चलना माता और पिता को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया हे. रही बात तसलीमा नसरीन की तो वो तो शुरू से ही विवादित और रहस्मय लेख सभी धर्मो के बारे में लिखती आई हे. उनको खुद के देश भी इस लिए निकाल दिया था. मनोज श्रीवास्तव

    Manoj Shrivastava के द्वारा
    April 26, 2011

    मनोज जी आप की राय सही हे सत्य साईं बाबा का स्वस्थ पिछले एक साल से अच्छा नहीं चल रहा था और सत्य साईं ट्रस्ट के सभी अधिकारी साईं बाबा के सवास्थ में निरंतर गिरावट के जिम्मेदार हे और सही समय पर बाबा को उपचार के लिए भर्ती नहीं किया किस के कारन उनके शारीर में संक्रमण फेल गया और उन की म्रत्यु हो गयी. भगवान श्री सत्य साईं बाबा ने शरीर का त्याग करा हे जो की कृष्ण और राम ने भी करा था. में आपसे सहमत हूँ.

    Narendra Maheshwari के द्वारा
    April 26, 2011

    मनोज श्रीवास्तव जी आप ने सही फ़रमाया हे सत्य साईं ट्रस्ट के अधिकारी ही सत्य साईं बाबा के बिगड़ते स्वस्थ के लिए जिम्मेदार हे. क्योकि ५६००० करोड़ से अधिक का साम्राज्य बाबा का जनता की सेवा के लिए था लेकिन अब आगे क्या होगा यह कहना मुश्किल हे. ( नरेन्द्र महेश्वरी )

    Ashok Botham के द्वारा
    April 26, 2011

    मनोज भाई श्री सत्य साईं बाबा का शरीर मानव शरीर था और उन में इश्वर की दी हुई दिव्या शक्ति थी जिस प्रकार राम और कृष्ण का शरीर भी मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना उसी प्रकार बाबा भी थे इश्वर को भी शरीर का त्याग करना पड़ता हे. एक दोहा कबीर दास जी ने कहा हे बूरा में देखना चला बूरा मिला न कोई जो देखा आपन में मुझसे बूरा न कोई. किसी भी व्यक्ति की बुरे करने से पहले अपने अन्दर झाँख लेना चाहिए.

    Nancy John ( Goa) के द्वारा
    April 26, 2011

    मनोज जी गुड इवनिंग, आज जागरण द्वारा तसलीमा नसरीन जो की एक विवादस्पद लेखिका हे उन का काम पुब्लिसिटी के लिए कुछ भी लिखना हे चाहे वो किसी भी धर्म के खिलाफ हो उन्होने आज तक कभी भी गरीबो के बारे में कभी सोचा तक नहीं हे. जबकि श्री सत्य साईं बाबा ने समाज सेवा, नारायण सेवा और कई सामाजिक कार्यो को संचालित किया हे स्कूल , हॉस्पिटल ड्रिंकिंग वाटर जैसी कई योजनाओ को क्रियान्वित किया हे. श्री सत्य साईं बाबा भगवान से कम नहीं हे. में इस बात से भी सहमत हूँ की उनका स्वास्थ में निरंतर गिरावट के लिए साईं ट्रस्ट के अधिकारी ही जिम्मेदार हे.

    sonia vasco da gama के द्वारा
    April 26, 2011

    मनोज श्रीवास्तव जी आज अपने जो लिखा श्री सत्य साईं बाबा के बारे में वो एकदम सही हे आज जागरण जंक्शन को इस मुद्दे को प्रथम पेज पर छापना चाहिए और सरे विश्व को ये मालूम होना चाहिए की ट्रस्ट के अधिकारिओ की लापरवाही से ही साईं बाबा का स्वास्थ बिगड़ता चला गया और आज हमारे बीच में एक महँ समाजक सेवक धार्मिक गुरु और भगवान का दर्जा पाने वाला नहीं रहा.

    Hasan Bhai के द्वारा
    April 26, 2011

    मनोज भाई जान में आप की बात से सहमत हूँ की श्री सत्य साईं बाबा एक महापुरुष थे शरीर मानव का नाशवान हे ये सभी धर्म ग्रंथो में लिखा हे. वो फकीर हो या साधू रजा हो या रंक एक दिन सब को जाना हे ये प्रकृति का नियम हे उम्र के साथ शरीर की शक्ति भी कम होती जाती हे बाबा की उम्र ८५ साल थी लम्बे समय से बीमार होने के कारन उनका शरीर और कमजोर हो गया था जब उनको इलाज की जरूरत थी तब ट्रस्ट के मेम्बेर्स को ध्यान रखना था लेकिन एसा नहीं हुआ.

    umesh sharma के द्वारा
    April 26, 2011

    Sai Baba used to heal other by simple touch or Ashirvad. it is not proper to blame any one for his ill health.

    NILESH SURYAWANSHI के द्वारा
    April 27, 2011

    मनोज जी किसी की मौत के लिए किसी को भी जिम्मेवार कहना ये ज्ञान की कमी को दर्शाता है सरीर विनासी है उसका नास धीरे धीरे होता ही है साईं बाबा की आकाल मृत्यु नहीं हुई है अगर किसी भी प्रकार की जाँच का कमिटी लगनी है तो भविष्य के लिए बने जो ये तय करे की संस्थान का सञ्चालन कैसे किया जाये आपको तो केवल उनका करोडो का धन नज़र आ रहा है जिस धन को खुद साईं अपने साथ नहीं ले जा सके कोई और क्या ले जायेगा उनकी तरफ ध्यान नहीं जाता जो साईं के पास आकर अपने दुःख दर्द सब भूल जाते थे उसकी पूर्ति क्या कोई जाँच कमिटी सीबीआई कर सकती है सीबीआई एक काम करे एसा कोई संस्थान खोजे जहा इतने सारे साईं भक्त जा कर वही सुख शांति और प्रेम अनुभव कर सके जो साईं के पास करते थे यही साईं की और उनके भक्तो की सच्ची सेवा होगी.

    Feroz Bhai ( Delhi) के द्वारा
    April 27, 2011

    मनोज जी आप की प्रतिक्रिया जागरण जंक्शन पर पड़ने और निलेश सुरवंशी जी का उत्तर देखकर आप लोगो से में ये कहना चाहूगा अगर कोई वृद्ध व्यक्ति अपने घर में हे और उसकी अगर ठीक से देखबाल नहीं होती हे और समय पर उसके स्वास्थ पर ध्यान नहीं दिया जाता हे तो उसका मर्ज और बड जायेगा और वो शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत कम हो जाएगी एसा ही बाबा साईं के साथ हुआ ट्रस्ट के प्रमुख सचिव और अधिकारिओ ने बाबा के स्वास्थ को नज़रंदाज़ किया जिसका परिणाम ये हुआ की उनके शरीर को कई रोगों ने घेर लिया और वो गंभीर बीमार हो गए. इस बात से में आप से सहमत हूँ.

VinayBhatt के द्वारा
April 26, 2011

यंहा पर कई लोग अभी भी अंधभक्ति में डूबे हुए हैं ! 1918 में शिर्डी के साईं बाबा ने इस संसार को छोड़ दिया था.. उनके बारे मैं मैं कह सकता हूँ की वो वाकई एक महान आत्मा थे ..सारा जीवन उन्होंने भक्ति और लोगों के दुःख दूर करने लगा दिया..स्वयम बाबा कुटिया या मंदिरों में रहते थे ..घूम घूम कर लोगों के दुःख दूर करते थे ..उनके मानने वाले सारे भारत वर्ष में हैं.और रहेंगे.. जबकि सत्य साईं ने स्वयम को साईं अवतार घोषित किया ..चमत्कार तो सड़क पर मजमा लगाने वाला मदारी भी करता है ..उन्होंने अपना जीवन महलों में बित्ताया और एक ही क्षेत्र तक सिमित रहे मैं उत्तर भारत से आता हूँ और मैंने इस क्षेत्र में उनका कोई प्रभाव नहीं देखा ..उन्होंने हो सकता है कई भलाई के काम किये हों माना जा सकता है..केवल क्षेत्र विशेष में ..तो उनको मानने वालों में अंतर हो सकता है…लेकिन भगवान नहीं हो सकते ..इस कलयुग में किसी इंसान को भगवान नहीं माना जा सकता..श्रद्धा अपनी जगह है..और भगवान् महीने भर अस्पताल में भर्ती नहीं रहते ..वो स्वमं की इच्छा से महाप्रयाण करते हैं… उने मात्र अध्यात्मिक गुरु माना जा सकता है..और यंहा पर कोई यदि आशाराम बापू का भक्त भी हो तो ये बता दूँ की उनके भी स्टिंग ऑपरेशन टीवी पर आ चुके हैं ..इसके बाद कुछ कहना बाकि नहीं रह जाता …

Dr.satyendra के द्वारा
April 26, 2011

सत्य sain संत थे , संत वो जो सम्नाज को अद्यात्म और सन्मार्ग के मार्ग पर ले जाए , उनके चमत्कारों के बारे में मुझे कुछ भी नहीं कहना है ,क्यूंकि एक जादूगर भी ऐसे चमत्कार रोजाना ही दिखाता है . जहाँ तक सनातन शाश्त्रों का प्रश्न है उनमे कहा गया है की इश्वर जन्म मृत्यु से परे आदि शक्ति है , और ये बात विवेक रूप से सर्वसम्मत भी है , तो साइन , इश्वर तो नहीं.न हो सकते शास्त्रों के अनुसार इश्वर का अन्शान्शाव्तार होता है, मतलब की इश्वर अपनी devine पॉवर का थोडा सा अंश किसी मानव को दे देता है और वो मनुष्य इश्वर का दूत कहलाता है ,. वो स्याम इश्वर नहीं होता. अर्थात साईं इश्वर नहीं हैं , किन्तु ऐश्वर्या शक्ति का कुछ अंश उनको ईश्वर ने दिया . कुछ शब्द बड़े भ्रामक हो गए हैं , जैसे भगवान् , अगर कोई डॉ. किसी serious मरीज को ठीक कर दे तो log कहते हैं की are आप तो हमारे लिए भगवान् ही हैं , मतलब भगवान् के सामान हैं , भगवान् स्वयं नहीं जिस प्रकार आम भाषा में कहा जाता है की आप तो हमारे पितातुल्य हैं , पिता तुल्य औए पिता होने में बहुत फर्क है. साईं संत हैं , समाज सुधारक हैं ,उनमे devine पॉवर का कुछ अंश हो सकता है लेकिन वोही भगवान् हैं ? ये थोडा सा विवादास्पद कथन है . असलियत में आहार गौर करें तो भगवान् शब्द का इस्तेमाल इश्वर के दूतों के लिए होता है , या कोई ऐसा इंसान जो devine पॉवर से युक्त हो . परमपिता परमात्मा के लिए तो हे ईश्वर शब्द का प्रयोग ही होता है . मैं स्वाम में साईं जी द्वारा kiye गए मानव hit karyon के लिए unkaa aadar karta हूँ. किन्तु वोही भगवान् हैं , ये बात मेरी समझ के परे है डॉ. सत्येन्द्र

ajay tomar के द्वारा
April 26, 2011

Any soul who come in the physical world he/she can be great person,he can self realized,he can spiritualy advance,he can disolve his body & can reform his body,A yogi can do any miracle but he can not be supreme power Or god.god is only one.

poonam के द्वारा
April 26, 2011

मिथ्या है आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है? भोली-भाली जनता को बेवकूफ बना रहे हैं.

    gautam roy के द्वारा
    April 26, 2011

    भगवान क्या है ? सबसे पहले हमें ये जान लेना चाहिए.कुछ लोगों की आदत है की बस नुक्स निकलना है.साईं बाबा ने जो कम समाज के लिए किये है उन सभी कामो में उनका अपना कोई स्वार्थ नहीं था, और जो निस्वार्थ भावना से समाज के लिए सेवा करे वो भगवान ही है. जनता को बेबकूफ साईं बाबा ने नहीं बनाया.जनता तो है ही बेबोकूफ़ जो की हर पांच साल के लिए आदमखोरो को चुनती है.उन नेताओ से किसी ने कहा की वो भोली भली जनता को बेबोकूफ़ बना रहे है.अगर किसी संत ने अपना पूरा जीवन समाज के सेवा में लगा दिया तो वो बेबोकूफ़ बना रहा है? जरा सोचो फिर बोलो दुनिया वालो.

    munna के द्वारा
    April 26, 2011

    गौतम रॉय भाई जी मै आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हू

SHATRUGHAN के द्वारा
April 26, 2011

UNHEN TO AMAR HO JANA CHAHIYA THAA…..? PEOPLE IN 2 CATAGORY IN WORLD GOOD OR BAD BUT SOME PEOPLE BEING GREAT,,, BUT cant GOD… GOD kahne wale cheat inocent people….

    mojiz के द्वारा
    April 26, 2011

    बिलकुल सही है भगवान का दर्जा सभी को नहीं दिया जा सकता है ये तो मासूमों के साथ उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ है इसका विरोध किया जाना चाहिए

Naveen Pandey के द्वारा
April 26, 2011

                                                  “Jagran Junction Forum”                                   “श्री सत्य साईं पर आरोप- मिथ्या या हकीकत” विवादों से गहरा रिश्ता है हमारा .खुद को चर्चा में लाने के लिए कुछ भी करना पड़े ..जुगत लगा बैठते है..जो लोग इतने बड़े मनीषी पर आरोप -प्रत्यारोप कर रहे है उनसे सवाल है की क्या आपके पास सत्य बाबा की कोई ” विडियो सी डी” या ” आडियो सी डी” है जिसमे उन्होंने खुद को भगवान बताया है …हलाकि आज के समय में कुछ भी हो सकता है .. \" विडियो सी डी\" हो या \" आडियो सी डी\" कुछ भी सबूत के तौर पर दिया जा सकता है…जाँच करानी है तो करा लो मन माफिक रिजल्ट मिलेगा ये सब जन चुके है..अब जनता बेवकूफ नहीं है ..दरअसल सारा खेल उन रुपयों का है जो अब लोगो की नज़र में है… सवाल उठता है की आखिर भगवान की परिभाषा क्या है.बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्‍लीमा नसरीन ने पुट्टापर्थी वाले सत्य साईं बाबा की मृत्यु के पश्चात ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा:“सत्‍य साईं बाबा – भगवान थे या साधारण आदमी – उनकी मौत के साथ यह प्रश्‍न एक बार फिर उठ गया है. सही मायने में वे साधारण आदमी ही थे. उन्‍होंने जीवन भर करोड़ों लोगों के साथ धोखा किया.” जबकि क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सहित अनेक गणमान्य हस्तियां श्री सत्य साईं बाबा को महान संत और भगवान का दर्जा देती रही हैं. दरअसल सचिन दुनिया के महान खिलाडी है .उनको किसी पहचान की ज़रुरत नहीं ..शायद इसलिए उनका विवादों से को लेना देना नहीं… दुनिया आज सचिन को क्रिकेट का देवता मानती है तो इसमे सचिन की क्या गलती है …सचिन वाकई देवता है.. घर घर में उनको लोग भरोसे के साथ देखते है ..क्या सचिन ने कभी कहा की मैं भगवान हूँ ..नहीं ..लोग उन्हें भगवान मानते है .. तसलीमा वो शख्स है जो न तो कभी किसी की थी न किसी की है .. सच तो यह है की वो खुद की भी नहीं है.. न अपने देश की न अपने घर की ..विवादों में रहकर पब्लिसिटी का शगल उनका पुराना दंधा रहा है …और इस कला में वे पेशेवर है…कितने लोग है जो तसलीमा के चाहने वाले है ..कितने घरो में तसलीमा को आदर की नज़र से देखा जाता है..वो उस बेचैन कलमकार की तरह से जो पब्लिसिटी के लिए कभी भी कुछ भी कर लेता है … सत्य साईं बाबा की मृत्यु के पश्चात उनपर इस तरह के आरोप प्रत्यारोप लगाना ठीक नहीं है.. भारत की जनता इतनी बेवकूफ नहीं है जो कोई कुछ कहे और उसे मन ले…भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ,सोनिया गाँधी जैसे शख्स का उनके अंतिम दर्शन के लिए जाना इस बात का पलटवार जवाब है .. चर्चा में बनिए पर पर किसी धर्मं की आस्था के साथ नहीं.. सत्य साईं बाबा ने कभी खुद को भगवान नहीं बताया ..उनके चमत्कार और उनकी देश विदेश में दी गई सेवाए उन्हें भगवान का दर्ज़ा देती है.. मैं एक लेखक और एक पब्लिक ब्राडकास्टर की हैसियत से उन्हें भगवान कहता हूँ ..तसलीमा जी आपको जो कहना है कहिये…आपकी मर्ज़ी ..एक छोटी सी सलाह है… जब आदमी के बुरे दिन आते है तो आप जैसी हरकत करता है मेरी ऊपर वाले से दुआ है कि आपको विवेक दे जिससे आपकी ज़िन्दगी के बाकि जो दिन है वो तो कम से कम ठीक से गुज़रे …

    munna के द्वारा
    April 26, 2011

    नवीन पाण्डेय भाई जी बहुत सुंदर लिखा इश तरह लिखने बालो के लिए आपका उत्तर इनके मुह पर तमाचा है आपके विचारों के लिए धन्यवाद्

    subhah के द्वारा
    April 26, 2011

    aapka conclusion ekdam premature hai agar sachin sahi ho sakte hai to tasrina kyo nahi

    Mr. X in Bombay के द्वारा
    April 27, 2011

    ऐसे हीं ज्ञान विहीन लोंगो के कारन ब्रह्मणों का आज समाज से इज्जत जा रही है ………..यह सच है की अपने कर्मो से हीं कोई ब्रह्मण बन सकता है ………..सत्य साईं को भगवान माननेवाला या तो अशिक्षित है या भ्रष्ट या दोनों ………साथ हीं सोनिया जिसे नमस्कार करे वह स्वयं हीं चोर सिद्ध हो जाता है साईं धर्म हर भ्रष्ट का फैशन हो गया है ……….मैंने आजतक किसी सच्चे इंसान को साईं जैसे हास्यास्पद अवतारों को मानते नहीं देखा जागो ! वर्ना कल्कि के शिकार बनोगे | साईं तो खुद को भी नहीं बचा पाया …….तुम्हे क्या बचाएगा जय श्री राम !!!

रचना रस्तोगी के द्वारा
April 26, 2011

भगवान् कौन है और कौन नही इसका प्रमाण किसी समाचार पत्र या अदालत से नही लेना है / मंदिर में जो मूर्ती पूजी जाती है वह उस व्यक्ति के द्वारा बनायी गयी होती है जिसने कभी उस शक्सियात को कभी देखा तक नही/ जहाँ जाकर मन को थोड़ी शान्ति मिले बस वही तीर्थ है ,मंदिर है और मस्जिद है/ क्योंकि वहां थोड़ी बहुत देर के लिए व्यक्ति अपने गम भूल कर एक परम सत्ता को याद कर लेता है/ ठीक इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति आपके ग़मों को थोडा सा हल्का कर दे,आपकी बात सुहृदय से सुन ले,आपके साथ थोडा सा हंस ले,आपके परिवार को थोडा सा सहारा देदे,आपकी निगाह में वह व्यक्ति भगवान् तुल्य हो जाता है/ चमत्कार से व्यक्ति भगवान् नही बनता बल्कि जो व्यक्ति समाज हित में चौबीस घंटे सोचता है वह जरुर भगवान् तुल्य हो जाता है/ चूंकि श्री सत्य साईं ने सारी जिंदगी समाज सेवा में गुजार दी इसलिए लोग उन्हें भगवान् का दर्जा दे रहे हैं /जहाँ तक तस्लीम जी की बात है उनका प्रचार करना,किसी भी अच्छे सम्पादक को शोभा नही देता क्योंकि जो अपने देश का ना हुआ वह किसी और का क्या होगा?उसने क्या कहा, क्यों कहा ,किस्से कहा, इसका विचार करना ही राष्ट्रद्रोह है/बेहतर तो यही होगा कि श्री सत्य साईं से प्रेरणा लेकर सभी भारतवासी राष्ट्रहित में सोचें और समाज सेवा को प्राथमिकता देवें /वैसे तो भगवान् या खुदा या अल्लाह को जब किसी ने देखा नही तो इन्ही की पूजा इबादत क्यों ?क्या तसलीमा इसका उत्तर देंगी ?नास्तिकता से आस्तिकता अच्छी है,और जब मार पड़ती है तो लंगा भी भागने लग जाता है/ श्री सत्य साईं भगवान् हैं या थे ,बजाय इस पर बहस करने के उनसे सीखना चाहिए कि जब एक व्यक्ति इतना सब कुछ कर सकता है तो मैं क्यों नही ? रचना रस्तोगी

    Naveen Pandey के द्वारा
    April 26, 2011

    रचना जी वाकई में एक विचारवान शक्सियत है ..मैं दिल से प्रणाम करता हूँ ..वाकई रचना उस सशक्त भारतीय का उदहारण है जिसके भीतर देश को जोड़ने ..घर को सजा सवारकर कर रखने कि ताक़त है . रचना जी का कहना ” श्री सत्य साईं भगवान् हैं या थे ,बजाय इस पर बहस करने के उनसे सीखना चाहिए कि जब एक व्यक्ति इतना सब कुछ कर सकता है तो मैं क्यों नही ?” आज के समय के लिए प्रासंगिक है.. मैं उनके इस विचार कि सलाम करता हूँ… नवीन पाण्डेय रेडियो मंत्रा 91.9 FM

    Naveen Pandey के द्वारा
    April 26, 2011

    “Jagran Junction Forum” “श्री सत्य साईं पर आरोप- मिथ्या या हकीकत” रचना जी वाकई में एक विचारवान शक्सियत है ..मैं दिल से प्रणाम करता हूँ ..वाकई रचना उस सशक्त भारतीय का उदहारण है जिसके भीतर देश को जोड़ने ..घर को सजा सवारकर कर रखने कि ताक़त है . रचना जी का कहना ” श्री सत्य साईं भगवान् हैं या थे ,बजाय इस पर बहस करने के उनसे सीखना चाहिए कि जब एक व्यक्ति इतना सब कुछ कर सकता है तो मैं क्यों नही ?” आज के समय के लिए प्रासंगिक है.. मैं उनके इस विचार कि सलाम करता हूँ… नवीन पाण्डेय रेडियो मंत्रा 91 .9 FM

    munna के द्वारा
    April 26, 2011

    बहन रचना जी नॉन हिन्दू को जादा प्रॉब्लम हो रही है. किशी की इक्छा है तो मानो नहीं इक्छा है तो मत मानो हम मानते है हम पत्थर की पूजा करते है तो तुमारे पेट मे दर्द क्यों हो रहा है बाबा भारत मे चिर निद्रा मे है हमारे शोक मे नॉन हिन्दू सामिल ना हो तो ठीक है

    Mr. X in Bombay के द्वारा
    April 27, 2011

    घोर कलयुग आ गया अंग्रेजी में खुद को हिन्दू और अन्य आस्तिकों को अहिंदू कहकर भी लोग लज्जित नहीं होते ……….तुम पापियों के उद्धार के लिए कल्कि अवतार शीघ्र होगा

    munna के द्वारा
    April 27, 2011

    मिस्टर x बॉम्बे अश्लील भासा का प्रयोग करते हो और अपना नाम भी छिपाते हो और राम नाम भी लेते हो एक प्रसंग याद आया मार्रीच ने अपना रूप भी छिपाया राम राम भी बोला था तो वह राक्शाषा बिचारा जानवर की मौत मरा मिस्टर x आपके सारे गुण मारीच से मिलते है बोम्बे मे रहते हो समझ गए होगे आपकी टिपणी का इंतजार रहेगा

    Mr. X in Bombay के द्वारा
    April 27, 2011

    बलि को मरने के लिए भगवान राम ने भी अपने आप को छिपाया था कलयुग में नीच लोंगो के साथ सबकुछ जायज है

Anand Mishra के द्वारा
April 26, 2011

जहॉ तक ये सवाल है कि सॉई बाबा ईश्वर थे की नहीं तो अन्य मानव रूप के ईश्वर का अंत देखे. सभी किसी न किसी कारण से ही निर्वाण किये. उसमे समय के साथ कुछ कपोल कल्पनाये जुड़ गयी. कुछ लोग ईश्वर को ही नहीं मानते और कुछ लोग साईं बाबा को भगवान नहीं मानते. तसलीमा जी को राय व्यक्त करने का पूरा हक़ है पर ये भी तय क़ि उनकी राय एक तो एकमेव सत्य नहीं है और उनकी राय से अधिकतर लोग नाइत्तिफाकी रखते है. जो असहाय व गरीब लोगो क़ि मदद करे वो ईश्वर तुल्य है. यदि आप में से कोई गरीबो क़ि मदद करता है तो वो भी भगवान है. तो फिर बुध्धिजीवियों का ज्ञान क्यों इतना छलक छलक जा रहा है, उनका ज्ञान कभी दाऊद या समतुल्य लोगो के चरित्र का विश्लेषण करता है?

    munna के द्वारा
    April 26, 2011

    भाई आनंद मिश्र जी नॉन हिन्दू का हिन्दू संत के बारे मे कोई राय व्यक्त करने का कोई अधिकार नहीं है

Ravi Vishnoi के द्वारा
April 26, 2011

सज्जनों मै अपनी प्रतिक्रिया में यही कहना चाहूँगा की हमारे देश में अगर कोई भलाई का काम करता है तो उसे भगवान का दर्जा ही दिया जाता है . कहने को तो भगवान राम भी एक आम इंसान ही थे पर वे महापुरुष थे , आदर्शवादी इन्सान थे , अच्छाई परोपकार यही सब भगवान् के गुण है . अब आगे वो किसी भी रूप में हो क्या फर्क पड़ता है ! पर हा एक फर्क पड़ा है की एक भला इंसान इस दुनिया से चला गया . इन सब विवादों को ख़त्म करके उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते है जय साईं नाथ

    munna के द्वारा
    April 26, 2011

    भाई विशनोई जी ॐ साईं राम अपने सही कहा हम सब को उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए ये मीडिया वाले भी कम नहीं है

Kamal Kumar के द्वारा
April 26, 2011

हम ळोगो फालतू के कमेन्ट करना हमारी आदत हो गयी है पर हम यह नही सोचते के हम न क्या दिया सामाज को हम लोगो पर कीचर उछालना जानते है कबी खुद कुछ कर पाते है नही जो करते है उन पर कमेन्ट कमाल के लोग है हम भी

डॉ मनोज दुबलिश के द्वारा
April 26, 2011

जो लोग समाज की सेवा करते हैं उनको समाज भगवान् बना देता है/ तस्लीम जी ने कभी किसी प्यासे को बिना स्वार्थ पानी भी अगर पिलाया हो तब वे किसी भी श्रेष्ठ समाजसेवी पर टिप्पणी करने की अधिकारी बन सकती हैं बल्कि वे तो अपने धर्म की आड़ में बेजुबान पशुओं की निर्मम हत्याएं करती हैं इसलिए उनको समाज की अच्छाई या बुराई पर अपनी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नही है/ जगर श्री सत्य बाबा ने अगर समाज से कुछ लिया भी था तो उससे ज्यादा समाज को दिया भी है/ क्या तस्लीमजी ने किसी गरीब की शिक्षा का प्रबंध किया है किसी गरीब का इलाज़ अपनी जेब से कराया है कभी किसी गरीब की कन्या की शादी अपनी जेब से की है/ अरे जहाँ सरकारी अस्तपताल तक में इलाज़ मुफ्त में नही होता,सरकारी स्कूलों में शिक्षा मुफ्त नही है,वहाँ साईं बाबा ने यह सब काम ना केवल मुफ्त में लिया बल्कि लोगों को रोजगार दिया,शिक्षा दी,स्वास्थय दिया,एक रेलवे स्टेशन दिया ,एक हवाई अड्डा दिया ,एक प्लेनेटेनोरियम दिया,और भी ना जाने क्या क्या दिया/ इसलिए तस्लीमजी को काम से काम किसी समाजसेवी के बारे में अपनी लेखनी उठाने से पहले आत्मचिंतन करना चहिये/ यह तो अच्छा है कि उन्होंने बंगला देश में यह सब लिखा अगर यह सब अगर उन्होंने पुत्त्पार्थी में कहा होता तो शायद वे इसका उत्तर भी सुनने लायक ना रहतीं/ डॉ मनोज दुबलिश

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
April 26, 2011

साईं बाबा भगवान् ना सही, महान आत्मा तो थे ही, लोकोपकार के बहुत से कार्य करवाए, अध्यात्म के आधार पर सत्य, अहिंसा, क्षमा, परोपकार का सन्देश मानवता को दिया, बलात किसी का धर्मपरिवर्तन नही करवाया. अगर उनके पूरे जीवन का सही गलत के आधार पर मून्यांकन करेंगे तो सही कार्यों का प्रतिशत बहुत ज्यादा होगा बनिस्बत गलत के, और जब कोई व्यक्ति सही राह पर होता है है लांछन लगाने वाले भी ज्यादा कीचड उछालते हैं, अगर उनके अनुयायी उनको भगवान् मानते तो किसी का क्या बिगड़ता है, किसी को उन्हें भगवान् नहीं मानना है तो ना माने. उनके अनुयायी किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं कर रहे हैं की आप भी उन्हें भगवान् मानो. उनको भगवान् मानो या ना मानो लेकिन ये तो स्वयं सिद्ध है है वो महान आत्मा तो थे ही. इति शुभम

Saleem Khan के द्वारा
April 26, 2011

हिन्दू धर्म की सर्वोच्च किताबों ‘वेदों’ में कई जगह ईश्वर के गुण व विशेष लिखें है और मैं जहाँ तक जानता हूँ जब भी कोई चीज़ वेदों के खिलाफ़ जाएगी वह स्वतः ही हिन्दू धर्म के विरुद्ध हो जायेगी. ईश्वर के गुण के लिए वेदों में लिखा है- एकं ब्रह्मा द्वितीयो नास्ति… अर्थात ईश्वर एक ही है दूसरा नहीं है. और न तस्य प्रतिमा अस्ति…. अर्थात उसकी (ईश्वर की) कोई भी प्रतिमा, मूर्ति, फोटो, छवि नहीं हो सकती है.

    शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
    May 3, 2011

    खान साहब हमारा धर्म किताबों से नही चला करता है, तमाम वेदों उपनिषदों की स्पष्ट व्याख्या के बावजूद चार्वाक दर्शन को भी इसी भूमि पर मान्यता दी गई है. यही इस धर्म और इस भूमि की खासियत है, साधारण मनुष्य भी अपने को भगवान् कहला सकता है, दूसरा कोई उसे टोकेगा भी नही की भाई तुम भगवान् कैसे हो गए? यही हमारे धर्म का मर्म है.

Vikrant के द्वारा
April 26, 2011

किसी भी व्यक्ति को भगवान् बोलना स्वंयं भगवान् का निरादर करना है, कोई भी व्यक्ति इशवर की जगह नहीं ले सकता, ये केवल अंध विशवास के अलावा और कुछ भी नहीं, चार दिन क राजकीय शोक का भी कोई मतलब नहीं बनता, ये हिन्दुस्तान की जनता है जो किसी को भी सर पर बैठा लेती है , या फिर उसके घर पर कालिख पोतती है , हमें अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए जो भी अच्छा है केवल उसी का अनुसरण करना चाहिए वो भी आंखे खोलकर.

VinayBhatt के द्वारा
April 26, 2011

अब वो भगवान थे या नहीं इतना गहरा रहस्य तो मैं नहीं समझ सकता क्योंकि मुझे कभी भी उनके दर्शन या कोई अनुभूति नहीं हुई… मैं इतना कह सकता हूँ की भगवान एक महीने अस्पताल में झेल झेल कर अपना शरीर नहीं त्यागते…उन्हें पता होता है कि किस दिन उन्हें इस नश्वर संसार से महाप्रयाण करना है..अगर वो भगवान थे तो दुनिया में भगवान कहे जाने वाले डाक्टर उन्हें बचाने को इतनी कोशिशे न करते….बाकि जनता खुद भी समझदार है….

dilbagsingh के द्वारा
April 26, 2011

आद्रनीय प्रवीन धालीवाल जी मैं आपके माध्‍यम से उन सभी लोगों को कहना चाहता हूं जो छोटी सी बात पर आपा खो बैठते हैं, मुझ्‍ो लगता है आप अपनी बात बिना गाली के भी सही ढंग से कह सकते थे। इस बलॉगिंग साईट पर लिखने वाले सभी लोगों को सभ्‍यक रहना चाहिए

    Parveen Dhariwal के द्वारा
    April 29, 2011

    ओह्ह इस बात के लिए मैं जागरण और आप सब ब्लोगिंग वालो से क्षमा चाहता हु

dilbagsingh के द्वारा
April 26, 2011

मैं आपकी इस बात से सहमत हूं कि सत्‍य साईं बाबा भगवान नहीं थे, मगर वह भगवान द्वारा भेजे गए फरिश्‍ता थे, मैं कभी भी उनके धार्मिक स्‍थल पर नहीं गया, जो कुछ मीडिया में आ रहा है उसे देख और सुन रहा हूं, बताया जाता है कि वहां पर लोगों को हर धर्म का पाठ पढाया जाता था और पढाई के साथ साथ शिक्षा का भी प्रबंध किया गया था, इस लिए मैं सोचता हूं कि वह भगवान द्वारा भेजा गया वह फरिश्‍ता था, जिसने भगवान के नाम का प्रसार किया और दूसरों को नेकी के रास्‍ते पर चलने का पाठ पढाया। बाकी हमारा देश लोकतांञिक देश है और यहां हर किसी को अपनी बात कहने और अपनी करने का हक है। अगर कुछ लोग उन्‍हें भगवान मानते भी है, इसमें विवाद की बात नहीं है।

    bipin kumar के द्वारा
    July 2, 2012

    दिलबाग सिंह जी मै आपके इस बात से अच्छी तरह सहमत हूँ… बिपिन कुमार , बेगुसराई

jack के द्वारा
April 26, 2011

आज लोगों ने सत्यनारायण राजू जी को श्री सत्य साईं बना दिया, साई बाबा का रुप बता दिया पर किसी ने यह ध्यान दिया कि कभी भगवान खुद को भगवान नही बताते, जबकि साईं बाबा तो खुद को ही भगवान बताते थे और उनकी मौत भी एक आम आदमी की तरह हुई तो क्या इसे मात्र इत्तेफाक कहें या हम भारतीय का धर्मा के प्रति अंधविश्वसा. कल को आसाराम बापू और अन्य बाबा अपने को विष्णु का अव्तार बताएंगे और सब मान भी लेंगे .. कुछ नही हो सकता इस देश का. धर्म के नाम पर लूटने वाले लूटेंगे और हम भाग्य के नाम पर लूटते रहेंगे.

    Parveen Dhariwal के द्वारा
    April 26, 2011

    कौन कहता है की सत्य साईं बाबा फ्रौड थे मैं हर उस ब्यक्ति से पूछना चाहता हु जो उनको बुरा बोल रहा है की उन्होंने किस बन्दे को धरम के नाम पे लूटा किस आदमी को ये बोला की तू ये धर्म ले या वो धर्म ले उन्होंने तो शांति और अहिंसा पर बल दिया इतने काम किये इतनी शिक्षा उपलब्ध करवाई पर फिर भी लोग उनके बारे मैं इतना गलत बोल रहे हैं चलो ठीक है मान लिया की वो भगवन नहीं थे पर उन्होंने किसके साथ बुरा किया उन्होंने सबको सही रास्ता ही दिखाया किसी को गलत मार्ग पे चलने को नहीं कहा बेकार मैं धन का दुरूपयोग नहीं किया कम से कम वो भारत के नेताओ की तरह तो नहीं थे उन्होंने घोटाले तो नहीं किये पर लोग अनपे अंदर झांक के नहीं देखते बस उनका काम है तो दुसरे की निंदा करना मैं आपसे पूछता हु क्या आपने कभी कोई ऐसा काम किया है जिसके बजह से किसी को शांति मिली हो मुझे नहीं लगता की आपने कोई काम ऐसा किया हो पर भगवन सत्य साईं बाबा जी ने तो अरबो लोगो को शांति का पाठ सिखाया मैं तो बस यही कहूँगा की सत्य साईं बाबा जी की निंदा करना छोड़ दो बे सच शांति और धरम के परिचायक थे अगर आप उन्हें भगवन नहीं मान सकते तो काम से काम उनके बारे मैं बुरा तो मत बोलो

    Saleem Khan के द्वारा
    April 26, 2011

    अगर हम सत्य साईं बाबा को अवतार मान लें तो क्या ईश्वर का अवतार इस दयनीय स्थिति पर पहुँच गया कि उसे स्वयं जीवन रक्षक प्रणाली के बलबूते इंसानी डाक्टर ज़िन्दा रख रहें हैं. हम उनकी बिमारियों की तरफ़ तवज्जोह फ़रमायें तो पाएंगे कि उनमें भी वही सब बीमारी है जो आम इंसान में है. और अगर वे वाक़ई चमत्कारी अवतार हैं जैसा कि उन्होंने 1990 से पहले चमत्कार करें थे तो फिर अब क्या हुआ ! उन्हें जो दूसरों को सही कर रहें थे स्वयं को क्यूँ नहीं सही कर पा रहे हैं.

    SSKG के द्वारा
    April 26, 2011

    Aaj ke modern bhagwan hain:- Rahul Gandi,Sonia Gandi,Digvijay Saingh,Suresh Kalmadi,A.Raja aur wo saare corrupted person,who had done more and more corruption in their life. Logo ko in ki pooja karni chahiye….pujna chahiye.. Aur Manmohan to bilkul bhagwan Brahma ji hain…jo kuchh bolna hi nahi jante…bus sab dekhte hain and kahte hain…wait and watch and forget all things….its happens only in india…

    subhah के द्वारा
    April 26, 2011

    abhi parveen dhariwal ji ne kha ki baba ji ne shanti aur ahinsa ka sandes diya aur khud itne adhir ho gye ki logo ko gali tak de daali baba ji ki aatma ko sabse bada dukh aapne pahunchya hai parveen ji

    Mukesh के द्वारा
    April 27, 2011

    प़िय प़वीण जी लगता है आप आपको भगवान ने साक्षात् दर्शन दे दिए हें , किसी के खुद को भगवन कहने से ही वह भगवन नहीं बन जाता, यदि वह भगवन थे, तो वो एक सामान्य इंसान की तरह क्यों मरे वह भी हॉस्पिटल में १ महीने तक झेलने के बाद…आप उन पर लगाये कई शिष्यों द्वारा शारीरक शोशण के बारे में क्या जवाब देना चाहेंगे…बहार कई देशों में उन पैर मुकदमा चलाने के लिए भी कई बार इंडिया पर जोर डाला गया था लकिन हमारे भारत में नेताओं और बाबाओं के खिलाफ कुछ नहीं किया जा सकता इस बात का इतिहास गवहा है.. आप उन्हें सिर्फ इंसान ही रहने दे तो अच्छा हें….

    Parveen Dhariwal के द्वारा
    April 29, 2011

    मैंने किसी को कुछ गलत नहीं बोला है मैं तो सिर्फ इतना बोलना चाहता हू की किसी बात को जाने बिना उसके बारे मैं नहीं बोलना चाहिए सत्य साईं बाबा ने किसी को नहीं लूटा न जाति के नाम पर न धरम के नाम पर लोग बोल रहे हैं की उनके ट्रस्ट मैं पैसा है और उन्होंने जनता के पैसे पे ऐश की कुछ लोग बोल रहे हैं की ये जनता का ही पैसा था अगर कुछ पैसा जनता के लिए भी खर्च कर दिया तो कौन सी बड़ी बात की मैं आप लोगो से पूछता हू की अगर आपका अपना कोई ऐसा ट्रस्ट होता तो क्या आप उसे जनता के लिए इस्तेमाल करते ? मुझे तो नहीं लगता बाबा ने तो अपने ऐश्वर्य पे कभी कुछ खर्च नहीं किया बल्कि सारे धन का उपयोग लोगो की भलाई के लिए किया सभी प्रमुख देशो मैं उनके ट्रस्ट होना इस बात का सबूत है कुछ लोग बोल रहे हैं V I P लोग अपने फायदे के लिए बाबा के पास जाते थे तो क्या क्रिकेट का भगवन भी अपने फायदे के लिए ही उनके पास जाता था अरे जब आप लोग बाबा के बारे मैं कुछ जानते ही नहीं तो उनके बारे मैं क्यों ऐसे बोल रहे हो और तो और मीडिया तक उनके बारे मैं ऐसा बोल रहा है अगर बे भगवन का अवतार नहीं थे तो जो भी आदमी उनके पास एक बार चला जाता था तो बार बार उनके पास ही क्यों जाता था क्यों उनका ही हो जाता था क्यों बाबा मैं ही खो जाता था जिन लोगो ने बाबा को देखकर शांति को महसूस किया है बही उनपे बिश्बास कर सकते हैं आप जैसे लोगो की तो आदत है अगर १० लोग किसी बात को बोल रहे हैं तो आप उसपर बिश्बास कर लेते हैं मैं ये नहीं बोलता की किसी के बारे मैं मत बोलो जरूर बोलो आपका हक़ बनता है बोलना पर जिस चीज़ के बारे मैं आप नहीं जानते जिस चीज़ को आपने महसूस नहीं किया उसके बारे मैं बोलना मुझे नहीं लगता सही है


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