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क्या लोकतंत्र बचाने के लिए अनशन का तरीका ब्लैकमेलिंग है?

Posted On: 16 Apr, 2011 में

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“अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने कहा है कि अन्ना हजारे ‘ब्लैकमेल’ करने की कोशिश कर रहे हैं जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाले अन्ना के साथियों पर सवाल उठाने के साथ उनकी खिल्ली भी उड़ाई है.”


अन्ना हज़ारे के आमरण अनशन और तमाम मशहूर हस्तियों द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन की कई कारणों का हवाला देते हुए निंदा की जा रही है. आमरण अनशन का तरीका इस्तेमाल करने को “ब्लैकमेलिंग” की संज्ञा तक दी जाने लगी है. विरोध करने वालों का तर्क है कि इस प्रकार अपनी मांग मनवाने का तरीका लोकतंत्र के खिलाफ है और अगर इसे बढ़ावा दिया गया तो लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है.


jagran-jugtion-forumजागरण जंक्शन अपने सभी पाठकों से सवाल करता है कि क्या वाकई अन्ना हज़ारे का भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनाया गया आमरण अनशन का तरीका ब्लैकमेलिंग के दायरे में आता है? यदि कोई सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हो और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही हो तो क्या जनता को चुप रहकर देखना चाहिए और लोकतंत्र को बचाने के लिए दबाव बनाने की जिद छोड़ देनी चाहिए? लोकतंत्र के नाम पर जनता को शोषित किया जाना सही है या जनता की आवाज ही लोकतंत्र है?


राष्ट्रहित के इस बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर आप अपना जवाब स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जारी कर सकते हैं?


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें. उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक लोकतंत्र और ब्लैकमेल है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व लोकतंत्र और ब्लैकमेल – Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें.

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गयी है. आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं.


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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SB के द्वारा
June 21, 2011

किसने कहा लोकातन्त्र है । चोरतन्त्र है । च्रोर की तरफ से उसके भाई बहेन बकवास करेन्गे ही। आमरण अनशन का तरीका ब्लैकमेलिंग के नही आत्महत्य के दायरे मे आता है । ईसका दुसरा अर्थ है रुठना । अरे भाई रुठा तो अपनो से जाता है ,गैरो से नही । गैरो को क्या फर्क पडता है आप जीओ मरो । देख लिया निगमानन्द के केस मे । बाबा और अन्ना चोरो को कबसे अपना मनने लगे ।

Darshan Gupta के द्वारा
April 24, 2011

There should not be any exclusion clause of Ministers and beurocrates that may be of executive or judicial in the forthcoming Lok Pal Bill.There should also be an independent agency to investigate the cases/complaints that should also be without assistance from any other force central or State.The proposed bill should also fix time limit three months/six months for the disposal of the complaint. Darshan Gupta Sangrur

Anupam Upadhyay के द्वारा
April 20, 2011

नहीं, अनशन ब्लेकमेलिंग नहीं है वरन यह तो विरोध का अत्यंत सात्विक रूप है. इसी माध्यम से तो महात्मा गाँधी जी ने देश को स्वतंत्र कराया था अन्यथा किसी भी सरकार से किसी और प्रकार से तो बात करना ही संभव नहीं होता है, सही मानों मैं ब्लेकमेलिंग की संज्ञा तो वैसे लोगों और कार्यों को दी जानी चाहिए जो राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं. क्रूर कार्यों से अपनी बात रखने और समझाने और मनवाने का प्रयास करते हैं. इसके लिए और एक सत्याग्रह होना चाहिए, राष्ट्रीय संपत्ति के नुकसान को राष्ट्र द्रोह के समान मन जाना चाहिए और यदि किसी भी दल/व्यक्ति/समूह आदि के कार्यकर्ताओं के द्वारा कोई भी राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है तो इसके लिए उस दल को दण्डित किया जाना चाहिए उस दल के शीर्ष नेतृत्व को दण्डित किया जाना चाहिए तथा वित्तीय नुकसान की भरपाई उस दल से की जानी चाहिए.

Bhagwan Babu के द्वारा
April 19, 2011

अगर लोकतंत्र बचाने के लिये सरकार को ब्लैकमेल भी करना पडे तो वो 100% जायज है । भ्रष्टाचार की मार एक आम जनता को ही झेलनी पडती है किसी नेता और भ्रष्टाचारियो को नही । सख्त कानून भी एक आम जनता ही झेलती है कोई नेता नही……. क्यो? चाहे वो नेता कितना ही भ्रष्ट क्यों न हो ….. ऐसा क्यो…? अगर इसके लिये सरकार को ब्लैकमेल करना पडे या व्हाईटमेल करना पडे सब जायज है….। और जो इसके खिलाफ आवाज उठा रहे है…… सरकार सबसे पहले उनके गिरेबान की जाँच कराये …।

Aditya के द्वारा
April 19, 2011

anna hazare doing very well and he is in a right way,which thing he is doing for removal corruption Deserves praise,and he is not doing blackmailing the way he is.

surendrashuklabhramar5 के द्वारा
April 18, 2011

कोई सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हो और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही हो तो क्या जनता को चुप रहकर देखना चाहिए और लोकतंत्र को बचाने के लिए दबाव बनाने की जिद छोड़ देनी चाहिए जिनके साथ हम आज तक प्यार से पेश आते रहे वे ही ब्लैक मैलिंग की संज्ञा इसे दे डाले -लोक तंत्र को बचने और इसके दर्द को उजागर करने को उपवास व्रत अनशन जो भी किया जाये वो सब कम है हमें तो उनकी छाती पर चढ़ मूंग दलना चाहिए -हाँ अगर वे इसे एक औजार बना अपने काले मन की मंशा पूरी करना चाहते हैं तो ये सपना अगले जनम में देखें .. एक सार्थक विषय उठाने और इस तरह के विषय को प्राथमिकता देने हेतु हम आभारी हैं

Meera Sharma के द्वारा
April 18, 2011

प्रिय पाठकों अन्ना हजारे जी ने जो कदम उठाया है वो प्रशंसनीय है उस पर ऊँगली उठाना सच्चाई के खिलाफ ऊँगली उठाने के बराबर है . क्यूंकि कई नेता अब डर गए हैं की अब उनका आगे का रास्ता बंद हो रहा है ,इतिहास गवाह है की जब जब कोई बुराई के खिलाफ आवाज़ उठाता है तब तब उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है या उसकी आवाज़ बंद कर दी जाती है.आज जो भ्रष्टाचार बढ़ रहा है वह जग जाहिर है .गरीब और गरीब होते जा रहे हैं व अमीर और अमीर .एक तरफ कोई करोड़ों की रिश्वत ले रहा है तो एक तरफ किसी को दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं है .मुझे गर्व है की आज कोई तो एक भारतवासी ऐसा है जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है .मै उन्हें सलाम करती हूँ .

Amit के द्वारा
April 18, 2011

शर्मिला जी तो खुद ही पुत्रप्रेम से ग्रस्त है……उनके सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए उनके बेटे को को पदमश्री और बेस्ट एक्टर का रास्ट्रीय पुरस्कार मिला था जबकि वोह इन दोनों के लायक शायद नहीं है…….सो उनको अन्ना पर उंगली उठाने का कोई भी हक नहीं है…..जहा तक दिग्विजय सिंह के बात है तो वोह तो एक बेवखूफ़ नेता है…एकदम मुर्ख…………सो उसकी बातो का बुरा नहीं मानना चाहिए…………..

Vikas BAdola के द्वारा
April 18, 2011

शर्मीला टैगोरे जैसी महान शख्सियत का यह बयान बिलकुल भी स्वागत योग्य नहीं है. शर्मिला जी को यह याद रखना चाहिए की अनशन करने से पहले उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी और श्रीमती सोनिया गाँधी को चिठ्ठी लिखी थी.और इस बात का जिक्र खुद अन्ना जी ने किया था. वैसे भी अन्नाजी एक साधू और सन्यासी व्यक्ति है सारा देश उनका घर है और उन्होंने अपने घर की गन्दगी की सफाई का बीड़ा उठाया . अगर वो गलत होते तो सरे देश से उन्हें इतना जबरदस्त समर्थन न मिलता. लोग उनके समर्थन मे उपवास न रखते और इतनी रात तक भीड़ इक्कठी न होती. सारा देश उन्हें समर्थन न देता. कुछ ही लोग, बल्कि किसी पार्टी विशेष के लोगो को ही उनके इस कदम पर एतराज है. अगर शर्मीला जी को ये कदम अनुचित लग रहा था तो क्यों नहीं वो स्वयं भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी हुई. शायद वो स्वयं भी किसी घोटाले मे लिप्त है.

    O P PAREEK के द्वारा
    April 27, 2011

    Vikas Badolaji, How come Sharmila Tagore is a “Mahaan Shakhsiyat”. What she has done in the public domain so as to deserve this title from you. Like every middle class Indian you seem to be obsessed by the celebrities but mind you all those who indulge in big corruption are none else but the celebrities. Perhaps you dont know non of Bollywood actorsor actress is paid full amount in cheque and everybody takes black money in addition. Sharmila could have been one of them during her stint as a heroine. So dont confer the title of Mahan shakshiyat on such people . By the way read my recent blog “blackmail ? kis kee” at http://www.oppareek43.jagranjunction.com

s.s.agrawal के द्वारा
April 18, 2011

खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे .जब नताओं की जान पर बन आयी तो अनर्गल बातें कर जनता को गुमराह करने पर उतर आये है.सही को गलत और गलत को सही साबित करना इन चालाक लोगों की कलाकारी है.हमें इनकी चालों को समझ कर सही जवाब देना होगा .अभी तो अनशन करना ब्लाक्मैलिंग हुआ है आगे चल कर जनता के आवाज उठाने पर भी आपत्ति होने लगेगी  

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
April 18, 2011

धूर्तों और मक्कारों की जान पे जब बन आती है तो वो शब्द जाल में फ़साने की कुचेष्टा करते हैं, की सद्विवेकी अपनी धार खो दे और ये लोग छूट जाए, कदाचित यही हाल इन दुष्टों का हो रहा है तो आन्दोलन की धार को कुंद करने के लिए कपट और धूर्तता का सहारा ले रहे हैं. अगर सत्य को ब्लैक mailing का सहारा लेना पड़ रहा है, तो इन लंपटो को शर्म से डूब मरना चाहिए.

Journalist Ankur Dwivedi के द्वारा
April 17, 2011

is tarah ki baat karne wale sabhi log bhrashtachari ya unke sathi hai.. mere hisab se to janlokpal bill me bhrashtachar karne walo ko desh nikala ya mratudand ka pravdhan hona chahiye.

shiromanisampoorna के द्वारा
April 17, 2011

देश के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि जिन्होंने राजनीती को न केवल गन्दा किया बल्कि बेशर्मी की हद तो देखो हर किसी पर प्रतिकिरिया देने से जनाब बाज नहीं आते सच तो vhi है जो पूज्या दीदी माँ जी कहती है कि हम्हें आजादी नहीं मिली बल्कि गोरे अंग्रेजों ने काले अंग्रेजों के हाथ में सत्ता हस्तांतरित की tabi तो लोकतंत्र की यह दुर्दशा है/

1433 के द्वारा
April 17, 2011

Agar ye blackmailing hai to sabhi ko sahi baat ke blackmailing karna chahiye.Har wo kaam loktantrik hoga jisse logon ka bhala ho.sahi kaam ke liye jo bhi hathkanda kiya jaye sahi hai.aur jo iska virode karey darasal wo khud ander se bhrast hai.

    Shah Nawaz के द्वारा
    April 18, 2011

    भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी लड़ाई लड़ने की ज़रूरत है… मेरे विचार से इसकी शुरआत हमारे अन्दर से होनी चाहिए….. अगर मैं अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए अपने अन्दर के भ्रष्टाचार को समाप्त कर लूँगा तो यह लड़ाई आसान हो जाएगी. बस इतना सा प्रयास हर एक कर ले तो हमारा वतन फिर से विश्व गुरु बन जाएगा. http://premras.jagranjunction.com

    Mahesh Rastogi के द्वारा
    April 20, 2011

    तंत्र लोक से ही बना है। लेकिन भ्रष्ट तंत्र के कारण लोक ही खतरे में पड़ गया था। अब जब लोक इस तंत्र को सुधारने के लिए आगे आया है तो तंत्र की चूलें हिलती नजर आ रही हैं। लोकतंत्र को खतरा लोक से नहीं तंत्र से है। इस तंत्र को सुधारने की जरूरत है। इसलिए बहस के मुद्दे को डायवर्ट मत कीजिए। उसे सही दिशा में जाने दीजिए। तंत्र को सुधारने के लिए जो कुछ भी किया जा सकता है उसे करने दीजिए। यह ब्लैकमेलिंग नहीं, बल्कि लोक के अपने असीमित अधिकारों में से कुछ और अधिकारों का प्रयोग है। जो अन्ना हजारे ने किया और जनता ने उनका साथ दिया।


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